रोटी, चावल और दही: कब्ज़ होने पर खाने में क्या बदलाव मदद कर सकते हैं?

Information By Dr. Bhavna Dwivedi     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

दोपहर में चार रोटी, आलू की सब्जी और थोड़ा दही खाया। रात को चावल और दाल। खाना तो घर का ही था, फिर भी सुबह पेट साफ नहीं हुआ।

कब्ज होने पर कई लोगों के मन में यही सवाल आता है: क्या ज्यादा रोटी खाने से कब्ज हो रही है? क्या सफेद चावल पेट को बांध देते हैं? और दही खाना चाहिए या कुछ दिनों के लिए बंद कर देना चाहिए?

इन सवालों पर घर में अलग-अलग सलाह मिलती है। कोई कहता है चावल बिल्कुल मत खाओ, तो कोई रात में दही खाने से मना करता है।

लेकिन कब्ज में किसी एक खाद्य पदार्थ को जिम्मेदार मानने से पहले पूरी थाली को देखना जरूरी है।

रोटी, चावल और दही अपने आप कब्ज का निश्चित कारण नहीं हैं। असली फर्क इस बात से पड़ सकता है कि आप इन्हें किस मात्रा में, किस रूप में और किन चीजों के साथ खाते हैं।

कब्ज में रोटी खाना सही है या नहीं?

उत्तर भारत में रोटी लगभग हर घर के भोजन का हिस्सा है। कई लोग सुबह-शाम रोटी खाते हैं और उन्हें कोई परेशानी नहीं होती।

लेकिन अगर आपको कब्ज रहती है, तो सबसे पहले यह देखें कि रोटी किस आटे से बन रही है।

साबुत गेहूं के आटे में फाइबर मौजूद होता है। वहीं बहुत ज्यादा रिफाइंड आटे यानी मैदे से बने खाद्य पदार्थों में आमतौर पर फाइबर कम होता है।

फाइबर मल में मात्रा बढ़ाने और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।

अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां कब्ज से राहत देने वाले भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।

इसलिए सामान्य परिस्थितियों में साबुत गेहूं की रोटी, मैदे से बने खाद्य पदार्थों की तुलना में बेहतर फाइबर विकल्प हो सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जितनी ज्यादा रोटी खाएंगे, कब्ज उतनी जल्दी ठीक होगी।

अगर आप रोटी तो बहुत खाते हैं, लेकिन साथ में सब्जी, दाल और दूसरे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ बहुत कम लेते हैं, तो भोजन का संतुलन बेहतर करने की जरूरत हो सकती है।

चार रोटी और सूखी सब्जी या दो रोटी, दाल और सब्जी: किससे मदद मिलेगी?

मान लीजिए, आपका दोपहर का भोजन चार रोटियाँ और थोड़ी-सी आलू की सूखी सब्जी है।

इसके बाद शाम तक कुछ नहीं खाते और दिनभर बहुत कम पानी पीते हैं।

अब इसकी तुलना दूसरी थाली से करें।

दो रोटी, एक कटोरी दाल, मौसमी सब्जी और साथ में आपकी जरूरत के अनुसार पानी।

दूसरी थाली में भोजन की विविधता और फाइबर के अलग-अलग स्रोत शामिल हो सकते हैं।

लेकिन यह कोई निश्चित नियम नहीं है कि कब्ज वाले हर व्यक्ति को चार की जगह दो रोटी ही खानी चाहिए। मात्रा उम्र, भूख, कामकाज, स्वास्थ्य और ऊर्जा की जरूरत पर निर्भर करती है।

महत्वपूर्ण यह है कि केवल रोटी से पेट भरने के बजाय बाकी भोजन को भी पर्याप्त जगह मिले।

उदाहरण के लिए, आप लौकी, तोरी, गाजर, भिंडी या अपनी सहनशीलता के अनुसार दूसरी सब्जियां शामिल कर सकते हैं।

दालों से भी फाइबर मिलता है। लेकिन अगर दाल खाने से पेट फूलता है, तो मात्रा और प्रकार को धीरे-धीरे समायोजित करना उपयोगी हो सकता है।

कब्ज में बेहतर थाली बनाने का मतलब सिर्फ रोटी कम करना नहीं, बल्कि भोजन में फाइबर की विविधता बढ़ाना है।

क्या सफेद चावल खाने से कब्ज हो जाती है?

बहुत से लोग मानते हैं कि चावल खाने से पेट बंध जाता है।

लेकिन यह बात हर व्यक्ति के लिए सही नहीं है।

सफेद चावल बनाने की प्रक्रिया में अनाज की बाहरी परत हटाई जाती है। इस वजह से सामान्यतः इसमें ब्राउन राइस की तुलना में फाइबर कम होता है।

NHS की constipation dietary guidance में जहां संभव हो, सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस जैसे साबुत अनाज चुनने की सलाह दी गई है।

फिर भी सफेद चावल खाना अपने आप कब्ज पैदा होने का प्रमाण नहीं है।

यदि आप चावल के साथ दाल, सब्जी और दूसरे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खा रहे हैं, तो सफेद चावल भी संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकता है।

समस्या तब हो सकती है जब आपका ज्यादातर भोजन कम फाइबर वाली चीजों पर निर्भर हो और फल-सब्जियां बहुत कम हों।

अगर ब्राउन राइस खाने से ज्यादा गैस या पेट फूलता है, तो उसे जबरदस्ती खाना भी जरूरी नहीं है।

आप अपनी सहनशीलता के अनुसार चावल की मात्रा और साथ खाई जाने वाली चीजों पर ध्यान दे सकते हैं।

क्या दही कब्ज में राहत दे सकता है?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब थोड़ा अलग है।

दही में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। कुछ प्रकार के दही में जीवित बैक्टीरियल कल्चर भी मौजूद हो सकते हैं।

लेकिन सामान्य दही में फाइबर लगभग नहीं होता।

इसलिए केवल दही खाने से फाइबर की कमी पूरी नहीं होती।

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में विशेष प्रोबायोटिक उत्पादों से कब्ज के लक्षणों में सुधार देखा गया है।

2024 में प्रकाशित एक systematic review और meta-analysis में 17 randomized trials के कुल 1,256 प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया। परिणामों में कुछ प्रोबायोटिक उत्पादों से मल त्याग की आवृत्ति और मल के स्वरूप में सुधार के संकेत मिले, लेकिन प्रमाण की गुणवत्ता कम या बहुत कम थी और अध्ययनों के परिणामों में काफी अंतर था।

यहां एक जरूरी बात समझें।

प्रोबायोटिक सप्लीमेंट पर हुई research को घर के हर दही पर लागू नहीं किया जा सकता।

दही में मौजूद बैक्टीरिया का प्रकार और मात्रा अलग-अलग हो सकती है।

किसी व्यक्ति को दही खाने से आराम महसूस हो सकता है, जबकि दूसरे को दूध में मौजूद लैक्टोज के कारण गैस या पेट फूलने की परेशानी हो सकती है।

अगर आपको सादा दही खाने से कोई समस्या नहीं होती, तो उसे भोजन का हिस्सा बनाए रखना संभव है। लेकिन दही को कब्ज की दवा समझना सही नहीं होगा।

Reddit पर भी सवाल: किसी को दही से आराम, तो किसी की कब्ज क्यों बढ़ती है?

Reddit के r/Constipation community में एक चर्चा में लोगों से पूछा गया कि कब्ज होने पर वे कौन-से खाद्य पदार्थ आसानी से खा पाते हैं।

एक उपयोगकर्ता ने दही को अपने लिए आरामदायक बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि दही खाने पर उसकी कब्ज बढ़ती महसूस होती है।

एक अन्य चर्चा में व्यक्ति ने बताया कि सादा Greek Yogurt खाने के बाद उसका मल त्याग नियमित होने लगा था। लेकिन उसी चर्चा में दूसरे उपयोगकर्ता ने कहा कि शुरुआत में फायदा हुआ और बाद में वह असर महसूस नहीं हुआ।

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।

लेकिन इनसे एक उपयोगी बात समझ आती है: भोजन का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।

अगर आप दही खाने के बाद बेहतर महसूस करते हैं, तो केवल इसलिए उसे बंद करने की जरूरत नहीं कि किसी और को उससे कब्ज हुई थी।

इसी तरह अगर आपको दही खाने से लगातार परेशानी होती है, तो उसे जबरदस्ती खाने की जरूरत भी नहीं है।

अपने लक्षणों का पैटर्न पहचानना ज्यादा उपयोगी है।

कब्ज में सुबह से रात तक थाली में क्या बदलाव करें?

कब्ज में हर रोज नया घरेलू नुस्खा आजमाने से बेहतर है कि सामान्य भोजन में छोटे और टिकाऊ बदलाव किए जाएं।

उदाहरण के लिए, एक सामान्य भारतीय दिनचर्या ऐसी हो सकती है।

  • सुबह का नाश्ता: सिर्फ चाय और बिस्कुट के बजाय सब्जियों वाला दलिया, ओट्स या अपनी पसंद का पोषक नाश्ता लें। साथ में मौसमी फल भी शामिल कर सकते हैं।
  • दोपहर का भोजन: साबुत गेहूं की रोटी या चावल के साथ पर्याप्त दाल और सब्जी लें। केवल आलू या बहुत कम सब्जी वाली थाली पर निर्भर न रहें।
  • शाम: जरूरत के अनुसार फल या कोई उपयुक्त फाइबर वाला नाश्ता चुनें।
  • रात का भोजन: रात के भोजन में रोटी या चावल के साथ अच्छी तरह पकी सब्जी और दाल शामिल कर सकते हैं। अगर सादा दही आपको सूट करता है, तो उसे भी भोजन के हिस्से के रूप में लिया जा सकता है।

यह एक सामान्य उदाहरण है, हर व्यक्ति के लिए निर्धारित diet chart नहीं।

डायबिटीज, किडनी की बीमारी, IBS या दूसरी समस्याएं होने पर भोजन का चुनाव अलग हो सकता है।

फाइबर अचानक बढ़ाने से गैस क्यों होने लगती है?

मान लीजिए, अभी तक आप ज्यादातर सफेद चावल और कम सब्जी खाते थे।

फिर एक दिन से ब्राउन राइस, ज्यादा दाल, सलाद और साबुत अनाज खाना शुरू कर दिया।

इसके बाद पेट फूलने लगा और गैस बढ़ने लगी।

ऐसा हो सकता है क्योंकि शरीर को फाइबर की बढ़ी हुई मात्रा के अनुसार ढलने में समय लगता है।

NIDDK के अनुसार, वयस्कों को उम्र और लिंग के आधार पर सामान्यतः लगभग 22–34 ग्राम फाइबर प्रतिदिन की जरूरत हो सकती है।

लेकिन इस मात्रा तक पहुंचने के लिए एक ही दिन में पूरा भोजन बदलना उचित नहीं है।

फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना भी महत्वपूर्ण है।

अगर डॉक्टर ने हार्ट या किडनी की बीमारी के कारण पानी सीमित करने को कहा है, तो उस सलाह का पालन करें।

कभी-कभी ज्यादा फाइबर लेने के बावजूद कब्ज बनी रह सकती है। कुछ लोगों में IBS या मल त्याग से संबंधित मांसपेशियों की परेशानी जैसी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।

ऐसे में केवल और ज्यादा फाइबर खाते रहना उचित समाधान नहीं है।

दो सप्ताह तक कैसे समझें कि भोजन में बदलाव मदद कर रहा है?

अगर आपकी कब्ज हल्की है और कोई गंभीर warning sign नहीं है, तो अपने सामान्य भोजन में धीरे-धीरे बदलाव करते हुए कुछ दिनों तक लक्षणों का रिकॉर्ड रख सकते हैं।

एक छोटी डायरी में नोट करें:

  • दिन में कितनी रोटी या कितनी मात्रा में चावल खाए?
  • साथ में दाल, सब्जी या फल कितने लिए?
  • दही खाने के बाद गैस या पेट में कोई बदलाव हुआ?
  • मल सख्त था या सामान्य?
  • शौच के दौरान जोर लगाना पड़ा या नहीं?

लगभग एक-दो सप्ताह का रिकॉर्ड शुरुआती पैटर्न समझने में मदद कर सकता है। लेकिन इतने समय में सुधार न होने का मतलब यह नहीं कि सिर्फ भोजन ही जिम्मेदार है।

कब्ज बनी रहे या बढ़े, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

कब खाने में बदलाव पर्याप्त नहीं होता?

अगर कब्ज कई सप्ताह से बनी हुई है, मल बहुत सख्त है या पेट पूरी तरह साफ नहीं होता, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

खासतौर पर इन स्थितियों को नजरअंदाज न करें:

  • मल में खून आना या काला, तारकोल जैसा मल होना।
  • बिना वजह वजन कम होना।
  • पेट में लगातार या गंभीर दर्द होना।
  • कब्ज के साथ बार-बार उल्टी होना।
  • गैस या मल का निकलना बंद होना।
  • बुखार या अचानक मल त्याग की आदतों में बड़ा बदलाव होना।

गंभीर पेट दर्द, उल्टी और गैस या मल बिल्कुल न निकलने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

कब्ज दवाओं, थायरॉइड संबंधी समस्या, डायबिटीज, आंतों की गति या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है।

कब्ज में सही खानपान समझने के लिए Jiva Ayurveda से सलाह लें

अगर आप रोटी, चावल या दही खाने के बाद कब्ज, पेट भारी रहने या गैस की परेशानी महसूस करते हैं, तो किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी पूरी दिनचर्या और भोजन के पैटर्न की समीक्षा करना उपयोगी है।

Jiva Ayurveda में आप योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपनी कब्ज, पाचन, खानपान और दैनिक आदतों को लेकर परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आहार, जीवनशैली और उपयुक्त आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्पों पर मार्गदर्शन दे सकते हैं। अगर लंबे समय से कब्ज है या लक्षण बढ़ रहे हैं, तो Gastroenterologist से जांच और आवश्यक चिकित्सकीय उपचार भी जरूरी हो सकते हैं।

अगर रोजमर्रा का सामान्य खाना खाने के बावजूद कब्ज परेशान करती है, तो Jiva Ayurveda के डॉक्टर से परामर्श के लिए फॉर्म भरें और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे हमारे नंबर +919266714040 पर। 

कब्ज में सही खानपान का मतलब रोटी, चावल या दही से हमेशा के लिए दूरी बनाना नहीं है। बेहतर तरीका है अपनी थाली को संतुलित रखना, फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाना और यह समझना कि कौन-से बदलाव आपके लिए वास्तव में मददगार हैं।

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। लंबे समय से कब्ज, मल में खून, वजन घटने या गंभीर पेट दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच कराएं। बीमारी के अनुसार भोजन और तरल पदार्थ की जरूरत अलग हो सकती है।

Medical Sources & Research References

  1. NIDDK: Eating, Diet & Nutrition for Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/eating-diet-nutrition

Content Reference: कब्ज में साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दालें, पर्याप्त तरल पदार्थ और फाइबर को धीरे-धीरे बढ़ाने संबंधी सलाह। वयस्कों के लिए लगभग 22–34 ग्राम दैनिक फाइबर की सामान्य जरूरत।

  1. University Hospitals Sussex NHS Foundation Trust: Constipation

Source: https://www.uhsussex.nhs.uk/resources/constipation/

Content Reference: सफेद ब्रेड और सफेद चावल की जगह Wholemeal Bread या Brown Rice जैसे अधिक फाइबर वाले विकल्प चुनना तथा फल-सब्जियां बढ़ाना।

  1. NHS: Good Foods to Help Your Digestion

Source: https://www.nhs.uk/live-well/eat-well/digestive-health/good-foods-to-help-your-digestion/

Content Reference: पाचन में फाइबर की भूमिका, Whole Grains, Brown Rice, Oats, फल-सब्जियों और पानी का महत्व। IBS जैसी स्थितियों में कुछ high-fiber foods से bloating होने की संभावना।

  1. Hull University Teaching Hospitals NHS Trust: Relieving Constipation and Promoting Healthy Bowels

Source: https://www.hey.nhs.uk/patient-leaflet/relieving-constipation-and-promoting-healthy-bowels-improving-you-bowel-health/

Content Reference: Soluble और Insoluble Fiber, भोजन में साबुत अनाज व दालें शामिल करना और फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाना।

  1. BMJ Open (2024): Probiotic-Containing Products and Functional Constipation

Source: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10806726/

Content Reference: 17 randomized studies और 1,256 प्रतिभागियों के विश्लेषण में कुछ प्रोबायोटिक उत्पादों से मल त्याग की आवृत्ति तथा stool consistency में सुधार के संकेत। प्रमाण की गुणवत्ता और अध्ययन परिणामों में अंतर के कारण निष्कर्षों को सावधानी से समझना चाहिए। घरेलू दही के लिए सीधे समान प्रभाव का दावा नहीं किया जा सकता।

  1. NIDDK: Symptoms & Causes of Constipation

Source: https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/constipation/symptoms-causes

Content Reference: कब्ज के कारण, दवाओं एवं स्वास्थ्य समस्याओं की भूमिका और रक्तस्राव, उल्टी, लगातार पेट दर्द या गैस न निकलने पर चिकित्सकीय सहायता की जरूरत।

Patient Forum Research

  1. Reddit: r/Constipation

Discussion: What are your “safe foods” when constipated?

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/197hf6t/

Content Reference: कब्ज में दही कुछ लोगों को आरामदायक लगता है और दूसरे लोगों को उससे परेशानी होती है।

  1. Reddit: r/Constipation

Discussion: Huge game changer for regular BM

Source: https://www.reddit.com/r/Constipation/comments/1ru1e0t/

Content Reference: सादा Greek Yogurt खाने के बाद कुछ लोगों में मल त्याग बेहतर महसूस होने और दूसरे लोगों में लाभ सीमित रहने के अनुभव। साथ खाए गए फलों और फाइबर की संभावित भूमिका भी चर्चा में रही।

  1. Reddit: r/ibs

Discussion: Why does white rice constipate me?

Source: https://www.reddit.com/r/ibs/comments/1fbqpuw/

Content Reference: सफेद चावल खाने के बाद कब्ज या bloating बढ़ने के व्यक्तिगत अनुभव। चर्चा में व्यक्त सभी पोषण संबंधी दावे चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित नहीं हैं।

Research Note: Reddit के अनुभव मरीजों की चिंताओं को समझने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। इन्हें किसी खाद्य पदार्थ के कारणात्मक प्रभाव या उपचार की सफलता का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना गया है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

Top Ayurveda Doctors

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us