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High BP बिना symptoms के भी dangerous क्यों हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम सभी की एक आम सोच होती है कि अगर शरीर में कोई बीमारी है, तो वह कोई न कोई इशारा ज़रूर करेगी। कहीं दर्द होगा, चक्कर आएंगे या कमज़ोरी लगेगी। लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो कोई शोर नहीं मचातीं। वे चुपचाप शरीर के अंदर ही अंदर बढ़ती रहती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप बिल्कुल ऐसी ही एक बीमारी है। लोग सालों तक एक दम नॉर्मल ज़िन्दगी जीते रहते हैं, उन्हें कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन अंदर ही अंदर उनके शरीर के बेहद ज़रूरी अंग खराब हो रहे होते हैं। 

हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है?

अपने शरीर को एक मशीन और नसों को पानी के पाइप की तरह मान लीजिए। हमारा दिल एक मोटर (पंप) है, जो लगातार धड़क कर पूरे शरीर की नसों में खून भेजता है। जब खून इन नसों से होकर गुज़रता है, तो वह नसों की दीवारों पर एक दबाव डालता है। इसी दबाव को हम 'ब्लड प्रेशर' कहते हैं।

जब किसी कारण से नसों में यह दबाव नॉर्मल से बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और लंबे समय तक बढ़ा ही रहता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर (High BP) कहते हैं।

इसे 'साइलेंट किलर' इसलिए कहते हैं क्योंकि 100 में से 90 लोगों को सालों तक इसका कोई लक्षण महसूस नहीं होता। बीमारी एकदम खामोशी से बढ़ती है, और जब तक इसका पता चलता है, तब तक कई बार दिल, दिमाग या किडनी को नुकसान हो चुका होता है।

हाई ब्लड प्रेशर में अक्सर कोई लक्षण क्यों नहीं दिखाई देते?

जब नसों में इतना दबाव है, तो शरीर हमें बताता क्यों नहीं? हमें दर्द या तकलीफ क्यों नहीं होती?

हमारा शरीर बहुत समझदार है। वह धीरे-धीरे होने वाले बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेता है। जब ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता है, तो शरीर को उसकी आदत पड़ जाती है। शरीर उस बढ़े हुए प्रेशर को ही 'नॉर्मल' मान लेता है। इसलिए इंसान को एकदम फिट और स्वस्थ महसूस होता है।

यही कारण है कि बहुत से लोगों को अपने हाई बीपी का पता तब चलता है, जब वे किसी और बीमारी (जैसे बुखार या पेट दर्द) के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं और डॉक्टर रूटीन चेकअप में उनका बीपी नापते हैं।

बिना लक्षण के हाई ब्लड प्रेशर शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

भले ही आपको कोई दर्द न हो, लेकिन बढ़ा हुआ बीपी आपके शरीर के सबसे अहम अंगों को धीरे-धीरे खत्म कर रहा होता है:

  • दिल पर बुरा असर: जब नसों में प्रेशर ज़्यादा होता है, तो आपके दिल को खून पंप करने के लिए नॉर्मल से दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लगातार ज़्यादा मेहनत करने से दिल की मांसपेशियां मोटी और सख्त होने लगती हैं। धीरे-धीरे दिल थकने लगता है, जिससे हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • दिमाग पर असर: हमारे दिमाग की नसें बहुत ही नाजुक होती हैं। लगातार हाई बीपी रहने से ये नसें अंदर से कमज़ोर हो जाती हैं। कई बार ज़्यादा प्रेशर की वजह से दिमाग की कोई नस फट सकती है, जिसे ब्रेन हैमरेज या स्ट्रोक (Stroke) कहते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बीपी बढ़ने से लोगों की याददाश्त भी कमज़ोर होने लगती है।
  • किडनी का खराब होना: किडनी हमारे शरीर की छन्नी है, जो खून से गंदगी को बाहर निकालती है। हाई बीपी किडनी की इन बारीक छन्नियों (रक्त वाहिकाओं) को पूरी तरह डैमेज कर देता है। धीरे-धीरे किडनी अपना काम करना बंद कर देती है और इंसान को डायलिसिस की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • आंखों की रोशनी पर असर: आंखों के पीछे बहुत ही पतली नसें होती हैं। बीपी बढ़ने पर ये नसें फट सकती हैं या इनमें सूजन आ सकती है। इससे आंखों के आगे धुंधलापन छा सकता है और गंभीर मामलों में इंसान की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।

किन लोगों में खतरा सबसे अधिक होता है?

हाई बीपी किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क बहुत ज़्यादा होता है:

  • जिनके माता-पिता या परिवार में पहले से किसी को हाई बीपी की शिकायत रही हो।
  • जिनकी उम्र बढ़ रही हो (खासकर 40-45 साल के बाद)।
  • जो लोग खाने में ऊपर से बहुत ज़्यादा कच्चा नमक खाते हैं।
  • जिनका वज़न बहुत ज़्यादा है।
  • जो लोग पूरा दिन बैठे रहते हैं और कोई कसरत या वॉक नहीं करते।
  • जो हमेशा टेंशन (तनाव) में रहते हैं।
  • जो लोग सिगरेट पीते हैं या बहुत ज़्यादा शराब का सेवन करते हैं।
  • जिन्हें पहले से शुगर (डायबिटीज़) की बीमारी है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

हाई ब्लड प्रेशर को केवल लक्षणों के आधार पर नहीं पहचाना जा सकता। इसलिए नियमित ब्लड प्रेशर जांच ही इसका सबसे अच्छा बचाव है। यदि आपका परिवारिक इतिहास है, उम्र 40 वर्ष से अधिक है या आपको डायबिटीज, मोटापा या किडनी की बीमारी है, तो समय-समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है।

आयुर्वेद हाई ब्लड प्रेशर को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद में हाई बीपी को सिर्फ एक 'बीमारी' नहीं, बल्कि पूरे शरीर और मन के बैलेंस (संतुलन) का बिगड़ना माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार, जब इंसान बहुत ज़्यादा टेंशन लेता है, गुस्सा करता है या गलत रूटीन फॉलो करता है, तो शरीर में 'वात' (हवा) और 'पित्त' (गर्मी) दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही, जब इंसान का पाचन खराब रहता है, तो शरीर में गंदगी जमा होती है। ये सब मिलकर खून के बहाव में रुकावट डालते हैं, जिससे बीपी बढ़ जाता है।

आयुर्वेद सिर्फ बीपी की रीडिंग कम करने पर जोर नहीं देता, बल्कि वह मन की शांति, सही खाना और रूटीन सुधारकर शरीर को अंदर से रिलैक्स करने पर काम करता है।

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए क्या बदलाव करें?

अगर आप हाई बीपी से बचना चाहते हैं या इसे कंट्रोल करना चाहते हैं, तो सिर्फ दवाएं काफी नहीं हैं। अपनी आदतों में ये आसान बदलाव करें:

  • नमक से दोस्ती कम करें: खाने में ऊपर से कच्चा नमक छिड़कना बिल्कुल बंद कर दें। पैकेट वाले चिप्स, नमकीन और अचार से दूर रहें।
  • हरी सब्जियां और फल खाएं: अपनी डाइट में ताजे फल, सब्जियां, सलाद और पोटैशियम वाली चीजें (जैसे केला और नारियल पानी) शामिल करें।
  • रोज पसीना बहाएं: दिन में कम से कम 30 से 40 मिनट तेज पैदल चलें या योग करें।
  • वज़न कम करे: अगर आपका पेट बाहर निकला हुआ है, तो उसे कम करने की कोशिश करें। वज़न कम होते ही बीपी अपने आप नीचे आने लगता है।
  • टेंशन कम करे: ज़्यादा सोचना बंद करें। रोज सुबह 10 मिनट गहरी सांसें लें (प्राणायाम) और ध्यान लगाएं।
  • नींद से समझौता न करें: रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना दिल के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • दवाएं अपनी मर्जी से बंद न करें: कई लोग बीपी नॉर्मल आते ही दवा खानी छोड़ देते हैं। यह बहुत खतरनाक है। डॉक्टर से पूछे बिना बीपी की गोली कभी बंद न करें।

कब तुरंत डॉक्टर के पास भागना चाहिए?

अगर आपको हाई बीपी की शिकायत है और अचानक से शरीर में ये लक्षण दिखें, तो एक मिनट की भी देरी न करें:

  • सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द या भारीपन होना।
  • बैठे-बैठे सांस फूलने लगना।
  • ऐसा भयानक सिरदर्द होना जैसा पहले कभी न हुआ हो।
  • आंखों के आगे एकदम अंधेरा छा जाना।
  • जुबान लड़खड़ाना या बोलने में दिक्कत होना।
  • शरीर के किसी एक हिस्से (हाथ या पैर) में अचानक कमज़ोरी आना या सुन्न पड़ जाना।

ये सब हार्ट अटैक या लकवा (Stroke) के इशारे हो सकते हैं।

निष्कर्ष

हाई ब्लड प्रेशर उस शांत दीमक की तरह है जो बिना किसी आवाज किए आपके शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। "मुझे तो एकदम ठीक लग रहा है" यह सोचकर बीपी चेक न करवाना आपके जीवन की बहुत बड़ी गलती हो सकती है।

इसलिए, लक्षणों का इंतजार न करें। समय-समय पर अपना बीपी नापते रहें, घर का सादा खाना खाएं, रोज थोड़ा टहलें और खुश रहें। अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो यह 'खामोश कातिल' आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

References

Uncontrolled high blood pressure puts over a billion people at risk

What Is High Blood Pressure? | NHLBI, NIH

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी नहीं। 90% मामलों में हाई बीपी का कोई भी लक्षण नहीं होता। मरीज़ को एकदम नॉर्मल महसूस होता है।

बिल्कुल! हाई बीपी बिना किसी तकलीफ दिए भी आपके अंदर हो सकता है। इसलिए तसल्ली के लिए चेकअप करवाना बहुत ज़रूरी है।

आजकल की खराब लाइफस्टाइल को देखते हुए, 20-25 साल की उम्र के बाद हर इंसान को साल में कम से कम एक-दो बार अपना बीपी ज़रूर नपवाना चाहिए।

हाँ, बिल्कुल। लगातार टेंशन और स्ट्रेस लेने से शरीर में कुछ ऐसे हॉर्मोन निकलते हैं जो नसों को सिकोड़ देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर तुरंत बढ़ जाता है।

यह गलती कभी न करें। आपका बीपी इसलिए नॉर्मल है क्योंकि आप दवा खा रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा छोड़ते ही बीपी फिर से अचानक बढ़ सकता है।

अगर बीपी सिर्फ खराब रूटीन या मोटापे की वजह से बढ़ा है, तो डाइट और कसरत से इसे वापस नॉर्मल किया जा सकता है। लेकिन कई मामलों में इसे सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है, खत्म नहीं।

हाँ, आयुर्वेद के नियम (जैसे सही खाना, प्राणायाम और तनाव से दूरी) बीपी को नेचुरली कंट्रोल करने में बहुत मदद करते हैं। लेकिन चल रही मॉडर्न दवाइयों को एकदम से बंद नहीं करना चाहिए।

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