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Shoes (footwear) का गलत selection knee pain को कैसे trigger करता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 24 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 24 Apr, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

अक्सर हम अपने जूतों को केवल स्टाइल या फैशन के नजरिए से देखते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आपके पैरों के नीचे की वह एक इंच की सोल आपके घुटनों की लंबी उम्र तय कर रही है। जब आप गलत जूतों का चुनाव करते हैं, तो हर कदम के साथ आपके घुटनों पर पड़ने वाला दबाव एक 'साइलेंट किलर' की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे जोड़ों के कार्टिलेज को घिसने लगता है। अगर आज आपने अपनी चाल और जूतों के तालमेल पर ध्यान नहीं दिया, तो कल की एक छोटी सी सैर भी आपके लिए एक दर्दनाक चुनौती बन सकती है। घुटनों का यह दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र का संकेत नहीं, बल्कि आपके गलत फुटवियर का नतीजा हो सकता है जिसे अब और नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

जूतों की चाल और घुटनों का हाल: क्या है यह समस्या?

हमारे शरीर की बनावट में पैर एक 'फाउंडेशन' की तरह होते हैं। जब हम चलते हैं, तो जमीन से टकराने पर हमारे पैरों को एक 'शॉक' महसूस होता है। अच्छे जूतों का काम इस झटके को सोखना होता है, लेकिन गलत चुनाव इस पूरे प्रेशर को सीधे आपके घुटनों (Knee Joints) की ओर भेज देता है। इसे मेडिकल भाषा में 'फुटवियर-इंड्यूस्ड मैकेनिकल स्ट्रेस' कहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, अगर नींव टेढ़ी होगी, तो ऊपर की मंजिल यानी आपके घुटनों में दरार आना तय है।

दर्द के अलग-अलग अवतार: 'फुटवियर इंजरी' के प्रकार

गलत जूतों से होने वाले घुटने के नुकसान को हम मुख्य रूप से तीन स्थितियों में देख सकते हैं:

  • ओवर-प्रोनेशन (Over-pronation): इसमें चलते समय पैर अंदर की तरफ ज्यादा झुक जाता है, जिससे घुटने के अंदरूनी हिस्से पर भारी दबाव पड़ता है
  • सुपिनेशन (Supination): इसमें पैर बाहर की तरफ मुड़ता है, जो घुटने के बाहरी लिगामेंट्स में खिंचाव पैदा करता है।
  • शॉक एब्जॉर्प्शन की कमी: बिल्कुल फ्लैट चप्पलें या घिसे हुए तलवे जमीन के झटके को सीधे हड्डियों तक पहुँचाते हैं, जिससे 'ऑस्टियोआर्थराइटिस' का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर का अलार्म: जब घुटने चिल्लाकर कहें 'जूते बदलो!'

कैसे पहचानें कि आपका दर्द जूतों की वजह से है? इन लक्षणों पर गौर करें:

  • सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटने की कटोरी (Patella) के पीछे तेज चुभन।
  • लंबे समय तक चलने के बाद घुटनों में हल्की सूजन या गर्माहट महसूस होना।
  • आपके जूतों के तलवों (Soles) का किसी एक तरफ से ज्यादा घिस जाना।
  • सुबह सोकर उठने पर पैरों के तलवों और जोड़ों में भारी अकड़न।

क्यों रूठ जाते हैं घुटने? गलत फुटवियर के पीछे के कारण

घुटनों की सेहत बिगाड़ने में इन चीजों का सबसे बड़ा हाथ होता है:

  1. पेंसिल हील्स का शौक: हाई हील्स शरीर के सेंटर ऑफ ग्रेविटी को बिगाड़ देती हैं, जिससे घुटनों पर 25% से 30% तक ज्यादा प्रेशर आता है।
  2. कुशनिंग का अभाव: सख्त तलवे वाले जूते कंक्रीट की सड़क पर चलते समय जोड़ों को सुरक्षा नहीं दे पाते।
  3. पुराने और घिसे जूते: अगर आपके जूतों की शेप बिगड़ चुकी है, तो वे आपके पैर को सही 'आर्च सपोर्ट' नहीं दे पाते।

खतरे की घंटी और रिकवरी की उम्मीद: रिस्क फैक्टर्स एवं समाधान

नीचे दी गई तालिका आपको बताएगी कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है और छोटे बदलाव कैसे राहत दे सकते हैं।

जोखिम कारक (The Risk)

भविष्य की मुश्किल (The Fear)

रिकवरी की किरण (The Hope)

गलत आर्च सपोर्ट

हड्डियों का टेढ़ापन और परमानेंट डैमेज।

'ऑर्थोपेडिक इनसोल्स' से पैर का कर्व ठीक हो सकता है।

मोटापा + गलत जूते

कार्टिलेज का तेजी से घिसना और गंभीर दर्द।

सही वेट मैनेजमेंट और गद्देदार जूतों से 40% तक राहत।

पुरानी चोट की अनदेखी

भविष्य में नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी की नौबत।

फिजियोथेरेपी और सही फुटवियर से सर्जरी टाली जा सकती है।

मॉडर्न आयुर्वेद से जांच: अपने 'दोष' और चाल को पहचानें

आज का 'मॉडर्न आयुर्वेद' केवल जड़ी-बूटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अलाइनमेंट (Alignment) को गहराई से समझता है। घुटने का दर्द अक्सर 'वात' दोष के असंतुलन से जुड़ा होता है।

अपना दोष पहचानें (Identify Your Dosha):

  • वात (Vata) प्रधान: इनके जोड़ रूखे होते हैं और चटकने की आवाज आती है। इनके अत्यधिक कुशनिंग वाले जूतों की जरूरत होती है।
  • पित्त (Pitta) प्रधान: इनके पैरों में जलन और सूजन जल्दी होती है। इन्हें हवादार (Breathable) और नरम मटेरियल के जूते पहनने चाहिए।
  • कफ (Kapha) प्रधान: इनके पैर भारी होते हैं और मोच जल्दी आती है। इन्हें मजबूत ग्रिप और फर्म सपोर्ट वाले जूतों की आवश्यकता होती है।

सुकून का रास्ता: पर्सनलाइज्ड केयर से मिलेगी मंजिल 

घबराएं नहीं, आपके घुटने फिर से स्वस्थ हो सकते हैं। बस कुछ छोटे बदलाव अपनाएं:

  • शाम को करें खरीदारी: हमेशा शाम के समय जूते खरीदें, क्योंकि दिन भर की थकान के बाद पैर थोड़े सूजे होते हैं। यह सबसे सटीक फिटिंग देता है।
  • आयुर्वेदिक लेप और मालिश: हफ्ते में दो बार महानारायण तेल से घुटनों की मालिश जोड़ों के लुब्रिकेशन को बनाए रखती है।
  • विशेषज्ञ की सलाह: अगर दर्द पुराना है, तो एक बार 'गेट एनालिसिस' (Gait Analysis) जरूर कराएं ताकि आपके चलने के सही ढंग का पता चल सके।

आपके पैर पूरे जीवन का बोझ उठाते हैं। उन्हें अच्छे जूतों का उपहार दें, ताकि आपके घुटने ताउम्र बिना किसी दर्द के आपका साथ निभा सकें।

आयुर्वेद की दृष्टि: जूतों से घुटनों तक 'वात' का सफर

आयुर्वेद के अनुसार, घुटनों का दर्द मुख्य रूप से 'संधिगत वात' (Sandhigata Vata) का परिणाम है। जब हम गलत जूते पहनते हैं, तो शरीर का संतुलन बिगड़ने से वायु (वात) जोड़ों में जाकर संचित हो जाती है। यह बढ़ा हुआ वात जोड़ों के प्राकृतिक चिकने पदार्थ (श्लेषक कफ) को सुखा देता है, जिससे हड्डियाँ आपस में रगड़ने लगती हैं। सरल शब्दों में, आपके गलत जूते आपके शरीर के भीतर वायु के असंतुलन को आमंत्रित करते हैं, जो घुटनों के घर्षण का मुख्य कारण बनता है।

जीवा आयुर्वेद का नज़रिया: जड़ से इलाज की तकनीक

जीवा आयुर्वेद में हम केवल दर्द को दबाते नहीं, बल्कि दर्द के 'मूल कारण' (Root Cause) को खोजते हैं। हमारा उपचार दृष्टिकोण तीन स्तंभों पर टिका है:

  • निदान (Analysis): आपके चलने के तरीके और फुटवियर की आदतों का बारीकी से विश्लेषण।
  • अग्नि चिकित्सा: आपके पाचन को सुधारना ताकि जोड़ों को सही पोषण मिले।
  • संतुलन: जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव के जरिए वात दोष को वापस अपनी सामान्य स्थिति में लाना।

प्रकृति का खजाना: घुटनों के लिए चमत्कारी जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद ने हमें ऐसी कई जड़ी-बूटियां दी हैं जो जूतों के गलत तनाव से होने वाली सूजन को कम करने में 'नेचुरल हीलर' का काम करती हैं:

  • शल्लकी (Boswellia): इसे 'आयुर्वेदिक इबुप्रोफेन' कहा जाता है। यह जोड़ों की सूजन और जकड़न को कम करने में बेजोड़ है।
  • अश्वगंधा: यह मांसपेशियों को मजबूती देता है, जिससे गलत जूतों के कारण घुटनों पर पड़ने वाला भार मांसपेशियां खुद झेल लेती हैं।
  • गुग्गुल: यह जोड़ों के बीच जमा जहरीले तत्वों (आम) को बाहर निकालता है और लुब्रिकेशन बढ़ाता है।
  • सोंठ (Ginger): यह प्राकृतिक रूप से दर्द निवारक है और रक्त संचार को सुधारती है।

पंचकर्म और थेरेपी: बाहरी तनाव से आंतरिक राहत

जब गलत जूतों के कारण दर्द पुराना हो जाता है, तो बाहरी उपचार बहुत प्रभावी होते हैं:

  • जानु बस्ती (Janu Basti): घुटने के चारों ओर औषधीय तेल का एक 'पूल' बनाया जाता है। यह कार्टिलेज को पुनर्जीवित करने और दर्द को सोखने का सबसे अच्छा तरीका है।
  • पत्र पिण्ड पोटली: गर्म औषधीय पोटली से सिकाई करने पर जकड़न तुरंत दूर होती है।
  • अभ्यंग: विशेष तेलों जैसे 'महानारायण तेल' से मालिश करने पर नसों को पोषण मिलता है।

खाने का सही तालमेल: आपकी 'डाइट' घुटनों के लिए

घुटनों की सेहत सिर्फ पैरों से नहीं, पेट से भी जुड़ी है। सही खान-पान जोड़ों के लचीलेपन को बनाए रखता है।

क्या खाएं (Best for Knees)

क्या न खाएं (Avoid for Relief)

गर्म और ताजा भोजन: जो आसानी से पच जाए।

ठंडा और बासी भोजन: जो वात को बढ़ाता है।

देसी घी और तिल का तेल: जोड़ों में चिकनाई बनाए रखने के लिए।

मैदा और जंक फूड: जो शरीर में सूजन पैदा करते हैं।

अदरक, हल्दी और मेथी: ये प्राकृतिक सूजन-रोधी हैं।

खट्टे और ठंडे पदार्थ (दही, छाछ रात में): जोड़ों में दर्द बढ़ा सकते हैं।

मेवे (अखरोट, बादाम): ओमेगा-3 के लिए हैं जो जोड़ों को पोषण देते हैं।

राजमा और सफेद चने: ये वायु पैदा करते हैं जिससे दर्द ट्रिगर होता है।

जीवा में आपकी सेहत का 'चेक-अप': हम आपको कैसे समझते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हम केवल आपकी बीमारी का नहीं, बल्कि 'आपका' इलाज करते हैं। हमारी परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process) काफी गहरी और व्यक्तिगत होती है:

  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): हर व्यक्ति का शरीर अलग है। हम यह पहचानते हैं कि आप वात, पित्त या कफ में से किस प्रकृति के हैं।
  • नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis): हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी नाड़ी के जरिए शरीर के भीतर छिपे असंतुलन और बीमारियों की जड़ का पता लगाते हैं।
  • दोषों की गहराई: हम यह देखते हैं कि गलत जूतों के तनाव ने आपके 'व्यान वायु' और 'श्लेषक कफ' को कितना प्रभावित किया है।

स्वस्थ होने का सफर: आपकी रिकवरी का रोडमैप

जब आप जीवा से जुड़ते हैं, तो आपकी रिकवरी एक व्यवस्थित तरीके से शुरू होती है:

  1. विस्तृत परामर्श: डॉक्टर आपकी जीवनशैली, जूतों के चुनाव और दर्द के इतिहास को समझते हैं।
  2. कस्टमाइज्ड डाइट प्लान: आपके दोषों के अनुसार एक व्यक्तिगत भोजन चार्ट तैयार किया जाता है।
  3. हर्बल फॉर्मूलेशन: आपके लिए विशेष रूप से तैयार शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियां दी जाती हैं।
  4. लगातार फॉलो-अप: हमारी टीम समय-समय पर आपकी प्रगति की जांच करती है और जरूरी बदलाव करती है।

हीलिंग टाइमलाइन: कितने समय में दिखेगा असर?

आयुर्वेद एक धीमी लेकिन स्थायी प्रक्रिया है। घुटने के दर्द में सुधार आपकी स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है:

  • शुरुआती सुधार (15-30 दिन): सूजन में कमी और चलने-फिरने में थोड़ी आसानी महसूस होने लगती है।
  • महत्वपूर्ण बदलाव (3-6 महीने): जोड़ों का लचीलापन वापस आने लगता है और दर्द की तीव्रता काफी कम हो जाती है।
  • स्थायी राहत: पुराने मामलों में जड़ से आराम मिलने में 6 महीने से एक वर्ष का समय लग सकता है।

क्या उम्मीद रखें? (समस्या vs समाधान तालिका)

जीवा के इलाज से आपको जो परिणाम मिलते हैं, वे केवल दर्द कम नहीं करते बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता सुधारते हैं।

आपकी मौजूदा समस्या (The Problem)

जीवा का समाधान (The Solution)

अपेक्षित परिणाम (Expectation)

घुटनों में तेज जकड़न और सूजन।

कस्टमाइज्ड 'वात-शामक' औषधियां।

जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई (Lubrication) की वापसी।

चलने में असमर्थता और दर्द की दवाइयों पर निर्भरता।

पंचकर्म और सही फुटवियर गाइडेंस।

पेनकिलर्स से मुक्ति और बेहतर गतिशीलता।

भविष्य में सर्जरी का डर।

जड़ से उपचार और जीवनशैली में बदलाव।

सर्जरी की संभावना में भारी कमी और आत्मविश्वास।

मरीजों का अनुभव- 

मेरे घुटनों और कमर में बहुत तेज़ दर्द रहता था। हालत ऐसी थी कि मैं ज़्यादा देर खड़ी नहीं हो पाती थी और सीढ़ियाँ चढ़ना तो मेरे लिए नामुमकिन सा हो गया था। डॉक्टरों ने दर्द की दवाइयाँ तो दीं, लेकिन उनसे कोई खास आराम नहीं मिल रहा था।

तभी एक दोस्त की सलाह पर मैंने जीवा आयुर्वेद (Jiva Ayurveda) में दिखाया। मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती कि वहाँ इलाज शुरू करने के बाद मेरी ज़िंदगी कितनी बदल गई है। अब मेरा दर्द पहले से बहुत कम है और मैं काफी बेहतर महसूस कर रही हूँ। सही समय पर सही इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद का बहुत-बहुत शुक्रिया।

— राज बाला शर्मा

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
  • पूरे भारत में 80+ क्लिनिक

आधुनिक vs आयुर्वेदिक इलाज: आपके लिए क्या बेहतर है?

जब बात घुटनों की आती है, तो एलोपैथी और आयुर्वेद के नजरिए में काफी अंतर होता है। नीचे दी गई तालिका से आप खुद समझ पाएंगे कि आयुर्वेद आपके लिए एक बेहतर निवेश क्यों है:

विशेषता (Feature)

आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine)

जीवा आयुर्वेदिक उपचार (Jiva Ayurveda)

दृष्टिकोण (Approach)

लक्षणों को दबाना (Symptom Management)।

जड़ से इलाज (Root Cause Analysis)।

उपचार विधि

पेनकिलर्स, स्टेरॉयड या सर्जरी।

हर्बल दवाएं, पंचकर्म और कस्टमाइज्ड डाइट।

दुष्प्रभाव (Side Effects)

दवाओं के लंबे उपयोग से लिवर/किडनी पर असर।

पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित (Safe & Natural)।

दीर्घकालिक लाभ

राहत अस्थायी हो सकती है।

शरीर के दोष संतुलित कर स्थायी राहत।

जीवनशैली

लाइफस्टाइल पर कम ध्यान।

आहार और विहार (Life Habits) में सुधार।

डॉक्टर से कब मिलें? (खतरे के संकेत)

यदि आप नीचे दिए गए संकेतों को महसूस कर रहे हैं, तो अब और इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है:

  • घुटनों में इतनी सूजन कि आप पैर मोड़ न पाएं।
  • रात को सोते समय भी घुटनों में टीस उठना।
  • घुटने का अचानक 'लॉक' हो जाना या चलते-चलते लचक जाना।
  • पैर की बनावट में बदलाव दिखना (जैसे पैर बाहर की ओर मुड़ना)।

अभी संपर्क करें (Call to Action):

अपने घुटनों को नई जिंदगी देने के लिए आज ही हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से बात करें।

  • फोन: +91-129-4040404
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • क्लीनिक: अपने नजदीकी जीवा क्लीनिक पर जाएँ (भारत भर में 80+ स्थान)।

निष्कर्ष

गलत जूतों का चयन एक छोटी सी भूल लग सकती है, लेकिन इसके परिणाम आपके भविष्य की गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि शरीर एक मशीन नहीं, बल्कि प्रकृति का एक हिस्सा है जिसे प्रेम और सही देखभाल की जरूरत है। सही फुटवियर, संतुलित आहार और जीवा की विशेषज्ञता के साथ, आप घुटनों के दर्द को पीछे छोड़कर एक सक्रिय और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। याद रखें, पहला कदम ही सबसे कठिन होता है—आज ही वह कदम उठाएं!

References 

https://www.google.com/search?q=https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/sushruta-samhita-english-translation 

https://www.google.com/search?q=https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/sushruta-samhita-english-translation 

https://www.google.com/search?q=https://www.jiva.com/case-studies 

https://www.google.com/search?q=https://www.arthritis.org/health-wellness/healthy-living/managing-pain/joint-protection/best-shoes-for-knee-osteoarthritis  

https://www.google.com/search?q=https://www.health.harvard.edu/pain/the-footwear-knee-pain-connection 

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