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PCOD में Weight Loss करने से Period ठीक हो जाएगा? सच इससे अलग है

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 04 May, 2026
  • category-iconUpdated on 04 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5008

आप रोज़ाना जिम जाते हैं, कीटो डाइट फॉलो करते हैं और अपना कई किलो वज़न कम कर चुके हैं। आप सोचते हैं कि वज़न कम होते ही PCOD (Polycystic Ovarian Disease) खत्म हो जाएगा और आपके पीरियड्स (Periods) नियमित हो जाएँगे। लेकिन वज़न कम होने के बावजूद आपकी माहवारी (Menstrual cycle) अभी भी गायब है या अनियमित है। आप हैरान हैं कि ऐसा क्यों? सच तो यह है कि वज़न कम करना PCOD का एकमात्र इलाज नहीं है। PCOD केवल मोटापे की बीमारी नहीं है, यह हॉर्मोन्स और मेटाबॉलिज़्म के गहरे असंतुलन का परिणाम है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि सिर्फ वज़न घटाना काफी क्यों नहीं है और आयुर्वेद इसे जड़ से कैसे ठीक करता है।

PCOD और इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) का दुष्चक्र

PCOD में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे खून में शुगर और इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ इंसुलिन ओवरीज़ (Ovaries) को बहुत ज़्यादा पुरुष हार्मोन (Testosterone/Androgens) बनाने के लिए उत्तेजित करता है। इसी हार्मोनल असंतुलन के कारण चेहरे पर अनचाहे बाल आते हैं और पीरियड्स रुक जाते हैं। केवल क्रैश डाइट से वज़न कम करने से यह इंसुलिन रेजिस्टेंस ठीक नहीं होता।

ओवरीज़ (Ovaries) में सिस्ट (Cyst) का बनना और ओव्यूलेशन (Ovulation) का रुकना

हॉर्मोन्स के बिगड़ने से ओवरीज़ में हर महीने बनने वाला अंडा (Egg) पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता और बाहर नहीं निकल पाता (Anovulation)। ये अधूरे अंडे ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट (Cyst) का रूप ले लेते हैं। जब तक शरीर के अंदर अंडे बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया (Ovulation) दोबारा शुरू नहीं होगी, तब तक केवल वज़न घटाने से पीरियड्स नियमित नहीं हो सकते।

लगातार क्रैश डाइट और स्ट्रेस आपके शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है?

जब आप PCOD ठीक करने के लिए बहुत ज़्यादा डाइटिंग या भारी वर्कआउट करते हैं, तो शरीर इसे एक भारी तनाव (Stress) मान लेता है।

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का बढ़ना: अत्यधिक डाइटिंग से तनाव बढ़ता है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) भड़कता है और यह प्रजनन हॉर्मोन्स को पूरी तरह रोक देता है।
  • पोषक तत्वों की कमी: खाना छोड़ने से शरीर में खून (रक्त धातु) और रस की भारी कमी हो जाती है, जिससे पीरियड्स लाने के लिए ओवरीज़ के पास ज़रूरी ऊर्जा नहीं बचती।
  • वात दोष का भड़कना: खाली पेट रहने और अत्यधिक व्यायाम करने से रूखापन बढ़ता है और 'वात दोष' भड़क कर पीरियड्स को और ज़्यादा अनियमित कर देता है।

आयुर्वेद PCOD और रुके हुए पीरियड्स को कैसे समझता है?

आयुर्वेद में PCOD को 'आर्तव क्षय' या पुष्पघ्नी के संदर्भ में देखा जाता है। यह मुख्य रूप से कफ और वात दोष का असंतुलन है।

  • कफ दोष और आम (Toxins) का बढ़ना: खराब पाचन के कारण शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनता है। बढ़ा हुआ कफ और 'आम' गर्भाशय और ओवरीज़ के चैनलों (स्रोतों) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे सिस्ट (Cyst) बनते हैं।
  • वात दोष (अपान वात) का रुकना: 'अपान वात' शरीर से पीरियड्स के खून को बाहर निकालता है। ब्लॉकेज के कारण जब अपान वात रुक जाता है या उल्टी दिशा में बहने लगता है, तो पीरियड्स समय पर नहीं आते।
  • आर्तव धातु का कमज़ोर होना: रस और रक्त धातु के खराब होने से शरीर का प्रजनन ऊतक (आर्तव धातु) सही से नहीं बन पाता।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

आधुनिक चिकित्सा अक्सर PCOD के लिए गर्भनिरोधक गोलियाँ (Contraceptive pills) देती है, जो केवल आर्टिफिशल ब्लीडिंग लाती हैं। हम जीवा आयुर्वेद में मुख्य कारण पर काम करते हैं।

  • स्रोतोरोध (Blockage) को हटाना: कफ-शामक औषधियों से ओवरीज़ की ब्लॉकेज (सिस्ट) को घोला जाता है ताकि प्राकृतिक रास्ता साफ हो सके।
  • अग्नि दीपन और डिटॉक्स: मेटाबॉलिज़्म को सुधारकर इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्राकृतिक रूप से खत्म किया जाता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकाले जाते हैं।
  • अपान वात का अनुलोमन: रुकी हुई माहवारी को प्राकृतिक रूप से वापस लाने के लिए वात को नीचे की ओर निर्देशित किया जाता है।

PCOD को कंट्रोल करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी जादुई औषधियाँ दी हैं जो सिस्ट को घोलने के साथ-साथ हॉर्मोन्स को भी कंट्रोल करती हैं:

  • कांचनार गुग्गुल (Kanchanar Guggulu): यह शरीर की किसी भी गाँठ या सिस्ट को घोलने की सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है। यह कफ को पिघलाकर रास्ता साफ करती है।
  • शतावरी (Shatavari): यह फीमेल हॉर्मोन्स को बैलेंस करती है, रूखेपन को खत्म करती है और ओव्यूलेशन (Ovulation) को प्राकृतिक रूप से शुरू करने में मदद करती है।
  • अशोक (Ashoka): यह गर्भाशय (Uterus) को ताक़त देता है और रुके हुए या अनियमित पीरियड्स को वापस लाने में बहुत प्रभावी है।
  • दशमूल (Dashmoola): यह वात को शांत करता है और पेल्विक हिस्से (Pelvic area) में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है।

रोगी के लिए शुद्ध आहार

PCOD में सिर्फ वज़न घटाना नहीं, बल्कि शरीर को सही पोषण देना ज़रूरी है। आहार ऐसा होना चाहिए जो कफ को घटाए और वात को शांत करे।

  • गर्म और सुपाच्य भोजन: हमेशा ताज़ा पका हुआ भोजन करें। ठंडी, बासी और फ्रिज में रखी चीज़ें कफ और ब्लॉकेज को भयंकर रूप से बढ़ाती हैं।
  • सही कार्बोहाइड्रेट्स (Carbs): मैदा और सफेद चीनी बिल्कुल छोड़ दें। इनकी जगह बाजरा, जौ (Barley) और रागी का सेवन करें, जो शुगर और इंसुलिन लेवल को नहीं बढ़ाते।
  • हल्का और स्निग्ध भोजन: रूखी क्रैश डाइट न लें। वात को शांत करने के लिए भोजन में आधा चम्मच गाय का शुद्ध घी ज़रूर शामिल करें।
  • गर्म तासीर वाले मसाले: दालचीनी (Cinnamon), मेथी दाना, हल्दी और जीरा का रोज़ाना उपयोग करें। रात भर भीगा हुआ मेथी दाना इंसुलिन रेजिस्टेंस को बहुत तेज़ी से खत्म करता है।
  • क्या बिल्कुल न खाएँ: दूध और भारी डेयरी उत्पाद, पैकेटबंद जंक फूड, और अत्यधिक मीठा खाने से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि ये ओवरीज़ में भारीपन लाते हैं।

पंचकर्म थेरेपी: हॉर्मोन्स और ओवरीज़ की डीप क्लीनिंग

जब गोलियाँ असर न कर रही हों और माहवारी कई महीनों से गायब हो, तो पंचकर्म शरीर को 'हार्ड रिसेट' (Hard Reset) करता है।

  • वमन और विरेचन (Vamana & Virechana): शरीर में जमे हुए अत्यधिक कफ (सिस्ट बनाने वाला) और पित्त को उल्टी या दस्त के रास्ते बाहर निकाला जाता है, जिससे मेटाबॉलिज़्म एकदम नया हो जाता है।
  • उद्वर्तन (Udvartana): हर्बल पाउडर से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह जमे हुए फैट को पिघलाने और कफ दोष को कम करने में मदद करती है।
  • उत्तर बस्ति (Uttar Basti): गर्भाशय (Uterus) के अंदर औषधीय तेल या काढ़ा डाला जाता है। यह ओवरीज़ के सिस्ट को घोलने और प्राकृतिक पीरियड्स को नियमित करने का सबसे अचूक इलाज है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप रुके हुए पीरियड्स की शिकायत लेकर आते हैं, तो हम केवल अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट नहीं देखते, हम आपके शरीर और नाड़ी को पढ़ते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि क्या ब्लॉकेज कफ के कारण है या वात (रूखेपन) के कारण ओव्यूलेशन रुका हुआ है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन में कितना स्ट्रेस लेते हैं, आपकी डाइट कैसी है और आपका रूटीन कितना एक्टिव है—इन सबका बहुत बारीकी से विश्लेषण किया जाता है।
  • पाचन का विश्लेषण: यह जाँचना कि आपकी 'पाचन अग्नि' कितनी कमज़ोर हो चुकी है जो 'आम' (Toxins) बना रही है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद केवल आर्टिफिशल ब्लीडिंग नहीं लाता, बल्कि उस इंजन (मेटाबॉलिज़्म और ओवरीज़) को ठीक करता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: सही डाइट और जड़ी-बूटियों के प्रभाव से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होगा। पाचन सुधरेगा और शरीर का भारीपन कम होने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: आपके हॉर्मोन्स प्राकृतिक रूप से बैलेंस होने लगेंगे। अगर पीरियड्स पूरी तरह रुके हुए थे, तो स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।
  • 3 से 6 महीने तक: ओव्यूलेशन (Ovulation) प्राकृतिक तरीके से होने लगेगा। सिस्ट का आकार घटेगा और माहवारी बिना किसी दवाई के नियमित हो जाएगी।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी (PCOD) की शिकायत थी, जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया, लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया, पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला। तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई, जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य गर्भनिरोधक गोलियों से आर्टिफिशल ब्लीडिंग लाना कफ (सिस्ट) और वात को संतुलित कर प्राकृतिक ओव्यूलेशन बहाल करना
शरीर को देखने का नज़रिया समस्या को मोटापा और ओवरी तक सीमित मानना दोष-असंतुलन, अग्नि और आर्तव धातु की कमजोरी के रूप में देखना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका केवल वज़न घटाने पर ज़ोर अग्नि-वर्धक आहार, दालचीनी-मेथी, संतुलित दिनचर्या और थेरेपी (उत्तर बस्ति)
इलाज का तरीका हार्मोनल दवाओं पर निर्भरता जड़ी-बूटियों, पंचकर्म और प्राकृतिक संतुलन पर आधारित उपचार
लंबा असर दवा बंद करते ही पीरियड्स फिर रुकना मेटाबॉलिज़्म और हार्मोन संतुलन से स्थायी सुधार

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

PCOD के कारण हॉर्मोन्स का बिगड़ना कभी-कभी गंभीर हो सकता है। अगर आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • आपको लगातार 4 से 6 महीने तक माहवारी (Periods) बिल्कुल न आए।
  • ब्लीडिंग शुरू होने के बाद कई हफ्तों तक बंद ही न हो (Heavy prolonged bleeding)।
  • अगर पेल्विक हिस्से (पेट के निचले भाग) में अचानक बहुत भयंकर दर्द उठने लगे।
  • चेहरे पर बहुत तेज़ी से बाल आने लगें और आवाज़ में भारीपन महसूस होने लगे।

निष्कर्ष

PCOD में सिर्फ वज़न घटाना रुके हुए पीरियड्स का असली इलाज नहीं है। क्रैश डाइट और अत्यधिक वर्कआउट से वात भड़कता है और शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, जिससे ओव्यूलेशन पूरी तरह रुक जाता है। जब तक शरीर के अंदर हॉर्मोन्स और इंसुलिन का बैलेंस नहीं सुधरेगा, माहवारी नियमित नहीं होगी। कृत्रिम गोलियों से आर्टिफिशल ब्लीडिंग लाने के बजाय, आयुर्वेद के प्राकृतिक रास्ते को अपनाएँ। कांचनार गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियों, वात-शामक आहार और पंचकर्म के ज़रिए ओवरीज़ को स्वस्थ बनाएँ। जीवा आयुर्वेद के साथ प्राकृतिक और नियमित मासिक धर्म की ओर सुरक्षित कदम बढ़ाएँ।

FAQs

नहीं। वज़न कम करने से इंसुलिन का स्तर थोड़ा सुधर सकता है, लेकिन अगर आपके शरीर में कफ दोष और आम (Toxins) जमा हैं, तो ओवरीज़ से सिस्ट नहीं जाएँगे और पीरियड्स पूरी तरह नियमित नहीं होंगे।

ये गोलियाँ प्राकृतिक पीरियड्स नहीं लातीं, बल्कि आर्टिफिशल ब्लीडिंग (Withdrawal bleeding) करवाती हैं। ये ओवरीज़ को सुन्न कर देती हैं। जब आप इन्हें छोड़ते हैं, तो पीरियड्स फिर से रुक जाते हैं और समस्या दोगुनी हो जाती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण ओवरीज़ अत्यधिक पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) बनाने लगती हैं। इस हार्मोनल असंतुलन की वजह से ही चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उगने लगते हैं।

कांचनार गुग्गुल सिस्ट को घोलने के लिए और शतावरी रुके हुए ओव्यूलेशन को वापस लाने तथा फीमेल हॉर्मोन्स को बैलेंस करने के लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार PCOD मुख्य रूप से कफ दोष की बीमारी है। भारी डेयरी उत्पाद (विशेषकर पैकेटबंद दूध और पनीर) कफ को बढ़ाते हैं और ओवरीज़ में ब्लॉकेज पैदा करते हैं, इसलिए इनसे परहेज़ करना चाहिए।

Lean PCOD में मुख्य समस्या मोटापा नहीं, बल्कि अत्यधिक स्ट्रेस और वात दोष का भड़कना होता है। वात का रूखापन ओवरीज़ को सुखा देता है, जिससे अंडे नहीं बनते और पीरियड्स गायब हो जाते हैं।

बिल्कुल। ये दोनों ही मसाले इंसुलिन रेजिस्टेंस को बहुत तेज़ी से तोड़ते हैं। रोज़ सुबह रात भर भीगे हुए मेथी दाने का पानी पीना PCOD के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है।

चूँकि आयुर्वेद सिस्ट को घोलकर प्राकृतिक रूप से ओव्यूलेशन शुरू करता है, इसलिए शरीर को पूरी तरह बैलेंस होने और प्राकृतिक पीरियड्स आने में कम से कम 3 से 6 महीने का समय लगता है।

इस थेरेपी में औषधीय तेल को सीधा गर्भाशय (Uterus) में पहुँचाया जाता है। यह दवा सीधे ओवरीज़ तक जाकर जमे हुए कफ (सिस्ट) को पिघलाती है और गर्भाशय को प्राकृतिक ताक़त देती है।

जी हाँ, 100% हो सकती है। जब आयुर्वेदिक औषधियों और सही लाइफस्टाइल से आपके हॉर्मोन्स बैलेंस हो जाते हैं और ओव्यूलेशन (अंडे का बनना) नियमित हो जाता है, तो गर्भधारण में कोई समस्या नहीं आती।

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