आपने शायद ध्यान दिया होगा कि जब आप सुबह ऑनलाइन मीटिंग अटेंड करते हैं, अपना काम करते हैं एक मीटिंग से दूसरी मीटिंग, प्रेजेंटेशन्स, ईमेल का जवाब देना या अपने कलीग से बातचीत करना आदि। ये सब काम खत्म करके शाम तक आपको आपकी गर्दन भारी लगने लगती है, कमर और कंधे अकड़ने लगते हैं। तब आपको महसूस होता होगा कि बिना किसी फिजिकल एक्टिविटी के भी आपको थकान महसूस हो रही होती है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपको एहसास भी नहीं होता कि आप काम के दौरान एक ही position में बैठे होते हैं।
यही कारण है कि आप लंबे समय तक बिना किसी फिजिकल एक्टिविटी के थकान और स्टिफनेस महसूस करते हैं।
ऑनलाइन मीटिंग के दौरान शरीर में स्टिफनेस क्यों महसूस होती हैं?
ऑनलाइन मीटिंग के दौरान हम एक ही position में लंबे समय तक बैठे रहते है जिसका असर कुछ मसल्स जैसे कंधे, गर्दन, कमर और हिप्स आदि के आसपास के मसल्स एक ही पोजीशन में लंबे समय तक रहने से बहुत प्रभावित होते हैं।
जब हम काम करते हैं तो ध्यान स्क्रीन पर रहने की वजह से हमारा ध्यान हमारे पोस्चर पर जाता ही नहीं है और हम काफी समय तक एक ही position में रहते हैं, जिससे शाम तक हमें थकान और स्टिफनेस का एहसास होता है।
इसके मुख्य कारण हैं-
- लंबे समय तक बैठे रहना: ऑनलाइन मीटिंग के दौरान हम घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं। इससे मांसपेशियों में रक्त संचार कम हो जाता है और शरीर में दर्द होने लगता है।
- खराब पोस्चर: सोफा, बिस्तर या बिना बैक-सपोर्ट वाली कुर्सी पर बैठने से पीठ, गर्दन और कंधों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है।
- सीमित गतिविधि: सामान्य आमने-सामने की मीटिंग में लोग थोड़े बहुत हिलते-डुलते हैं, लेकिन कैमरे के सामने स्क्रीन फ्रेम में बने रहने के लिए लोग बिल्कुल फ्रीज हो जाते हैं।
- लगातार देखना : कैमरा और स्क्रीन पर लगातार देखना नज़रें टिके रहने से आँखों पर ज़ोर पड़ता है, जिससे गर्दन और सिर की मांसपेशियाँ स्टिफ हो जाती हैं।
इसी वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपने पूरे दिन कुछ किया ही नहीं, फिर भी शरीर थका हुआ और स्टिफ महसूस होता है।
दिन के अंत में स्टिफनेस कम करने के लिए क्या करें?
स्टिफनेस के लिए काम को दोष देने की बजाय अगर अपने रूटीन में थोड़ा सुधार कर लिया जाये तो स्टिफनेस कुछ हद तक कम हो सकती हैं।
लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहने से शरीर में थकान और स्टिफनेस हो सकती है पर अच्छी बात यह है की इसको नियंत्रित किया जा सकता है।
उसके कुछ उपाय हैं:
- हलकी स्ट्रेचिंग: काम करने के बाद 5 से 10 minute के लिए हलकी स्ट्रेचिंग करे इससे जकड़ी हुई मांसपेशिया खुलती है।
- गर्म पानी से स्नान: दिन के अंत में गरम पानी आदि से नहाने से रक्त संचार बेहतर होता है और तनाव कम होता है।
- पर्याप्त पानी पिएं: डिहाइड्रेशन की वजह से भी मांसपेशियां जकड़ती हैं, इसलिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए।
- मालिश: प्रभावित हिस्से पर मालिश करने से मांसपेशियों को तुरंत राहत मिलती है।
- ब्रेक ले: काम के बीच में ब्रेक लेना चाहिए, चलना-फिरना चाहिए एक ही position में देर तक नहीं बैठना चाहिए।
इन उपायों से आपकी स्टिफनेस में राहत मिल सकती है। काम करते वक़्त एक ही position में देर तक नहीं बैठे रहना चाहिए थोड़ी हल चल करते रेहनी चाहिए जिससे मांसपेशिया जकड़े नहीं और वो स्टिफनेस का कारण न बने।
क्या हर मीटिंग के बाद exercise करना ज़रूरी है ?
नहीं हर मीटिंग के बाद exercise करना ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी है अपनी पोजीशन और पोस्चर ठीक करना एक ही जगह पर बैठे रहने से शरीर में थकान और स्टिफनेस महसूस होती है। इसलिए इस स्टिफनेस को दूर करने के लिए कोशिश करे की पूरे दिन एक ही जगह पर न बैठे रहे अपनी पोजीशन बदलते रहे और बीच-बीच में ब्रेक लेकर चला फिरा करे। जैसे:
अपना पोस्चर बदले
पानी पीने के लिए उठे
अपने कंधे और गर्दन में को धीरे-धीरे घुमाये
हो सके तो ऑडियो कॉल के दौरान थोड़ा चले फिरे
ऐसा करने से आपका शरीर एक ही जगह पर स्थित नहीं रहेगा और शरीर में मूवमेंट बनी रहेगी।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार दिन भर ऑनलाइन मीटिंग और zero movement के वजह से दिन के अंत में शरीर में स्टिफनेस बढ़ने का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन और कफ दोष का जमा होना है।
आयुर्वेद शरीर को नियमित रखने के लिए गति और आराम पर विशेष ध्यान देता है।
स्टिफनेस का मुख्य कारण है-
वात दोष का असंतुलित होना- वात दोष गति से जुड़ा हुआ है, जब हम बिना हिले-डुले एक ही position में रहते है तो इससे हमारे शरीर की गति रुक जाती है, जिससे शरीर का संचालन रुक जाता है और शरीर में रूखापन और शीतलता बढ़ जाती है जिससे वात दोष असंतुलित हो जाता है और इसी वजह से हमारे जोड़ो और मांसपेशियों में स्टिफनेस होती है।
कफ और आम का जमा होना- zero movement की वजह से शरीर की अग्नि मंद हो जाती है , जब यह अग्नि मंद होने लगती है तब शरीर में कफ और आम बढ़ने लगता है जो मिलके शरीर को पोषण देने वाले स्त्रोत्र को बंद कर देता है जिससे शरीर को पोषण नहीं मिलता और शरीर में स्टिफनेस महसूस होती है।
आप अपने डेली रूटीन में कुछ छोटे बदलाव करके स्टिफनेस से बच सकते है जैसे हल्की मूवमेंट, गर्म पानी का सेवन यह पाचन अग्नि को ठीक करेगा और आम (toxin) को पिघलाकर, वात को शांत करता है, और मालिश आदि से भी स्टिफनेस को ठीक किया जा सकता है।
निष्कर्ष
ऑनलाइन मीटिंग ने काम को आसान और flexible बना दिया है, पर हमारी शारीरिक गतिविधियों पर भी इसकी वजह से प्रभाव पड़ा है , इन ऑनलाइन मीटिंग के वजह से हमे घंटो तक एक ही पोजीशन और पोस्चर में बैठा रहना पड़ता है जो शाम तक शरीर में स्टिफनेस और थकान का कारण बन सकता है।
पर इसका solution कोई लंबा workout नहीं है; केवल छोटे-छोटे बदलाव आपके शरीर को स्टिफनेस से राहत दे सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भी स्टिफनेस वात दोष के बढ़ने और पित दोष के जमा होने के वजह से होती है, और इनका सीधा संबंध शरीर की मूवमेंट से है, इसलिए लगातार एक ही जगह पर बैठने से बचे, बीच-बीच में अपनी position चेंज करे और चले फिरे, ब्रेक ले, स्ट्रेचिंग करे, मालिश करे और पानी पर्याप्त पिये। ऐसा करने से आपको दिन के अंत तक स्टिफनेस महसूस नहीं होगी।
References
Stiff-Person Syndrome | National Institute of Neurological Disorders and Stroke































































