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Vitamin D, Calcium लेने के बाद भी Joint Pain — Absorption का पूरा सच

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 05 May, 2026
  • category-iconUpdated on 05 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

जोड़ों का दर्द दूर करने के लिए आज लोग रोज़ाना विटामिन डी (Vitamin D) और कैल्शियम की महँगी गोलियाँ खा रहे हैं। लेकिन महीनों ये दवाइयाँ खाने के बाद भी दर्द खत्म नहीं होता और हड्डियाँ कमज़ोर ही रहती हैं। आधुनिक विज्ञान मानता है कि समस्या सप्लीमेंट्स में नहीं, बल्कि शरीर के 'अवशोषण' (Absorption) में है। आयुर्वेद के अनुसार, खराब पाचन से आँतों में भयंकर 'आम' (Toxins) जमा हो जाता है, जो खनिजों को शरीर में पचने नहीं देता। बिना पचे ये सप्लीमेंट्स पथरी पैदा कर देते हैं। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आँतों को साफ कर पाचक अग्नि बढ़ाता है, ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से कैल्शियम सोख सके और दर्द हमेशा के लिए खत्म हो।

कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट्स की ज़रूरत और Absorption का असली रूप क्या है?

आधुनिक चिकित्सा में जब भी जोड़ों में दर्द होता है, तो डॉक्टर तुरंत कैल्शियम और विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लिख देते हैं। कैल्शियम हड्डियाँ बनाने का ईंट-गारा है, और विटामिन डी वह मज़दूर है जो कैल्शियम को आँतों से निकालकर खून में पहुँचाता है। लेकिन अगर आपका पेट खराब है, तो यह सिस्टम फेल हो जाता है। आप कितनी भी गोलियाँ खा लें, वे आँतों से अवशोषित (Absorb) होकर हड्डियों तक नहीं पहुँच पातीं। आयुर्वेद मानता है कि जब शरीर की 'पाचक अग्नि' और 'अस्थि अग्नि' (Bones metabolism) कमज़ोर होती है, तो बाहर से दिया गया कैल्शियम शरीर में पचता नहीं है, बल्कि 'आम' बनकर नसों और किडनी में जमने लगता है।

Absorption न होने पर कैल्शियम सप्लीमेंट्स से जुड़ी बीमारियाँ कितनी तरह की होती हैं?

कैल्शियम और विटामिन डी शरीर में न पचने पर यह फायदे के बजाय मुख्य रूप से इन भयंकर बीमारियों का कारण बनता है:

  • किडनी स्टोन (Kidney Stones): जो कैल्शियम हड्डियाँ नहीं सोख पातीं, वह खून में घूमकर किडनी में पथरी (Calcium Oxalate stones) के रूप में जमा होने लगता है।
  • नसों का सख्त होना (Vascular Calcification): अवशोषण (Absorption) ठीक न होने पर कैल्शियम हार्ट की नसों में जमने लगता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस का भड़कना: कैल्शियम हड्डियों के अंदर जाने के बजाय जोड़ों के बाहरी किनारों पर नुकीली हड्डी (Bone Spurs) के रूप में जमने लगता है, जिससे जोड़ों का दर्द भयंकर हो जाता है।

Absorption की कमी होने पर शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण

महीनों कैल्शियम खाने के बावजूद जब शरीर उसे सोख नहीं पाता, तो शरीर अंदर से कमज़ोर होने के ये लक्षण देता है:

  • लगातार जोड़ों का दर्द: दवाइयाँ खाने के बाद भी उँगलियाँ, घुटनों और कमर में भयंकर दर्द और जकड़न बने रहना।
  • माँसपेशियाँ में ऐंठन: रात को सोते समय पिंडलियों (Calves) की माँसपेशियाँ का भयंकर रूप से चढ़ जाना।
  • सुस्ती और साँस फूलना: शरीर में विटामिन डी न पचने से इम्युनिटी गिर जाती है, थोड़ी सी सीढ़ियाँ चढ़ने पर साँस फूलती है और आँखें थकी-थकी लगती हैं।
  • पेट का भारीपन: कैल्शियम की गोलियाँ खाने के तुरंत बाद पेट में भयंकर गैस, एसिडिटी और कब्ज़ का हो जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो गोलियों की डोज़ बढ़ाने के बजाय अपना पाचन सुधारें और चिकित्सक से परामर्श लें।

सप्लीमेंट्स के बाद भी हड्डियाँ कमज़ोर होने और दर्द भड़कने के असली कारण

रोज़ाना महँगे सप्लीमेंट्स खाने के बाद भी आपकी हड्डियाँ अंदर से कमज़ोर क्यों रहती हैं? इसके मुख्य अंदरूनी कारण इस प्रकार हैं:

  • आँतों (Gut) में 'आम' का जमाव: खराब खान-पान से आँतों की परत पर 'आम' (गंदगी) की एक मोटी परत जम जाती है। यह परत सप्लीमेंट्स को खून में सोखने (Absorption) ही नहीं देती।
  • विटामिन K2 और मैग्नीशियम की कमी: कैल्शियम को खून से हड्डियों के अंदर धकेलने का काम विटामिन K2 करता है। इसके बिना कैल्शियम नसों में भटकता रहता है।
  • वात दोष का भयंकर प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वायु (वात) बढ़ने से हड्डियों में रूखापन आ जाता है। रूखी हड्डियाँ किसी भी पोषण को ग्रहण नहीं कर पातीं।
  • थायरॉइड और ग्रन्थियाँ का असंतुलन: पैराथायरॉइड ग्रन्थियाँ (Parathyroid Glands) कैल्शियम को कंट्रोल करती हैं। तनाव और खराब पाचन से ये ग्रन्थियाँ सुस्त हो जाती हैं।

कमज़ोर हड्डियों और बिना पचे सप्लीमेंट्स को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

अगर शरीर के 'अवशोषण' (Absorption) को ठीक किए बिना सिर्फ सप्लीमेंट्स खाये जाएँ, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हड्डियों का भुरभुरा होना (Osteoporosis): हड्डियाँ अंदर से खोखली हो जाती हैं और हल्का सा झटका लगने पर भी टूट (Fracture) सकती हैं।
  • पाचन तंत्र का डैमेज होना: लगातार कैल्शियम कार्बोनेट की गोलियाँ पेट के एसिड को खत्म कर देती हैं, जिससे अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।
  • दवाइयों पर भयंकर निर्भरता: शरीर अपना प्राकृतिक कैल्शियम सोखना भूल जाता है और हमेशा के लिए सप्लीमेंट्स का मोहताज हो जाता है।

Absorption और हड्डियों की ताकत पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में कैल्शियम को 'अस्थि धातु' का भोजन माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में सात धातुएँ होती हैं और हर धातु की अपनी अग्नि (मेटाबॉलिज़्म) होती है। जब 'अस्थि अग्नि' (Bone Fire) मंद पड़ जाती है, तो हड्डियाँ पोषण ग्रहण नहीं कर पातीं। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि सप्लीमेंट्स पच क्यों नहीं रहे हैं  क्या आँतों में खराबी है, या वात दोष ने हड्डियों को सुखा दिया है। आयुर्वेद में बस कैल्शियम की गोलियाँ थोपना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, आँतों की सफाई हो, 'आम' खत्म हो, और पाचक अग्नि प्राकृतिक रूप से इतनी मज़बूत बने कि आप जो भी साधारण खाना खाएँ, शरीर उसका पूरा कैल्शियम सोख ले।

जीवा आयुर्वेद Absorption सुधारने और ताकत वापस लाने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे सभी लक्षणों, जोड़ों के दर्द और पेट की गैस की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा खायी जा रही विटामिन डी या कैल्शियम की गोलियों की डोज़ का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित दोषों को पकड़ने के बाद ही आँतों को साफ करने और Absorption (अवशोषण) बढ़ाने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

हड्डियों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाने वाली अचूक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में पाचक अग्नि को तेज़ करने, वात शांत करने और हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण (Absorption) बढ़ाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अस्थिशृंखला (Hadjod): आयुर्वेद में यह हड्डियों को जोड़ने और अस्थि धातु को ताकत देने वाली सर्वश्रेष्ठ औषधि है। यह शरीर को कैल्शियम सोखने में तेज़ी से मदद करती है।
  • प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti): यह समुद्री मूँगे से बना प्राकृतिक कैल्शियम है। यह पचने में इतना हल्का होता है कि कमज़ोर आँतों वाले मरीज़ भी इसे आसानी से सोख लेते हैं।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह वात दोष को शांत करती है, थकी हुई माँसपेशियाँ को मज़बूत बनाती है और जोड़ों के भयंकर दर्द को दूर करती है।
  • गुग्गुल (Guggul): यह शरीर में जमे हुए 'आम' को पिघलाता है और हड्डियों के अंदर तक पोषण पहुँचाने वाले स्रोतों (Channels) को खोलता है।

जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और Absorption बढ़ाने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, आँतों की सफाई करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • बस्ती कर्म (Basti): यह वात रोगों और हड्डियों के दर्द की सबसे महान चिकित्सा है। औषधीय तेल का एनिमा आँतों के सूखेपन को खत्म करता है, जिससे आँतों की कैल्शियम सोखने (Absorption) की क्षमता तुरंत बढ़ जाती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): तिल या महानारायण तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से माँसपेशियाँ और हड्डियों के जोड़ों को बाहरी पोषण मिलता है।
  • नस्य (Nasya): नाक में औषधीय तेल की 2-2 बूँदें डालने से नर्वस सिस्टम और ग्रन्थियाँ शांत होती हैं, जो दर्द को कम करने में मदद करती हैं।

हड्डियों को बचाने वाला शुद्ध आहार: क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कौन सा आहार Absorption बढ़ाता है और कौन सा उसे रोकता है:

क्या खाएँ?

  • शुद्ध गाय का घी और तिल: काले तिल कैल्शियम का भंडार हैं। इन्हें गाय के घी के साथ भूनकर खाएँ, घी आँतों की चिकनाई बढ़ाता है जिससे कैल्शियम तुरंत पचता है।
  • सहजन (Drumsticks): मोरिंगा या सहजन की फली में दूध से कई गुना ज़्यादा कैल्शियम होता है और यह पचने में बहुत हल्की होती है।
  • धूप स्नान (Sunbath): सुबह की प्राकृतिक धूप लें। प्राकृतिक विटामिन डी सप्लीमेंट्स से हज़ार गुना बेहतर और सुरक्षित होता है।

क्या न खाएँ?

  • चाय और कॉफी: इनमें मौजूद 'टैनिन' और 'कैफीन' शरीर को कैल्शियम सोखने से रोकते हैं। खाने के तुरंत बाद चाय पीना हड्डियों के लिए ज़हर है।
  • मैदा और कोल्ड ड्रिंक्स: ये आँतों में चिपककर 'आम' बनाते हैं और खून को एसिडिक कर देते हैं, जिससे हड्डियाँ तेज़ी से गलने लगती हैं।

जीवा आयुर्वेद में हड्डियों और Absorption के रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ ब्लड रिपोर्ट (Vit D3/B12) देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, जोड़ों के दर्द और थकान के स्तर को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की जा रही भारी कैल्शियम की गोलियों की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, धूप में बैठने के समय और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर यह तय किया जाता है कि शरीर सप्लीमेंट्स को 'अवशोषित' (Absorb) क्यों नहीं कर पा रहा है।

जोड़ों के इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद से कैसे जुड़ें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

Absorption सुधरने और दर्द के पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में हड्डियों की कमज़ोरी (अस्थि क्षय) का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर दर्द की अभी शुरुआत है, तो आँतों की सफाई (डिटॉक्स) और सही आहार से 3 से 4 हफ्तों में ही शरीर हल्का महसूस होने लगता है और दर्द कम हो जाता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर गोलियाँ खाने से पेट खराब हो चुका है और हड्डियाँ भुरभुरी हो गई हैं, तो पाचक अग्नि को 'रीसेट' होने और हड्डियों में ताकत लौटने में 4 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और धूप स्नान का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में सप्लीमेंट्स के बिना भी उसकी हड्डियाँ फौलाद जैसी मज़बूत रहती हैं।

मरीज़ों का भरोसा – कैल्शियम गोलियों से मुक्ति के जीवन बदलने वाले अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाता था। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।जीवा (Jiva) की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा (Jiva Ayurveda) में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।

आधुनिक (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स (NSAIDs) और स्टेरॉयड से दर्द व सूजन को दबाना OA में जोड़ों की चिकनाई बढ़ाना और RA में ‘आम’ नष्ट कर जड़ से सुधार करना
नज़रिया समस्या को केवल जोड़ों की बीमारी (OA/RA) मानना रोग के कारण (वात, आम, अग्नि) को समझकर संपूर्ण दृष्टिकोण से देखना
उपचार तरीका दवाओं से दर्द के सिग्नल को रोकना और सूजन कम करना जड़ी-बूटियों से लुब्रिकेशन बढ़ाना, अग्नि सुधारना और डिटॉक्स करना
डाइट और लाइफस्टाइल दवाइयों पर निर्भरता, जीवनशैली पर सीमित ध्यान वात-शामक डाइट, सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार पर ज़ोर
लंबा असर दवा बंद होते ही दर्द वापस, किडनी व लिवर पर असर का खतरा शरीर मज़बूत बनता है, प्राकृतिक राहत और दीर्घकालिक सुधार

लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

सप्लीमेंट्स खाने के दौरान अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • कैल्शियम खाने के बाद पेट में भयंकर दर्द, ऐंठन या कई दिनों तक कब्ज़ रहना।
  • उँगलियों और जोड़ों में दर्द कम होने के बजाय अचानक सूजन और लालिमा बढ़ जाना।
  • यूरिन (पेशाब) करते समय भयंकर जलन या दर्द होना (जो पथरी का संकेत हो सकता है)।
  • नींद पूरी होने के बावजूद आँखें और शरीर दिन भर थका-थका महसूस होना।

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद के हिसाब से सप्लीमेंट्स खाने के बाद भी जोड़ों का दर्द न जाना मुख्य रूप से पाचक अग्नि के मंद होने और आँतों में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने से जुड़ी समस्या है। अप्राकृतिक गोलियाँ खाने से शरीर उन्हें सोख नहीं पाता, जिससे वे किडनी और नसों में जमकर भयंकर बीमारियाँ पैदा करती हैं। सिर्फ बाहर से गोलियाँ खा लेने से हड्डियाँ मज़बूत नहीं होतीं। इलाज में शरीर की वात-पित्त शुद्धि, हडजोड़ व अश्वगंधा जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और आँतों की सफाई (बस्ती) सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे शरीर का 'Absorption' सुधरे और आप बिना किसी सप्लीमेंट के जीवन भर स्वस्थ रहें।

FAQs

हाँ, अगर आप कैल्शियम कार्बोनेट वाली गोलियाँ बिना डॉक्टर की सलाह के ज़्यादा मात्रा में खाते हैं और शरीर उसे 'Absorb' नहीं कर पाता, तो वह सीधा किडनी में जाकर 'कैल्शियम ऑक्सालेट' की पथरी बना देता है।

आधुनिक विज्ञान के अनुसार विटामिन K2 और मैग्नीशियम ज़रूरी है, जबकि आयुर्वेद के अनुसार 'स्वस्थ पाचक अग्नि' और आँतों का साफ होना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। बिना इसके कोई भी विटामिन नहीं पचेगा।

बिल्कुल। प्रवाल पिष्टी प्राकृतिक समुद्री मूँगे से बनी आयुर्वेदिक औषधि है। यह तासीर में ठंडी और पचने में इतनी हल्की होती है कि शरीर इसे 100% सोख (Absorb) लेता है, और इससे कोई कब्ज़ या पथरी नहीं होती।

अगर आपका पाचन खराब है, तो दूध पेट में जाकर 'आम' (गंदगी) बनाता है जो जोड़ों में दर्द पैदा करता है। इसलिए आयुर्वेद दूध में हमेशा हल्दी, सोंठ या गाय का घी मिलाकर पीने की सलाह देता है।

हाँ, सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच की धूप में शरीर का 30-40% हिस्सा कम से कम 20 मिनट तक खुला रखने से शरीर को पर्याप्त प्राकृतिक विटामिन डी मिल जाता है, जो सप्लीमेंट्स से कई गुना बेहतर है।

हाँ, कैल्शियम नसों के सिग्नल्स को पास करने में मदद करता है। इसकी भयंकर कमी से नर्वस सिस्टम कमज़ोर हो जाता है और हाथ-पैरों की उँगलियाँ सुन्न पड़ने लगती हैं।

बिल्कुल, यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के असंतुलन और वात दोष के बढ़ने का सबसे बड़ा संकेत है, जिससे माँसपेशियाँ में भयंकर ऐंठन (Cramps) आती है।

हाँ, नाक में घी डालने से पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) और नर्वस सिस्टम को ताकत मिलती है। यह वात दोष को शांत करता है, जिससे पूरे शरीर के जोड़ों का दर्द कम होता है।

कैल्शियम सप्लीमेंट्स आँतों का पानी सोख लेते हैं। इससे बचने के लिए रोज़ाना मुनक्का, पपीता और रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ 'त्रिफला' चूर्ण का सेवन करें।

हाँ, जीवा आयुर्वेद में सही जड़ी-बूटियों (अस्थिशृंखला, अश्वगंधा) और आहार के नियमों का पालन करके 'अस्थि अग्नि' को ठीक किया जा सकता है, जिससे शरीर खुद कैल्शियम सोखने लगता है और दर्द पूरी तरह खत्म हो जाता है। 

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