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दिनभर काम और घर की जिम्मेदारी के बाद शाम की थकान को सिर्फ ‘normal’ मानना सही है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज-कल सारा दिन काम और घर की जिम्मेदारी निभाते निभाते जो थकान होती है उसे नॉर्मल मानना बिल्कुल भी ठीक नहीं है यह किसी नई बीमारी की शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं जैसे कि स्ट्रेस, क्रोनिक फटीग , या बॉडी में नुट्रिएंट्स की कमी एवं इसके अलावा और भी चीज हो सकती है जैसे की नींद का पूरा न होना, खान-पान में कमी होना, शरीर में पानी की कमी होना या आपके शरीर में कोई अंदरूनी दिक्कत होना 

रोज-रोज एक जैसा लाइफस्टाइल एवं एक जैसी शैली रोज करना और उसी के साथ-साथ टेंशन बढ़ जाती है जिसकी वजह से हम काफी चीज़ अपनी डेली लाइफ में मिस कर देते हैं हमें यह करने की जरूरत है कि हम अपना खाना ढंग से खाये ,सारे न्यूट्रिएंट्स को अब्जॉर्ब करें ,अपनी पाचन शक्ति को मजबूत करें इसी के साथ-साथ यह ध्यान रखें कि हमारा शरीर पूरी तरीके से हाइड्रेटेड रहे और साथ पूरा रेस्ट भी या पूरी नींद लेना भी अनिवार्य है|

जानते हैं कि अगर आप ऐसे ही रहे तो क्या होगा ?

अगर आप अपनी इस कंडीशन को ठीक नहीं करते हैं या फिर अपने शरीर को ठीक नहीं करते हैं और ऐसे ही अपने काम में लगे रहते हैं और रात में सो कर संतुष्ठ महसूस करते हैं लेकिन असल में आपके शरीर के अंदर कुछ और ही चल रहा होता है जो एक लंबे समय के अंतराल के दौरान आपको देखने के लिए मिलता है इसमें आपको शारीरिक और मानसिक बीमारियां हो सकती है 

शारीरिक लक्षण

लगातार थकान: रात भर अच्छी नींद लेने के बाद भी थका हुआ और भारीपन महसूस करना।

शरीर के संकेत: बार-बार उबासी आना, पलकें भारी होना या चेहरा रगड़ना ।

मांसपेशियों में कमजोरी: रोज़मर्रा के सामान्य कामों के दौरान दर्द या कमजोरी महसूस होना

मानसिक लक्षण

ध्यान न लगना: बातचीत के दौरान ध्यान देने में परेशानी या मन का भटकना।

याददाश्त में कमी: छोटी-छोटी बातें भूल जाना या मानसिक रूप से उलझन महसूस करना।

धीमी प्रतिक्रिया: आसान संकेतों पर प्रतिक्रिया देने में ज़्यादा समय लगना या लापरवाही से गलतियाँ करना ।

भावनात्मक लक्षण

चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर आसानी से परेशान, बेसब्र या चिढ़ जाना।

उत्साह की कमी: रोज़मर्रा के कामों या शौक को पूरा करने के लिए प्रेरणा खो देना।

बहुत ज़्यादा दबाव महसूस करना: रोज़ाना के तनाव का सामना करने में मुश्किल होना।

क्या बस अच्छा खाना ही इलाज है

जी नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ,अच्छा खाना खाना ही इलाज नहीं होता है अगर आपका शरीर उसे खाने को अच्छे से पचा ना पाए काजू ,बादाम , कैल्शियम वाली चीज या फिर मैग्नीशियम वाली चीज या हेल्दी चीज खाने का कोई फायदा तब तक नहीं है जब तक आपकी जठराग्नि या फिर आपकी जो पेट की अग्नि है वह सही ना हो और सही तरीके से कार्य न करें ऐसा भी हो सकता है कि आप कुछ अच्छा न्यूट्रीशनल खाए और वह आपको डाइजेशन में दिक्कत करें यथार्थ हम यह कह सकते हैं कि हमारी पाचन शक्ति या पाचन क्रिया जो होती है उसे पर भी यह टिका होता है कि हम जो खा रहे हैं, वह सही से हमारे शरीर में लगे ,तो अपने शरीर को सही रखने के लिए अपनी पाचन शक्ति को भी सही रखें 

थकान के स्त्री-रोग संबंधी कारण

थकान के कुछ कारण सीधे तौर पर महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। ये स्थितियां अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती हैं और शुरुआत में इन पर ध्यान न जा पाना आसान होता है।

बहुत ज़्यादा या अनियमित पीरियड्स

पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा खून बहने से आयरन की कमी वाला एनीमिया हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिए ज़रूरी स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाएं) काफ़ी मात्रा में नहीं होती हैं। जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो मांसपेशियों और दिमाग को ज़रूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे बहुत ज़्यादा थकान महसूस होती है।

जिन महिलाओं को बहुत ज़्यादा पीरियड्स होते हैं, उन्हें चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना या बर्फ़ या खाने की चीज़ों के अलावा दूसरी चीज़ें खाने की इच्छा होना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

PCOS हार्मोन से जुड़ी एक समस्या है, जिसके कारण थकान, वज़न बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और नींद न आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस, जो PCOS की एक आम समस्या है, ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव का कारण भी बन सकता है, जिससे दिन भर आपकी ऊर्जा खत्म हो जाती है।

पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़

मेनोपॉज़ की ओर बढ़ने के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव नींद की गुणवत्ता और एनर्जी लेवल पर असर डाल सकते हैं। हॉट फ़्लैश, रात में पसीना आना और मूड में उतार-चढ़ाव जैसी चीज़ों से ठीक से आराम नहीं मिल पाता और दिन में थकान महसूस होती है।

एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस की वजह से होने वाला लंबे समय तक पेल्विक दर्द और सूजन आपकी नींद में खलल डाल सकते हैं और आपकी ऊर्जा खत्म कर सकते हैं। लगातार दर्द का सामना करने से आप भावनात्मक रूप से भी थक सकते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है।

गर्भनिरोधक या हार्मोनल असंतुलन

कुछ महिलाओं पर हार्मोनल गर्भनिरोधकों का असर ज़्यादा होता है, जिससे उनके मूड, एनर्जी और नींद पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, हार्मोनल रेगुलेशन के बिना शरीर में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं, जिससे थकान भी हो सकती है।

अगर आपको ये परेशानियां हो रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लें

अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या हो रही है तो तुरंत हमारे एक्सपीरियंस डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले और अपनी दिक्कत समझाएं हमारे यहां आपका इलाज आपके root cause को जानते हुए किया जाता है और आपके शरीर की प्रकृति को देखते हुए हम आपके इलाज को शुरू करते हैं 

  • लगातार थकान रहना जो आपकी डेली जिंदगी पर प्रभाव डालती है
  • काम पर ध्यान लगाना या ठीक से काम करने में दिक्कत होना
  • खराब नींद जो अच्छी नींद की आदतों से भी ठीक नहीं होती
  • शरीर के वजन में एकदम बढ़ोतरी या एकदम घटना
  • लगातार तनाव व कमजोरी है रहना
  • पाचन सही नहीं है या फिर आपको उल्टी या डायरिया की दिक्कत है

निष्कर्ष 

अगर आपको थकान का कोई मूल कारण समज नहीं आरा है तो , आज ही किसी अच्छे डॉक्टर या चिकित्सक को दिखाए और ध्यान दे की बस खान पान ही वजह नहीं होता , आपका शरीर में बोहोत ऐसे कारण है जिससे आपको थकान को नार्मल नहीं मानना चाइये , और अपने digestion का साथ साथ ओवरआल बॉडी का भी ध्यान दे खास कर महिलाओ में जो दिक्कत है | 

References

Potential objective biomarkers for fatigue among working women - PMC

Work-related fatigue: the specific case of highly educated women in the Netherlands - PMC

Chronic fatigue in developing countries: population based survey of women in India. - GOV.UK

Sleep and fatigue management strategies: How nurses, midwives and paramedics cope with their shift work schedules,a qualitative study - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं,जब तक आपकी थकान हर दिन सामान्य नहीं लगती, और आराम के बाद भी कम नहीं होती, इसे हल्के में न लें। यह कई वजहों से हो सकती है और जाँच ज़रूरी हो सकती है।

लगातार दिन-भर चक्कर आना, पलकें भारी होना, सीधे बात-चीत में ध्यान न लगना, याददाश्त कमजोर होना, तेज़ प्रतिक्रिया में देरी आदि।

हाँ. अच्छी खुराक तभी फायदेमंद रहती है जब जठर-अग्नि (पाचन शक्ति) सही से काम करे। पाचन ठीक न हो तो न्यूट्रिएंट्स का अवशोषण कम होता है और थकान बढ़ती है।

आयरन-deficiency एनीमिया, PCOS, हार्मोनल बदलाव (PM/SY), एंडोमेट्रियोसिस, मेनोपॉज़/पेरिमेनोपॉज़, गर्भनिरोधक से जुड़े प्रभाव, और क्रॉनिक तनाव आदि।

अगर दो हफ्तों से कम या तीन सप्ताह से अधिक थकावट बनी रहे, नींद भी पूरी न हो, दर्द, डायरिया/उल्टी आदि हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

संतुलित भोजन (प्रोटीन, सही कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर), पानी पर्याप्त पिएं, नियमित छोटे-छोटे स्नैक, हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि, और पर्याप्त नींद लें।

तनाव प्रबंधन के लिए गहरी साँस, माइंडफुलनेस/ध्यान, समय-निर्भर ब्रेक, पर्याप्त नींद, और जरूरत हो तो पेशेवर सहायता लें।

हाँ. पानी की कमी थकान बढ़ाती है। दिनभर में पानी के सेवन को 6–8 गिलास तक रखें (संभावित रूप से अधिक अगर/activity ज़्यादा हो)।

heavy/अनियमित पीरियड्स, PCOS, में नॉर्मल लक्षण तो चिकित्सक से उपचार/डायट सलाह लें। हार्मोनल बदलाव के समय अच्छी नींद, संतुलित भोजन और सपोर्टिव देखभाल मदद कर सकती है।

अगर डाइजेस्टिव क्रिया धीमी या डायरिया/कब्ज हो, तो पोषक तत्व का अवशोषण घट सकता है; इससे Energy कमी महसूस होती है।

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