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PCOS में Hair Removal Laser के बावजूद Facial Hair वापस — Root Cause

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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चेहरे पर अनचाहे बालों (Facial Hair) का आना किसी भी महिला के आत्मविश्वास को बुरी तरह तोड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के भयंकर प्रदूषण और भागदौड़ के बीच जब आप या आपके घर की कोई सदस्या अपने UPSC जैसे महत्वपूर्ण एग्जाम्स की तैयारी कर रही होती हैं, तो इस कॉस्मेटिक समस्या से बचने के लिए सबसे पहला ख्याल महंगे लेज़र हेयर रिमूवल (Laser Hair Removal) का आता है। हज़ारों रुपये खर्च करने और कई दर्दनाक सेशंस (Sessions) के बाद चेहरा एकदम साफ और चिकना हो जाता है। आपको लगता है कि समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई।

लेकिन यह खुशी महज़ कुछ ही महीनों की मेहमान होती है। धीरे-धीरे ठुड्डी (Chin) और जबड़े (Jawline) पर बाल पहले से भी ज़्यादा कड़े और घने होकर वापस आने लगते हैं। आप खुद को ठगा हुआ महसूस करती हैं और सोचती हैं कि लेज़र मशीन में ही कोई खराबी थी। सच्चाई यह है कि मशीन खराब नहीं थी; खराबी आपके शरीर के ऑपरेटिंग सिस्टम में है। लेज़र ने केवल त्वचा के ऊपर से बालों की जड़ों को जलाया था, लेकिन आपके शरीर के अंदर जो पीसीओडी/पीसीओएस (PCOD/PCOS) का भयंकर हॉर्मोनल तूफान चल रहा है, वह हर दिन नए बाल उगाने का सिग्नल दे रहा है। जब तक आप अपनी सुविधाजनक जीवनशैली को बदलकर इस हॉर्मोनल रूट कॉज़ (Root Cause) को नहीं काटेंगी, दुनिया का कोई भी लेज़र आपके अनचाहे बालों को वापस आने से नहीं रोक सकता।

लेज़र के बाद भी Facial Hair वापस क्यों आ जाते हैं? (The Root Cause)

चेहरे पर बाल (Hirsutism) त्वचा की नहीं, बल्कि आपके एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) की बीमारी है। इसके पीछे एक पूरी चेन-रिएक्शन (Chain reaction) काम करती है:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): जब आप रिफाइंड चीनी, जंक फूड या भारी कार्बोहाइड्रेट्स खाती हैं, तो कोशिकाएं इंसुलिन का विरोध करने लगती हैं। इस इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) के कारण खून में इंसुलिन का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • ओवरीज़ का कन्फ्यूज़न (High Androgens): खून में मौजूद यह अत्यधिक इंसुलिन ओवरीज़ (अंडाशय) को टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) यानी पुरुष हॉर्मोन बनाने का ज़बरदस्त सिग्नल देता है।
  • हेयर फॉलिकल्स का एक्टिवेट होना: यह टेस्टोस्टेरोन आपके चेहरे (ठुड्डी, अपर लिप्स, छाती) के हेयर फॉलिकल्स को ट्रिगर करता है। लेज़र केवल मौजूदा बालों को जलाता है, लेकिन यह टेस्टोस्टेरोन कुछ ही महीनों में नए फॉलिकल्स को जगा देता है और बाल वापस आ जाते हैं।
  • लगातार वज़न बढ़ने (Weight gain) का दुष्चक्र: पीसीओएस में वज़न बढ़ता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को और बढ़ाता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन और ज़्यादा बनता है। यह एक कभी न खत्म होने वाला लूप (Loop) है।

दोषों के अनुसार PCOS और अनचाहे बालों का प्रकार

आयुर्वेद के अनुसार, चेहरे पर बालों का आना मांस और मेद धातुओं की विकृति है। दोषों के आधार पर इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कफ-प्रधान (मोटापा और थिक हेयर): इसमें बाल बहुत कड़े (Thick) और काले होते हैं। महिला का वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ता है। ओवरीज़ में बड़ी-बड़ी गांठे (Cysts) बन जाती हैं।
  • पित्त-प्रधान (एक्ने और बाल): इसमें अनचाहे बालों के साथ-साथ चेहरे और पीठ पर भयंकर दर्दनाक सिस्टिक एक्ने (Cystic Acne) निकलते हैं। इसके लिए पित्त शांत करने वाले आहार अपनाना सबसे ज़रूरी है।
  • वात-प्रधान (रूखापन और पतले बाल): इसमें बाल थोड़े पतले होते हैं, लेकिन चेहरे पर फैल जाते हैं। महिला को भयंकर तनाव रहता है। इसके लिए वात दोष कम करने के उपायों की आवश्यकता होती है।

क्या आपका शरीर भी मेटाबॉलिक क्रैश के ये अलार्म बजा रहा है?

फेशियल हेयर केवल एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है। यह शरीर का अलार्म है कि आपका मेटाबॉलिज़्म क्रैश कर रहा है:

  • गर्दन और बगलों का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): त्वचा का मखमली और काला पड़ जाना, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा रेड फ्लैग है।
  • सुबह उठते ही भयंकर थकावट: 8 घंटे की नींद के बाद भी शरीर में ऐसी क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) महसूस होना जो किसी आराम से न जाए।
  • रुके हुए या दर्दनाक पीरियड्स: महीनों तक पीरियड्स का न आना और आने पर भयंकर मासिक धर्म की समस्याएं होना।
  • सिर के बालों का उड़ना (Male Pattern Baldness): चेहरे पर बाल आना और सिर के आगे के हिस्से (मांग) से बालों का तेज़ी से झड़ना।

बाल हटाने के चक्कर में महिलाएं क्या भयंकर गलतियाँ करती हैं?

तुरंत खूबसूरत दिखने की इस अंधी दौड़ में महिलाएं अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेती हैं जो शरीर को अंदर से खोखला कर देते हैं:

  • हॉर्मोनल गोलियों (OCPs) पर अंधी निर्भरता: फेशियल हेयर और पीरियड्स को ठीक करने के लिए लगातार बर्थ कंट्रोल पिल्स खाना। ये गोलियाँ केवल हॉर्मोन्स को सुन्न करती हैं। गोली छोड़ते ही बाल दोगुनी ताक़त से वापस आते हैं और एंग्जायटी (Anxiety) बढ़ जाती है।
  • लगातार वैक्सिंग (Waxing) और थ्रेडिंग: चेहरे की नाज़ुक त्वचा पर बार-बार वैक्स करने से त्वचा ढीली पड़ जाती है, इन्फेक्शन होता है और इनग्रोन हेयर (Ingrown hairs) की समस्या शुरू हो जाती है।
  • केवल थायरॉइड की गोली खाना: कई बार पीसीओएस के साथ-साथ थायरॉइड (Thyroid) भी होता है, लेकिन केवल थायरॉइड की गोली खाने से पीसीओएस का टेस्टोस्टेरोन कम नहीं होता।

आयुर्वेद फेशियल हेयर और PCOS के विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जहाँ केवल लेज़र और एंटी-एंड्रोजन (Anti-androgen) दवाइयों पर निर्भर है, वहीं आयुर्वेद इसे अग्निमांद्य, आम और आर्तववह स्रोतस की रुकावट मानता है।

  • जठराग्नि का बुझ जाना: आपकी पाचन तंत्र की आग जब बुझ जाती है, तो भोजन रस बनने के बजाय आम (Toxins) बनाता है।
  • स्रोतोरोध (Channels का ब्लॉक होना): कफ और यह आम मिलकर महिलाओं के ओवरीज़ (आर्तववह स्रोतस) को ब्लॉक कर देते हैं। अंडे फूट नहीं पाते (Anovulation) और ओवरीज़ मेल हॉर्मोन्स बनाने लगती हैं।
  • रस और रक्त धातु की विकृति: जब तक रक्त धातु शुद्ध नहीं होगा, तब तक त्वचा पर एक्ने और अनचाहे बालों की जड़ें सूखेंगी नहीं।

टेस्टोस्टेरोन को कम करने वाली क्लीन ईटिंग डाइट

अपने शरीर को एक Buy It For Life (BIFL) संपत्ति मानें। आपकी डाइट ही आपके हॉर्मोन्स का असली रिमोट कंट्रोल है। इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - लो ग्लाइसेमिक और कफ नाशक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - हॉर्मोन्स बिगाड़ने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley सबसे श्रेष्ठ फैट कटर है), रागी, बाजरा, दलिया। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, सफेद पॉलिश चावल।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) ब्रोकली, करेला, परवल, लौकी, सहजन (Drumsticks)। अत्यधिक आलू, शकरकंद, अरबी, डिब्बाबंद और फ्रोज़न सब्ज़ियाँ।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (सीमित मात्रा में), कच्ची घानी सरसों का तेल। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बहुत ज़्यादा पैकेटबंद स्नैक्स।
फल (Fruits) आंवला, पपीता, जामुन, सेब। पैकेटबंद फलों के मीठे रस (Heavy Fructose), कोल्ड स्टोरेज के फल।
पेय पदार्थ (Beverages) पुदीने की चाय (Spearmint tea - टेस्टोस्टेरोन कम करती है), मट्ठा। कोल्ड ड्रिंक्स, डार्क कॉफी, पैकेटबंद एनर्जी ड्रिंक्स।

PCOS की गांठों को पिघलाने वाली जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के ओवरीज़ को नया जीवन देते हैं:

  • शतावरी (Shatavari): महिलाओं के प्रजनन तंत्र को फौलादी ताकत देने और एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन को बैलेंस करने के लिए शतावरी (Shatavari) सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है।
  • कांचनार (Kanchnar): यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली ग्रंथि-नाशक औषधि है। यह ओवरीज़ में बनी हुई पीसीओएस की गांठों (Cysts) को पिघलाकर बाहर निकाल देती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): भयंकर मानसिक तनाव (Mental stress) और कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर को कम करके हॉर्मोन्स को शांत करने में अश्वगंधा (Ashwagandha) फौलादी ताकत देता है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): फेशियल हेयर और सिस्टिक एक्ने के पीछे की रक्त की अशुद्धि को खत्म करने के लिए मंजिष्ठा (Manjistha) एक जादुई ब्लड प्यूरीफायर है।
  • गिलोय (Giloy): शरीर की अंदरूनी सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को काटने के लिए गिलोय (Giloy) का नियमित सेवन अमृत के समान है।

ज़िद्दी चर्बी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब कफ और मेद (Fat) बहुत गहराई तक जम चुका हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ एंडोक्राइन सिस्टम को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • उद्वर्तन (Udvartana): सूखे और गर्म हर्बल पाउडर से की जाने वाली यह तेज़ मालिश त्वचा के नीचे जमे हुए ज़िद्दी कफ और इंसुलिन रेजिस्टेंस को तेज़ी से पिघलाती है। पीसीओएस के लिए उद्वर्तन (Udvartana) एक जादुई थेरेपी है।
  • विरेचन (Virechana): लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) शरीर से अत्यधिक पित्त और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालती है।
  • नस्य थेरेपी (Nasya): नाक के ज़रिए औषधीय तेल डालने की यह नस्य थेरेपी (Nasya therapy) सीधे पिट्यूटरी ग्लैंड (Pituitary Gland) को स्टिमुलेट करती है, जो पूरे हॉर्मोनल सिस्टम का मास्टर कंट्रोलर है।

हॉर्मोन्स के प्राकृतिक रूप से बैलेंस होने में कितना समय लगता है?

बरसों की गलत डाइट और कृत्रिम हॉर्मोन्स (OCPs) से ब्लॉक हुए शरीर को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट की ब्लोटिंग खत्म होगी, चेहरे के एक्ने सूखने लगेंगे और नए अनचाहे बालों की ग्रोथ की स्पीड (Growth rate) धीमी हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: कांचनार और उद्वर्तन के प्रभाव से आपका ज़िद्दी वज़न प्राकृतिक रूप से कम होने लगेगा। इंसुलिन रेजिस्टेंस टूटेगा और रुके हुए पीरियड्स प्राकृतिक रूप से आना शुरू होंगे।
  • 5-6 महीने: आपकी ओवरीज़ पूरी तरह रीबूट हो जाएंगी। टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर जाएगा। अब अगर आप लेज़र (Laser) या थ्रेडिंग करवाएंगी, तो बाल वापस नहीं आएंगे। आप पूरी तरह इस ट्रैप से बाहर आ जाएंगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

PCOS और फेशियल हेयर के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य बालों के लिए लेज़र/वैक्सिंग और पीरियड्स के लिए OCPs (गर्भनिरोधक गोलियाँ) देना। जठराग्नि को बढ़ाना, इंसुलिन रेजिस्टेंस तोड़ना और ओवरीज़ की गांठों को प्राकृतिक रूप से घुलाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल ओवरीज़ और स्किन (Skin) की एक अलग-अलग समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, 'आम' का संचय और 'रस-मेद' धातु की विकृति का एक संपूर्ण मेटाबॉलिक सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर केवल वज़न प्रबंधन (Weight management) की आम सलाह दी जाती है। क्लीन ईटिंग', स्पियरमिंट टी (Spearmint Tea), सही कुकिंग मेथड्स और शरीर के दोषों के अनुसार आहार को आधार माना जाता है।
लंबा असर गोलियाँ और लेज़र छोड़ते ही बाल और पीरियड्स की समस्या तुरंत वापस आ जाती है। शरीर अंदर से इतना मज़बूत हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से अपने हॉर्मोन्स खुद बैलेंस करना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद पीसीओएस को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • बिना वजह अचानक भयंकर ब्लीडिंग: अगर महीनों बाद पीरियड्स आएं और ब्लीडिंग इतनी भयंकर हो कि रुकने का नाम न ले और चक्कर आने लगें।
  • आवाज़ का भारी होना (Voice Deepening): अगर फेशियल हेयर के साथ-साथ आपकी आवाज़ पुरुषों की तरह भारी (Deep) होने लगे और मांसपेशियों का आकार अजीब तरह से बढ़ने लगे (यह एड्रिनल ट्यूमर का संकेत हो सकता है)।
  • पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द: अगर ओवरीज़ के पास अचानक ऐसा भयंकर फटने वाला दर्द उठे जो बर्दाश्त से बाहर हो (यह किसी बड़ी सिस्ट के फटने (Ruptured Cyst) का इशारा हो सकता है)।
  • स्तनों (Breasts) के आकार में अचानक कमी: अगर मेल हॉर्मोन्स के भयंकर स्तर के कारण स्तनों का आकार सिकुड़ने लगे।

निष्कर्ष

इस कॉस्मेटिक बैंड-एड (Band-Aid) और हॉर्मोनल पिल्स के खतरनाक ट्रैप से बाहर निकलें। अपने मेटाबॉलिज़्म को रीबूट करें। क्लीन ईटिंग अपनाएं, जंक फूड को कूड़ेदान में डालें और अपनी डाइट में जौ, पुदीने की चाय और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। शतावरी, कांचनार और गिलोय जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की उद्वर्तन थेरेपी से अपने शरीर के ब्लॉक हुए चैनल्स (स्रोतस) को खोलें। उम्र भर चेहरे के बालों को छिपाने और वैक्सिंग के दर्द से बचें, और अपने शरीर की प्राकृतिक हॉर्मोनल लय (Rhythm) को वापस पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

लेज़र ट्रीटमेंट केवल त्वचा के नीचे मौजूद हेयर फॉलिकल (बालों की जड़) को जलाता है। लेकिन पीसीओएस में आपके खून में पुरुष हॉर्मोन (Testosterone) बहुत ज़्यादा होता है। यह हॉर्मोन कुछ ही महीनों में नए फॉलिकल्स को एक्टिवेट कर देता है, जिससे बाल वापस उग आते हैं। जब तक टेस्टोस्टेरोन कम नहीं होगा, बाल आना बंद नहीं होंगे।

OCPs पीसीओएस का असली इलाज नहीं हैं। ये गोलियाँ केवल आपके प्राकृतिक हॉर्मोन्स को सुन्न करके एक कृत्रिम, नकली ब्लीडिंग (Withdrawal bleeding) लाती हैं। जैसे ही आप इन्हें छोड़ेंगी, आपके बाल और पीरियड्स की समस्या फिर से वापस आ जाएगी। आयुर्वेद इसे प्राकृतिक रूप से बैलेंस करता है।

हाँ। स्पियरमिंट टी (Spearmint Tea - पहाड़ी पुदीने की चाय) को आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों में एंटी-एंड्रोजन (Anti-androgen) माना गया है। दिन में दो बार स्पियरमिंट टी पीने से खून में मौजूद फ्री टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होता है, जिससे अनचाहे बालों की ग्रोथ धीमी हो जाती है।

यह पीसीओएस से जुड़े इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) का सबसे बड़ा लक्षण है। जब खून में इंसुलिन का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो त्वचा की कोशिकाएं बहुत तेज़ी से बढ़ने लगती हैं, जिससे गर्दन, बगलों और जोड़ों के पास की त्वचा मोटी और मखमली काली हो जाती है। यह कोई मैल नहीं है जिसे रगड़ कर साफ किया जा सके।

कांचनार आयुर्वेद की एक शक्तिशाली ग्रंथि-नाशक (गांठ पिघलाने वाली) औषधि है। यह ओवरीज़ में बनी हुई पानी की गांठों (Cysts) को पिघलाकर बाहर निकालती है। जब ओवरीज़ का कफ और सूजन हटती है, तो वे टेस्टोस्टेरोन बनाना बंद कर देती हैं और बालों की ग्रोथ रुक जाती है।

जब आपको पीसीओएस (इंसुलिन रेजिस्टेंस) होता है, तो खून में मौजूद शुगर (Glucose) कोशिकाओं के अंदर नहीं जा पाती। आपकी कोशिकाएं ऊर्जा के लिए भूखी (Starving) रहती हैं, इसलिए दिमाग बार-बार कुछ मीठा खाने का सिग्नल देता है।

बिल्कुल। उद्वर्तन में सूखे और गर्म हर्बल पाउडर (जैसे त्रिफला या चने का आटा) से शरीर की उल्टी दिशा में तेज़ मालिश की जाती है। यह घर्षण त्वचा के नीचे जमे हुए मेद (Fat) और कफ को तोड़ता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी को तेज़ी से सुधारकर ज़िद्दी वज़न कम करता है।

पीसीओएस में बाज़ार का पैकेटबंद दूध और पनीर कफ और आम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, कमर्शियल दूध में मौजूद हॉर्मोन्स (जैसे IGF-1) ओवरीज़ को ट्रिगर करके टेस्टोस्टेरोन और एक्ने बढ़ा सकते हैं। आयुर्वेद में पीसीओएस के दौरान भारी डेयरी से बचने और केवल देसी गाय का घी या छाछ (तक्र) लेने की सलाह दी जाती है।

शेविंग से बाल कड़े या काले नहीं होते, यह एक मिथक है। शेविंग केवल बाल को सतह से काटती है। हालांकि, पीसीओएस में त्वचा अक्सर सेंसिटिव (Acne-prone) होती है, इसलिए वैक्सिंग या शेविंग से इनग्रोन हेयर (त्वचा के अंदर बाल मुड़ जाना) और सूजन का खतरा रहता है। सबसे सही तरीका हॉर्मोन्स को अंदर से ठीक करना ही है।

हाँ। पीसीओएस कोई स्थायी डैमेज नहीं है। अगर आप आयुर्वेदिक डिटॉक्स, सही डाइट (लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स), स्ट्रेस मैनेजमेंट और शतावरी जैसी औषधियों का सेवन करती हैं, तो ओवरीज़ अपनी प्राकृतिक स्थिति में वापस आ जाती हैं और नए फेशियल हेयर का आना 100% रुक सकता है।

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