आजकल लोग अपनी सेहत के लिए बहुत जागरूक हो रहे हैं, वह संतुलित और organic पदार्थों का सेवन शुरू कर रहे है और अपनी सेहत में हो रहे छोटे से छोटे बदलाव की ओर वो पूरा ध्यान दे रहे हैं। लोगों का ध्यान प्राकृतिक चीज़ों की ओर ज़्यादा आकर्षित हुआ है। लोग एलोपैथिक दवाइयों का सेवन न करके आयुर्वेदिक दवाइयों को प्राथमिकता दे रहे है। जिसमें बुराई तो कुछ नहीं है पर क्या आपको पता है कि जिन आयुर्वेदिक दवाइयों या चूर्ण का सेवन आप कर रहें है क्या वो 100% शुद्ध हैं?
आजकल जहां सब लोग सेहत के लिए जागरूक हो रहे हैं वहीं कुछ उत्पादक स्वास्थ्य के लिए उपयोग होने वाली चीज़ों में मिलावट करने लगें है।
आयुर्वेदिक दवाइयों और चूर्ण में भी आजकल steroid पाए जाने लगे हैं। आयुर्वेदिक दवाइयां अपना असर दिखाने में थोड़ा समय लेती है, किन्तु कुछ उत्पादक अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए दवाइयों में steroid मिलाने लगे हैं, ताकि दवाइयाँ जल्दी असर करने लगें।
ऐसे में यह जानना बहुत ज़रूरी है कि असली और नकली दवाइयों में फर्क कैसे करें।
आयुर्वेदिक दवाइयों में चूर्ण मिलाना क्यों खतरनाक है?
आयुर्वेदिक दवाइयों या चूर्ण में steroid मिलाना कई हद तक खतरनाक हो सकता है। आयुर्वेदिक इलाज एक प्राकृतिक और धीमी प्रक्रिया है जिसमें जड़ी-बूटियों द्वारा इलाज किया जाता है और ये शरीर में धीरे-धीरे अपना असर करती है। वहीं कुछ उत्पादक जल्दी असर दिखने के लिए और तुरंत आराम देने के लिए इसमें मिलावट करके steroid मिला देते है जिससे दर्द तुरंत ठीक हो जाता है पर लंबे समय तक इसका इस्तेमाल सेहत के लिए कई हद तक नुकसानदायक हो सकता हैं।
Steroid इस्तेमाल करने से शरीर में कई नुकसान हो सकते हैं:
- शरीर में अचानक वजन बढ़ने लगता है और सूजन आने लगती है।
- ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
- हड्डियाँ कमज़ोर होने लगती हैं।
- ब्लड प्रेशर पर दबाव पड़ने लगता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बिना सलाह के steroid के प्रयोग से शरीर में ये सब परेशानियाँ हो सकती हैं। और तो और, अचानक दवाइयाँ बंद करने से भी नुकसान हो सकता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाइयों के सेवन से बचें।
असली और नकली आयुर्वेदिक दवाइयों में फर्क कैसे पहचानें?
आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करने में कोई बुराई नहीं है बल्कि यह तो एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसका निर्माण प्राकृतिक जड़ी-बूटियों द्वारा किया जाता है जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे विकारों को जड़ से खत्म करके हमें स्वस्थ बनाती है। वही कुछ उत्पादक तुरंत राहत देने के लिए इसमें steroid आदि मिला देते हैं। Steroid से आपको राहत तो मिल जाती है, पर इसका अधिक प्रयोग आपको कई हद तक नुकसान पहुंचा सकता है।
अब सवाल ये होता है कि आयुर्वेदिक दवाइयों में असली और नकली की पहचान कैसे करें।
असली और नकली की पहचान करने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं:
- दवाइयों में लाइसेंस नंबर या फिर निर्माता के पते की जाँच करें। असली दवाइयों में यह सब पैकेजिंग में साफ-साफ लिखा हुआ मिल सकता है, पर नकली दवाइयों में ये सब जानकारियां मिलना मुश्किल होता है या फिर अस्पष्ट रूप से लिखा हुआ होता है।
- सामग्री आदि की जानकारी वाले सेक्शन को ध्यान से देखें। असली दवाइयों में सामग्री आदि बिलकुल स्पष्ट रूप से लिखी हुई होती है, और नकली दवाइयों में यह सब स्पष्ट रूप से मिलना मुश्किल होता है।
- पैकेजिंग की ओर ध्यान दे, सील टूटी हुई नहीं मिलनी चाहिए पैकेट के ऊपर लिखी हुई जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए, अगर आपको पैकेजिंग में लिखी हुई जानकारी अस्पष्ट, धुन्धुली या मिटी हुई दिखाई देती है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।
- बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट पर ध्यान दे हो सकता है की नकली दवाइयों में ये सब सही तरीके से print हुआ न मिले।
- हमेशा एक अच्छी और registered दुकान से ही ये दवाइयाँ खरीदें और overclaimed दावों वाली दवाइयों से बचें।
अगली बार दवाई खरीदने जाएँ तो इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही दवाइयाँ खरीदें।
Steroids वाली दवाइयों से किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?
वैसे तो Steroids आदि का सेवन बिना डॉक्टर्स की सलाह के नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह कुछ समय के लिए आपको दर्द आदि से राहत ज़रूर दे सकते हैं, पर यह किसी समस्या का समाधान नहीं है। लम्बे समय तक Steroids का प्रयोग आपके शरीर में कई हद तक बुरा प्रभाव पंहुचा सकते है। कुछ विशेष स्वास्थ्य संबंधित रोगों से झूझ रहे व्यक्तिओं को विशेषकर इन आयुर्वेदिक दवाओं से बचना चाहिए, जैसे:
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली स्त्री, लिवर या किडनी की बीमारी से झूझ रहे मरीज, कमज़ोर इम्युनिटी और हड्डियों वाले मरीज और अल्सर आदि से पीड़ित मरीजों को Steroids वाले आयुर्वेदिक दवाइयों से बचना चाहिए।
इन लोगो को बिना डॉक्टर्स की सलाह के Steroids आदि का सेवन नहीं करना चाहिए, अन्यथा ये इनके स्वास्थ्य पर कई बुरे प्रभाव डाल सकता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में दवाइयों की शुद्धता, उनके गुण और उनकी मात्रा पर विशेष ध्यान दिया गया है। आयुर्वेदिक नाम जुड़ जाने से दवाई 100% प्राकृतिक नहीं हो जाती है उसके सामग्री, बनने की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण होती है। आयुर्वेद भी इन्ही सब चीज़ो को महत्त्व देता हैं।
आयुर्वेद का काम बीमारी के लक्षणों को दबाना नहीं है बल्कि अपनी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों द्वारा रोगों को पहचानना, उनकी जड़ तक पहुंचना और उन्हें जड़ से खत्म करना ही आयुर्वेद का उद्देश्य है।
इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक चूर्ण को खरीदने से पहले उसके गुण, और उनकी प्रमाणिकता की और ध्यान देना बहुत आवश्यक है। प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि हर औषधि हर व्यक्ति के लिए सटीक ही साबित हो।
असली आयुर्वेदिक दवाई वही है जिसमे सही निर्माण, सही सामग्री का चयन और सही मार्गदर्शन को महत्त्व दिया जाये।
निष्कर्ष
आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन करना अच्छी बात है। यह आपके विकारों को जड़ से ठीक करके आपको स्वस्थ बनाने में कारगर साबित हो सकता है, पर किसी भी उत्पाद पर आँख बंद करके भरोसा कर लेना उचित नहीं है। आयुर्वेदिक दवाइयों का चयन करते समय ध्यान दें कि आप सही निर्माता की ही औषधि खरीदें और उपयोग करें और नकली उत्पादकों की दवाइयों से बचें, नहीं तो आपको औषधि के सेवन से फायदे से ज़्यादा नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि कौन सी दवा कितनी जल्दी असर कर रही है बल्कि यह ज़रूरी है कि आप अपने शरीर को क्या दे रहे हैं। इसलिए जागरूक बनें और सही दवाई विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही खरीदें और प्रयोग करें।
References
Adverse events with ayurvedic medicines- possible adulteration and some inherent toxicities - PMC













