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Gut issues chronic fatigue का कारण बन सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan

कुछ थकान ऐसी होती है जो सिर्फ आराम या नींद से दूर नहीं होती। सुबह उठने के बाद भी शरीर भारी लगता है, और दिनभर ऊर्जा की कमी बनी रहती है। ऐसी lingering fatigue अक्सर अंदरूनी असंतुलन की ओर इशारा करती है, खासकर gut health से जुड़ी समस्याओं की तरफ। जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता, और यही लगातार बनी रहने वाली थकान का कारण बन सकता है।

Chronic Fatigue क्या है? 

क्रॉनिक फटीग एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति लगातार और अत्यधिक थकान का अनुभव करता है, जो लंबे समय तक बनी रहती है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होती। यह केवल शारीरिक कमजोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गहरी मानसिक थकावट भी शामिल होती है, जिससे ध्यान केंद्रित करना या रोजमर्रा के सरल निर्णय लेना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। 

Gut Health क्या होती है?

गट हेल्थ का सरल अर्थ है आपके पाचन तंत्र का संपूर्ण संतुलन। यह केवल खाना पचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण (Absorption) और आंतों में रहने वाले खरबों सूक्ष्मजीवों (Microbiome) की सेहत भी शामिल है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि जब यह नाजुक संतुलन बिगड़ता है, तो इसका नकारात्मक असर न केवल पेट पर, बल्कि आपकी इम्यूनिटी, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की कुल ऊर्जा पर भी पड़ता है। 

पाचन तंत्र और ऊर्जा का मूल संबंध 

हम अक्सर सोचते हैं कि केवल अच्छा खाना खाने से हमें ताकत मिल जाएगी, लेकिन शरीर का विज्ञान थोड़ा अलग है। हमारे शरीर में ऊर्जा का स्तर पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा पेट कैसे काम कर रहा है।

  • भोजन का ईंधन बनना: खाना हमारे शरीर के लिए ईंधन की तरह है, लेकिन यह ऊर्जा (Energy) में तभी बदलता है जब पाचन तंत्र उसे छोटे-छोटे पोषक तत्वों में तोड़ देता है।
  • अवशोषण (Absorption) की भूमिका: ऊर्जा सिर्फ खाना पचाने से नहीं, बल्कि उसे सोखने से मिलती है। अगर आंतें पोषक तत्वों को सही से सोख नहीं पातीं, तो शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता।
  • कमजोर पाचन का असर: यदि पाचन अग्नि (Digestion) कमजोर है, तो सबसे पौष्टिक खाना भी ऊर्जा देने के बजाय शरीर में भारीपन, सुस्ती और थकान पैदा करने लगता है।

खराब गट हेल्थ के प्रमुख लक्षण 

पाचन तंत्र (Gut) में गड़बड़ी होने पर हमारा शरीर कई तरह के संकेत देता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि पेट की समस्या सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। 

  • बार-बार गैस, bloating या जलन:  पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा, इसका सीधा संकेत
  • लगातार थकान और सुस्ती: अच्छी नींद के बाद भी energy न मिलना gut imbalance दिखाता है
  • मीठा खाने की ज्यादा इच्छा: खराब बैक्टीरिया sugar cravings बढ़ा देते हैं
  • त्वचा की समस्याएं: मुंहासे, dull skin या eczema पेट की गंदगी से जुड़े हो सकते हैं
  • वजन में अचानक बदलाव: बिना कारण weight बढ़ना या घटना absorption की समस्या दर्शाता है
  • नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन: gut खराब होने से mood और sleep प्रभावित होते हैं
  • खाने के बाद असहजता: कुछ foods खाने पर दर्द या गैस होना food intolerance का संकेत है

गट हेल्थ और ऊर्जा बिगड़ने के मुख्य कारण

पाचन तंत्र (Gut Health) और ऊर्जा के स्तर में गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक जीवनशैली के नजरिए से इसके मुख्य कारण यहाँ दिए गए हैं:

  • खराब खान-पान (Poor Diet): प्रोसेस्ड फूड, मैदा और ज्यादा चीनी अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं
  • कमजोर पाचन अग्नि (Weak Digestive Fire): खाना सही से नहीं पचता और ‘आम’ (toxins) बनने लगते हैं
  • पानी की कमी (Dehydration): पाचन धीमा हो जाता है और कब्ज व सुस्ती बनी रहती है
  • तनाव और चिंता (Stress & Anxiety): पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे थकान बढ़ती है
  • नींद की कमी (Lack of Sleep): शरीर की मरम्मत रुकती है और energy level गिर जाता है
  • कम शारीरिक गतिविधि (Sedentary Lifestyle): आंतों की गति धीमी हो जाती है, पाचन कमजोर पड़ता है
  • गलत समय पर भोजन: देर रात या बिना भूख के खाना पाचन पर अतिरिक्त दबाव डालता है

Gut-Brain Axis: दिमाग और पेट का कनेक्शन 

अक्सर हम कहते हैं कि हमें "गट फीलिंग" (Gut Feeling) आ रही है, और यह केवल एक कहावत नहीं है। हमारा पेट और दिमाग वास्तव में एक-दूसरे से हर वक्त बातचीत करते हैं। 

  • सीधा संवाद (Direct Link): पेट और दिमाग Vagus Nerve के जरिए जुड़े होते हैं, इसलिए तनाव होते ही पाचन तुरंत प्रभावित होता है
  • मूड का कंट्रोल सेंटर: शरीर का लगभग 95% Serotonin आंतों में बनता है, यानी पेट ठीक तो मूड और ऊर्जा दोनों बेहतर
  • मानसिक असर (Mental Impact): gut imbalance होने पर चिड़चिड़ापन, anxiety और “brain fog” बढ़ने लगता है
  • दो-तरफा रिश्ता (Two-way Connection): तनाव पेट को बिगाड़ता है, और खराब पेट दिमाग को, दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं

आयुर्वेद का नज़रिया: पेट और दिमाग का गहरा रिश्ता 

आयुर्वेद के अनुसार पेट और दिमाग का संबंध केवल शारीरिक नहीं, बल्कि गहरा ऊर्जात्मक होता है, जिसे ‘कोष्ठा-मानस’ संबंध कहा जाता है। जब पाचन ठीक होता है, तो मन शांत और स्पष्ट रहता है, लेकिन पाचन बिगड़ने पर इसका असर सीधे मानसिक स्थिति पर पड़ता है। 

पेट में असंतुलन होने से ‘प्राण वायु’ और ‘समान वायु’ का संतुलन बिगड़ता है, जिससे चिंता, बेचैनी और ध्यान की कमी बढ़ सकती है। अधपचा भोजन ‘आम’ (toxins) बनाकर दिमाग तक पहुंचता है, जिससे ब्रेन फॉग और मानसिक भारीपन महसूस होता है। वहीं, सही पाचन से बनने वाला ‘ओजस’ मन को स्थिर, शांत और ऊर्जावान बनाए रखता है।

जीवा आयुर्वेद: उपचार का अनूठा दृष्टिकोण

जीवा में हम मानते हैं कि हर व्यक्ति अद्वितीय है, इसलिए उसका इलाज भी विशेष (Customized) होना चाहिए।

  • जड़ की पहचान (Root Cause Analysis): हम केवल यह नहीं देखते कि आपको क्या बीमारी है, बल्कि यह देखते हैं कि वह क्यों हुई। क्या यह गलत खान-पान से है, तनाव से है या दोषों के असंतुलन से?
  • प्रकृति आधारित इलाज (Personalized Treatment): जीवा का प्रोटोकॉल हर मरीज की 'प्रकृति' (Vata, Pitta, Kapha) पर आधारित होता है। दो व्यक्तियों को एक जैसी बीमारी होने पर भी उनकी दवाइयाँ अलग हो सकती हैं।
  • अग्नि और आम पर ध्यान: उपचार का मुख्य हिस्सा पाचन अग्नि (Agni) को मजबूत करना और शरीर से विषैले तत्वों (Ama) को बाहर निकालना है। जब पेट साफ होता है, तो दवाइयाँ बेहतर काम करती हैं।
  • डाइट और लाइफस्टाइल (Ayur-Plan): जीवा में दवाइयों के साथ-साथ एक कस्टमाइज्ड डाइट चार्ट और जीवनशैली के निर्देश दिए जाते हैं। हम मानते हैं कि सही भोजन ही सबसे बड़ी औषधि है।
  • मानसिक स्वास्थ्य (Mind-Body Balance): चूंकि मन और शरीर जुड़े हुए हैं, इसलिए हम इलाज में तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति के लिए योग व ध्यान को भी शामिल करते हैं।

Gut Health को बेहतर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियाँ 

आयुर्वेद में gut health को शरीर की समग्र सेहत का आधार माना गया है। जब पाचन तंत्र मजबूत होता है, तो ऊर्जा, इम्युनिटी और मानसिक स्पष्टता भी बेहतर रहती है। नीचे कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ दी गई हैं जो gut को संतुलित और मजबूत बनाने में सहायक मानी जाती हैं।

  • त्रिफला (Triphala): यह आंतों की गहराई से सफाई करती है और digestion को नियमित बनाकर कब्ज और sluggish bowel को ठीक करने में मदद करती है।
  • अजवाइन (Ajwain): यह पाचन अग्नि को प्रज्वलित करती है और गैस, ब्लोटिंग तथा indigestion जैसी समस्याओं को कम करने में प्रभावी होती है।
  • हींग (Hing): यह पेट की गैस और ऐंठन को तुरंत शांत करती है और digestive system को हल्का और सक्रिय बनाती है।
  • अदरक (Ginger): यह digestion को तेज करती है और भोजन को सही तरीके से तोड़कर nutrient absorption को बेहतर बनाती है।
  • हरड़ (Haritaki): यह आंतों को साफ रखने में मदद करती है और natural detoxification के जरिए gut को संतुलित करती है।

Gut Health को बेहतर करने के लिए आयुर्वेदिक थेरेपीज़

आयुर्वेद में पाचन को सुधारने के लिए कुछ विशेष थेरेपीज़ दी जाती हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों (toxins) को बाहर निकालकर पाचन तंत्र को फिर से संतुलित करती हैं।

  • बस्ती (Basti Therapy): औषधीय एनीमा के जरिए बड़ी आंत की सफाई की जाती है। यह वात दोष को संतुलित कर कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत देता है
  • अभ्यंग (Abhyanga Massage): औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह नसों को शांत करता है और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाता है
  • स्वेदन (Swedan Therapy): हर्बल स्टीम के माध्यम से शरीर को पसीना दिलाया जाता है, जिससे toxins बाहर निकलते हैं और शरीर हल्का महसूस होता है
  • अग्नि दीपना थेरेपी (Digestive Fire Boosting): विशेष जड़ी-बूटियों और उपचारों से पाचन अग्नि को मजबूत किया जाता है, ताकि खाना सही से पच सके

Digestive Issues के लिए डाइट चार्ट

सही खान-पान पाचन को सुधारने और gut health को संतुलित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नीचे दिया गया सरल डाइट चार्ट पाचन को हल्का और सक्रिय रखने में मदद करता है।

क्या खाएं (Eat)

  • मूंग दाल खिचड़ी और हल्का सात्विक भोजन
  • छाछ (भुना जीरा मिलाकर)
  • लौकी, तोरई, कद्दू जैसी हल्की सब्जियां
  • उबली या स्टीम की हुई सब्जियां
  • सेब, अनार, केला जैसे आसानी से पचने वाले फल
  • नारियल पानी
  • सीमित मात्रा में घी

क्या न खाएं (Avoid)

  • तला-भुना और भारी भोजन
  • मैदा, जंक फूड और पैकेट फूड
  • बहुत ज्यादा मसालेदार खाना
  • चाय और कॉफी का अधिक सेवन
  • कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा
  • खट्टे अचार और प्रोसेस्ड पिकल्स
  • देर रात भारी भोजन

जीवा आयुर्वेद में Gut Issues (पाचन समस्या) की जांच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में केवल लक्षणों को नहीं, बल्कि पाचन अग्नि, दोषों और जीवनशैली के पूरे संतुलन को गहराई से समझा जाता है। इससे समस्या की जड़ तक पहुंचकर सही उपचार तय किया जाता है।

  • अग्नि (Digestive Fire) विश्लेषण: देखा जाता है कि पाचन शक्ति मंद, तीव्र या विषम है, क्योंकि यही gut issues का मुख्य आधार होता है
  • ‘आम’ (toxins) की जांच: जीभ की परत, मल और शरीर के संकेतों से टॉक्सिन्स का स्तर समझा जाता है
  • नाड़ी परीक्षा: वात, पित्त और कफ असंतुलन का आकलन किया जाता है
  • लक्षण पैटर्न अध्ययन: गैस, bloating, कब्ज, थकान और भारीपन के पैटर्न को देखा जाता है
  • मानसिक स्थिति मूल्यांकन: तनाव, चिंता और नींद का gut health पर असर समझा जाता है
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: खान-पान, अनियमित दिनचर्या और गलत आदतों का विश्लेषण किया जाता है

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

Gut Issues में सुधार होने में कितना समय लगता है?

  • शुरुआती स्टेज: हल्की गैस, bloating और थकान में 7–15 दिनों में सुधार दिख सकता है, यदि डाइट और दिनचर्या सही हो
  • Chronic Gut Issues: लंबे समय से चली आ रही समस्या में 4–8 हफ्ते या उससे अधिक समय लग सकता है
  • अन्य कारक: सुधार की गति डाइट, तनाव, नींद और लाइफस्टाइल अनुशासन पर निर्भर करती है

इलाज से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?

सही और कस्टमाइज़्ड आयुर्वेदिक उपचार से आपको धीरे-धीरे ये सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं:

  • पेट की गैस, bloating और भारीपन में धीरे-धीरे कमी
  • लगातार बनी रहने वाली थकान और सुस्ती में सुधार
  • खाने के बाद होने वाली असहजता और जलन में राहत
  • पाचन और energy rhythm का संतुलन बेहतर होना
  • शरीर में हल्कापन और मानसिक clarity बढ़ना
  • लंबे समय में बार-बार gut issues होने की संभावना कम होना

पेशेंट टेस्टिमोनियल 

मेरा नाम दक्ष मलिक है, मैं 23 वर्ष का हूँ और नोएडा का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले मुझे पेट से जुड़ी समस्या शुरू हुई, इंडाइजेशन, पेट में जलन और लंबे समय तक ठीक से मल न आना जैसी परेशानी होने लगी। मेरे कुछ टेस्ट भी हुए, जिनमें पता चला कि मेरे पेट में कुछ घाव (ulcers) हैं। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद मैंने टीवी पर डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और उनसे प्रेरित होकर जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। मैंने डॉक्टर से फोन पर भी बात की और फिर वहाँ से दवाइयाँ व उपचार शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी हालत में सुधार आने लगा और अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च और पारदर्शिता 

कई लोग सोचते हैं कि ऐसा कस्टमाइज्ड आयुर्वेद बहुत महंगा होगा। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है । जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें ।

  • जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है । (यह एक अनुमानित आधार है और अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।)
  • अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए विशेष पैकेज प्रोटोकॉल भी हैं, जिन्हें शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ।
  • इन पैकेज में दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और ध्यान मार्गदर्शन, आहार योजना और थेरेपी शामिल हैं । इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है ।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता कम: 88% मरीजों ने धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं और हार्मोनल सपोर्ट पर निर्भरता कम की है।

आयुर्वेद vs मॉडर्न अप्रोच (Gut Issues & Chronic Fatigue)

बिंदु आयुर्वेदिक दृष्टिकोण मॉडर्न दृष्टिकोण
सोच का तरीका मंदाग्नि, आम और दोष असंतुलन के रूप में देखता है IBS, indigestion, fatigue syndrome के रूप में देखता है
मुख्य कारण गलत खान-पान, कमजोर अग्नि, toxins और lifestyle imbalance stress, poor diet, infection और gut microbiome imbalance
लक्षणों की समझ bloating, गैस, थकान, brain fog, भारीपन fatigue, acidity, constipation, IBS symptoms
उपचार का तरीका अग्नि दीपना, आम शोधन, पंचकर्म और डाइट सुधार medicines, probiotics, acid reducers, supplements
मुख्य फोकस जड़ से पाचन सुधारकर energy restore करना symptoms को control करना और राहत देना
रिजल्ट धीरे लेकिन स्थायी सुधार और energy regain जल्दी राहत, लेकिन relapse की संभावना रहती है
मुख्य फोकस शरीर को प्राकृतिक स्थिति में वापस लाना calories, nutrition balance और disease management
रिजल्ट धीरे लेकिन स्थायी healing और vitality restoration जल्दी बदलाव, लेकिन dependence और relapse संभव

कब डॉक्टर से सलाह लें?

जब gut issues और थकान आपके दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें।

  • लगातार पेट फूलना, गैस या कब्ज रहना
  • हर समय थकान और low energy महसूस होना
  • वजन में अचानक बदलाव होना
  • खाने के बाद भारीपन या जलन लगातार बने रहना
  • नींद पूरी होने के बाद भी tired महसूस करना
  • घरेलू उपायों से कोई राहत न मिलना

निष्कर्ष

Gut health सिर्फ पाचन का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर की ऊर्जा और मानसिक स्थिति से जुड़ा है। आयुर्वेद के अनुसार, जब अग्नि संतुलित होती है और ‘आम’ नहीं बनता, तभी शरीर सही ऊर्जा उत्पन्न करता है।

छोटी पाचन समस्याओं को समय पर समझना जरूरी है, क्योंकि यही आगे चलकर chronic fatigue और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। एक स्वस्थ gut ही एक energetic, active और balanced जीवन की नींव है।

FAQs

 हाँ, आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन मंद होता है, तो आम (विषाक्त तत्व) बनते हैं। ये टॉक्सिन्स रक्त के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचकर मानसिक स्पष्टता को कम कर देते हैं, जिससे व्यक्ति को सोचने में कठिनाई, याददाश्त में कमी और मानसिक थकान महसूस होती है।

अत्यधिक व्यायाम वात दोष को बढ़ा सकता है, जो पाचन अग्नि को अनियमित कर देता है। यदि आप क्षमता से अधिक व्यायाम करते हैं और शरीर को पर्याप्त आराम या पोषण नहीं देते, तो यह क्रॉनिक फटीग का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, सूर्यास्त के बाद फल खाने से कफ बढ़ता है और पाचन धीमा हो जाता है। इससे सुबह उठने पर शरीर में भारीपन और ऊर्जा की कमी (Lethargy) महसूस हो सकती है। फलों का सेवन दिन के समय करना ही ऊर्जा के लिए श्रेष्ठ है।

एंटीबायोटिक्स हानिकारक बैक्टीरिया के साथ-साथ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) को भी खत्म कर देते हैं। इससे पोषण का अवशोषण गिर जाता है, जिससे दवाओं का कोर्स खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक थकान बनी रह सकती है।

खड़े होकर पानी पीने से वह तेजी से नीचे जाता है और पाचन तंत्र पर दबाव डालता है। इससे पोषक तत्वों का अवशोषण बाधित होता है और शरीर में वात असंतुलित हो सकता है, जो अंततः नसों की कमजोरी और थकान पैदा करता है।

नियमित अंतराल पर हल्का उपवास या 'लंघन' करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे शरीर में जमा आम (Toxins) जल जाते हैं और पाचन अग्नि फिर से प्रज्वलित होती है, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करने लगता है।

कैफीन अस्थायी रूप से ऊर्जा का अहसास देता है, लेकिन यह पाचन अग्नि को सुखा देता है और शरीर में एसिडिटी बढ़ाता है। लंबे समय में यह एड्रेनल फटीग का कारण बनता है, जिससे व्यक्ति कॉफी के बिना खुद को बिल्कुल थका हुआ महसूस करने लगता है।

अक्सर लोग सप्लीमेंट्स लेते हैं लेकिन उनकी कमी पूरी नहीं होती। इसका कारण 'Malabsorption' (अवशोषण की कमी) है। यदि आपकी आंतों की दीवारें स्वस्थ नहीं हैं, तो वे भोजन या सप्लीमेंट्स से विटामिन सोख नहीं पाएंगी, जिससे थकान बनी रहेगी।

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