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बार-बार muscle pull होना किस कमी का संकेत हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 24 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 24 Apr, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5007

कभी चलते-चलते, सीढ़ियाँ चढ़ते समय या हल्की सी गतिविधि में भी मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना आम लग सकता है। शुरुआत में इसे लोग थकान या ज्यादा काम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

लेकिन जब यही muscle pull बार-बार होने लगे, तो यह सिर्फ थकान नहीं होता, यह शरीर का संकेत है कि अंदर पोषण की कमी, पानी की कमी या मांसपेशियों के संतुलन में गड़बड़ी है। कई बार यह इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, कमजोरी या नसों पर दबाव का भी संकेत हो सकता है।

अगर समय रहते इस संकेत को समझा न जाए, तो यह समस्या बार-बार दर्द, जकड़न और रोज़मर्रा की गतिविधियों में रुकावट का कारण बन सकती है।

Muscle Pull क्या होता है और क्यों होता है? 

Muscle pull वह स्थिति है जब मांसपेशियां अपनी क्षमता से ज्यादा खिंच जाती हैं या उन पर अचानक दबाव पड़ता है। यह आमतौर पर अचानक मूवमेंट, ज्यादा स्ट्रेचिंग, कमजोरी या सही वार्म-अप के बिना गतिविधि करने से होता है।

यह खिंचाव हल्का भी हो सकता है, जिसमें सिर्फ हल्का दर्द महसूस होता है, और गंभीर भी हो सकता है, जिसमें सूजन, तेज दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई शामिल हो जाती है। बार-बार muscle pull होना इस बात का संकेत हो सकता है कि मांसपेशियां अंदर से कमजोर हैं या शरीर में पोषण और संतुलन की कमी है।

बार-बार Muscle Pull होना क्यों चिंता का विषय है?

अगर मांसपेशियों में खिंचाव कभी-कभार हो, तो यह सामान्य माना जा सकता है। लेकिन जब यही समस्या बार-बार होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है, क्योंकि यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत हो सकता है।

मुख्य कारण:

  • मांसपेशियों की कमजोरी: लगातार खिंचाव इस बात का संकेत है कि muscles अंदर से मजबूत नहीं हैं।
  • पोषण की कमी: कैल्शियम, मैग्नीशियम या पोटैशियम की कमी से मांसपेशियां जल्दी खिंचती हैं।
  • पानी की कमी (Dehydration): शरीर में fluid कम होने से muscles stiff हो जाती हैं।
  • गलत lifestyle: बिना वार्म-अप एक्सरसाइज, लंबे समय तक बैठना या अचानक ज्यादा activity करना।
  • नसों पर दबाव: nerve compression के कारण भी बार-बार खिंचाव महसूस हो सकता है।

इन संकेतों को समझना जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआत में ही रोका जा सके।

Muscle Pull शरीर में किन कमियों का संकेत देता है?

बार-बार होने वाला muscle pull अक्सर शरीर में कुछ जरूरी तत्वों की कमी या असंतुलन का संकेत होता है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय इन कारणों को समझना जरूरी है:

  • मिनरल्स की कमी: कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी से muscles ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे खिंचाव और cramps बढ़ते हैं।
  • पानी की कमी: शरीर में hydration कम होने पर मांसपेशियां stiff और sensitive हो जाती हैं, जिससे अचानक खिंचाव हो सकता है।
  • मांसपेशियों की कमजोरी: कमजोर muscles थोड़े से दबाव में भी strain हो जाती हैं, खासकर बिना एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग के।
  • रक्त संचार की कमी: जब muscles तक सही मात्रा में blood और oxygen नहीं पहुंचता, तो उनमें जकड़न और दर्द महसूस होने लगता है।

इन कमियों को समय पर पहचानकर सुधार करना ही बार-बार होने वाले muscle pull से बचने का सही तरीका है।

कमजोर मांसपेशियों के संकेत और लक्षण

कमजोर मांसपेशियां शुरुआत में हल्के संकेत देती हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन समय के साथ ये लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं:

  • जल्दी थकान होना: थोड़ा काम या चलने पर ही मांसपेशियों में थकान महसूस होना
  • बार-बार खिंचाव (Muscle Pull): हल्की गतिविधि में भी muscles का strain हो जाना
  • दर्द और जकड़न: खासकर सुबह उठते समय या आराम के बाद stiffness महसूस होना
  • कम ताकत महसूस होना: वजन उठाने या सामान्य काम करने में कमजोरी लगना
  • संतुलन में कमी: चलते समय लड़खड़ाना या body balance बनाए रखने में कठिनाई
  • मांसपेशियों का ढीलापन: muscles का tone कम होना या loose महसूस होना
  • बार-बार cramps आना: अचानक मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन होना

इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, ताकि मांसपेशियों को मजबूत बनाकर आगे की समस्या से बचा जा सके।

लंबे समय तक नजरअंदाज करने के दुष्परिणाम

बार-बार होने वाला muscle pull अगर लंबे समय तक अनदेखा किया जाए, तो यह सिर्फ एक छोटी समस्या नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित करने लगता है। समय के साथ यह दर्द और कमजोरी का बड़ा कारण बन सकता है।

  • क्रॉनिक दर्द (Chronic Pain): बार-बार होने वाला हल्का दर्द समय के साथ लगातार रहने वाला दर्द बन सकता है, जो रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करता है।
  • मांसपेशियों की कमजोरी: लगातार खिंचाव और strain से muscles और कमजोर हो जाती हैं, जिससे शरीर की ताकत कम होने लगती है।
  • बार-बार चोट लगना (Repeated Injury): कमजोर मांसपेशियां और असंतुलन के कारण हल्की गतिविधि में भी injury का खतरा बढ़ जाता है।
  • मूवमेंट में कमी (Reduced Mobility): दर्द और जकड़न बढ़ने से चलना-फिरना, झुकना या उठना मुश्किल हो सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: समस्या की जड़ क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार, बार-बार होने वाला muscle pull सिर्फ बाहरी कारणों जैसे ज्यादा मेहनत या गलत मूवमेंट का परिणाम नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर त्रिदोष असंतुलन का संकेत है। इसमें मुख्य रूप से वात दोष बढ़ने पर मांसपेशियों में सूखापन, जकड़न, दर्द और खिंचाव की समस्या बढ़ जाती है, क्योंकि वात शरीर की गति और संचार को नियंत्रित करता है। 

इसके साथ ही अधपचा भोजन शरीर में ‘आम’ (toxins) बनाकर मांसपेशियों और सूक्ष्म मार्गों में रुकावट पैदा करता है, जिससे stiffness और दर्द महसूस होता है। वहीं जब मांस धातु कमजोर हो जाती है, तो muscles की ताकत और लचीलापन कम हो जाता है, जिससे वे जल्दी थककर बार-बार खिंचाव का कारण बनती हैं।

जीवा आयुर्वेद का दृष्टिकोण: Muscle Pull का समाधान

जीवा आयुर्वेद में बार-बार होने वाले muscle pull को केवल दर्द की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के भीतर हुए वात असंतुलन, मांस धातु की कमजोरी और ‘आम’ (toxins) के जमाव के रूप में देखा जाता है। उपचार का उद्देश्य सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि समस्या की जड़ को ठीक करना होता है।

  • दोष संतुलन (Vata Shaman): सबसे पहले वात दोष को शांत किया जाता है, जिससे मांसपेशियों की जकड़न और सूखापन कम हो सके।
  • आम निष्कासन (Detox): शरीर में जमा टॉक्सिन्स को हटाकर मांसपेशियों और नसों में साफ़ प्रवाह बहाल किया जाता है।
  • धातु पोषण (Muscle Strengthening): मांस धातु को मजबूत करने के लिए पुनर्निर्माण और पोषण पर ध्यान दिया जाता है, जिससे muscles टिकाऊ बनें।
  • रक्त संचार सुधार: प्रभावित हिस्सों में blood circulation बेहतर किया जाता है ताकि दर्द और stiffness कम हो।
  • लाइफस्टाइल सुधार: गलत posture, overuse और दिनचर्या को ठीक कर future injury से बचाव किया जाता है।

Muscle Pull के लिए उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

बार-बार होने वाले muscle pull में आयुर्वेद में ऐसी जड़ी-बूटियों और औषधियों का उपयोग किया जाता है जो दर्द, सूजन और वात असंतुलन को शांत करने में मदद करती हैं।

  • महानारायण तेल: मांसपेशियों की मालिश के लिए उपयोग होता है, जो दर्द और जकड़न को कम करता है।
  • योगराज गुग्गुलु: वात दोष को संतुलित करता है और जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द में उपयोगी होता है।
  • सहचरादी तेल: मांसपेशियों की stiffness और कमजोरी में लाभ देता है।
  • अश्वगंधा: मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है और बार-बार होने वाली कमजोरी को कम करता है।

इन औषधियों का उपयोग हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए ताकि सही परिणाम मिल सके।

Muscle Pull के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी

बार-बार होने वाले muscle pull में आयुर्वेदिक थेरेपी शरीर को गहराई से आराम देती हैं और मांसपेशियों की जकड़न, दर्द व वात असंतुलन को ठीक करने में मदद करती हैं।

  • अभ्यंग (तेल मालिश): औषधीय तेल से पूरे शरीर या प्रभावित हिस्से की मालिश की जाती है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों की stiffness कम होती है।
  • स्वेदन (हर्बल स्टीम थेरेपी): भाप के माध्यम से शरीर की जकड़न और दर्द को कम किया जाता है, जिससे muscles रिलैक्स होती हैं।
  • जानु बस्ती / स्थानीय बस्ती: प्रभावित हिस्से पर औषधीय तेल को रोककर रखा जाता है, जिससे गहराई से दर्द और सूजन में राहत मिलती है।
  • लेप थेरेपी (Herbal Poultice): जड़ी-बूटियों का लेप लगाकर सूजन और दर्द को कम किया जाता है।

डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण)

क्या खाएं (Eat) क्या न खाएं (Avoid)
मूंग दाल खिचड़ी और हल्का भोजन तला-भुना और भारी भोजन
गर्म सूप (सब्जी / दाल) मैदा और जंक फूड
दूध के साथ हल्दी या अश्वगंधा ठंडे पेय और कोल्ड ड्रिंक्स
हरी पत्तेदार सब्जियां बहुत ज्यादा मसालेदार खाना
केला, पपीता, अनार प्रोसेस्ड और पैकेट फूड
नारियल पानी चाय और कॉफी का अधिक सेवन
पर्याप्त गुनगुना पानी देर रात भारी भोजन

सही आहार मांसपेशियों को पोषण देकर कमजोरी कम करता है और बार-बार होने वाले muscle pull को नियंत्रित करने में मदद करता है।

जीवा आयुर्वेद में Muscle Pull की जांच कैसे की जाती है?

जीवा आयुर्वेद में muscle pull को केवल दर्द नहीं, बल्कि शरीर के अंदर हुए वात असंतुलन, मांस धातु की कमजोरी और रक्त संचार की गड़बड़ी के रूप में देखा जाता है। जांच पूरी तरह समग्र (holistic) तरीके से की जाती है।

  • वात दोष का मूल्यांकन: यह देखा जाता है कि मांसपेशियों में खिंचाव वात वृद्धि के कारण तो नहीं है।
  • मांस धातु की स्थिति: muscles की ताकत, लचीलापन और बार-बार होने वाली कमजोरी का आकलन किया जाता है।
  • रक्त संचार जांच: प्रभावित हिस्सों में blood flow और oxygen supply सही है या नहीं, यह समझा जाता है।
  • दर्द का पैटर्न विश्लेषण: खिंचाव कब, कैसे और किन गतिविधियों में बढ़ता है, इसका गहराई से अध्ययन किया जाता है।
  • आम (toxins) का मूल्यांकन: शरीर में जकड़न और सूजन पैदा करने वाले टॉक्सिन्स की स्थिति देखी जाती है।
  • लाइफस्टाइल और posture जांच: चलने, बैठने, काम करने की आदतें और overuse पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। 

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

सुधार होने में कितना समय लगता है?

शुरुआती स्टेज: 7–10 दिनों में दर्द, जकड़न और हल्के muscle pull में स्पष्ट राहत महसूस होने लगती है।
पुरानी (Chronic) समस्या: 3–6 हफ्तों में मांसपेशियों की ताकत, लचीलापन और वात संतुलन धीरे-धीरे बेहतर होता है।
अन्य कारक: सुधार की गति डाइट, शारीरिक गतिविधि, hydration, काम का बोझ और जीवनशैली अनुशासन पर निर्भर करती है।

इलाज से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?

सही और कस्टमाइज़्ड आयुर्वेदिक उपचार से शरीर में धीरे-धीरे ये सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं:

  • बार-बार होने वाले muscle pull में कमी
  • मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ना
  • दर्द और stiffness में धीरे-धीरे राहत
  • चलने-फिरने और movement में सुधार
  • शरीर में हल्कापन और थकान में कमी

पेशेंट टेस्टिमोनियल 

मेरा नाम आशु है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मुझे पिछले कई सालों से मसल पेन, जॉइंट पेन और नर्व से जुड़ी समस्याएँ थीं। मेरी यह परेशानी लगभग 5–6 साल से चल रही थी और मैं लगातार मॉडर्न इलाज भी करवा रहा था, लेकिन कोई स्थायी राहत नहीं मिल रही थी। फिर मैंने टीवी पर डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और प्रेरित होकर जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। मैंने डॉक्टर से कंसल्ट किया और वहाँ से इलाज शुरू कराया। धीरे-धीरे मेरे लक्षणों में सुधार आने लगा और अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च और पारदर्शिता 

कई लोग सोचते हैं कि ऐसा कस्टमाइज्ड आयुर्वेद बहुत महंगा होगा। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है । जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें ।

  • जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है । (यह एक अनुमानित आधार है और अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।)
  • अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए विशेष पैकेज प्रोटोकॉल भी हैं, जिन्हें शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ।
  • इन पैकेज में दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और ध्यान मार्गदर्शन, आहार योजना और थेरेपी शामिल हैं । इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है ।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता कम: 88% मरीजों ने धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं और हार्मोनल सपोर्ट पर निर्भरता कम की है।

आयुर्वेद vs मॉडर्न अप्रोच (Muscle Pain / Muscle Pull)

बिंदु आयुर्वेदिक दृष्टिकोण मॉडर्न दृष्टिकोण
सोच का तरीका इसे वात असंतुलन, मांस धातु की कमजोरी और शरीर की सूखी-ठंडी प्रकृति के रूप में देखता है इसे muscle strain, injury या overuse के रूप में देखा जाता है
मुख्य कारण बढ़ा हुआ वात, कमजोर मांस धातु, ‘आम’ का जमाव और खराब जीवनशैली over-exercise, electrolyte imbalance, dehydration, poor posture
लक्षणों की समझ दर्द, खिंचाव, जकड़न, बार-बार muscle pull, stiffness sharp pain, swelling, reduced movement, cramps
उपचार का तरीका तेल मालिश, स्वेदन, बस्ती, वात शमन औषधियाँ और लाइफस्टाइल सुधार painkillers, muscle relaxants, physiotherapy, ice/heat therapy
मुख्य फोकस जड़ कारण को ठीक करना, वात संतुलन और मांसपेशियों को मजबूत करना दर्द कम करना और जल्दी mobility वापस लाना
परिणाम धीरे-धीरे लेकिन स्थायी सुधार, recurrence कम तेजी से राहत, लेकिन दोबारा strain की संभावना रहती है

कब डॉक्टर से सलाह लें?

अगर muscle pull बार-बार हो रहा हो और सामान्य आराम या घरेलू उपायों के बाद भी दर्द कम न हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। दर्द का लगातार बढ़ना, सूजन का बने रहना, मांसपेशियों में सुन्नपन महसूस होना या चलने-फिरने में कठिनाई होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। कभी-कभी यह समस्या नसों पर दबाव, मिनरल की कमी या अंदरूनी चोट से भी जुड़ी हो सकती है। ऐसे में समय पर विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है ताकि समस्या बढ़ने से पहले सही इलाज मिल सके।

निष्कर्ष

Muscle pain केवल थकान या हल्का खिंचाव नहीं, बल्कि यह शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन, कमजोरी या गलत जीवनशैली का संकेत हो सकता है। अगर इसे शुरुआती स्तर पर समझ लिया जाए, तो इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन नजरअंदाज करने पर यह लंबे समय तक चलने वाली समस्या बन सकता है। संतुलित आहार, सही व्यायाम, पर्याप्त पानी और उचित आराम के साथ-साथ सही उपचार अपनाकर मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है, जिससे भविष्य में बार-बार होने वाले दर्द से बचाव संभव है।

FAQs

 नहीं, दोनों अलग स्थितियाँ हैं। muscle pull हल्का खिंचाव होता है, जबकि muscle tear में मांसपेशियों के fibers में ज्यादा नुकसान होता है और recovery में अधिक समय लगता है। 

हाँ, नींद के दौरान शरीर की मांसपेशियों की repair होती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो muscles कमजोर हो जाती हैं और हल्की गतिविधि में भी खिंचाव का खतरा बढ़ जाता है।

ठंड में मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और flexibility कम हो जाती है। इसी कारण अचानक movement करने पर muscle pull होने की संभावना बढ़ जाती है।

लंबे समय का stress शरीर में तनाव और stiffness बढ़ाता है। इससे मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और खिंचाव की संभावना बढ़ जाती है।

हाँ, यह कभी-कभी vitamin deficiency, nerve compression या metabolic imbalance का संकेत भी हो सकता है। इसलिए बार-बार होने पर जांच जरूरी है।

हल्का और सही तरीके से किया गया massage फायदेमंद होता है, लेकिन बहुत ज्यादा pressure या गलत technique दर्द को बढ़ा सकती है।

हाँ, उम्र बढ़ने पर muscles की elasticity और strength कम हो जाती है, जिससे strain और injury की संभावना बढ़ जाती है।

हाँ, बिना warm-up या तैयारी के अचानक exercise शुरू करने से muscles पर अचानक दबाव पड़ता है, जिससे खिंचाव हो सकता है।

 गलत posture लंबे समय में मांसपेशियों पर uneven pressure डालता है, जिससे एक तरफ strain और बार-बार muscle pull की समस्या हो सकती है।

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