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Cervical Disc और Heart Pain — एक की वजह दूसरा लगता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 16 May, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5076

अक्सर जब सीने में अचानक दर्द होता है, कंधे जकड़ जाते हैं या बाएं हाथ में भारीपन लगता है, तो सबसे पहले दिल की बीमारी का डर ही दिमाग में आता है। इस डर के मारे कई बार लोग और ज़्यादा घबराने लगते हैं। पर क्या हर बार ये दिल का ही दर्द होता है? ऐसा बिल्कुल ज़रूरी नहीं है।

कई बार हमारी गर्दन की नसों और डिस्क में आई दिक्कत भी बिल्कुल ऐसा ही दर्द देती है। जब गर्दन की नसों पर दबाव बढ़ता है, तो ये दर्द कंधों से होते हुए छाती और हाथों तक पहुंच जाता है।

आयुर्वेद इस दर्द को सिर्फ गर्दन या मांसपेशियों की दिक्कत नहीं मानता। इसे हमारे गलत तरीके से बैठने, नसों के कमज़ोर पड़ने, स्ट्रेस लेने और शरीर में वात के बिगड़ने से जोड़कर देखा जाता है। इसीलिए आयुर्वेद में सिर्फ दर्द की गोली देकर काम नहीं चलाया जाता, बल्कि शरीर के अंदर के बैलेंस और नसों को ठीक करने पर पूरा ध्यान रहता है।

आखिर ये सर्वाइकल डिस्क की दिक्कत है क्या?

जब इन डिस्क पर ज्यादा दबाव पड़ता है, तो आसपास की नसें प्रभावित हो सकती हैं। इसकी वजह से गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द, हाथों में झनझनाहट और कई बार छाती में भी असहजता महसूस होने लगती है। यह केवल साधारण गर्दन दर्द की समस्या नहीं मानी जाती, क्योंकि इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकता है। कई लोगों में यह दर्द दिल से जुड़ी परेशानी जैसा महसूस हो सकता है, जिससे भ्रम और घबराहट बढ़ सकती हैं।

आखिर दिल के दर्द और सर्वाइकल में लोग कंफ्यूज़ क्यों होते हैं?

असल में हमारे शरीर की सारी नसें एक-दूसरे से अंदर ही अंदर जुड़ी होती हैं। हमारी गर्दन से जो नसें निकलती हैं, उनका सीधा कनेक्शन कंधों, छाती और हाथों तक जाता है। होता ये है कि जब गर्दन की नसों पर कोई दबाव पड़ता है या उनमें कोई दिक्कत आती है, तो दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता। वो दर्द सीधा छाती और हाथों की तरफ फैलने लगता है।

अब परेशानी तब बढ़ जाती है जब यही दर्द बाईं तरफ यानी लेफ्ट साइड में होने लगता है। ऐसे में किसी को भी सबसे पहले दिल की बीमारी का ही डर सताएगा। ये दोनों दर्द आपस में इतने मिलते-जुलते हैं कि बिना डॉक्टर की जांच के इनमें फर्क कर पाना सच में बहुत मुश्किल हो जाता है।

इसी कन्फ्यूज़न में कई लोग इसे सीधा हार्ट अटैक समझ लेते हैं और बुरी तरह घबरा जाते हैं। और जो ये मन में लगातार बना हुआ डर और टेंशन है ना, ये परेशानी को कम करने के बजाय और ज़्यादा बढ़ा देता है।

सर्वाइकल नसें छाती में दर्द कैसे पैदा कर सकती हैं?

गर्दन की हड्डियों के बीच से कई महत्वपूर्ण नसें निकलती हैं, जो कंधों, पीठ और छाती तक जुड़ी होती हैं। जब गर्दन की डिस्क या हड्डियों के कारण इन नसों पर दबाव बढ़ता है, तो दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता। कई बार यह दर्द छाती और हाथों तक फैल सकता है, जिससे व्यक्ति को दिल की समस्या जैसा महसूस होने लगता है।

  • नसों पर दबाव बढ़ना: जब गर्दन की डिस्क कमजोर होकर नसों पर दबाव डालती है, तो उनमें जलन और खिंचाव बढ़ सकता है। इसका असर छाती, कंधे और हाथों तक महसूस हो सकता है।
  • दर्द दूसरी जगह महसूस होना: कई बार समस्या गर्दन में होती है, लेकिन दर्द छाती में महसूस होता है। इसे ऐसा दर्द माना जाता है जो नसों के जरिए दूसरी जगह तक पहुंचता है।
  • बाईं तरफ दर्द का डर बढ़ाना: अगर दर्द बाईं तरफ ज्यादा महसूस हो, तो व्यक्ति इसे दिल की समस्या समझ सकता है। इसी वजह से कई लोगों में घबराहट और तनाव बढ़ जाता है।
  • सांस लेने या गर्दन हिलाने पर दर्द बढ़ना: कुछ लोगों में गहरी सांस लेने या गर्दन घुमाने पर दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। यह संकेत देता है कि दर्द का संबंध गर्दन और नसों से भी हो सकता है।

Heart Attack जैसे कौन-से लक्षण महसूस हो सकते हैं?

सर्वाइकल डिस्क की समस्या में कई बार ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो दिल की बीमारी या दिल के दौरे जैसे महसूस होते हैं। इसी कारण कई लोग शुरुआत में इसे हृदय से जुड़ी समस्या समझ लेते हैं।

  • सीने में दबाव या दर्द महसूस होना: कुछ लोगों को छाती में भारीपन या दबाव जैसा दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द कई बार दिल के दर्द जैसा लग सकता है।
  • बाएं हाथ में भारीपन: दर्द या खिंचाव बाएं हाथ तक फैल सकता है। इस वजह से व्यक्ति को दिल की समस्या का डर बढ़ सकता है।
  • कंधे और ऊपरी पीठ में जकड़न: गर्दन की नसों पर दबाव बढ़ने से कंधों और ऊपरी पीठ में अकड़न महसूस हो सकती है। लंबे समय तक बैठने या गलत तरीके से बैठने पर यह ज्यादा बढ़ सकती है।
  • गर्दन घुमाने पर दर्द बढ़ना: अगर गर्दन हिलाने या झुकाने पर दर्द ज्यादा हो, तो इसका संबंध सर्वाइकल समस्या से हो सकता है। यह संकेत दिल के दर्द से अलग माना जाता है।
  • हाथों में झनझनाहट: नसों पर दबाव के कारण हाथों और उंगलियों में झनझनाहट महसूस हो सकती है। कई बार इसके साथ कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
  • सिरदर्द और चक्कर महसूस होना: कुछ लोगों में गर्दन की समस्या के साथ सिर भारी लगना और चक्कर आना भी देखा जा सकता है। यह नसों और गर्दन की जकड़न से जुड़ा हो सकता है।

इन लक्षणों में कई बातें दिल की समस्या जैसी लग सकती हैं, लेकिन सर्वाइकल दर्द अक्सर गर्दन की स्थिति, बैठने के तरीके और गर्दन की हरकत से जुड़ा होता है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और फैलने वाले दर्द का संबंध

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में गर्दन की हड्डियों और डिस्क में धीरे धीरे बदलाव आने लगते हैं। इन बदलावों की वजह से आसपास की नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे नसों में जलन और खिंचाव महसूस होने लगता है।

जब नसें प्रभावित होती हैं, तो दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता। कई लोगों में यह दर्द कंधों, हाथों और यहां तक कि छाती तक भी फैल सकता है। इसी कारण कुछ मामलों में यह दर्द दिल की बीमारी जैसा महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में छाती तक पहुंचने वाले इस दर्द को सर्वाइकल से जुड़ा छाती दर्द भी माना जाता है। यह वास्तविक दिल की बीमारी नहीं होती, लेकिन इसके लक्षण काफी हद तक मिलते जुलते महसूस हो सकते हैं।

इसी वजह से सही जांच और सही कारण समझना बहुत जरूरी माना जाता है, ताकि भ्रम और अनावश्यक घबराहट से बचा जा सके।

सर्वाइकल दर्द आखिर होता क्यों है?

सर्वाइकल कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो बस रातों-रात शुरू हो जाए। सच तो ये है कि हमारी अपनी कुछ आदतें ही इस दर्द को बुलावा देती हैं।

  • गलत तरीके से बैठना: अगर आप कुर्सी पर घंटों तक गलत पोस्चर में बैठे रहते हैं, तो गर्दन पर बहुत दबाव पड़ता है। इससे वहां की मांसपेशियां दुखने लगती हैं।
  • फोन और लैपटॉप की आदत: आजकल हर कोई बस गर्दन झुकाकर स्क्रीन में लगा रहता है। इस एक आदत से धीरे-धीरे गर्दन पूरी तरह जकड़ जाती है।
  • दिमागी टेंशन: आपको लगेगा कि स्ट्रेस का दर्द से क्या मतलब! पर जब हम ज़्यादा तनाव लेते हैं, तो कंधे और गर्दन की नसें एकदम खिंच जाती हैं और दर्द शुरू हो जाता है।
  • बढ़ती उम्र का असर: उम्र के साथ हमारी हड्डियों और डिस्क में हल्का घिसाव आने लगता है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ जाता है।
  • एक्टिविटी की कमी: पूरे दिन बस बैठे रहना और कोई मेहनत वाला काम न करना। ऐसे में हमारी गर्दन कमज़ोर पड़ने लगती है।
  • सोने का गलत तरीका: कई लोग बहुत ऊंचे तकिए पर या उल्टे-सीधे सोते हैं। इसी वजह से सुबह उठने पर गर्दन में भारी अकड़न मिलती है।

ये परेशानी सबसे ज़्यादा किन लोगों में दिखती है?

पहले लोग मानते थे कि सर्वाइकल तो बस बड़ी उम्र वालों की बीमारी है। पर आज के समय में कम उम्र वाले भी इससे खूब परेशान हैं। चलिए देखते हैं कि यह दिक्कत सबसे ज़्यादा किसे घेरती है:

  • लैपटॉप पर काम करने वाले: जो लोग ऑफिस का काम करते हुए घंटों लैपटॉप के आगे झुके रहते हैं। उनकी गर्दन पर हमेशा एक दबाव रहता है जिससे दर्द होना आम बात है।
  • फोन में घुसे रहने वाले लोग: जो अपना ज़्यादातर समय सिर नीचे करके मोबाइल चलाने में बिताते हैं, उनकी डिस्क पर सच में बहुत बुरा असर पड़ता है।
  • ड्राइविंग करने वाले: गाड़ी या कैब चलाने वालों को घंटों एक ही जगह बैठना होता है। फिर ऊपर से खराब रास्तों के झटके इस दर्द को और बढ़ा देते हैं।
  • बैठे रहने वाले लोग: जिनका काम बस एक जगह बैठे रहने का है और कोई भागदौड़ नहीं है। बिना किसी मूवमेंट के उनकी मांसपेशियां जल्दी सख्त और कमज़ोर हो जाती हैं।
  • हमेशा स्ट्रेस में रहने वाले: जो लोग बात-बात पर टेंशन लेते हैं, उनकी नसें हमेशा सिकुड़ी रहती हैं। इसी वजह से उनकी ये जकड़न कभी दूर नहीं होती।

आयुर्वेद में सर्वाइकल डिस्क को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद की बात करें तो वो सर्वाइकल को कोई आम बीमारी नहीं मानता। ये सीधा 'वात' के बिगड़ने का नतीजा है। शरीर में जब भी सूखापन, कमज़ोरी और जकड़न बढ़ती है, तो उसका सीधा असर हमारी हड्डियों और नसों पर पड़ता है। इसी वात के बढ़ने से गर्दन का दर्द और अकड़न शुरू होती है।

अगर इस पर ध्यान न दें, तो दर्द सिर्फ गर्दन तक नहीं रुकता। ये धीरे-धीरे कंधों, हाथों और फिर छाती तक पहुँच जाता है। कई लोगों को तो हाथों में झनझनाहट और सुन्नपन तक महसूस होने लगता है। शरीर के सारे मूवमेंट वात ही कंट्रोल करता है। इसके बिगड़ने पर नसें बहुत ज़्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं और दर्द तेज़ हो जाता है। रोज़ की टेंशन, खराब नींद और कुर्सी पर घंटों बैठना इस परेशानी को और बढ़ा देता है।

आयुर्वेद के इलाज का तरीका

आयुर्वेद में सर्वाइकल सिर्फ एक गर्दन दर्द नहीं है। इसे वात बिगड़ने, नसों का दबाव और गलत रूटीन का नतीजा माना जाता है।

  • अंदर की वजहें समझना: डॉक्टर सिर्फ दर्द की गोली नहीं देते। वो आपके बैठने का तरीका, टेंशन और नींद की आदतों को भी समझते हैं।
  • वात को बैलेंस करना: गर्दन का सूखापन और नसों का खिंचाव कम करने के लिए सबसे पहले वात को ही ठीक करते हैं।
  • नसों और मसल्स को सपोर्ट: जो मांसपेशियां कमज़ोर हो चुकी हैं, उनको अंदर से मज़बूती देने पर काम किया जाता है।
  • दर्द और जकड़न मिटाना: गर्दन से हाथों तक जाने वाले भारीपन को घटाने की पूरी कोशिश रहती है।
  • टेंशन कम करना: लगातार बैठे रहने और स्ट्रेस के कारण होने वाली बेचैनी को शांत किया जाता है।
  • खान-पान और रूटीन सुधारना: आपको एक ऐसी डाइट बताई जाती है जो पाचन सही रखे और शरीर को आराम दे।
  • लंबे समय का आराम: मकसद कुछ दिन का दर्द रोकना नहीं है। नसों को हमेशा के लिए हेल्दी रखना इसका असली टारगेट है।

सर्वाइकल में काम आने वाली आयुर्वेदिक औषधियां

सर्वाइकल वात बिगड़ने की निशानी है, इसलिए आयुर्वेद में ऐसी चीज़ें देते हैं जो शरीर को अंदर से ताकत दें।

  • अश्वगंधा: इसके इस्तेमाल से शरीर की कमज़ोरी दूर भागती है। मसल्स को ये बहुत अच्छा सपोर्ट देता है।
  • गुग्गुल: पुरानी जकड़न खोलने के लिए इसका खूब इस्तेमाल होता है, खासकर जोड़ों और गर्दन के लिए।
  • दशमूल: बिगड़े हुए वात को वापस पटरी पर लाने और दर्द खींचने में ये बहुत बढ़िया काम करता है।
  • गिलोय: शरीर का अंदरूनी बैलेंस सुधारने के साथ ही ये दिन भर की थकान मिटा देता है।
  • ब्राह्मी: अगर दर्द के साथ-साथ आपको दिमागी टेंशन ज़्यादा रहती है, तो ये दिमाग को एकदम शांत कर देगी।

सर्वाइकल के लिए कुछ खास आयुर्वेदिक थेरेपी

इन सारी थेरेपी का बस एक ही काम है गर्दन की जकड़न खोलना और नसों को रिलैक्स करना।

  • तेल मालिश (अभ्यंग): हल्के हाथ से मालिश करने पर गर्दन और कंधों की सारी जकड़न खुल जाती है। इससे दर्द में बहुत आराम मिलता है।
  • ग्रीवा बस्ती: इसमें गर्दन के ऊपर एक घेरा बनाकर हल्का गर्म तेल भरते हैं। इससे नसों का दबाव और अकड़न काफी कम हो जाती है।
  • हल्की भाप (स्वेदन): भाप लेने से कंधों की जकड़न दूर होती है। इसके बाद शरीर में एक अलग ही हल्कापन महसूस होता है।
  • शिरोधारा: माथे पर लगातार तेल गिराने वाली ये थेरेपी टेंशन और बेचैनी दूर करके दिमाग को सुकून देती है।
  • पैरों की मालिश (पादाभ्यंग): पैरों को रिलैक्स करने से पूरे शरीर को आराम मिलता है। रात को नींद भी बहुत अच्छी आती है।

सर्वाइकल में कैसा हो आपका खान-पान?

अगर आपका खान-पान सही है, तो गर्दन और मसल्स की जकड़न को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या खाएं?

  • एकदम ताज़ा और हल्का खाना खाएं, जो पाचन में आसान हो।
  • अपनी डाइट में हरी सब्ज़ियां और मौसम वाले फल ज़रूर शामिल करें।
  • दिन भर खूब पानी पिएं और हल्की गर्म चीज़ें ही लें।
  • मूंग दाल जैसी आसानी से पचने वाली चीज़ें ज़्यादा खाएं।
  • खाने में थोड़ी मात्रा में देसी घी लेना भी अच्छा रहता है।
  • शरीर की मज़बूती बनाए रखने के लिए सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) खाएं।

क्या न खाएं?

  • बहुत ज़्यादा तला-भुना खाने से बचें।
  • ऐसा भारी और मसालेदार खाना न खाएं जो पाचन खराब करे।
  • फ्रिज की एकदम ठंडी चीज़ें लेने से नसों की जकड़न बढ़ सकती है।
  • पैकेट बंद और बाहर के जंक फूड से बिल्कुल दूर रहें।
  • लंबे समय तक भूखे न रहें, खाली पेट रहने से वात बिगड़ता है।
  • खाने का एक समय तय करें, बिना टाइम के उल्टी-सीधी चीज़ें न खाएं।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम रेखा है और मैं ग्वालियर से हूँ। पिछले लगभग 5 सालों से मैं सर्वाइकल और थायरॉइड की समस्या से बहुत परेशान थी। मैं एलोपैथिक इलाज ले रही थी, दवाइयाँ लेने तक थोड़ी राहत मिलती थी, लेकिन जैसे ही दवा बंद होती, समस्या फिर से शुरू हो जाती थी। मेरी गर्दन, पीठ और कंधों में लगातार दर्द रहता था और हाथों में सुन्नपन भी महसूस होता था। इस वजह से मेरी दिनचर्या काफी प्रभावित हो गई थी और मैं बहुत परेशान रहने लगी थी। इसी दौरान मुझे एक जैन डॉक्टर के माध्यम से जीवा आयुर्वेद के बारे में पता चला और उनकी सलाह पर मैं वहाँ गई। डॉक्टरों ने मेरी पूरी स्थिति को समझकर उपचार शुरू किया। मुझे दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी सही सलाह दी गई। धीरे-धीरे मुझे आराम मिलने लगा और मेरी तकलीफों में काफी सुधार आया। अब मैं पहले से बेहतर महसूस करती हूँ।

डॉक्टर को कब दिखाना ज़रूरी है?

गर्दन या छाती के दर्द को कभी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आपको नीचे दी गई कोई भी दिक्कत ज़्यादा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं:

निष्कर्ष

सर्वाइकल का दर्द सिर्फ गर्दन तक रुकने वाली परेशानी नहीं है। कई बार ये कंधों और हाथों से होता हुआ छाती तक पहुँच जाता है, जिसे लोग गलती से दिल की बीमारी समझ लेते हैं। साइंस इसे नसों और डिस्क पर पड़ने वाला दबाव मानता है, वहीं आयुर्वेद इसे वात बिगड़ने और खराब लाइफस्टाइल का सीधा नतीजा बताता है।

घंटों तक गर्दन झुकाकर बैठना, टेंशन लेना, गलत तरीके से काम करना और शरीर को आराम न देना ये सब इस दर्द को और बढ़ा देते हैं। इसलिए सिर्फ पेनकिलर खाकर दर्द दबाने के बजाय, अपने रूटीन और शरीर के अंदरूनी बैलेंस पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। तभी आपको इस परेशानी से लंबे समय तक के लिए छुटकारा मिल पाएगा।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, कई लोगों में सर्वाइकल दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता। यह कंधों, हाथों और कभी-कभी छाती तक भी फैल सकता है। नसों पर दबाव बढ़ने के कारण दर्द दूसरी जगह महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में हाथ भारी लगना या झनझनाहट भी महसूस हो सकती है। इसलिए इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग दिखाई दे सकते हैं।

बहुत ऊंचा या बहुत कठोर तकिया गर्दन की स्थिति को बिगाड़ सकता है। इससे रातभर गर्दन पर दबाव बना रह सकता है। सुबह उठने पर दर्द, अकड़न और भारीपन ज्यादा महसूस हो सकते हैं। लंबे समय तक गलत तकिया इस्तेमाल करने से समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है। सही ऊंचाई और आरामदायक तकिया गर्दन को बेहतर सहारा देने में मदद कर सकते हैं।

जो लोग लंबे समय तक गाड़ी चलाते हैं या लगातार यात्रा करते हैं, उनमें गर्दन पर दबाव ज्यादा पड़ सकता है। खराब सड़क और लगातार झटकों का असर गर्दन की मांसपेशियों और डिस्क पर पड़ सकता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से जकड़न भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि कई यात्रियों और चालकों में यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है।

लगातार तनाव रहने पर गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कसी रहने लगती हैं। इससे दर्द, भारीपन और अकड़न बढ़ सकते हैं। कई लोगों में तनाव के समय सिरदर्द और गर्दन का खिंचाव भी ज्यादा महसूस होता है। मानसिक दबाव नसों की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। इसलिए तनाव कम करना भी राहत के लिए जरूरी माना जाता है।

शरीर को पर्याप्त गतिविधि न मिलने पर गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से गर्दन की लचक भी कम हो सकती है। इससे जकड़न और दर्द की संभावना बढ़ जाती है। हल्की शारीरिक गतिविधि और नियमित खिंचाव वाले अभ्यास गर्दन को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

मोबाइल को नीचे देखकर लंबे समय तक इस्तेमाल करने से गर्दन लगातार आगे की तरफ झुकी रहती है। इससे गर्दन की हड्डियों और नसों पर दबाव बढ़ सकता है। धीरे-धीरे दर्द, अकड़न और हाथों में झनझनाहट महसूस होने लग सकती है। यही कारण है कि कम उम्र के लोगों में भी अब यह समस्या तेजी से दिखाई दे रही है।

कुछ लोगों में ठंड या नमी वाले मौसम में गर्दन की जकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है। ठंड के कारण मांसपेशियां सख्त हो सकती हैं, जिससे दर्द बढ़ सकता है। सुबह के समय अकड़न ज्यादा महसूस होना भी आम बात हो सकती है। शरीर को गर्म और सक्रिय रखना कई बार आराम देने में मदद कर सकता है।

घंटों तक बिना रुके बैठे रहने से गर्दन और पीठ पर लगातार दबाव बना रहता है। इससे गर्दन की मांसपेशियां थकने लगती हैं और जकड़न बढ़ सकती है। बीच बीच में आराम और शरीर की स्थिति बदलना जरूरी माना जाता है। सही तरीके से बैठना भी गर्दन पर दबाव कम करने में मदद कर सकता है।

कई लोगों में गर्दन का दर्द रात के समय ज्यादा महसूस हो सकता है। करवट बदलने या सिर की स्थिति बदलने पर असहजता बढ़ सकती है। दर्द और जकड़न की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। अच्छी नींद न मिलने पर शरीर की थकान और तनाव भी बढ़ सकते हैं। इसलिए गर्दन को आरामदायक स्थिति में रखना जरूरी माना जाता है।

शरीर का अतिरिक्त वजन गर्दन और रीढ़ पर दबाव बढ़ा सकता है। इससे मांसपेशियों और हड्डियों पर अतिरिक्त भार महसूस हो सकता है। कम शारीरिक गतिविधि के साथ यह समस्या और बढ़ सकती है। संतुलित वजन बनाए रखना शरीर की गति और गर्दन के आराम के लिए फायदेमंद माना जाता है

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