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Diabetes Neuropathy में पैरों की चुभन रात को क्यों बढ़ती है? आयुर्वेद का जवाब

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल डायबिटीज़ (Diabetes) के मरीज़ों में पैरों में भयंकर जलन और सुई चुभने (Neuropathy) की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। रात होते ही यह दर्द इतना भयंकर हो जाता है कि नींद पूरी तरह उड़ जाती है। एलोपैथी में इसे दबाने के लिए अक्सर नसों को सुन्न करने वाली गोलियाँ (Nerve pills) दी जाती हैं। ये दवाइयाँ दर्द को कुछ समय के लिए सुन्न ज़रूर करती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से किडनी और लिवर पर बुरा असर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या बढ़े हुए शुगर से 'वात-पित्त' दोष के भड़कने और नसों के सूखने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से नसों को ताकत देकर इस बीमारी को जड़ से मिटाता है ताकि आपकी सेहत वापस लौट सके।

Diabetes Neuropathy असल में क्या है?

डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy) नसों से जुड़ी एक भयंकर जटिल स्थिति है। जब शरीर में ब्लड शुगर (Blood Sugar) का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो वह खून में मौजूद ऑक्सीजन को सोख लेता है और नसों की बाहरी परत (Myelin sheath) को भयंकर रूप से डैमेज कर देता है। सबसे पहले इसका असर पैरों और पंजों की लंबी नसों पर पड़ता है। नसों को सुन्न करने वाली गोलियों का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी और अस्थायी इलाज है, जो दिमाग को दर्द का सिग्नल (Signal) मिलने से रोकता है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर सुस्त पड़ी जठराग्नि और डैमेज हो रही नसों में चल रही होती है।

Diabetes Neuropathy के भयंकर प्रकार

डायबिटिक न्यूरोपैथी मुख्य रूप से चार भयंकर प्रकार की होती है:

  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें पैरों, पंजों और कभी-कभी हाथों की नसें भयंकर रूप से डैमेज हो जाती हैं, जिससे सुन्नपन और सुई चुभने जैसा दर्द होता है।
  • ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी (Autonomic Neuropathy): यह शरीर के अंदरूनी अंगों (जैसे दिल, पेट, आँखें) की नसों को भयंकर रूप से डैमेज करता है, जिससे पाचन खराब होता है और चक्कर आते हैं।
  • प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी (Proximal Neuropathy): यह जाँघों, कूल्हों और नितंबों (Hips) की नसों को डैमेज करता है, जिससे बैठने के बाद उठने में भयंकर तकलीफ होती है।
  • फोकल न्यूरोपैथी (Focal Neuropathy): इसमें शरीर की कोई एक विशेष नस (जैसे चेहरे या आँख की) अचानक भयंकर रूप से डैमेज हो जाती है, जिससे अचानक भयंकर दर्द होता है।

पैरों में दिखने वाले इन शारीरिक लक्षणों के भयंकर संकेत

नसों के डैमेज होने पर पैरों द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पैरों में सुई चुभना (Tingling & Pricking): पैरों के तलवों में ऐसा महसूस होना जैसे हज़ारों सुइयाँ या चींटियाँ एक साथ चल रही हों।
  • भयंकर जलन (Burning Sensation): पैरों में ऐसी भयंकर जलन होना जैसे किसी ने पैरों को आग पर रख दिया हो, जो रात को और भड़क जाती है।
  • सुन्नपन (Numbness): पैरों में कोई एहसास न बचना, जिससे ज़मीन पर चलते हुए यह पता ही न चले कि पैर कहाँ पड़ रहा है। चप्पल पैर से निकल जाए तो भी पता नहीं चलता।
  • माँसपेशियों में भयंकर ऐंठन (Muscle Cramps): रात को सोते समय पिंडलियों (Calves) की नसें अचानक भयंकर रूप से चढ़ जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपनी जाँच कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

रात को पैरों में चुभन और दर्द बढ़ने के असली कारण

दिन के बजाय रात में पैरों का दर्द भयंकर होने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • तापमान का गिरना: रात के समय वातावरण का तापमान कम होता है, जिससे डैमेज नसों का 'वात' दोष भयंकर रूप से भड़क जाता है और सुन्नपन व चुभन तेज़ हो जाती है।
  • ध्यान का केंद्रित होना: दिन भर आप काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन रात को शांति होते ही दिमाग का पूरा ध्यान पैरों के दर्द और जलन पर चला जाता है।
  • हार्मोनल बदलाव: रात में शरीर का मेटाबॉलिज़्म और खून का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे कमज़ोर नसों तक पूरा ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाता।
  • दवाइयों का असर खत्म होना: दिन में खाई गई दर्द निवारक गोलियों का असर रात तक आते-आते खत्म हो जाता है, जिससे भयंकर चुभन वापस लौट आती है।

Neuropathy को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस भयंकर स्थिति को अगर सिर्फ 'पैरों की थकावट' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • डायबिटिक फुट अल्सर (Diabetic Foot Ulcer): पैर सुन्न होने के कारण छोटी सी चोट, कंकड़ चुभने या कट का पता नहीं चलता, जो बाद में भयंकर घाव (Ulcer) बन जाता है।
  • पैर कटने का खतरा (Amputation): अगर घाव में भयंकर इन्फेक्शन (Infection) फैल जाए और वह ठीक न हो, तो पैर काटने तक की भयंकर नौबत आ सकती है।
  • गैंग्रीन (Gangrene): नसों के पूरी तरह ब्लॉक होने से पैरों के ऊतक (Tissues) मरने लगते हैं, जो एक जानलेवा स्थिति है।

Diabetes Neuropathy पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में इस समस्या को 'प्रमेह' (Diabetes) के उपद्रव और 'वात-पित्त' दोष के भयंकर असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, जब बढ़ा हुआ शुगर शरीर की रस और रक्त धातु को दूषित करता है, तो दूषित 'पित्त' नसों में भयंकर जलन पैदा करता है। साथ ही, जब बढ़ा हुआ 'वात' नसों को सुखा देता है, तो पैरों में सुन्नपन और सुई चुभने जैसी तकलीफ होती है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। आयुर्वेद में बस नसों को सुन्न करना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शुगर कंट्रोल हो, और नसें प्राकृतिक रूप से ताकतवर बनें।

जीवा आयुर्वेद Neuropathy को संतुलित करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रही जलन, रात के दर्द और सुन्नपन की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की शुगर का स्तर (HbA1c) और ली जा रही एलोपैथिक दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-पित्त दोष को पकड़ने के बाद ही नसों को हील करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

नसों को प्राकृतिक रूप से ताकत देने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में नसों को अंदर से रिपेयर (Repair) करने, जलन कम करने और शुगर कंट्रोल करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • शिलाजीत (Shilajit): यह नसों को ताकत देने और शुगर को कंट्रोल करने के लिए आयुर्वेद का सबसे चमत्कारी रसायन है। यह कमज़ोर पैरों में जान डाल देता है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह सूखी और डैमेज नसों को अंदरूनी ताकत देता है और रात में भड़कने वाले भयंकर वात और तनाव को शांत करता है।
  • गिलोय (Giloy): यह भयंकर सूजन को सोख लेती है और खून से अतिरिक्त शुगर व टॉक्सिन्स (Toxins) को बाहर निकालती है।
  • हरिद्रा (Turmeric/Haldi): यह नसों के घाव भरती है और भड़के हुए पित्त को शांत कर पैरों की भयंकर जलन को तुरंत रोकती है।

नसों को खोलने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, वात को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • पादाभ्यंग (Padabhyanga): औषधीय तेलों (जैसे क्षीरबला तेल) से पैरों और तलवों की मालिश की जाती है। यह पैरों के सूखेपन को मिटाता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और रात को चैन की नींद लाता है।
  • बस्ती (Basti): वात को जड़ से खत्म करने के लिए औषधीय तेलों का एनीमा (Enema) दिया जाता है, जो पैरों की नसों को अंदर से पोषण देता है।

Neuropathy के ट्रिगर्स को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस बीमारी में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गर्म और वात नाशक भोजन: मूंग की दाल और गाय का शुद्ध घी आहार में शामिल करें, जो शरीर में चिकनाहट बढ़ाते हैं।
  • करेला और जामुन: इनका रस रोज़ाना पीने से ब्लड शुगर प्राकृतिक रूप से कंट्रोल रहता है, जो नसों को और डैमेज होने से बचाता है।
  • मेथी दाना का पानी: सुबह खाली पेट मेथी का पानी पिएँ, यह इंसुलिन (Insulin) को बैलेंस करता है।

क्या न खाएँ?

  • चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: मिठाइयाँ, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि यही नसों को सड़ाने का काम करते हैं।
  • मैदा और बासी भोजन: बिस्कुट, पिज़्ज़ा, और रिफाइंड आटा शरीर में भयंकर 'आम' और वात बढ़ाते हैं।
  • शराब और धूम्रपान: ये शरीर की नसों को भयंकर रूप से सिकोड़ देते हैं, जिससे पैरों में खून पहुँचना बिल्कुल बंद हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ शुगर की रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, पैरों की जलन और रात में नींद टूटने को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा खाई जा रही नसों की गोलियों की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पैरों में छाले या घाव और कब्ज़ होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' और दूषित वात-पित्त के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर पैरों में चुभन अभी शुरू हुई है, तो शुगर कंट्रोल करने और दवाइयों से 6 से 8 हफ्तों में ही जलन कम होने लगती है और नींद अच्छी आती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर पैर पूरी तरह सुन्न हैं और आप सालों से नसों की गोलियाँ खा रहे हैं, तो नसों को पूरी तरह 'रीसेट' होने और एहसास वापस आने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों (शिलाजीत, अश्वगंधा) और डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में सुन्नपन जड़ से खत्म हो जाता है और पैर कटने का भयंकर खतरा टल जाता है।

मरीज़ों का भरोसा – Neuropathy से मुक्ति का जीवन बदलने वाला अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयां उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयां शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य Gabapentin जैसी दवाओं से नसों के दर्द को नियंत्रित करना शिलाजीत, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों से नसों को प्राकृतिक रूप से पोषण और सपोर्ट देना
नज़रिया समस्या को नसों के डैमेज और दर्द तक सीमित मानना इसे वात-पित्त असंतुलन, बढ़ी हुई शुगर और कमज़ोर पाचन से जोड़कर देखना
उपचार तरीका दवाओं के ज़रिए दर्द के सिग्नल को कम करना हरिद्रा, पादाभ्यंग और आयुर्वेदिक थेरेपी से सूजन व जलन को शांत करने का प्रयास
डाइट और लाइफस्टाइल दवा और शुगर मॉनिटरिंग पर अधिक ज़ोर संतुलित आहार, शुगर नियंत्रण, वात-शामक भोजन और दिनचर्या पर फोकस
लंबा असर लंबे समय तक दवाओं से दुष्प्रभाव की संभावना नसों की ताकत, आराम और समग्र स्वास्थ्य सुधारने पर ध्यान

Neuropathy के भयंकर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

अगर सुन्नपन के साथ ये भयंकर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • पैर में कोई कट या छाला (Blister) हो जाए जो कई दिनों तक न भरे।
  • पैरों की उँगलियों का रंग अचानक नीला या काला पड़ने लगे (गैंग्रीन का संकेत)।
  • पैरों का सुन्नपन इतना बढ़ जाए कि आपको चप्पल पहनने या ज़मीन पर चलने का एहसास ही न हो।
  • पैरों के किसी घाव से भयंकर बदबू आने लगे या मवाद बहने लगे।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से डायबिटिक न्यूरोपैथी और रात में पैरों की भयंकर चुभन मुख्य रूप से बढ़े हुए ब्लड शुगर के कारण नसों के डैमेज होने और 'वात-पित्त' दोष के बिगड़ने से जुड़ी समस्या है। शुगर की वजह से नसों की परत सूख जाती है। सिर्फ नसों को सुन्न करने की गोली खाने से दर्द कुछ दिन के लिए महसूस नहीं होता, लेकिन बीमारी अंदर ही अंदर पैर को भयंकर रूप से सड़ा सकती है। इलाज में शरीर की शुद्धि, शिलाजीत और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ और शुगर-फ्री शुद्ध आहार सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपकी नसें बिना किसी केमिकल के जीवन भर प्राकृतिक रूप से काम करती रहें और आप दर्द-मुक्त रहें।

FAQs

रात के समय तापमान गिरने और शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से डैमेज नसों का वात दोष भयंकर रूप से भड़क जाता है। साथ ही, शांति होने के कारण दिमाग का पूरा ध्यान दर्द पर चला जाता है।

हाँ, यह एक भयंकर सच है। पैर सुन्न होने के कारण घाव या चोट का पता नहीं चलता। अगर उसमें इन्फेक्शन फैल जाए और वह ठीक न हो, तो पैर काटने (Amputation) की नौबत आ सकती है।

लंबे समय तक इनका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है। ये दवाइयाँ सिर्फ दर्द का एहसास रोकती हैं, बीमारी ठीक नहीं करतीं, और इनके भयंकर साइड इफेक्ट्स (जैसे चक्कर आना, लिवर कमज़ोर होना) होते हैं।

बिल्कुल। आयुर्वेद में वात को शांत करने वाली जड़ी-बूटियों (अश्वगंधा, शिलाजीत) और पादाभ्यंग की मदद से डैमेज नसों को फिर से ताकत दी जा सकती है, जिससे पैरों का एहसास वापस आ जाता है।

शुगर कंट्रोल करना बहुत ज़रूरी है ताकि नसें और डैमेज न हों। लेकिन जो नसें पहले ही सूख चुकी हैं, उन्हें दोबारा हील करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और पंचकर्म की सख्त ज़रूरत होती है।

अगर पैर में कोई खुला घाव या छाला नहीं है, तो औषधीय तेलों (जैसे क्षीरबला तेल) से पैरों की हल्की मालिश करना बहुत फायदेमंद है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और जलन तुरंत कम होती है।

हाँ, शिलाजीत डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए सबसे चमत्कारी रसायन है। यह ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करता है और कमज़ोर नसों में नई ऊर्जा भर देता है।

हाँ। जब शुगर के कारण नसों में खून पहुँचना बिल्कुल बंद हो जाता है, तो पैरों की कोशिकाएँ मरने लगती हैं और पैर काला पड़ने लगता है, जिसे गैंग्रीन कहते हैं। यह एक जानलेवा स्थिति है।

बिल्कुल। सिगरेट की निकोटीन नसों को भयंकर रूप से सिकोड़ देती है, जिससे डैमेज नसों तक बची-खुची ऑक्सीजन भी नहीं पहुँच पाती और सुन्नपन कई गुना बढ़ जाता है।

रोज़ रात को अपने पैरों को गुनगुने पानी से साफ करें, अच्छी तरह सुखाएँ और पैरों के तलवों व उँगलियों के बीच किसी भी कट, लालिमा या छाले की बारीकी से जाँच करें। कभी भी नंगे पैर न चलें।

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