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Work pressure से headache क्यों बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि काम के बीच होने वाला सिरदर्द एक आम बात है और एक चाय या पेनकिलर से इसका इलाज हो जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि रविवार की छुट्टी के दिन आपका सिर एकदम हल्का रहता है, लेकिन मंगलवार की दोपहर किसी डेडलाइन के आते ही आपके सिर में भयंकर जकड़न और दर्द क्यों शुरू हो जाता है? दरअसल, 'साधारण सिरदर्द' और 'वर्क प्रेशर से होने वाला सिरदर्द' (Tension Headache) दोनों भले ही दर्द महसूस कराते हों, लेकिन दोनों के होने का कारण और शरीर पर असर बिल्कुल अलग होता है। सिर्फ किसी के कहने पर रोज़ाना दर्द की गोली खा लेने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि बढ़ सकती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम थकान नहीं है, बल्कि आपके शरीर की ज़रूरत और मानसिक क्षमता के बीच बिगड़ते संतुलन का मामला है।

यह वर्क प्रेशर असल में करता क्या है? 

जब आप काम का अत्यधिक तनाव लेते हैं, तो आपका शरीर 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में चला जाता है। इस दौरान दिमाग कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालाईन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेज़ी से रिलीज़ करता है। इसके असर से आपकी गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियाँ बुरी तरह सिकुड़ जाती हैं और सख्त हो जाती हैं। रक्त वाहिकाएँ (Blood vessels) भी सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके उलट, एक आम सिरदर्द किसी गंध, भूख या सर्दी की वजह से होता है। वर्क प्रेशर वाला दर्द ऐसा महसूस होता है जैसे किसी ने आपके सिर के चारों तरफ एक टाइट रबर बैंड बाँध दिया हो।

क्या हर सिरदर्द एक जैसा होने का मतलब सबका कारण भी एक है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार लोग लगातार स्क्रीन देखने और स्ट्रेस से हुए सिरदर्द को माइग्रेन समझ लेते हैं और गलत दवाइयाँ लेना शुरू कर देते हैं। माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में तेज़ धड़कन जैसा दर्द होता है और रोशनी से दिक्कत होती है। जबकि वर्क प्रेशर से होने वाला दर्द सिर के दोनों तरफ, गर्दन के पिछले हिस्से और कंधों में एक भारीपन के रूप में महसूस होता है। अगर आप लगातार काम के तनाव में यह सोचकर कॉफी पी रहे हैं कि दर्द ठीक होगा, तो फायदे की जगह आपकी नसें और ज़्यादा उत्तेजित हो जाएँगी। समस्या सिर्फ काम में नहीं, बल्कि हमारी इस दर्द को पहचानने की आधी-अधूरी जानकारी में है।

वर्क प्रेशर और दर्द को नज़रअंदाज़ करने से सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम बिना सोचे-समझे लगातार स्ट्रेस में काम करते हैं और इस दर्द को दबाते हैं, तो शरीर के अंदर अजीबोगरीब बदलाव होते हैं:

  • नींद का गायब होना (Insomnia): दिमाग इतना ज़्यादा एक्टिव और तनावग्रस्त हो जाता है कि रात को बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आती।
  • पाचन तंत्र का बिगड़ना: तनाव का सीधा असर पेट पर पड़ता है। इससे एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या बहुत तेज़ी से बढ़ जाती है।
  • आँखों में भयंकर जलन और भारीपन: लगातार स्क्रीन घूरने और स्ट्रेस की वजह से आँखों की मांसपेशियाँ थक जाती हैं, जिससे विज़न धुंधला होने लगता है।
  • चिड़चिड़ापन और फोकस में कमी: दिमाग थक जाने की वजह से आपका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है और काम में गलतियाँ बढ़ने लगती हैं।

क्या इस सिरदर्द का गलत इलाज शरीर में किसी बड़ी परेशानी का संकेत बन सकता है?

अगर आप रोज़ाना स्ट्रेस ले रहे हैं और दर्द को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। यह शरीर में कई गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकता है:

  • गंभीर सर्वाइकल (Cervical Pain): गर्दन और कंधों की जकड़न अगर लंबे समय तक बनी रहे, तो यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का रूप ले लेती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर का खतरा: स्ट्रेस हार्मोन के लगातार बढ़े रहने से दिल की धड़कन तेज़ रहती है, जिससे ब्लड प्रेशर हाई रहने लगता है और हार्ट की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
  • बर्नआउट और डिप्रेशन: लगातार मानसिक दबाव दिमाग के न्यूरॉन्स को थका देता है, जिससे व्यक्ति गंभीर डिप्रेशन और 'बर्नआउट' का शिकार हो सकता है।
  • क्रॉनिक हेडेक डिसऑर्डर: जो दर्द हफ्ते में एक बार होता था, वह रोज़ का स्थायी दर्द बन सकता है।

प्राचीन आयुर्वेद इस मानसिक तनाव और दर्द को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ का ही सारा खेल है। जब आप अत्यधिक मानसिक काम करते हैं, स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं या स्ट्रेस लेते हैं, तो शरीर में वात (हवा/गति) तेज़ी से बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात नसों में खुश्की (Dryness) पैदा करता है, जिससे सिर और गर्दन में भयंकर दर्द उठता है। इसके अलावा, जब काम के दौरान गुस्सा या फ्रस्ट्रेशन बढ़ता है, तो शरीर का पित्त (गर्मी) बेकाबू हो जाता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप वात को शांत करने और दिमाग को ठंडक पहुँचाने वाले उपाय नहीं करेंगे, तब तक सिर्फ दवाइयाँ खाने से कोई स्थायी फायदा नहीं मिलेगा।

मानसिक थकान दूर करने वाले और दिमाग के बेहतरीन साथी

प्रकृति ने हमें स्ट्रेस और सिरदर्द को खत्म करने के लिए कुछ बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो नसों को तुरंत आराम पहुँचाती हैं:

  • कैमोमाइल या ग्रीन टी: काम के बीच में अगर आप कैमोमाइल चाय लेते हैं, तो यह नसों को रिलैक्स करती है और स्ट्रेस हार्मोन को तुरंत कम करती है।
  • ब्राह्मी और अश्वगंधा: रात को सोने से पहले दूध के साथ अश्वगंधा या ब्राह्मी लेने से दिमाग फौलाद बनता है और स्ट्रेस सहने की क्षमता बढ़ती है।
  • बादाम रोगन (बादाम का तेल): सिर और गर्दन के पिछले हिस्से में बादाम के तेल की हल्की मालिश वात को शांत करके दर्द को जादू की तरह खींच लेती है।
  • पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स: तनाव के वक्त दिमाग को ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है; खूब पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन एकदम सही रहता है।

क्या कमज़ोर नर्वस सिस्टम वालों के लिए वर्क प्रेशर ज़्यादा खतरनाक है?

बिलकुल! आप जितना तनाव लेते हैं, दिमाग को उसे प्रोसेस करने के लिए उतनी ही ऊर्जा चाहिए। अगर आपका नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पहले से कमज़ोर है या आपकी लाइफस्टाइल खराब है, तो आपका शरीर हर छोटी डेडलाइन पर 'अलार्म' बजा देगा। ऐसे लोगों में कोर्टिसोल बहुत जल्दी बढ़ता है। वहीं, मज़बूत इम्यूनिटी और अच्छी रूटीन वाले लोग उसी प्रेशर को आसानी से हैंडल कर लेते हैं। अगर कमज़ोर नर्वस सिस्टम वाले लोग लगातार तनाव लें, तो यह दिमागी नसों को भयंकर नुकसान पहुँचा सकता है।

वो आम गलतियाँ जो इस दर्द के फायदों को नुकसान में बदल देती हैं

हम अक्सर काम के प्रेशर में जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो परेशानी और बढ़ा देता है:

  • चाय-कॉफी का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल: कैफीन कुछ देर के लिए तो जगा देता है, लेकिन इसके बाद डिहाइड्रेशन होता है और सिरदर्द दुगना हो जाता है।
  • पेनकिलर पर निर्भरता: रोज़ दर्द की गोली खाना खतरनाक है, इससे पेट में अल्सर हो सकता है।
  • लंच या मील्स स्किप करना: काम के चक्कर में भूखे रहने से ब्लड शुगर लेवल गिरता है, जिससे सिर फटने लगता है।
  • स्क्रीन से आँखें न हटाना: घंटों तक बिना पलक झपकाए काम करना आँखों और सिर की नसों को पूरी तरह थका देता है।
  • नींद से समझौता करना: रात-रात भर जागकर काम करने से दिमाग को खुद को रिपेयर करने का वक्त ही नहीं मिलता।

किन दूसरी बीमारियों में बिना सोचे-समझे प्रेशर लेना मुसीबत बन सकता है?

कई बार आप अपनी तरफ से काम सही से मैनेज कर रहे होते हैं, फिर भी कुछ दूसरी अंदरूनी बीमारियों की वजह से यह तनाव भारी पड़ सकता है:

  • हाइपरटेंशन (High BP): अगर आपको पहले से बीपी की शिकायत है, तो वर्क प्रेशर नसों पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालता है जिससे स्ट्रोक का खतरा रहता है।
  • एंग्जायटी डिसऑर्डर: जिन्हें घबराहट की बीमारी है, उनके लिए वर्क प्रेशर पैनिक अटैक का कारण बन सकता है।
  • माइग्रेन (Migraine): स्ट्रेस माइग्रेन का सबसे बड़ा ट्रिगर है। प्रेशर बढ़ते ही माइग्रेन का अटैक कई दिनों तक बिस्तर पर डाल सकता है।
  • कमज़ोर नज़र: अगर आपके चश्मे का नंबर बढ़ रहा है और आप लगातार स्क्रीन पर काम कर रहे हैं, तो दर्द बर्दाश्त के बाहर हो जाएगा।

बाज़ार में मिलने वाली पेनकिलर्स का रोज़ाना इस्तेमाल कब बन जाता है खतरा?

आजकल लोग काम का समय बचाने के लिए और दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए बाज़ार से हैवी पेनकिलर्स या सिरदर्द के पाउडर खा लेते हैं। ये चीज़ें तुरंत इस्तेमाल में तो आसान लगती हैं, लेकिन रोज़ाना इनका भरोसा करना खतरनाक है। इन दवाइयों के लगातार इस्तेमाल से 'मेडिकेशन ओवरयूज़ हेडेक' (Medication Overuse Headache) या रिबाउंड हेडेक हो जाता है। यानी आपका शरीर दवाई का इतना आदी हो जाता है कि जब तक आप दवाई नहीं खाएँगे, तब तक सिरदर्द नहीं जाएगा। रोज़ाना केमिकल वाली दवाइयाँ लिवर और किडनी को कमज़ोर कर देती हैं।

महंगे इलाजों की जगह इन आसान तरीकों से लें रिलैक्सेशन का असली मज़ा

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर बिना किसी साइड इफेक्ट के सिरदर्द से निजात पा सकते हैं:

  • 20-20-20 का नियम अपनाएँ: हर 20 मिनट में स्क्रीन से नज़र हटाकर 20 फीट दूर किसी चीज़ को 20 सेकंड तक देखें, आँखों की थकान छूमंतर हो जाएगी।
  • गहरी साँसें (Deep Breathing): अपनी कुर्सी पर बैठें, आँखें बंद करें और 5-10 गहरी साँसें लें। यह दिमाग में ऑक्सीजन का फ्लो तुरंत बढ़ा देगा।
  • हल्की स्ट्रेचिंग: काम के बीच में अपनी गर्दन को दाएँ-बाएँ और गोल घुमाएँ। कंधों को ऊपर-नीचे करके रिलैक्स करें, इससे ब्लड सर्कुलेशन खुलेगा।
  • ठंडी या गर्म सिकाई: सिर के पिछले हिस्से पर बर्फ का पैक या गर्म पानी की बोतल रखने से सिकुड़ी हुई मांसपेशियाँ तुरंत खुल जाती हैं।

हमेशा रिलैक्स और फिट रहने के लिए वर्क रूटीन कैसे ढालें?

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप इसका बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • पोस्चर सुधारें: काम करते समय अपनी कमर सीधी रखें और कंप्यूटर स्क्रीन को आँखों के बिल्कुल सामने रखें ताकि गर्दन झुकाकर न बैठना पड़े।
  • ब्रेक लेना सीखें: लगातार 4 घंटे बैठने के बजाय हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें और थोड़ा टहल लें।
  • बाउंड्री सेट करें: ऑफिस का काम ऑफिस तक रखें। घर आने के बाद ईमेल या काम के मैसेजेस चेक करने से बचें ताकि दिमाग को शांति मिले।
  • सही समय पर नींद लें: हर रात कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि आपका सिस्टम अगले दिन के प्रेशर के लिए तैयार रहे।

आयुर्वेद शरीर की रिकवरी के लिए इन पर इतना भरोसा क्यों करता है?

आयुर्वेद सिर्फ दर्द को नहीं दबाता, बल्कि उसकी जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि मानसिक तनाव की वजह से 'मज्जा धातु' (Nervous System) सूखने लगती है। इसलिए आयुर्वेद में 'शिरोधारा' (माथे पर गर्म औषधीय तेल की धार गिराना) जैसी थेरेपी दी जाती है जो दिमाग की गहराइयों तक जाकर नसों का 'स्नेहन' (चिकनाहट) करती है। इसके अलावा नाड़ी वैद्य 'मेध्य रसायन' देते हैं जो दिमाग की नसों को पोषण देते हैं। आयुर्वेद में आपकी रूटीन कुछ इस तरह सेट की जाती है कि आपका शरीर स्ट्रेस को झेलने के लिए प्राकृतिक रूप से मज़बूत हो जाए।

इस दर्द के दौरान डॉक्टर के पास जाने की नौबत कब आ सकती है?

घरेलू उपाय और रिलैक्सेशन के बाद भी अगर कुछ अजीब महसूस हो, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • सिरदर्द के साथ-साथ अगर आँखों के आगे अचानक अंधेरा छा जाए या चीज़ें डबल दिखने लगें।
  • दर्द इतना भयंकर हो कि उल्टियाँ (Vomiting) शुरू हो जाएँ या चक्कर आने लगें।
  • अगर गर्दन इतनी ज़्यादा अकड़ जाए कि उसे हिलाना भी नामुमकिन हो जाए।
  • जब दर्द की वजह से आपकी रातों की नींद पूरी तरह उड़ जाए और पेनकिलर का भी कोई असर न हो।

साधारण सिरदर्द और वर्क प्रेशर वाले सिरदर्द के बीच के सबसे बड़े अंतर क्या हैं?

तुलना का आधार साधारण सिरदर्द (Normal Headache) वर्क प्रेशर वाला सिरदर्द (Tension Headache)
मुख्य कारण अक्सर सर्दी-ज़ुकाम, खाली पेट रहने या किसी गंध की वजह से होता है। लगातार मानसिक तनाव, स्क्रीन टाइम और डेडलाइन के प्रेशर से होता है।
दर्द का एहसास माथे के आस-पास या सिर के किसी एक हिस्से में सामान्य दर्द महसूस होता है। ऐसा लगता है जैसे सिर के चारों ओर एक कड़ा रबर बैंड कस दिया गया हो।
प्रभावित हिस्सा ज़्यादातर सिर्फ सिर तक सीमित रहता है। सिर के साथ-साथ गर्दन के पिछले हिस्से और कंधों में भयंकर जकड़न होती है।
दर्द की अवधि कुछ घंटों में या खाना खाने/सोने के बाद अक्सर ठीक हो जाता है। अगर स्ट्रेस खत्म न हो, तो यह पूरे दिन या हफ्तों तक खिंच सकता है।
राहत पाने का तरीका अच्छी नींद, बाम लगाने या साधारण उपाय से ठीक हो जाता है। काम से ब्रेक लेने, स्ट्रेचिंग करने और दिमाग को शांत करने (De-stress) से ही आराम मिलता है।

हमेशा याद रखें कि हमारा शरीर और दिमाग कोई मशीन नहीं हैं, इसके काम करने की एक सीमा है। आप करियर में जो भी हासिल करना चाहते हैं, उसका सीधा असर आपकी मानसिक शांति और स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए एक साधारण सिरदर्द और स्ट्रेस से होने वाले दर्द को एक ही चीज़ मानकर सिर्फ पेनकिलर खाते रहने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। काम ज़रूरी है, लेकिन खुद को ब्रेक देना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। सही पोस्चर रखें, तनाव को मैनेज करना सीखें और जब आपका दिमाग अंदर से शांत रहेगा, तो यकीनन आप हर प्रेशर में पूरी तरह से बेहतरीन परफॉरमेंस दे पाएँगे।

References:

Chronic Stress and Headaches: The Role of the HPA Axis and Autonomic Nervous System - PMC

Central mechanisms of stress-induced headache - PubMed

Can Stress Cause Migraines?

Stress and chronic headache: A psychophysiological analysis of mechanisms - ScienceDirect

Tension headaches - NHS

Central mechanisms of stress-induced headache | Request PDF

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, क्योंकि घर से काम करते समय लोग अक्सर लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, सही एर्गोनॉमिक्स का ध्यान नहीं रखते और काम तथा निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमा नहीं बना पाते। इससे तनाव और सिरदर्द दोनों बढ़ सकते हैं।

बिलकुल। काम में व्यस्त रहने के कारण कई लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते। इससे दिमाग और शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सिरदर्द अधिक तीव्र महसूस हो सकता है।

कुछ लोगों में लगातार AC में रहने से आँखों और नाक में सूखापन बढ़ सकता है। यदि इसके साथ तनाव, कम पानी पीना और स्क्रीन टाइम भी जुड़ जाए, तो सिरदर्द की संभावना बढ़ सकती है।

हाँ। पढ़ाई का दबाव, परीक्षाएँ, स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग और पर्याप्त आराम की कमी के कारण बच्चों और किशोरों में भी तनावजनित सिरदर्द देखा जा सकता है।

सीधे तौर पर नहीं, लेकिन लगातार तनाव और नींद की कमी एकाग्रता, फोकस और अल्पकालिक स्मृति को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे व्यक्ति को भूलने जैसी समस्या महसूस हो सकती है।

हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग कई लोगों को राहत दे सकती है। लेकिन यदि दर्द बहुत तेज़ हो, चक्कर आ रहे हों या कोई अन्य गंभीर लक्षण हों, तो पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

हाँ। बहुत तेज़, बहुत कम या लगातार चमकती रोशनी आँखों पर दबाव बढ़ा सकती है, जिससे सिरदर्द और थकान दोनों बढ़ सकते हैं।

कई लोगों के लिए नियमित ध्यान (Meditation) मानसिक तनाव को कम करने, मन को शांत रखने और तनावजनित सिरदर्द की आवृत्ति घटाने में सहायक हो सकता है।

हाँ। साइनस हेडेक आमतौर पर नाक बंद होने, चेहरे में दबाव और संक्रमण से जुड़ा होता है, जबकि टेंशन हेडेक अधिकतर मानसिक तनाव, मांसपेशियों की जकड़न और लंबे समय तक काम करने से जुड़ा होता है।

अक्सर हाँ। नियमित ब्रेक, छुट्टियाँ और मानसिक आराम शरीर के तनाव स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे सिरदर्द की तीव्रता और आवृत्ति दोनों घट सकती हैं।

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