Diseases Search
Close Button
 
 

Painkiller से गाउट Gout का दर्द दब जाता है पर Joint खराब होता रहता है — क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5055

आधी रात को अचानक पैर के अंगूठे में ऐसा भयंकर दर्द उठना जैसे किसी ने सुई चुभा दी हो या अंगूठे को आग के अंगारों पर रख दिया हो। दर्द इतना तेज़ कि चादर का हल्का सा स्पर्श भी बर्दाश्त न हो। ऐसे में, अलमारी में रखी एक पेनकिलर Painkiller खाना और अगली सुबह दर्द गायब होने पर ऑफिस के लिए निकल जाना हमारी आम आदत बन चुकी है। हम राहत की सांस लेते हैं और सोचते हैं कि बीमारी ठीक हो गई।

लेकिन यह 'ठीक होना' महज़ एक खतरनाक धोखा है। पेनकिलर ने आपके दिमाग तक जाने वाले दर्द के सिग्नल को ज़रूर काट दिया है, लेकिन आपके जोड़ों के अंदर जो यूरिक एसिड Uric Acid के सुई जैसे नुकीले क्रिस्टल्स जमा हैं, वो कहीं नहीं गए। वे अंदर ही अंदर आपकी हड्डियों, कार्टिलेज और लिगामेंट्स को दीमक की तरह खा रहे हैं। जब आप दर्द दबाकर गाउट को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो आप अनजाने में अपने जोड़ों को हमेशा के लिए अपाहिज होने और अपनी किडनी को डैमेज होने की तरफ धकेल रहे होते हैं।

गाउट Gout का दर्द शरीर में क्या संकेत देता है?

गाउट गठिया Arthritis का ही एक बेहद दर्दनाक और जटिल रूप है, जो शरीर में यूरिक एसिड के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण होता है। यूरिक एसिड हमारे शरीर में प्यूरीन Purine नामक तत्व के टूटने से बनता है, जिसे हमारी किडनी फिल्टर करके यूरिन के ज़रिए बाहर निकाल देती है।

लेकिन जब किडनी इसे बाहर निकालने में कमज़ोर पड़ जाती है या शरीर में प्यूरीन बहुत ज़्यादा बनने लगता है, तो यह यूरिक एसिड खून में तैरने लगता है। धीमे-धीमे यह ठंडे जोड़ों जैसे पैर का अंगूठा, टखने, घुटने में जाकर जमा होने लगता है और सुई जैसे नुकीले क्रिस्टल Monosodium Urate Crystals का रूप ले लेता है। जब ये क्रिस्टल जोड़ों की झिल्ली Synovial fluid में चुभते हैं, तो शरीर का इम्यून सिस्टम वहां हमला करता है, जिससे भयंकर लालिमा, सूजन और असहनीय दर्द पैदा होता है। यह दर्द चीख-चीख कर बताता है कि आपके शरीर का मेटाबॉलिज़्म और फिल्टरिंग सिस्टम फेल हो रहा है।

गाउट Gout और जोड़ों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का शरीर और दोष अलग होते हैं। बढ़े हुए यूरिक एसिड का प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान डैमेज: इस स्थिति में जोड़ों में भयंकर चुभन और फड़कने वाला दर्द होता है। दर्द अपनी जगह बदलता रहता है। जोड़ रूखे हो जाते हैं और मूवमेंट करने पर कटकटाहट महसूस होती है। ठंडी हवा या ठंडे मौसम में यह दर्द असहनीय हो जाता है।
  • पित्त-प्रधान डैमेज: इसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स के कारण जोड़ों में भयंकर लालिमा Redness आ जाती है। अंगूठा या टखना छूने पर गर्म Hot to touch लगता है और आग लगने जैसी जलन होती है। मरीज़ को बुखार भी आ सकता है।
  • कफ-प्रधान डैमेज: लगातार यूरिक एसिड जमा होने से जोड़ों में भारी सूजन Swelling आ जाती है। जोड़ सुन्न और भारी महसूस होते हैं। इस स्थिति में जोड़ों के आस-पास चर्बी और क्रिस्टल्स की गांठें Tophi बननी शुरू हो जाती हैं।

क्या आपके जोड़ों में भी गाउट और डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

जोड़ों का डैमेज एक दिन में नहीं होता। गाउट के क्रिस्टल्स सालों तक खामोशी से जोड़ों में जमा होते रहते हैं। अगर आपको अपने शरीर में ये संकेत दिख रहे हैं, तो पेनकिलर खाने के बजाय तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • पैर के अंगूठे में अचानक अटैक Podagra: बिना किसी चोट के आधी रात को अचानक पैर के अंगूठे में भयंकर सूजन और ऐसा दर्द उठना जो सुबह तक चरम पर पहुँच जाए।
  • जोड़ों की त्वचा का लाल और चमकदार होना: दर्द वाले जोड़ के ऊपर की त्वचा एकदम तन जाती है, चमकदार हो जाती है और लाल या बैंगनी रंग की दिखने लगती है।
  • हल्के दबाव से भी भयंकर दर्द: मोज़े पहनने या यहाँ तक कि बिस्तर की चादर का हल्का सा हिस्सा छू जाने पर भी जोड़ में करंट जैसा दर्द दौड़ना।
  • गांठें Tophi महसूस होना: उँगलियों, टखनों या कोहनी के आस-पास त्वचा के नीचे कठोर, सफेद या पीले रंग की गांठें बनना शुरू हो जाना यह एडवांस डैमेज का लक्षण है।

पेनकिलर Painkillers से दर्द दबाने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

गाउट के दर्द से रातों-रात छुटकारा पाने के लिए मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो जोड़ों को स्थायी रूप से तबाह कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन: दर्द निवारक गोलियाँ NSAIDs केवल दिमाग को दर्द महसूस करने से रोकती हैं Prostaglandins को ब्लॉक करके। वे यूरिक एसिड को शरीर से बाहर नहीं निकालतीं। नतीजा—दर्द नहीं होता, इसलिए आप सामान्य रूप से चलते-फिरते हैं, जिससे सुई जैसे क्रिस्टल्स कार्टिलेज को और तेज़ी से फाड़ते और घिसते रहते हैं।
  • स्टेरॉयड्स का गलत इस्तेमाल: तुरंत सूजन कम करने के लिए स्टेरॉयड्स लेना आपकी हड्डियों को अंदर से खोखला Osteoporosis कर देता है और इम्युनिटी को गिरा देता है।
  • सिर्फ यूरिक एसिड कम करने की दवा पर निर्भरता: कुछ गोलियाँ यूरिक एसिड का बनना तो रोक देती हैं, लेकिन जो भारी कचरा और क्रिस्टल्स पहले ही जोड़ों में जमा हैं, उन्हें बाहर निकालने का कोई काम नहीं करतीं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर पेनकिलर से दर्द दबाया जाता रहा, तो कुछ ही सालों में जोड़ों का आकार हमेशा के लिए टेढ़ा Joint Deformity हो जाता है। साथ ही, यही यूरिक एसिड किडनी में जाकर पथरी Kidney Stones बनाता है और अंततः क्रोनिक किडनी फेलियर CKD का कारण बनता है।

आयुर्वेद गाउट वातरक्त और जोड़ों के खराब होने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे गाउट Gout या हाइपरयूरिसीमिया कहता है, आयुर्वेद उसे 'वातरक्त' Vatarakta या 'आढ्य वात' के बहुत ही वैज्ञानिक और सटीक दृष्टिकोण से समझता है।

  • रक्त धातु का दूषित होना और वात का प्रकोप: जब हम गलत खान-पान विरुद्ध आहार और खराब जीवनशैली अपनाते हैं, तो हमारा 'रक्त' Blood दूषित हो जाता है और 'वात' हवा कुपित हो जाती है। जब यह बिगड़ा हुआ वात शरीर में दूषित रक्त के साथ मिल जाता है, तो यह 'वातरक्त' बन जाता है।
  • स्रोतों Channels में रुकावट: दूषित रक्त भारी होकर पैर के निचले हिस्सों जैसे अंगूठे की तरफ बैठता है। कुपित वात इसे वहाँ जाकर ब्लॉक कर देता है। इस रुकावट के कारण जोड़ों में भारी दबाव, सूजन और दर्द पैदा होता है, जिसे आज हम क्रिस्टल जमा होना कहते हैं।
  • जठराग्नि की अनदेखी और 'आम' का निर्माण: जब कमज़ोर पाचन के कारण खाना ठीक से नहीं पचता, तो शरीर में विषैला कचरा 'आम' Toxins/Undigested food बनता है। यही 'आम' प्यूरीन मेटाबॉलिज़्म को बिगाड़ता है और यूरिक एसिड के रूप में रक्त में घुल जाता है।
  • आम का पाचन और अग्नि दीपन Toxin Removal & Digestion: सबसे पहले आयुर्वेदिक औषधियों से आंतों और रक्त में घुले हुए ज़िद्दी 'आम' Toxins को पचाया जाता है और आपकी पाचन अग्नि को तेज़ किया जाता है, ताकि प्यूरीन शरीर में इकट्ठा होने के बजाय पच सके।
  • रक्त शोधन Blood Purification: दूषित रक्त को साफ करने के लिए रक्त-शोधक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो खून से अतिरिक्त यूरिक एसिड को निकालकर किडनी के रास्ते बाहर कर देती हैं।
  • क्रिस्टल को पिघलाना और वात शमन: जोड़ों में जमे हुए यूरिक एसिड के कड़े क्रिस्टल्स को तोड़ने के लिए खास गुग्गुल Guggulu और बाहरी लेप का प्रयोग किया जाता है, और वात को शांत करने के लिए जोड़ों को स्नेहन Lubrication दिया जाता है।

यूरिक एसिड घटाने और वातरक्त शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

गाउट की बीमारी 80% आपके किचन से कंट्रोल होती है। पेनकिलर छोड़ने और यूरिक एसिड को प्राकृतिक रूप से फ्लश आउट करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अनिवार्य रूप से अपनाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - यूरिक एसिड निकालने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - प्यूरीन और वात बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ Barley - सबसे बेहतरीन, ज्वार। वाइट ब्रेड, मैदा, बासी खाना, खमीर उठा हुआ भोजन।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी, तिल का तेल सीमित मात्रा में। रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत ज़्यादा तला-भुना खाना।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, परवल, पेठा Ash gourd, करेला। पालक, टमाटर बीज वाले, कटहल, फूलगोभी, बैंगन।
दालें और प्रोटीन सिर्फ छिलके वाली मूंग दाल। राजमा, छोले, उड़द की दाल, रेड मीट Red Meat, सीफूड Seafood।
फल और मेवे Fruits ताज़ा चेरी यूरिक एसिड कम करती है, सेब, पपीता, आंवला। खट्टे फल अगर सूजन ज़्यादा हो, डिब्बाबंद जूस।
पेय पदार्थ Beverages दिन भर में खूब सारा गुनगुना पानी, छाछ जीरा डालकर, धनिया का पानी। शराब खासकर बीयर, कोल्ड ड्रिंक्स, बहुत ज़्यादा चाय/कॉफी।

जोड़ों को ताक़त देने वाली और यूरिक एसिड निकालने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना लिवर या किडनी को नुकसान पहुँचाए गाउट के दर्द को खींच लेते हैं:

  • गिलोय Giloy / Guduchi: वातरक्त Gout के इलाज में गिलोय को 'अमृत' माना गया है। यह शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को तेज़ी से कम करती है, खून साफ करती है और जोड़ों की भयंकर लालिमा और सूजन को शांत करती है।
  • पुनर्नवा Punarnava: इसके नाम का ही अर्थ है 'शरीर को नया करने वाला'। यह एक प्राकृतिक डाइयूरेटिक Diuretic है, जो किडनी के काम को तेज़ करके यूरिक एसिड को यूरिन के रास्ते फ्लश आउट कर देती है।
  • कैशोर गुग्गुल Kaishore Guggulu: यह आयुर्वेदिक औषधि जोड़ों में गहराई तक जमे हुए यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़ने और खून की गर्मी पित्त को शांत करने के लिए सबसे अचूक मानी जाती है।
  • मंजिष्ठा Manjistha: यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है। गाउट में जब खून में भारी एसिडिटी और कचरा जमा हो जाता है, तो मंजिष्ठा रक्त को साफ करके जोड़ों की स्किन को सामान्य करती है।
  • हरसिंगार Parijat: पारिजात के पत्तों का काढ़ा जोड़ों की दर्दनाक सूजन और जकड़न को जादुई तरीके से खींचने के लिए जाना जाता है।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स पिघलाने और सूजन मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब यूरिक एसिड की गांठें Tophi बहुत पुरानी हो चुकी हों और जोड़ डैमेज होने की कगार पर हों, तो पंचकर्म की ये विशेष थेरेपीज़ बिना पेनकिलर के तुरंत और स्थायी आराम देती हैं:

  • विरेचन Virechana: यह एक मेडिकल प्यूरिफिकेशन थेरेपी है। इसमें औषधियों के माध्यम से पेट साफ करके शरीर से बढ़ा हुआ पित्त और दूषित रक्त बाहर निकाला जाता है। गाउट के मरीज़ों में यूरिक एसिड को तुरंत कम करने का यह सबसे शक्तिशाली तरीका है।
  • बस्ती Basti: वात दोष को जड़ से खत्म करने के लिए एनिमा के ज़रिए औषधीय काढ़े और तेल शरीर में पहुँचाए जाते हैं। यह आंतों की सफाई करती है और जोड़ों के दर्द को गहराई से शांत करती है।
  • रक्तमोक्षण Raktamokshana / Leech Therapy: जहां भयंकर दर्द, सूजन और लालिमा हो, वहां लीच जौंक लगाकर अशुद्ध खून को निकाला जाता है। इससे गाउट के दर्द में कुछ ही घंटों के भीतर जादुई आराम मिलता है।
  • लेप और धारा Lepa & Dhara: जब जोड़ आग की तरह जल रहा हो, तब ठंडी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों जैसे दशांग लेप का गाढ़ा पेस्ट जोड़ पर लगाया जाता है, जो चुभते हुए दर्द को तुरंत खींच लेता है।

जोड़ों के पूरी तरह रिपेयर होने और गाउट खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से पेनकिलर्स खाकर खराब हो चुके मेटाबॉलिज़्म को सुधारने और जोड़ों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों से आपका पाचन सुधरेगा और 'आम' पचेगा। जोड़ों का भयंकर दर्द, लालिमा और सूजन में भारी कमी आएगी। गाउट के अटैक्स की फ्रीक्वेंसी कम हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: शरीर में प्यूरीन का मेटाबॉलिज़्म ठीक होगा। यूरिक एसिड ब्लड में नॉर्मल लेवल पर आने लगेगा। पेनकिलर की ज़रूरत लगभग खत्म हो जाएगी और आप आसानी से चल-फिर सकेंगे।
  • 5-6 महीने: रक्त और धातुएँ पूरी तरह शुद्ध हो जाएंगी। जोड़ों में जमे हुए पुराने क्रिस्टल्स धीरे-धीरे पिघल जाएंगे। आपका जोड़ डैमेज होने से बच जाएगा और आप एक स्वस्थ और एक्टिव जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गाउट और यूरिक एसिड के डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स NSAIDs, स्टेरॉयड्स और जीवन भर यूरिक एसिड रोकने की गोली Allopurinol देना। वात-रक्त को शांत करना, 'आम' को पचाना, खून साफ करना और जमे हुए क्रिस्टल्स को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल ब्लड में बढ़े हुए एक केमिकल Uric Acid और एक स्थानीय जोड़ की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन अग्नि, बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म और दूषित रक्त का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल प्यूरीन वाली चीज़ें बंद करने को कहा जाता है, लेकिन पाचन सुधारने या खून साफ करने पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पाचन, 'आम' को बनने से रोकना और जड़ी-बूटियों को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर पेनकिलर से किडनी और पेट डैमेज होता है। दवाइयाँ छोड़ने पर गाउट का अटैक तुरंत वापस आ जाता है और जोड़ों के विकृत Deform होने का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, किडनी का फंक्शन सुधरता है और मेटाबॉलिज़्म खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद गाउट को बहुत प्रभावी ढंग से जड़ से खत्म कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • जोड़ों में भयंकर गर्माहट और तेज़ बुखार: अगर दर्द के साथ-साथ आपको तेज़ बुखार Fever आ जाए और जोड़ छूने पर आग जैसा गर्म लगे, तो यह किसी खतरनाक इन्फेक्शन Septic arthritis का संकेत हो सकता है।
  • गांठों Tophi का फटना: अगर जोड़ों के आस-पास बनी यूरिक एसिड की सफेद गांठें त्वचा फाड़कर बाहर आ जाएं या उनमें से सफेद चॉक जैसा पदार्थ रिसने लगे।
  • पेशाब में खून या भयंकर दर्द: अगर गाउट के साथ आपकी कमर के निचले हिस्से में भयंकर दर्द हो या पेशाब करते समय खून आए, तो यह यूरिक एसिड के कारण किडनी में पथरी Kidney stone फँसने का लक्षण है।

निष्कर्ष

आधी रात को दर्द उठने पर पेनकिलर खा लेना उस समय आपके लिए एक वरदान लग सकता है, लेकिन यह आपके जोड़ों के भविष्य के लिए एक अभिशाप है। गाउट का दर्द आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका सिस्टम प्यूरीन को पचा नहीं पा रहा है, खून में एसिडिटी बढ़ गई है और सुई जैसे क्रिस्टल्स आपकी हड्डियों को काट रहे हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर और स्टेरॉयड्स से दबाते हैं, तो आप अपनी किडनी को फेल होने और जोड़ों को हमेशा के लिए अपाहिज होने की दावत दे रहे होते हैं।

इस खतरनाक शॉर्टकट के चक्र से बाहर निकलें। अपनी डाइट को सुधारें, टमाटर-पालक और शराब से दूरी बनाएं और अपने शरीर में शुद्ध घी और मूंग दाल को शामिल करें। गिलोय, पुनर्नवा और कैशोर गुग्गुल जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और विरेचन व रक्तमोक्षण से अपने दूषित खून को साफ करके नया जीवन दें। यूरिक एसिड के कारण अपने शरीर को दीमक की तरह खोखला न होने दें, और अपने मेटाबॉलिज़्म व जोड़ों को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सामान्य गठिया (जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस) उम्र के साथ हड्डियां घिसने से होता है और उसका दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है। लेकिन गाउट अचानक अटैक करता है, ज़्यादातर रात के समय पैर के अंगूठे में होता है, और इसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स के कारण बहुत तेज़ सूजन, लालिमा और असहनीय जलन होती है।

आधुनिक चिकित्सा में बर्फ लगाने की सलाह दी जाती है, और आयुर्वेद में भी पित्त-प्रधान गाउट (जहां बहुत लालिमा और भयंकर जलन हो) में ठंडी सिकाई कुछ हद तक सूजन सुन्न कर सकती है। लेकिन आयुर्वेद दर्द को खींचने के लिए बर्फ की जगह ठंडे औषधीय लेप (जैसे दशांग लेप) को ज़्यादा सुरक्षित और असरदार मानता है।

हाँ। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि टमाटर (खासकर उसके बीज) शरीर में एसिडिटी और प्यूरीन लेवल को बढ़ा सकते हैं। अगर आपको गाउट है, तो टमाटर, पालक और बैंगन जैसी सब्ज़ियों से पूरी तरह बचना चाहिए।

गोली सिर्फ नया यूरिक एसिड बनने से रोकती है, लेकिन आपके जोड़ों में जो क्रिस्टल्स और आम (Toxins) पहले से जमे हुए हैं, वो वहां से नहीं हटते। थोड़ी सी भी डाइट बिगड़ने या मौसम बदलने पर वही जमे हुए क्रिस्टल्स दोबारा दर्द पैदा कर देते हैं। आयुर्वेद इन्हीं जमे हुए क्रिस्टल्स को बाहर निकालता है।

बिल्कुल। बीयर प्यूरीन (Purine) का बहुत बड़ा स्रोत है। शराब पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन होता है और किडनी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने के बजाय शराब को पचाने में लग जाती है, जिससे गाउट का अटैक तुरंत आ सकता है।

नहीं, यह एक बहुत बड़ा मिथक है। आपको राजमा, छोले, और उड़द जैसी भारी दालें छोड़नी चाहिए क्योंकि ये पचने में भारी होती हैं और वात बढ़ाती हैं। छिलके वाली मूंग दाल बहुत हल्की होती है और शरीर में आम पैदा नहीं करती, इसलिए आयुर्वेद गाउट में मूंग की दाल खाने की सलाह देता है।

हाँ। यूरिक एसिड एक कचरा है जिसे किडनी पानी के ज़रिए शरीर से बाहर निकालती है। अगर आप पानी कम पीते हैं, तो खून गाढ़ा हो जाता है और यूरिक एसिड तेज़ी से क्रिस्टल्स बनकर जोड़ों में जमने लगता है।

बहुत गहरा कनेक्शन है। जो यूरिक एसिड आपके जोड़ों में जाकर गाउट बनाता है, वही यूरिक एसिड जब किडनी में ज़्यादा जमा हो जाता है, तो वह सख्त होकर यूरिक एसिड की पथरी (Urate stones) का रूप ले लेता है, जो किडनी को डैमेज कर सकता है।

गिलोय वातरक्त (Gout) के लिए सबसे श्रेष्ठ औषधि है। यह त्रिदोष नाशक है, विशेषकर पित्त और वात को शांत करती है। यह शरीर की पाचन अग्नि को सुधारती है, खून की सफाई करती है और मेटाबॉलिज़्म को इतना मज़बूत कर देती है कि क्रिस्टल्स खुद-ब-खुद पिघल कर शरीर से बाहर हो जाते हैं

अटैक के समय जोड़ को बिल्कुल हिलाएं-डुलाएं नहीं। उस हिस्से को तकिये पर रखकर थोड़ा ऊपर उठा लें। गर्म सिकाई या मालिश भूलकर भी न करें (इससे जलन बढ़ जाएगी)। ठंडे पानी या चंदन/मुल्तानी मिट्टी का हल्का लेप करें और तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करके रक्त-शोधक और वात-शामक दवाइयां शुरू करें।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us