बवासीर का ऑपरेशन करवाने के साल भर बाद फिर से वही तकलीफ़ शुरू हो गई

Information By Dr. Bhavna Dwivedi     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बवासीर वर्त्तमान में सबसे ज़्यादा होने वाली बीमारियों में से एक हैं। बवासीर 50 की उम्र के बाद किसी भी लिंग (महिला या पुरुष) को हो सकती है या उस व्यक्ति को भी हो सकती है जिसने पहले से ही बवासीर का इलाज कराया हुआ है। इस लेख में आपको, बवासीर वापिस क्यों आती है और इसको ऑपरेशन करवाने के बाद वापिस आने से कैसे रोके, इस बारे में जानकारी मिलेगी।

बवासीर क्या है और क्यों होती है?  

बवासीर या पाइल्स जिसे मेडिकल टर्म्स में हेमोर्रोइड्स (Hemorrhoids) भी बोलते है, यह तब होता है जब हमारे अनल-कैनाल (anal canal) या गुदा द्वार के अंदरूनी या बाहरी किनारों पर सूजन आ जाती हैं। जब गुदा-द्वार की नसों पर लम्बे समय तक दबाव रहता है तो नसे फूलने के कारण दर्द, जलन या रक्त आने का कारण बन सकता हैं।

बवासीर एक ऐसी बीमारी है, जो रातो-रात पैदा नहीं होती, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र में लम्बे समय से चलने वाली गड़बड़ी और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल (routine) का परिणाम हैं। इसके होने के कुछ कारण इस प्रकार हैं:

  • पानी काम पीना: हमारा शरीर 70 % पानी से बना है और जब हम पानी काम पीते है तो शौच करने में कठिनाई होती है और दबाव पढता हैं। 
  • लम्बे समय तक बैठे रहना: जब हम लम्बे समय तक बैठे रहते है और कोई व्यामाम नहीं करते तो हमारी बॉडी स्टिफ हो जाती है और शौच करने में तकलीफ होती हैं। 
  • खाने में फाइबर (fiber) की कमी: जब आप रूखा खाना, जंक फ़ूड या फिर तला-भुना खाना ज़्यादा खाते है और हरी सब्जियों का सेवन कम करते हो तब आपकी खाना पचने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कब्ज़ होने की सम्भावना बढ़ जाति  हैं।  
  • पुरनी कब्ज़ या लगातार कब्ज़ होना: कब्ज़ (constipation) तब होती है जब हमारा मल रुक जाता है जिसका मतलब है की आपके पेट में पुराना खाना अभी ठीक से पचा नहीं है। 

बवासीर होने के प्रमुख लक्षण 

बवासीर के लक्षण अक्सर कब्ज़ के लक्षणों के समान्य होते हैं, लेकिन हम अक्सर इन लक्षणों को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते है जिसके कारण यह आगे जाकर आपके गुदा-द्वार पर बहुत दबाव डालती है। अगर हम समय रहते हुए इन लक्षणों को पहचान लें तो न केवल दर्द कम होगा, बल्कि ऑपरेशन करने की बात ही नहीं आएगी।  

बवासीर के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं: 

  • शौच के समय दर्द या जलन होना 
  • मल में खून दिखना या बदबू आना 
  • गुदा-द्वार के आसपास सूजन या गाठे महसूस होना 
  • गुदा-द्वार के आसपास खुजली होना 
  • उठने या बैठने में परेशानी होना

बवासीर ऑपरेशन के बाद भी वापस क्यों आ जाती है? 

बवासीर के ऑपरेशन के बाद और कई हफ्तों के रिकवरी पीरियड के बाद भी जब यह पाइल्स या बवासीर की बीमारी फिर वापस आती है तो  हमारा या उस व्यक्ति का जिसका ऑपरेशन पहले भी हो चूका है उसका मनोबल टूट जाता हैं। 

सर्जरी के बाद जब पाइल्स वापिस आती है उसके कुछ कारण मरीज़ द्वारा की जाने वाली दिनचर्या की गलतिया होती है जो वह जाने-अनजाने में नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इनमें से कुछ लक्षण या निशानियाँ ऐसी हैं: 

  • कब्ज़ का वापस आना: कब्ज़ आपके खाने में फाइबर की कमी की वजह से होती है और जो सर्जरी होती है वो सिर्फ तब-तक ठीक रहती है जब तक आप खान-पान सही रखते है। 
  • सेडेंटरी लाइफस्टाइल (sedentry lifestyle): इसका मतलब अगर आप दिनभर एक जगह बैठे रहते हो और किसी तरह का व्यायाम नहीं करते तो वो सेडेंटरी लाइफस्टाइल में आता है जिसका सीधा असर आपके पाचन क्रिया पर पड़ता हैं। 
  • लिवर (liver) का स्लो काम करना: आपका लिवर एक प्रकार का एंजाइम (enzyme) बन|ता है जो आपकी पाचन क्रिया में खाना पचाने में मदद करता है।
  • दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं करना: जब आप ऑपरेशन के बाद फिर से वो गलतिया दोबारा करते है, जैसे कम पानी पीना, समय से ना उठना, व्यायाम ना करना या खाने में कम फाइबर लेना। 

बवासीर के क्या-क्या प्रकार क्या हैं?

यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हर व्यक्ति में बवासीर के लक्षण और उसकी गंभीरता अलग-अलग होते हैं। सही प्रकार को पहचाने बिना उसका सही इलाज संभव नहीं है।

बवासीर के कुछ प्रकार निम्लिखित हैं: 

  • अंदरूनी बवासीर (Internal Hemorrhoids): ये गुदा-द्वार के अंदरूनी हिस्से में होते हैं और आमतौर पर मल त्याग के समय ये फट जाते हैं और चमकीला लाल खून आता है।
  • बाहरी बवासीर (External  Hemorrhoids): यह गुदा-द्वार के बाहरी किनारे पर होते हैं। इनमें भयंकर खुजली, दर्द और सूजन होती है। बैठने और चलने-फिरने में भी मरीज़ को तकलीफ़ होती है।
  • खूनी बवासीर (Bleeding Piles): इस अवस्था में मल के साथ या मल के बाद खून की धार या बूँदें आती हैं। यह स्थिति शरीर में भारी कमज़ोरी और खून की कमी (Anemia) का कारण बन सकती है।
  • बादी बवासीर (Blind Piles): इसमें खून तो नहीं आता, लेकिन मलद्वार के पास कठोर मस्से बन जाते हैं। इनमें लगातार एक चुभन और खुजली बनी रहती है, और लोअर एब्डोमिनल पेन व गैस की समस्या लगातार सताती है।

बवासीर के दोबारा होने के शुरुआती संकेत  

कोई भी बीमारी बिना लक्षण दिखाए वापस नहीं आती बल्कि कुछ शुरुआती संकेतों के साथ आती है जैसे:

  • मल त्याग के समय जलन या चुभन महेसुस होना जैसे गुदा-मार्ग में कोई कांच का टुकड़ा  चुभ रहे हों या मलद्वार छिल गया हो।
  • मलाशय या गुदा-द्वार के आसपास दिनभर अजीब सी खुजली होना। 
  • पेट का आधा अधूरा साफ़ होना यानि आप घन्टे भर बाथरूम में  बैठे हो लेकिन फिर भी मल पूरी तरह से साफ़ नहीं हुआ। 

बवासीर के लक्षणों को कैसे रोके?

बवासीर वापिस आने या बवासीर के लक्षणों को रोकने के कुछ आसान तरीके है जैसे: 

    • सही मात्रा में फाइबर ले: अपनी डाइट में दलीय, साबुत अनाज, हरी सब्जिया और ताजे फलो को शामिल कीजिये ताकि आपका पेट आसानी से साफ होजाये। 
    • भरपूर मात्रा में पानी पिएं: आप अपनी दिनचर्या में यह नियम बनाएं कि आप 8-10 गिलास पानी पीना है। 
    • व्यायाम और प्राणायाम करे: अपने दिनचर्या में कम से कम आधा घंटा व्यायाम को शामिल करे ताकि आपके पाचनतंत्र में अग्नि सामने रूप से बानी रहे।
    • सही दिनचर्या को अपनाएँ 
    • सही डाइट को अपनाएँ  

क्या बवासीर का इलाज सिर्फ ऑपरेशन है? 

बवासीर एक पाचन क्रिया से संबंधित बीमारी है जिसका सीधा अर्थ यह है की इसका इलाज सिर्फ ऑपरेशन नहीं है। 

आयुर्वेदा के अनुसार बवासीर को कुछ आयुर्वेदिक थेरेपी जैसे: 

  • बस्ती: इसे आयुर्वेद की 'अर्ध-चिकित्सा' कहा जाता है। औषधीय तेलों या काढ़े के जरिए दी जाने वाली यह एनिमा थेरेपी मलाशय की खुश्की दूर करती है और पुरानी कब्ज को जड़ से खत्म करती है।
  • अवगाह स्वेद: गुनगुने पानी में औषधीय काढ़ा मिलाकर उसमें बैठना 'सिट्ज़ बाथ' कहलाता है। यह गुदा क्षेत्र की मांसपेशियों को आराम देता है, दर्द कम करता है और मस्सों की सूजन घटाता है।
  • क्षार सूत्र: यह ग्रेड 3 और 4 की बवासीर के लिए एक प्रसिद्ध पैरा-सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें एक विशेष औषधीय धागे का उपयोग किया जाता है जो मस्सों को बिना किसी बड़े चीरे के धीरे-धीरे काटकर सुखा देता है।
  • अभ्यंग: पेट के निचले हिस्से और शरीर की औषधीय तेलों से मालिश करने से 'अपान वायु' का अनुलोमन होता है, जिससे मल त्याग में होने वाला तनाव कम हो जाता है।
  • तक्र धारा: छाछ (मट्ठे) के औषधीय गुणों का उपयोग पाचन तंत्र को ठंडा करने और शरीर की गर्मी (पित्त) को शांत करने के लिए किया जाता है, जो बवासीर के रोगियों के लिए अमृत समान है।

निष्कर्ष  

बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसकी शुरुआत कब्ज़ की तरह ही होती है, यानि आपको शुरुआत में इंडिगेस्टिव या खाना ठीक से ना पचने की समस्या होगी और फिर अगर आप इसका समय रहते इलाज न करवाए तो यह आगे बढ़कर बवासीर बन सकती है जिसके अलग अलग प्रकार  होते है और वो ऑपरेशन से ही ठीक हो पाते है। 

आज की तारीख में बवासीर 50 की उम्र के बाद किसी भी लिंग के व्यक्ति को हो सकती है साथ ही साथ यह उस व्यक्ति को भी हो सकती है जिसने ऑपरेशन करवाया हुआ है। लेकिन हम बवासीर को अपने रोजमरा की आदतों से नियंत्रित रख सकते है। 

References 

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/treatment

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/hemorrhoids/eating-diet-nutrition

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7075634/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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