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Menopause के बाद bone health क्यों important हो जाती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 31 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 31 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि बढ़ती उम्र के साथ अचानक घुटनों और कमर में तेज़ दर्द रहने लगा हो? महिलाओं की जिंदगी में मेनोपॉज़ एक बहुत बड़ा मोड़ होता है। जब पीरियड्स आने बंद होते हैं, तो शरीर के अंदर हॉर्मोन्स में भी काफी उथल-पुथल मचती है। इसका सबसे ज़्यादा असर हड्डियों की मज़बूती पर पड़ता है। अक्सर महिलाएँ परेशान रहती हैं कि कैल्शियम की गोलियाँ लेने के बाद भी शरीर में इतनी थकावट और कमज़ोरी क्यों लग रही है?यहाँ हम यही समझेंगे कि इस उम्र के बाद हड्डियों का ख़याल रखना इतना ज़रूरी क्यों हो जाता है और इन्हें मज़बूत बनाए रखने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है।

हड्डियों की सेहत पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और हड्डी रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं का शरीर एक बहुत बड़े बदलाव से गुज़रता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस उम्र में एस्ट्रोजन नाम का हॉर्मोन तेज़ी से कम होने लगता है। यह वही अहम हॉर्मोन है जो हमारी हड्डियों को अंदर से मज़बूत और पूरी तरह सुरक्षित रखता है। डॉक्टरों की राय में, जब महिलाएँ जोड़ों में दर्द या कमज़ोरी की शिकायत लेकर आती हैं, तो वे इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का असर नहीं मानते। उनका कहना है कि यह हॉर्मोन्स की कमी का सीधा असर है जिसे सही डाइट से संभाला जा सकता है।

मेनोपॉज़ के बाद अचानक हड्डियाँ कमज़ोर क्यों होती हैं?

यह एक बहुत ज़रूरी सवाल है कि आखिर इस दौरान शरीर की हड्डियाँ इतनी कमज़ोर क्यों पड़ने लगती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण एस्ट्रोजन हॉर्मोन का गिरना है। जब शरीर में एस्ट्रोजन कम होता है, तो हड्डियाँ अपना कैल्शियम तेज़ी से खोने लगती हैं। हड्डियों के अंदर जो पुराना ढाँचा टूटता है, उसकी जगह नया ढाँचा बनने की रफ्तार बहुत ज़्यादा धीमी हो जाती है। इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में बोन लॉस कहा जाता है। इसी वजह से हड्डियाँ अंदर से बिल्कुल खोखली और कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे हल्का सा झटका लगने पर भी उनके टूटने का खतरा रहता है।

हड्डियों की कमज़ोरी से जुड़ी प्रतिशत दर क्या है?

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि मेनोपॉज़ के बाद कितनी प्रतिशत महिलाएँ इस भयंकर कमज़ोरी का शिकार होती हैं। स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि भारत में पचास की उम्र पार कर चुकी लगभग अस्सी प्रतिशत महिलाएँ हड्डियों के भारी दर्द से जूझती हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो लगभग पैंतालीस प्रतिशत मामलों में इसका सीधा कारण एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी होता है। तीस प्रतिशत मामलों में शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की भारी कमी ज़िम्मेदार होती है। वहीं बचे हुए पच्चीस प्रतिशत मामलों में व्यायाम न करना और खराब जीवनशैली मुख्य रूप से हड्डियों को अंदर से खोखला करती है।

कैल्शियम लेने पर भी जोड़ों में दर्द क्यों रहता है?

कई महिलाएँ यह शिकायत करती हैं कि वे रोज़ कैल्शियम की गोलियाँ खा रही हैं, फिर भी जोड़ों में हमेशा भारी दर्द रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में कैल्शियम को पचाने और उसे हड्डियों तक पहुँचाने के लिए विटामिन डी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। अगर आपके शरीर में विटामिन डी नहीं है, तो सारा कैल्शियम बिना इस्तेमाल हुए शरीर से बाहर निकल जाता है। इसके अलावा, हॉर्मोन्स के असंतुलन की वजह से जोड़ों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई सूखने लगती है। इसी चिकनाई के कम होने से हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं और आपको लगातार तेज़ दर्द महसूस होता है।

हड्डियों से जुड़े किन संकेतों को हल्के में न लें?

यह बिल्कुल सही है कि उम्र बढ़ने के साथ हल्का दर्द होना एक बहुत ही आम बात है। लेकिन जब शरीर कुछ गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इन बड़े संकेतों को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए:

  • कमर का झुकना: अगर आपकी लंबाई अचानक कम लगने लगे और कमर आगे की तरफ झुकने लगे।
  • हल्की चोट पर फ्रैक्चर: अगर मामूली सी चोट लगने या खाँसने पर भी हड्डी में अचानक फ्रैक्चर हो जाए।
  • लगातार पीठ दर्द: जब रीढ़ की हड्डी में हर वक्त एक भयंकर और चुभने वाला दर्द लगातार बना रहे।
  • नाखूनों का टूटना: अगर आपके हाथों के नाखून बहुत ज़्यादा कमज़ोर होकर बार-बार तेज़ी से टूटने लगें।

क्या मेनोपॉज़ की दवाइयाँ हड्डियों को नुकसान पहुँचाती हैं?

जी हाँ, कई बार मेनोपॉज़ के भारी लक्षणों को कम करने के लिए हम जो दवाइयाँ लेते हैं, वे हड्डियों के लिए नई परेशानी बन जाती हैं। हॉट फ्लैशेस और घबराहट दूर करने के लिए कुछ महिलाओं को खास हॉर्मोन थेरेपी या तेज़ स्टेरॉयड्स दिए जाते हैं। अगर ये दवाइयाँ लंबे समय तक बिना सही डॉक्टरी सलाह के खाई जाएँ, तो ये हड्डियों के प्राकृतिक घनत्व को तेज़ी से कम करने लगती हैं। इन दवाइयों की वजह से शरीर हड्डियों में नया कैल्शियम बिल्कुल जमा नहीं कर पाता है। इसलिए अगर दवा खाने के बाद आपका दर्द बढ़े, तो अपने डॉक्टर से तुरंत खुलकर बात करनी चाहिए।

हड्डियों को मज़बूत बनाने का आयुर्वेदिक नज़रिया क्या है?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ दोषों पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, मेनोपॉज़ के समय महिलाओं के शरीर में वात दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वात दोष हड्डियों के अंदर की नमी और चिकनाई को पूरी तरह सुखा देता है, जिससे हड्डियाँ रूखी और भुरभुरी (ऑस्टियोपोरोसिस) हो जाती हैं। आयुर्वेद स्पष्ट रूप से कहता है कि बीमारी को सिर्फ कैल्शियम की बाहरी गोलियों से ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए आपको पौष्टिक आहार और गर्म तेल की मालिश के ज़रिए शरीर के अंदर बढ़े हुए वात दोष को हमेशा के लिए शांत करना होगा।

हड्डियों के दर्द से राहत पाने के लिए क्या करें?

जब भी आपके जोड़ों या कमर में तेज़ दर्द हो, तो बाज़ार की तेज़ पेनकिलर खाने की बजाय घर पर कुछ सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके आजमाने चाहिए। ये घरेलू तरीके हड्डियों को अंदर से बहुत जल्दी आराम पहुँचाते हैं:

  • तिल के तेल की मालिश: रोज़ रात को गुनगुने तिल के तेल से अपने दर्द वाले जोड़ों की बहुत हल्के हाथों से मालिश करें।
  • हल्दी वाला दूध पिएँ: रात को सोते समय गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर पिएँ, यह सूजन को पूरी तरह खत्म करता है।
  • सिकाई का इस्तेमाल: बहुत ज़्यादा दर्द होने पर गर्म पानी की थैली से दर्द वाली जगह की अच्छी तरह रोज़ाना सिकाई करें।
  • मेथी दाने का पानी: रोज़ सुबह खाली पेट भीगे हुए मेथी दाने का पानी पिएँ, यह शरीर में वात दोष को बहुत अच्छे से कंट्रोल करता है।

क्या बढ़ता तनाव भी हड्डियों को कमज़ोर करता है?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में मानसिक तनाव एक ऐसी भयानक बीमारी बन गया है जो आपकी हड्डियों को अंदर ही अंदर पूरी तरह खोखला कर रहा है। जब आप ऑफिस के काम या परिवार को लेकर लगातार बहुत ज़्यादा चिंतित रहती हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन काफी ज़्यादा बढ़ जाता है। यह खतरनाक हार्मोन हड्डियों को नया रूप देने वाली कोशिकाओं के काम को बिल्कुल धीमा कर देता है। इसके अलावा, तनाव के कारण पेट का पाचन खराब होता है, जिससे खाने का कैल्शियम शरीर को नहीं लग पाता। असल में आपका भारी मानसिक तनाव आपकी कमज़ोर हड्डियों का बहुत बड़ा कारण है।

मेनोपॉज़ में हड्डियों को टूटने से बचाने के उपाय क्या हैं?

अगर आप चाहती हैं कि बढ़ती उम्र में आपकी हड्डियाँ मज़बूत रहें और आपको बार-बार फ्रैक्चर का सामना न करना पड़े, तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव करने होंगे। एक अच्छी जीवनशैली अपनाकर आप आसानी से फिट रह सकती हैं:

  • सुबह की ताज़ा धूप लें: विटामिन डी की कमी को प्राकृतिक रूप से पूरा करने के लिए रोज़ाना सुबह पंद्रह मिनट हल्की धूप में ज़रूर बैठें।
  • कैल्शियम वाला भोजन खाएँ: अपनी रोज़ की डाइट में दूध, दही, पनीर, रागी और ताज़ी हरी सब्ज़ियों की मात्रा बहुत ज़्यादा बढ़ा दें।
  • वज़न उठाने वाला व्यायाम: हड्डियों को अंदर से मज़बूत करने के लिए हल्का स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग वाला व्यायाम रोज़ाना सुबह ज़रूर करें।
  • नमक और कैफीन कम करें: दिन भर में बहुत ज़्यादा चाय, कॉफी और खाने में ऊपर से कच्चे नमक का इस्तेमाल बिल्कुल कम कर दें।

बोन हेल्थ के लिए आयुर्वेदिक और आधुनिक इलाज में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
बीमारी का नज़रिया हड्डियों की कमज़ोरी का कारण जानने के लिए जाँच (जैसे DEXA स्कैन, विटामिन D, कैल्शियम आदि) के आधार पर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार कैल्शियम, विटामिन D, अन्य दवाइयाँ, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह दी जाती है। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली का महत्व कैल्शियम-समृद्ध आहार, नियमित व्यायाम और धूप को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य सुधार पर विशेष बल दिया जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य हड्डियों को मज़बूत रखना, फ्रैक्चर के जोखिम को कम करना और गतिशीलता बनाए रखना। समग्र स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और लंबे समय तक हड्डियों की देखभाल पर ध्यान देना।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलें?

मेनोपॉज़ के बाद हड्डियों में हल्का दर्द रहना एक बहुत ही आम बात है और यह आराम करने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है। लेकिन हमें मालूम होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • असहनीय दर्द उठना: अगर आपके कूल्हे या कमर में अचानक से ऐसा भयंकर दर्द हो कि आप अपने पैरों पर बिल्कुल खड़ी भी न हो पाएँ।
  • हड्डियों का आकार मुड़ना: अगर आपको अपनी उंगलियों या घुटनों के जोड़ों का आकार बिल्कुल टेढ़ा, सूजा हुआ और बहुत अजीब लगने लगे।
  • चलने में लड़खड़ाहट: दर्द और कमज़ोरी के कारण अगर चलते समय आपका संतुलन बिगड़ने लगे और आप बार-बार ज़मीन पर गिरने लगें।

निष्कर्ष

मेनोपॉज़ एक महिला के जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण और बिल्कुल स्वाभाविक हिस्सा है। यह साफ तौर पर आपको बताता है कि शरीर नए बदलावों से गुज़र रहा है और अब आपको अपनी सेहत का सबसे ज़्यादा ध्यान रखना है। हड्डियों का कमज़ोर होना किसी एक कारण से नहीं होता। इसके पीछे तेज़ी से गिरते हुए हॉर्मोन्स, कैल्शियम की कमी, बढ़ता हुआ मानसिक तनाव और आपकी खराब जीवनशैली सबसे बड़ी वजह हैं। अपनी सेहत के प्रति हमेशा जागरूक रहें। सही समय पर पौष्टिक खानपान, सुबह की ताज़ा धूप और नियमित हल्का व्यायाम करने से सब कुछ ठीक होगा। परेशानी तंग करे तो डॉक्टर से सही सलाह लें, क्योंकि खुद को खुश रखना ही सबसे बड़ी दवा है।

References

https://www.who.int/news/item/23-02-2023-new-collaboration-targets-better-bone-health-and-ageing

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK45517/

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0002916523279083

https://www.healthline.com/health/osteoporosis/osteoporosis-facts-and-statistics

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हड्डियाँ हमेशा के लिए कमज़ोर हो जाएँगी। अगर आप सही समय पर अपनी डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी बढ़ा दें, और रोज़ाना हल्का व्यायाम करना शुरू कर दें, तो आपकी हड्डियाँ दोबारा बहुत मज़बूत बन सकती हैं।

हड्डियों की मज़बूती के लिए गाय का ताज़ा दूध सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इसे पचाना बहुत आसान होता है। अगर आपको दूध से गैस बनती है, तो आप अपनी डाइट में बादाम का दूध या सोया दूध भी बहुत आराम से शामिल कर सकती हैं।

जी हाँ, चाय और कॉफी में कैफीन की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। जब आप दिन भर में कई कप चाय पीती हैं, तो यह कैफीन आपके शरीर के ज़रूरी कैल्शियम को पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल देता है, जिससे हड्डियाँ तेज़ी से भुरभुरी और कमज़ोर होने लगती हैं।

बिल्कुल नहीं, पूरी तरह से चलना छोड़ देने से आपके घुटने और भी ज़्यादा जाम हो जाएँगे। आपको दौड़ने या भारी कसरत करने के बजाय आराम से हल्की वॉक करनी चाहिए। चलने से जोड़ों के बीच खून का दौरा बढ़ता है और दर्द में काफी आराम मिलता है।

यह एक बहुत बड़ी गलती हो सकती है। शरीर में विटामिन डी का बहुत ज़्यादा हो जाना भी नुकसान पहुँचाता है। इसलिए हमेशा पहले अपना ब्लड टेस्ट करवाएँ और डॉक्टर की सलाह के बाद ही सही पावर वाली विटामिन डी की गोली खाना शुरू करें।

जी हाँ, मेनोपॉज़ के बाद बहुत सी महिलाओं को थायरॉइड की परेशानी हो जाती है। थायरॉइड के कारण शरीर का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा पड़ जाता है, जिससे कैल्शियम सही से पच नहीं पाता और आपके पूरे शरीर की हड्डियों और जोड़ों में भारी दर्द रहने लगता है।

जैसे ही महिलाओं के पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाएँ (मेनोपॉज़ शुरू हो), उन्हें अपना पहला बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) करवा लेना चाहिए। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर हर दो साल में एक बार यह टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए ताकि सही स्थिति पता चल सके।

हाँ, मेनोपॉज़ में मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से वज़न तेज़ी से बढ़ता है। विज्ञान के अनुसार, शरीर का एक किलो वज़न बढ़ने पर घुटनों पर चार किलो का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी भारी दबाव की वजह से आपके घुटनों में हर समय भयंकर दर्द और भारी सूजन रहने लगती है।

मखाना कैल्शियम और प्रोटीन का एक बहुत ही बेहतरीन और प्राकृतिक स्रोत है। रोज़ाना शाम को हल्के देसी घी में भुने हुए मखाने खाने से शरीर को भरपूर कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों का रूखापन खत्म होता है और जोड़ों के दर्द में बहुत जल्दी और जादुई आराम मिलता है।

सकता, उसके लिए आपको प्लास्टर और डॉक्टर की ही ज़रूरत पड़ेगी। लेकिन हड्डी जुड़ने के बाद जब प्लास्टर खुलता है, तो योगासन आपकी सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को दोबारा खोलने और हड्डियों में पुरानी जैसी ताकत वापस लाने में सबसे ज़्यादा मदद करता है।

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