Diseases Search
Close Button
 
 

Late Night Dinner GERD & Ulcer risk क्यों बढ़ाता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज की तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में रात को 10 या 11 बजे डिनर करना और खाते ही सीधे बिस्तर पर लेट जाना एक बहुत ही आम लाइफस्टाइल बन चुका है। अक्सर हम ऑफिस की थकान के कारण भारी खाना खाते हैं और तुरंत सो जाते हैं। कुछ घंटों बाद आधी रात को अचानक सीने में भयंकर जलन होती है, गले में खट्टा और कड़वा पानी आ जाता है, और ऐसा महसूस होता है जैसे पेट में आग लग गई हो। ज़्यादातर लोग इसे महज़ एक 'आम गैस' समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं या कोई एंटासिड (गैस की गोली) पीकर वापस सो जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि लेट नाइट डिनर (Late night dinner) और तुरंत सो जाने की यह आदत आपके शरीर के अंदर एक टाइम बम तैयार कर रही है? रात में होने वाली यह एसिडिटी कोई सामान्य गैस नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे 'गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज' (GERD) और पेट के साइलेंट अल्सर (Silent Ulcers) जैसी भयंकर बीमारियों की नींव रख रही है। दिन के मुकाबले रात में बढ़ने वाला तेज़ाब आपके पेट और भोजन नली को कई गुना ज़्यादा नुकसान पहुँचाता है।

लेट नाइट डिनर से GERD (गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज) का रिस्क क्यों बढ़ता है?

GERD एक ऐसी क्रोनिक (पुरानी) बीमारी है जिसमें पेट का तेज़ाब बार-बार ऊपर की तरफ भोजन नली (Esophagus) में वापस आने लगता है। लेट नाइट डिनर इस प्रक्रिया को सीधे तौर पर ट्रिगर करता है। इसके पीछे कई शारीरिक और वैज्ञानिक कारण हैं:

  • लोअर इसोफेजियल स्फिंक्टर (LES) का ढीला पड़ना: हमारे पेट और भोजन नली के बीच एक वाल्व (Valve) होता है जो खाने को पेट में जाने देता है और फिर बंद हो जाता है ताकि एसिड ऊपर न आए। लगातार लेट और भारी खाने से इस वाल्व पर भारी दबाव पड़ता है और यह ढीला होकर कमज़ोर हो जाता है।
  • गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का न होना: दिन में जब हम खड़े या बैठे होते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण एसिड को पेट में नीचे रखता है। लेकिन जब आप भारी डिनर के तुरंत बाद लेट जाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण का यह सहारा खत्म हो जाता है। पेट का सारा एसिड आसानी से वाल्व को पार करके सीधे गले तक आ जाता है।
  • पेट खाली होने की धीमी गति (Delayed Gastric Emptying): रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज़्म और पाचन धीमा हो जाता है। लेट खाया हुआ भारी खाना पेट में लंबे समय तक पड़ा रहता है, जिससे उसे पचाने के लिए पेट को सामान्य से बहुत ज़्यादा एसिड बनाना पड़ता है।

लेट डिनर से पेट में अल्सर (Stomach Ulcer) का खतरा क्यों बढ़ता है?

जिस सीने की जलन को आप रात में पानी पीकर शांत कर देते हैं, वह असल में आपके पेट और आंतों में गहरे और जानलेवा घाव (Ulcers) बना रही होती है। लेट डिनर इसका सबसे बड़ा कारण है।

  • म्यूकोसा (Mucosa) परत का जलना: हमारे पेट के अंदर एक नाज़ुक सुरक्षा परत होती है जिसे म्यूकोसा कहते हैं। जब आप देर रात खाते हैं, तो पेट पूरी रात तेज़ाब (Hydrochloric Acid) का निर्माण करता रहता है। लगातार घंटों तक इस तेज़ एसिड के संपर्क में रहने से यह सुरक्षा परत कमज़ोर होकर पिघलने लगती है।
  • एसिड का एक जगह इकट्ठा होना (Pooling of Acid): जब आप सो रहे होते हैं, तो पेट की गति (Peristalsis) धीमी होती है। एसिड आंतों में आगे जाने के बजाय पेट के एक ही हिस्से में इकट्ठा होने लगता है और वहाँ की मांसपेशियों को जलाकर गहरे घाव (Peptic Ulcers) बना देता है।
  • एच. पाइलोरी (H. Pylori) का सक्रिय होना: पेट का एसिडिक और अस्वस्थ माहौल खराब बैक्टीरिया (जैसे H. Pylori) को पनपने का मौका देता है, जो अल्सर को और भी ज़्यादा गहरा और खतरनाक बना देते हैं।

दिन और रात की एसिडिटी में क्या बड़ा अंतर है?

हम दिन में भी एसिडिटी का अनुभव करते हैं, लेकिन रात की एसिडिटी शरीर को बहुत ज़्यादा गहरा और स्थायी नुकसान पहुँचाती है।

  • लार (Saliva) का कम बनना: दिन में हमारी लार (जो प्रकृति में अल्कलाइन होती है) एसिड को बेअसर करती है। रात की गहरी नींद में लार बनना लगभग बंद हो जाता है, जिससे एसिड का जलाना दोगुना हो जाता है।
  • निगलने की प्रक्रिया का रुकना: दिन में हम लगातार थूक निगलते हैं, जिससे भोजन नली में आया एसिड वापस नीचे चला जाता है। सोते समय हम निगलते नहीं हैं, इसलिए एसिड घंटों तक भोजन नली में पड़ा रहता है और उसकी नाज़ुक परत को बुरी तरह जलाता रहता है।

इस डैमेज को नज़रअंदाज़ करने के खतरनाक परिणाम

अगर लेट डिनर और रात की एसिडिटी को महीनों तक इग्नोर किया जाए, तो यह आपके शरीर के सबसे अहम अंगों को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती है।

  • निगलने में परेशानी (Strictures): लगातार एसिड से जलने और हील होने की प्रक्रिया में भोजन नली सिकुड़ जाती है और वहाँ स्कार्स (Scars) बन जाते हैं। इसके कारण इंसान को खाना या पानी निगलने में भयंकर दर्द और रुकावट महसूस होती है।
  • कैंसर का खतरा (Barrett's Esophagus): सालों तक एसिड की मार सहने से भोजन नली की कोशिकाएं अपना रूप बदल लेती हैं। इस स्थिति को 'बैरेट्स इसोफेगस' कहते हैं, जो आगे चलकर भोजन नली के कैंसर (Esophageal Cancer) का एक बहुत बड़ा कारण बनता है।
  • क्रोनिक खाँसी और अस्थमा: रात को सोते समय जब एसिड गले तक आता है, तो उसकी कुछ बारीक बूंदें गलती से आपकी सांस की नली और फेफड़ों में चली जाती हैं, जिससे भयंकर सूखी खाँसी और अस्थमा के अटैक आते हैं।

एंटासिड (Antacids) का धोखा: क्या रोज़ गोलियाँ खाना सही है?

जब रात को जलन होती है, तो तुरंत एक गैस की गोली (PPIs जैसे पैंटोप्राज़ोल) खाना एक जादू की तरह लगता है। लेकिन लंबे समय तक इनका रोज़ाना इस्तेमाल आपके शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है।

  • एसिड को ज़बरदस्ती रोकना: ये गोलियाँ पेट में एसिड बनाने वाले पंप को ही बंद कर देती हैं। लेकिन पेट में एसिड खाने को पचाने और खतरनाक बैक्टीरिया को मारने के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • पोषण की भारी कमी: एसिड के बिना आपका शरीर कैल्शियम, आयरन और विटामिन बी-12 को खाने से सोख (Absorb) नहीं पाता, जिससे हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और भयंकर थकान आती है।
  • एसिड रिबाउंड (Rebound Acidity): जैसे ही आप कुछ दिनों के लिए ये गोलियाँ खाना छोड़ते हैं, पेट पहले से दोगुनी ताकत से और ज़्यादा एसिड निकालता है, जिससे जलन और भी भयंकर हो जाती है।

आयुर्वेद इस बीमारी को कैसे समझता है? (अम्लपित्त और अग्निमांद्य)

आधुनिक विज्ञान जिसे GERD या अल्सर कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले 'अम्लपित्त' (Amlapitta) के रूप में बहुत ही गहराई से समझा था। यह हमारी पाचन अग्नि के बिगड़ने का सीधा परिणाम है।

  • पित्त दोष का भड़कना: आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में पाचन का काम 'पित्त दोष' (अग्नि तत्व) करता है। लेट नाइट और भारी खाने से यह पित्त बहुत ज़्यादा खट्टा और आक्रामक (अम्ल) हो जाता है।
  • अग्निमांद्य (Agnimandya): रात को भारी खाना खाने से हमारी 'पाचन अग्नि' सुस्त पड़ जाती है। खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है और खमीर (Fermentation) उठता है, जो भारी मात्रा में खट्टा एसिड बनाता है।
  • ऊर्ध्वग अम्लपित्त: जब यह खट्टा और सड़ा हुआ एसिड नीचे आंतों में जाने के बजाय ऊपर की तरफ (गले की ओर) उछलता है, तो इसे 'ऊर्ध्वग अम्लपित्त' कहते हैं। आयुर्वेद सिर्फ इस एसिड को सुन्न नहीं करता, बल्कि बढ़े हुए पित्त को शांत करके अग्नि को सुधारता है।

पेट और भोजन नली को हील करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें पेट की आग को बुझाने और अल्सर को शांत करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं। ये बिना किसी साइड इफेक्ट के काम करती हैं।

  • मुलेठी (Licorice): यह GERD और अल्सर के लिए आयुर्वेद की सबसे चमत्कारी दवा है। यह पेट और भोजन नली की जली हुई दीवारों पर एक प्राकृतिक और ठंडी परत (Mucus lining) बना देती है, जिससे जलन तुरंत शांत होती है और अल्सर तेज़ी से सूखता है।
  • शतावरी (Shatavari): यह भड़के हुए पित्त को तुरंत शांत करती है, पेट की भयंकर सूजन (Gastritis) को खत्म करती है और पाचन तंत्र की नाज़ुक परतों को अंदरूनी ताकत देती है।
  • आंवला (Amla): विटामिन सी से भरपूर आंवला प्राकृतिक रूप से पेट के अतिरिक्त एसिड को काटता है, इम्युनिटी बढ़ाता है और अल्सर से डैमेज हुए ऊतकों (Tissues) की मरम्मत करता है।
  • गिलोय (Giloy): यह शरीर से अतिरिक्त गर्मी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और स्ट्रेस लेवल को कम करके पाचन को सुधारती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी रात की एसिडिटी और अल्सर में कैसे काम करती है?

जब एंटासिड काम करना बंद कर दें और सीने में आग जैसी जलन रातों की नींद हराम कर दे, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर की गहराई में जाकर इस तेज़ाब को बाहर निकाल फेंकती है।

  • विरेचन (Virechana): यह अम्लपित्त और अल्सर के लिए सबसे अचूक और जादुई पंचकर्म इलाज है। इसमें खास जड़ी-बूटियों के माध्यम से शरीर, लिवर और आंतों में सालों से जमा हुए भयंकर और सड़े हुए पित्त (एसिड) को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है। पेट के साफ होते ही एसिडिटी तुरंत खत्म हो जाती है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): अगर रात की एसिडिटी का कारण मानसिक तनाव या नींद की कमी है, तो माथे पर औषधीय तेलों की लगातार धारा गिराई जाती है। यह दिमाग को इतना शांत कर देती है कि तनाव के कारण बनने वाले एसिड का उत्पादन पूरी तरह रुक जाता है और गहरी नींद आती है।

GERD और अल्सर से बचने के लिए पित्त-शामक डाइट और लाइफस्टाइल प्लान

आप जो खाते हैं और जिस समय खाते हैं, वही आपके पेट की जलन को तय करता है। इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए एक सख़्त डाइट और लाइफस्टाइल का पालन करना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
जल्दी रात का खाना (Early Dinner) सोने से 2–3 घंटे पहले हल्का भोजन (जैसे मूंग की खिचड़ी, ओट्स) लें ताकि पेट खाली रहे देर रात भारी भोजन करना
आहार का सिद्धांत हल्का, ठंडा और सुपाच्य भोजन लें जो पित्त को शांत करे बहुत ज़्यादा गर्म, मसालेदार, खट्टा और तीखा भोजन
क्या बिल्कुल न खाएं सादा, कम मसाले वाला और प्राकृतिक भोजन अपनाएँ टमाटर, खट्टे फल, कच्चा प्याज़, लहसुन, जंक फूड, रिफाइंड चीनी, लाल मिर्च, चाय, कॉफी, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स
सिरहाना ऊँचा रखें (Elevate Head) सोते समय सिर और छाती को 6–8 इंच ऊँचा रखें ताकि एसिड नीचे रहे बिल्कुल सपाट लेटना जिससे एसिड ऊपर आ सके
बाईं करवट सोएं (Left Side Sleeping) बाईं करवट सोएं जिससे एसिड वाल्व के नीचे रहे और रिफ्लक्स कम हो दाईं करवट या पीठ के बल सोना जिससे रिफ्लक्स बढ़ सकता है

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी केमिकल गोली (ईनो) नहीं है जो 6 सेकंड में जलन को सुन्न कर दे। आपके पेट के बिगड़े हुए वाल्व को ठीक करने और छिले हुए घावों को भरने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपके पेट की आग शांत होगी; रात को सीने की जलन, खट्टा पानी आना और भारीपन काफी कम होने लगेंगे। नींद पहले से गहरी और बेहतर होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: भड़का हुआ पित्त शांत होने से गले की ख़राश, सूखी खांसी और पेट का तीखा दर्द खत्म होने लगेगा। पेट और भोजन नली के घाव (Ulcers) धीरे-धीरे भरने लगेंगे।
  • 3 से 6 महीने तक: आपके पेट और भोजन नली की सुरक्षा परत (Mucosa) अंदर से पूरी तरह दोबारा बन जाएगी। आपका वाल्व (LES) ताकतवर हो जाएगा। आप बिना किसी एंटासिड के आराम से सो सकेंगे और सामान्य जीवन जी सकेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मुझे मुख्य रूप से हाइपरएसिडिटी की समस्या पिछले 21 सालों से थी। इसकी वजह से मुझे गैस फॉर्मेशन, जोड़ों में दर्द जैसी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। जब एसिडिटी बहुत बढ़ गई थी, तो मेरे चेहरे पर ब्लैक पैचेज आ गए थे और चेहरा काला पड़ने लगा था। 

तभी मेरे एक साथी ने मुझे जीवा से इलाज कराने की सलाह दी। मैं न्यू बॉम्बे में जीवा आयुर्वेद क्लीनिक के डॉक्टर शिरोडकर से मिला। उन्होंने बताया कि मुझे मुख्य रूप से वात और पित्त की समस्या है। उन्होंने मेरे लिए एक पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट शुरू किया और साथ ही डाइट कंट्रोल करने के लिए कहा। 

शुरू में मैंने एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों को साथ रखा, लेकिन डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे एलोपैथी कम करना शुरू किया। लगभग एक महीने बाद मैं पूरी तरह से एलोपैथी दवाएं बंद कर चुका था। पिछले 3 महीने के ट्रीटमेंट से मुझे 90% से ज्यादा फायदा हुआ है। इतने वंडरफुल रिजल्ट्स आ सकते हैं, यह मुझे पहले पता नहीं था। थैंक्स टू जीवा पर्सनलाइज्ड आयुर्वेद।

AB Mukharjee

Navi Mumbai

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

रात की एसिडिटी, GERD और अल्सर के इस दर्दनाक रूप से बचने के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य एंटासिड (PPIs) से एसिड को पूरी तरह ब्लॉक करना, जिससे लंबे समय में पाचन और हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं पित्त को शांत कर एसिड को संतुलित करना और वाल्व को मज़बूत बनाना
शरीर को देखने का नज़रिया समस्या को केवल मैकेनिकल या केमिकल असंतुलन मानना इसे ‘अम्लपित्त’ व पाचन अग्नि का दोष मानकर पंचकर्म (विरेचन) से प्राकृतिक हीलिंग को बढ़ावा देना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट पर कुछ ध्यान, लेकिन मुख्य ज़ोर दवाइयों पर पित्त-शामक डाइट, जल्दी डिनर और ठंडी तासीर वाले भोजन को उपचार का मुख्य आधार
लंबा असर दवाइयाँ बंद करते ही एसिड दोबारा तेज़ी से बनना (Acid Rebound) जड़ी-बूटियों (जैसे मुलेठी) से म्यूकोसा परत को पुनः बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में काम

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

एसिडिटी को महज़ आम गैस मानकर घर पर ही ईनो पीकर ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कई बार यह कैंसर या अल्सर फटने का संकेत होता है। अगर आपको ये गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • काले रंग का मल (Tarry Stool): अगर आपका मल बिल्कुल तारकोल की तरह काला और चिपचिपा आ रहा है (यह पेट या आंतों के अंदर अल्सर से ब्लीडिंग का पक्का संकेत है)।
  • उल्टी में खून आना: अगर आपको उल्टियाँ हो रही हैं और उल्टी में ताज़ा लाल खून या कॉफी के पाउडर जैसा (Coffee-ground) भूरा पदार्थ आ रहा है।
  • निगलने में भयंकर तकलीफ (Dysphagia): अगर आपको खाना या पानी निगलते समय ऐसा लगे कि वह सीने में जाकर फँस रहा है या बहुत तेज़ दर्द कर रहा है।
  • बिना कोशिश के वज़न गिरना: अगर आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिर रहा हो और खाने की बिल्कुल इच्छा न हो।
  • अचानक सांस रुकना या दम घुटना: अगर रात को सोते समय अचानक एसिड गले में आ जाए और आपका दम घुटने लगे, जिससे सांस लेने में भारी दिक्कत हो।

निष्कर्ष

लेट नाइट डिनर (Late night dinner) और एसिड रिफ्लक्स का यह कॉम्बिनेशन कोई मामूली सीने की जलन नहीं है; यह आपके शरीर के अंदर एक सुलगती हुई आग है जो आपके सबसे अहम अंगों को धीरे-धीरे खा रही है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना एंटासिड या गैस के सिरप से बंद कर देते हैं, तो वह उबलता हुआ तेज़ाब आपकी भोजन नली को छीलकर GERD, साइलेंट अल्सर, क्रोनिक खांसी, अस्थमा और यहाँ तक कि कैंसर (Barrett's Esophagus) जैसी भयंकर बीमारियों की नींव रख देता है। यह सिर्फ एक बीमारी नहीं है, यह आपकी देर रात भारी खाना खाने, तुरंत सो जाने और तनाव भरी जीवनशैली का सीधा परिणाम है। इस समस्या को रोज़ाना गोलियों से दबाकर अपनी हड्डियों और पाचन को खोखला करने के बजाय, इसे जड़ से खत्म करना ही समझदारी है। आयुर्वेद आपको इस एसिड के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का एक सुरक्षित और प्राकृतिक समाधान देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, मुलेठी और शतावरी जैसी ठंडी जड़ी-बूटियों, पंचकर्म की विरेचन थेरेपी और सही पित्त-शामक जीवनशैली (जैसे जल्दी डिनर और बाईं करवट सोना) को अपनाकर आप अपने पेट की आग को हमेशा के लिए शांत कर सकते हैं। अपने शरीर के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लें, सिर्फ सिम्पटम को न दबाएं, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपने पेट को शांत करके रोज़ाना एक गहरी और चैन की नींद पाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

देर रात खाने के बाद जब आप लेट जाते हैं, तो पेट घंटों तक तेज़ एसिड (तेज़ाब) बनाता रहता है। क्योंकि खाना आगे नहीं बढ़ पाता, यह एसिड एक ही जगह पर इकट्ठा होकर पेट की सुरक्षा परत (म्यूकोसा) को जला देता है, जिससे गहरे अल्सर बन जाते हैं।

रात को जब हम सीधे लेट जाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) काम नहीं करता। पेट का एसिड आसानी से ढीले वाल्व (LES) से होकर भोजन नली में आ जाता है और घंटों तक वहीं पड़ा रहकर नाज़ुक परतों को जलाता रहता है, जबकि दिन में खड़े रहने से वह नीचे रहता है।

ये गोलियाँ पेट में एसिड बनना बंद कर देती हैं। एसिड के बिना खाना ठीक से पचता नहीं है और शरीर कैल्शियम व विटामिन बी-12 सोख नहीं पाता। लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और गोलियाँ छोड़ते ही एसिड दोगुनी तेज़ी से वापस आता है।

रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले खा लेना चाहिए। ऐसा करने से सोते समय तक पेट का ज़्यादातर खाना पच कर आगे खिसक जाता है और पेट खाली हो जाता है, जिससे एसिड के ऊपर उछलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

हमेशा बाईं करवट (Left side) सोना चाहिए। हमारे पेट की प्राकृतिक बनावट ऐसी है कि बाईं करवट सोने पर पेट का एसिड वाल्व (LES) के लेवल से नीचे रहता है, जिससे रिफ्लक्स (एसिड का ऊपर आना) लगभग रुक जाता है।

बिल्कुल! कैफीन (चाय/कॉफी में मौजूद) और शराब पेट और भोजन नली के बीच के वाल्व (LES) को ढीला कर देते हैं। जब वाल्व ढीला हो जाता है, तो पेट का तेज़ाब बहुत आसानी से ऊपर गले की तरफ आ जाता है।

जी हाँ! आयुर्वेद में मुलेठी (Licorice) और शतावरी जैसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो भोजन नली और पेट की जली हुई दीवारों पर एक प्राकृतिक, ठंडी सुरक्षा परत बना देती हैं, जिससे जलन तुरंत शांत होती है और अल्सर प्राकृतिक रूप से भर जाते हैं।

जब पेट का एसिड उछलकर गले तक आता है, तो उसकी कुछ बारीक बूंदें गलती से सांस की नली (Trachea) और फेफड़ों में चली जाती हैं। इससे भयंकर जलन होती है, जिसके कारण रात को अचानक तेज़ खांसी उठती है और दम घुटने लगता है।

मल का रंग डामर या तारकोल जैसा काला होना या उल्टी में खून आना एक बहुत बड़ी मेडिकल इमरजेंसी है। इसका सीधा मतलब है कि पेट या भोजन नली के अंदर अल्सर फट गया है और वहाँ से खून बह रहा है। तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सही आयुर्वेदिक डाइट और जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से शुरुआती जलन, खट्टा पानी आना और खांसी में कुछ ही हफ्तों में भारी आराम मिल जाता है। लेकिन भोजन नली के अंदरूनी अल्सर और घावों को पूरी तरह भरने और वाल्व को ताकत देने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us