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Temperature change से शरीर का balance क्यों बिगड़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मौसम बदलते ही अक्सर हमारा शरीर अजीब सा बर्ताव करने लगता है। कभी अचानक से थकान होने लगती है तो कभी बिना वजह सर्दी जुकाम जकड़ लेता है। हम सोचते हैं कि बस थोड़ी सी हवा लग गई है या पानी बदल गया है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब मौसम में अचानक से उतार चढ़ाव होता है तो हमारे शरीर का पूरा सिस्टम क्यों डगमगा जाता है? असल में हमारे शरीर को एक तय तापमान में रहने की आदत होती है। जब बाहर का मौसम अचानक से गर्म या ठंडा होता है तो हमारे शरीर के अंदर के सिस्टम को उसे संभालने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह सिर्फ मौसम का बदलना नहीं है बल्कि आपके शरीर का उस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने का संघर्ष है।

मौसम बदलने पर शरीर क्यों टूटने लगता है

हमारे शरीर का एक अंदरूनी तापमान होता है जिसे हमारा दिमाग कंट्रोल करता है। जब बाहर बहुत ज़्यादा ठंड या गर्मी होती है तो दिमाग शरीर को एक खास सिग्नल भेजता है ताकि अंदर का तापमान सही बना रहे। इस कोशिश में शरीर की बहुत सारी ऊर्जा खर्च हो जाती है। जब शरीर का सारा ध्यान तापमान को सही रखने में लग जाता है तो हमारी रोगों से लड़ने की ताकत यानी इम्युनिटी थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है। इसी कमज़ोर पल का फायदा उठाकर बाहर के वायरस और बैक्टीरिया हम पर हमला कर देते हैं और हम बीमार पड़ जाते हैं।

क्या हर बार बीमारी की वजह सिर्फ मौसम होता है

जी नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार मौसम तो बस एक बहाना होता है असली वजह हमारी अपनी कमज़ोर इम्युनिटी होती है। अगर आप सही से खा पी नहीं रहे हैं या बहुत ज़्यादा तनाव में हैं तो शरीर पहले से ही कमज़ोर रहता है। ऐसे में ज़रा सा भी मौसम बदलने पर शरीर उसे बर्दाश्त नहीं कर पाता। कई लोग ठंड आते ही पानी पीना कम कर देते हैं या गर्मी आते ही अचानक बहुत ज़्यादा ठंडा पानी पीने लगते हैं। यह अचानक किए गए बदलाव शरीर को सीधा नुकसान पहुँचाते हैं।

तापमान बदलने पर शरीर के अंदर क्या क्या होता है

जब मौसम बदलता है तो हमारे शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव एक साथ होते हैं:

  • ऊर्जा की कमी: शरीर को तापमान सेट करने में इतनी मेहनत करनी पड़ती है कि हमें हर वक्त थकान और सुस्ती महसूस होती है।
  • खून की नसों का सिकुड़ना: ठंड के मौसम में शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं जिससे ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ सकता है और दिल पर ज़ोर पड़ता है।
  • इम्युनिटी का कमज़ोर होना: मौसम बदलने के दौरान हवा में वायरस बहुत तेज़ी से फैलते हैं और शरीर की सुरक्षा परत कमज़ोर होने से इन्फेक्शन जल्दी होता है।
  • एलर्जी का बढ़ना: हवा में नमी और तापमान के बदलाव से धूल और पराग कण ज़्यादा फैलते हैं जिससे नाक बहना और छींकें आना शुरू हो जाता है।

क्या बार बार बीमार पड़ना किसी बड़ी परेशानी का इशारा है

अगर आपको हर बार मौसम बदलते ही भयंकर सर्दी जुकाम या बुखार हो जाता है तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • कमज़ोर इम्युनिटी: इसका मतलब है कि आपके शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत बहुत कम हो चुकी है।
  • साइनस या अस्थमा: अगर बार बार साँस लेने में दिक्कत या सिर में भारीपन होता है तो यह साइनस या अस्थमा की शुरुआत हो सकती है।
  • विटामिन्स की भारी कमी: शरीर में विटामिन डी और सी की कमी होने पर भी मौसम का असर शरीर पर बहुत जल्दी होता है।

आयुर्वेद मौसम बदलने के बारे में क्या कहता है

आयुर्वेद के अनुसार जब एक मौसम जाता है और दूसरा आता है तो उस बीच के समय को ऋतु संधि कहा जाता है। यह वह समय होता है जब शरीर में वात, पित्त और कफ तीनों दोष अपना संतुलन बदल रहे होते हैं। जैसे सर्दियां जाने पर शरीर में जमा हुआ कफ पिघलने लगता है जिससे सर्दी-जुकाम होता है। आयुर्वेद मानता है कि अगर इस दौरान खानपान में बदलाव न किया जाए तो शरीर का संतुलन बिगड़ना तय है। इसलिए मौसम के हिसाब से अपनी डाइट बदलना सबसे ज़रूरी है।

मौसम की मार से बचाने वाली अचूक जड़ी बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी बूटियाँ दी हैं जो बदलते मौसम में शरीर को ताकत देती हैं:

  • गिलोय: यह हर तरह के बुखार और इन्फेक्शन को दूर रखने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है।
  • तुलसी: यह सर्दी-खाँसी को दूर भगाने और इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है।
  • अदरक: यह शरीर को अंदर से गर्माहट देता है और कफ को खत्म करके गले को आराम पहुँचाता है।
  • हल्दी: इसमें मौजूद गुण शरीर की सूजन कम करते हैं और हर तरह के वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं।

क्या स्ट्रेस लेने से भी मौसम का असर जल्दी होता है

बिल्कुल सच है। जब आप तनाव में होते हैं तो आपका शरीर पहले से ही थका हुआ होता है। ज़्यादा स्ट्रेस लेने से शरीर में सूजन बढ़ती है और बीमारियों से लड़ने वाले अच्छे सेल्स कम होने लगते हैं। ऐसे में जब मौसम बदलता है तो आपके शरीर के पास उससे लड़ने की ताकत ही नहीं बचती। इसलिए जो लोग ज़्यादा चिंता करते हैं वह मौसम बदलते ही सबसे पहले बीमार पड़ते हैं।

मौसम बदलते वक्त हम खाने पीने में क्या गलतियां करते हैं

हम जाने अनजाने में कुछ ऐसी चीज़ें खा पी लेते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देती हैं:

  • एकदम से ठंडा पानी पीना: गर्मी आते ही फ्रिज का चिल्ड पानी पीने से गला तुरंत खराब होता है और खाँसी शुरू हो जाती है।
  • भारी और तला हुआ खाना: जब मौसम बदलता है तो हमारा पाचन तंत्र कमज़ोर होता है ऐसे में भारी खाना खाने से पेट खराब हो सकता है।
  • मौसमी फल न खाना: हर मौसम के अपने फल होते हैं जो शरीर को उस मौसम के हिसाब से ढालते हैं इन्हें न खाने से शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिलता।
  • बासी खाना खाना: बदलते मौसम में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं इसलिए बासी खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा रहता है।
  • पानी कम पीना: हल्की ठंड या बारिश के मौसम में हम पानी पीना कम कर देते हैं जिससे शरीर में रूखापन आता है और टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते।

किन दूसरी बीमारियों के कारण मौसम का असर ज़्यादा होता है

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं फिर भी कुछ पुरानी बीमारियों की वजह से मौसम का बदलाव आपको ज़्यादा परेशान करता है:

  • शुगर की बीमारी: जिन लोगों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता उनकी इम्युनिटी कमज़ोर होती है और वह जल्दी बीमार पड़ते हैं।
  • थायराइड: इसके असंतुलन से शरीर अपना तापमान सही से सेट नहीं कर पाता जिससे कभी बहुत ठंड तो कभी बहुत गर्मी लगती है।
  • खून की कमी: शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने से थकान ज़्यादा होती है और मौसम की मार जल्दी असर करती है।

शरीर को मौसम के हिसाब से ढालने के आसान तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान आदतें अपनाकर इस परेशानी से बच सकते हैं:

  • सुबह उठकर हल्का गुनगुना पानी पिएँ इससे शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और गला भी साफ रहता है।
  • मौसम के हिसाब से कपड़े पहनें। हल्की ठंड में भी लापरवाही न करें और शरीर को ढक कर रखें।
  • रोज़ कम से कम सात से आठ घंटे की अच्छी नींद लें क्योंकि सोते समय ही शरीर खुद को अंदर से रिपेयर करता है।
  • रोज़ाना कम से कम आधा घंटा धूप में बैठें इससे शरीर को विटामिन डी मिलता है जो इम्युनिटी के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आयुर्वेद इस परेशानी को जड़ से कैसे खत्म करता है

आयुर्वेद सिर्फ जुकाम या बुखार को नहीं दबाता बल्कि शरीर की ताकत बढ़ाता है। इसमें सबसे पहले यह देखा जाता है कि किस मौसम में कौन सा दोष बढ़ रहा है। फिर उसी के हिसाब से खानपान में बदलाव किया जाता है। शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय और जड़ी बूटियाँ दी जाती हैं ताकि आपका शरीर अंदर से इतना मज़बूत हो जाए कि मौसम बदलने का उस पर कोई असर ही न हो।

बदलते मौसम की बीमारियों के लिए डॉक्टर के पास कब जाएँ

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • बुखार तीन दिन से ज़्यादा तक लगातार बना रहे और उतरने का नाम न ले।
  • जब साँस लेने में दिक्कत होने लगे या सीने में बहुत ज़्यादा भारीपन महसूस हो।
  • शरीर में इतनी कमज़ोरी आ जाए कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल लगने लगे।
  • खाँसी के साथ खून आने लगे या लगातार उल्टियां हो रही हों।

एलोपैथी और आयुर्वेद के इलाज में क्या फर्क है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य संक्रमण या बीमारी के कारण की पहचान कर बुखार, दर्द और अन्य लक्षणों का उपचार करना। शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान।
उपचार का तरीका आवश्यकता अनुसार एंटीबायोटिक्स (केवल बैक्टीरियल संक्रमण में), दर्द निवारक दवाइयाँ और अन्य चिकित्सकीय उपचार। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, पंचकर्म और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और नियमित पालन पर आधारित होता है।
सुरक्षा दवाइयों का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करने पर लाभ और संभावित दुष्प्रभावों का संतुलन रखा जाता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए, क्योंकि इनके भी दुष्प्रभाव या दवा-परस्पर क्रियाएँ हो सकती हैं।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग के कारण का उपचार, रोकथाम और आवश्यक जीवनशैली सुधार पर जोर। संतुलित दिनचर्या, उचित आहार और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर विशेष ध्यान।

निष्कर्ष:

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर एक बहुत ही समझदार मशीन है। मौसम का बदलना कोई बीमारी नहीं है बस प्रकृति का एक नियम है। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के शरीर की आवाज़ को सुनना सीखें। अपने खानपान को मौसम के हिसाब से बदलें रोज़ थोड़ा समय योग और कसरत को दें और बेवजह का तनाव न पालें। जब आपका शरीर अंदर से मज़बूत रहेगा तो चाहे कितनी भी कड़कड़ाती ठंड आए या चिलचिलाती गर्मी आपका संतुलन कभी नहीं बिगड़ेगा।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/climate-change-and-health 

https://www.who.int/health-topics/climate-change

https://www.climate.gov/news-features/understanding-climate/climate-change-global-temperature

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/climate-change-heat-and-health

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

शरीर को नए तापमान की आदत डालने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है जिससे हमारी इम्युनिटी कुछ समय के लिए कमज़ोर पड़ जाती है और हम जल्दी बीमार हो जाते हैं।

 बिल्कुल। एसी की ठंडी हवा से अचानक तेज़ धूप में जाने पर शरीर को तापमान बदलने का समय नहीं मिल पाता जिससे सर्दी जुकाम या सिरदर्द हो जाता है।

 हमारा गला बाहरी हवा के सबसे पहले संपर्क में आता है। हवा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया सबसे पहले गले पर ही हमला करते हैं इसलिए खराश शुरू हो जाती है।

 ठंड की वजह से खून की नसें सिकुड़ जाती हैं और शरीर के जोड़ों तक खून का बहाव थोड़ा कम हो जाता है इसी वजह से दर्द महसूस होता है।

 हाँ क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी पूरी तरह से विकसित नहीं होती है इसलिए वह मौसम के बदलाव को जल्दी नहीं सह पाते और बीमार हो जाते हैं।

 ठंडी तासीर वाली चीज़ें जैसे दही और फ्रिज का पानी कम कर देना चाहिए और शरीर को अंदर से गर्म रखने वाली चीज़ें जैसे सूप और अदरक लेना शुरू कर देना चाहिए।

 हाँ हल्दी में सूजन कम करने वाले और वायरस से लड़ने वाले गुण होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बहुत मज़बूत बनाते हैं।

 क्योंकि आपका शरीर बाहर के बदलते तापमान के हिसाब से अंदर के तापमान को सेट करने में अपनी बहुत सारी ऊर्जा खर्च कर देता है।

 पानी शरीर से गंदे तत्वों को बाहर निकालता है और गले को सूखने नहीं देता जिससे सर्दी जुकाम में काफी हद तक आराम मिलता है।

गर्म पानी से नहाना शरीर की थकान मिटाता है और नसों को आराम देता है लेकिन इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अच्छा खानपान और अच्छी नींद सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

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