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Exercise गलत तरीके से करने पर joint pain क्यों बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 24 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 20 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5058

आजकल फिट दिखने की चाहत में लोग जिम, क्रॉसफिट या भारी योगा करते हैं। लेकिन भारी वज़न उठाना या गलत तरीके (पोस्चर) से एक्सरसाइज करना आपके जोड़ों के लिए एक साइलेंट किलर बन चुका है। अक्सर लोग वर्कआउट के बाद होने वाले भयंकर दर्द को "नो पेन, नो गेन" (No pain, no gain) या मामूली माँसपेशियों का खिंचाव समझकर पेनकिलर खा लेते हैं और उसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि यह कोई आम थकान नहीं, बल्कि आपके जोड़ों की गद्दी (कार्टिलेज) और लिगामेंट्स के बुरी तरह फटने का सीधा अलार्म है। आइए गहराई से समझते हैं कि गलत एक्सरसाइज से जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ता है और आयुर्वेद कैसे इस डैमेज को हमेशा के लिए रिपेयर कर सकता है।

गलत तरीके से Exercise करने पर जोड़ों में भयंकर दर्द (Joint Pain) क्यों बढ़ता है?

जब हम एक्सरसाइज करते हैं, तो हमारे शरीर का पूरा भार और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) हमारे जोड़ों (खासकर घुटनों, कमर और कंधों) पर पड़ता है। लेकिन जब यही एक्सरसाइज गलत फॉर्म या गलत तरीके से की जाती है, तो यह जोड़ों के लिए ज़हर बन जाती है। इसके पीछे स्पष्ट वैज्ञानिक कारण हैं:

बायोमैकेनिक्स (Biomechanics) का पूरी तरह बिगड़ जाना:

हमारे शरीर के हर जोड़ की मूवमेंट का एक प्राकृतिक कोण (Angle) होता है। जब आप गलत पोस्चर में भारी वज़न उठाते हैं (जैसे स्क्वाट्स करते समय घुटनों को पंजों से बहुत आगे ले जाना या कमर को झुका लेना), तो सारा वज़न आपकी माँसपेशियों पर पड़ने के बजाय सीधे आपके घुटनों की गद्दी (Cartilage) और रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। यह अतिरिक्त दबाव जोड़ों के बीच के अलाइनमेंट को बिगाड़ देता है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं।

  • सूक्ष्म चोटें (Micro-tears) और लिगामेंट डैमेज:जोड़ों को अपनी जगह पर स्थिर रखने के लिए रबर बैंड जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें लिगामेंट्स (Ligaments) कहते हैं। जब आप बिना सही फॉर्म के अचानक भारी वज़न उठाते हैं या गलत तरीके से दौड़ते हैं, तो इन लिगामेंट्स पर अचानक बहुत तेज़ झटका लगता है। इससे उनमें छोटे-छोटे कट्स (Micro-tears) आ जाते हैं। लगातार ऐसा करने से ये कट्स बड़े हो जाते हैं और जोड़ में भयंकर सूजन और दर्द पैदा करते हैं।
  • वार्म-अप (Warm-up) की भारी कमी:बिना शरीर को गर्म किए (वार्म-अप के बिना) सीधे भारी एक्सरसाइज करने से जोड़ों के अंदर प्राकृतिक चिकनाई (Synovial Fluid) का बहाव नहीं हो पाता। सूखे जोड़ों पर जब भारी वज़न पड़ता है, तो कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की गद्दी) बहुत तेज़ी से घिसती है और अंदर से 'कट-कट' की आवाज़ (Crepitus) आने लगती है।

ओवरट्रेनिंग (Overtraining) और रिकवरी न होना:

जोड़ों और माँसपेशियों को डैमेज होने के बाद दोबारा रिपेयर होने (Recovery) के लिए समय चाहिए होता है। लेकिन "जल्दी रिज़ल्ट" पाने के चक्कर में लोग रोज़ाना भारी वर्कआउट करते हैं। इससे जोड़ों पर लगातार दबाव (Repetitive stress) बना रहता है, जिससे 'ओवरयूज़ इंजरी' (Overuse Injury) हो जाती है।

लोग इस भयंकर चेतावनी को नज़रअंदाज़ क्यों करते हैं?

फिटनेस की दुनिया में यह सबसे गलत वाक्य है। ज़्यादातर लोग यह मान बैठते हैं कि जब तक वर्कआउट के बाद शरीर टूटेगा नहीं या भयंकर दर्द नहीं होगा, तब तक फिटनेस नहीं मिलेगी। वे 'अच्छे दर्द' (माँसपेशियों की थकान) और 'बुरे दर्द' (जोड़ों की चोट) के बीच का फर्क ही नहीं समझ पाते। घुटनों या कमर के दर्द को वे मेहनत का रिज़ल्ट मानकर नज़रअंदाज़ करते रहते हैं।

पेनकिलर और स्प्रे का झूठा फायदा:

जब जोड़ों में दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो लोग तुरंत कोई भारी दर्द निवारक गोली (Painkiller) खा लेते हैं या दर्द निवारक स्प्रे लगा लेते हैं। कुछ घंटों के लिए दर्द सुन्न हो जाता है। लोग सोचते हैं कि "बाम लगाने से मैं बिल्कुल ठीक हूँ" और वे अगले दिन फिर उसी गलत तरीके से भारी वज़न उठाने चले जाते हैं। वे यह नहीं समझते कि पेनकिलर ने फटे हुए लिगामेंट को रिपेयर नहीं किया है, सिर्फ दिमाग को धोखा दिया है।

एक्शन न लेने के भयंकर परिणाम: इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें

अगर आप यह मानकर बैठे हैं कि यह तो बस वर्कआउट का आम दर्द है और पेनकिलर से काम चल जाएगा, तो आप अनजाने में खुद को हमेशा के लिए अपाहिज बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं:

  • लिगामेंट टियर (ACL / Meniscus Tear):घुटनों पर गलत तरीके से दबाव डालने से घुटने की गद्दी (Meniscus) या मुख्य रबर (ACL) फट सकती है। एक बार यह फट जाए, तो इंसान का पैर सीधा खड़ा भी नहीं हो पाता और अंततः सर्जरी (Operation) की नौबत आ जाती है।
  • अर्ली ऑस्टियोआर्थराइटिस (Early Osteoarthritis):जोड़ों की गद्दी (कार्टिलेज) के लगातार घिसने से हड्डियाँ अंदर से खुरदुरी हो जाती हैं। जो बीमारी 60 साल की उम्र में होनी चाहिए थी, वह गलत एक्सरसाइज के कारण 30 साल के युवाओं में हो रही है। हड्डियाँ आपस में टकराती हैं और इंसान बिना छड़ी के चल भी नहीं पाता।
  • स्लिप डिस्क (Slip Disc):जिम में भारी डेडलिफ्ट (Deadlift) या स्क्वाट्स गलत तरीके से करने पर रीढ़ की हड्डी की गद्दी अपनी जगह से खिसक जाती है और पैर की मुख्य नस (Sciatica) को दबा देती है, जिससे कमर से लेकर पैर के अँगूठे तक बिजली के करंट जैसा असहनीय दर्द दौड़ता है।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे समझता है?

आयुर्वेद दुनिया की सबसे प्राचीन और सटीक चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में व्यायाम (Exercise) को शरीर के लिए अमृत बताया गया है, लेकिन महर्षि चरक ने स्पष्ट लिखा है कि 'अतिव्यायाम' (हद से ज़्यादा और गलत तरीके से एक्सरसाइज) शरीर के लिए बहुत बड़ा ज़हर है।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में गति (Movement) को 'वात दोष' (Vata Dosha) नियंत्रित करता है। जब हम अपनी क्षमता से ज़्यादा (अतिव्यायाम) या गलत पोस्चर में वज़न उठाते हैं, तो शरीर का 'वात दोष' भयंकर रूप से कुपित हो जाता है।

बढ़ा हुआ और रूखा वात दोष जोड़ों के अंदर मौजूद प्राकृतिक चिकनाई (श्लेषक कफ / Synovial Fluid) को पूरी तरह सुखा देता है। इसके सूखते ही हमारे जोड़ों के 'स्नायु' (Ligaments) और 'कंडरा' (Tendons) में भयानक जकड़न (Stiffness) और सूखापन आ जाता है। जब आप दोबारा उस सूखे हुए जोड़ पर भारी वज़न डालते हैं, तो वहां 'आम' (टॉक्सिन्स) जमा हो जाता है और भयंकर सूजन व दर्द (संधिगत वात) पैदा होता है। जब तक शरीर के इस कुपित वात को शांत करके जोड़ों (मज्जा और अस्थि धातु) को दोबारा 'स्नेहन' (चिकनाई) नहीं दिया जाएगा, कोई भी केमिकल की गोली आपको ठीक नहीं कर सकती।

  • नसों को अंदर से ठोस बनाने के लिए रसायन और बल्य (ताकत देने वाली) औषधियाँ दी जाती हैं।

जोड़ों के दर्द और डैमेज को रिपेयर करने के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें गलत एक्सरसाइज से हुई इंजरी (चोट) को खत्म करने और लिगामेंट्स को दोबारा रिपेयर करने के लिए बहुत ही जादुई जड़ी-बूटियाँ दी हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): वर्कआउट करने वालों के लिए यह धरती का सबसे बड़ा अमृत है। अश्वगंधा डैमेज हो चुकी माँसपेशियों को रिपेयर करता है, वात को शांत करता है और जोड़ों को लोहे जैसी ताकत (Strength) देता है।
  • हड़जोड़ (Hadjod): जैसा कि इसका नाम है (हड्डी जोड़ने वाली), यह अस्थि धातु को मज़बूत बनाती है। भारी वज़न उठाने से हड्डियों में आए कट्स या कमज़ोरी को यह प्राकृतिक रूप से भर देती है।
  • शल्लकी (Shallaki / Boswellia): यह आयुर्वेद का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक दर्द निवारक और सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) है। शल्लकी सीधे कार्टिलेज को टूटने से रोकती है और जोड़ों की भारी जकड़न को खोलती है।
  • निर्गुंडी (Nirgundi): अगर गलत एक्सरसाइज से नस दब गई है (जैसे साइटिका) और करंट जैसा तेज़ दर्द आ रहा है, तो निर्गुंडी की सिकाई और औषधियाँ दर्द को चूस लेने में अचूक हैं।

आयुर्वेदिक थेरेपी जोड़ों की चोट (Gym Injuries) में कैसे काम करती है?

जब कार्टिलेज डैमेज हो चुका हो और भारी दर्द के कारण आप ठीक से चल भी न पा रहे हों, तब हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी गहराई में जाकर चमत्कारिक रिज़ल्ट देती है।

  • जानु बस्ती और कटि बस्ती (Janu & Kati Basti): घुटनों या कमर के दर्द के लिए यह सबसे अचूक चिकित्सा है। इसमें दर्द वाली जगह पर आटे का एक घेरा बनाकर उसमें लगातार गर्म औषधीय तेल (जैसे महानारायण तैल) भरा जाता है। यह गर्म तेल त्वचा के अंदर गहराई तक जाकर सूखी हुई गद्दी (Cartilage) को चिकनाई देता है और वात को शांत कर दर्द खत्म करता है।
  • पत्र पिंड स्वेद (Patra Pinda Sweda): वात-नाशक ताज़े पत्तों (जैसे निर्गुंडी, अर्क) की पोटली बनाकर गर्म तेल में डुबोकर जोड़ों की गहरी सिकाई की जाती है। यह जकड़े हुए जोड़ों में तुरंत लचीलापन ला देती है और ब्लड फ्लो बढ़ाती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): पूरे शरीर पर वात-नाशक गर्म तेलों से गहरी मालिश की जाती है जो लैक्टिक एसिड (Lactic Acid) की थकावट और माँसपेशियों की ऐंठन को एक ही बार में शरीर से बाहर खींच लेती है।

इंजरी से बचने और रिकवरी के लिए वात-शामक डाइट प्लान क्या हो?

जोड़ों का दर्द और रिकवरी पूरी तरह से आपकी डाइट पर निर्भर करती है। प्रोटीन के चक्कर में लिया गया गलत रूखा आहार वात को बढ़ा देता है।

  • क्या खाएँ (Foods to Include): अपनी डाइट में गर्म, ताज़ा और स्निग्ध भोजन शामिल करें। जोड़ों में प्राकृतिक ग्रीस (चिकनाई) वापस लाने के लिए रोज़ाना अपनी डाइट में 1-2 चम्मच 'शुद्ध गाय का घी', सफेद तिल, दूध और अखरोट का सेवन ज़रूर करें।
  • किन चीज़ों से सख्त परहेज़ करें (Vata-Aggravating Diet): जिम के बाद बर्फ का ठंडा पानी (Ice water), बहुत ज़्यादा सूखी प्रोटीन बार्स, कच्चा सलाद और बासी भोजन खाना तुरंत बंद कर दें। बादी वाली चीज़ें जैसे भारी राजमा, छोले और रूखा-सूखा खाना वात बढ़ाकर जोड़ों को सुखाते हैं, इनसे बचें।
  • दैनिक पेय: रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी और थोड़ा सा शुद्ध घी डालकर पिएँ। हल्दी सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी है जो वर्कआउट की अंदरूनी सूजन को जड़ से मिटाती है।

ठीक होने (Recovery) में लगने वाला समय कितना है?

लिगामेंट्स और डैमेज हुई कार्टिलेज रातों-रात रिपेयर नहीं होती। इसे दोबारा हील होने और अपनी पुरानी ताकत पाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 1 से 3 हफ्ते: आपके जोड़ों की लालिमा, सूजन और चलते समय होने वाले तेज़ दर्द में काफी हद तक आराम मिलने लगेगा। 'कट-कट' की आवाज़ कम होने लगेगी।
  • 1 से 3 महीने तक: जोड़ों की जकड़न खुल जाएगी और आप बिना दर्द के अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी सकेंगे। आपकी पेनकिलर्स पूरी तरह छूट जाएँगी और माँसपेशियों में प्राकृतिक लचीलापन आएगा।
  • 3 से 6 महीने तक: वात दोष पूरी तरह शांत हो जाएगा। पंचकर्म और रसायन औषधियों से आपके डैमेज लिगामेंट्स और कार्टिलेज काफी हद तक रिपेयर हो जाएँगे और आप डॉक्टर की सलाह से दोबारा सही पोस्चर के साथ हल्की एक्सरसाइज शुरू कर सकेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाता था। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।

बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।

जीवा (Jiva) की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा (Jiva Ayurveda) में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

वर्कआउट की चोट में हम अक्सर बहुत जल्दबाज़ी में आइस-पैक और भारी पेनकिलर्स ढूँढते हैं। लेकिन सिर्फ दर्द दबाना और आयुर्वेद की गहराई को अपनाना कितना अलग है, यह जानना बहुत ज़रूरी है।

तुलना का आधार आयुर्वेदिक दृष्टिकोण आधुनिक (मॉडर्न) दृष्टिकोण
सोच का तरीका दोष (वात-पित्त) और ‘आम’ का असंतुलन यूरिक एसिड और क्रिस्टल डिपॉज़िशन
मुख्य कारण कमजोर अग्नि, आम का जमाव ज्यादा प्यूरीन, किडनी से कम एक्सक्रेशन
लक्षणों की समझ दर्द, सूजन, जलन, भारीपन जॉइंट पेन, रेडनेस, अचानक अटैक
उपचार का तरीका जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म, डाइट व लाइफस्टाइल दवाएँ (पेनकिलर, UA-लोअरिंग) + डाइट कंट्रोल
मुख्य फोकस/रिजल्ट जड़ कारण ठीक कर स्थायी सुधार जल्दी राहत, लेकिन रीकरेन्स संभव

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

वर्कआउट के दर्द को हमेशा "मसल्स गेन" समझकर इग्नोर न करें। अगर आपको ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अगर भारी वज़न उठाते समय आपको कमर या घुटने से बहुत तेज़ 'पॉप' या टूटने की आवाज़ आए और आप गिर पड़ें।
  • अगर आपके जोड़ का आकार अजीब सा हो जाए (Deformity) या वह बहुत तेज़ी से सूज कर लाल हो जाए।
  • अगर आप दर्द वाले पैर या हाथ पर अपना थोड़ा सा भी वज़न न डाल पा रहे हों और जोड़ लॉक (Lock) हो जाए।
  • अगर कमर दर्द के साथ पैरों में भारी सुन्नपन आ जाए और मल-मूत्र पर कंट्रोल न रहे (Slip disc - Cauda Equina Syndrome)।

निष्कर्ष

एक्सरसाइज करना शरीर के लिए एक वरदान है, लेकिन गलत पोस्चर और अपनी क्षमता से ज़्यादा वज़न उठाना (अतिव्यायाम) आपके जोड़ों को अंदर से अपाहिज बना सकता है। वर्कआउट के बाद होने वाले भयंकर दर्द को सिर्फ "मसल्स गेन" समझकर पेनकिलर्स के भरोसे छोड़ना आपकी कार्टिलेज और लिगामेंट्स को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। जब सीढ़ियाँ चढ़ना या थोड़ा सा मुड़ना भी एक दर्दनाक सज़ा बन जाए, तो इसे इग्नोर न करें। आयुर्वेद की प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म थेरेपी और सही वात-शामक डाइट आपके डैमेज जोड़ों को दोबारा ताकत देकर प्राकृतिक रूप से रिपेयर कर सकते हैं। अपने शरीर के खौफनाक संकेतों को सुनें, गलतियों को सुधारें और जीवा आयुर्वेद के साथ दर्द-मुक्त फिटनेस की ओर लौटें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

मांसपेशियों का हल्का खिंचाव (अच्छा दर्द) 24 से 48 घंटे में अपने आप कम हो जाता है। लेकिन अगर दर्द तीखा है, सुई चुभने जैसा है, जोड़ों के बिल्कुल अंदर है, और 3-4 दिन बाद भी बढ़ रहा है, तो यह इंजरी (बुरा दर्द) का साफ संकेत है।

गलत पोस्चर में घुटने जब पंजों से बहुत आगे चले जाते हैं, तो शरीर का सारा वज़न जांघों पर पड़ने के बजाय सीधे घुटने की गद्दी (Cartilage) और लिगामेंट्स पर पड़ता है, जिससे वे बुरी तरह कुचले जाते हैं और डैमेज होते हैं।

बिल्कुल नहीं! पेनकिलर सिर्फ आपके दिमाग को दर्द महसूस करने से रोकता है, लेकिन अंदर की चोट जस-की-तस रहती है। दर्द न होने के कारण आप दोबारा भारी वज़न उठाते हैं, जिससे चोट हमेशा के लिए भयंकर बन जाती है और सर्जरी की नौबत आ जाती है।

जी हाँ! आयुर्वेद की 'जानु बस्ती' और 'कटि बस्ती' थेरेपी के साथ-साथ अश्वगंधा, शल्लकी और हड़जोड़ जैसी जड़ी-बूटियों की मदद से कार्टिलेज और लिगामेंट्स को प्राकृतिक पोषण देकर रिपेयर किया जा सकता है।

आयुर्वेद में 'हड़जोड़' (Hadjod) हड्डियों को जोड़ने और ताकत देने के लिए सबसे बेहतरीन है। इसके साथ ही अश्वगंधा माँसपेशियों और नसों को लोहे जैसी ताकत और रिकवरी देता है।

कभी नहीं! लिगामेंट टियर या सूजन की अवस्था में किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति (मालिश वाले) से भारी मालिश करवाने से चोट और भयंकर हो जाती है। आयुर्वेद में केवल हल्के हाथ से औषधीय तेल (अभ्यंग) का प्रयोग बताया गया है।

वर्कआउट करने वालों को हमेशा ताज़ा और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। जोड़ों में चिकनाई (Lubrication) बनाए रखने के लिए शुद्ध देसी गाय का घी, दूध, सफेद तिल और ड्राई फ्रूट्स सबसे बेहतरीन हैं। रूखी प्रोटीन बार्स और ठंडा पानी वात बढ़ाते हैं।

जी हाँ। आयुर्वेद में इसे 'अतिव्यायाम' कहा गया है। अपनी क्षमता से ज़्यादा पसीना बहाने और शरीर को रिकवरी का समय न देने से शरीर का 'वात दोष' भड़क जाता है, जो जोड़ों की प्राकृतिक ग्रीस (श्लेषक कफ) को पूरी तरह सुखा देता है।

जी हाँ! ज़्यादातर स्लिप डिस्क के मामले बिना सर्जरी के आयुर्वेद से ठीक हो जाते हैं। पंचकर्म की 'कटि बस्ती' और वात-शामक औषधियों से दबी हुई नस खुल जाती है और रीढ़ की हड्डी की गद्दी अपनी जगह पर सेट होने लगती है।

तीव्र दर्द और सूजन में शुरुआती 2 से 3 हफ्तों में ही काफी आराम मिल जाता है। लेकिन डैमेज हुए लिगामेंट्स को रिपेयर करने और घुटनों को पूरी तरह ताकत देने में आमतौर पर 3 से 6 महीने का अनुशासित समय लगता है।

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