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रोज़ 8 घंटे कुर्सी पर बैठना शरीर को डायबिटीज की ओर कैसे ले जाता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज के दौर में दफ़्तरों में बैठकर घंटों काम करना हमारी मजबूरी बन चुका है, लेकिन यही सिटिंग जॉब हमारे शरीर के लिए एक साइलेंट किलर साबित हो रही है। जब हम रोज़ाना 8 से 10 घंटे कुर्सी पर चिपके रहते हैं, तो हमारा मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे शरीर में शुगर को पचाने की क्षमता कम होने लगती है। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसे अगर शुरुआती दौर में न संभाला जाए, तो यह शरीर के हर अंग को धीरे-धीरे खोखला कर सकती है। समय पर इसका इलाज और जीवनशैली में बदलाव करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि आपकी ज़िंदगी को अब गति और संतुलन की सख़्त ज़रूरत है।

डायबिटीज या मधुमेह क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, हमारा शरीर जो भी खाना खाता है, वह ग्लूकोज शुगर में बदल जाता है ताकि हमें ऊर्जा मिल सके। इस शुगर को कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम इंसुलिन नाम का हार्मोन करता है। डायबिटीज वह स्थिति है जहाँ या तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर कोशिकाएं उस इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं। नतीजा यह होता है कि शुगर कोशिकाओं में जाने के बजाय खून में ही जमा होने लगती है। सरल शब्दों में, यह आपके शरीर की ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली का पूरी तरह से बिगड़ जाना है।

 डायबिटीज के विभिन्न प्रकार और उनकी अवस्थाएं

डायबिटीज को मुख्य रूप से इन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

टाइप 1 डायबिटीज यह एक ऑटो-इम्यून स्थिति है जहाँ शरीर का रक्षा तंत्र ही इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।

टाइप 2 डायबिटीज यह सबसे आम प्रकार है, जो सुस्त जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण होता है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।

प्री-डायबिटीज यह वह स्थिति है जहाँ शुगर का स्तर सामान्य से ज़्यादा है लेकिन अभी वह डायबिटीज की श्रेणी में नहीं आया है। यहाँ बदलाव की सबसे ज़्यादा गुंजाइश होती है।

जेस्टेशनल डायबिटीज यह केवल गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होता है और प्रसव के बाद अक्सर ठीक हो जाता है।

मैच्योरिटी-ऑनसेट डायबिटीज यह अनुवांशिक कारणों से होता है और अक्सर कम उम्र में ही दिखाई दे सकता है।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

बार-बार पेशाब आना खून में शुगर बढ़ने पर गुर्दे उसे बाहर निकालने के लिए ज़्यादा मेहनत करते हैं।

अत्यधिक प्यास और भूख शुगर कोशिकाओं तक न पहुँचने के कारण शरीर हर वक़्त प्यासा और ऊर्जा के लिए भूखा महसूस करता है।

धुंधली दृष्टि हाई शुगर आँखों के लेंस की नमी को प्रभावित करती है जिससे साफ़ दिखने में दिक़्क़त होती है।

ज़ख़्म भरने में देरी शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे छोटी सी चोट भी गंभीर रूप ले सकती है।

हाथ-पैरों में झनझनाहट नसों पर शुगर का बुरा असर होने से सुन्नपन या सुइयाँ चुभने जैसा अहसास होता है।

सुस्त जीवनशैली और डायबिटीज के मुख्य कारण

शारीरिक निष्क्रियता घंटों बैठे रहने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है, जिससे वे खून से शुगर सोखना बंद कर देती हैं।

इंसुलिन रेजिस्टेंस जब हम सक्रिय नहीं होते, तो शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ज़िद्दी हो जाती हैं।

तनावपूर्ण कार्य वातावरण दफ़्तर का तनाव कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो सीधे शुगर के स्तर को भड़काता है।  

गलत खान-पान काम के दौरान बार-बार चाय, कॉफी या जंक फूड का सेवन करना शुगर को तेज़ी से बढ़ाता है।

नींद की कमी देर रात तक काम करना या स्क्रीन देखना शरीर के मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह बिगाड़ देता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और जटिलताएं

जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता को डायबिटीज है, तो आपका ख़तरा दोगुना हो जाता है।

पेट की चर्बी यदि वज़न ज़्यादा है और चर्बी पेट के पास जमा है, तो इंसुलिन सही काम नहीं कर पाता।

उच्च रक्तचाप हाई बीपी और डायबिटीज अक्सर एक साथ शरीर पर हमला करते हैं।

बढ़ती उम्र 35 साल की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से धीमा होने लगता है।

धूम्रपान और शराब ये दोनों शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

गुर्दों की बीमारी लंबे समय तक हाई शुगर गुर्दों की छननी प्रणाली को खराब कर सकती है।

हृदय रोग डायबिटीज के मरीज़ों में दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी नसों का स्थायी रूप से डैमेज होना, जिससे अंगों को काटना भी पड़ सकता है।

दृष्टिहीनता रेटिनोपैथी आँखों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं का फट जाना जिससे अंधापन हो सकता है।

त्वचा संक्रमण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बार-बार फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना।

डायबिटीज की जाँच कैसे की जाती है?

फास्टिंग ब्लड शुगर सुबह खाली पेट खून की जाँच जिससे रात भर के शुगर स्तर का पता चलता है।

पीपी टेस्ट खाना खाने के ठीक दो घंटे बाद शुगर के स्तर को मापना।

HbA1c टेस्ट यह पिछले तीन महीनों के औसत शुगर स्तर को बताता है, जो सबसे विश्वसनीय जाँच मानी जाती है।

जीएलटी टेस्ट यह ग्लूकोज सहिष्णुता की जाँच करता है कि शरीर शुगर को कितनी तेज़ी से प्रोसेस कर रहा है।

पेशाब की जाँच यह देखने के लिए कि क्या शुगर या कीटोन पेशाब के रास्ते बाहर निकल रहे हैं।

आयुर्वेद में डायबिटीज प्रमेह और कफ दोष का प्रभाव

आयुर्वेद में डायबिटीज को प्रमेह कहा जाता है, जिसमें 20 प्रकार के पेशाब विकारों का वर्णन है

मंदाग्नि और कफ घंटों बैठकर काम करने से शरीर में कफ दोष बढ़ता है और पाचन अग्नि मंद हो जाती है। यह बढ़ा हुआ कफ ओजस शरीर की शुद्ध ऊर्जा को नष्ट करता है।

आम का निर्माण अधूरा पचा हुआ भोजन आम टॉक्सिन्स बनाता है जो शरीर के स्रोतों को अवरुद्ध Block कर देता है।

धातु क्षय आयुर्वेद मानता है कि डायबिटीज शरीर की धातुओं ऊतकों को गला कर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है, जिससे कमज़ोरी आती है।

डायबिटीज को नियंत्रित करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

मेथी दाना यह शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए बेहतरीन है।

करेला और जामुन इनका कड़वा और कसैला रस खून को साफ़ करता है और शुगर को कम करता है।

गुड़मार जैसा कि नाम से पता चलता है, यह मीठे की तलब को मारता है और शुगर के अवशोषण को रोकता है।

विजयासार प्राचीन काल से ही इसका उपयोग मधुमेह के इलाज में एक रामबाण औषधि के रूप में किया जाता रहा है।

आयुर्वेदिक थेरेपी और पंचकर्म उपचार

वस्ति चिकित्सा औषधीय काढ़े और तेल के ज़रिए शरीर का शोधन, जो वायु दोष को शांत करता है।

उद्वर्तन सूखे जड़ी-बूटी के चूर्ण से मालिश करना, जो शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है।

विरेचन पित्त और रक्त की अशुद्धि निकालने के लिए किया जाने वाला शोधन जो शुगर कंट्रोल में मदद करता है।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्या खाएं

साबुत अनाज जौ, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ करते हैं।

हरी सब्जियाँ लौकी, तोरई, करेला और मेथी जैसी सब्जियाँ जो फाइबर से भरपूर हों।

दालें और फल मूंग की दाल और फाइबरयुक्त फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में।

क्या न खाएं

सफेद ज़हर चीनी, मैदा और सफेद चावल का सेवन बिल्कुल बंद कर देना ज़रूरी है।

मीठे फल आम, चीकू, अंगूर और केले जैसे फलों से बचें क्योंकि ये शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

तला-भुना भोजन बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद जूस शरीर में आम Toxins बढ़ाते हैं।

 इलाज से क्या फ़ायदा मिल सकता है? 

  1. अंगों की सुरक्षा समय पर इलाज से आपके गुर्दे, आँखें और दिल आने वाले बड़े ख़तरे से बच जाते हैं।
  2. ऊर्जा में वृद्धि जब शुगर खून के बजाय कोशिकाओं में पहुँचती है, तो आप दिन भर सक्रिय महसूस करते हैं।
  3. दवाओं के बोझ से मुक्ति संतुलित जीवनशैली से आप भारी डोज़ वाली दवाओं और उनके दुष्प्रभावों से बच सकते हैं।
  4. मानसिक स्पष्टता शुगर कंट्रोल होने से ब्रेन फॉग खत्म होता है और काम में एकाग्रता बढ़ती है।
  5. बेहतर जीवन प्रत्याशा आप एक लंबी, स्वस्थ और बिना किसी शारीरिक पाबंदी वाली ज़िंदगी जी सकते हैं।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज  आयुर्वेदिक इलाज 
लक्ष्य इसका मुख्य ध्यान रक्त में मौजूद शुगर को तुरंत नियंत्रित करने पर होता है। इसका लक्ष्य पाचन अग्नि को बढ़ाकर और पेनक्रियाज को सक्रिय कर शुगर के मूल कारण को ठीक करना है।
तरीका यह इंसुलिन या ओरल दवाओं के माध्यम से शरीर को बाहर से मदद देता है। यह शरीर की अपनी इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को सक्रिय करता है।
साइड इफ़ेक्ट लंबे समय तक दवाओं के सेवन से किडनी और पाचन तंत्र पर नुकसान का खतरा रहता है। जड़ी-बूटियों और संतुलित आहार पर आधारित, अपेक्षाकृत सुरक्षित और पोषण देने वाला उपचार।
दृष्टिकोण यह बीमारी के लक्षणों का इलाज करता है। यह मरीज़ की प्रकृति और होलिस्टिक हीलिंग Holistic Healing पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  •   यदि आपको अचानक बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे और गला सूखने लगे।
  •   यदि बिना किसी कारण के आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिरने लगे।
  •   यदि आपको पैरों के तलवों में जलन या सुइयाँ चुभने जैसा दर्द महसूस हो।
  •   यदि कोई छोटा सा घाव हफ़्तों तक ठीक न हो रहा हो।
  •   यदि आपको हर वक़्त बहुत ज़्यादा थकान और सुस्ती महसूस हो रही हो।

 निष्कर्ष

कुर्सी पर बैठकर बिताया गया हर एक घंटा आपकी सेहत से उसकी ऊर्जा छीन रहा है। डायबिटीज कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपकी गलत आदतों का एक परिणाम है। आयुर्वेद का होलीस्टिक हीलिंग नज़रिया आपको दवाओं के चक्रव्यूह से बाहर निकालकर एक प्राकृतिक और सक्रिय ज़िंदगी की ओर ले जाता है। आज ही संकल्प लें कि आप हर एक घंटे के बाद 5 मिनट का ब्रेक लेंगे और अपनी सेहत के प्रति ज़िम्मेदार बनेंगे।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

  हाँ, महज़ 5 मिनट टहलने से भी आपकी मांसपेशियाँ सक्रिय हो जाती हैं और शुगर को बेहतर तरीके से प्रोसेस करने लगती हैं।

   सिर्फ चीनी छोड़ना काफी नहीं है, चाय में मौजूद दूध और कैफीन भी मेटाबॉलिज्म पर असर डालते हैं, इसलिए संतुलित मात्रा ही बेहतर है।

   जी हाँ, मानसिक तनाव शरीर में 'ग्लूकोनोजेनेसिस' की प्रक्रिया बढ़ाता है जिससे खून में शुगर का स्तर तेज़ी से ऊपर जाता है।

 बिल्कुल, रात में मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, देर से खाने पर शुगर शरीर में जमा होने लगती है जिसे पचाना मुश्किल होता है।

 आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखा पानी 'प्रमेह' यानी डायबिटीज को नियंत्रित करने और पाचन सुधारने में मदद करता है।

 हाँ, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल जैसे अमरूद, पपीता और सेब सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं।

   डायबिटीज के लिए रोज़ाना 30-40 मिनट की तेज़ सैर (Brisk Walking) सबसे बेहतर और प्राकृतिक व्यायाम माना जाता है।

  नहीं, बिना खान-पान और जीवनशैली में बदलाव किए केवल दवा से डायबिटीज को जड़ से काबू करना नामुमकिन है।

   लहसुन में 'एलिसिन' होता है जो इंसुलिन के स्तर को सुधारने और हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत फ़ायदा पहुँचाता है।

   जीवा आपकी प्रकृति के अनुसार कस्टमाइज़्ड दवाइयाँ और 'सात्विक' डाइट प्लान देता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को खत्म करने में मदद करते हैं।

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