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Curd खाने से acidity बढ़ती है या कम होती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हमारे घरों में खाने की थाली तब तक अधूरी सी लगती है, जब तक उसमें एक कटोरी दही न हो। खाने के स्वाद को दोगुना करने के साथ-साथ, हम हमेशा से सुनते आए हैं कि दही पेट को ठंडा रखता है। लेकिन कई लोगों की शिकायत होती है कि दही खाते ही उनके सीने में जलन होने लगती है या खट्टी डकारें आने लगती हैं। ऐसे में मन में यह उलझन होना बहुत स्वाभाविक है कि जब पेट में जलन हो, तो क्या दही खाना सही है? कुछ लोग इसे दवा मानते हैं, तो कुछ इसे परेशानी बढ़ाने वाला मानते हैं। आज हम इसी उलझन को सुलझाएँगे और बहुत आसान भाषा में समझेंगे कि दही आपके पेट के लिए कब अमृत बन जाता है और कब यह आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है।

Curd खाने से Acidity बढ़ती है या कम होती है?

सच कहा जाए तो इस सवाल का जवाब सिर्फ एक शब्द में नहीं दिया जा सकता। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप कैसा दही खा रहे हैं।अगर आपका दही एकदम ताज़ा और मीठा है, तो यह आपकी पाचन नली को तुरंत आराम पहुँचाता है। ताज़ा दही पेट की गर्मी को शांत करने और बढ़े हुए एसिड को संतुलित करने का काम बहुत अच्छी तरह से करता है। वहीं दूसरी तरफ, अगर दही पुराना है, ठीक से जमा नहीं है या बहुत खट्टा हो गया है, तो यह आपकी परेशानी को सीधे तौर पर बढ़ा सकता है। खट्टा दही स्वभाव से बहुत अम्लीय होता है। जब आप इसे खाते हैं, तो यह पेट में जाकर एसिड के स्तर को और ऊपर ले जाता है, जिससे सीने की जलन कम होने के बजाय काफी ज़्यादा बढ़ जाती है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

पेट और पाचन तंत्र के जानकारों के साथ-साथ आयुर्वेद का भी इस मुद्दे पर बहुत स्पष्ट मत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर मानते हैं कि अगर आपको दूध से बनी चीज़ों से कोई एलर्जी नहीं है, तो ताज़ा जमा हुआ दही आपकी आँतों के लिए एक बेहतरीन दवा की तरह काम करता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पेट के वातावरण को स्वस्थ बनाते हैं।

लेकिन अगर हम आयुर्वेद की बात करें, तो वह दही को पचने में भारी और तासीर में गर्म मानता है। जी हाँ, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। आयुर्वेद के अनुसार दही की तासीर ठंडी नहीं बल्कि गर्म होती है, जिसे उष्ण वीर्य कहा जाता है। इसलिए आयुर्वेद सलाह देता है कि अगर आपके शरीर में पहले से ही बहुत ज़्यादा पित्त या गर्मी बढ़ी हुई है, तो आपको रोज़ाना दही खाने से बचना चाहिए, खासतौर पर खट्टा दही।

Acidity होने पर Curd शरीर में कैसे काम करता है?

जब आप बहुत ज़्यादा तीखा, मसालेदार या बाहर का जंक फूड खाते हैं, तो आपके पेट की अंदरूनी परत में जलन होने लगती है। ऐसे समय में जब आप घर का बना ताज़ा दही खाते हैं, तो यह पेट में जाकर एक बहुत ही शानदार काम करता है। दही पेट की उस संवेदनशील परत के ऊपर एक ठंडी और आरामदायक कोटिंग बना देता है।

इस कोटिंग की वजह से पेट में मौजूद तेज़ एसिड का सीधा असर पेट की दीवारों पर नहीं पड़ता। इसके अलावा, ताज़े दही का गाढ़ापन एसिड को ऊपर भोजन नली में आने से रोकता है। यही कारण है कि ताज़ा दही खाने के कुछ ही देर बाद आपको सीने की जलन में काफी राहत महसूस होने लगती है।

Curd में मौजूद Probiotics पाचन के लिए कितने फायदेमंद हैं?

दही को एक सुपरफूड बनाने के पीछे सबसे बड़ा हाथ इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स का होता है। आइए जानते हैं कि ये हमारे पेट के लिए कैसे काम करते हैं:

  • प्रोबायोटिक्स हमारे पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो खाने को जल्दी और आसानी से पचाने में मदद करते हैं।
  • अगर आपके पेट में खराब बैक्टीरिया की संख्या बढ़ गई है, तो ये प्रोबायोटिक्स उन्हें खत्म करके आँतों में एक स्वस्थ संतुलन बनाते हैं।
  • इनकी वजह से खाना खाने के बाद पेट फूलना, भारीपन और गैस बनने जैसी दिक्कतें काफी हद तक दूर हो जाती हैं।
  • यह भोजन में मौजूद ज़रूरी पोषक तत्वों को सोखने में हमारी आँतों की मदद करते हैं, जिससे शरीर को पूरी ताक़त मिलती है।
  • लगातार प्रोबायोटिक्स मिलने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मज़बूत होती है।

किन लोगों में Curd खाने से Acidity बढ़ सकती है?

दही हर किसी के लिए फायदेमंद हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है। कुछ लोगों को इसे खाने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ सकता है:

  • जिन लोगों को दूध या दूध से बनी चीज़ें पचाने में परेशानी होती है, जिन्हें लैक्टोज़ इनटॉलरेंस है, उन्हें दही खाने से बहुत ज़्यादा गैस और जलन हो सकती है।
  • जो लोग बहुत गंभीर एसिड रिफ्लक्स की बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें फुल क्रीम दूध से बने दही के फैट से परेशानी हो सकती है।
  • जिन्हें हमेशा सर्दी, खांसी या कफ की शिकायत रहती है, उनके लिए दही पाचन को धीमा कर सकता है और सीने में भारीपन ला सकता है।
  • जो लोग बहुत खट्टा या कई दिनों तक फ्रिज में रखा हुआ पुराना दही खाते हैं, उनकी परेशानी तय है कि बढ़ेगी।

खाली पेट Curd खाना सही है या नहीं?

पहलू खाली पेट दही खाने का दृष्टिकोण
मुख्य प्रभाव खाली पेट दही का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए? जिन लोगों को गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या संवेदनशील पाचन की समस्या रहती है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
खाने का बेहतर समय अधिकांश लोगों के लिए दही को दोपहर के भोजन या अन्य भोजन के साथ खाना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण आयुर्वेद दही का सेवन व्यक्ति की प्रकृति, मौसम और सही समय के अनुसार करने की सलाह देता है।
महत्वपूर्ण सलाह यदि दही खाने के बाद बार-बार असहजता महसूस हो, तो डॉक्टर या योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

क्या रोज़ Curd खाना Acid Reflux के मरीजों के लिए सुरक्षित है?

अगर आपको बार-बार खट्टी डकारें आने, गले में खट्टा पानी आने और सीने में जलन की शिकायत रहती है, तो रोज़ाना दही खाना आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे मरीज़ ताज़ा और बिना मलाई वाले दूध से बना दही हफ्ते में तीन से चार दिन दोपहर के समय आराम से खा सकते हैं। लेकिन अगर आप रोज़ाना खट्टा या बहुत गाढ़ा दही खा रहे हैं, तो यह आपके पेट में एसिड को बढ़ाएगा और भोजन नली के वाल्व को कमज़ोर करेगा। एसिड रिफ्लक्स के मरीजों को हमेशा घर का जमाया हुआ बिल्कुल ताज़ा दही ही इस्तेमाल करना चाहिए।

किन लक्षणों में Curd खाने से बचना चाहिए?

अगर आपको अपने शरीर में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो कुछ समय के लिए दही से दूरी बना लेना ही समझदारी है:

  • जब सीने में बहुत तेज़ जलन हो रही हो और खट्टा पानी बार-बार गले तक आ रहा हो।
  • अगर आपका पेट बहुत ज़्यादा फूल गया हो और आपको साँस लेने में भी भारीपन महसूस हो रहा हो।
  • गले में खराश, लगातार खांसी या बहुत ज़्यादा कफ बन रहा हो।
  • जोड़ों में दर्द हो या शरीर में कहीं भी सूजन की समस्या हो।
  • जब आपको उल्टी आने जैसा मन हो रहा हो या पेट में बहुत तेज़ ऐंठन हो।

Curd खाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

दही खाने का सही फायदा आपको तभी मिलेगा, जब आप इसे सही तरीके से खाएँगे। इन छोटी लेकिन काम की बातों का हमेशा ध्यान रखें:

  • दही को कभी भी गर्म करके न खाएँ। गर्म करने से इसके सारे अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं और यह फायदे की जगह भारी नुकसान पहुँचाता है।
  • दही के साथ मछली, मांस या बहुत ज़्यादा खट्टे फलों का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।
  • रात के समय दही खाने से हमेशा बचें, क्योंकि रात में यह पचने में भारी होता है और आपकी नींद के साथ-साथ पाचन को भी खराब कर सकता है।
  • दही को पचने में आसान बनाने के लिए आप इसमें थोड़ा सा भुना हुआ जीरा या काला नमक मिला सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए

पेट की जलन कभी-कभी किसी बड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकती है। अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • जब दही या कुछ भी हल्का खाने के बाद भी सीने की जलन और दर्द लगातार बना रहे।
  • अगर आपको उल्टी में खून आ रहा हो या आपके मल का रंग बहुत काला हो गया हो।
  • बिना किसी कारण के आपका वज़न लगातार तेज़ी से कम हो रहा हो।
  • खाना निगलते समय आपको गले में बहुत परेशानी या दर्द महसूस हो रहा हो।
  • जब घरेलू नुस्खे अपनाने के कई हफ्तों बाद भी आपकी तकलीफ कम न हो रही हो।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य एसिडिटी और पेट की जलन के कारण की पहचान कर लक्षणों को नियंत्रित करना। पाचन संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका एसिड कम करने वाली दवाइयाँ, जाँच और खानपान से जुड़ी चिकित्सकीय सलाह। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
पाचन का दृष्टिकोण एसिडिटी के कारणों का मूल्यांकन कर उसी के अनुसार उपचार किया जाता है। पाचन शक्ति, भोजन के समय और खानपान की आदतों को संतुलित रखने पर ज़ोर दिया जाता है।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे पाचन और समग्र स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण दोबारा समस्या न हो, इसके लिए कारणों की पहचान और स्वस्थ आदतों पर ज़ोर। संतुलित जीवनशैली और सही खानपान के माध्यम से लंबे समय तक पाचन स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर बात यह है कि दही आपके पेट और आपकी सेहत के लिए एक बहुत बेहतरीन चीज़ है, बशर्ते आप इसे सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाएँ। अगर आपको सीने में जलन की शिकायत रहती है, तो सिर्फ घर का बना ताज़ा दही ही चुनें और खट्टे दही से पूरी तरह दूरी बना लें। हमेशा अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। अगर आपको दही खाने के बाद भारीपन या जलन महसूस होती है, तो कुछ दिन के लिए इसे छोड़कर देखें। एक अच्छी जीवनशैली, तनाव से दूरी और सही खानपान ही पेट की हर बीमारी का सबसे पक्का इलाज है।

References

https://www.healthline.com/health/gerd/dairy-and-acid-reflux

https://www.healthline.com/nutrition/foods/yogurt

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/acid-reflux-ger-gerd-adults

https://gi.org/topics/acid-reflux/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

रात के समय दही खाने से बचना चाहिए। रात में हमारा पाचन तंत्र धीमा होता है और दही पचने में भारी होता है, जिससे आपको कफ, खांसी या गैस की समस्या हो सकती है।

सीने में जलन होने पर दही की तुलना में छाछ पीना ज़्यादा फायदेमंद होता है। छाछ पचने में बहुत हल्की होती है और यह पेट को तुरंत ठंडक पहुँचाती है।

अगर आपके पेट में बहुत गर्मी है, तो ताज़े दही में बहुत थोड़ी सी मिश्री या चीनी मिलाकर खाने से राहत मिल सकती है। यह पेट की जलन को शांत करता है।

बाज़ार के दही में कई बार उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ चीज़ें मिलाई जाती हैं। सेहत के लिए हमेशा घर का जमाया हुआ ताज़ा दही ही सबसे अच्छा माना जाता है।

आप अपने दही में थोड़ा सा भुना हुआ जीरा पाउडर और चुटकी भर काला नमक मिलाकर खा सकते हैं। यह स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन को भी बहुत अच्छा बनाता है।

खाली पेट दही खाने से आपको गैस बन सकती है। अगर आप वज़न कम करना चाहते हैं, तो इसे दोपहर के भोजन के साथ सलाद के रूप में लेना ज़्यादा अच्छा विकल्प है।

बुखार, सर्दी या जुकाम के दौरान दही खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। इस समय दही खाने से शरीर में कफ बढ़ सकता है और आपकी तबीयत ज़्यादा खराब हो सकती है।

खट्टा दही खाने से आपके पेट में एसिड का स्तर बहुत तेज़ी से बढ़ जाता है, जिससे सीने में तेज़ जलन, खट्टी डकारें और कभी-कभी त्वचा पर दाने निकलने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

एक स्वस्थ इंसान के लिए दिन भर में एक से डेढ़ कटोरी ताज़ा दही खाना पूरी तरह से सुरक्षित और पाचन के लिए फायदेमंद होता है।

अगर आपका दही ताज़ा है, तो यह गैस को खत्म करने में मदद करता है। लेकिन अगर आप दूध न पचा पाने वाले लोगों में आते हैं या दही पुराना और खट्टा है, तो आपको बहुत ज़्यादा गैस बन सकती है।

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