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Kidney problems के शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हमारी किडनी (गुर्दे) शरीर के अंदर चुपचाप काम करने वाली एक मशीन की तरह है। जब तक यह ठीक से चल रही होती है, हमें पता भी नहीं चलता कि यह कितनी मेहनत कर रही है। अब सोचिए, अगर आपके घर से कूड़ा उठाने वाला कुछ दिन न आए, तो क्या हाल होगा? पूरे घर में बदबू और गंदगी फैल जाएगी। किडनी का काम भी बिल्कुल ऐसा ही है। अगर यह अपना काम धीमा कर दे, तो शरीर के अंदर गंदगी (टॉक्सिन्स) इकट्ठी होने लगती है, और फिर सिर से लेकर पैर तक अलग-अलग तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि किडनी खराब होने की शुरुआत में कोई बहुत बड़ा अलार्म नहीं बजता। थोड़ा बहुत थक जाना, पैरों पर हल्की सूजन आना या पेशाब में कुछ बदलाव होने को हम अक्सर यह सोचकर इग्नोर कर देते हैं कि शायद थकान या मौसम की वजह से ऐसा हो रहा है। लेकिन अगर हम शरीर के इन छोटे-छोटे इशारों को वक्त रहते पकड़ लें, तो आगे जाकर किसी बड़ी मुसीबत से आसानी से बचा जा सकता है।

आखिर किडनी करती क्या है?

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि किडनी का काम बस पेशाब बनाना है। जबकि सच तो यह है कि यह हमारे शरीर का सबसे ज़रूरी 'फिल्टर' है।

  • खून को साफ करना: किडनी चौबीसों घंटे हमारे खून को छानने का काम करती है। जो भी टॉक्सिन्स या एक्स्ट्रा पानी होता है, उसे पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती है।
  • पानी और नमक का बैलेंस: शरीर में कितना नमक (सोडियम), पोटैशियम और पानी रुकना चाहिए, इसका पूरा हिसाब-किताब किडनी ही रखती है। अगर यह बैलेंस जरा सा भी बिगड़ा, तो शरीर का पूरा सिस्टम हिल सकता है।
  • बीपी (ब्लड प्रेशर) कंट्रोल करना: यह बात कम ही लोग जानते हैं कि किडनी से कुछ ऐसे हॉर्मोन भी निकलते हैं, जो हमारे ब्लड प्रेशर को नॉर्मल बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं।

किडनी खराब होने की वजहें क्या हैं?

देखिए, किडनी कोई एक-दो दिन में खराब नहीं होती। हमारी रोज़ की कुछ गलतियां और लाइफस्टाइल इसे धीरे-धीरे अंदर से खराब करते हैं:

  • शुगर और हाई बीपी: अगर आपकी डायबिटीज़ (ब्लड शुगर) या ब्लड प्रेशर लंबे समय से आउट ऑफ कंट्रोल है, तो यह किडनी की खून छानने वाली बारीक छलनियों को फाड़ देता है। आज के समय में किडनी खराब होने के सबसे बड़े गुनहगार यही दोनों हैं।
  • उल्टा-सीधा खानपान: खाने में जरूरत से ज़्यादा नमक लेना, डिब्बे वाली चीजें खाना, पानी कम पीना और दिनभर बस बैठे रहना, ये सब आदतें किडनी पर बहुत ज़्यादा लोड डालती हैं।
  • पेनकिलर्स (दर्द की गोलियां): हल्का सा सिर दुखा या कमर दर्द हुआ और तुरंत बिना डॉक्टर से पूछे दर्द की गोली खा ली, यह आदत आपकी किडनी के लिए एक धीमे ज़हर का काम करती है।

आयुर्वेद किडनी की समस्या को कैसे देखता है?

आयुर्वेद की भाषा बहुत सरल है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का पूरा स्वास्थ्य हमारे पेट यानी हमारे 'पाचन' पर टिका है।

जब हमारी पाचन शक्ति (पेट की आग) कमज़ोर हो जाती है, तो हम जो भी खाते हैं वह ठीक से पच नहीं पाता। यह बिना पचा हुआ खाना पेट में ही सड़कर एक चिपचिपा और जहरीला पदार्थ बनाता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' (टॉक्सिन्स) कहते हैं। जब यह गंदगी हमारे शरीर के पेशाब वाले रास्तों (मूत्रवह स्रोतस) में जाकर जमा हो जाती है, तो वहां रुकावट पैदा करती है। इसी रुकावट और गंदगी की वजह से किडनी की बीमारियाँ शुरू होती हैं।

किडनी खराब होने के 8 शुरुआती संकेत (इन्हें कभी नज़रअंदाज़ न करें)

किडनी की परेशानी शुरू होने पर हमारा शरीर कुछ इशारे देता है, जिन्हें बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यहाँ ऐसे 6 मुख्य लक्षण बताए गए हैं:

  • पेशाब में बदलाव: रात में बार-बार टॉयलेट के लिए उठना पड़े, पेशाब में बहुत ज़्यादा झाग (बुलबुले) बने या उसका रंग अचानक गहरा हो जाए।
  • शरीर पर सूजन: जब किडनी पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो सुबह उठने पर आंखों के आस-पास, पैरों और टखनों में सूजन दिखने लगती है।
  • हर वक्त थकान: अच्छी नींद लेने के बाद भी अगर शरीर में जान महसूस न हो और सुस्ती रहे, तो यह खून में गंदगी जमा होने का साफ इशारा है।
  • भूख न लगना और मतली: शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ने से मुँह का स्वाद बदल जाता है, खाने का मन नहीं करता और सुबह के वक्त उल्टी जैसी फीलिंग आती है।
  • लगातार खुजली होना: खून में मिनरल्स का बैलेंस बिगड़ने से शरीर में तेज़ खुजली शुरू हो जाती है, जिसे लोग अक्सर आम एलर्जी समझ कर टाल देते हैं।
  • अचानक बीपी बढ़ना: अगर आपका ब्लड प्रेशर पहले नॉर्मल रहता था और अचानक से बहुत ज़्यादा रहने लगे, तो यह भी किडनी की गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेदिक खानपान

किडनी को खुश रखने के लिए आपको कोई बहुत महंगी चीजें नहीं खानी हैं, बस घर का सादा भोजन काफी है:

  • हल्का और सुपाच्य भोजन: ऐसा खाना खाएं जो पेट में आसानी से पच जाए। लौकी, तोरई, परवल जैसी मौसमी सब्जियां और मूंग की दाल सबसे अच्छी मानी जाती हैं।
  • सही मात्रा में पानी: पानी खूब पिएं, लेकिन अगर आपको पहले से किडनी की बीमारी है, तो पानी कितनी मात्रा में पीना है, यह अपने डॉक्टर से ही पूछें।
  • क्या न खाएं: खाने में ऊपर से कच्चा नमक डालना बिल्कुल बंद कर दें। बाजार के पैकेट बंद चिप्स, नमकीन, पापड़, अचार, बाहर का पिज्जा-बर्गर और बहुत ज़्यादा चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी तरह दूरी बना लें।

जीवनशैली (Lifestyle) में क्या बदलाव करें?

इन छोटी-छोटी आदतों को अपने रोज़ के रूटीन में शामिल करें और अपनी किडनी को हमेशा तंदुरुस्त रखें। 

  • नियमित दिनचर्या: आयुर्वेद मानता है कि शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है। समय पर सोना, समय पर उठना और रोज एक ही समय पर भोजन करना शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं।
  • रोजाना थोड़ा पसीना बहाएं: सुबह या शाम को कम से कम 30 से 40 मिनट तेज़ सैर (Walking) करें। इससे आपका ब्लड प्रेशर और शुगर दोनों कंट्रोल में रहेंगे।
  • टेंशन को दूर भगाएं: ज़्यादा तनाव लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। रोज 15 मिनट आंखें बंद करके लंबी गहरी सांसें लें (प्राणायाम) या ध्यान (Meditation) करें।
  • पूरी नींद लें: रात की 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें। रात के समय ही शरीर अपनी अंदरूनी टूट-फूट की मरम्मत करता है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

अगर आपको अपने शरीर में इनमें से कोई भी गंभीर लक्षण नज़र आए, तो बिल्कुल लापरवाही न बरतें: 

  • पेशाब में खून आना: या पेशाब का अचानक बहुत कम या बिल्कुल बंद हो जाना।
  • सांस लेने में तकलीफ: अचानक से बहुत ज्यादा सांस फूलना या भारीपन महसूस होना।
  • अचानक तेज सूजन: चेहरे, हाथ या पैरों का बहुत तेजी से सूज जाना।

निष्कर्ष

हमारी किडनी किसी भी अन्य मशीन की तरह है; अगर आप इसे सही ईंधन (अच्छा भोजन) देंगे, इसका रखरखाव (एक्सरसाइज) करेंगे और इसे कचरे (टॉक्सिन्स) से बचाएंगे, तो यह जीवन भर आपका साथ निभाएगी। शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को इग्नोर न करें। बीमारी को छुपाने या दबाने के बजाय, उसे शुरुआत में ही पहचान लें। समय पर की गई एक छोटी सी ब्लड या यूरिन टेस्ट की जांच आपके शरीर के इस अनमोल अंग को हमेशा के लिए सुरक्षित कर सकती है!

References

Kidney disease

6-Step Guide to Protecting Kidney Health

Kidney Disease - NIDDK

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ। शुरुआती चरण में किडनी की बीमारी अक्सर बिना किसी दर्द के होती है। इसलिए नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट कराना ज़रूरी होता है, खासकर यदि आपको डायबिटीज़, हाई बीपी या किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास है।

हर व्यक्ति को बार-बार जांच की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, डायबिटीज़ या हाई बीपी के मरीज, मोटापे से ग्रस्त लोग और जिनके परिवार में किडनी रोग रहा हो, उन्हें समय-समय पर जांच करानी चाहिए।

 आमतौर पर डॉक्टर सीरम क्रिएटिनिन, eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate), यूरिन एल्ब्यूमिन/प्रोटीन टेस्ट और सामान्य यूरिन जांच कराने की सलाह देते हैं। आवश्यकता होने पर किडनी का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है।

स्वस्थ व्यक्ति के लिए संतुलित मात्रा में प्रोटीन सुरक्षित है। लेकिन जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही प्रोटीन की मात्रा तय करनी चाहिए।

हाँ। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और किडनी तक रक्त प्रवाह कम कर सकता है। वहीं अधिक शराब शरीर में पानी की कमी और ब्लड प्रेशर बढ़ाकर किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

यदि यूरिन इन्फेक्शन का समय पर इलाज न किया जाए और संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए, तो यह किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है। बार-बार यूटीआई होने पर डॉक्टर से कारण की जांच करानी चाहिए।

नहीं। पानी की मात्रा हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। शुरुआती या सामान्य स्थिति में पर्याप्त पानी पीना फायदेमंद होता है, लेकिन गंभीर किडनी रोग, हार्ट फेलियर या डायलिसिस वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी लेना चाहिए।

ज़रूरी नहीं। कुछ हर्बल पाउडर, काढ़े या सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो किडनी पर असर डालें। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक, हर्बल या न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद का सेवन शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लें।

अधिकांश मामलों में हल्की से मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज जैसे तेज़ चाल से चलना, योग या साइक्लिंग लाभदायक होती है। यदि किडनी की बीमारी गंभीर है, तो व्यायाम का प्रकार और अवधि डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

यह बीमारी के कारण और स्टेज पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में समय पर इलाज से किडनी की कार्यक्षमता को स्थिर रखा जा सकता है या सुधार हो सकता है, लेकिन लंबे समय से हुई गंभीर क्षति को पूरी तरह ठीक करना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए जल्दी पहचान और समय पर उपचार सबसे महत्वपूर्ण है।

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