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Thyroid में Brain Fog - सोचने में ज़ोर लगता है, क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan

बात करते-करते अचानक शब्द भूल जाना, कोई चीज़ रखकर भूल जाना या एक ही लाइन को बार-बार पढ़ना... क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? अगर आपको थायराइड (Thyroid) की समस्या है, तो दिमाग का इस तरह सुन्न या भारी महसूस होना बहुत आम है। इसे मेडिकल भाषा में 'ब्रेन फॉग' (Brain Fog) कहते हैं। यह कोई ऐसा अनुभव नहीं है जिसे आप बस आलस कहकर टाल दें। जब आपका दिमाग घने कोहरे (Fog) जैसी स्थिति में होता है, तो छोटी-छोटी बातों पर भी सोचने में बहुत ज़ोर लगाना पड़ता है और इंसान अंदर ही अंदर चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में कई लोग खुद को दोष देने लगते हैं या तुरंत राहत के लिए दिन भर चाय-कॉफी पीते रहते हैं। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिलकुल नहीं। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि थायराइड आपके दिमाग को कैसे धीमा कर रहा है, तब तक कोई भी कैफीन या एनर्जी ड्रिंक आपको ठीक नहीं कर सकती। यह समझना बेहद ज़रूरी है कि ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि आपके असंतुलित थायराइड का एक लक्षण है, जिसे सही दिनचर्या और प्राकृतिक तरीकों से सुधारा जा सकता है।

थायराइड में ब्रेन फॉग क्यों होता है?

ब्रेन फॉग की समस्या किसी एक कारण से नहीं होती। हमारा थायराइड ग्लैंड शरीर के इंजन की तरह काम करता है। यह जो हार्मोन (T3 और T4) बनाता है, वही हमारे दिमाग की कोशिकाओं को काम करने की एनर्जी देते हैं। जब आपको हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) होता है, तो दिमाग को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती। इस वजह से नर्वस सिस्टम धीमा पड़ जाता है। दिमाग का वो हिस्सा जो याददाश्त और फोकस के लिए ज़िम्मेदार होता है, वह सुस्त होने लगता है। इसके अलावा, शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से दिमाग में खून और ऑक्सीजन का संचार भी कम हो जाता है। यही कारण है कि आप शारीरिक रूप से तो थकते ही हैं, मानसिक रूप से भी पूरी तरह टूट जाते हैं। असल में फोकस कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती लाया जा सके; जब दिमाग को सही पोषण मिलेगा, तो वह खुद तेज़ हो जाएगा।

क्या ब्रेन फॉग की परेशानी हर समय एक जैसी होती है?

जी नहीं, ब्रेन फॉग की परेशानी हर व्यक्ति के लिए और पूरे दिन एक जैसी नहीं होती। इसे आप अलग-अलग स्थितियों में महसूस कर सकते हैं। कुछ लोगों को सुबह सोकर उठने के बाद बहुत ज़्यादा सुस्ती लगती है, उनका दिमाग काम शुरू करने में घंटों लगा देता है। वहीं, कुछ लोगों को दिन के बीच में (दोपहर के समय) अचानक ऐसा लगता है कि दिमाग की सारी बैटरी खत्म हो गई है और वे कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। एक स्थिति वह होती है जब इंसान बात करते-करते बीच में अटक जाता है और सही शब्द याद नहीं कर पाता। कुछ लोगों के लिए यह परेशानी कभी-कभार होती है, जबकि कइयों के लिए यह रोज़ की थका देने वाली आदत बन जाती है। इसलिए अपनी इस परेशानी के पैटर्न को पहचानना सबसे पहला कदम है।

तनाव और चिंता का ब्रेन फॉग पर क्या असर पड़ता है?

तनाव और ब्रेन फॉग एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। जब हम थायराइड के साथ-साथ तनाव लेते हैं, तो दिमाग और भी ज़्यादा उलझ जाता है:

  • कॉर्टिसोल का बढ़ना: तनाव के कारण शरीर में 'कॉर्टिसोल' नाम का स्ट्रेस हार्मोन काफी बढ़ जाता है, जो थायराइड हार्मोन को दिमाग तक पहुंचने से रोकता है।
  • दिमागी उलझन: चिंता हमारे दिमाग को शांत नहीं होने देती। कई तरह के विचार एक साथ चलने से दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड कम हो जाती है।
  • थकावट: स्ट्रेस में दिमाग लगातार चलता रहता है, जिससे वह जल्दी थक जाता है और सोचने-समझने की ताकत घट जाती है।
  • हल्की नींद: तनाव के कारण नींद कच्ची होती है। जब दिमाग रात में रीचार्ज नहीं होता, तो अगले दिन फॉग और भी गहरा हो जाता है।

क्या आपका ब्रेन फॉग किसी गहरी वजह का संकेत है?

लगातार दिमाग सुस्त रहना सिर्फ थायराइड कम होने की निशानी नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है:

  • पोषक तत्वों की भारी कमी: विटामिन B12, आयरन या विटामिन D की कमी थायराइड के मरीजों में आम है, जो सीधे याददाश्त पर वार करती है।
  • सूजन (Inflammation): हाशिमोटो (Hashimoto's) जैसी ऑटोइम्यून बीमारी में शरीर के अंदर सूजन रहती है, जो दिमाग की नसों को भी प्रभावित करती है।
  • गट हेल्थ (पाचन तंत्र): अगर आपका पेट ठीक नहीं है या कब्ज़ रहती है, तो दिमाग तक सही पोषण नहीं पहुंच पाता (Gut-Brain Connection)।
  • ब्लड शुगर का असंतुलन: शरीर में शुगर का लेवल बार-बार ऊपर-नीचे होना भी दिमाग को सुन्न और थका हुआ महसूस कराता है।

आयुर्वेद में ब्रेन फॉग का मूल कारण क्या माना जाता है?

आयुर्वेद के अनुसार, थायराइड में होने वाले ब्रेन फॉग को हम शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने और दोषों के बिगड़ने से जोड़ कर देख सकते हैं:

  • कफ दोष का बढ़ना: थायराइड धीमा होने पर शरीर में कफ बढ़ता है। कफ की प्रकृति भारी और ठंडी होती है, जो दिमाग में भारीपन और आलस पैदा करती है।
  • वात का असंतुलन: जब वात (हवा तत्व) बिगड़ता है, तो दिमाग की नसें सूखने लगती हैं, जिससे भूलने की बीमारी और विचारों में अस्थिरता आती है।
  • आम (Toxins) का नाड़ियों में जमाव: खराब पाचन की वजह से शरीर में जो विषैले तत्व बनते हैं, वे दिमाग की नाड़ियों (Channels) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे सोचने की गति रुक जाती है।
  • ओजस की कमी: थायराइड के कारण शरीर का 'ओज' (इम्यूनिटी और वाइटैलिटी) घट जाता है, जिससे दिमाग को ताक़त नहीं मिलती।

थायराइड और ब्रेन फॉग को सुधारने वाली जादुई जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद में कुछ खास जड़ी-बूटियां हैं जो सीधे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर काम करती हैं:

  • ब्राह्मी (Brahmi): यह दिमाग की कोशिकाओं को नया जीवन देती है। यह वात को शांत करती है और फोकस तथा याददाश्त को बढ़ाने में सबसे असरदार है।
  • शंखपुष्पी (Shankhpushpi): यह जड़ी-बूटी दिमाग के भारीपन और तनाव को कम करती है। यह नसों को आराम देकर सोचने-समझने की क्षमता (Cognitive function) को तेज़ करती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करती है और थायराइड ग्लैंड को सही से काम करने के लिए ताक़त देती है, जिससे दिमागी थकान मिटती है।
  • जटामांसी (Jatamansi): यह दिमाग को शांत करने और याददाश्त को पक्का करने के लिए बहुत बेहतरीन मानी जाती है। यह नींद की क्वालिटी को भी सुधारती है।

ज़्यादा मोबाइल चलाने से दिमाग कैसे प्रभावित होता है?

आजकल हर वक्त स्क्रीन देखना ब्रेन फॉग को और भी ज़्यादा खराब कर देता है:

  • सेंसरी ओवरलोड: मोबाइल से लगातार आने वाली जानकारी हमारे पहले से थके हुए दिमाग पर एक्स्ट्रा बोझ डालती है।
  • ब्लू लाइट का असर: स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को रोकती है, जिससे दिमाग को शांति वाली नींद नहीं मिल पाती।
  • डोपामीन क्रैश: सोशल मीडिया पर बार-बार रील देखने से डोपामीन बढ़ता है और फिर अचानक गिरता है, जिससे सुस्ती और चिड़चिड़ापन आता है।
  • आंखों और दिमाग पर ज़ोर: लगातार स्क्रीन पर फोकस करने से दिमागी ऊर्जा खत्म होती है और माथे में भारीपन आ जाता है।

गलत खानपान कैसे आपकी सोचने की ताक़त कम करता है?

आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपके थायराइड और दिमाग दोनों पर पड़ता है:

  • मीठी चीज़ें (Sugar): ज़्यादा चीनी खाने से थोड़ी देर के लिए तो एनर्जी आती है, लेकिन उसके बाद भयंकर दिमागी सुस्ती (Sugar Crash) छा जाती है।
  • ग्लूटेन (Gluten): मैदा या गेहूं की चीज़ें कई थायराइड मरीजों के शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाती हैं, जो सीधा ब्रेन फॉग का कारण बनता है।
  • कैफीन का ज़्यादा सेवन: थकावट मिटाने के लिए बार-बार चाय-कॉफी पीना आपके नर्वस सिस्टम को ओवरड्राइव में डाल देता है, जिससे अंदरूनी कमज़ोरी बढ़ती है।
  • प्रोसेस्ड फूड: पैकेट बंद खाने में मौजूद केमिकल्स दिमाग की काम करने की क्षमता को धीमा कर देते हैं।

किन अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण दिमाग सुन्न महसूस होता है?

कई बार आप अपनी थायराइड की दवा भी सही ले रहे होते हैं, फिर भी कुछ बीमारियों के कारण ब्रेन फॉग नहीं जाता:

  • स्लीप एप्निया (Sleep Apnea): रात में खर्राटे आना या सांस रुकना, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और सुबह उठकर भी भारीपन लगता है।
  • एनीमिया (खून की कमी): शरीर में खून की कमी होने से दिमाग तक ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं जाती, जिससे सुन्नपन महसूस होता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर में शुगर पच न पाने के कारण दिमाग की कोशिकाओं को ग्लूकोज़ नहीं मिलता।
  • डिप्रेशन और एंग्जायटी: लगातार उदासी या घबराहट दिमाग की प्रोसेसिंग क्षमता को पूरी तरह ब्लॉक कर देती है।

सिर्फ थायराइड की गोली (Thyroid Pill) से ब्रेन फॉग क्यों नहीं जाता?

ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि सुबह खाली पेट थायराइड की एक गोली खा लेने से उनकी सारी थकान और सुस्ती दूर हो जाएगी। लेकिन यह सिर्फ एक भ्रम है। थायराइड की गोली (जैसे थायरॉक्सिन) खून में हार्मोन का लेवल तो ठीक कर देती है, लेकिन यह उन कारणों को खत्म नहीं करती जो कोशिकाओं के अंदर चल रहे हैं। जब तक आपके शरीर में विटामिन्स की कमी है, पेट खराब है या शरीर में सूजन (Inflammation) है, तब तक वह हार्मोन आपके दिमाग की नसों तक सही से नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए सिर्फ एक गोली पर निर्भर रहना ब्रेन फॉग का स्थायी समाधान नहीं है; आपको अपनी जीवनशैली भी बदलनी होगी।

बिना दवा के दिमाग की सुस्ती दूर करने के प्राकृतिक तरीके

प्राकृतिक रूप से दिमाग को एक्टिव करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

  • गहरी सांसें (Deep Breathing): अनुलोम-विलोम या भ्रामरी प्राणायाम दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाते हैं और सुस्ती को तुरंत तोड़ते हैं।
  • हाइड्रेशन (Hydration): दिन भर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं। दिमाग का 70% हिस्सा पानी है, थोड़ी सी भी कमी फॉग ले आती है।
  • धूप लेना: सुबह की हल्की धूप विटामिन D देती है, जो दिमाग और थायराइड दोनों के लिए बूस्टर का काम करती है।
  • हल्का व्यायाम: तेज़ चलना या स्ट्रेचिंग करने से खून का दौरा तेज़ होता है और दिमाग की नसें खुलती हैं।
  • नोट्स बनाएँ : बहुत ज़्यादा चीज़ें याद रखने का ज़ोर दिमाग पर न डालें। छोटी-छोटी बातें डायरी या फोन में नोट करने की आदत डालें।

तेज़ दिमाग के लिए रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें अपनाएँ ?

अपनी मेंटल क्लैरिटी को वापस लाने के लिए रूटीन में ये बदलाव लाएँ :

  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन को खुद से दूर रख दें ताकि दिमाग शांत हो सके।
  • सिंगल-टास्किंग करें: एक साथ बहुत सारे काम (Multitasking) करने की जगह, एक समय में सिर्फ एक काम पर फोकस करें।
  • पौष्टिक नाश्ता: सुबह के नाश्ते में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स (जैसे अखरोट, बादाम) ज़रूर लें, ये दिमाग का खाना हैं।
  • ब्रेन ब्रेक्स: काम के बीच में हर एक घंटे बाद 5 मिनट का ब्रेक लें, आंखें बंद करें और दिमाग को रिलैक्स होने दें।
  • नींद का रूटीन: रोज़ रात को एक ही समय पर सोने की आदत डालें।, गहरी नींद ब्रेन फॉग की सबसे अच्छी दवा है।

आयुर्वेद ब्रेन फॉग की समस्या को कैसे देखता है?

आयुर्वेद में थायराइड और ब्रेन फॉग को 'रस धातु' (प्लाज्मा) और 'मज्जा धातु' (नर्वस सिस्टम) की कमज़ोरी माना जाता है। जब हमारी 'जठराग्नि' (पाचन तंत्र) कमज़ोर होती है, तो शरीर में भोजन सही से नहीं पचता। इस वजह से दिमाग को पोषण देने वाला रस नहीं बन पाता। आयुर्वेद सिर्फ थायराइड हार्मोन के नंबर ठीक करने पर ज़ोर नहीं देता, बल्कि वह जड़ी-बूटियों और सही खानपान के ज़रिए शरीर की अग्नि को बढ़ाता है, नाड़ियों की सफाई करता है और दिमाग को अंदर से पोषण देता है ताकि वह अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके।

ब्रेन फॉग के लिए डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर के पास जाना बहुत ज़रूरी है:

  • लगातार भूलना: अगर आप बहुत ही ज़रूरी चीज़ें, पासवर्ड या अपने जानने वालों के नाम भूलने लगें।
  • काम पर असर: ब्रेन फॉग की वजह से अगर आप अपनी नौकरी या रोज़मर्रा के साधारण काम भी नहीं कर पा रहे हैं।
  • डिप्रेशन महसूस होना: सुस्ती के साथ-साथ अगर मन में बहुत गहरी उदासी या नकारात्मक विचार आने लगें।
  • दवा का डोज़: अगर आपको लगता है कि आपकी थायराइड की दवा का डोज़ सही नहीं है और लक्षण बढ़ते जा रहे हैं।

तेज़ और एक्टिव दिमाग के लिए आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में कुछ बेहतरीन उपाय हैं जो दिमाग की धुंध को छांटने में मदद करते हैं। सबसे कारगर है 'नस्य कर्म' (Nasya)। रोज़ सुबह नाक के दोनों नथुनों में अणु तेल या गाय के शुद्ध देसी घी की दो-दो बूंदें डालने से दिमाग की नसें तुरंत खुलती हैं और वात शांत होता है। इसके अलावा रात को सोने से पहले पैरों के तलवों की मालिश (पादभ्यंग) दिमाग को गहरा आराम देती है। खाने में गाय के घी का इस्तेमाल करें, यह 'मज्जा' (ब्रेन टिशू) के लिए सबसे उत्तम टॉनिक है जो याददाश्त को तेज़ करता है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य थायरॉइड हार्मोन के स्तर को सामान्य रखना और लक्षणों को नियंत्रित करना। शरीर के समग्र संतुलन, आहार-विहार और पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार स्वास्थ्य सुधारना।
जाँच का आधार केवल TSH ही नहीं, बल्कि आवश्यकता अनुसार Free T4, Free T3, एंटीबॉडी टेस्ट, लक्षणों और अन्य स्वास्थ्य कारकों का भी मूल्यांकन किया जाता है। व्यक्ति की प्रकृति, जीवनशैली, पाचन, नींद और अन्य कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
उपचार तरीका हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट (जैसे लेवोथायरॉक्सिन) दिया जाता है, जो शरीर में कमी वाले हार्मोन की पूर्ति करता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ, आहार, दिनचर्या, योग और अन्य पारंपरिक उपायों का उपयोग किया जा सकता है।
ब्रेन फॉग (Brain Fog) यदि थायरॉइड की वजह से हो, तो हार्मोन स्तर सामान्य होने पर कई लोगों में सुधार हो सकता है। अन्य कारणों की भी जाँच की जाती है। मानसिक स्पष्टता और समग्र स्वास्थ्य सुधारने के लिए विभिन्न आयुर्वेदिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।
थायरॉइड ग्रंथि पर प्रभाव उपचार का उद्देश्य हार्मोन की कमी को पूरा करना और जटिलताओं से बचाना है। कुछ आयुर्वेदिक पद्धतियाँ थायरॉइड स्वास्थ्य को समर्थन देने का दावा करती हैं, लेकिन थायरॉइड को "प्राकृतिक रूप से पुनः सामान्य" कर देने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
वैज्ञानिक साक्ष्य थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट के लाभ और प्रभावशीलता के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक उपायों पर अध्ययन हुए हैं, लेकिन अधिकांश दावों के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले शोध की आवश्यकता है।
सुरक्षा दवा की सही मात्रा और नियमित जाँच आवश्यक होती है। आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग भी योग्य चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए, क्योंकि कुछ उत्पादों के दुष्प्रभाव या दवा-परस्पर क्रियाएँ हो सकती हैं।

निष्कर्ष

थायराइड में होने वाला ब्रेन फॉग आपके लिए बहुत झल्लाहट भरा हो सकता है, लेकिन यह याद रखें कि यह आपकी गलती नहीं है। जब शरीर का इंजन धीमा पड़ता है, तो दिमाग का सुस्त होना बहुत स्वाभाविक है। सिर्फ एक गोली पर निर्भर रहना सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, सही खानपान, जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, आपका दिमाग एक दिन में तेज़ नहीं होगा, इसके लिए आपको अपने शरीर के साथ धैर्य रखना होगा। अपने शरीर के संकेतों को सुनें और एक स्वस्थ, फोकस से भरे जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

FAQs

हाँ, अगर आप अपने थायराइड को संतुलित कर लें, सही डाइट लें और तनाव को कम करें, तो ब्रेन फॉग को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

थायराइड की कमी के कारण नर्वस सिस्टम धीमा हो जाता है, जिससे दिमाग में जानकारी को प्रोसेस करने और सही शब्द ढूंढने में सामान्य से ज़्यादा समय लगता है।

नहीं, थायराइड की वजह से होने वाला ब्रेन फॉग अल्ज़ाइमर या डिमेंशिया नहीं है। हार्मोन के संतुलित होते ही यह याददाश्त की समस्या ठीक हो जाती है।

रात को सोने से लगभग आधा घंटा पहले, एक कप गुनगुने दूध या पानी में आधा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण मिलाकर पीना काफी फायदेमंद होता है।

नहीं, ज़्यादा कैफीन कुछ देर के लिए एनर्जी तो देता है, लेकिन बाद में यह एड्रिनल ग्लैंड को थका देता है और ब्रेन फॉग को और भी बुरा बना देता है।

हाँ, बहुत से थायराइड (खासकर हाशिमोटो) के मरीजों को गेहूं या मैदा (ग्लूटेन) छोड़ने से पेट की सूजन कम होती है और दिमागी सुस्ती में बहुत फायदा मिलता है।

नाक को आयुर्वेद में दिमाग का दरवाज़ा माना गया है (नासा ही शिरसो द्वारम्)। इसमें शुद्ध घी डालने से सूखी नसों को नमी मिलती है और दिमाग तुरंत एक्टिव होता है।

हाँ, गहरी नींद के दौरान ही दिमाग अपने अंदर के टॉक्सिन्स को साफ करता है। अगर नींद पूरी नहीं होगी, तो अगले दिन फॉग बहुत गहरा होगा।

हाँ, गहरी नींद के दौरान ही दिमाग अपने अंदर के टॉक्सिन्स को साफ करता है। अगर नींद पूरी नहीं होगी, तो अगले दिन फॉग बहुत गहरा होगा।

हाँ, ब्लड टेस्ट में नंबर नॉर्मल आने के बावजूद अगर आपके शरीर में B12, विटामिन D की कमी है या तनाव बहुत ज़्यादा है, तो ब्रेन फॉग रह सकता है।

बिल्कुल! भ्रामरी और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम दिमाग के नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं, जिससे सोचने की क्लैरिटी वापस आती है।

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