Diseases Search
Close Button
 
 

आयुर्वेद में Ovarian Cyst को कैसे समझा जाता है और इसका जड़ समाधान क्या है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 19 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5103

आज की इस भागदौड़ और टेंशन भरी जिंदगी में औरतों के पेट (अंडाशय) में गांठें बनना सिर्फ कोई आम बीमारी नहीं रह गई है। यह इस बात का सबूत है कि शरीर की अंदरूनी मशीनरी बुरी तरह हिल चुकी है। हमारे आयुर्वेद के पुराने वैद्यों के हिसाब से, ये गांठें सिर्फ पानी के बुलबुले नहीं हैं। जब शरीर में कफ और गैस (वात) बुरी तरह बिगड़ जाते हैं, तो ये शरीर के अंदर जमे सड़े हुए कचरे को औरतों के खास रास्तों में फंसा देते हैं, और वहीं से ये गांठें पनपने लगती हैं। आजकल के अंग्रेजी डॉक्टर इसे अक्सर ऑपरेशन या कुछ दिन की गोलियों से टाल देते हैं। लेकिन भई, आयुर्वेद का तरीका अलग है। आयुर्वेद शरीर की बुझी हुई आग को जलाकर और अंदर के सारे जहरीले तत्वों को बाहर निकालकर एक ऐसा पक्का इलाज देता है, जो बीमारी को ऊपर-ऊपर से नहीं बल्कि एकदम जड़ से उखाड़ फेंकता है।

अंडाशय की गांठ (ओवेरियन सिस्ट) क्या है?

हर औरत की बच्चेदानी के दोनों तरफ दो छोटे-छोटे हिस्से होते हैं, जिन्हें अंडाशय कहते हैं। इनका काम शरीर के लिए अंडे बनाना और जरूरी रस (हार्मोन) छोड़ना है। लेकिन कई बार जब अंडा सही से बाहर नहीं आ पाता या उसमें पानी भर जाता है, तो वो एक गुब्बारे जैसी गांठ बन जाता है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर गांठें खतरनाक नहीं होतीं और कुछ महीनों में खुद ही फूटकर खत्म हो जाती हैं।

कैसे पहचानें कि पेट में कोई गांठ पल रही है?

शुरुआत में ये गांठें बहुत मामूली इशारे देती हैं, जिन्हें औरतें अक्सर टाल देती हैं। लेकिन जब इनका साइज बढ़ता है, तो शरीर चीख-चीख कर आपको अलर्ट करने की कोशिश करता है:

  • पेडू में दर्द: पेट के निचले हिस्से में या कमर में एक तरफ लगातार दर्द रहना या अचानक सुई चुभने जैसा दर्द उठना। पीरियड्स के आस-पास यह दर्द जानलेवा हो जाता है।
  • पेट का हमेशा फूलना: ऐसा लगना जैसे पेट में गैस का गुब्बारा भर गया हो और कपड़े एकदम तंग होने लगें। यह असल में गांठ का आस-पास की आंतों पर पड़ने वाला भारी दबाव है।
  • पीरियड्स का पूरा सिस्टम बिगड़ना: डेट का महीनों तक न आना या फिर आते ही खून और दर्द के साथ आना।
  • बार-बार पेशाब भागना: जब गांठ बड़ी हो जाती है, तो वो पेशाब की थैली को दबाने लगती है। इससे औरत को लगता है कि उसे हर वक्त पेशाब आ रहा है या थैली पूरी खाली नहीं हुई है।
  • संबंध बनाते वक्त दर्द: पति के साथ संबंध बनाते समय अगर पेट के निचले हिस्से में भयंकर दर्द हो रहा है, तो समझ लें अंदर किसी गांठ ने पूरी जगह घेर रखी है।
  • कब्ज और भारीपन: गांठ के दबाव से आंतों का काम भी रुक जाता है, जिससे भयंकर कब्ज रहने लगती है और पेट हमेशा भरा-भरा लगता है।

आखिर ये गांठें बनती क्यों हैं?

ये गांठें कोई रातों-रात नहीं बनतीं, बल्कि हमारी अपनी गलतियों और शरीर के बिगड़े हुए सिस्टम का नतीजा हैं:

  • हार्मोन्स का हिलना: जब शरीर के जरूरी रस ऊपर-नीचे हो जाते हैं, तो अंडे का सिस्टम बिगड़ जाता है। कई बार अंडे बनाने वाली अंग्रेजी दवाइयों की गर्मी से भी ये गांठें बन जाती हैं।
  • चॉकलेट सिस्ट की बीमारी: जब बच्चेदानी का मांस अपनी जगह छोड़कर बाहर अंडाशय पर चिपकने लगता है, तो वहां खून की गांठें बन जाती हैं जो बहुत खतरनाक दर्द देती हैं।
  • इन्फेक्शन: औरतों के नीचे के रास्ते में हुआ कोई पुराना और भारी इन्फेक्शन जब ऊपर पहुंचता है, तो वो अंदर मवाद वाली गांठें बना देता है।
  • प्रेग्नेंसी का असर: कई बार बच्चा ठहरने की शुरुआत में जो कुदरती गांठ बनती है, वो बाद में खत्म नहीं होती और वहीं टिकी रहकर दिक्कत देने लगती है।
  • खराब पाचन: आयुर्वेद साफ कहता है कि रोज-रोज भारी और बाहर का खाना खाने से पेट में एक जहरीला कचरा बनता है। यही कचरा औरतों की नसों को ब्लॉक कर देता है और वहां गांठें पैदा कर देता है।
  • हर वक्त की टेंशन: बहुत ज्यादा दिमागी टेंशन से शरीर का गैस (वात) और हार्मोन का सिस्टम बुरी तरह बौखला जाता है, जो बीमारियों को खुला न्योता है।

कैसे पता चलता है कि अंदर गांठ है?

डॉक्टर अंदर की इस बीमारी को पकड़ने के लिए कुछ बहुत ही आम जांच करवाते हैं:

  • पेट का अल्ट्रासाउंड: यह सबसे पक्का तरीका है। मशीन से पेट के अंदर की फोटो ली जाती है, जिससे पता चल जाता है कि गांठ कितनी बड़ी है, कहां है और उसमें पानी है या मांस।
  • खून की जांच: अगर गांठ शक के घेरे में हो, तो डॉक्टर कैंसर का खतरा चेक करने के लिए एक खास खून का टेस्ट करवाते हैं।
  • हार्मोन्स की जांच: शरीर के रसों (हार्मोन्स) को चेक किया जाता है ताकि पता चले कि यह गांठ हार्मोन्स के हिलने से तो नहीं बनी है।
  • दूरबीन वाली जांच: अगर मामला पेचीदा हो, तो पेट में एक छोटा सा छेद करके दूरबीन डाली जाती है। डॉक्टर अंदर से सब कुछ साफ देखकर कई बार गांठ को वहीं के वहीं निकाल भी देते हैं।

गांठ को हल्के में लेने के खतरनाक नुकसान

भले ही ज्यादातर गांठें खुद ठीक हो जाती हैं, लेकिन अगर ये बड़ी हो जाएं और आप इन्हें अनदेखा करते रहें, तो ये जानलेवा भी हो सकती हैं:

  • अंडाशय का पलट जाना: अगर गांठ बहुत बड़ी और भारी हो जाए, तो वो अंडाशय को ही उसकी जगह से मरोड़ देती है। इससे खून की नसें दब जाती हैं और ऐसा दर्द उठता है कि इंसान तड़प जाता है।
  • गांठ का अंदर ही फट जाना: अगर पानी से भरी कोई बड़ी गांठ पेट के अंदर ही फट जाए, तो वहां भयंकर खून बहने लगता है और जान का खतरा बन जाता है।
  • मां बनने में अड़चन: वैसे तो आम गांठों से बच्चा ठहरने में दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर चॉकलेट सिस्ट या पीसीओडी वाली गांठें हों, तो वो अंडे को बनने ही नहीं देतीं।
  • कैंसर का डर: हालांकि 100 में से 90 गांठें कैंसर वाली नहीं होतीं, लेकिन बुढ़ापे में (पीरियड्स बंद होने के बाद) होने वाली गांठों में कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा होता है।
  • आंतों और पेशाब की थैली दबना: बड़ी गांठ पेशाब की थैली और आंतों का दम घोंट देती है, जिससे औरत को कब्ज और पेशाब से जुड़ी भारी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

आयुर्वेद क्या कहता है? ओवेरियन सिस्ट की असली जड़ क्या है?

आयुर्वेद में ओवेरियन सिस्ट को सिर्फ पानी का कोई बुलबुला या गांठ नहीं माना जाता। हमारे पुराने वैद्यों के हिसाब से, इसे 'ग्रंथि' (गांठ) की बीमारी कहा गया है। जब शरीर में कफ और गैस (वात) बुरी तरह बिगड़ जाते हैं, तो ये खून और मांस के साथ मिलकर अंडाशय में एक गोल गांठ बना लेते हैं।

इसकी सबसे बड़ी जड़ है हमारा सुस्त पाचन (मंदाग्नि)। जब पेट की भट्टी ठंडी पड़ जाती है, तो खाना पचता नहीं, बल्कि पेट में सड़कर एक जहरीला आम बना देता है। यही जब खून के साथ बहकर औरतों के नीचे के रास्तों में जाकर फंसता है, तो वहां पूरी तरह ब्लॉकेज हो जाती है। इसी रुकावट की वजह से हार्मोन्स का बहना रुक जाता है और गांठें बन जाती हैं। आयुर्वेद साफ कहता है कि इसका पक्का इलाज सिर्फ चीरा लगाना या सर्जरी नहीं है, बल्कि अंदर की आग को तेज करके और खास पंचकर्म से इन गांठों को सुखाकर जड़ से खत्म करना है।

ओवेरियन सिस्ट को जड़ से मिटाने का आयुर्वेदिक तरीका

आयुर्वेद में हम सिर्फ ऊपर-ऊपर से गांठ को गलाने का काम नहीं करते। हमारा असली मकसद आपके शरीर की मशीनरी को अंदर से ठीक करना है ताकि ये गांठें दोबारा बनें ही नहीं। हम इसे इन आसान तरीकों से करते हैं:

  • आपकी तासीर समझना: हर औरत का शरीर अलग होता है। इसलिए सबसे पहले हम आपकी तासीर (वात, पित्त या कफ) समझते हैं। उसी के हिसाब से आपके लिए खास इलाज तय किया जाता है।
  • पाचन सुधारना और जहर निकालना: इलाज की पहली सीढ़ी है आपके पेट की आग को दोबारा तेज करना। जब पाचन सुधरेगा, तो शरीर अपने अंदर जमा सारे सड़े हुए कचरे को बाहर फेंक देगा, जिससे गांठ का साइज अपने आप सिकुड़ने लगेगा।
  • बंद रास्तों को खोलना: खास जड़ी-बूटियों से बच्चेदानी और अंडाशय के बंद पड़े रास्तों को खोला जाता है। इससे हार्मोन्स वापस अपने सही रास्ते पर आ जाते हैं और अंडे बनने का रूटीन एकदम सेट हो जाता है।
  • दिमागी शांति और योग: हर वक्त की टेंशन हार्मोन्स का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसलिए दवाइयों के साथ-साथ आपको सही योग (जैसे तितली आसन) और शांत रहने के तरीके बताए जाते हैं ताकि शरीर का बैलेंस कभी न बिगड़े।

ओवेरियन सिस्ट (गांठ) को सुखाने वाली पक्की देसी दवाइयां

आयुर्वेद में इसका इलाज सिर्फ दर्द रोकना नहीं है, बल्कि कुछ ऐसी दमदार दवाइयां हैं जो इन गांठों को अंदर ही अंदर काट देती हैं:

  • गुग्गुलु: गांठों को सुखाने और गलाने के लिए यह आयुर्वेद की सबसे मशहूर दवा है। यह अंडाशय की गांठों को छोटा कर देती है और शरीर की अंदर से पूरी सफाई करती है।
  • पुनर्नवा: जैसा इसका नाम है, यह शरीर के अंगों में 'नई जान' फूंक देती है। यह शरीर की सूजन और भारीपन को खींच लेती है, जिससे गांठ की वजह से होने वाला पेट का भारीपन तुरंत कम हो जाता है।
  • अशोक और लोध्र: ये दोनों जड़ी-बूटियाँ बच्चेदानी और अंडाशय की नसों को फौलादी मजबूती देती हैं। अगर गांठ की वजह से आपके पीरियड्स बिगड़ गए हैं या बहुत ज्यादा खून आ रहा है, तो ये उसे एकदम रोक देती हैं।

सिस्ट को जड़ से खत्म करने वाली असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

खाने वाली दवाइयों के अलावा, आयुर्वेद में कुछ खास बाहरी तरीके भी अपनाए जाते हैं जो बहुत गहराई में जाकर बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकते हैं:

  • उत्तर बस्ती: ओवेरियन सिस्ट के लिए यह सबसे अचूक तरीका है। इसमें खास जड़ी-बूटियों वाला तेल या काढ़ा सीधे नीचे के रास्ते से अंदर भेजा जाता है। यह गांठ को अंदर ही अंदर सुखा देता है और सारे ब्लॉक पड़े रास्तों को खोल देता है।
  • बस्ती: जड़ी-बूटियों वाले एनीमा के जरिए दी जाने वाली यह थेरेपी भड़की हुई गैस (वात) को शांत करती है। गांठ की वजह से पेडू में होने वाले दर्द और रुके हुए पीरियड्स में यह तुरंत आराम देती है।
  • उद्वर्तन: इसमें देसी जड़ी-बूटियों के सूखे पाउडर से शरीर पर रगड़कर मालिश की जाती है। यह चर्बी और कफ को काटती है, जिससे कफ वाली गांठें धीरे-धीरे अपने आप पिघलने लगती हैं।

ओवेरियन सिस्ट में क्या खाएं और क्या न खाएं?

1. क्या खाएं? 

  • ताजी और हरी सब्जियां: लौकी, तोरई, करेला, कद्दू और टिंडा जैसी हल्की और सुपाच्य सब्जियां खाएं। ये शरीर में 'कफ' को नहीं बढ़ातीं और पाचन को दुरुस्त रखती हैं।
  • पुराने अनाज का सेवन: पुराना चावल, जौ (Barley), और रागी जैसे अनाज आहार में शामिल करें। जौ विशेष रूप से सिस्ट को सुखाने और हार्मोन्स को संतुलित करने में सहायक है।
  • हल्की दालें: मूंग की दाल और मसूर की दाल का सेवन करें। इनमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है और ये पचाने में बहुत हल्की होती हैं।
  • मसाले जो औषधि हैं: हल्दी, अदरक, मेथी दाना, दालचीनी और जीरा का प्रयोग बढ़ा दें। ये मसाले 'आम' (Toxins) को जलाते हैं और शरीर की सूजन (Inflammation) को कम करते हैं।
  • गुनगुना पानी: दिनभर हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह शरीर के स्रोतों (Channels) को साफ रखता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है।

2. क्या न खाएं?

  • दूध और डेयरी उत्पाद: अत्यधिक दूध, पनीर, और भारी क्रीम से बचें। ये शरीर में 'कफ' और 'मेद' (Fat) बढ़ाते हैं, जिससे सिस्ट का आकार बढ़ सकता है।
  • मैदा और सफेद चीनी: बिस्किट, ब्रेड, पास्ता और मिठाई जैसी चीजों से पूरी तरह परहेज करें। ये इंसुलिन का स्तर बिगाड़ते हैं, जो ओवेरियन सिस्ट का एक मुख्य कारण है।
  • तली-भुनी और गरिष्ठ चीजें: समोसे, पकोड़े या बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना 'आम' पैदा करता है और हार्मोनल चक्र को बाधित करता है।
  • पैकेट बंद (Processed) फूड: चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रिजर्वेटिव वाले खाद्य पदार्थ शरीर में टॉक्सिन्स जमा करते हैं।
  • भारी दालें और सब्जियां: उड़द की दाल, राजमा, छोले और अरबी जैसी वात बढ़ाने वाली चीजों का सेवन कम से कम करें।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए? 

ओवेरियन सिस्ट को हल्के में लेना सही नहीं है। कुछ लक्षण संकेत देते हैं कि अब विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है:

  • लगातार पेट या पेल्विक दर्द: दर्द बार-बार हो या बढ़ता जाए।
  • अनियमित पीरियड्स: बहुत ज्यादा, बहुत कम या लंबे समय तक पीरियड्स न आना।
  • अचानक तेज दर्द: सिस्ट के फटने या मरोड़ (torsion) का संकेत हो सकता है।
  • पेट में सूजन या भारीपन: लगातार ब्लोटिंग या असहजता महसूस होना।
  • बार-बार पेशाब आना: सिस्ट के दबाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
  • मतली या उल्टी: खासकर दर्द के साथ हो तो इसे नजरअंदाज न करें।
  • वजन तेजी से बढ़ना या हार्मोनल बदलाव: जैसे मुंहासे, बाल झड़ना आदि।
  • लंबे समय तक सुधार न होना: इलाज के बावजूद लक्षण बने रहें।

निष्कर्ष

ओवेरियन सिस्ट केवल एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत है। जब अग्नि कमजोर होती है, कफ और वात बढ़ते हैं और ‘आम’ जमा होता है, तो सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए केवल सिस्ट को हटाने के बजाय उसके मूल कारणों को समझकर उपचार करना अधिक प्रभावी होता है। सही आहार, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक देखभाल से इस समस्या को जड़ से नियंत्रित किया जा सकता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, कई छोटे सिस्ट समय के साथ बिना इलाज के खत्म हो जाते हैं। लेकिन यदि सिस्ट बार-बार बनता है, तो यह अंदरूनी असंतुलन का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ज्यादातर सिस्ट सामान्य और गैर-खतरनाक होते हैं। फिर भी, कुछ मामलों में जटिलताएं हो सकती हैं, इसलिए नियमित जांच और निगरानी जरूरी है।

आयुर्वेद सिस्ट के मूल कारणों पर काम करता है, जैसे दोष असंतुलन और कमजोर पाचन। इससे धीरे-धीरे सिस्ट को नियंत्रित करने और दोबारा बनने से रोकने में मदद मिलती है।

 हाँ, सही और संतुलित आहार हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह सिस्ट के बढ़ने की गति को कम कर सकता है और रिकवरी को बेहतर बनाता है।

हल्का व्यायाम जैसे योग, वॉक या स्ट्रेचिंग फायदेमंद होता है। लेकिन ज्यादा भारी या जोरदार एक्सरसाइज से बचना चाहिए, खासकर दर्द होने पर।

 हाँ, तनाव हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे सिस्ट की समस्या बढ़ सकती है। मानसिक शांति बनाए रखना इसलिए बेहद जरूरी है।

अधिकतर मामलों में प्रेग्नेंसी संभव होती है, खासकर जब सिस्ट छोटा और नियंत्रित हो। लेकिन यह सिस्ट के प्रकार और स्थिति पर निर्भर करता है।

 हाँ, अनियमित पीरियड्स ओवेरियन सिस्ट का एक आम लक्षण हो सकता है। यह हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा करता है।

नहीं, हर मामले में सर्जरी जरूरी नहीं होती। कई बार दवाओं, डाइट और जीवनशैली में बदलाव से भी सिस्ट को नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि अचानक तेज दर्द, उल्टी, चक्कर या बेहोशी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us