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Elderly लोगों में बार-बार चक्कर आना क्यों हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि घर के बड़े बुजुर्गों को चक्कर आना या सिर घूमना सिर्फ बढ़ती उम्र की कमज़ोरी है। हम उन्हें मीठा पानी या जूस पिलाकर मान लेते हैं कि अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि लेटे-लेटे अचानक उठने पर या चलते-चलते अचानक उनका सिर क्यों चकराने लगता है? हमारे शरीर का बैलेंस बनाने वाला सिस्टम बहुत नाज़ुक होता है। उम्र बढ़ने के साथ कान के अंदर का वो हिस्सा कमज़ोर पड़ने लगता है जो दिमाग को बैलेंस बनाए रखने का सिग्नल भेजता है। सिर्फ कमज़ोरी की दवा खाने से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होती। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह सिर्फ थकान नहीं है, बल्कि शरीर का यह बताने का तरीका है कि उसके संतुलन तंत्र को अब सहारे और सही देखभाल की ज़रूरत है।

शरीर का बैलेंस बिगड़ने की असली वजह क्या है

हमारे शरीर में दिमाग, आँखें और कान के अंदर का हिस्सा मिलकर काम करते हैं ताकि हम सीधे खड़े रह सकें। कान के अंदर एक खास तरह का पानी और नसों का जाल होता है। जब उम्र बढ़ती है, तो यह सिस्टम दिमाग को सही समय पर संदेश नहीं भेज पाता। ऐसे में जब बुजुर्ग अचानक सिर घुमाते हैं या उठकर खड़े होते हैं, तो दिमाग और शरीर का तालमेल कुछ सेकंड के लिए टूट जाता है। इसी तालमेल के टूटने की वजह से उन्हें ऐसा लगता है कि उनके आस-पास की दुनिया गोल-गोल घूम रही है या ज़मीन हिल रही है।

क्या हर बार सिर्फ कमज़ोरी ही होती है

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार बुजुर्ग अच्छे से अच्छा खाना खाते हैं, फिर भी उन्हें चक्कर आ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या उनके खाने में नहीं, बल्कि खून के बहाव में होती है। जब इंसान अचानक लेट कर या बैठकर उठता है, तो खून तेज़ी से पैरों की तरफ जाता है और दिमाग तक पूरा खून नहीं पहुँच पाता। इसे अचानक ब्लड प्रेशर गिरना कहते हैं। इसके अलावा कई बार कान के अंदर छोटे-छोटे कण अपनी जगह से खिसक जाते हैं, जिससे बिना कमज़ोरी के भी भयंकर चक्कर आते हैं।

जब सिर घूमता है तो शरीर के अंदर क्या होता है

जब बड़े बुजुर्गों को चक्कर आते हैं, तो उनके शरीर में कई चीज़ें एक साथ होती हैं:

  • आँखों के आगे अंधेरा छाना: दिमाग तक खून न पहुँचने से आँखों के सामने पल भर के लिए सब काला हो जाता है।
  • पेट में अजीब सी हलचल: बैलेंस बिगड़ने से उल्टी आने जैसा मन होता है और जी मिचलाता है।
  • धड़कन का तेज़ होना: गिरने के डर और घबराहट से दिल की धड़कन एकदम से बढ़ जाती है।
  • पसीना आना: शरीर अपने आप को संभालने की कोशिश में अचानक ठंडा पड़ जाता है और पसीना छूटने लगता है।

क्या रोज़ सिर चकराना किसी बड़ी बीमारी की घंटी है

अगर घर के बड़ों को रोज़ाना सिर घूमने की शिकायत हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • कान का इंफेक्शन: कान के अंदरूनी हिस्से में सूजन आने से हमेशा सिर भारी और घूमता हुआ महसूस होता है।
  • दिल की बीमारियाँ: अगर दिल सही से खून को पंप नहीं कर पाता, तो दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुँचती जिससे चक्कर आते हैं।
  • सर्वाइकल की दिक्कत: गर्दन की नसें दबने से दिमाग को जाने वाले खून का रास्ता रुकता है, जो चक्कर का बड़ा कारण है।
  • नसों की कमज़ोरी: उम्र के साथ नसें सिकुड़ जाती हैं और शरीर का पूरा बैलेंस सिस्टम डगमगा जाता है।

आयुर्वेद की नज़रों में चक्कर आने का क्या मतलब है

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ ये तीन मुख्य दोष होते हैं। उम्र के आखिरी पड़ाव यानी बुढ़ापे में शरीर के अंदर 'वात' यानी हवा का तत्व बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात जब शरीर की नसों और दिमाग को रूखा कर देता है, तो शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को भ्रम कहा जाता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप शरीर के इस बढ़े हुए वात को शांत नहीं करेंगे, नसों में चिकनाई वापस नहीं लाएंगे, तब तक चक्कर आना बंद नहीं होगा।

सिर घूमने की परेशानी कम करने वाली देसी जड़ी बूटियां

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी बूटियां दी हैं जो दिमाग की नसों को ताक़त देती हैं और चक्कर आने की समस्या को कम करती हैं:

  • अश्वगंधा: यह शरीर की थकान और नसों की कमज़ोरी को दूर करने की सबसे असरदार जड़ी बूटी है।
  • शंखपुष्पी: यह सीधे दिमाग पर काम करती है, याददाश्त बढ़ाती है और सिर के भारीपन को दूर करती है।
  • आंवला: आंवला शरीर में खून की कमी को पूरा करता है और दिमाग को ठंडक देकर घबराहट वाले चक्कर रोकता है।
  • गिलोय: यह पूरे शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है और अंदरूनी कमज़ोरी को जड़ से मिटाती है।

क्या बहुत ज़्यादा चिंता करने से भी सिर चकराता है

बिलकुल! बुजुर्ग अक्सर अकेलेपन या किसी बात को लेकर बहुत ज़्यादा सोचते रहते हैं। जितना ज़्यादा वो चिंता करते हैं, उनकी साँसें उतनी ही छोटी हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन कम पहुँचती है और खून का बहाव सही से नहीं हो पाता। जब दिमाग को सही मात्रा में ताज़ा खून और ऊर्जा नहीं मिलती, तो अचानक से सिर घूमने लगता है। घबराहट में अक्सर पसीना भी आता है और ऐसा लगता है जैसे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक रही हो।

हमारी वो गलतियां जो इस परेशानी को और बढ़ा देती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो घर के बड़ों की परेशानी को दोगुना कर देता है:

  • झटके से उठना: लेटे हुए एकदम से उठकर खड़े हो जाने से दिमाग का खून पैरों में चला जाता है और चक्कर आ जाता है।
  • बहुत कम पानी पीना: बुजुर्ग अक्सर पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर सूख जाता है और ब्लड प्रेशर गिर जाता है।
  • भारी और तला हुआ खाना: बहुत भारी खाना खाने से सारा खून पेट की तरफ चला जाता है, जिससे दिमाग सुस्त पड़ता है और सिर घूमता है।
  • लंबे समय तक भूखे रहना: समय पर खाना न खाने से शुगर लेवल अचानक गिर जाता है, जिससे हाथ-पैर कांपने लगते हैं।
  • कान की सफाई में लापरवाही: कान में मैल जमा होने से भी कान के परदे पर दबाव पड़ता है जो बैलेंस बिगाड़ता है।

किन दूसरी बीमारियों के कारण सिर भारी रहता है

कई बार आप उनका खानपान बिल्कुल सही रखते हैं, फिर भी कुछ दूसरी बीमारियों की वजह से बार-बार सिर चकरा सकता है:

  • ब्लड प्रेशर का ऊपर-नीचे होना: बीपी की दवाइयों के कारण कई बार बीपी एकदम कम हो जाता है, जिससे चक्कर आते हैं।
  • शुगर की बीमारी: खून में अचानक से शुगर की मात्रा कम होने से भयंकर कमज़ोरी और सिर घूमने की शिकायत होती है।
  • खून की कमी: शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने से दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
  • आंखों की कमज़ोरी: मोतियाबिंद या चश्मे का नंबर बदलने से भी चीज़ें साफ नहीं दिखतीं और सिर चकराने लगता है।

बिना दवा के आराम पाने के कुछ बेहद आसान तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर बुजुर्गों को इस परेशानी से आराम दिला सकते हैं:

  • जब भी उन्हें चक्कर आए, तो उन्हें तुरंत एक जगह आराम से बिठा दें या लिटा दें, ताकि गिरने का खतरा न रहे।
  • एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा नींबू और सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से शरीर में तुरंत जान आ जाती है।
  • रात को सोते समय उनके पैरों के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करें, इससे वात शांत होता है और अच्छी नींद आती है।
  • अदरक का छोटा सा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से जी मिचलाना और चक्कर आना तुरंत कम हो जाता है।

शरीर को संतुलित रखने के लिए अपनाएं ये रोज़ की आदतें

बुजुर्गों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • उठने का तरीका बदलें: सुबह बिस्तर से उठते समय पहले पांच मिनट बिस्तर पर ही बैठें, फिर धीरे-धीरे खड़े हों।
  • सहारे का इस्तेमाल करें: बाथरूम जाने या टहलने के लिए छड़ी का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस न करने दें।
  • घर में रोशनी रखें: रात के समय कमरों और गैलरी में हल्की रोशनी ज़रूर रखें ताकि वो बिना टकराए चल सकें।
  • पानी की बोतल पास रखें: उनके बिस्तर के पास हमेशा पानी रखें ताकि वो समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।

आयुर्वेद इस कमज़ोरी को जड़ से कैसे मिटाता है

आयुर्वेद सिर्फ चक्कर को नहीं रोकता, बल्कि उसके जड़ तक जाता है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर नाड़ी देखकर यह समझते हैं कि शरीर में हवा वात ज़्यादा है या खून की कमी है। फिर नसों की खुश्की दूर करने के लिए शिरोधारा यानी माथे पर तेल की धार गिराने जैसी थेरेपी दी जाती है। इससे दिमाग की नसें पूरी तरह से रिलैक्स हो जाती हैं। इसके साथ ही खानपान को ऐसा बनाया जाता है जो शरीर में वात को न बढ़ने दे और हड्डियों व नसों को अंदर से चिकनाई दे।

डॉक्टर के पास जाना  कब ज़रूरी हो जाता है

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे या ये लक्षण दिखें, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • चक्कर के साथ अगर उनकी ज़बान लड़खड़ाने लगे या बोलने में दिक्कत हो यह लकवे का इशारा हो सकता है।
  • सीने में भारी दर्द होने लगे या सांस लेने में बहुत ज़्यादा तकलीफ हो।
  • शरीर का कोई एक हिस्सा अचानक सुन्न पड़ जाए या काम करना बंद कर दे।
  • अचानक से आँखों के सामने बिल्कुल अंधेरा छा जाए और वो बेहोश होकर गिर जाएं।

अंग्रेज़ी दवा और आयुर्वेदिक इलाज में क्या फर्क है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
उपचार का तरीका कारण के अनुसार दवाइयाँ, वेस्टिबुलर थेरेपी या अन्य चिकित्सकीय उपचार। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, तेल मालिश और जीवनशैली में सुधार।
बीमारी पर दृष्टिकोण चक्कर आने के कारण की पहचान कर उसी के अनुसार उपचार किया जाता है। शरीर के समग्र संतुलन और व्यक्ति की प्रकृति को ध्यान में रखकर देखभाल की जाती है।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे लाभ दिखाई दे सकते हैं।
समग्र स्वास्थ्य आवश्यकतानुसार पोषण, दवाइयाँ और अन्य उपचार दिए जाते हैं। आहार, दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य सुधार पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग के कारण के अनुसार उपचार, फॉलो-अप और पुनर्वास पर ध्यान। संतुलित जीवनशैली और स्वस्थ आदतों के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष :

हमेशा याद रखें कि बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं है, यह ज़िंदगी का एक बहुत नाज़ुक पड़ाव है। इस उम्र में शरीर के कई हिस्से थकने लगते हैं, खासकर वो जो हमारा बैलेंस बनाते हैं। इसलिए चक्कर आने को महज़ एक कमज़ोरी मानकर टालने की गलती न करें। घर के बड़ों को आपके समय और सही देखभाल की ज़रूरत है। उनके खानपान का ध्यान रखें, उन्हें अचानक उठने-बैठने से रोकें और घर का माहौल खुशनुमा रखें। जब उनका मन शांत रहेगा और शरीर को सही पोषण मिलेगा, तो बुढ़ापे का यह सफर उनके लिए बहुत आसान और सुरक्षित हो जाएगा।

References

https://www.nidcd.nih.gov/health/balance-disorders

https://www.healthline.com/health/dizziness-and-fatigue

https://www.healthline.com/health/dizziness

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 हां, उम्र बढ़ने पर प्यास कम लगती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो ब्लड प्रेशर गिर जाता है जिससे दिमाग को खून नहीं मिलता और चक्कर आने लगते हैं।

चक्कर आते ही तुरंत ज़मीन पर बैठ जाएं या लेट जाएं। आंखें बंद कर लें और गहरी साँसें लें। खड़े रहने की कोशिश बिल्कुल न करें क्योंकि गिरने से हड्डियां टूट सकती हैं।

बिल्कुल, कान के अंदर एक तरल पदार्थ होता है जो शरीर का बैलेंस बनाता है। कान में इंफेक्शन होने या मेल जमने से यह सिस्टम बिगड़ जाता है और चक्कर आते हैं।

लेटते समय खून का बहाव पूरे शरीर में एक जैसा होता है। अचानक उठकर चलने से खून पैरों की तरफ आ जाता है और दिमाग में कुछ पल के लिए खून की कमी हो जाती है।

हां, बहुत ऊंचा तकिया लगाने से गर्दन की नसें दब जाती हैं और दिमाग तक खून का बहाव रुक जाता है, जो सर्वाइकल और चक्कर दोनों का कारण बनता है।

अगर चक्कर कमज़ोरी या शुगर लेवल कम होने की वजह से आया है, तो मीठा खाने से तुरंत आराम मिलेगा। लेकिन अगर बीपी कम होने से चक्कर आया है, तो नमकीन पानी ज़्यादा फायदा करेगा।

इसे टिनिटस और वर्टिगो कहा जाता है। यह कान की अंदरूनी नसों की कमज़ोरी के कारण होता है और इसके लिए कान के डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी होता है।

हां, नींद की गोलियां, डिप्रेशन की दवाइयां या बीपी की पावरफुल दवाइयां खाने से अक्सर शरीर सुस्त हो जाता है और सिर भारी रहने लगता है।

उन्हें भारी कसरत बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। वो कुर्सी पर बैठकर हाथ-पैरों को हिलाने वाले व्यायाम या गर्दन को धीरे-धीरे घुमाने वाले आसान योग कर सकते हैं।

थोड़ी सी चाय ताज़गी दे सकती है, लेकिन खाली पेट ज़्यादा चाय या काफी पीने से पेट में गैस बनती है जो दिमाग की तरफ चढ़कर चक्कर को और बढ़ा सकती है।

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