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Kids में immunity weak होने के signs क्या हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपका बच्चा भी हर बदलते मौसम के साथ बीमार पड़ जाता है? ज़रा सी हवा लगी नहीं कि सर्दी-ज़ुकाम ने जकड़ लिया। स्कूल जाने वाले बच्चों का बार-बार बीमार पड़ना माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चिंता बन जाता है। अक्सर हम सोचते हैं कि बच्चे तो बीमार पड़ते ही हैं और उन्हें कफ सिरप या दवाइयाँ दे देते हैं। लेकिन क्या सिर्फ दवा पिला देना ही सही तरीका है? बिलकुल नहीं। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि बच्चे का शरीर बीमारियों से लड़ क्यों नहीं पा रहा है, तब तक कोई भी टॉनिक असर नहीं करेगा। बार-बार बीमार होना कोई आम बात नहीं, बल्कि यह बच्चे की कमज़ोर इम्युनिटी (Immunity) का सबसे बड़ा संकेत है।

कमज़ोर इम्युनिटी आखिर है क्या?

इम्युनिटी का मतलब है शरीर की वह प्राकृतिक ढाल जो हमें बीमारियों से बचाती है। बच्चों का शरीर और उनका इम्यून सिस्टम अभी विकास की अवस्था में होता है। लेकिन जब यह ढाल कमज़ोर हो जाती है, तो बाहर के बैक्टीरिया और वायरस बच्चे पर तुरंत हावी हो जाते हैं। इसके पीछे आज की भागदौड़ वाली जीवनशैली, बाहर का जंक फूड और शारीरिक खेलकूद की कमी मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। एसी (AC) में ज़्यादा रहना और मिट्टी में न खेलने की आदत बच्चों के शरीर को नाज़ुक बना देती है। इम्युनिटी सिर्फ बीमारियों से नहीं बचाती, बल्कि यह बच्चे के सही विकास के लिए भी बेहद ज़रूरी है।

क्या हर सर्दी-खाँसी इम्युनिटी कमज़ोर होने का इशारा है?  

जी नहीं, बच्चों को साल में दो-चार बार सर्दी-ज़ुकाम होना बिल्कुल नॉर्मल है। इसी तरह तो उनका शरीर नए कीटाणुओं से लड़ना सीखता है। लेकिन परेशानी तब होती है जब पैटर्न बिगड़ने लगता है। कुछ बच्चों को हर महीने भयंकर खाँसी हो जाती है जो हफ्तों तक ठीक नहीं होती। वहीं, कुछ बच्चों का पेट हमेशा खराब रहता है या वे कुछ भी बाहर का खाते ही उल्टी कर देते हैं। तीसरी स्थिति में बच्चा हमेशा सुस्त और थका हुआ रहता है। मौसम बदलने पर कभी-कभार बीमार होना अलग बात है, लेकिन हर छोटी बात पर शरीर का टूट जाना कमज़ोर इम्युनिटी की पक्की निशानी है।

पेट और पाचन का बच्चों की इम्युनिटी से क्या रिश्ता है?

शायद आपको पता न हो, लेकिन हमारी 70% इम्युनिटी हमारे पेट (Gut) में होती है। बच्चों का हाज़मा अगर खराब रहेगा, तो उनका शरीर बीमारियों से कभी नहीं लड़ पाएगा। जब बच्चे बहुत ज़्यादा मीठा, चॉकलेट या मैदा खाते हैं, तो उनके पेट के अच्छे बैक्टीरिया मरने लगते हैं। पेट में कब्ज़ रहने या गैस बनने से खाया-पिया शरीर को लगता ही नहीं है। अगर बच्चे को बार-बार दस्त लगते हैं या वह हमेशा पेट दर्द की शिकायत करता है, तो समझ लीजिए कि उसका पाचन तंत्र कमज़ोर है। जब तक पेट साफ और मज़बूत नहीं होगा, तब तक कोई भी विटामिन बच्चे को ताकत नहीं दे सकता।

कमज़ोर इम्युनिटी के छिपे हुए गहरे संकेत क्या हैं?

लगातार खाँसी-ज़ुकाम के अलावा भी कई ऐसे लक्षण हैं जो अंदरूनी कमज़ोरी का इशारा करते हैं:

  • घाव देरी से भरना: अगर बच्चे को चोट लगने के बाद उसके घाव या खरोंच भरने में बहुत ज़्यादा समय लग रहा है।
  • सुस्ती और थकान: भरपूर नींद लेने के बाद भी अगर बच्चा हमेशा थका-थका महसूस करे और खेलकूद में उसका मन न लगे।
  • वज़न और ग्रोथ रुकना: उम्र के हिसाब से बच्चे का वज़न और लंबाई न बढ़ना कमज़ोर इम्युनिटी का बहुत बड़ा संकेत है।
  • स्किन इन्फेक्शन: बार-बार त्वचा पर दाने होना, रैशेज़ या फंगल इन्फेक्शन होना भी शरीर की अंदरूनी कमज़ोरी दिखाता है।

आयुर्वेद बच्चों की कमज़ोर इम्युनिटी को कैसे देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, बच्चों की इम्युनिटी को 'बाल' या 'ओजस' कहा जाता है। ओजस हमारे शरीर की वह असली ताकत है जो धातुओं के सही पोषण से बनती है। जब बच्चे गलत समय पर गलत आहार लेते हैं, तो उनके पेट में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनने लगता है। यह ज़हरीला 'आम' पोषण ले जाने वाली नलियों को ब्लॉक कर देता है। इसके अलावा, बच्चों में कफ दोष स्वाभाविक रूप से ज़्यादा होता है। जब कफ बुरी तरह असंतुलित हो जाता है, तो बच्चे बार-बार छाती के इन्फेक्शन, अस्थमा या एलर्जी का शिकार होने लगते हैं। शरीर के दोषों का बिगड़ना ही कमज़ोरी की असली जड़ है।

बच्चों की इम्युनिटी मज़बूत बनाने वाली असरदार जड़ी-बूटियाँ

बच्चों के शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने के लिए आयुर्वेद में सबसे खास और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ ये हैं:

  • गिलोय: यह इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे बड़ा प्राकृतिक टॉनिक है। यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालती है और बार-बार होने वाले बुखार से बचाती है।
  • तुलसी: तुलसी के पत्तों का रस बच्चों को सर्दी, खाँसी और गले के इन्फेक्शन से बचाने में किसी जादू की तरह काम करता है।
  • आंवला: विटामिन सी से भरपूर आंवला बच्चों की आँखों, बालों और पूरे इम्यून सिस्टम को नई ऊर्जा और ताकत देता है।
  • हल्दी: दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर देने से शरीर की अंदरूनी सूजन खत्म होती है और कीटाणुओं से लड़ने की ताकत मिलती है।

रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें बच्चों को कमज़ोर बना रही हैं?

अनजाने में की गई हमारी ही कुछ आदतें बच्चों के शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं:

  • मिट्टी से दूरी: बच्चों को हर समय बंद कमरों और साफ-सुथरे माहौल में रखने से उनका शरीर प्राकृतिक बैक्टीरिया से लड़ना ही नहीं सीख पाता।
  • स्क्रीन टाइम: मोबाइल और टीवी में घंटों चिपके रहने से बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी खत्म हो गई है, जिससे वे सुस्त हो रहे हैं।
  • देर से सोना: रात को देर तक जागने से बच्चों की ग्रोथ हार्मोन और इम्युनिटी वाली कोशिकाएँ सही से बन नहीं पातीं।
  • एसी (AC) की आदत: दिन-रात एसी में रहने से बच्चों के शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम कमज़ोर पड़ जाता है।

जंक फूड कैसे बच्चों की इम्युनिटी को दीमक की तरह खा रहा है?

आप बच्चे की प्लेट में जो परोसते हैं, वह या तो दवा है या ज़हर। रोज़ाना पैकेट बंद चिप्स, बिस्कुट और नूडल्स खाने से शरीर को कोई असली पोषण नहीं मिलता। ज़्यादा मीठी चीज़ें और कोल्ड ड्रिंक्स शरीर की सफेद रक्त कोशिकाओं को सुस्त कर देती हैं। मैदा आंतों में जाकर चिपक जाता है और पाचन को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। पैकेट वाले खानों में मौजूद केमिकल और कलर बच्चों के लिवर और इम्युनिटी पर सीधा हमला करते हैं। जब तक घर की डाइट नहीं सुधरेगी, बच्चे बार-बार बीमार पड़ते ही रहेंगे।

बार-बार एंटीबायोटिक देना कितना खतरनाक है?

बच्चे को हल्का सा बुखार या खाँसी होते ही तुरंत एंटीबायोटिक दवाइयाँ दे देना सबसे बड़ी गलती है। ये दवाइयाँ बुरे बैक्टीरिया के साथ-साथ पेट के अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देती हैं। शरीर का अपना सिस्टम इतना सुस्त हो जाता है कि वह खुद से लड़ना ही भूल जाता है। लगातार एंटीबायोटिक खाने से पेट में बहुत ज़्यादा गर्मी बढ़ती है और बच्चों की भूख मर जाती है। अगली बार जब बच्चा बीमार पड़ता है, तो साधारण दवाइयाँ उस पर असर ही नहीं करतीं। इसलिए डॉक्टर की सख्त सलाह के बिना कभी भी ये दवाइयाँ न दें।

बच्चों को सेहतमंद रखने के लिए रोज़ क्या करें?

बच्चों को बीमार होने से बचने के लिए  उनकी लाइफ़स्टाइल में ये बदलाव करें 

  • बच्चों को नाश्ता कराएं:  बच्चों को खाली पेट कभी भी स्कूल न भेजें उन्हें फल या दलिया  का नाश्ता कराएं जिससे उनके अंदर दिन भर ताकत बनी रहे 
  • पानी का ध्यान रखना: उन्हें दिन भर थोड़ा थोड़ा पानी पिलाते रहें इससे शरीर की गंदगी  बाहर निकलती है और बच्चे फुर्तीले होते हैं 
  • साफ सफाई : खाने से पहले और बाहर से खेल के आयें तो उनको हाथ धोना सिखाएं ये छोटी सी आदत बीमारियों को दूर रखती है 
  • घर का खाना: बाहर के जंक फूड के बजाय उन्हें घर का ताज़ा और पौष्टिक खाना ही खिलाएँ यही उनकी सेहत के लिए सबसे बेस्ट है

बच्चे को डॉक्टर के पास कब ले जाएं?

अगर घरेलू नुस्खों से बच्चे को आराम न मिले, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। खासकर इन हालात में:

  • बुखार न उतरे: अगर 2-3 दिन से लगातार तेज बुखार हो।
  • साँस में दिक्कत: साँस लेने में जोर लगाना पड़े या छाती से आवाज़ आए।
  • उल्टी-दस्त न रुकें: बच्चा कुछ खा-पी न पाए और लगातार उल्टी या दस्त हो रहे हों।
  • बच्चा निढाल हो जाए: वह एकदम सुस्त हो जाए और बस लेटा ही रहे।

बच्चों की इम्युनिटी के लिए खास आयुर्वेदिक सुझाव

​बच्चों को अंदर से मजबूत बनाने के लिए आयुर्वेद में कुछ बहुत ही बढ़िया और आसान तरीके बताए गए हैं।

​इनमें सबसे काम की चीज़ है सोने (Gold) की भस्म चटाना। यह पुराने ज़माने का एक बहुत ही असरदार तरीका है, जिसे आप एक तरह की खास आयुर्वेदिक घुट्टी समझ सकते हैं। इसमें सोने के बहुत ही बारीक पाउडर (भस्म) को शुद्ध देसी घी और शहद में मिलाकर बच्चे को थोड़ा सा चटाया जाता है। इससे बच्चे का दिमाग भी तेज़ होता है और वो बार-बार बीमार पड़ने से भी बचता है।​इसके अलावा, एक और आसान काम आप कर सकते हैं। रोज़ रात को सोते टाइम बच्चे के पैरों के तलवों पर हल्के गर्म सरसों के तेल या गाय के घी से मालिश कर दें। इससे बच्चे की दिन भर की थकान निकल जाती है, उसे बड़ी अच्छी नींद आती है और उसका शरीर अपने आप अंदर से ताकतवर बनने लगता है।

अंग्रेजी और आयुर्वेदिक इलाज में फर्क:

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य बीमारी की पहचान, उपचार और जटिलताओं की रोकथाम। समग्र स्वास्थ्य, पाचन और शरीर के संतुलन पर ध्यान।
उपचार तरीका आवश्यकतानुसार दवाएँ, पोषण, टीकाकरण और अन्य चिकित्सकीय उपाय। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार और पारंपरिक उपचार।
पाचन पर ध्यान पोषण और पाचन संबंधी समस्याओं का चिकित्सकीय प्रबंधन किया जाता है। पाचन शक्ति (अग्नि) को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता संतुलित आहार, टीकाकरण और उचित उपचार से स्वास्थ्य को समर्थन मिलता है। जीवनशैली और पारंपरिक उपायों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग की रोकथाम और स्वस्थ विकास पर ध्यान दिया जाता है। शरीर के संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

निष्कर्ष

बच्चे हमारे घर की रौनक होते हैं। उनका बार-बार बीमार पड़ना यह इशारा है कि शरीर अंदर से कमज़ोर हो रहा है। हर बार दवाइयों की बोतलों पर निर्भर होना सही समाधान नहीं है। बच्चे की दिनचर्या में सुधार, घर का पौष्टिक खानपान, बाहर का खेलकूद और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर उनकी इम्युनिटी को जड़ से मज़बूत किया जा सकता है। याद रखें, एक मज़बूत शरीर रातों-रात नहीं बनता; इसके लिए बचपन से ही सही आदतें डालनी पड़ती हैं। अपने बच्चे की आदतों को सुधारें और उन्हें एक स्वस्थ, ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ाने में मदद करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, थोड़ी बहुत मिट्टी में खेलने से बच्चों का शरीर अच्छे प्राकृतिक बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, जिससे उनकी इम्युनिटी और मज़बूत होती है।

दूध अच्छा है, लेकिन अगर बच्चे को अक्सर कफ या खाँसी रहती है, तो ज़्यादा दूध देना उसकी परेशानी और बलगम बढ़ा सकता है।

सर्दियों के मौसम में सुबह नाश्ते से पहले एक चम्मच च्यवनप्राश गुनगुने पानी या दूध के साथ देना सबसे ज़्यादा फायदेमंद होता है।

हाँ, ज़्यादा चीनी खाने से शरीर की बीमारियों से लड़ने वाली सफेद कोशिकाएँ कई घंटों तक सुस्त पड़ जाती हैं।

यह साफ इशारा है कि बच्चे का इम्यून सिस्टम कमज़ोर है और वह आम मौसम के कीटाणुओं से भी नहीं लड़ पा रहा है।

बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ सिरप देना सही नहीं है। असली पोषण घर के ताज़े खाने और फलों से मिलना ज़्यादा बेहतर है।

आंवला, संतरा, पपीता, कीवी और अमरूद जैसे विटामिन सी से भरपूर फल बच्चों की इम्युनिटी के लिए बेहतरीन हैं।

हाँ, लगातार ठंडी हवा में रहने से शरीर की प्राकृतिक गर्मी कम हो जाती है और बाहर के तापमान को सहने की क्षमता घट जाती है।

रातों-रात इम्युनिटी नहीं बढ़ती। सही नींद, घर का खाना और रोज़ाना खेलकूद का रूटीन ही इसका सबसे पक्का इलाज है।

हाँ, रात को सोते समय एक कप गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर देना बहुत सुरक्षित और फायदेमंद आयुर्वेदिक उपाय है।

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