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Gout के मरीज़ को किन चीजों से तुरंत सावधान हो जाना चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कई बार ऐसा होता है कि दर्द रातों-रात नहीं आता। वो अंदर ही अंदर सुलगता रहता है और फिर एक दिन अचानक ऐसा हमला करता है कि इंसान संभल ही नहीं पाता। 'गाउट' (Gout) का दर्द भी बिल्कुल ऐसा ही है। एकदम से जोड़ों में सूजन, जलन और इतनी तेज़ टीस कि पैर ज़मीन पर रखना तो दूर, हिलाना भी आफत बन जाता है।

ऐसी नौबत आने पर हम पेनकिलर खा लेते हैं। दर्द दब जाता है तो हमें लगता है कि चलो, आफत टल गई। लेकिन क्या सच में बीमारी खत्म हो गई? या बस थोड़ी देर के लिए सो गई है? सच तो ये है कि गाउट कोई आम दर्द नहीं है, बल्कि ये इस बात का अलार्म है कि आपके खून में 'यूरिक एसिड' (Uric acid) खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है। अगर इसे यूँ ही टालते रहे, तो ये बार-बार पलट कर आएगा और धीरे-धीरे शरीर के बाकी जोड़ों को भी अपनी चपेट में ले लेगा।

गाउट आखिर है क्या? 

गाउट एक तरह का गठिया (जोड़ों का दर्द) ही है, जो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से होता है। जब हमारी किडनी इस एसिड को छानकर शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती, तो ये खून में ही घूमने लगता है। धीरे-धीरे ये एसिड छोटे-छोटे नुकीले क्रिस्टल (बिल्कुल बारीक सुइयों जैसे कणों) में बदल जाता है और हमारे जोड़ों के बीच जाकर छिप जाता है।

जब ये सुइयां चुभती हैं, तो अचानक दर्द, सूजन और त्वचा पर लालिमा आ जाती है। ज़्यादातर लोगों में इसकी शुरुआत पैर के अंगूठे से होती है। दर्द इतना खतरनाक होता है कि रात को सोते वक्त अगर चादर भी अंगूठे से छू जाए, तो इंसान चीख पड़े।

गाउट के अलग-अलग रूप (स्टेजेस) 

खून में यूरिक एसिड कितना फैला है और दिक्कत कितनी पुरानी है, इस हिसाब से गाउट को चार अलग-अलग स्टेजेस में बांटा जा सकता है:

  • पहली स्टेज - एक्यूट गाउट (Acute Gout): यह गाउट का एकदम पहला और अचानक होने वाला अटैक है। इंसान रात को बिल्कुल ठीक सोता है और आधी रात को अचानक अंगूठे या किसी जोड़ में ऐसा दर्द उठता है जैसे किसी ने हथौड़ा मार दिया हो। वहां तुरंत सूजन और लाली आ जाती है।
  • दूसरी स्टेज - इंटरक्रिटिकल गाउट (Intercritical Gout): इसे आप 'तूफान से पहले की शांति' कह सकते हैं। पहले अटैक के बाद दर्द एकदम गायब हो जाता है। इंसान को लगता है कि वो बिल्कुल ठीक हो गया है, लेकिन असल में यूरिक एसिड के वो नुकीले क्रिस्टल अंदर ही अंदर चुपचाप अपनी फौज तैयार कर रहे होते हैं।
  • तीसरी स्टेज - क्रॉनिक गाउट (Chronic Gout): अगर शुरुआत में इस पर ध्यान न दिया जाए, तो बीमारी पुरानी यानी 'क्रॉनिक' हो जाती है। अब दर्द आपको चैन नहीं लेने देता। ये बार-बार लौटकर आता है और अब सिर्फ अंगूठे में नहीं, बल्कि दूसरे जोड़ों में भी सूजन और जकड़न रहने लगती है। इंसान का उठना-बैठना और चलना तक मुहाल हो जाता है।
  • चौथी स्टेज - टोफेशियस गाउट (Tophaceous Gout): ये गाउट की सबसे बिगड़ी हुई और खतरनाक हालत है। इसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल इकट्ठे होकर बड़ी-बड़ी और सख्त गांठें बना लेते हैं। मेडिकल भाषा में इन्हें 'टोफी' (Tophi) कहते हैं। ये गांठें आपकी उंगलियों, कोहनी या कान के आस-पास स्किन के नीचे साफ तौर पर उभरी हुई दिखने लगती हैं।

गाउट के लक्षण: शरीर की चेतावनी पहचानें

गाउट का हमला अक्सर बिना किसी पूर्व सूचना के होता है, लेकिन शरीर में इसके लक्षण बहुत ही स्पष्ट और कष्टदायक होते हैं। यहाँ इसके प्रमुख संकेत दिए गए हैं:

  • जोड़ों में अचानक और तीव्र दर्द: रात या सुबह के समय अचानक पैर के अंगूठे, टखने या घुटने में असहनीय दर्द महसूस होना। यह दर्द हमले के पहले 4 से 12 घंटों में सबसे अधिक होता है।
  • सूजन और लालिमा: प्रभावित जोड़ बुरी तरह सूज जाता है और वहां की त्वचा चमकदार, लाल या बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती है।
  • अत्यधिक संवेदनशीलता (Tenderness): प्रभावित जोड़ इतना संवेदनशील हो जाता है कि उस पर चादर या कपड़े का हल्का सा स्पर्श भी तेज चुभन और दर्द पैदा करता है।
  • जोड़ का गर्म महसूस होना: छूने पर प्रभावित हिस्सा शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी गर्म महसूस होता है, जो अंदरूनी सूजन (Inflammation) का संकेत है।
  • चलने-फिरने में कठिनाई (Limited Range of Motion): जैसे-जैसे गाउट बढ़ता है, जोड़ों का लचीलापन कम हो जाता है और उन्हें हिलाना या उन पर वजन डालना मुश्किल हो जाता है।
  • जोड़ों के ऊपर की त्वचा में खुजली: सूजन कम होने के बाद प्रभावित जोड़ के आसपास की त्वचा में खुजली हो सकती है या वहां की खाल उतर सकती है।

गाउट के मुख्य कारण: शरीर में क्यों बढ़ता है यूरिक एसिड?

गाउट होने का प्राथमिक कारण शरीर में यूरिक एसिड का असंतुलन है। जब यह एसिड खून में ज़रूरत से ज़्यादा हो जाता है, तो यह जोड़ों में जमा होने लगता है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • गलत खान-पान (Diet): लाल मांस (Red meat), सीफूड, और दालों का अत्यधिक सेवन यूरिक एसिड बढ़ाता है। इसके अलावा, मीठे पेय पदार्थ (Fructose-rich drinks) और शराब (विशेषकर बीयर) इसके मुख्य अपराधी हैं।
  • मेटाबॉलिज्म और पाचन (Ayurvedic Perspective): आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारी 'अग्नि' (पाचन शक्ति) कमजोर होती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पचता और 'आम' (विषाक्त तत्व) बनाता है। यही 'आम' रक्त के साथ मिलकर वात-रक्त पैदा करता है।
  • किडनी की कार्यक्षमता में कमी: यदि किडनी यूरिक एसिड को खून से फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकालने में धीमी पड़ जाए, तो इसका स्तर शरीर में बढ़ने लगता है।
  • मोटापा (Obesity): अधिक वजन होने पर शरीर अधिक यूरिक एसिड बनाता है और किडनी के लिए इसे बाहर निकालना कठिन हो जाता है।
  • आनुवंशिकी (Genetics): यदि आपके परिवार में किसी को गाउट की समस्या रही है, तो आपको इसका खतरा अधिक हो सकता है।
  • चिकित्सीय स्थितियाँ और दवाएं: हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारियाँ गाउट के जोखिम को बढ़ाती हैं। कुछ दवाएं (जैसे पानी निकालने वाली दवाएं या Diuretics) भी यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं।

Gout के मरीज़ को किन चीजों से तुरंत सावधान हो जाना चाहिए?

गाउट (Gout) के मामले में हमारा शरीर हमें कुछ खास इशारे देता है, जिन्हें समय रहते पकड़ना बहुत ज़रूरी है। अगर आपके साथ नीचे लिखी बातें हो रही हैं, तो समझ जाइए कि यूरिक एसिड खतरे के निशान को पार कर रहा है और अब आपको बिल्कुल अलर्ट हो जाना चाहिए:

  • आधी रात का अचानक दर्द ('मिडनाइट अटैक'): अगर रात को सोते-सोते पैर के अंगूठे में अचानक इतनी भयंकर जलन और टीस उठे कि आपकी नींद खुल जाए और पैर हिलाना भी भारी पड़ जाए, तो समझ लें कि यह गाउट का सीधा हमला है।
  • स्किन के नीचे सख्त गांठें (Tophi): अगर आपको अपनी उंगलियों, कोहनी या कान के आस-पास छोटी-छोटी पत्थर जैसी सख्त गांठें महसूस होने लगें, तो इसका मतलब है कि यूरिक एसिड अब जमकर नुकीले क्रिस्टल बन चुका है।
  • बुखार के साथ कंपकंपी छूटना: जोड़ों में दर्द तो है ही, लेकिन अगर साथ में आपको हल्का बुखार या सर्दी लगने लगे, तो यह साफ इशारा है कि शरीर के अंदर भारी सूजन (इन्फ्लेमेशन) फैल चुकी है।
  • किडनी के आस-पास दर्द: अगर आपकी कमर के निचले हिस्से या पसलियों के ठीक नीचे दर्द रहने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यूरिक एसिड सिर्फ जोड़ों में नहीं, बल्कि किडनी में जाकर पथरी (Stone) भी बना सकता है।

गाउट को टालने के जोखिम और बड़ी मुसीबतें

अक्सर हम गाउट को सिर्फ "पैर का मामूली दर्द" मानकर दर्द की गोली खा लेते हैं। लेकिन सच बताऊं तो शरीर में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड किसी 'टाइम बम' से कम नहीं है। अगर सही समय पर इसका पक्का इलाज न किया जाए, तो आगे चलकर यह ये बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकता है:

  • दर्द के बार-बार और खतरनाक अटैक: जो दर्द पहले साल-छह महीने में एक बार तंग करता था, वो धीरे-धीरे हर महीने आने लगता है। और सबसे बुरी बात यह है कि हर नया अटैक पहले से ज़्यादा लंबा और रुलाने वाला होता है।
  • जोड़ों का हमेशा के लिए खराब होना (Joint Damage): यूरिक एसिड के वो बारीक और नुकीले क्रिस्टल जोड़ों के अंदर की गद्दी को चूहों की तरह कुतरने लगते हैं। अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो जोड़ अपनी जगह से खिसक सकते हैं या उंगलियां हमेशा के लिए टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती हैं।
  • भद्दी और सख्त गांठें (Tophi) बनना: जब खून में यूरिक एसिड की मात्रा हद से ज़्यादा हो जाती है, तो यह टखनों, उंगलियों और कानों के बाहरी हिस्से पर सख्त गांठों के रूप में जमा होने लगता है। ये गांठें दिखने में तो खराब लगती ही हैं, साथ ही अंदर ही अंदर हड्डियों को भी गलाने लगती हैं।
  • किडनी में पथरी (Kidney Stones): यूरिक एसिड के ये कण सिर्फ जोड़ों तक सीमित नहीं रहते। ये किडनी (गुर्दे) में जाकर भी इकट्ठे हो जाते हैं और वहां बड़ी दर्दनाक 'यूरिक एसिड पथरी' बना देते हैं, जिससे पेशाब के रास्ते में रुकावट आ सकती है।
  • किडनी फेल होने का डर: अगर गाउट को कंट्रोल न किया जाए, तो यह किडनी के फिल्टर करने की ताकत को बिल्कुल निचोड़ देता है। लंबे समय तक शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ा रहना किडनी की गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।

आयुर्वेद में गाउट (Gout) को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद की पुरानी किताबों में गाउट को 'वात-रक्त' कहा गया है। यह नाम अपने आप में ही पूरी बीमारी की कहानी कह देता है। सीधी सी बात है, जब शरीर में 'हवा' (वात) और 'खून' (रक्त) का तालमेल बिगड़ जाता है, तब यह बीमारी पैदा होती है।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में गाउट बनने की पूरी प्रक्रिया को आप ऐसे समझ सकते हैं:

  • बीमारी की जड़ (हाजमे का कमजोर होना): सारी फसाद की जड़ हमारा अपना पेट है। जब हमारे खाना पचाने की ताकत (जठराग्नि) ठंडी पड़ जाती है, तो खाया हुआ भोजन पचने के बजाय पेट में ही सड़ने लगता है। यही अधपका और सड़ा हुआ खाना शरीर में 'आम' यानी एक तरह का जहरीला कचरा पैदा करता है।
  • हवा (वात) का बेकाबू होना: जब हम बहुत ज्यादा खट्टा, तीखा, तेज नमक वाला या रुखा-सूखा खाना खाते हैं और उल्टे-सीधे समय पर सोते-जागते हैं, तो शरीर में वात (हवा) बुरी तरह भड़क जाती है।
  • खून का गंदा होना: अब जो वात शरीर में भड़की हुई है, वह जाकर हमारे खून में मिल जाती है और उसे अंदर से गंदा कर देती है। यह खराब खून शरीर में ठीक से दौड़ नहीं पाता और जोड़ों की तरफ भागने लगता है।

आयुर्वेद में गाउट (वात-रक्त) का पक्का इलाज कैसे होता है?

आयुर्वेद में हमारा काम सिर्फ दर्द की गोली देकर आपको कुछ देर के लिए सुन्न कर देना नहीं है। हमारा असली मकसद अंदर की उस गड़बड़ी को एकदम जड़ से ठीक करना है, ताकि यूरिक एसिड अपने आप कंट्रोल में आ जाए और फिर कभी पलट कर न आए।

इसके लिए हम इन तरीकों पर काम करते हैं:

  • हाजमे को मजबूत बनाना: आयुर्वेद साफ कहता है कि आपका खराब हाजमा ही इस यूरिक एसिड की असली फैक्ट्री है। इसलिए हम आपके पेट की उस आग को दोबारा तेज करने पर काम करते हैं, ताकि आप जो भी खाएं, शरीर उसका कचरा बनाने के बजाय उससे असली ताकत बनाए।
  • किडनी को सहारा देना: हम इलाज में कुछ ऐसी जड़ी-बूटियां भी शामिल करते हैं जो आपकी किडनी की मशीनरी को तेज करती हैं। इससे किडनी यूरिक एसिड को अच्छे से छानकर पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर फेंकने लगती है।
  • पंचकर्म से शरीर की डीप-सफाई: अगर बीमारी बहुत पुरानी या बिगड़ी हुई है, तो हम 'विरेचन' और 'बस्ती' जैसे पंचकर्म का सहारा लेते हैं। खासकर दूध और खास औषधियों से दी जाने वाली 'क्षीर बस्ती' (एक तरह का एनीमा) तो इस बीमारी में किसी जादू या रामबाण की तरह काम करती है।
  • खान-पान और रूटीन सुधारना: आपके शरीर और बीमारी के हिसाब से एक खास डाइट चार्ट बनाते हैं। इसमें उन चीजों को खाने से पूरी तरह रोक दिया जाता है जो आपस में दुश्मन हैं (जैसे दूध के साथ खट्टा) और आपको सिर्फ वो सुपाच्य खाना बताया जाता है जो पेट को हल्का रखे और वात को शांत करे।

गाउट में काम आने वाली असरदार आयुर्वेदिक दवाइयां

आयुर्वेद का सीधा सा नियम है अगर गाउट को जड़ से हराना है, तो भड़की हुई 'हवा' (वात) को शांत करो और 'खून' की गंदगी को साफ करो। आयुर्वेद में हम हर मरीज की तासीर और शरीर देखकर ही ये खास दवाइयां तय करते हैं:

  • गुग्गुल: गाउट के मामले में यह आयुर्वेद की सबसे जानी-मानी दवा है। यह सीधे आपके खून की सफाई करती है, जोड़ों की सूजन को खींचती है और शरीर में जमे यूरिक एसिड को बाहर का रास्ता दिखाती है।
  • गिलोय: आयुर्वेद में इसे 'अमृत' का दर्जा दिया गया है। बढ़ा हुआ यूरिक एसिड कम करने और वात-रक्त के बिगड़े हुए बैलेंस को वापस पटरी पर लाने के लिए गिलोय से बेहतर शायद ही कोई दूसरी जड़ी-बूटी हो।
  • पुनर्नवा: इसका तो नाम ही है 'फिर से नया करने वाला'। यह सीधे आपकी किडनी की ताकत बढ़ाती है, जिससे किडनी यूरिक एसिड को अच्छे से छानकर पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल फेंकती है।

गाउट को अंदर से खत्म करने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी (पंचकर्म)

जब यूरिक एसिड शरीर में बहुत गहराई तक जम जाता है, तो सिर्फ गोलियां खाने से बात नहीं बनती। उस जमे हुए ज़हरीले तत्वों को बाहर खींचने के लिए शरीर की डीप-सफाई करनी पड़ती है। इसके लिए हम इन खास तरीकों का इस्तेमाल करते हैं:

  • रक्तमोक्षण: इसमें जिस जोड़ में सबसे ज्यादा दर्द या लालपन होता है, वहां से थोड़ा सा अशुद्ध खून बाहर निकाला जाता है (अक्सर लीच या जोंक थेरेपी के जरिए)। आप यकीन मानिए, इसे करते ही वो टीस, जलन और दर्द तुरंत कम हो जाती हैं।
  • बस्ती (औषधीय एनीमा): क्योंकि गाउट असल में वात (हवा) के बिगड़ने की बीमारी है, और वात को कंट्रोल करने का बस्ती से तगड़ा कोई तरीका नहीं है। खासकर दूध और खास जड़ी-बूटियों से दी जाने वाली 'क्षीर बस्ती' सूखे हुए जोड़ों में अंदर तक जाकर चिकनाई भरती है और दर्द को जड़ से काटती है।
  • अभ्यंग और स्वेदन: जब गाउट बहुत पुराना हो जाता है और जोड़ों में पत्थर जैसी जकड़न आ जाती है, तब 'पिंड तेल' जैसे वात खत्म करने वाले खास तेलों से मालिश करके शरीर को भाप दी जाती है। इससे जकड़े हुए जोड़ खुल जाते हैं और इंसान का चलना-फिरना फिर से आसान हो जाता है।

गाउट में डाइट और लाइफस्टाइल टिप्स

क्या खाएं:

  • हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन
  • लौकी, तोरई, खीरा जैसी सब्जियां (body को cool रखने के लिए)
  • चेरी, आंवला जैसे fruits (uric acid balance में मदद)
  • पर्याप्त पानी (दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीते रहें)
  • दालें सीमित मात्रा में और कम तेल वाला खाना

क्या न खाएं:

  • ज्यादा प्रोटीन और purine-rich फूड (जैसे red meat, organ meat)
  • शराब और बीयर (uric acid बढ़ाते हैं)
  • ज्यादा मीठा और sugary drinks
  • पैकेट बंद और processed food
  • बहुत ज्यादा चाय-कॉफी

कब डॉक्टर से सलाह लें?

अगर आपको अचानक जोड़ों में तेज दर्द, सूजन, लालिमा या जलन महसूस हो—खासकर पैर के अंगूठे में—तो इसे नजरअंदाज न करें। साथ ही, अगर गाउट के अटैक बार-बार हो रहे हैं, uric acid लगातार बढ़ा हुआ है या किडनी से जुड़ी समस्या (जैसे पथरी) के संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

गाउट सिर्फ एक सामान्य joint pain नहीं, बल्कि शरीर में बढ़े हुए uric acid का संकेत है। अगर इसे समय रहते समझकर सही डाइट, लाइफस्टाइल और उपचार अपनाया जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आयुर्वेद और मॉडर्न दोनों अप्रोच मिलकर न केवल दर्द को कम करने, बल्कि समस्या के जड़ कारण को सुधारने में मदद कर सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, हालांकि यह सबसे आम जगह है, लेकिन गाउट टखनों (ankles), घुटनों, कोहनियों, कलाई और उंगलियों के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।

हाँ, पर्याप्त पानी पीने से किडनी को खून से यूरिक एसिड को फिल्टर करने और उसे पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।

हाँ, अत्यधिक मानसिक या शारीरिक तनाव शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है, जिससे अचानक यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है और गाउट का अटैक शुरू हो सकता है।

हाँ, कम तापमान के कारण जोड़ों के आसपास रक्त का संचार धीमा हो जाता है, जिससे यूरिक एसिड के क्रिस्टल जल्दी जमा होने लगते हैं और दर्द बढ़ जाता है।

नहीं, लंबे समय तक भूखे रहने या क्रैश डाइट लेने से शरीर में कीटोन्स बढ़ सकते हैं, जो किडनी द्वारा यूरिक एसिड को बाहर निकालने की क्षमता को कम कर देते हैं, जिससे दर्द बढ़ सकता है।

अटैक के दौरान आराम करना चाहिए, लेकिन दर्द कम होने पर नियमित व्यायाम वजन घटाने और जोड़ों को लचीला बनाए रखने में मदद करता है, जो लंबे समय में गाउट के लिए फायदेमंद है।

कुछ शोधों के अनुसार, विटामिन-C यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।

रात में शरीर का तापमान थोड़ा कम हो जाता है और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो सकती है, जिससे यूरिक एसिड के क्रिस्टल आसानी से जोड़ों में जम जाते हैं।

हाँ, चेरी में एंथोसायनिन (Anthocyanins) नामक तत्व होते हैं जिनमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह यूरिक एसिड को कम करने और सूजन घटाने में सहायक हो सकती है।

हाँ, कुछ 'डियूरेटिक्स' (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं) शरीर से पानी बाहर निकालती हैं, जिससे खून में यूरिक एसिड गाढ़ा हो जाता है और गाउट का खतरा बढ़ जाता है।

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