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Thyroid में Weight Gain क्यों रुकता नहीं है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि शरीर का वज़न सिर्फ ज़्यादा खाने या कसरत न करने से बढ़ता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आपको थायराइड की दिक्कत होती है, तो बहुत कम खाने के बाद भी शरीर फूलने लगता है?  हमारे गले में मौजूद थायराइड ग्रंथि और शरीर के वज़न का बहुत गहरा रिश्ता होता है। जब यह ग्रंथि सुस्त पड़ जाती है, तो हमारा मेटाबॉलिज़्म एकदम धीमा हो जाता है। सिर्फ डाइटिंग कर लेने से यह मोटापा जड़ से खत्म नहीं होता। जब तक आप इस ग्रंथि की उलझन को नहीं सुलझाते, आपका वज़न कम होना मुश्किल है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम मोटापा नहीं है, बल्कि आपके शरीर का आपको यह बताने का तरीका है कि अंदर की मशीनरी अब बहुत धीमी हो गई है।

गले की यह ग्रंथि हमारे शरीर को कैसे मोटा करती है

हमारे शरीर में गले के पास तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है। जब यह ग्रंथि ज़रूरत के हिसाब से हार्मोन बनाना कम कर देती है, तो शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है। इस स्थिति में शरीर का खाना पचाने और उसे ऊर्जा में बदलने का काम एकदम धीमा हो जाता है। जब शरीर आपके खाए हुए भोजन को ऊर्जा में नहीं बदल पाता, तो वह उसे चर्बी के रूप में जमा करने लगता है। इसी चर्बी की वजह से शरीर में भारीपन, सूजन और लगातार वज़न बढ़ने की परेशानी शुरू हो जाती है।

क्या सिर्फ गलत खानपान ही इस मोटापे की वजह है

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप एकदम सादा और घर का बना उबला हुआ खाना खाते हैं, फिर भी आपका वज़न बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या आपकी थाली में नहीं, बल्कि आपके शरीर की ऊर्जा खर्च करने की रफ्तार में है। अगर आप बहुत कम भी खा रहे हैं, लेकिन आपकी थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर रही है, तो वह सादा खाना भी शरीर में जाकर चर्बी ही बनाएगा। सुस्त मेटाबॉलिज़्म की वजह से शरीर पानी को भी रोकने लगता है, जिससे पूरे शरीर में सूजन आ जाती है और इंसान बहुत ज़्यादा मोटा लगने लगता है।

थायराइड बिगड़ने पर शरीर के अंदर क्या बदलाव आते हैं

जब थायराइड सुस्त पड़ता है, तो शरीर के अंदर बहुत सारी परेशानियां एक साथ शुरू हो जाती हैं:

  • हार्मोन की कमी: शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य हार्मोन एकदम कम हो जाते हैं, जिससे इंसान को दिन भर भयानक थकान रहती है।
  • शरीर में भारी सूजन: बीमारी के कारण शरीर में पानी और नमक जमा होने लगता है, जिससे सुबह उठने पर चेहरा और पैर सूजे हुए लगते हैं।
  • चर्बी का इकट्ठा होना: खाना ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे चर्बी बनकर पेट और जांघों के आसपास जमने लगता है।
  • पाचन का कमज़ोर होना: खाना पचने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है, जिससे भयंकर कब्ज़ रहने लगती है और पेट हमेशा फूला हुआ लगता है।

क्या लगातार वज़न बढ़ना शरीर में किसी बड़े खतरे का संकेत है

अगर आपका वज़न हर महीने लगातार बढ़ रहा है और कंट्रोल नहीं हो रहा, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। यह आगे चलकर कई बड़ी बीमारियां पैदा कर सकता है:

  • कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना: धीमे मेटाबॉलिज़्म की वजह से खून में खराब कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, जो आगे चलकर दिल के लिए बड़ा खतरा बनता है।
  • घुटनों और जोड़ों का दर्द: शरीर का वज़न लगातार बढ़ने से घुटनों और कमर की हड्डियों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है जिससे दर्द शुरू हो जाता है।
  • शुगर की बीमारी का खतरा: वज़न बढ़ने और शरीर का सिस्टम बिगड़ने से आगे चलकर मधुमेह होने का डर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • फैटी लिवर की समस्या: शरीर की फालतू चर्बी लिवर के ऊपर जाकर चिपकने लगती है, जिससे लिवर कमज़ोर और बीमार होने लगता है।

आयुर्वेद थायराइड और मोटापे की समस्या को कैसे देखता है

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ ये तीन मुख्य दोष होते हैं। जब आपके शरीर में कफ दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो गले की थायराइड ग्रंथि का काम धीमा हो जाता है। बढ़ा हुआ कफ शरीर में भारीपन, सुस्ती और बहुत सारी चर्बी पैदा करता है। इस वजह से शरीर के अंदर मौजूद पाचन की आग बुझने लगती है। इसी धीमी आग की वजह से खाया हुआ अन्न पचता नहीं है और वज़न बढ़ता है। आयुर्वेद में इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप अपने शरीर की इस आग को दोबारा नहीं भड़काएंगे, तब तक यह कफ और चर्बी कम नहीं होगी।

वज़न और थायराइड को कंट्रोल करने वाली चमत्कारी जड़ी बूटियां

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो शरीर की चर्बी को पिघलाने और थायराइड को सही करने में बहुत मदद करती हैं:

  • कांचनार: यह थायराइड की गांठ और सूजन को कम करने के लिए आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन और जानी मानी जड़ी बूटी मानी जाती है।
  • अश्वगंधा: यह शरीर का तनाव कम करती है और थायराइड ग्रंथि को सही मात्रा में हार्मोन बनाने के लिए अंदर से बहुत ताकत देती है।
  • गुग्गुल: यह शरीर में जमा पुरानी चर्बी को पिघलाने और खून में जमे खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में बहुत असरदार है।
  • त्रिफला: यह शरीर की अंदर से गहरी सफाई करता है, पुरानी कब्ज़ मिटाता है और तेज़ी से वज़न कम करने में काफी मदद करता है।

क्या बहुत ज़्यादा तनाव लेने से भी थायराइड की बीमारी बिगड़ती है

बिलकुल ऐसा ही होता है। आप जितना ज़्यादा तनाव लेते हैं, आपके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन उतना ही बढ़ जाता है। ज़्यादा सोचने और परेशान रहने से शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और इसका सीधा असर आपकी गले की ग्रंथि पर पड़ता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर थायराइड हार्मोन को सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसी वजह से आपका मेटाबॉलिज़्म और भी सुस्त हो जाता है और लाख कोशिशों के बाद भी वज़न कम होने का नाम नहीं लेता।

जाने अनजाने में होने वाली हमारी रोज़मर्रा की खानपान की गलतियां

हम अक्सर बिना सोचे समझे कुछ ऐसा खा या पी लेते हैं जो हमारी इस बीमारी को दोगुना कर देता है:

  • कच्ची पत्तागोभी और फूलगोभी खाना: ये चीज़ें थायराइड ग्रंथि को हार्मोन बनाने से रोकती हैं, जिससे गले की सूजन और बीमारी और बढ़ती है।
  • सोयाबीन से बनी चीज़ें ज़्यादा खाना: बहुत ज़्यादा सोया खाने से शरीर में थायराइड की गोली का असर कम हो जाता है।
  • चीनी और बहुत मीठा भोजन खाना: मीठा खाने से शरीर में सूजन बढ़ती है और वज़न बहुत तेज़ी से ऊपर चढ़ने लगता है।
  • मैदा और बाहर का पैकेट बंद खाना: यह खाना पचने में बहुत भारी होता है और सीधा चर्बी बनकर शरीर में हमेशा के लिए जमा हो जाता है।
  • बहुत ज़्यादा मसालेदार और तला हुआ खाना: यह शरीर के अंदर गर्मी और असंतुलन पैदा करता है जिससे हार्मोन बिगड़ जाते हैं।
  • समय पर खाना न खाने की आदत: खाने का समय फिक्स न होने से शरीर की घड़ी बिगड़ जाती है और चर्बी घटने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

किन दूसरी वजहों से थायराइड में मोटापा बहुत तेज़ी से बढ़ता है

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी कमियों की वजह से वज़न लगातार बढ़ता रहता है:

  • इंसुलिन का सही से काम न करना: शरीर जब खाने की शुगर को ठीक से नहीं पचा पाता, तो वह सीधा चर्बी में बदलने लगता है।
  • शरीर में विटामिन डी की कमी होना: धूप न सेकने से इस विटामिन की कमी हो जाती है जिससे थायराइड ग्रंथि और कमज़ोर पड़ जाती है।
  • रात को ठीक से नींद न आना: जो लोग रात को सात या आठ घंटे की गहरी नींद नहीं लेते, उनका शरीर अगले दिन चर्बी घटाने का काम रोक देता है।
  • सुबह की दवा सही तरीके से न लेना: अगर आप थायराइड की गोली सुबह खाली पेट सही नियम से नहीं खाते हैं, तो बीमारी बिल्कुल कंट्रोल में नहीं आती।

बिना किसी नुकसान के वज़न कम करने के बेहद आसान तरीके

आप अपनी जीवनशैली में कुछ बहुत ही आसान बदलाव करके इस मोटापे से आराम पा सकते हैं:

  • सुबह उठकर खाली पेट धनिया का पानी पिएं, यह थायराइड को कंट्रोल करने में बहुत बढ़िया काम करता है और सूजन घटाता है।
  • दिन भर हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत डालें, इससे शरीर की जमा हुई पुरानी चर्बी धीरे धीरे पिघलने लगती है।
  • रोज़ाना सुबह की ताज़ी धूप में कम से कम बीस मिनट बैठें, इससे शरीर को ताकत मिलती है और ग्रंथि अपना काम सही से करती है।
  • खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने के बजाय कुछ देर ज़रूर टहलें, इससे खाना बहुत आसानी से पच जाता है।

शरीर को अंदर से फिट और हल्का रखने वाली रोज़मर्रा की आदतें

अपनी रोज़ की ज़िंदगी में कुछ छोटे छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • खाने का समय फिक्स करें: रोज़ एक ही समय पर खाना खाने की आदत डालें ताकि शरीर की काम करने की गति एकदम सही रहे।
  • खाने को खूब चबा चबाकर खाएं: खाने को इतना चबाएं कि वह मुंह में ही पानी बन जाए। इससे आपके धीमे पाचन तंत्र का आधा काम आसान हो जाएगा।
  • रोज़ थोड़ा पसीना ज़रूर बहाएं: सुबह या शाम को पैदल चलने या योगा करने से शरीर की रुकी हुई मशीनरी फिर से चालू हो जाती है।
  • रात को पूरी और अच्छी नींद लें: रात को समय पर सोने की आदत डालें ताकि आपके शरीर को अंदर से खुद की मरम्मत करने का पूरा समय मिल सके।

आयुर्वेद मोटापे की इस परेशानी को जड़ से कैसे खत्म करता है

आयुर्वेद सिर्फ बढ़ते हुए वज़न को नहीं रोकता, बल्कि उसके असली कारण तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपका यह मोटापा बिगड़े हुए कफ दोष का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले वैद्य आपकी नाड़ी देखकर आपके शरीर की प्रकृति को अच्छे से समझते हैं। फिर शरीर के अंदर जमे ज़हरीले तत्वों को बाहर निकालने के लिए पंचकर्म जैसी पुरानी थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही, आपका खाना पीना कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके पाचन की आग को तेज़ करे। ऐसा करने से शरीर खुद ही अपनी फालतू चर्बी को जलाना सीख जाता है।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • वज़न कम करने की पूरी कोशिश और डाइटिंग के बाद भी हर महीने आपका वज़न तेज़ी से बढ़ता ही जा रहा हो।
  • थोड़ा सा पैदल चलने या सीढ़ी चढ़ने पर ही आपकी सांस बहुत ज़्यादा फूलने लगे और सीने में भारीपन महसूस हो।
  • महिलाओं में पीरियड्स एकदम से बिगड़ जाएं या बहुत ज़्यादा दर्द और परेशानी होने लगे।
  • आपके बाल गुच्छों में झड़ने लगें और आपको बिना किसी बात के बहुत ज़्यादा उदासी या डिप्रेशन महसूस होने लगे।

एलोपैथी और आयुर्वेद के इलाज में क्या फर्क होता है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य थायरॉयड हार्मोन की कमी को हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा से पूरा करना। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार और शरीर के संतुलन पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित दवा और समय-समय पर थायरॉयड टेस्ट। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, योग और जीवनशैली सुधार पर ज़ोर।
असर होने का समय उचित दवा से हार्मोन स्तर और लक्षणों में अपेक्षाकृत जल्दी सुधार आ सकता है। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और नियमित पालन पर निर्भर करता है।
निगरानी नियमित TSH, T3, T4 जाँच के आधार पर दवा की मात्रा समायोजित की जाती है। व्यक्ति की प्रकृति और लक्षणों के अनुसार उपचार में बदलाव किया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण कई लोगों को लंबे समय तक या जीवनभर दवा की आवश्यकता हो सकती है। स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित दिनचर्या बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

निष्कर्ष

थायराइड बिगड़ने का सीधा मतलब है कि इस मशीन का इंजन थोड़ा धीमा हो गया है। इसलिए वज़न बढ़ने पर खुद को कोसने या एकदम से खाना पीना छोड़ने की गलती बिल्कुल न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा समय ज़रूर निकालें। अपने खानपान को सुधारें, रोज़ थोड़ा व्यायाम करें और किसी भी बात का ज़्यादा तनाव न लें। जब आपका मन खुश रहेगा और आपकी जीवनशैली सही होगी, तो यकीनन आपका शरीर भी पूरी तरह से तंदुरुस्त, हल्का और फिट रहेगा।

References:

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/35288841/

https://apps.who.int/iris/bitstream/handle/10665/66342/WHO_DIL_00.4_eng.pdf

https://platform.who.int/mortality/themes/theme-details/topics/indicator-groups/indicator-group-details/MDB/thyroid-cancer

https://www.healthline.com/health/hypothyroidism/symptoms-treatments-more

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

क्योंकि इस बीमारी में शरीर का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा हो जाता है, जिससे शरीर खाए हुए भोजन को ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे चर्बी में बदलने लगता है।

सफेद चावल में कार्बोहाइड्रेट बहुत ज़्यादा होता है जो आसानी से पचकर चर्बी बन सकता है। इसलिए सफेद की जगह ब्राउन राइस खाना ज़्यादा बेहतर रहता है।

धनिया का पानी थायराइड ग्रंथि को ठंडक पहुँचाता है, शरीर की सूजन कम करता है और हार्मोन को बैलेंस करने में बहुत अच्छी मदद करता है।

अगर आपकी ग्रंथि पूरी तरह खराब हो चुकी है तो गोली खानी पड़ सकती है, लेकिन अच्छी जीवनशैली और आयुर्वेद की मदद से कई लोगों की गोली की पावर कम भी हो जाती है।

वैसे तो फल अच्छे होते हैं, लेकिन डिब्बाबंद फल या बहुत ज़्यादा मीठे फलों के रस से बचना चाहिए क्योंकि इनमें बहुत ज़्यादा शुगर होती है जो वज़न बढ़ाती है।

हाँ, रोज़ कम से कम चालीस मिनट तेज़ कदम से पैदल चलने से शरीर का धीमा पड़ा मेटाबॉलिज़्म फिर से तेज़ हो जाता है और चर्बी घटने लगती है।

गर्म पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर गरारे करने से और गले पर हल्के गर्म तेल की मालिश करने से गले की सूजन में काफी आराम मिलता है।

कम फैट वाला दूध और ताज़ा दही खाया जा सकता है, लेकिन अगर आपको कफ और सर्दी की शिकायत रहती है, तो दही खाने से बचना चाहिए।

क्योंकि आपका शरीर सर्वाइवल मोड में चला गया है। कम खाने से मेटाबॉलिज़्म और भी धीमा हो जाता है, इसलिए भूखे रहने के बजाय सही और पौष्टिक खाना ज़रूरी है।

बिलकुल, स्ट्रेस लेने से शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ता है जो थायराइड के काम में रुकावट डालता है और वज़न घटाना एकदम नामुमकिन कर देता है।

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