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Processed food धीरे-धीरे body को कैसे नुकसान पहुँचा रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल प्रोसेस्ड फूड हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है—चिप्स, नूडल्स, बिस्किट और रेडी-टू-ईट खाना हर जगह आसानी से मिल जाता है। स्वाद तुरंत अच्छा लगता है और बनाना भी आसान होता है, इसलिए हम बिना ज्यादा सोचे इसे अपना लेते हैं।

लेकिन इसी आसान सुविधा के पीछे एक धीरे-धीरे बढ़ने वाला खतरा छिपा होता है, जो शुरुआत में महसूस नहीं होता। समय के साथ यही खाना शरीर के अंदरूनी संतुलन, पाचन और ऊर्जा पर असर डालने लगता है।

Processed Food क्या होता है?

Processed food वह भोजन है जिसे उसकी प्राकृतिक अवस्था से बदलकर लंबे समय तक सुरक्षित रखने, स्वाद बढ़ाने और आकर्षक बनाने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुज़ारा जाता है। इसमें नमक, चीनी, तेल और विभिन्न प्रकार के रसायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं ताकि इसका स्वाद और रंग बेहतर दिखे और यह लंबे समय तक खराब न हो।

ऐसा भोजन प्राकृतिक रूप से कम और कृत्रिम रूप से अधिक तैयार किया गया होता है, जिसमें पोषण की तुलना में सुविधा और स्वाद को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।

Processed Food का शरीर पर सबसे पहला असर क्या होता है? 

Processed food धीरे-धीरे शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है। इसका असर तुरंत गंभीर नहीं दिखता, लेकिन लगातार सेवन से यह पाचन, ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्थिति तक को बदल देता है। शरीर इसे पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से संभाल नहीं पाता, इसलिए भीतर ही भीतर असंतुलन शुरू हो जाता है।

  • पाचन तंत्र कमजोर होना: यह भोजन भारी और कम रेशेदार होता है, जिससे पाचन धीमा पड़ जाता है और गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं।
  • पोषण की कमी (Malnutrition जैसा प्रभाव): इसमें कैलोरी तो होती है, लेकिन जरूरी विटामिन और मिनरल्स कम होते हैं, जिससे शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता।
  • ऊर्जा में गिरावट और थकान: सही पोषण न मिलने से शरीर सुस्त और थका हुआ महसूस करता है, ऊर्जा स्तर लगातार गिरता रहता है।
  • वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म का धीमा होना: यह भोजन शरीर में फैट जमा करने की प्रवृत्ति बढ़ाता है और metabolism को धीमा कर देता है।
  • आंतों और gut health का बिगड़ना: लगातार सेवन से अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं और digestive system असंतुलित हो जाता है।
  • सूजन (Inflammation) का बढ़ना: शरीर में हल्की लेकिन लगातार सूजन बनी रह सकती है, जो आगे चलकर कई समस्याओं का कारण बनती है।
  • मूड और मानसिक स्थिति पर असर: gut और brain के संबंध में प्रभावित होता है, जिससे चिड़चिड़ापन, brain fog और mental fatigue महसूस हो सकता है।

Nutrient Depletion की समस्या

Processed food बनाने की प्रक्रिया में उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने और स्वाद बढ़ाने के लिए कई चरणों से गुज़रता है। इसी दौरान उसके प्राकृतिक पोषक तत्व धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।

ताज़े अनाज, फल और अन्य खाद्य पदार्थों में मौजूद विटामिन, मिनरल्स और फाइबर जब अत्यधिक सफाई (refining) और उच्च तापमान प्रोसेसिंग से गुजरते हैं, तो उनका बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है।

इसके बाद जो भोजन बचता है, उसमें केवल कैलोरी रह जाती है, लेकिन शरीर को मजबूत बनाने वाले जरूरी पोषक तत्व बहुत कम या लगभग न के बराबर होते हैं। यही कारण है कि ऐसा भोजन पेट तो भर देता है, लेकिन शरीर को वास्तविक पोषण नहीं दे पाता।

Gut Health का धीरे-धीरे बिगड़ना

Processed food का लगातार सेवन हमारे आंतों के अंदर मौजूद सूक्ष्म जीवों (gut microbiome) के संतुलन को धीरे-धीरे बिगाड़ देता है। यह संतुलन शरीर की पाचन शक्ति और समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है।

जब ऐसे भोजन की मात्रा बढ़ती है, तो अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया धीरे-धीरे हावी हो जाते हैं। यह बदलाव तुरंत महसूस नहीं होता, लेकिन भीतर ही भीतर सिस्टम को कमजोर करता रहता है।

इस असंतुलन का सीधा असर पाचन पर पड़ता है, भोजन ठीक से नहीं पचता, गैस और भारीपन बढ़ता है। साथ ही, immunity system भी कमजोर होने लगता है क्योंकि gut health और प्रतिरक्षा शक्ति का गहरा संबंध होता है।

Liver पर बढ़ता दबाव क्यों खतरनाक है?

लिवर शरीर का प्राकृतिक detox केंद्र होता है, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है।

जब हम लगातार processed food का सेवन करते हैं, तो लिवर को इन्हें तोड़ने और detox करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। यह स्थिति धीरे-धीरे उसे overwork कर देती है।

लगातार दबाव के कारण लिवर की कार्यक्षमता कम होने लगती है और वह पहले जितनी प्रभावी तरीके से शरीर को साफ नहीं कर पाता।

Brain Fog से लेकर Hormonal Imbalance तक Processed Food का असर

Processed food धीरे-धीरे शरीर के कई महत्वपूर्ण सिस्टम को प्रभावित करता है। शुरुआत में यह सिर्फ स्वाद और सुविधा देता है, लेकिन समय के साथ यह अंदरूनी असंतुलन पैदा करने लगता है। इसका असर वजन बढ़ने से लेकर हार्मोन तक हर स्तर पर दिखाई देता है।

  • Brain Fog और Mental Fatigue:  मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे ध्यान, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता कम हो जाती है।
  • Immunity का कमजोर होना:  Gut health बिगड़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है।
  • Skin और Hair Problems:  अंदरूनी विषैले तत्व बाहर निकलने के लिए त्वचा को प्रभावित करते हैं, जिससे acne, dull skin और hair fall बढ़ सकता है।
  • Hormonal Imbalance का खतरा:  Endocrine system के प्रभावित होने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे mood, metabolism और reproductive health पर असर पड़ता है।

Processed Food का आयुर्वेदिक दृष्टि से गहरा असर (Digestive & Energetic Imbalance)

Processed food का सबसे पहला असर जठराग्नि पर पड़ता है, जो भोजन को पचाने की प्राकृतिक शक्ति है। यह इसे धीमा और कमजोर कर देता है, जिससे digestion system धीरे-धीरे sluggish हो जाता है। अधपचा भोजन शरीर में “आम” (Ama) का निर्माण करता है, जो एक चिपचिपा विष जैसा पदार्थ है और शरीर के सूक्ष्म चैनलों को block कर देता है। यही आयुर्वेद में कई रोगों की जड़ माना जाता है।

लगातार सेवन से शरीर में toxins का धीमा संचय होता है, जो तुरंत दिखाई नहीं देता लेकिन अंदरूनी क्षति करता है। यह त्रिदोष, वात, पित्त और कफ, को असंतुलित करता है; वात से anxiety, पित्त से acidity और कफ से heaviness बढ़ती है। इसके साथ ही अग्नि और कमजोर हो जाती है, जिससे ऊर्जा घटती है। Gut microbiome भी बिगड़ता है और अंत में शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा “ओज” का क्षय होने लगता है, जिससे immunity और vitality दोनों कमजोर पड़ते हैं।

जीवा का ट्रीटमेंट अप्रोच (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण)

जीवा ट्रीटमेंट अप्रोच का उद्देश्य शरीर के रोग को सिर्फ दबाना नहीं, बल्कि उसकी जड़ तक पहुँचकर असंतुलन को ठीक करना होता है। इसमें विशेष रूप से पाचन तंत्र, जठराग्नि और शरीर में जमा “आम” (विषैले अवशेष) पर काम किया जाता है, ताकि शरीर अपनी प्राकृतिक स्थिति में लौट सके।

  • अग्नि दीपक (पाचन अग्नि को मजबूत करना): कमजोर पाचन शक्ति को सक्रिय किया जाता है ताकि भोजन सही तरीके से पचकर ऊर्जा में बदल सके।
  • आम पाचन (विषैले पदार्थों का नाश): शरीर में जमा अस्वास्थ्यकर और विषैले तत्वों को खत्म किया जाता है, जिससे शरीर हल्का और सक्रिय महसूस करता है।
  • दोष संतुलन (वात, पित्त, कफ का सामंजस्य): असंतुलित दोषों को प्राकृतिक तरीके से संतुलित किया जाता है, जिससे शरीर में स्थिरता आती है।
  • औषधीय सहायता (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ): प्राकृतिक औषधियों का उपयोग करके पाचन, detox और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जाता है।
  • आहार और जीवनशैली सुधार: सही भोजन, नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली अपनाकर शरीर की प्राकृतिक लय को पुनः स्थापित किया जाता है।

आयुर्वेदिक औषधियाँ जो शरीर के असंतुलन को ठीक करने में मदद करती हैं

आयुर्वेद में शरीर के असंतुलन को केवल रोग नहीं माना जाता, बल्कि यह वात, पित्त और कफ के बिगड़ने का परिणाम होता है। इन औषधियों का उद्देश्य शरीर की प्राकृतिक लय को वापस लाना, पाचन को सुधारना और विषैले तत्वों (आम) को बाहर निकालना होता है।

  • त्रिफला (Triphala): यह शरीर की आंतरिक सफाई में मदद करती है और कब्ज व पाचन की गड़बड़ी को धीरे-धीरे ठीक करती है।
  • अजवाइन (Ajwain): यह पाचन अग्नि को तेज करती है और गैस, भारीपन तथा अपच को कम करने में सहायक होती है।
  • हींग (Hing): यह पेट की गैस और ऐंठन को शांत करती है और पाचन तंत्र को सक्रिय बनाती है।
  • अदरक (Ginger): यह digestion को सुधारती है और शरीर में जमी हुई सुस्ती और भारीपन को कम करती है।
  • हरड़ (Haritaki): यह आंतों की सफाई करती है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है।

आयुर्वेदिक Therapies जो शरीर के असंतुलन को ठीक करने में मदद करती हैं

आयुर्वेद में शरीर के संतुलन को वापस लाने के लिए केवल औषधियाँ ही नहीं, बल्कि विशेष थेरपीज़ का भी उपयोग किया जाता है। ये थेरपीज़ शरीर से विषैले तत्वों को निकालकर, पाचन तंत्र को मजबूत करके और ऊर्जा को पुनः सक्रिय करके काम करती हैं।

  • पंचकर्म थेरपी (Panchakarma Therapy): यह शरीर की गहरी सफाई की प्रक्रिया है, जिसमें विषैले तत्वों (आम) को बाहर निकालकर शरीर को हल्का और संतुलित किया जाता है।
  • अभ्यंग (Abhyanga - तेल मालिश): औषधीय तेलों से की जाने वाली मालिश शरीर की नसों को शांत करती है और वात दोष को संतुलित करने में मदद करती है।
  • स्वेदन (Swedana - भाप चिकित्सा): शरीर को हर्बल भाप दी जाती है जिससे टॉक्सिन्स पसीने के माध्यम से बाहर निकलते हैं और stiffness कम होती है।
  • बस्ती (Basti Therapy): यह विशेष एनीमा थेरपी है जो मुख्य रूप से वात दोष को संतुलित करने और आंतों को साफ करने में उपयोग होती है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): इसमें सिर पर धीरे-धीरे औषधीय तेल डाला जाता है, जो तनाव कम करता है और मानसिक संतुलन को सुधारता है।

डाइट चार्ट

सही खान-पान पाचन को सुधारने और gut health को संतुलित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नीचे दिया गया सरल डाइट चार्ट पाचन को हल्का और सक्रिय रखने में मदद करता है।

क्या खाएं (Eat)

  • मूंग दाल खिचड़ी और हल्का सात्विक भोजन
  • छाछ (भुना जीरा मिलाकर)
  • लौकी, तोरई, कद्दू जैसी हल्की सब्जियां
  • उबली या स्टीम की हुई सब्जियां
  • सेब, अनार, केला जैसे आसानी से पचने वाले फल
  • नारियल पानी
  • सीमित मात्रा में घी

क्या न खाएं (Avoid)

  • तला-भुना और भारी भोजन
  • मैदा, जंक फूड और पैकेट फूड
  • बहुत ज्यादा मसालेदार खाना
  • चाय और कॉफी का अधिक सेवन
  • कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा
  • खट्टे अचार और प्रोसेस्ड पिकल्स
  • देर रात भारी भोजन

जीवा आयुर्वेद में जांच कैसे की जाती है? 

जीवा आयुर्वेद में पाचन समस्याओं को केवल लक्षणों से नहीं, बल्कि शरीर के भीतर के असंतुलन को गहराई से समझकर जांचा जाता है। इसमें अग्नि, आम, दोष और जीवनशैली का समग्र विश्लेषण किया जाता है।

  • अग्नि (Digestive Fire) का मूल्यांकन: पाचन शक्ति मजबूत है या मंद, इसी से gut health की वास्तविक स्थिति समझी जाती है।
  • आम (Toxins) की पहचान: जीभ, मल और शरीर के संकेतों से विषैले पदार्थों का स्तर आंका जाता है।
  • नाड़ी परीक्षा: वात, पित्त और कफ के असंतुलन को pulse के माध्यम से समझा जाता है।
  • लक्षणों का विश्लेषण: गैस, ब्लोटिंग, थकान और अपच को एक पैटर्न के रूप में देखा जाता है।
  • मानसिक स्थिति का आकलन: तनाव, चिंता और नींद की गुणवत्ता का पाचन पर प्रभाव जांचा जाता है।
  • लाइफस्टाइल मूल्यांकन: खान-पान, दिनचर्या और आदतों का विश्लेषण किया जाता है जो gut health को प्रभावित करते हैं।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च और पारदर्शिता 

कई लोग सोचते हैं कि ऐसा कस्टमाइज्ड आयुर्वेद बहुत महंगा होगा। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है । जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें ।

  • जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है । (यह एक अनुमानित आधार है और अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।)
  • अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए विशेष पैकेज प्रोटोकॉल भी हैं, जिन्हें शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ।
  • इन पैकेज में दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और ध्यान मार्गदर्शन, आहार योजना और थेरेपी शामिल हैं । इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है ।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता कम: 88% मरीजों ने धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं और हार्मोनल सपोर्ट पर निर्भरता कम की है।

आयुर्वेद vs मॉडर्न अप्रोच (Processed Food और उसका शरीर पर असर)

बिंदु आयुर्वेदिक दृष्टिकोण मॉडर्न दृष्टिकोण
सोच का तरीका विरुद्ध आहार, मंदाग्नि और आम निर्माण के रूप में देखता है ultra-processed food और metabolic health issue के रूप में देखता है
मुख्य कारण कृत्रिम भोजन, असंतुलित अग्नि, दोष विकृति और विष निर्माण additives, preservatives, high sugar/fat और low nutrition
शरीर पर असर आम, अग्नि मंदता, त्रिदोष असंतुलन, ओज क्षय obesity, diabetes risk, inflammation, digestive issues
मानसिक प्रभाव मन की अस्थिरता, आलस्य, heaviness और brain fog fatigue, poor concentration, mood swings
ऊर्जा पर प्रभाव दीर्घकालिक energy depletion और sluggishness low energy, insulin spikes and crashes
उपचार का तरीका अग्नि दीपना, आम शोधन, सात्त्विक आहार और detox diet modification, exercise, supplements, lifestyle change
मुख्य फोकस शरीर को प्राकृतिक स्थिति में वापस लाना calories, nutrition balance और disease management
रिजल्ट धीरे लेकिन स्थायी healing और vitality restoration जल्दी बदलाव, लेकिन dependence और relapse संभव

कब डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें?

जब processed food का असर शरीर पर लगातार दिखने लगे और सामान्य जीवन पर प्रभाव पड़ने लगे, तब इसे गंभीरता से लेना जरूरी है।

  • लगातार थकान और भारीपन महसूस होना
  • बार-बार acidity, गैस या indigestion होना
  • अचानक वजन बढ़ना या घटना
  • मीठे और जंक फूड की तेज craving बढ़ना
  • नींद के बाद भी तरोताज़ा महसूस न होना
  • ध्यान और concentration में कमी आना

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार processed food शरीर की “अग्नि” को कमजोर करता है और धीरे-धीरे “आम” (toxins) का निर्माण करता है। यही विष शरीर की ऊर्जा, पाचन और मानसिक संतुलन को प्रभावित करता है। मॉडर्न विज्ञान इसे metabolic disorder और inflammation के रूप में देखता है, लेकिन दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि processed food शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ता है। सच यही है, जितना अधिक natural भोजन होगा, उतनी ही अधिक natural ऊर्जा शरीर में बनी रहेगी।

FAQs

Processed food में अधिक मात्रा में preservatives, sugar और unhealthy fats होते हैं। ये शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देते हैं और पाचन को कमजोर करते हैं। लंबे समय तक सेवन से शरीर में धीरे-धीरे विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।

नहीं, इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता। यह धीरे-धीरे शरीर के सिस्टम को प्रभावित करता है जैसे पाचन, ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म। समस्या समय के साथ गंभीर रूप ले सकती है।

हाँ, इसमें high calories और low nutrition होते हैं। यह शरीर में फैट स्टोरेज बढ़ाता है और metabolism को धीमा करता है। इससे वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

हाँ, यह brain function को प्रभावित कर सकता है। इससे brain fog, चिड़चिड़ापन और concentration में कमी आ सकती है। Gut और brain के connection के कारण ऐसा प्रभाव देखा जाता है।

हाँ, क्योंकि इसमें जरूरी nutrients की कमी होती है। शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती और fatigue बढ़ता है। यह low energy और sluggishness का कारण बन सकता है।

हाँ, यह gut microbiome का संतुलन बिगाड़ सकता है। अच्छे बैक्टीरिया कम और harmful bacteria बढ़ सकते हैं। इससे digestion कमजोर और immunity प्रभावित होते हैं।

हाँ, इसमें high sugar content होता है जो blood sugar spikes करता है। बार-बार spikes insulin resistance का कारण बन सकते हैं। लंबे समय में diabetes का risk बढ़ सकता है।

हाँ, बच्चों का शरीर विकसित हो रहा होता है इसलिए असर ज्यादा होता है। यह उनकी immunity, growth और concentration को प्रभावित कर सकता है। बार-बार सेवन उनकी eating habits भी बिगाड़ सकता है।

ताज़ा और प्राकृतिक भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है। पानी, फल, सब्जियां और fiber-rich diet से शरीर को संतुलन मिलता है। धीरे-धीरे processed food की मात्रा कम करना सबसे अच्छा तरीका है।

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