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Liver Detox के लिए May सबसे अच्छा महीना — आयुर्वेदिक Cleanse

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 15 May, 2026
  • category-iconLiver and Gall
  • blog-view-icon5005

आजकल गलत खानपान, तनाव और खराब लाइफस्टाइल के कारण लिवर (Liver) में गंदगी और टॉक्सिन्स (Toxins) जमा होना बहुत आम बात हो गई है। लोग अक्सर थकावट और पेट की समस्याओं को गैस की गोली से दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि असली समस्या उनके सुस्त पड़े लिवर में है। एलोपैथी में इसके लिए अक्सर लिवर टॉनिक या सिरप दिए जाते हैं, जो सिर्फ कुछ समय के लिए फायदा करते हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से गंदगी शरीर में ही रह जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर की गंदगी (आम) और दूषित 'पित्त' को बाहर निकालने के लिए मई (May) का महीना सबसे बेहतरीन समय होता है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आपके लिवर को गहराई से साफ (Detox) कर शरीर को नई ऊर्जा और प्राकृतिक सेहत देता है।

May का महीना Liver Detox के लिए सबसे अच्छा क्यों है?

आयुर्वेद के अनुसार, मई (May) का महीना वसंत (Spring) और भयंकर ग्रीष्म (Summer) ऋतु के बीच का समय (ऋतु संधि) होता है। सर्दियों और वसंत में शरीर में जो भारीपन और 'कफ' जमा होता है, वह गर्मियों की शुरुआत में पिघलने लगता है और इसी समय शरीर में 'पित्त' (गर्मी) भड़कना शुरू होता है। लिवर हमारे शरीर का मुख्य पित्त केंद्र है। अगर मई के महीने में लिवर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स (Detox) कर लिया जाए, तो शरीर से सारा ज़हरीला 'आम' बाहर निकल जाता है। इससे आपका शरीर भयंकर गर्मी सहने के लिए तैयार हो जाता है और पेट की बीमारियाँ, मुँहासे और सुस्ती आपसे कोसों दूर रहती हैं।

Toxic Liver में दिखने वाले इन शारीरिक लक्षणों के भयंकर संकेत

जब लिवर गंदगी से भर जाता है, तो शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण इस प्रकार हैं:

  • लगातार सुस्ती और थकान (Chronic Fatigue): सुबह 8 घंटे की नींद के बाद भी भयंकर थकावट महसूस होना और किसी काम में मन न लगना।
  • त्वचा का पीला या बेजान पड़ना: खून साफ न होने के कारण चेहरे का प्राकृतिक ग्लो खत्म हो जाना और आँखों के नीचे भयंकर डार्क सर्कल्स (Dark Circles) आ जाना।
  • पाचन तंत्र का खराब होना: कुछ भी खाने पर पेट में भारीपन, गैस, भयंकर एसिडिटी (Acidity) और कब्ज़ की शिकायत रहना।
  • मुँहासे और खुजली: लिवर की गर्मी और गंदगी सीधे त्वचा पर मुँहासों (Acne) और बिना कारण भयंकर खुजली के रूप में बाहर आने लगती है।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपना लिवर टेस्ट (LFT) कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

लिवर में 'आम' (गंदगी) जमा होने के असली अंदरूनी कारण

लिवर के सुस्त पड़ने और टॉक्सिन्स जमा होने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • जंक फूड और रिफाइंड चीनी: पिज़्ज़ा, मैदा और मिठाइयाँ लिवर की जठराग्नि को धीमा कर देती हैं और भयंकर 'आम' के रूप में लिवर पर जमा हो जाती हैं।
  • शराब (Alcohol) का सेवन: शराब लिवर की कोशिकाओं को सीधे तौर पर भयंकर रूप से डैमेज करती है, जिससे वह खून को साफ करना बंद कर देता है।
  • नींद की कमी और तनाव: रात-रात भर जागने से शरीर का 'वात' भड़कता है और लिवर अपनी रिपेयर (Repair) प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता।
  • दवाइयों का भयंकर इस्तेमाल: छोटी-छोटी बात पर भारी पेनकिलर (Painkillers) खाने से उसका सारा केमिकल लिवर में जमा होकर उसे सुस्त कर देता है।

लिवर की गंदगी को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस भयंकर स्थिति को अगर सिर्फ 'सामान्य थकावट' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • फैटी लिवर (Fatty Liver): लिवर के ऊपर भयंकर चर्बी जमा हो जाती है, जिससे उसका आकार बढ़ जाता है और वह काम करना बंद कर देता है।
  • पीलिया (Jaundice): दूषित पित्त जब खून में मिल जाता है, तो आँखों और त्वचा का रंग भयंकर पीला पड़ जाता है।
  • लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis): लगातार गंदगी और सूजन के कारण लिवर पूरी तरह खराब हो सकता है, जो एक जानलेवा स्थिति है।

Liver Detox पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में लिवर को 'यकृत' कहा जाता है, जो 'रंजक पित्त' (रक्त बनाने वाला) का मुख्य स्थान है। आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारा खानपान खराब होता है, तो पेट में बना दूषित 'आम' रक्त के ज़रिए सीधे लिवर में पहुँचकर उसे ब्लॉक कर देता है। मई के महीने में भड़कने वाला पित्त इस समस्या को और खराब कर देता है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि गंदगी पित्त की वजह से है या सुस्त कफ की वजह से। आयुर्वेद में बस लिवर टॉनिक पिलाना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि लिवर की कोशिकाएँ अंदर से साफ हों, पुरानी गंदगी बाहर निकले और शरीर नया व शुद्ध रक्त बनाना सीखे।

जीवा आयुर्वेद Liver को प्राकृतिक रूप से Detox करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए क्लीन्ज़ (Cleanse) पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रही सुस्ती, पेट की गैस और मुँहासों की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ के शराब पीने की आदत या पेनकिलर के इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित पित्त और आम को पकड़ने के बाद ही लिवर को ताकत देने और गंदगी बाहर निकालने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

लिवर की गंदगी को साफ करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में लिवर को साफ करने, सूजन कम करने और पित्त को शांत करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • कुटकी (Kutki): यह लिवर डिटॉक्स के लिए आयुर्वेद की सबसे अचूक और चमत्कारी जड़ी-बूटी है। यह लिवर में जमे पुराने ज़हरीले तत्वों को काट-काटकर बाहर निकालती है।
  • कालमेघ (Kalmegh): यह लिवर की अग्नि को मज़बूत करता है और खून से भयंकर 'आम' को पूरी तरह साफ कर देता है।
  • भूमि आंवला (Bhumi Amla): यह लिवर की डैमेज कोशिकाओं को रिपेयर करता है और पीलिया (Jaundice) व फैटी लिवर में संजीवनी का काम करता है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): यह लिवर की भयंकर सूजन को सोख लेती है और शरीर में रुके हुए दूषित पानी (Fluid) को पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है।

रक्त और लिवर को साफ करने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, लिवर को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • विरेचन (Virechana): मई के महीने में लिवर डिटॉक्स के लिए यह सबसे अचूक चिकित्सा है। औषधीय दवाइयाँ देकर पेट साफ कराया जाता है, जिससे लिवर और पित्ताशय से सारा भयंकर पित्त और गंदगी बाहर निकल जाती है।
  • बस्ती (Basti): आंतों में जमा पुराने मल को साफ करने के लिए एनीमा (Enema) दिया जाता है, जिससे लिवर पर दबाव कम होता है और वह बेहतर तरीके से काम करता है।

Liver Detox के ट्रिगर्स को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस क्लीन्ज़ (Cleanse) में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • ठंडा और रसदार भोजन: लौकी, खीरा, परवल और तरबूज़ का सेवन बढ़ाएँ, जो लिवर को ठंडक देते हैं और उसे प्राकृतिक रूप से धोते (Flush) हैं।
  • पुदीना और धनिया का पानी: सुबह खाली पेट पुदीना या धनिये का पानी पीने से लिवर की भयंकर गर्मी शांत होती है और खून साफ होता है।
  • मूंग दाल की खिचड़ी: डिटॉक्स के दौरान हल्का भोजन ही लें, जो लिवर को पचाने में मेहनत न कराए।

क्या न खाएँ?

  • शराब और जंक फूड: ये लिवर डिटॉक्स के सबसे बड़े दुश्मन हैं, डिटॉक्स के दौरान इनका सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • मसालेदार और खट्टी चीज़ें: लाल मिर्च, अचार और बहुत ज़्यादा खट्टी चीज़ें पित्त को भड़काती हैं और लिवर को डैमेज करती हैं।
  • मैदा और रिफाइंड चीनी: ये शरीर में भयंकर 'आम' पैदा करते हैं, जो लिवर की सफाई को रोक देते हैं।

जीवा आयुर्वेद में गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, दिन भर की थकान और त्वचा की समस्याओं को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की गई गैस या एसिडिटी की गोलियों की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पानी पीने की आदत और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' और दूषित पित्त के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

लिवर पूरी तरह साफ होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में डिटॉक्स पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर सुस्ती और गैस की समस्या अभी शुरू हुई है, तो मई के महीने में 3 से 4 हफ्तों का आयुर्वेदिक क्लीन्ज़ (Cleanse) ही लिवर को पूरी तरह चमका देता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर ग्रेड-2 फैटी लिवर है या लिवर भयंकर रूप से कमज़ोर है, तो कुटकी और विरेचन के ज़रिए इसे पूरी तरह 'रीसेट' होने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में सुस्ती और पेट की बीमारियाँ हमेशा के लिए खत्म हो जाती हैं।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य दवाओं और सिरप से पाचन व लक्षणों को नियंत्रित करना अग्नि, पाचन और लिवर स्वास्थ्य को संतुलित कर समग्र सुधार पर ध्यान
नज़रिया समस्या को एसिडिटी, एंजाइम्स या लिवर फंक्शन तक सीमित मानना इसे ‘आम’, पित्त असंतुलन और जीवनशैली से जोड़कर देखना
उपचार तरीका दवाओं और मेडिकल मैनेजमेंट से लक्षण नियंत्रण कुटकी, भूमि आंवला, विरेचन, आहार और दिनचर्या सुधार पर ज़ोर
डाइट और लाइफस्टाइल दवा के साथ सीमित आहार सलाह पित्त-शामक भोजन, ताज़ा आहार और संतुलित दिनचर्या को आधार बनाना
लंबा असर दवा बंद होने पर लक्षण दोबारा लौट सकते हैं पाचन और जीवनशैली संतुलन के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

अगर आपको लिवर की कमज़ोरी के साथ ये भयंकर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • आँखों का सफेद हिस्सा और त्वचा अचानक बहुत ज़्यादा पीली पड़ने लगे (पीलिया)।
  • पेट के ऊपरी दाएँ (Right) हिस्से में भयंकर दर्द हो जो बर्दाश्त न हो रहा हो।
  • पेशाब का रंग बहुत ज़्यादा गहरा (Dark mustard/brown) आने लगे।
  • बिना कुछ खाए भी लगातार उल्टी आए और वज़न अचानक भयंकर रूप से गिरने लगे।

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर, आयुर्वेद के हिसाब से लिवर में गंदगी जमा होना खराब लाइफस्टाइल और मंद जठराग्नि के कारण बिगड़े हुए 'पित्त' और 'आम' की भयंकर समस्या है। एलोपैथी के केमिकल सिरप पीने से लिवर कुछ दिन के लिए शांत दिखता है, लेकिन गंदगी अंदर ही अंदर फैटी लिवर का रूप ले लेती है। मई का महीना इस गंदगी को बाहर निकालने के लिए प्रकृति का सबसे अच्छा समय है। असली इलाज शरीर की शुद्धि (विरेचन), कुटकी और कालमेघ जैसी जड़ी-बूटियाँ और पित्त-नाशक शुद्ध आहार है, जिससे आपका लिवर बिना किसी कृत्रिम गोली के जीवन भर सेहतमंद बना रहे और आप भयंकर बीमारियों से सुरक्षित रहें।

FAQs

मई वसंत और गर्मियों के बीच का समय (ऋतु संधि) है। इस समय शरीर में जमा 'कफ' पिघल कर बाहर आता है और 'पित्त' भड़कने लगता है। डिटॉक्स करने से गर्मी की बीमारियों से बचाव होता है और लिवर की भयंकर गर्मी शांत होती है।

हल्की सुस्ती के लिए आप लौकी का जूस और पुदीने का पानी पीकर प्राकृतिक क्लीन्ज़ कर सकते हैं। लेकिन अगर फैटी लिवर या पुरानी समस्या है, तो कुटकी जैसी आयुर्वेदिक दवाइयाँ और विरेचन पंचकर्म करना बहुत ज़रूरी है।

बिल्कुल। कुटकी आयुर्वेद में लिवर की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी है। यह कड़वी ज़रूर होती है, लेकिन यह लिवर के अंदर से भयंकर ज़हरीले तत्वों (Toxins) को काट-काट कर बाहर निकालने में अचूक है।

आयुर्वेद कभी भी पूरी तरह भूखे रहने की सलाह नहीं देता। डिटॉक्स के दौरान आपको सुपाच्य और हल्का भोजन (जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, ताज़ा फलों का रस) खाने की सलाह दी जाती है ताकि लिवर को आराम मिल सके।

हाँ, बिल्कुल। लेकिन सबसे पहले आपको शराब पूरी तरह छोड़नी होगी। उसके बाद भूमि आंवला और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियों से लिवर की डैमेज हुई कोशिकाओं को प्राकृतिक रूप से हील (Heal) किया जा सकता है।

100% कम होंगे। चेहरे पर आने वाले ज़्यादातर मुँहासे और डार्क सर्कल्स लिवर की गंदगी और दूषित खून का परिणाम होते हैं। जब लिवर साफ होता है, तो त्वचा अपने आप चमकने लगती है।

हाँ, यह लिवर और पित्त रोगों के लिए सबसे अचूक और शक्तिशाली पंचकर्म है। इसमें पेट साफ करने वाली आयुर्वेदिक दवाइयाँ दी जाती हैं, जिससे सारा दूषित पित्त शरीर से बाहर आ जाता है।

लौकी, खीरा, थोड़ा सा अदरक और पुदीने की पत्तियों को पीसकर बनाया गया ताज़ा जूस लिवर के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक क्लीन्ज़र (Cleanser) का काम करता है।

हाँ। जब लिवर सुस्त होता है तो पाचन भयंकर रूप से धीमा हो जाता है। खाया हुआ खाना आंतों में सड़ने लगता है, जिससे बहुत ज़्यादा गैस बनती है और खट्टी डकारें आती हैं।

जी हाँ। आयुर्वेद में सही डाइट, रोज़ाना कसरत और कालमेघ व त्रिफला जैसी जड़ी-बूटियों की मदद से फैटी लिवर की समस्या को बिना किसी केमिकल के जड़ से और हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है।

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