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Weight gain joints पर कितना असर डालता है — arthritis क्यों बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 25 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 25 Apr, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

जब आप सीढ़ियां चढ़ते हैं और घुटनों से 'कटक-कटक' की आवाज़ आती है, तो क्या आप इसे सिर्फ 'बढ़ती उम्र' मानकर इग्नोर कर देते हैं? असल में, आपके जोड़ों के दर्द का सबसे बड़ा दुश्मन उम्र नहीं, बल्कि आपका बढ़ा हुआ वज़न (Weight Gain) है! आपका एक्स्ट्रा वज़न घुटनों की गद्दी (Cartilage) को रोज़ एक भारी हथौड़े की तरह कुचलता है। आर्थोपेडिक ओपीडी ऐसे लोगों से भरी है जो घुटने बदलवाने की कगार पर हैं, क्योंकि उन्होंने समय रहते वज़न कंट्रोल नहीं किया। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि आपकी चर्बी कैसे आर्थराइटिस (Arthritis) को भड़काती है, और आयुर्वेद कैसे वज़न व दर्द को जड़ से खत्म कर सकता है।

बढ़ा हुआ वज़न (Weight Gain) और जोड़ों के दर्द का असली कनेक्शन क्या है?

वज़न और जोड़ों के दर्द का कनेक्शन सिर्फ एक 'फिजिकल भार' तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक भयंकर केमिकल लोचा भी है। आइए विज्ञान की भाषा में समझते हैं कि आपकी चर्बी जोड़ों को कैसे बर्बाद करती है।

  • घुटनों पर 4 गुना प्रेशर (The Physics of Weight): जब आप चलते हैं या सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो आपके शरीर के हर 1 किलो एक्स्ट्रा वज़न का मतलब है आपके घुटनों पर 4 किलो का अतिरिक्त प्रेशर पड़ना! यानी अगर आपका वज़न 10 किलो ज़्यादा है, तो आपके बेचारे घुटने हर दिन 40 किलो एक्स्ट्रा हथौड़े की मार सह रहे हैं। इससे घुटनों के बीच की चिकनाई (Cartilage) तेज़ी से घिसने लगती है।
  • फैट सेल्स और सूजन (Inflammatory Chemicals): यह सबसे खतरनाक हिस्सा है। शरीर की चर्बी (खासकर पेट का फैट) कोई शांत चीज़ नहीं है। यह 'साइटोकिन्स' (Cytokines) नाम के ज़हरीले केमिकल्स छोड़ती है। ये केमिकल्स सीधे आपके जोड़ों में जाकर सूजन और जलन (Inflammation) पैदा करते हैं, जिससे रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस तेज़ी से भड़कता है।
  • पोश्चर (Posture) का बिगड़ना: पेट बाहर निकलने और वज़न बढ़ने से शरीर का 'सेंटर ऑफ ग्रेविटी' बदल जाता है। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी (Spine) और कूल्हों (Hips) पर एक अजीब सा दबाव पड़ता है, जिससे लोअर बैक पेन और हिप जॉइंट का दर्द शुरू हो जाता है।

वज़न बढ़ने पर आर्थराइटिस के लक्षण कैसे भड़कते हैं? (Flare-ups)

जैसे-जैसे मशीन पर ओवरलोड पड़ता है, उसके पुर्ज़े आवाज़ करने लगते हैं। ठीक वैसे ही शरीर का वज़न बढ़ने पर जोड़ों के ये भयंकर लक्षण सामने आते हैं:

  • सुबह की भयंकर जकड़न (Morning Stiffness): सुबह उठने पर घुटने, टखने और उंगलियां इतनी सख्त हो जाती हैं कि उन्हें मोड़ने में जान निकल जाती है। आधा घंटा चलने-फिरने के बाद ही थोड़ा आराम मिलता है।
  • सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में मौत आना: समतल ज़मीन पर चलना फिर भी आसान होता है, लेकिन सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटनों में ऐसा चुभने वाला दर्द होता है जैसे अंदर कोई सुई गड़ा रहा हो।
  • जोड़ों में लालिमा और भयंकर सूजन: घुटनों या टखनों के आसपास पानी भर जाना, उनका सूजकर मोटा हो जाना और छूने पर गर्म महसूस होना।
  • कट-कट की आवाज़ (Crepitus): उठते-बैठते समय घुटनों से हड्डियां रगड़ने की आवाज़ें आना, जो इस बात का चीखता हुआ अलार्म है कि बीच की गद्दी घिस चुकी है।

हम कौन सी गलतियाँ करते हैं जो वज़न और जोड़ों के दर्द को बढ़ाती हैं?

दर्द होने पर हम अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो इस समस्या को सुलझाने के बजाय और ज़्यादा उलझा देती हैं।

  • दर्द के डर से हिलना-डुलना बंद करना: घुटने में दर्द होते ही ज़्यादातर लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं। चलना-फिरना बंद करने से वज़न और तेज़ी से बढ़ता है, जो वापस जोड़ों पर और ज़्यादा प्रेशर डालता है (यह एक खतरनाक दुष्चक्र है)।
  • पेनकिलर्स (Painkillers) का अंधाधुंध इस्तेमाल: दर्द से राहत पाने के लिए रोज़ तेज़ पेनकिलर खाना। यह दर्द का एहसास तो खत्म कर देता है, लेकिन अंदर ही अंदर हड्डी घिसती रहती है और दवाइयों से लिवर-किडनी खराब होने लगते हैं।
  • सूजन बढ़ाने वाला जंक फूड खाना: दर्द के तनाव में मीठा, मैदा, और तला हुआ खाना खाना। ये चीज़ें शरीर में तुरंत एसिड और सूजन (Inflammation) को भड़काती हैं।

आयुर्वेद इस मोटापे और आर्थराइटिस के गठजोड़ को कैसे समझता है? 

आधुनिक विज्ञान जिसे 'ओबेसिटी-इंड्यूस्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस' कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले 'स्थौल्य' (मोटापा) और 'संधिगत वात' के रूप में बहुत ही गहराई से समझाया था।

  • मेदो धातु (चर्बी) का रास्ता रोकना: आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में कफ दोष और 'मेदो धातु' (Fat) ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाते हैं, तो वे शरीर के छोटे-छोटे रास्तों (Srotas) को ब्लॉक कर देते हैं।
  • वात का भयंकर असंतुलन: जब वात (हवा तत्व) को घूमने का रास्ता नहीं मिलता, तो वह ब्लॉक होकर जोड़ों में जमा होने लगता है। वात का स्वभाव रूखा (Dry) है, इसलिए यह जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई (श्लेषक कफ) को सुखा देता है।
  • आम (Toxins) का ज़हर: कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में अधपचा खाना ज़हरीले 'आम' में बदल जाता है। जब यह आम और वात आपस में मिलते हैं, तो भयंकर सूजन वाला 'आमवात' (Rheumatoid Arthritis) पैदा होता है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम आपको सिर्फ घुटने सुन्न करने वाली गोलियां या वज़न कम करने वाले क्रैश-डाइट प्लान नहीं देते। हमारा लक्ष्य आपकी चर्बी को काटना और जोड़ों की चिकनाई को दोबारा वापस लाना है।

  • अग्नि दीपन और आम पाचन: सबसे पहले आपके पेट की अग्नि को सुधारा जाता है ताकि ज़हरीला 'आम' (Toxins) पचे और शरीर में नई चर्बी बननी बंद हो।
  • वात शमन और जोड़ों का पोषण: वात को शांत करके नसों और घुटनों की हड्डियों को रसायन औषधियों से अंदरूनी ताकत दी जाती है ताकि घिसाव रुक जाए।
  • सुरक्षित वज़न नियंत्रण (Weight Management): शरीर के मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करके प्राकृतिक रूप से मेदो धातु (चर्बी) को कम किया जाता है, जिससे घुटनों से प्रेशर हट सके।

मोटापा काटने और जोड़ों का दर्द शांत करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें चर्बी को पिघलाने और हड्डियों में नई जान फूंकने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं:

  • गुग्गुल (Guggulu): यह आयुर्वेद का सबसे बड़ा हथियार है। यह एक साथ दो काम करता है— शरीर की ज़िद्दी चर्बी को काटता है और जोड़ों की भयंकर सूजन और दर्द को खींचकर बाहर निकालता है।
  • शल्लकी (Shallaki): यह एक बेहतरीन प्राकृतिक पेनकिलर है। यह उन ज़हरीले केमिकल्स को रोकती है जो घुटनों की गद्दी (Cartilage) को नष्ट कर रहे होते हैं।
  • अश्वगंधा: लंबे समय तक दर्द सहने से शरीर और मांसपेशियां कमज़ोर पड़ जाती हैं। अश्वगंधा हड्डियों और मसल्स को फौलाद जैसी ताकत देता है।
  • निर्गुंडी और लहसुन: वात के दर्द और शरीर की जकड़न को खोलने के लिए ये सबसे असरदार औषधियाँ हैं।

आयुर्वेदिक थेरेपी (पंचकर्म) वज़न और दर्द को एक साथ कैसे ठीक करती है?

जब दर्द के मारे चला न जाए और वज़न कम करना नामुमकिन लगने लगे, तो पंचकर्म थेरेपी शरीर की ओवरहॉलिंग (डिटॉक्स) करती है।

  • उद्वर्तन (Udvartana): यह चर्बी काटने की सबसे जादुई थेरेपी है। इसमें जड़ी-बूटियों के रूखे पाउडर से पूरे शरीर की उल्टी दिशा में ज़ोरदार मालिश की जाती है। यह सीधे स्किन के नीचे जमी चर्बी को पिघलाती है और कफ को शांत करती है।
  • जानु बस्ती (Janu Basti): घुटनों के दर्द के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। घुटनों पर उड़द की दाल का रिंग बनाकर उसमें औषधीय गर्म तेल भरा जाता है। यह तेल हड्डियों के अंदर तक जाकर सूखी हुई गद्दी (Cartilage) को दोबारा चिकनाई (Greasing) देता है।
  • पत्र पोटली स्वेद: दर्द वाली जगह पर गर्म जड़ी-बूटियों की पोटली से सिंकाई की जाती है, जो तुरंत नसों को खोलती है और सूजन को चूस लेती है।

जोड़ों के दर्द और मोटापे को कम करने वाला डाइट प्लान

आप क्या खाते हैं, यही तय करता है कि शरीर में चर्बी बढ़ेगी या चिकनाई।

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित आहार): पुराना लाल चावल, मूंग की दाल, लौकी, तोरई, परवल जैसी हल्की सब्ज़ियाँ। खाने में लहसुन, अदरक, हल्दी और जीरे का भरपूर इस्तेमाल करें जो दर्द को काटते हैं।
  • क्या बिल्कुल न खाएं (वर्जित): ठंडा पानी, आइसक्रीम, मैदा, डीप-फ्राइड जंक फूड, चीनी, राजमा, छोले और उड़द की दाल। ये चीज़ें सीधा वज़न बढ़ाती हैं और वात भड़काकर घुटने जाम कर देती हैं।
  • सुरक्षित व्यायाम: घुटनों पर ज़ोर डालने वाली रनिंग या जंपिंग के बजाय, स्विमिंग (तैरना), स्थिर साइकिल (Static Cycling) और कुर्सी पर बैठकर किए जाने वाले योग (Chair Yoga) करें।
  • हाइड्रेशन और रूटीन: दिन भर सिर्फ हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह जमे हुए फैट को पिघलाने और जोड़ों से यूरिक एसिड/टॉक्सिन्स को फ्लश आउट करने का सबसे सस्ता और बेहतरीन तरीका है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप पेनकिलर्स खाकर अपनी किडनी खराब होने के डर में जी रहे होते हैं, तब हम बीमारी की जड़ तक पहुँचने के लिए गहराई से जाँच करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि वात और कफ का स्तर कितना बिगड़ चुका है।
  • जॉइंट ऑडिट: आपके घुटनों और जोड़ों की रेंज ऑफ मोशन (रगड़ और सूजन) को चेक किया जाता है।
  • मेटाबॉलिज़्म और लाइफस्टाइल ऑडिट: आपका वज़न क्यों बढ़ रहा है (स्ट्रेस, थायरॉइड या खराब डाइट)? असली ट्रिगर को गहराई से समझा जाता है।
  • मेडिकल हिस्ट्री चेक: आपके पुराने एक्स-रे या यूरिक एसिड की रिपोर्ट्स को देखकर नुकसान का अंदाज़ा लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

सालों की जमा चर्बी और घिसी हुई हड्डियों को वापस रीसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है। यह कोई एक रात का जादू नहीं है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपको शरीर में हल्कापन लगेगा। सुबह उठने पर होने वाली भयंकर जकड़न में काफी राहत मिलेगी और दर्द का तीखापन कम होने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: जठराग्नि सुधरने से वज़न कम होना शुरू हो जाएगा (Healthy Weight Loss)। घुटनों से प्रेशर हटने के कारण दर्द 50-60% तक कम हो जाएगा और आप बेहतर तरीके से चल-फिर सकेंगे।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपकी चर्बी कंट्रोल में आ जाएगी और वात शांत हो जाएगा। जोड़ों के अंदरूनी कार्टिलेज को पोषण मिलेगा, जिससे आप बिना पेनकिलर्स के एक एक्टिव और दर्द-मुक्त ज़िंदगी जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

कई लोग सोचते हैं कि ऐसा कस्टमाइज्ड आयुर्वेद बहुत महंगा होगा। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है । जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें ।

  • जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है । (यह एक अनुमानित आधार है और अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।)
  • अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए विशेष पैकेज प्रोटोकॉल भी हैं, जिन्हें शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ।
  • इन पैकेज में दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और ध्यान मार्गदर्शन, आहार योजना और थेरेपी शामिल हैं । इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

मरीज़ों के अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाता था। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।
बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।जीवा (Jiva) की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा (Jiva Ayurveda) में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
इलाज का मुख्य लक्ष्य NSAIDs/स्टेरॉयड से दर्द कंट्रोल, सर्जरी पर फोकस वज़न घटाकर प्रेशर कम करना और कार्टिलेज को पोषण
नज़रिया घुटना और वज़न अलग समस्याएँ शरीर को एक संपूर्ण प्रणाली मानना
उपचार तरीका दवाएँ, इंजेक्शन, सर्जरी डाइट, लाइफस्टाइल और जड़ी-बूटियाँ
फोकस दर्द को दबाना कफ (वज़न) और वात (दर्द) संतुलन
लंबा असर अस्थायी राहत दीर्घकालिक सुधार और प्राकृतिक हीलिंग

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? (Red Flags)

हर दर्द को आम आर्थराइटिस नहीं मानना चाहिए। अगर ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • घुटनों या जोड़ों की बनावट बिल्कुल टेढ़ी हो जाए (Deformity)।
  • जोड़ों में भयंकर सूजन के साथ वह छूने पर आग की तरह गर्म लगे और लाल हो जाए (यह गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है)।
  • दर्द के कारण आप उस पैर पर बिल्कुल भी वज़न न डाल पा रहे हों।
  • दर्द के साथ-साथ अचानक तेज़ बुखार रहने लगे।

निष्कर्ष

वज़न का बढ़ना और आर्थराइटिस कोई मामूली थकान नहीं, बल्कि आपकी हड्डियों पर गिरते भारी दबाव का चीखता हुआ अलार्म है। बढ़ती चर्बी को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ पेनकिलर्स खाना घुटनों को हमेशा के लिए बर्बाद करना है। जब तक शरीर से एक्स्ट्रा बोझा (चर्बी) नहीं हटेगा, घुटनों की चीख कभी नहीं रुकेगी। आयुर्वेद आपको एक स्थायी और प्राकृतिक समाधान देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, गुग्गुल जैसी चमत्कारी जड़ी-बूटियों, पंचकर्म की उद्वर्तन थेरेपी और सही डाइट को अपनाकर आप चर्बी पिघला सकते हैं और जोड़ों को फौलाद सा मज़बूत बना सकते हैं। दर्द को हावी न होने दें, जीवा आयुर्वेद के साथ जड़ से इलाज पाएं।

FAQs

बिल्कुल! विज्ञान के अनुसार, आपके शरीर का 1 किलो वज़न बढ़ने पर घुटनों पर 4 किलो एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है। अगर आपका वज़न सिर्फ 3 किलो भी बढ़ा है, तो आपके घुटने रोज़ाना 12 किलो एक्स्ट्रा हथौड़े की मार झेल रहे हैं, जिससे दर्द शुरू होना तय है।

हाँ, और यह सबसे खतरनाक है। पेट का फैट सिर्फ एक्स्ट्रा मांस नहीं है, यह एक एक्टिव ग्लैंड की तरह काम करता है। यह लगातार शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा करने वाले ज़हरीले केमिकल्स छोड़ता है, जो खून के ज़रिए जोड़ों तक पहुँचकर कार्टिलेज को अंदर से नष्ट कर देते हैं।

घुटनों में दर्द होने पर दौड़ना, जंपिंग या भारी वेट लिफ्टिंग बिल्कुल न करें। वज़न घटाने के लिए सबसे सुरक्षित एक्सरसाइज़ स्विमिंग (तैरना), पानी में चलना, या स्टेशनरी साइकिल (खड़ी हुई साइकिल) चलाना है। इससे घुटनों पर प्रेशर नहीं पड़ता और कैलोरी भी बर्न होती है।

जी हाँ! आयुर्वेद बीमारी की जड़ पर काम करता है। गुग्गुल जैसी आयुर्वेदिक औषधियां और उद्वर्तन (हर्बल पाउडर मसाज) जैसी पंचकर्म थेरेपी शरीर से कफ (चर्बी) को काटती हैं और वात (दर्द) को शांत करती हैं, जिससे दोनों समस्याएं एक साथ ठीक होती हैं।

रात को सोते समय शरीर में मूवमेंट नहीं होती, जिससे वात और आम (टॉक्सिन्स) जोड़ों में इकट्ठा हो जाते हैं। बढ़े हुए वज़न के कारण जो सूजन होती है, उसका फ्लूइड भी वहीं जमा हो जाता है, जिससे सुबह उठते ही भयंकर जकड़न और दर्द महसूस होता है।

अगर हड्डी पूरी तरह से एक-दूसरे से चिपक नहीं गई है, तो आयुर्वेद की जानु बस्ती और रसायन औषधियों (जैसे शल्लकी और अश्वगंधा) से कार्टिलेज के घिसाव को रोका जा सकता है और उसे पोषण देकर काफी हद तक रिपेयर किया जा सकता है।

एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी, ज़रा सी काली मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक उबाल लें। इसे रोज़ सुबह पिएं। हल्दी और अदरक दुनिया के सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) मसाले हैं, जो मेटाबॉलिज़्म भी तेज़ करते हैं।

वज़न कम करने से आर्थराइटिस की बीमारी रिवर्स नहीं होती, लेकिन इसका बढ़ना बिल्कुल रुक जाता है। सिर्फ 5 से 10% वज़न कम करने से जोड़ों का दर्द 50% तक कम हो जाता है और आपको दर्द की गोलियां खाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

अगर जोड़ों में लालिमा है और छूने पर बहुत गर्म लग रहा है (एक्यूट सूजन), तो बर्फ की ठंडी सिंकाई करें। लेकिन अगर पुराना दर्द है, जकड़न है और कटक-कटक की आवाज़ आती है (ऑस्टियोआर्थराइटिस), तो गर्म पानी की थैली या महानारायण तेल की मालिश के बाद गर्म सिंकाई करें।

आधुनिक चिकित्सा में दर्द और घिसाव का अंतिम उपाय सर्जरी ही माना जाता है। लेकिन अगर आप सर्जरी के बाद भी अपना वज़न कम नहीं करते हैं, तो नए आर्टिफिशियल घुटने भी जल्दी खराब हो जाएंगे। इसलिए आयुर्वेद वज़न घटाकर और प्राकृतिक ग्रीसिंग देकर असली घुटनों को बचाने पर ज़ोर देता है।

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