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पेनकिलर से माइग्रेन ठीक नहीं होता — बल्कि यह एक नई बीमारी को जन्म देता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 01 May, 2026
  • category-iconUpdated on 06 Jun, 2026
  • category-iconMental Health
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आजकल की भागदौड़ और टेंशन वाली लाइफ में सिरदर्द होना कोई नई बात नहीं है। घंटों तक लैपटॉप पर आंखें गड़ाए रखना, रात-रात भर नींद पूरी न होना, कभी भी कुछ भी खा लेना और हर वक़्त दिमाग में कोई न कोई टेंशन पाले रखना ये सब ऐसी चीजें हैं जो रोज़ हमारे सिर में दर्द पैदा कर रही हैं। और जब ये दर्द बर्दाश्त से बाहर होता है, तो सबसे आसान तरीका क्या लगता है? एक पेनकिलर खाना।

शुरू में तो ये गोलियां बड़ा जादू करती हैं। खाते ही कुछ देर में दर्द छूमंतर हो जाता है। लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है, जब धीरे-धीरे हमारे शरीर को इन गोलियों की आदत पड़ जाती है। फिर वो दर्द बार-बार लौटकर आने लगता है, और ये वो स्टेज होती है जहाँ दिक्कतें अंदर ही अंदर गहरी हो रही होती हैं।

माइग्रेन क्या है और यह कैसे महसूस होता है?

माइग्रेन कोई ऐसा-वैसा सिरदर्द नहीं है कि बाम लगाया और ठीक हो गया। यह एक ऐसा भयंकर, धड़कता हुआ दर्द है जो ज़्यादातर सिर के सिर्फ एक तरफ उठता है। शुरुआत में हल्का लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इतना जानलेवा हो जाता है कि बिस्तर से उठना या कोई काम करना भारी पड़ जाता है।

और सबसे बुरी बात यह है कि माइग्रेन में सिर्फ दर्द नहीं होता, इसके साथ और भी बहुत सी परेशानियां जुड़ी होती हैं। अचानक से कमरे की लाइट बहुत चुभने लगती है, किसी की तेज़ आवाज़ भी बर्दाश्त नहीं होती। कई बार उल्टी आने लगती है और दिमाग एकदम सुन्न सा लगने लगता है। कुछ लोगों को तो दर्द शुरू होने से पहले ही आंखों के सामने तारे नज़र आने लगते हैं या अचानक धुंधला दिखने लगता है।

माइग्रेन के लक्षण: यह सिर्फ सिरदर्द नहीं है

माइग्रेन को सिर्फ सिरदर्द समझना बहुत बड़ी भूल होगी। यह असल में शरीर में होने वाली कई दिक्कतों का एक पूरा पैकेज है। अगर आप इसके लक्षणों को पहले ही पहचान लें, तो दर्द के भयंकर रूप लेने से पहले ही खुद को बचा सकते हैं।

  • नस फटने जैसा दर्द: यह कोई आम भारीपन नहीं है। इसमें सिर के आधे हिस्से में ऐसा दर्द होता है जैसे अंदर कोई हथौड़ा मार रहा हो या नस ज़ोर-ज़ोर से धड़क रही हो। थोड़ा सा भी चलने-फिरने या काम करने पर यह दर्द जानलेवा हो जाता है।
  • जी मिचलाना और उल्टी: दर्द के साथ-साथ ऐसा लगता है जैसे पेट में कुछ उलट-पुलट हो रहा है। भयंकर उबकाई आती है और कई बार उल्टियां भी हो जाती हैं।
  • रोशनी और शोर से नफरत: माइग्रेन के मरीज़ को इस दौरान थोड़ी सी भी तेज़ आवाज़ या आंखों पर पड़ने वाली रोशनी बर्दाश्त नहीं होती। उसे बस एक ही चीज़ चाहिए होती है एकदम शांत और घुप अंधेरा कमरा।
  • दर्द से पहले का अलार्म (ऑरा): कई लोगों को दर्द शुरू होने से ठीक पहले आंखों के सामने चमकते हुए तारे, टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें या धुंधलापन दिखने लगता है। इसे 'ऑरा' कहते हैं, जो बताता है कि भयंकर दर्द बस आने ही वाला है।

माइग्रेन को कौन सी चीज़ें भड़काती हैं?

माइग्रेन बिना वजह कभी हमला नहीं करता। हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ करते हैं, जो इसे न्योता देती हैं। अगर हम इन कारणों (ट्रिगर्स) को पकड़ लें, तो इस दर्द से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाया जा सकता है:

  • टेंशन और खराब लाइफस्टाइल: दिमाग में चौबीसों घंटे टेंशन पालना, बहुत ज़्यादा चिंता करना और रातों को ठीक से न सोना ये सब चीज़ें दिमाग की नसों को इतना थका देती हैं कि माइग्रेन का अटैक आना तय हो जाता है।
  • हॉर्मोन्स और मौसम की मार: महिलाओं में पीरियड्स के आस-पास हॉर्मोन्स के बिगड़ने से माइग्रेन बहुत आम है। इसके अलावा अचानक तेज़ धूप में निकलना या मौसम का बदलना भी इसे ट्रिगर करता है।
  • खाने-पीने की गलतियां: बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी पीना, चॉकलेट खाना, पैकेट वाली चीज़ें खाना या फिर घंटों तक पेट खाली (भूखा) रखना शरीर में गर्मी (पित्त) बढ़ाकर दर्द को भड़का देता है।
  • सेंसरी ओवरलोड: दिन भर मोबाइल या लैपटॉप की तेज़ रोशनी में आंखें गड़ाए रखना, किसी परफ्यूम या धुएं की तेज़ गंध और कानों को चुभने वाला शोर ये सब दिमाग की नसों को उत्तेजित कर देते हैं।

पेनकिलर तुरंत आराम क्यों देती है, लेकिन बीमारी को क्यों नहीं मिटाती?

जब आप गोली खाते हैं, तो यह शरीर के दर्द वाले सिग्नल को बस कुछ घंटों के लिए सुन्न कर देती है। आपको लगने लगता है कि चलो, दर्द चला गया और आप एकदम ठीक हो गए। लेकिन सच तो ये है कि बीमारी की असली जड़ वहीं की वहीं बैठी रहती है।

जैसे ही गोली का असर उतरता है, दर्द फिर से अपना सिर उठा लेता है। और इसी आराम पाने के चक्कर में हम बार-बार गोलियां खाने लगते हैं। बाहर से भले ही हम ठीक दिखें, लेकिन अंदर ही अंदर वो बीमारी और भी भयंकर होती जाती है।

रोज़-रोज़ पेनकिलर खाने से शरीर का क्या हाल होता है?

अगर आप हर छोटे-मोटे दर्द के लिए तुरंत गोली निगल लेते हैं, तो आपका शरीर अपनी खुद की बीमारियों से लड़ने की ताकत भूलने लगता है। धीरे-धीरे शरीर में ये बड़े बदलाव आने लगते हैं:

  • दर्द सहने की ताकत खत्म होना: रोज़ गोली खाने से शरीर इतना नाज़ुक हो जाता है कि उसका अपना नेचुरल हीलिंग सिस्टम सुस्त पड़ जाता है। फिर आगे चलकर ज़रा सा हल्का दर्द भी बर्दाश्त से बाहर लगने लगता है।
  • दवाइयों की लत: एक टाइम ऐसा आता है जब बिना पेनकिलर खाए शरीर को चैन ही नहीं पड़ता। इंसान पूरी तरह से इन गोलियों का गुलाम बन जाता है।
  • पेट का हाजमा बिगड़ना: ये तेज़ और गर्म दवाइयां पेट की अंदरूनी परत को छीलने का काम करती हैं। इससे गैस, सीने में भयंकर जलन और हमेशा पेट में भारीपन रहने की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
  • लिवर और किडनी पर बोझ: शरीर में जाने वाले हर बाहरी केमिकल को छानने का काम लिवर और किडनी करते हैं। रोज़-रोज़ इन तेज़ गोलियों का कचरा छानते-छानते शरीर के ये सबसे खास अंग अंदर से थकने और डैमेज होने लगते हैं।
  • बीमारी का बार-बार लौटना: पेनकिलर सिर्फ दर्द को कुछ देर के लिए सुलाती है, बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती। इसलिए जब तक अंदर की असली खराबी ठीक नहीं होती, दर्द बार-बार पलट कर आपकी ज़िंदगी में वापस आता ही रहेगा।

आयुर्वेद का नज़रिया: माइग्रेन क्यों होता है?

आयुर्वेद मानता है कि माइग्रेन कोई साधारण सिरदर्द नहीं होता है। असल में यह हमारे शरीर के भीतर वात और पित्त के असंतुलित हो जाने की वजह से होता है। जब शरीर में वात यानी हवा का प्रकोप बढ़ता है, तो सिर के अंदर एक अजीब सा खिंचाव होने लगता है। ऐसा लगता है मानो कोई नस अभी फट पड़ेगी।

वहीं दूसरी तरफ, जब पित्त यानी शरीर की गर्मी भड़कती है, तो सिर में बहुत तेज़ जलन और सुई चुभने जैसा दर्द होने लगता है। ऐसी हालत में इंसान को रोशनी और धूप से सख्त नफ़रत हो जाती है। ऊपर से हमारा गलत खानपान, सोने-जागने का बिगड़ा हुआ समय और हर समय दिमाग पर हावी रहने वाला तनाव इस आग में घी डालने का काम करता है। जब ये दोनों दोष एक साथ मिलकर गड़बड़ी करते हैं, तो माइग्रेन बार-बार लौटकर आता है। फिर इंसान की रातों की नींद उड़ जाती है। उसका चैन छिन जाता है और पूरी ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो जाती है।

आयुर्वेद में माइग्रेन का इलाज कैसे होता है?

आयुर्वेद के पास माइग्रेन का जो इलाज है, वह कोई दर्द दबाने वाली मामूली गोली नहीं है। इसका पूरा ज़ोर बीमारी को उसकी जड़ से उखाड़कर फेंकने पर होता है:

  • पेट को साफ़ रखना: जब हमारा पेट अंदर से साफ नहीं होता, तो अधपचा भोजन सड़कर एक ज़हरीला कचरा बना देता है। आयुर्वेद में इसे 'आम' कहते हैं। यही कचरा नसों के रास्तों को जाम कर देता है। इसलिए पेट साफ़ करना बहुत ज़रूरी है।
  • नस्य और शिरोधारा का सहारा: बरसों पुरानी इस तकलीफ को हमेशा के लिए मिटाने के लिए नाक में खास तेल डालने की 'नस्य' क्रिया की जाती है। साथ ही माथे पर तेल गिराने वाली 'शिरोधारा' जैसी लाजवाब थेरेपी का उपयोग होता है। ये सीधे दिमाग को आराम पहुँचाती हैं।
  • ज़िंदगी जीने का ढंग बदलना: सिर्फ दवाइयाँ खा लेने भर से यह बीमारी कभी पीछा नहीं छोड़ती। इसीलिए आपके शरीर की बनावट के हिसाब से सही खानपान, योग और भ्रामरी जैसे प्राणायाम को रोज़ की आदत में शामिल कराया जाता है। इससे माइग्रेन दोबारा पलटकर हमला नहीं कर पाता है।

माइग्रेन में संजीवनी का काम करने वाली जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद के खजाने में कुछ ऐसी बूटियाँ मौजूद हैं, जो दिमाग को एकदम ठंडा रखती हैं। ये हमारी नसों को भीतर से बेहद मज़बूत बना देती हैं:

  • ब्राह्मी: इसे आप दिमाग के लिए एक कुदरती एसी कह सकते हैं। यह मन की उलझन, टेंशन और घबराहट को पूरी तरह गायब कर देती है। इसके इस्तेमाल से माइग्रेन के दौरों में तेज़ी से कमी आने लगती है।
  • शंखपुष्पी: जिन लोगों का सिरदर्द बहुत ज़्यादा सोचने या रात-दिन दिमागी काम करने की वजह से बढ़ जाता है, उनके लिए यह औषधि किसी वरदान से कम नहीं है। यह नसों की सुस्ती दूर करती है और ध्यान लगाने में मदद करती है।
  • अविपत्तिकर चूर्ण: कई बार सिर की बीमारी की असली वजह पेट की भयंकर गैस, एसिडिटी और कब्ज होती है। यह चूर्ण पेट के अंदर जमा सारी फालतू गर्मी और तेज़ाब को एकदम शांत कर देता है। जब पेट हल्का होता है, तो सिर का दर्द खुद-ब-खुद भाग जाता है।
  • देसी गाय का घी: हल्के गुनगुने देसी घी की दो-दो बूंदें नाक में टपकाना इस बीमारी का एक बेहद आसान और चमत्कारी घरेलू उपाय माना जाता है। इसे नस्य कहते हैं। यह सीधे तौर पर दिमाग की सूखी नसों को अंदरूनी तरी और पूरा पोषण देता है।

माइग्रेन को खत्म करने में मदद करने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी

आयुर्वेद में बताई गई कुछ विशेष थेरेपी सिर्फ ऊपर-ऊपर से दर्द को धीमा नहीं करती हैं। बल्कि ये दिमाग को अंदर से पूरी तरह शांत करके बीमारी को खत्म करने का काम करती हैं:

  • नस्य क्रिया: माइग्रेन को ठीक करने के लिए इसे सबसे असरदार तरीका माना जाता है। नाक के रास्तों से जो औषधीय तेल अंदर डाला जाता है, वह सीधे हमारे मस्तिष्क के मुख्य केंद्रों तक पहुँच जाता है। यह सिर की रुकी हुई नसों को खोल देता है, जिससे दर्द में फौरन आराम मिलता है।
  • शिरोधारा थेरेपी: इस प्रक्रिया के दौरान माथे के बीचों-बीच लगातार एक पतली धार में औषधीय तेल या काढ़ा गिराया जाता है। यह तरीका दिमाग की थकी हुई नसों को इतनी गहरी शांति देता है कि सालों पुरानी चिंता, स्ट्रेस और अनिद्रा की समस्या चुकटियों में गायब हो जाती है।
  • शिरोलेप: इसमें कई ठंडी जड़ी-बूटियों को पीसकर एक लेप तैयार किया जाता है और उसे सीधे सिर पर लगाया जाता है। यह लेप सिर के भीतर की भयंकर तपन और पित्त को अपने अंदर सोख लेता है। इससे सिर में उठने वाली तेज़ टीस और धड़कन वाला दर्द तुरंत शांत हो जाता है।
  • विरेचन (भीतर से पूरी सफाई): चूंकि माइग्रेन का सीधा कनेक्शन हमारे खराब पेट और बढ़े हुए तेज़ाब से होता है, इसलिए इस विधि के द्वारा शरीर के सारे टॉक्सिन्स को दस्त के रास्ते बाहर निकाल फेंका जाता है। जैसे ही पेट अंदर से पूरी तरह साफ़ हो जाता है, माइग्रेन के भयानक दौरों का आना हमेशा के लिए थम जाता है।

माइग्रेन के लिए आहार: क्या खाएं/क्या न खाएं 

श्रेणी क्या खाएं (शामिल करें) क्या न खाएं (परहेज करें)
अनाज और दालें पुराने चावल, मूंग दाल, दलिया, ओट्स और रागी। मैदा, सफेद ब्रेड, नूडल्स और भारी उड़द की दाल।
सब्जियां लौकी, तोरई, कद्दू, परवल और मौसमी हरी सब्जियां। कच्ची सब्जियां (ज्यादा सलाद), फूलगोभी और भारी तली सब्जियां।
डेयरी और वसा शुद्ध A2 गाय का घी, गुनगुना दूध (हल्दी के साथ) और ताजा छाछ। ठंडा दूध, पनीर (रात में), और रिफाइंड तेल।
मसाले अदरक, हल्दी, जीरा, धनिया, सोंठ और अजवाइन। बहुत ज्यादा लाल मिर्च, गरम मसाला और अत्यधिक नमक।
पेय पदार्थ गुनगुना पानी, हर्बल टी और ताजे फलों का जूस (बिना चीनी)। कोल्ड ड्रिंक्स, ज्यादा चाय/कॉफी और शराब।
मीठा और स्नैक्स गुड़, खजूर, शहद और भुने हुए मखाने। सफेद चीनी, पेस्ट्री, चॉकलेट और डिब्बाबंद स्नैक्स।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मैं जब 8वीं कक्षा में थी, तब मुझे अक्सर तेज सिर दर्द होता था और आँखों में बहुत तेज चुभन महसूस होती थी। मुझे समझ नहीं आता था कि यह आँखों की समस्या है या सिरदर्द की वजह। डॉक्टर से सलाह लेने पर पता चला कि यह माइग्रेन के कारण हो रहा है।

मैंने दवाइयाँ लीं, और जब तक दवा चलती रही तब तक आराम रहता था, लेकिन दवा छोड़ते ही दर्द फिर से शुरू हो जाता था। यह समस्या बार-बार होने लगी, जिससे मैं बहुत परेशान रहने लगी।

फिर मेरी एक सहेली ने मुझे जीवा आयुर्वेद के बारे में बताया। वहाँ मैंने उपचार शुरू कराया और धीरे-धीरे मेरी समस्या में सुधार आने लगा। अब मुझे पहले की तरह बार-बार सिरदर्द और आँखों में चुभन की समस्या नहीं होती।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

माइग्रेन को अक्सर सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है:

  • बार-बार और तेज सिरदर्द: यदि सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो, बार-बार हो रहा हो और दवाओं से भी आराम न मिल रहा हो।
  • मतली और उल्टी के साथ दर्द: अगर सिरदर्द के साथ लगातार उल्टी, चक्कर या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो।
  • रोशनी और आवाज से अत्यधिक परेशानी: यदि हल्की रोशनी या सामान्य आवाज भी असहनीय लगने लगे और दर्द बढ़ जाए।
  • लंबे समय तक चलने वाला दर्द: जब सिरदर्द कई घंटों से लेकर दिनों तक लगातार बना रहे और सामान्य कामकाज प्रभावित हो।
  • आंखों के सामने धुंधलापन या चमक: यदि दर्द से पहले या दौरान दृष्टि में बदलाव, चमकती रोशनी या धुंधलापन दिखे।

निष्कर्ष

माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि शरीर के भीतर होने वाले वात और पित्त असंतुलन तथा तंत्रिका तंत्र की संवेदनशीलता का संकेत है। आधुनिक चिकित्सा इसमें दर्द को तुरंत नियंत्रित करने पर काम करती है, जबकि आयुर्वेद शरीर के अंदरूनी असंतुलन को संतुलित करने पर ध्यान देता है। असली समाधान सिर्फ दर्द को दबाना नहीं, बल्कि उसकी जड़ को समझकर जीवनशैली, आहार और मानसिक तनाव को संतुलित करना है। जब शरीर का आंतरिक संतुलन ठीक होता है, तो माइग्रेन की तीव्रता और आवृत्ति दोनों कम हो जाती हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

माइग्रेन पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकता है, लेकिन महिलाओं में यह अधिक देखा जाता है। इसका एक कारण हार्मोनल बदलाव भी माना जाता है, जो मासिक चक्र के दौरान प्रभावित होता है। हालांकि जीवनशैली, तनाव और नींद की कमी जैसे कारण दोनों में समान रूप से प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि माइग्रेन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।

हाँ, कई लोगों में मौसम का बदलाव माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। खासकर तेज धूप, गर्मी, ठंडी हवा या आर्द्रता में बदलाव शरीर के संतुलन को प्रभावित करते हैं। इससे सिरदर्द की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खानपान में बदलाव करना जरूरी होता है।

लंबे समय तक खाली पेट रहने से शरीर में ऊर्जा का स्तर गिरता है, जिससे सिरदर्द शुरू हो सकता है। यह स्थिति माइग्रेन को भी ट्रिगर कर सकती है। नियमित अंतराल पर हल्का और संतुलित भोजन करना इस जोखिम को कम करने में मदद करता है।

लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन देखने से आंखों और दिमाग पर दबाव बढ़ता है। इससे सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। लगातार स्क्रीन उपयोग करने से पहले बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी होता है।

हल्का व्यायाम और योग माइग्रेन में लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा या तेज व्यायाम कुछ लोगों में दर्द को बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना बेहतर होता है।

 माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना हर व्यक्ति में संभव नहीं होता, लेकिन सही जीवनशैली, आहार और देखभाल से इसकी तीव्रता और आवृत्ति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमितता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हाँ, नींद की कमी या अनियमित नींद माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है। शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त और समय पर नींद लेना जरूरी है। अच्छी नींद माइग्रेन के हमलों को कम करने में मदद करती है।

कैफीन का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। कुछ लोगों में यह दर्द को कम कर सकता है, जबकि अधिक मात्रा में लेने पर यह माइग्रेन को ट्रिगर भी कर सकता है। इसलिए इसकी मात्रा को संतुलित रखना जरूरी होता है।

लंबी यात्रा, तेज आवाज, धूप और थकान माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं। खासकर अनियमित दिनचर्या और भोजन के कारण समस्या बढ़ सकती है। यात्रा के दौरान आराम और सही समय पर भोजन का ध्यान रखना जरूरी है।

 तनाव माइग्रेन का एक बड़ा कारण माना जाता है। जब मानसिक दबाव कम होता है, तो सिरदर्द की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में कमी आ सकती है। ध्यान, प्राणायाम और शांत दिनचर्या अपनाने से इसमें मदद मिलती है।

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