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रात में बार-बार नींद टूटना किस बात का संकेत हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अगर आप रात को सोने के लिए बिस्तर पर लेटते हैं और थोड़ी ही देर में आपकी आँख खुल जाती है, तो यह कोई मामूली बात नहीं है। दिन भर थकने के बाद हमारे शरीर को एक अच्छी और गहरी नींद चाहिए होती है। लेकिन अगर आप पूरी रात करवटें बदलते रहते हैं या बार-बार आपकी नींद टूट जाती है, तो समझ जाइए कि शरीर के अंदर कुछ तो दिक्कत चल रही है। यह सिर्फ एक दिन नींद न आने की बात नहीं है, बल्कि आपका शरीर आपको इशारा कर रहा है कि कुछ गड़बड़ है और उसे ठीक करना बहुत जरूरी है। चलिए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और हमारा शरीर हमसे क्या कहना चाह रहा है। 

नींद के बीच में आँख खुलने का असली कारण क्या है

जब हम गहरी नींद सो रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग और शरीर खुद को रिलैक्स करते हैं और थकान मिटाते हैं, लेकिन अगर नींद में बार-बार आँखें खुलें, तो समझो कि मन में कोई न कोई टेंशन चल रही है। जब दिमाग में आने वाले कल की चिंता या काम का प्रेशर रहता है, तो वह ठीक से शांत नहीं हो पाता, इसके अलावा, कमरे का गलत टेम्परेचर, बाहर का शोर-शराबा या शरीर में किसी विटामिन की कमी होना भी इसकी वजह हो सकती है। आपका शरीर बस ये बता रहा है कि उसे सुकून चाहिए, सिर्फ बिस्तर पर लेटने भर से काम नहीं चलेगा। 

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

डॉक्टरों का मानना है कि रात में बार-बार उठना आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। अगर कभी कभार ऐसा होता है तो कोई बात नहीं, शायद आपने रात में ज़्यादा पानी पी लिया हो। लेकिन अगर यह रोज़ की आदत बन गई है, तो डॉक्टर इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं। इसे मेडिकल भाषा में स्लीप एप्निया या इनसोम्निया की शुरुआत कहा जाता है। इसमें सोते समय साँस लेने में रुकावट आती है या दिमाग को बिल्कुल भी आराम नहीं मिलता। डॉक्टर हमेशा यही सलाह देते हैं कि इस परेशानी को कभी भी आलस या बढ़ती उम्र का बहाना मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

हम जाने अनजाने में कौन सी गलतियां करते हैं

हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ ऐसी खराब आदतें पाल लेते हैं जो हमारी नींद की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती हैं:

  • सोने से पहले मोबाइल चलाना: स्क्रीन की नीली रोशनी हमारे दिमाग को चकमा देती है और नींद लाने वाले हार्मोन को बनने से पूरी तरह रोक देती है।
  • रात को चाय या कॉफी पीना: शाम के बाद चाय या कॉफी पीने से दिमाग की नसें एकदम से जाग जाती हैं और गहरी नींद नहीं आने देतीं।
  • देर रात भारी खाना खाना: जब आप रात को बहुत भारी और मसालेदार खाना खाते हैं, तो शरीर उसे पचाने में लगा रहता है और उसे आराम करने का समय नहीं मिलता।
  • गलत गद्दा और तकिया इस्तेमाल करना: अगर आपके सोने की जगह आरामदायक नहीं है, तो शरीर को सही सहारा नहीं मिलता और दर्द के कारण नींद टूट जाती है।

नींद टूटने की परेशानी कितने लोगों को होती है

आज की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह समस्या बहुत ही आम हो गई है। कई बड़ी रिसर्च बताती हैं कि शहरों में रहने वाले लगभग चालीस से पचास प्रतिशत लोग रात की अच्छी नींद के लिए तरस रहे हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है जो दफ्तर में बैठकर घंटों काम करते हैं या जिनका कोई फिक्स टाइम नहीं है। घर की औरतों में भी यह परेशानी बहुत देखने को मिलती है क्योंकि वे दिन भर के काम और परिवार की चिंताओं में इतना उलझ जाती हैं कि उनका दिमाग रात को भी शांत नहीं हो पाता और बीच बीच में आँख खुल जाती है।

बिना रुके गहरी नींद सोने के आसान तरीके

रात भर बिना रुके सोने के लिए आपको सोने का एक पक्का नियम बनाना होगा। चाहे रविवार की छुट्टी का दिन ही क्यों न हो, आपके सोने और जागने का समय रोज़ एक ही होना चाहिए। इससे शरीर की अपनी एक अंदरूनी घड़ी सेट हो जाती है। रात को सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपने फोन और टीवी को खुद से बहुत दूर रख दें। सोने से पहले आप कोई अच्छी किताब पढ़ सकते हैं या हल्का गुनगुना दूध पी सकते हैं। अपने कमरे में पूरा अंधेरा रखें और शांत माहौल बनाएं ताकि आपकी नींद के बीच में कोई रुकावट न आए।

किन लोगों को यह परेशानी सबसे ज़्यादा होती है

कुछ खास बीमारियों और परिस्थितियों से गुज़र रहे लोगों को रात में बार बार उठने की दिक्कत सबसे ज़्यादा झेलनी पड़ती है:

  • शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज़: जिन लोगों को शुगर होती है, उन्हें रात में बार बार पेशाब जाने की ज़रूरत पड़ती है जिससे उनकी नींद बुरी तरह टूट जाती है।
  • तनाव और डिप्रेशन वाले लोग: जो लोग हर छोटी बात की बहुत ज़्यादा चिंता करते हैं, उनका दिमाग रात में भी नहीं रुकता और उन्हें बेचैनी होती रहती है।
  • अस्थमा और साँस के मरीज़: रात के समय जब मौसम ठंडा होता है, तो ऐसे लोगों को साँस लेने में दिक्कत होती है और घबराहट में उनकी आँख खुल जाती है।
  • नई माताएं: जिनके घर में छोटे बच्चे होते हैं, उनकी नींद तो वैसे भी कभी पूरी नहीं हो पाती क्योंकि उन्हें रात भर उठकर रोते हुए बच्चे को संभालना पड़ता है।

क्या जीवनशैली बदलकर इस बीमारी को हरा सकते हैं

जी हाँ बिल्कुल! बिना अपनी जीवनशैली को सुधारे आप इस परेशानी से हमेशा के लिए छुटकारा नहीं पा सकते। दिन भर एक ही कुर्सी पर बैठे रहने से हमारा शरीर अंदर से सुस्त और जाम हो जाता है। इसलिए रोज़ाना कम से कम आधा घंटा पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। जब आप दिन में मेहनत करते हैं और थोड़ा पसीना बहाते हैं, तो शरीर सच में थकता है और रात को बहुत शानदार गहरी नींद आती है। इसके साथ ही दिन भर खूब पानी पिएँ, लेकिन सोने से ठीक पहले पानी कम कर दें ताकि रात को बार बार टॉयलेट जाने के लिए न उठना पड़े।

बार बार नींद टूटना किसी बड़ी बीमारी का इशारा तो नहीं

अगर आप अपनी तरफ से सब कुछ सही कर रहे हैं फिर भी नींद बार बार टूट रही है, तो यह शरीर में चल रही किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है:

  • दिल से जुड़ी परेशानियां: कई बार रात में अचानक घबराहट होना और पसीना आना दिल की कमज़ोरी या खराब ब्लड सर्कुलेशन का सीधा इशारा होता है।
  • स्लीप एप्निया: इस बीमारी में इंसान की सोते समय कुछ सेकंड के लिए साँस रुक जाती है जिससे वह एकदम से हाँफते हुए और डरकर उठ जाता है।
  • थायरॉयड का बिगड़ना: शरीर में थायरॉयड हार्मोन के ऊपर नीचे होने से इंसान को बहुत ज़्यादा गर्मी या ठंड लगती है जिससे नींद तुरंत खराब होती है।
  • नसों की कमज़ोरी: पैरों में लगातार बेचैनी होना या हल्का दर्द रहना नसों की कमज़ोरी बताता है जो रात की नींद को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है।

अच्छी और गहरी नींद के लिए रात का खानपान कैसा हो

आप रात को जो भी खाते पीते हैं उसका सीधा असर आपकी नींद पर पड़ता है। इसलिए रात का खानपान बहुत सोच समझकर चुनना चाहिए:

  • रात का खाना बहुत हल्का रखें: रात को हमेशा दाल, उबली हुई सब्ज़ियां या सूप जैसी चीज़ें खाएँ जो पेट पर भारी न पड़ें और बहुत जल्दी पच जाएँ।
  • मैग्नीशियम वाली चीज़ें खाएँ: कद्दू के बीज और बादाम में मैग्नीशियम होता है जो दिमाग की नसों को शांत करके अच्छी नींद लाने में बहुत मदद करता है।
  • केला और चेरी का सेवन: इन फलों में प्राकृतिक रूप से नींद लाने वाले हार्मोन होते हैं, इसलिए शाम के समय इनका सेवन करना बहुत फायदेमंद रहता है।
  • रात को मीठे से बचें: सोने से पहले मिठाई या चॉकलेट खाने से शरीर में एकदम से ऊर्जा आ जाती है और दिमाग जाग जाता है।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर आपने अपनी तरफ से खानपान और आदतें सब सुधार ली हैं फिर भी ज़रा सा भी आराम नहीं मिल रहा, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए:

  • एक महीने से ज़्यादा परेशानी: अगर आपको यह दिक्कत लगातार कई हफ्तों से हो रही है और आपकी दिनचर्या पूरी तरह खराब हो रही है।
  • दिन में बहुत ज़्यादा उबासी आना: रात में नींद टूटने की वजह से अगर आप दिन भर काम करते हुए या गाड़ी चलाते हुए बार बार सो रहे हैं।
  • तेज़ खर्राटे आना: अगर घर वाले बताते हैं कि आप रात को बहुत तेज़ खर्राटे लेते हैं और बीच बीच में आपकी साँस अटक जाती है।
  • सुबह उठकर सिर में भारी दर्द: रात की खराब नींद की वजह से अगर सुबह आपका सिर फटने लगता है तो यह ब्लड प्रेशर बढ़ने का संकेत है।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद में इसका क्या इलाज है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य नींद की समस्या के कारणों की पहचान कर उन्हें दूर करना और अच्छी नींद दिलाना। शरीर के संतुलन, दिनचर्या और मानसिक शांति पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका नींद का मूल्यांकन, स्लीप हाइजीन की सलाह, ज़रूरत पड़ने पर दवाइयाँ या अन्य चिकित्सा। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
नींद का नज़रिया तनाव, मानसिक स्वास्थ्य, हार्मोन, दवाइयों या अन्य चिकित्सीय कारणों की जाँच की जाती है। वात असंतुलन, दिनचर्या और मन-शरीर के संतुलन को महत्व दिया जाता है।
सहायक उपाय नियमित सोने का समय, स्क्रीन टाइम कम करना और अच्छी स्लीप हाइजीन अपनाने की सलाह। तेल मालिश, ध्यान, योग और विश्राम तकनीकों पर ज़ोर।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण कारण के अनुसार उपचार और स्वस्थ नींद की आदतें विकसित करने पर ध्यान। संतुलित जीवनशैली और नियमित दिनचर्या के माध्यम से प्राकृतिक रूप से अच्छी नींद बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

लगातार नींद टूटना कोई छोटी मोटी बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का आपको एक अलार्म देने का तरीका है। आपका शरीर यह साफ-साफ कह रहा है कि उसे आराम चाहिए और आप उस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नींद दुनिया की सबसे बड़ी और बिल्कुल मुफ्त दवा है जो शरीर की हर टूट फूट को अंदर से पूरी तरह ठीक कर देती है। इसलिए अपनी नींद के साथ कभी भी कोई समझौता न करें। आज से ही अपनी गलत आदतों को बदलें, रात को हल्का खाना खाएँ और मोबाइल को बिस्तर से दूर रखकर सोएँ। जब आप बिना रुके अच्छी नींद लेंगे तो आप अगले दिन दुनिया का हर काम पूरी ताकत और खुशी के साथ कर पाएंगे।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC1978319/

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK526136/

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1087079225000747

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

इसका सबसे बड़ा और आम कारण मानसिक तनाव और घबराहट है। जब दिमाग शांत नहीं होता तो नींद बहुत कच्ची हो जाती है और ज़रा सी आहट से खुल जाती है।

जी हाँ, सोने से ठीक पहले बहुत सारा पानी पीने से आपको रात में बार बार टॉयलेट जाने के लिए उठना पड़ सकता है जिससे गहरी नींद टूट जाती है।

हाँ, जैसे जैसे उम्र बढ़ती है हमारे शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन कम बनने लगते हैं जिससे बुज़ुर्गों को रात में बार बार जागने की परेशानी होती है।

अगर आँख खुल जाए तो मोबाइल बिल्कुल न देखें। शांति से लेटकर लंबी साँसें लें या उल्टी गिनती गिनें, इससे दिमाग दोबारा रिलैक्स होकर गहरी नींद में चला जाएगा।

अगर आप दिन में सिर्फ बीस से तीस मिनट की झपकी लेते हैं तो ठीक है, लेकिन घंटों तक सोने से आपकी रात की नींद पूरी तरह से गायब हो सकती है।

बिल्कुल, इनमें मौजूद कैफीन दिमाग की नसों को बहुत ज़्यादा सक्रिय कर देता है। इसलिए शाम के बाद चाय या कॉफी पीने से हमेशा बचना चाहिए।

कमरा एकदम शांत होना चाहिए, उसमें कोई नीली या तेज़ रोशनी नहीं होनी चाहिए और तापमान इतना होना चाहिए जिसमें आपको न ज़्यादा पसीना आए और न ठंड लगे।

इसे मेडिकल भाषा में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम कहते हैं। यह शरीर में आयरन या कुछ विटामिन्स की भारी कमी के कारण होता है जिससे पैरों में बेचैनी रहती है।

जी हाँ, रोज़ एक ही समय पर सोने से शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक एकदम सेट हो जाता है जिससे रात को अपने आप सही समय पर गहरी नींद आने लगती है।

बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की गोलियां खाना बहुत खतरनाक है। शरीर को इनकी बुरी आदत पड़ जाती है और फिर बिना गोली के नींद आना बिल्कुल बंद हो जाता है।

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