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40 के बाद महिलाओं में joint pain और weight gain का connection

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 29 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 29 Jul, 2026
  • category-iconJoint Health
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चालीस की उम्र पार करते ही अक्सर महिलाओं को महसूस होता है कि शरीर थोड़ा सुस्त पड़ने लगा है। अचानक घुटनों और कमर में मीठा-मीठा दर्द रहने लगता है, और बिना ज़्यादा खाए भी वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।यह एक ऐसी समस्या है जिसे ज़्यादातर महिलाएँ अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में झेलती हैं।

जब हम खाने-पीने पर ध्यान भी देते हैं, फिर भी पुराने कपड़े टाइट होने लगते हैं। साथ ही, सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते वक्त जोड़ों में कसक महसूस होती है, तो काफी उलझन होती है।क्या यह सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से है या बात कुछ और है? इस लेख में हम इसी वजह को आसान शब्दों में समझेंगे और जानेंगे कि इससे आराम कैसे पाया जाए। 

एक्सपर्ट की क्या राय है

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और हड्डी रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि चालीस के बाद शरीर में होने वाले बदलाव मुख्य रूप से हॉर्मोन्स से जुड़े हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस उम्र में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर तेज़ी से गिरता है। यह हॉर्मोन मेटाबॉलिज़्म को तेज़ रखता है और जोड़ों की चिकनाई को भी बनाए रखता है। डॉक्टरों की राय में, जब महिलाएँ वज़न बढ़ने और दर्द की शिकायत लाती हैं, तो इसे अलग बीमारी नहीं माना जाता। डॉक्टर इसे हॉर्मोनल बदलाव का सीधा असर बताते हैं, जिसे एक सही और संतुलित जीवनशैली अपनाकर आसानी से संभाला जा सकता है।

40 के बाद दर्द और वज़न बढ़ने का कनेक्शन?

यह एक बहुत ज़रूरी सवाल है और इसके पीछे मुख्य रूप से हॉर्मोन्स ज़िम्मेदार होते हैं। स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि चालीस के बाद लगभग पचहत्तर प्रतिशत महिलाएँ वज़न बढ़ने और जोड़ों में दर्द की एक साथ शिकायत करती हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत (Percentage) में बाँटें, तो लगभग पचास प्रतिशत मामलों में इसका कारण सीधे तौर पर एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी होती है, जो फैट बढ़ाता है और जोड़ों को रूखा करता है। तीस प्रतिशत मामलों में बढ़ा हुआ वज़न घुटनों पर भारी दबाव डालता है। वहीं बचे हुए बीस प्रतिशत मामलों में शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की गंभीर कमी मुख्य रूप से ज़िम्मेदार होती है।

वज़न बढ़ने से जोड़ों में दर्द क्यों होता है?

जोड़ों का दर्द और शरीर का वज़न, ये दोनों चीजें आपस में बहुत गहराई से जुड़ी हैं। जब चालीस के बाद आपका मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है, तो पेट और जाँघों पर तेज़ी से चर्बी जमा होने लगती है। विज्ञान कहता है कि शरीर का एक किलो वज़न बढ़ने से आपके घुटनों पर चार किलो का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा, शरीर में जमा फैट सिर्फ चर्बी नहीं है। ये फैट सेल्स शरीर में ऐसे रसायन छोड़ते हैं जो जोड़ों में सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं। इसी सूजन और दबाव की वजह से ही आपके घुटनों और कमर में हमेशा एक लगातार और थका देने वाला दर्द रहने लगता है।

किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए?

यह सही है कि उम्र के साथ हल्का दर्द या वज़न बढ़ना आम बात है। लेकिन शरीर जब कुछ खास तरह के इशारे दे, तो हमें सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि ये अंदरूनी बीमारी के संकेत हो सकते हैं:

  • भारी सूजन आना: अगर घुटनों या जोड़ों में अचानक तेज़ सूजन आ जाए और वे बिल्कुल लाल हो जाएँ।
  • सुबह की जकड़न: सोकर उठने के बाद अगर आपके जोड़ों में आधे घंटे तक गंभीर जकड़न बनी रहे।
  • अचानक वज़न बढ़ना: बिना ज़्यादा खाए कुछ ही दिनों में तेज़ी से आपका वज़न कई किलो बढ़ जाना।
  • दर्द के साथ बुखार: जोड़ों के तेज़ दर्द के साथ अगर आपके शरीर का तापमान भी बहुत बढ़ जाए।

क्या दर्द की दवाइयाँ इसका कारण हो सकती हैं?

जी हाँ, कई बार जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए हम जो दवाइयाँ लेते हैं, वे ही बढ़ते वज़न का मुख्य कारण बन जाती हैं। बहुत सी महिलाओं को तुरंत राहत के लिए स्टेरॉयड्स या खास पेनकिलर्स दिए जाते हैं। इन दवाइयों का काम जोड़ों की सूजन खत्म करना होता है। लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। लगातार सेवन से शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिससे शरीर फूला हुआ और वज़न ज़्यादा लगता है। इसके अलावा ये दवाइयाँ भूख बढ़ाती हैं, जिससे आप ज़्यादा खाने लगती हैं। अगर आपको लगे कि दवा से वज़न बढ़ रहा है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के मुताबिक हमारा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन दोषों पर ही टिका होता है। चालीस की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में वात और कफ दोष एक साथ बिगड़ने लगते हैं।जब कफ बढ़ता है, तो पाचन और मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे बिना वजह भी वज़न तेज़ी से भागने लगता है। वहीं दूसरी तरफ, वात बढ़ने से जोड़ों का कुदरती तेल या चिकनाई सूखने लगती है, जिससे हड्डियों में रूखापन आता है और घुटनों-कमर में कट-कट की आवाज़ के साथ दर्द शुरू हो जाता है।आयुर्वेद का मानना है कि सिर्फ दर्द मिटाने की गोलियाँ खाने से काम नहीं चलेगा, असली राहत तभी मिलेगी जब हम शरीर के अंदर बिगड़े हुए वात और कफ को शांत करेंगे।

दर्द और वज़न कम करने के लिए क्या करना चाहिए?

जब भी आपका वज़न बढ़ने लगे और जोड़ों में दर्द रहने लगे, तो घबराने के बजाय कुछ प्राकृतिक घरेलू तरीके आजमाने चाहिए। ये तरीके सुरक्षित हैं और बहुत जल्दी आराम देते हैं:

  • हल्दी का सेवन: रोज़ रात को हल्दी वाला दूध पिएँ, यह जोड़ों की सूजन और दर्द को तेज़ी से कम करता है।
  • गुनगुने तेल की मालिश: दर्द वाली जगह पर गुनगुने तिल के तेल से हल्के हाथों से मालिश करें, जिससे नसों को आराम मिलता है।
  • पर्याप्त पानी पिएँ: शरीर को हाइड्रेटेड रखें ताकि जोड़ों की चिकनाई बनी रहे और मेटाबॉलिज़्म भी तेज़ हो सके।
  • सुबह की धूप लें: हड्डियों को मज़बूत करने के लिए पंद्रह मिनट हल्की धूप ज़रूर लें।

क्या तनाव भी इसकी वजह हो सकती है?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी बीमारी बन गया है जो महिलाओं को अंदर से कमज़ोर कर रहा है। चालीस के बाद महिलाएँ परिवार या स्वास्थ्य को लेकर ज़्यादा सोचती हैं। जब आप चिंतित रहती हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ जाता है। इस हार्मोन के बढ़ने से शरीर तेज़ी से पेट के आसपास चर्बी जमा करने लगता है। इसके अलावा, तनाव के कारण मांसपेशियाँ हमेशा सिकुड़ी और कड़क रहती हैं, जिससे जोड़ों पर खिंचाव पड़ता है और दर्द भयंकर हो जाता है। तनाव असल में आपके वज़न और दर्द दोनों का एक बहुत बड़ा कारण है।

40 के बाद दर्द और वज़न से बचने के उपाय क्या हैं?

अगर आप इन परेशानियों से बचना चाहती हैं, तो अपनी दिनचर्या में कुछ असरदार बदलाव करने होंगे। अच्छी जीवनशैली अपनाकर आप बहुत आसानी से फिट रह सकती हैं:

  • मीठा खाना कम करें: चीनी और मैदे की चीज़ें बिल्कुल बंद करें, क्योंकि ये शरीर में सूजन और चर्बी दोनों को बढ़ाती हैं।
  • हल्का व्यायाम करें: रोज़ाना तीस मिनट तेज़ वॉक या योगा करें, जिससे बिना जोड़ों पर ज़ोर पड़े वज़न कम होता है।
  • कैल्शियम युक्त आहार: खाने में दूध, दही और हरी सब्ज़ियाँ बढ़ाएँ ताकि आपकी हड्डियाँ अंदर से मज़बूत बन सकें।
  • पर्याप्त नींद लें: सात घंटे की अच्छी नींद लें ताकि थके हुए शरीर की पूरी मरम्मत हो सके।

आयुर्वेदिक और आधुनिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
नज़रिया दर्द और उसके कारण का मूल्यांकन कर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार और शरीर के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता अनुसार दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, व्यायाम और अन्य चिकित्सकीय उपचार अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है। आहार, योग, नियमित दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य सुधार को महत्वपूर्ण माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य दर्द नियंत्रण, कार्यक्षमता बनाए रखना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार। संतुलित जीवनशैली के माध्यम से लंबे समय तक समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए ?

चालीस के बाद हल्का वज़न बढ़ना या दर्द रहना आम बात है। लेकिन हमें मालूम होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत अपने नज़दीकी विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए:

  • खड़े होने में परेशानी: अगर घुटनों में इतना भयंकर दर्द हो कि आप अपने पैरों पर बिल्कुल खड़ी भी न हो पाएँ।
  • जोड़ों का लॉक होना: चलते-चलते घुटने अचानक लॉक हो जाएँ और आप उन्हें किसी भी तरह सीधा न कर पाएँ।
  • आकार का बदलना: अगर आपके घुटने या उंगलियों के जोड़ों का आकार अचानक से बिल्कुल टेढ़ा होने लगे।
  • नींद उड़ जाना: दर्द इतना ज़्यादा तेज़ हो जाए कि उसकी वजह से आप रात भर सो न पाएँ।

निष्कर्ष

चालीस की उम्र एक महिला के जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण और सुंदर हिस्सा है। यह साफ तौर पर बताता है कि आपको अब अपनी सेहत का ज़्यादा ध्यान रखना है। बढ़ता हुआ वज़न और जोड़ों का दर्द किसी एक कारण से नहीं होता। इसके पीछे गिरते हुए हॉर्मोन्स, धीमा मेटाबॉलिज़्म, तनाव और बदलती हुई जीवनशैली सबसे बड़ी वजह हैं। अपनी सेहत के प्रति हमेशा जागरूक रहें। सही समय पर पौष्टिक खानपान और नियमित हल्का व्यायाम करने से सब कुछ ठीक होगा। परेशानी तंग करे, तो डॉक्टर से सलाह लें। खुद को फिट और खुश रखना ही सबसे बड़ी दवा है।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/osteoarthritis

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12680288/

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/obesity-and-overweight

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5983083/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, यह नामुमकिन नहीं है। हालांकि मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, लेकिन अगर आप चीनी कम कर दें और रोज़ाना तीस मिनट योग या वॉक करें, तो वज़न आसानी से घट सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, जोड़ों के दर्द में गुनगुना तिल का तेल या सरसों का तेल सबसे ज़्यादा फायदा करता है। इनमें लहसुन पकाकर मालिश करने से सूजन जल्दी खत्म होती है।

बिल्कुल नहीं। कैल्शियम की गोलियों से वज़न नहीं बढ़ता है, बल्कि यह आपकी हड्डियों को मज़बूत करता है जिससे आपको दर्द कम होता है और आप बेहतर तरीके से चल-फिर पाती हैं।

नहीं, पूरी तरह से चलना छोड़ देने से घुटने और ज़्यादा जाम हो जाएँगे। आप दौड़ने के बजाय आराम से हल्की वॉक करें या साइकिल चलाएँ जिससे जोड़ों पर ज़ोर न पड़े।

हाँ, आयुर्वेद मानता है कि बहुत ज़्यादा खट्टी चीज़ें, जैसे अचार या इमली खाने से शरीर में वात दोष बढ़ता है, जिससे जोड़ों में दर्द और रूखापन काफी तेज़ हो जाता है।

जी हाँ, चालीस के बाद महिलाओं में थायरॉइड की समस्या आम हो जाती है। इसके कारण मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा हो जाता है, वज़न तेज़ी से बढ़ता है और शरीर के जोड़ों में भारी दर्द रहता है।

रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी और चुटकी भर सोंठ (सूखा अदरक) मिलाकर पीने से जोड़ों की सूजन और दर्द में जादुई तरीके से आराम मिलता है।

हाँ, हमारे जोड़ों के बीच की चिकनाई (Cartilage) में बहुत अधिक मात्रा में पानी होता है। अगर आप पानी कम पीती हैं, तो यह चिकनाई सूखने लगती है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं।

अगर आप अपना वज़न तेज़ी से कम करना चाहती हैं, तो रात का खाना सोने से कम से कम दो या तीन घंटे पहले, यानी लगभग आठ बजे तक खा लेना बहुत ज़रूरी है।

यह बहुत बड़ी गलती है। बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ पेनकिलर्स खाने से आपका वज़न बढ़ सकता है और आपकी किडनी और लिवर पर भी बहुत बुरा और गहरा असर पड़ सकता है।

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