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ये सलाह Diabetes है तो चावल बिल्कुल बंद करो सही नहीं है, जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan

डायबिटीज (मधुमेह) का नाम सुनते ही सबसे पहला काम जो हम करते हैं, वह है अपनी थाली से चावल को हमेशा के लिए बाहर निकाल देना। डॉक्टर, पड़ोसी, और इंटरनेट ,हर कोई यही सलाह देता है कि चावल खाना मतलब साक्षात ज़हर खाना है। इस डर से लोग अपनी पसंदीदा चीज़ खाना छोड़ देते हैं और केवल सूखी रोटियों या उबली हुई सब्ज़ियों पर ज़िंदा रहने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि चावल पूरी तरह छोड़ने के बाद भी कई लोगों की शुगर कंट्रोल नहीं होती? उलटा उन्हें भयंकर कमज़ोरी, चिड़चिड़ापन और पैरों में दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है।

हमेशा याद रखें, किसी भी प्राकृतिक अनाज को पूरी तरह से छोड़ देना 21वीं सदी का सबसे बड़ा डाइट-भ्रम है। क्या आप जानते हैं कि चावल आपका दुश्मन नहीं है, बल्कि उसे पकाने का गलत तरीका, उसकी मात्रा और नया पॉलिश किया हुआ सफेद चावल असल अपराधी है? बिना सोचे-समझे चावल बंद कर देने से आपका 'कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज़्म' (Carbohydrate Metabolism) बिगड़ सकता है और आपका नर्वस सिस्टम कमज़ोर पड़ सकता है।

चावल और ब्लड शुगर का विज्ञान: क्या यह सच में ज़हर है?

जब हम चावल खाते हैं, तो शरीर उसे ग्लूकोज़ (Sugar) में तोड़ देता है। लेकिन समस्या चावल में नहीं, उसके 'ग्लाइसेमिक इंडेक्स' (Glycemic Index) में है।

  • पॉलिश किया हुआ सफेद चावल: जब चावल को मशीनों में रगड़कर उसका फाइबर और चोकर (Bran) निकाल दिया जाता है, तो वह शुद्ध स्टार्च बन जाता है। इसे खाते ही यह खून में तुरंत शुगर छोड़ता है (High GI), जिससे ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ता है।
  • गैस्ट्रिक एम्प्टीइंग और इंसुलिन स्पाइक: बिना सब्ज़ी या दाल के सिर्फ सादा सफेद चावल खाने से शरीर का पैंक्रियाज़ (Pancreas) अचानक बहुत सारा इंसुलिन बनाने के लिए मज़बूर हो जाता है। समय के साथ पैंक्रियाज़ थक जाता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) पैदा होता है।

इस समस्या के मुख्य प्रकार: आपका शरीर किस श्रेणी में है?

डायबिटीज और डाइट के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को मुख्य रूप से 3 प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  • कफज प्रमेह (Obese Diabetics): इस श्रेणी में व्यक्ति का वज़न ज़्यादा होता है, सुस्ती रहती है और मेटाबॉलिज़्म बेहद धीमा होता है। ऐसे लोगों को सफेद और नया चावल तुरंत नुकसान पहुँचाता है क्योंकि यह शरीर में भारीपन और 'क्लेद' (चिपचिपापन) बढ़ाता है।
  • पित्तज प्रमेह (Inflammatory Diabetics): इन लोगों को भयंकर प्यास लगती है, हाथ-पैरों में जलन होती है और बार-बार पसीना आता है। इनके शरीर में गर्मी ज़्यादा होती है। इन्हें चावल पूरी तरह बंद करने से एसिडिटी और कमज़ोरी होने लगती है।
  • वातज प्रमेह (Lean & Weak Diabetics): यह सबसे खतरनाक स्थिति है जहाँ व्यक्ति का वज़न तेज़ी से गिरता है, नसें सूखने लगती हैं (Neuropathy) और भयंकर दर्द रहता है। अगर ये लोग चावल या कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह बंद कर दें, तो इनका वात और भड़क जाता है और शरीर की 'धातुएं' क्षीण हो जाती हैं।

अगर इसे 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर किया (या बिना सोचे कार्बोहाइड्रेट बंद किया), तो क्या होंगी जटिलताएं?

डायबिटीज में अगर आप सिर्फ इंटरनेट की आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर चावल और कार्ब्स एकदम छोड़ देते हैं, तो शरीर अंदर से खोखला होने लगता है:

  • डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy): शरीर को सही मात्रा में ऊर्जा न मिलने से और वात बढ़ने से पैरों की नसें कमज़ोर हो जाती हैं। पैरों में चींटियाँ चलने जैसा अहसास (Tingling) और सुन्नपन शुरू हो जाता है।
  • हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia): कार्ब्स एकदम छोड़ने और दवाओं के सेवन से कई बार शुगर अचानक बहुत नीचे गिर जाती है। इससे चक्कर आना, पसीना आना और बेहोशी का खतरा रहता है, जो हाई शुगर से भी ज़्यादा जानलेवा है।
  • मसल लॉस (Muscle Wasting): जब शरीर को अनाज से ग्लूकोज़ नहीं मिलता, तो वह ऊर्जा के लिए आपकी मांसपेशियों (Muscles) को तोड़ना शुरू कर देता है। इंसान बहुत जल्दी बूढ़ा और कमज़ोर दिखने लगता है।
  • क्रोनिक डिप्रेशन और ईटिंग डिसऑर्डर: पसंदीदा भोजन को पूरी तरह से त्याग देने से दिमाग में 'फील-गुड' हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है या एक दिन अचानक बहुत सारा मीठा खा लेता है (Binge eating)।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है? (प्रमेह और अग्नि का खेल)

आधुनिक विज्ञान जिसे डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस कहता है, आयुर्वेद में उसे 'प्रमेह' और विशेष रूप से 'मधुमेह' के अंतर्गत रखा गया है।

  • नए बनाम पुराने चावल का विज्ञान: आयुर्वेद महर्षियों ने स्पष्ट लिखा है कि 'नवधान्य' (नया अनाज) शरीर में क्लेद (Toxins) बढ़ाता है। लेकिन 'पुराण शाली' (एक साल या उससे अधिक पुराना चावल) पचने में हल्का होता है और कफ दोष को नहीं बढ़ाता। पुराना चावल डायबिटीज के रोगियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
  • जठराग्नि (Digestive Fire) का कमज़ोर होना: डायबिटीज केवल शुगर की बीमारी नहीं है; यह 'अग्नि' (पाचन तंत्र) की बीमारी है। जब आपका पाचन कमज़ोर होता है, तो भोजन पचने के बजाय सड़ता है और 'आम' (टॉक्सिन्स) बनाता है, जो इंसुलिन के रास्तों को ब्लॉक कर देता है।
  • भात बनाने की विधि: आयुर्वेद के अनुसार, चावल को हमेशा खुले बर्तन में पकाना चाहिए और उसका मांड (Starch/Rice water) निकाल देना चाहिए। मांड निकाला हुआ चावल हल्का (लघु) और सुपाच्य हो जाता है, जो शुगर को तेज़ी से नहीं बढ़ाता। कुकर में सीटी लगाकर पकाया गया चावल भारी और शुगर बढ़ाने वाला होता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको भूखा मारने या आपका मनपसंद खाना पूरी तरह छुड़ाने में विश्वास नहीं करते। हम आपकी 'अग्नि' को ठीक करते हैं और आपके शरीर को अनाज पचाने के लायक बनाते हैं।

  • अग्नि दीपन (Metabolic Correction): सबसे पहले आयुर्वेदिक औषधियों से आपके शरीर की 'जठराग्नि' (पाचन) को मज़बूत किया जाता है ताकि जो भी आप खाएं, वह ऊर्जा में बदले, शुगर में नहीं।
  • दोषों का शमन: शरीर में बढ़े हुए कफ और वात को संतुलित करने पर काम किया जाता है, जिससे नसों की कमज़ोरी (Neuropathy) खत्म होती है और पैंक्रियाज़ को ताकत मिलती है।
  • सही आहार का मार्गदर्शन: चावल कैसे खाना है, किसके साथ खाना है (जैसे घी और सब्ज़ियों के साथ), इसका पूरा विज्ञान आपको समझाया जाता है।

डायबिटीज को कंट्रोल करने और नसों को बचाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

डायबिटीज के रोगियों के लिए भोजन में सही फाइबर और ग्लाइसेमिक लोड का संतुलन होना चाहिए।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - लो GI और सुपाच्य) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - हाई GI और कफ वर्धक)
अनाज (Grains) 1 साल पुराना चावल (शाली या साठी चावल), ब्राउन राइस, जौ (Barley), ज्वार, रागी। नया सफेद पॉलिश किया चावल, मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद ओट्स।
सुपरफूड्स और वसा (Fats) गाय का शुद्ध घी (चावल में 1 चम्मच घी डालने से उसका GI कम हो जाता है), अलसी के बीज, मेथी दाना। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बाज़ार का डीप-फ्राइड खाना।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) करेला, लौकी, परवल, सहजन (Drumsticks), पालक, मेथी, ब्रोकली। अत्यधिक आलू, शकरकंद, अरबी (विशेषकर बिना छिलके के)।
पेय पदार्थ (Beverages) जामुन की गुठली का पानी, विजयसार की लकड़ी का पानी, ताज़ा छाछ (मट्ठा)। पैकेटबंद फलों के जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, बहुत ज़्यादा मीठी चाय।
फल (Fruits) जामुन, आंवला, पपीता, सेब, अमरूद (सीमित मात्रा में)। पके हुए केले, चीकू, आम, और अंगूर का अत्यधिक सेवन।
मसाले (Spices) दालचीनी, हल्दी, मेथी दाना, काली मिर्च, धनिया। अत्यधिक लाल मिर्च, बाज़ार के तेज़ और प्रिजर्वेटिव्स वाले मसाले।

ब्लड शुगर कंट्रोल करने और पैंक्रियाज़ को ताकत देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • मधुमेहारी चूर्ण (Madhumehari Churna): यह जड़ी-बूटियों (जैसे जामुन, करेला, गिलोय) का एक शक्तिशाली मिश्रण है जो इंसुलिन के स्राव को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
  • शिलाजीत (Shilajit): डायबिटीज के कारण होने वाली कमज़ोरी, बार-बार पेशाब आने की समस्या और शारीरिक थकावट को मिटाने के लिए यह सबसे बेहतरीन रसायन है।
  • विजयसार (Vijaysar): इसकी लकड़ी से बना अर्क या बर्तन में रखा पानी पीने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है और पैंक्रियाज़ की बीटा कोशिकाएं (Beta cells) रिपेयर होती हैं।
  • आमलकी रसायन (Amalaki Rasayana): यह विटामिन सी का पावरहाउस है जो डायबिटीज के कारण आँखों (Diabetic Retinopathy) और नसों को होने वाले नुकसान से बचाता है।

पंचकर्म थेरेपी: पैंक्रियाज़ की 'हार्ड रिसेट' (Deep Detox)

जब शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बहुत ज़्यादा बढ़ जाए और दवाइयाँ असर करना बंद कर दें, तो पंचकर्म इस ज़हर को शरीर से निकालता है।

  • उद्वर्तन (Udvartana): यह एक विशेष प्रकार की सूखी पाउडर मसाज है (जड़ी-बूटियों के चूर्ण से)। यह शरीर की चर्बी (कफ और मेद) को पिघलाती है, ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है।
  • बस्ती (Basti): यह डायबिटीज में होने वाले नसों के दर्द (वात वृद्धि) और कब्ज़ के लिए रामबाण है। औषधीय तेलों और काढ़े का एनीमा देकर वात को जड़ से शांत किया जाता है।
  • विरेचन (Virechana): औषधीय रूप से पेट साफ करने की यह प्रक्रिया लिवर को डिटॉक्स करती है और शरीर से अतिरिक्त पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है, जिससे मेटाबॉलिज़्म एकदम नया जैसा हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम आपको केवल शुगर कम करने की गोली देकर घर नहीं भेजते; हम आपकी बीमारी के 'मूल कारण' को चेक करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर कफ, पित्त या वात में से कौन सा दोष प्रमेह (डायबिटीज) का कारण बन रहा है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: आपके वज़न, त्वचा, और नसों की कमज़ोरी (जैसे पैरों में झुनझुनी) की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • लाइफस्टाइल और डाइट ऑडिट: आप कौन सा चावल खाते हैं? कैसे पकाते हैं? आपके सोने और उठने का समय क्या है? इन आदतों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको आपके मनपसंद खाने से पूरी तरह दूर नहीं करते, बल्कि आपके शरीर को उसे पचाने के काबिल बनाते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर नसों की कमज़ोरी या व्यस्तता के कारण घर से निकलना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों के अनुसार खास औषधियाँ, पंचकर्म और आपकी पसंदीदा चीज़ों (जैसे चावल) को खाने का सही तरीका बताने वाला एक कस्टमाइज़्ड डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

  • शुरुआती 2-3 हफ्ते: आपकी पाचन शक्ति सुधरेगी। शरीर की थकावट, पैरों का दर्द और भारीपन में कमी आनी शुरू होगी। शुगर के स्पाइक्स कम होने लगेंगे।
  • 1 से 2 महीने तक: फास्टिंग और पीपी (PP) शुगर का स्तर स्थिर होने लगेगा। नसों का सुन्न होना काफी हद तक कम हो जाएगा और शरीर में हल्की ऊर्जा महसूस होगी।
  • 3 से 6 महीने तक: आपका मेटाबॉलिज़्म मज़बूत हो जाएगा। डॉक्टर की सलाह से आप अपनी डाइट में पुराना चावल और अन्य अनाज सुरक्षित रूप से पचाना सीख जाएंगे और आपकी एलोपैथिक दवाओं की निर्भरता कम हो सकती है।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयां उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयां शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

  • दवा
  • परामर्श
  • मानसिक स्वास्थ्य सत्र
  • योग और ध्यान मार्गदर्शन
  • आहार योजना
  • थेरेपी

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम केवल आपकी ब्लड शुगर रिपोर्ट के आंकड़ों को कम करने का काम नहीं करते, हम आपके पूरे स्वास्थ्य को सुधारते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ इंसुलिन बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियाँ नहीं देते; हम आपकी 'अग्नि' (पाचन) को अंदर से ठीक करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों मरीजों को डायबिटीज की भयंकर जटिलताओं और दवाइयों के भारी डोज़ से बाहर निकाला है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: आपका डायबिटीज मोटापे की वजह से है या अत्यधिक तनाव की वजह से? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण (Root Cause) पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: लगातार एलोपैथिक दवाइयाँ लिवर और किडनी पर असर डाल सकती हैं, जबकि आयुर्वेदिक रसायन पूरी तरह सुरक्षित हैं और शरीर के अंगों को रिपेयर करते हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Root Cause Analysis)
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड शुगर के नंबरों को किसी भी तरह (दवाओं/इंसुलिन से) सामान्य रखना। अग्नि' को ठीक करना, दोषों का शमन करना और शरीर के अंगों (पैंक्रियाज़/लिवर) को पोषण देना।
डाइट का नज़रिया चावल और कार्बोहाइड्रेट्स को पूरी तरह बंद करने की कठोर सलाह। पुराने चावल और सही अनाज को सही विधि (घी और सब्ज़ी के साथ) से खाने की आज़ादी।
शरीर को देखने का नज़रिया सिर्फ पैंक्रियाज़ और इंसुलिन हार्मोन पर पूरा फोकस। पूरे शरीर (पाचन, वात-पित्त-कफ, मानसिक तनाव) को एक साथ देखना।
लंबा असर समय के साथ दवाओं का डोज़ बढ़ता जाता है और नसों को नुकसान पहुँचता है। मेटाबॉलिज़्म अंदर से मज़बूत होता है, जिससे इंसान ऊर्जावान रहता है और बिना डरे जी सकता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको डायबिटीज है और आप नीचे दिए गए गंभीर संकेतों का अनुभव कर रहे हैं, तो यह सिर्फ शुगर बढ़ने का मामला नहीं है:

  • लगातार वज़न गिरना (Unexplained Weight Loss): अगर अच्छी डाइट के बावजूद आपका वज़न तेज़ी से कम हो रहा है, तो शरीर मस्कुलर डैमेज से गुज़र रहा है।
  • घाव का न भरना (Non-healing Wounds): अगर पैर में छोटा सा कट या छाला लगा है और हफ्तों तक नहीं सूख रहा है।
  • नज़र का धुंधला होना (Blurred Vision): अगर अचानक आपको धुंधला दिखने लगे, तो यह रेटिना पर शुगर के प्रभाव का संकेत है।
  • पैरों में भयंकर सुन्नपन: अगर आपके पैरों को गर्म या ठंडे का अहसास होना बंद हो जाए।

निष्कर्ष

डायबिटीज में अपनी थाली से चावल को पूरी तरह गायब कर देना कोई बहादुरी नहीं है, बल्कि यह अपने शरीर को कुपोषण और कमज़ोरी की तरफ धकेलना है। असली विज्ञान यह समझना है कि नया सफेद पॉलिश किया हुआ चावल आपके लिए नुकसानदायक है, लेकिन एक साल पुराना चावल (शाली चावल) जब खुले बर्तन में उसका मांड निकालकर, घी और खूब सारी सब्ज़ियों के साथ पकाया जाता है, तो वह आपके ब्लड शुगर को नहीं बढ़ाता।

डायबिटीज आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि आपका पाचन (अग्नि) और आपका लाइफस्टाइल बिगड़ चुका है। इस अलार्म को भूखे रहकर या सिर्फ दवाइयों के बल पर मत दबाइए। आयुर्वेद आपको एक संतुलित और स्वादिष्ट जीवन जीने का मार्ग दिखाता है। अपनी थाली को रंग-बिरंगी सब्ज़ियों, सही वसा (गाय के घी) और पुराने अनाज से भरें। जीवा आयुर्वेद के प्राकृतिक उपचार और पंचकर्म के साथ अपने मेटाबॉलिज़्म को रीस्टार्ट करें। अपनी बीमारी को अपना बॉस मत बनने दीजिए, आयुर्वेद के साथ अपने शरीर के बॉस खुद बनिए।

FAQs

हाँ, बिल्कुल। लेकिन चावल कौन सा है और कैसे पकाया गया है, यह ज़रूरी है। सफेद, पॉलिश किया हुआ नया चावल तेज़ी से शुगर बढ़ाता है। लेकिन पुराना चावल, ब्राउन राइस या लाल चावल (Red Rice) जिसमें फाइबर होता है, वह सुरक्षित है।

चावल को कुकर में सीटी लगाकर न पकाएं। इसे खुले बर्तन में ज़्यादा पानी के साथ उबालें। जब चावल पक जाए, तो उसका सफेद गाढ़ा पानी (मांड/Starch) निकालकर फेंक दें। इससे चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम हो जाता है।

हाँ! आयुर्वेद के अनुसार, चावल में एक चम्मच शुद्ध गाय का घी मिलाने से उसका पाचन धीमा हो जाता है। वसा (Fat) की वजह से चावल से निकलने वाला ग्लूकोज़ खून में धीरे-धीरे घुलता है, जिससे इंसुलिन स्पाइक नहीं होता।

ब्राउन राइस बेहतर है क्योंकि उसमें चोकर (Bran) और फाइबर मौजूद होता है, जो शुगर को तेज़ी से बढ़ने नहीं देता। सफेद चावल रिफाइंड होता है और शुद्ध कार्बोहाइड्रेट होता है।

एक साल या उससे अधिक पुराना चावल पचने में हल्का (लघु) होता है। समय के साथ अनाज का प्राकृतिक 'क्लेद' (चिपचिपापन) सूख जाता है। यह शरीर में कफ दोष को नहीं बढ़ाता और डायबिटीज के रोगियों के लिए पचने में बहुत आसान होता है।

अस्थायी रूप से नंबर कम दिख सकते हैं, लेकिन यह बहुत खतरनाक है। कार्ब्स एकदम छोड़ने से शरीर में 'वात' भड़क जाता है, जिससे भयंकर कमज़ोरी, नसों का सूखना (Neuropathy) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं।

बिल्कुल। जब आप चावल में फाइबर से भरपूर सब्ज़ियाँ (जैसे बीन्स, पालक, परवल) और थोड़ा प्रोटीन (दाल) मिलाते हैं, तो पूरे भोजन का 'ग्लाइसेमिक लोड' कम हो जाता है, जो शुगर के लिए एकदम सुरक्षित है।

आयुर्वेद रात के समय कफ बढ़ाने वाले भारी भोजन से बचने की सलाह देता है। अगर आपकी अग्नि (पाचन) कमज़ोर है, तो रात में चावल से बचें। इसे दोपहर के भोजन (Lunch) में खाना सबसे अच्छा है जब सूरज तेज़ होता है और पाचन शक्ति सबसे मज़बूत होती है।

शिलाजीत और अश्वगंधा बेहतरीन रसायन हैं। ये नसों की कमज़ोरी दूर करते हैं, मांसपेशियों को ताक़त देते हैं और बिना शुगर बढ़ाए शरीर में ऊर्जा (Stamina) का संचार करते हैं। (इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें)।

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