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कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा? जानें इसकी बड़ी वजहें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 17 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 17 Jul, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5009

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में युवाओं को बहुत सी बीमारियाँ घेर रही हैं। पहले स्ट्रोक को सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा? यह सवाल हर किसी के मन में है। अचानक से दिमाग की नसों में खून का बहाव रुक जाना या किसी नस का फट जाना स्ट्रोक कहलाता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह इंसान को हमेशा के लिए अपाहिज बना सकता है या उसकी जान भी ले सकता है।

खराब जीवनशैली और भारी तनाव है इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण

आज के समय में युवाओं की खराब लाइफस्टाइल इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण बन गई है। घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहना, शारीरिक मेहनत बिल्कुल न करना और देर रात तक जागने से शरीर पर भारी दबाव पड़ता है। इसके अलावा, करियर और नौकरी का भारी तनाव युवाओं को अंदर से बहुत कमज़ोर कर रहा है। जब इंसान लगातार तनाव में रहता है, तो उसका ब्लड प्रेशर अचानक से बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ प्रेशर दिमाग की बारीक नसों को फाड़ सकता है, जिससे कम उम्र में ही बड़ा स्ट्रोक आ जाता है।

ब्लड प्रेशर और शुगर का बढ़ना कर रहा है नसों को एकदम खोखला

युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ के मामले आजकल बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह दोनों बीमारियाँ स्ट्रोक का बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं। जब खून में शुगर की मात्रा हमेशा ज़्यादा रहती है, तो दिमाग की नसें अंदर से एकदम कमज़ोर और खोखली होने लगती हैं। वहीं हाई ब्लड प्रेशर के कारण नसों में खून बहुत तेज़ी से बहता है, जिससे खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) बन जाते हैं। जब यही थक्का दिमाग की किसी नस में जाकर फँस जाता है, तो खून का बहाव रुक जाता है और तुरंत भारी स्ट्रोक आ जाता है।

जंक फूड और मोटापे से शरीर में पनप रही हैं भयंकर बीमारियाँ

हमारा रोज़ाना का खानपान हमारी सेहत का सबसे बड़ा आधार होता है। आजकल के युवा ताज़ा घर का खाना छोड़कर बाहर का पिज़्ज़ा, बर्गर और जंक फूड बहुत ज़्यादा खाते हैं। ऐसे खाने में खराब तेल और भारी मात्रा में नमक होता है। लगातार ऐसा खाना खाने से शरीर में भारी मोटापा बढ़ने लगता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज़्यादा खराब हो जाता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल हमारी नसों में जमकर उन्हें अंदर से सिकोड़ देता है। दिमाग तक सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुँच पाने की वजह से स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सिगरेट और शराब का नशा छीन रहा है युवाओं के शरीर की ताकत

आजकल कम उम्र के लड़कों और लड़कियों में सिगरेट और शराब पीने की आदत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। यह खराब आदत न केवल आपके फेफड़ों को पूरी तरह बर्बाद करती है, बल्कि स्ट्रोक का एक बहुत बड़ा कारण भी है। सिगरेट के धुएँ में मौजूद खतरनाक केमिकल आपके खून को बहुत ज़्यादा गाढ़ा कर देते हैं, जिससे नसों में आसानी से थक्के बन जाते हैं। बहुत ज़्यादा शराब पीने से भी शरीर का ब्लड प्रेशर तेज़ी से ऊपर-नीचे होता है। अगर आप अपने दिमाग को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आज ही इस नशे से पूरी दूरी बना लें।

स्ट्रोक के इन बड़े शुरुआती संकेतों को भूलकर भी न करें अनदेखा

दिमाग का स्ट्रोक अचानक से आता है, लेकिन शरीर पहले से ही इसके कुछ बड़े संकेत देने लगता है। अगर आपको अचानक से बोलने में भारी परेशानी हो रही है या आपकी आवाज़ लड़खड़ा रही है, तो तुरंत सावधान हो जाएँ। चेहरे के एक हिस्से का सुन्न पड़ जाना या टेढ़ा हो जाना इसका बहुत बड़ा संकेत है। इसके अलावा अचानक से एक आँख से धुंधला दिखना या तेज़ चक्कर खाकर गिर जाना भी स्ट्रोक के ही लक्षण हैं। इन संकेतों को आम कमज़ोरी समझने की भूल बिल्कुल न करें और तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएँ।

सही खानपान और रोज़ाना व्यायाम से खुद को रखें इस बीमारी से दूर

इस खतरनाक बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका अपनी रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल में सही बदलाव करना है। अपनी डाइट में हमेशा ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज भारी मात्रा में शामिल करें। नमक और चीनी का इस्तेमाल बहुत कम कर दें। खुद को अंदर से चुस्त रखने के लिए रोज़ाना कम से कम चालीस मिनट तक तेज़ पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें। रोज़ाना अच्छी और गहरी नींद लें और खुद को तनाव से पूरी तरह दूर रखें। साल में एक बार अपने ब्लड प्रेशर और शुगर की पूरी जाँच ज़रूर करवाएँ।

आयुर्वेद के इन प्राकृतिक उपायों से दिमाग की नसों को बनाएँ मज़बूत

आयुर्वेद के अनुसार वात दोष ज़्यादा बिगड़ने से दिमाग की नसों में भारी रूखापन आ जाता है। आयुर्वेद में नसों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए ब्राह्मी और अश्वगंधा का उपयोग बहुत फायदेमंद बताया गया है। रोज़ रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में थोड़ा सा अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पिएँ। इसके अलावा देसी घी की दो-दो बूँदें रोज़ाना नाक में डालने से दिमाग शांत रहता है और स्ट्रोक का बड़ा खतरा दूर होता है।

निष्कर्ष

आज के समय में कम उम्र में स्ट्रोक का बढ़ना हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी और खतरनाक चेतावनी है। अपने शरीर को मशीन समझने की बड़ी भूल बिल्कुल न करें। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, भारी तनाव और नशे की आदतों से खुद को पूरी तरह दूर रखें। रोज़ाना थोड़ा समय अपने शरीर के लिए निकालें, व्यायाम करें और हमेशा ताज़ा खाना खाएँ। आयुर्वेद के आसान प्राकृतिक उपायों से आप अपने दिमाग की नसों को हमेशा के लिए तंदुरुस्त और मज़बूत रख सकते हैं। अगर कभी भी शरीर में कोई अजीब बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और हमेशा सुरक्षित रहें।

References

https://www.healthline.com/health/stroke 

https://www.healthline.com/health/stroke-types

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/stroke

https://medlineplus.gov/stroke.html

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आजकल खराब लाइफस्टाइल, भारी तनाव और जंक फूड के ज़्यादा इस्तेमाल के कारण युवाओं में स्ट्रोक का खतरा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।

जी हाँ, ब्लड प्रेशर ज़्यादा होने से दिमाग की बारीक नसें फट सकती हैं, जिससे अचानक से भारी स्ट्रोक आ सकता है।

अचानक से चेहरे का टेढ़ा हो जाना, बोलने में भारी परेशानी होना और शरीर के एक हिस्से का सुन्न पड़ जाना इसके सबसे बड़े संकेत हैं।

बिल्कुल, सिगरेट और शराब खून को गाढ़ा कर देते हैं, जिससे नसों में आसानी से थक्के बन जाते हैं और दिमाग का खून रुक जाता है।

आपको अपनी रोज़ाना की डाइट में हरी सब्ज़ियाँ, ताज़े फल और ओमेगा-3 से भरपूर चीज़ें खानी चाहिए, और बाहर का खाना छोड़ना चाहिए।

हाँ, भारी तनाव लेने से शरीर का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, जो दिमाग की कमज़ोर नसों के लिए बहुत खतरनाक होता है।

हाँ, रोज़ाना कम से कम चालीस मिनट तेज़ पैदल चलने या हल्का व्यायाम करने से दिल और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं और खून का बहाव सही रहता है।

बिल्कुल नहीं, अगर आपको चेहरे या हाथ-पैरों में अचानक सुन्नपन महसूस हो, तो बिना एक मिनट की देरी किए तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।

जी हाँ, बाहर का खराब तेल खाने से खून में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है, जो दिमाग की नसों को अंदर से सिकोड़कर ब्लॉक कर देता है।

आयुर्वेद के अनुसार रोज़ाना रात को अश्वगंधा वाला दूध पीना और नाक में शुद्ध देसी घी की बूँदें डालना नसों को मज़बूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।

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