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Blood pooling से complications कैसे बढ़ते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

दिन भर की भागदौड़ के बाद जब आप रात को बिस्तर पर लेटते हैं, तो क्या आपको अपने पैरों में ऐसा भारीपन महसूस होता है मानो उनमें सीसा Lead भर दिया गया हो? क्या आपकी पिंडलियों में नीली या बैंगनी रंग की नसें उभर आई हैं जो अब धीरे-धीरे दर्द करने लगी हैं? हम अक्सर इसे ज़्यादा चलने या उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह भारीपन सिर्फ थकान नहीं है, बल्कि यह आपकी नसों में रुके हुए और सड़ रहे गंदे खून का वज़न है? मेडिकल भाषा में इसे 'ब्लड पूलिंग' Blood Pooling कहा जाता है। वेरीकोज वेन्स Varicose Veins की शुरुआत इसी ब्लड पूलिंग से होती है। जब नसों के अंदर खून ऊपर दिल की तरफ जाने के बजाय नीचे पैरों में ही जमा होने लगता है, तो यह सिर्फ नसों को फुलाता ही नहीं, बल्कि अंदर ही अंदर मांसपेशियों और त्वचा को गलाने लगता है। अगर इस रुके हुए खून को समय रहते वापस सर्कुलेशन में नहीं लाया गया, तो यह ऐसी भयंकर जटिलताओं Complications को जन्म देता है जो आपकी ज़िंदगी को दर्दनाक बना सकती हैं। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि ब्लड पूलिंग क्या है, इससे शरीर में एक के बाद एक कौन सी गंभीर जटिलताएँ पैदा होती हैं, और कैसे आयुर्वेद की मदद से आप इस गंदे खून को बाहर निकालकर अपनी नसों को दोबारा स्वस्थ बना सकते हैं।

वेरीकोज वेन्स और ब्लड पूलिंग Blood Pooling असल में क्या हैं?

हमारे पैरों की नसों Veins का काम अशुद्ध खून को गुरुत्वाकर्षण Gravity के खिलाफ वापस दिल तक पहुँचाना है। इस काम को आसान बनाने के लिए नसों के अंदर छोटे-छोटे 'वाल्व' Valves होते हैं, जो एक तरफा दरवाजे की तरह काम करते हैं खून ऊपर जाता है तो ये खुल जाते हैं, और खून को नीचे गिरने से रोकने के लिए तुरंत बंद हो जाते हैं। लेकिन लगातार खड़े रहने, मोटापे या खराब लाइफस्टाइल के कारण जब ये वाल्व कमज़ोर होकर टूट जाते हैं, तो खून ऊपर जाने के बजाय वापस नीचे पैरों में गिरने लगता है और वहीं जमा हो जाता है। एक ही जगह पर खून के इस भयंकर जमाव को ही 'ब्लड पूलिंग' कहा जाता है। यही जमाव नसों को गुब्बारे की तरह फुला देता है, जिसे हम वेरीकोज वेन्स कहते हैं।

गंदा और अशुद्ध खून नसों के अंदर क्या होता है?

आपको यह समझना होगा कि जो खून वेरीकोज वेन्स में जमा हो रहा है, वह ऑक्सीजन से भरा ताज़ा खून नहीं है। वह 'डीऑक्सीजनेटेड' Deoxygenated यानी अशुद्ध खून है जिसमें शरीर के टॉक्सिन्स और कार्बन डाइऑक्साइड भारी मात्रा में मौजूद हैं। जब यह गंदा खून हफ्तों और महीनों तक पैरों की नसों में जमा रहता है ब्लड पूलिंग, तो नसों की दीवारों और आसपास के ऊतकों Tissues को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। ऑक्सीजन की इस कमी Hypoxia के कारण त्वचा और मांसपेशियाँ अंदर ही अंदर घुटने लगती हैं, और यहीं से जटिलताओं Complications का सिलसिला शुरू होता है।

लगातार खड़े रहना या बैठे रहना ब्लड पूलिंग का सबसे बड़ा कारण

आखिर यह ब्लड पूलिंग होती क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण हमारी दिनचर्या है। जो लोग पेशे से पुलिस वाले, शेफ, सिक्योरिटी गार्ड या टीचर हैं, वे घंटों एक ही जगह खड़े रहते हैं। वहीं ऑफिस में काम करने वाले लोग घंटों कुर्सी से चिपके रहते हैं। पैरों की मांसपेशियाँ एक 'पंप' का काम करती हैं जो खून को ऊपर धकेलती हैं। जब आप हिलते-डुलते नहीं हैं, तो यह पंप बंद हो जाता है और सारा खून गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे पैरों में ही जमा Pool होने लगता है।

कब्ज़  और बढ़ता वजन नसों पर अतिरिक्त दबाव

अगर आपको कब्ज़  Constipation रहती है, तो मल त्यागते समय आपको बहुत ज़ोर लगाना पड़ता है। यह ज़ोर आपके पेट का अंदरूनी दबाव बढ़ा देता है, जो पैरों से ऊपर आ रहे खून का रास्ता रोक देता है, जिससे ब्लड पूलिंग और तेज़ी से होती है। इसी तरह, शरीर का अतिरिक्त वजन मोटापा भी पैरों की कमज़ोर नसों पर भारी दबाव डालता है, जिससे उनके वाल्व टूट जाते हैं और खून नीचे जमा होने लगता है।

आयुर्वेद ब्लड पूलिंग को कैसे समझता है? 

आयुर्वेद में ब्लड पूलिंग और वेरीकोज वेन्स को 'सिराग्रंथि' Siragranthi कहा जाता है। यह मुख्य रूप से शरीर में 'वात दोष' Vata Dosha के भयंकर असंतुलन और खून रक्त धातु के अशुद्ध होने रक्त दृष्टि के कारण होता है। वात का काम शरीर में हर चीज़ को गति देना है। जब खराब जीवनशैली के कारण वात बिगड़ता है, तो वह नसों में खून की गति को रोक देता है। खून के इसी रुकाव पूलिंग से अशुद्ध और गंदा खून एक जगह जमा होकर ग्रंथि गाँठ या सूजी हुई नस बना लेता है। आयुर्वेद का लक्ष्य इस जमे हुए गंदे खून को बाहर निकालना और सर्कुलेशन को वापस चालू करना है।

नसों को मजबूत बनाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें रुके हुए खून को चलाने और नसों को ताक़त देने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • मंजिष्ठा यह आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन रक्त शोधक Blood Purifier जड़ी-बूटी है। यह ब्लड पूलिंग के कारण जमा हुए गंदे खून को साफ करती है और त्वचा के कालेपन को दूर करती है।
  • अर्जुन यह पूरे शरीर की रक्त वाहिकाओं Blood Vessels की दीवारों को भयंकर मज़बूती देती है, जिससे नसें दोबारा फूलती नहीं हैं।
  • गुग्गुलु यह शरीर में कहीं भी आई सूजन को प्राकृतिक रूप से खींच लेता है और नसों में खून के थक्के Clots बनने से रोकता है।
  • सारिवा यह नसों की जलन, भारीपन और खुजली को तुरंत शांत करती है।

आयुर्वेदिक थेरेपी रुके हुए खून को कैसे बाहर निकालती है?

जब ब्लड पूलिंग बहुत पुरानी हो जाती है और नसें फूलकर नीली पड़ जाती हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी सीधे उस गंदे खून पर हमला करती है।

  • रक्तमोक्षण जलौका/Leech Therapy यह ब्लड पूलिंग का सबसे जादुई और त्वरित इलाज है। इसमें सूजी हुई नसों और काले पड़े हिस्से के आसपास विशेष प्रकार की जोंक Leeches लगाई जाती हैं। ये ज़ोंक सिर्फ उस जमे हुए गंदे और अशुद्ध खून को चूसकर बाहर निकाल देती हैं। इससे नसों का भारी दबाव तुरंत कम हो जाता है, सूजन घटती है, और वहाँ ताज़ा ऑक्सीजन वाला खून दौड़ने लगता है।
  • अभ्यंग Upward Massage वेरीकोज वेन्स में बहुत सावधानी से औषधीय तेलों के साथ नीचे से ऊपर दिल की तरफ की दिशा में हल्की मालिश की जाती है, जो रुके हुए खून को वापस ऊपर धकेलने में बहुत मदद करती है।

सर्कुलेशन सुधारने के लिए वात-शामक डाइट प्लान क्या है?

आप जो खाते हैं, वही आपके खून को या तो गाढ़ा बनाता है या पतला। ब्लड पूलिंग को रोकने के लिए सही डाइट लेना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

  • आहार का सिद्धांत आपको हमेशा ऐसा हल्का और सुपाच्य भोजन अपनाना चाहिए जो पेट में गैस और कब्ज़  न बनाए। वात को बढ़ाने वाला सूखा, ठंडा और बासी खाना बिल्कुल न खाएं।
  • पोषक तत्व विटामिन सी से भरपूर चीज़ें जैसे आंवला, संतरा डाइट में शामिल करें; यह नसों की दीवारों के लचीलेपन को बनाए रखती हैं। फास्ट फूड और बहुत ज़्यादा नमक खाने से बचें क्योंकि यह पानी रोककर सूजन Edema को भड़काता है।
  • पाचन संतुलन त्रिफला का नियमित सेवन बहुत फायदेमंद है, यह पेट को बिल्कुल साफ रखकर नसों का दबाव कम करता है।
  • दैनिक पेय दिन भर में पर्याप्त मात्रा में हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह खून को प्राकृतिक रूप से पतला रखता है जिससे वाल्व्स को खून ऊपर धकेलने में आसानी होती है।
  • जीवनशैली सहयोग एक ही स्थिति में लगातार खड़े रहने या बैठने से बचें। हर 45 मिनट में उठकर थोड़ा चलें ताकि पिंडलियों की मांसपेशियाँ खून को पंप कर सकें।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी कैंची नहीं है जो एक मिनट में सूजी हुई नस को काटकर बाहर निकाल दे। आपके बिगड़े हुए सर्कुलेशन को पूरी तरह रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

शुरुआती कुछ हफ्ते आपका पेट साफ होगा; पैरों का भारीपन, ऐंठन और भयंकर खिंचाव काफी कम होने लगेंगे।

1 से 3 महीने तक जमे हुए गंदे खून के बाहर निकलने से त्वचा का कालापन और खुजली कम होने लगेगी। सूजी हुई नसें नरम पड़ने लगेंगी।

3 से 6 महीने तक आपकी नसें अंदर से पूरी तरह साफ और ताकतवर बन जाएँगी। वाल्व्स को ताक़त मिलेगी जिससे ब्लड पूलिंग होना बंद हो जाएगी, और आप दोबारा हल्के और स्वस्थ पैरों के साथ चल सकेंगे।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? 

ब्लड पूलिंग को महज़ एक आम सूजन मानकर इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर आपको पैरों में ये गंभीर संकेत दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ज़रूरी है

  • अगर सूजी हुई नीली नस अचानक बहुत ज़्यादा लाल, गर्म और छूने पर बहुत दर्दनाक हो जाए यह नसों में क्लॉट और सूजन यानी Phlebitis का संकेत है।
  • अगर पैरों के निचले हिस्से या टखनों के पास त्वचा सख्त, रूखी और काली या भूरी पड़ने लगे।
  • अगर उभरी हुई नस से अचानक खून बहने लगे Bleeding जो 10 मिनट दबाने के बाद भी न रुके।
  • अगर पैरों में अचानक से भयंकर सूजन आ जाए और साँस लेने में तकलीफ होने लगे यह जानलेवा ब्लड क्लॉट या DVT का फेफड़ों तक पहुँचने का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष

आपके पैरों में दिखने वाली उभरी हुई नीली नसें और भारीपन सिर्फ एक साधारण दर्द नहीं है; यह एक गंभीर चेतावनी है कि आपकी नसों के अंदर 'ब्लड पूलिंग' Blood Pooling हो रही है। गंदे और अशुद्ध खून का यह भयंकर जमाव अंदर ही अंदर आपकी त्वचा, मांसपेशियों और नसों को ऑक्सीजन से वंचित करके सड़ा रहा है। अगर आप सिर्फ दर्द की गोली खाकर या मोज़े पहनकर इसे नज़रअंदाज़ करते हैं, तो यही रुका हुआ खून आगे चलकर नसों के फटने, वेनस अल्सर और जानलेवा ब्लड क्लॉट्स जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बनता है। समस्या के इस भयानक रूप लेने का इंतज़ार क्यों करना, जब आयुर्वेद में इसका सुरक्षित और स्थायी समाधान मौजूद है? सही आयुर्वेदिक उपचार, रक्त-शोधक जड़ी-बूटियों, जलौका थेरेपी Leech Therapy और वात-शामक जीवनशैली को अपनाकर आप इस रुके हुए गंदे खून को शरीर से बाहर निकाल सकते हैं और अपनी नसों को दोबारा ताक़त दे सकते हैं। अपने शरीर की पुकार सुनें, सिर्फ सिम्पटम को न दबाएँ, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपनी ज़िंदगी को स्वस्थ और हल्का बनाएँ।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जब पैरों की नसों के वाल्व कमज़ोर हो जाते हैं, तो खून गुरुत्वाकर्षण के कारण ऊपर दिल तक जाने के बजाय वापस नीचे पैरों की नसों में ही जमा होने लगता है। खून के इसी लगातार जमाव को ब्लड पूलिंग कहते हैं।

जब नसों में खून बहुत ज़्यादा जमा हो जाता है, तो अंदर का दबाव बढ़ जाता है। इस दबाव के कारण खून का पानी (Plasma) रिसकर नसों से बाहर आसपास की त्वचा और ऊतकों में भर जाता है, जिससे टखनों और पैरों में भयंकर सूजन (Edema) आ जाती है।

बिल्कुल। जब गंदा खून नसों से बाहर रिसता है, तो लाल रक्त कोशिकाएं टूटकर एक पिगमेंट छोड़ती हैं जो त्वचा को अंदर से भूरा या काला बना देता है। यह अल्सर बनने से पहले की बहुत गंभीर चेतावनी है।

स्टॉकिंग्स बाहर से दबाव डालकर खून को नीचे जमा होने से कुछ हद तक रोकते हैं और सूजन कम करते हैं, लेकिन ये कमज़ोर वाल्व्स या खराब सर्कुलेशन की असली बीमारी को जड़ से ठीक नहीं करते। स्टॉकिंग्स उतारते ही ब्लड पूलिंग फिर शुरू हो जाती है।

ब्लड पूलिंग के कारण गंदा खून एक जगह जमा रहता है, जिससे त्वचा को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता। इससे त्वचा रूखी, सख्त और मृत (Dead) होने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप वहाँ असहनीय खुजली शुरू हो जाती है।

जी हाँ। अगर रुके हुए खून में थक्के (Blood Clots) बन जाएँ और वे टूटकर गहरी नसों के ज़रिए फेफड़ों (Lungs) तक पहुँच जाएँ, तो यह 'पल्मोनरी एम्बोलिज्म' नामक जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।

बहुत गहरा संबंध है। कब्ज़  के कारण मल त्यागते समय लगाया गया ज़ोर पेट का दबाव बढ़ाता है, जिससे पैरों से ऊपर आ रहे खून का रास्ता रुक जाता है और नीचे नसों में खून का जमाव (पूलिंग) और ज़्यादा तेज़ी से होने लगता है।

जी हाँ! आयुर्वेद में 'रक्तमोक्षण' (जलौका/Leech Therapy) बहुत कारगर है। इसमें प्रभावित जगह पर मेडिकल जोंक लगाई जाती हैं जो सिर्फ जमे हुए गंदे और अशुद्ध खून को चूसकर बाहर निकाल देती हैं, जिससे नसों का भारी दबाव तुरंत खत्म हो जाता है।

हल्की सैर (Walking), साइकिल चलाना और तैराकी बेहतरीन व्यायाम हैं। ये आपके पैरों की पिंडलियों (Calf muscles) को पंप करते हैं, जिससे जमे हुए खून को ऊपर की तरफ धकेलने में बहुत मदद मिलती है। भारी वज़न कभी न उठाएँ।

सोते समय पैरों को दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर रखने से गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की दिशा बदल जाती है। इससे दिन भर पैरों में जमा हुआ गंदा खून आसानी से वापस लौट पाता है, जिससे सुबह ब्लड पूलिंग और सूजन काफी कम हो जाती है।

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