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नसों में कमजोरी और झनझनाहट का कारण क्या है? जाने इसकी वजह

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अगर आप अक्सर हाथों या पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस करते हैं, तो इसे मामूली थकान समझकर नज़रअंदाज़ न करें। हम अक्सर सोचते हैं कि गलत तरीके से सोने या बैठने से ऐसा हुआ है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो यह शरीर में विटामिन B12 की गंभीर कमी का एक बहुत बड़ा और सीधा संकेत हो सकता है।चूंकि हमारा शरीर इस विटामिन को खुद नहीं बना सकता, इसलिए जब खाने से इसकी पूरी खुराक नहीं मिलती, तो इसका सबसे पहला असर हमारी नसों पर पड़ता है, जिससे हमें चींटियां चलने या सुई चुभने जैसा अहसास होने लगता है। ऐसे में तुरंत सचेत हो जाएं और डॉक्टर से मिलकर अपना ब्लड टेस्ट ज़रूर करवाएं, क्योंकि यह नसों की कमज़ोरी (Neuropathy) की शुरुआत हो सकती है, जिसे सही समय पर पहचानना और ठीक करना बहुत ज़रूरी है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

मेडिकल एक्सपर्ट्स और न्यूरोलॉजिस्ट साफ तौर पर मानते हैं कि नसों को स्वस्थ रखने और उन्हें सही तरीके से काम करने लायक बनाए रखने के लिए विटामिन बी12 सबसे जरूरी तत्व है। डॉक्टर बताते हैं कि जब मरीज हाथ पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी की शिकायत लेकर आते हैं तो सबसे पहले उनके खून में इसी विटामिन की जांच करवाई जाती है। सही समय पर कमी को पहचान कर अगर डाइट या दवाइयों की मदद ली जाए तो नसों को हमेशा के लिए खराब होने से बचाया जा सकता है।

विटामिन बी12 की कमी होने पर नसों में क्या होता है

इसे बहुत ही आसान तरीके से समझते हैं। हमारे घर में बिजली के तारों के ऊपर एक प्लास्टिक की कोटिंग होती है जो हमें करंट से बचाती है और तार के अंदर बिजली को सही से बहने देती है। ठीक इसी तरह हमारे शरीर की हर एक नस के ऊपर भी एक सुरक्षा परत होती है जिसे मेडिकल भाषा में माइलिन कहते हैं। विटामिन बी12 इसी सुरक्षा परत को बनाने और मजबूत रखने का काम करता है। जब शरीर में इसकी कमी हो जाती है तो नसों के ऊपर की यह परत धीरे-धीरे गलने या कमज़ोर  होने लगती है। परत हटने से नसें डैमेज होने लगती हैं र दिमाग तक सही सिग्नल नहीं पहुंच पाता जिससे हमें सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होती है।

नसों के लिए विटामिन बी12 कितना फायदेमंद है

  • यह नसों के ऊपर की सुरक्षा परत को मजबूत बनाता है जिससे नसें लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं।
  • यह दिमाग और शरीर के हर एक अंग के बीच सिग्नल के आने-जाने की गति को तेज और सही रखता है।
  • इसके सही स्तर से हाथ और पैरों में बेवजह होने वाले दर्द और भारीपन से पूरी तरह बचाव होता है।
  • यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है जिससे नसों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती रहती है।

किन लोगों में विटामिन बी12 की कमी का खतरा ज़्यादा  होता है

  • जो लोग पूरी तरह से शाकाहारी हैं क्योंकि यह विटामिन मुख्य रूप से जानवरों से मिलने वाले भोजन में ही पाया जाता है।
  • पचास साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ शरीर के अंदर खाने से विटामिन सोखने की ताकत कम हो जाती है।
  • वो लोग जिन्हें पेट या आंतों से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी है जिससे उनका पाचन कमज़ोर  रहता है।
  • शुगर या डायबिटीज के मरीज जो लंबे समय से दवाइयां खा रहे हैं क्योंकि कुछ दवाइयां इस विटामिन को शरीर में रुकने नहीं देतीं।
  • वो लोग जिन्होंने हाल ही में वजन कम करने के लिए पेट की कोई सर्जरी करवाई है।

क्या बिना जांच के सप्लीमेंट्स लेना सही है या नहीं

बिल्कुल भी नहीं। सिर्फ इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर या किसी के कहने पर खुद से मेडिकल स्टोर से गोलियां खरीद कर खाना सही तरीका नहीं है। सुन्नपन सिर्फ विटामिन बी12 की कमी से नहीं बल्कि शुगर बढ़ने, थायराइड या किसी नस के दबने की वजह से भी हो सकता है। इसलिए कोई भी दवा शुरू करने से पहले एक बार खून की जांच करवाना बेहद जरूरी है ताकि असली वजह का पता चल सके।

क्या रोज सप्लीमेंट्स लेना सुरक्षित है

अगर आपने डॉक्टर की सलाह से जांच करवाई है और उन्होंने आपको कमी दूर करने के लिए दवा दी है तो इसे रोज लेना पूरी तरह सुरक्षित है। विटामिन बी12 एक ऐसा विटामिन है जो पानी में आसानी से घुल जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर शरीर में इसकी मात्रा जरूरत से थोड़ी ज़्यादा  हो भी जाए तो हमारा शरीर उसे पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है। यह शरीर में जमा होकर कोई जहर नहीं बनाता। फिर भी डॉक्टर जितने दिन का कोर्स बताएं उसे उतना ही लेना चाहिए।

किन लक्षणों के दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए

  • जब हाथों और पैरों में सुई चुभने जैसा दर्द लगातार रहने लगे और मालिश से भी आराम न मिले।
  • जब चलते समय पैर लड़खड़ाने लगें या शरीर का बैलेंस बनाने में दिक्कत आने लगे।
  • बहुत ज़्यादा  थकान महसूस हो और थोड़ा सा काम करने पर ही सांस फूलने लगे।
  • जीभ का रंग एकदम लाल हो जाए और उसमें छाले या सूजन आ जाए।
  • याददाश्त कमज़ोर  होने लगे और आप रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगें।

डाइट में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

अगर आप मांसाहारी हैं तो आपके लिए अंडे, मछली और चिकन इस विटामिन के बहुत अच्छे स्रोत हैं। लेकिन अगर आप पूरी तरह शाकाहारी हैं तो आपको अपनी डाइट पर खास ध्यान देना होगा। अपने रोज के खाने में दूध, दही, पनीर और छाछ को जरूर शामिल करें। आजकल बाजार में बहुत से ऐसे ओट्स और सीरियल्स आते हैं जिनमें ऊपर से विटामिन बी12 मिलाया जाता है आप उन्हें भी नाश्ते में खा सकते हैं। इसके अलावा सोया मिल्क भी एक बहुत बढ़िया और आसान विकल्प है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए

  • जब झुनझुनी और सुन्नपन कई दिनों तक लगातार बना रहे और कम होने का नाम ही न ले।
  • जब सुन्नपन की वजह से आपके रोजमर्रा के काम जैसे कि चीजों को पकड़ना या चलना फिरना मुश्किल होने लगे।
  • डाइट में बदलाव करने और अच्छा खाना खाने के बाद भी  कमज़ोरी में कोई सुधार न दिखे।
  • जब सुन्नपन के साथ-साथ आपको देखने में परेशानी हो या आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगे।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य विटामिन B12 की कमी की पहचान कर उसे पूरा करना और नसों की सुरक्षा करना। समग्र स्वास्थ्य, पाचन और शरीर के संतुलन पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका खून की जाँच, विटामिन B12 की गोलियाँ, इंजेक्शन और कारण के अनुसार उपचार। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
समस्या का दृष्टिकोण विटामिन की कमी के कारण और उसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है। पाचन, व्यक्ति की प्रकृति और शरीर के संतुलन को ध्यान में रखकर देखभाल की जाती है।
असर होने की गति उपचार शुरू होने के बाद विटामिन B12 के स्तर और लक्षणों में अपेक्षाकृत जल्दी सुधार आ सकता है। नियमित पालन के साथ समग्र स्वास्थ्य और पाचन में धीरे-धीरे सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण कमी के कारण का उपचार, नियमित जाँच और संतुलित पोषण पर ज़ोर। स्वस्थ आहार, नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

हाथ पैरों का सुन्न होना कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे घबराया जाए लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी भारी पड़ सकता है। विटामिन बी12 हमारी नसों की खुराक है और इसके बिना हमारा तंत्रिका तंत्र सही से काम नहीं कर सकता। अगर आपको अपने अंदर ऐसे कोई भी लक्षण दिखते हैं तो घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करने की बजाय एक साधारण सा ब्लड टेस्ट करवाएं। सही डाइट और सही समय पर इलाज शुरू करने से आपकी नसें फिर से पूरी तरह स्वस्थ हो सकती हैं।

References

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK441923/

https://ods.od.nih.gov/factsheets/VitaminB12-HealthProfessional/

https://www.healthline.com/nutrition/vitamin-b12-deficiency-symptoms

https://www.healthline.com/health/b12-deficiency

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अगर कमी बहुत ज़्यादा  है और आप इंजेक्शन ले रहे हैं तो कुछ ही हफ्तों में आराम दिखने लगता है। गोलियों और डाइट के जरिए इस कमी को पूरी तरह खत्म होने में तीन से छह महीने तक का समय लग सकता है।

ऐसा जरूरी नहीं है। अगर शाकाहारी लोग दूध दही पनीर और सही मात्रा में डेयरी उत्पादों का सेवन करते रहें तो वे इस कमी से बच सकते हैं।

अगर आप शुरुआती लक्षणों को पहचान कर तुरंत इलाज शुरू कर देते हैं तो नसों का डैमेज पूरी तरह रुक जाता है और सुन्नपन खत्म हो जाता है। लेकिन अगर सालों तक इलाज न हो तो कुछ डैमेज पक्का हो सकता है।

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। इस विटामिन का वजन बढ़ने से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह सिर्फ आपके शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है जिससे आपको थकान कम लगती है।

नहीं धूप से हमें सिर्फ विटामिन डी मिलता है। विटामिन बी12 केवल खाने पीने की चीजों या फिर सप्लीमेंट्स के जरिए ही शरीर को मिल सकता है।

जैसा कि पहले बताया गया है यह पानी में घुलने वाला विटामिन है। शरीर जरूरत के हिसाब से इसे रख लेता है और बाकी को बाहर निकाल देता है इसलिए इसका कोई बड़ा नुकसान नहीं देखा गया है।

मालिश करने से खून का दौरा थोड़ी देर के लिए तेज हो जाता है जिससे पल भर का आराम मिल सकता है लेकिन यह पक्का इलाज नहीं है। जब तक अंदर से विटामिन की कमी पूरी नहीं होगी सुन्नपन वापस आ जाएगा।

सीधे तौर पर तनाव विटामिन को खत्म नहीं करता लेकिन ज़्यादा  तनाव लेने से पेट का हाजमा खराब होता है और खराब हाजमे की वजह से शरीर खाने में से विटामिन बी12 सोख नहीं पाता।

हां अगर छोटे बच्चे बिल्कुल भी दूध नहीं पीते हैं या उनकी डाइट में पौष्टिक चीजें शामिल नहीं हैं तो बच्चों में भी इसकी कमी से  कमज़ोरी और चिड़चिड़ापन हो सकता है।

यह फैसला सिर्फ डॉक्टर आपके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट देखकर करते हैं। अगर कमी बहुत ज़्यादा  खतरनाक स्तर पर है तो शुरुआत में नसों को बचाने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं और फिर गोलियां शुरू की जाती हैं।

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