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Endometriosis के साथ Bowel Issues — Deep Endo का संकेत

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 07 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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बहुत सी महिलाएं सालों तक पेट में दर्द, पीरियड्स में ऐंठन, पेट फूलने और वॉशरूम में होने वाली तकलीफों को यह सोचकर सहती रहती हैं कि "ये तो औरतों की आम दिक्कतें हैं।" शुरुआत में ये लक्षण सिर्फ हाजमे की खराबी या आम पीरियड पेन जैसे ही लगते हैं, लेकिन कई बार यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी 'डीप एंडोमेट्रियोसिस' (Deep Endometriosis) का खतरनाक इशारा हो सकता है।

खासकर तब, जब पीरियड्स के दौरान आपको टॉयलेट जाने (शौच) में दर्द हो, कब्ज़ एकदम से बढ़ जाए, या आपके पेडू (Pelvic) के हिस्से में हर वक्त एक मीठा-मीठा दर्द बना रहे। धीरे-धीरे ये परेशानियां इतनी बढ़ जाती हैं कि आपका रोज का उठना-बैठना और सुकून से रहना भी मुश्किल हो जाता है।

आयुर्वेद इसे सिर्फ गर्भाशय (बच्चेदानी) की कोई बीमारी नहीं मानता। हमारी नजर में यह सालों से बिगड़े हुए हाजमे, बहुत ज़्यादा टेंशन, गलत रूटीन और शरीर के वात-पित्त के भयानक असंतुलन का नतीजा है। इसलिए इसका इलाज सिर्फ दर्द की गोली खाना नहीं है; पूरे शरीर के सिस्टम को दोबारा सेट करना पड़ता है।

Endometriosis (एंडोमेट्रियोसिस) आखिर है क्या?

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी अजीब और तकलीफदेह बीमारी है जिसमें जो झिल्ली (टिशू) सिर्फ बच्चेदानी के अंदर बननी चाहिए, वो शरीर के दूसरे हिस्सों में भी उगने लगती है। यह सिर्फ बच्चेदानी तक नहीं रुकती, बल्कि आपकी ओवरी, फैलोपियन ट्यूब, पेल्विक एरिया और कई बार तो आंतों के आस-पास तक फैल जाती है।

असली मुसीबत तब शुरू होती है जब हर महीने आपके हार्मोन्स बदलते हैं (पीरियड्स के वक्त)। ये भटकी हुई कोशिकाएं भी ब्लीडिंग करती हैं, लेकिन उस खून के बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। इसी वजह से शरीर के अंदर सूजन, गांठे और दर्द पैदा होता है। वक्त के साथ यह दर्द सिर्फ पीरियड्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आपकी रोज की जिंदगी और हाजमे को भी तबाह करने लगता है।

Deep Endometriosis क्या होती है?

जब यही बीमारी अपनी हदें पार करके शरीर के अंदर बहुत गहराई तक घुस जाती है, तो उसे 'डीप एंडोमेट्रियोसिस' कहते हैं। इसमें ये जिद्दी टिशू सिर्फ बच्चेदानी के आस-पास नहीं रहते, बल्कि आपकी आंतों, पेशाब की थैली (Bladder) और पेडू की गहराई तक अपनी जड़ें जमा लेते हैं।

यही वजह है कि इस स्टेज पर आकर आपको सिर्फ पीरियड का दर्द नहीं होता, बल्कि गैस, कब्ज़, टॉयलेट जाने में तेज़ दर्द और पेट की कई और दिक्कतें भी शुरू हो जाती हैं।

आंतों की दिक्कत (Bowel Issues) और Endometriosis का क्या कनेक्शन है?

जब 'डीप एंडोमेट्रियोसिस' आपकी आंतों के आस-पास फैलती है, तो वहां भयानक सूजन आ जाती है और कई बार आंतें आपस में चिपकने लगती हैं। जब ये बीमारी आंतों को जकड़ लेती है, तो हाजमा और मोशन (शौच) की पूरी मशीनरी बिगड़ जाती है।

इसी वजह से आपको टॉयलेट जाते वक्त बहुत तेज़ दर्द होता है, जिद्दी कब्ज़ रहने लगती है, पेट हर वक्त गुब्बारे जैसा फूला रहता है और पेट के निचले हिस्से में हमेशा एक भारीपन लगता है। पीरियड्स के दौरान ये दिक्कतें कई गुना बढ़ जाती हैं, क्योंकि उस वक्त सूजन और हार्मोन्स दोनों उफान पर होते हैं।

वो लक्षण जिन्हें महिलाएं 'नॉर्मल' समझकर टाल देती हैं

इस बीमारी के कई इशारे शुरू में इतने आम लगते हैं कि महिलाएं इन्हें गैस या पीरियड्स की कमज़ोरी समझकर सालों तक इग्नोर करती हैं। लेकिन अगर ये दिक्कतें बार-बार हो रही हैं, तो अलर्ट हो जाइए:

  • हर वक्त पेट फूलना: थोड़ा सा खाते ही पेट का एकदम भारी हो जाना या गुब्बारे की तरह फूल जाना, वो भी बिना किसी साफ वजह के।
  • टॉयलेट जाने में दर्द: पीरियड्स में या आम दिनों में भी मोशन पास करते वक्त तेज़ दर्द या चुभन महसूस होना।
  • पीरियड्स में जानलेवा दर्द: दर्द इतना होना कि आप बिस्तर से न उठ पाएं और आपके सारे काम रुक जाएं। (इसे नॉर्मल पीरियड पेन समझने की गलती न करें)।
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द: लोअर बैक (कमर के निचले हिस्से) में लगातार ऐसा दर्द रहना जो पीरियड्स के वक्त और ज़्यादा भयानक हो जाए।
  • हर वक्त की थकावट: रातभर सोने के बाद भी शरीर टूटा-टूटा और थका हुआ लगना। यह अंदरूनी सूजन (Inflammation) की पक्की निशानी है।
  • हाजमे का परमानेंट खराब होना: गैस, कब्ज़ या दस्त का ऐसा सिलसिला जो खत्म ही न हो और रूटीन बन जाए।

पीरियड्स के दौरान पेट और टॉयलेट की परेशानियां इतनी क्यों बढ़ जाती हैं?

पीरियड्स के वक्त शरीर के अंदर हार्मोन्स का तूफान आता है। अगर आपको 'डीप एंडोमेट्रियोसिस' है, तो ये तूफान आपके दर्द और सूजन को भड़का देता है:

  • हार्मोन्स का उफान: तेज़ी से बदलते हार्मोन्स उन भटकी हुई कोशिकाओं को एक्टिव कर देते हैं, जिससे दर्द और सेंसिटिविटी बहुत बढ़ जाती है।
  • अंदरूनी सूजन: शरीर के अंदर सूजन इतनी बढ़ जाती है कि पूरा पेट भारी और दर्द से भरा लगता है।
  • पेडू (Pelvic) पर दबाव: सूजन और आंतों के चिपकने की वजह से पेडू के हिस्से में इतना दबाव बनता है कि उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है।
  • टॉयलेट में दर्द: अगर बीमारी आंतों तक पहुंच गई है, तो मोशन पास करते वक्त ऐसा लगता है जैसे अंदर कुछ खिंच रहा हो या कट रहा हो।
  • ऐंठन: पेट में ऐसे क्रैम्प्स (ऐंठन) आते हैं जिन्हें सहना किसी भी आम पेनकिलर के बस की बात नहीं होती।

कब्ज़, पेट फूलना और टॉयलेट में दर्द: आखिर ऐसा क्यों होता है?

जब आपके पेल्विक एरिया (पेट के निचले हिस्से) में सूजन आती है और अंदरूनी अंगों पर दबाव पड़ता है, तो आंतों का काम धीमा पड़ जाता है। आंतें ठीक से मल (Stool) को आगे नहीं धकेल पातीं।

नतीजा? आपको कब्ज़ होती है, गैस फंस जाती है, पेट भारी रहता है और टॉयलेट जाते वक्त बहुत तेज़ दर्द होता है। कई बार ऐसा लगता है कि पेट पूरी तरह साफ ही नहीं हुआ और अंदर एक अजीब सा खिंचाव बना रहता है। पीरियड्स के वक्त तो यह तकलीफ बर्दाश्त से बाहर हो जाती है।

आयुर्वेद 'Deep Endo' को किस दृष्टि से देखता है? 

आयुर्वेद इसे सिर्फ 'औरतों की बीमारी' या बच्चेदानी की सूजन नहीं मानता। हम इसे शरीर के अंदर सालों से बिगड़े हुए बैलेंस, खराब हाजमे, दिमागी टेंशन और 'वात' दोष के रूप से बिगड़ने का नतीजा मानते हैं।

वात का बिगड़ना और पेल्विक पेन का कनेक्शन: आयुर्वेद में 'वात' (हवा) का काम शरीर के हर मूवमेंट (जैसे मल त्याग) और नसों को कंट्रोल करना है। जब यह वात बेकाबू हो जाता है, तो शरीर में दर्द, ऐंठन और खिंचाव पैदा करता है।

इसी बिगड़े हुए वात की वजह से आपको:

  • पेल्विक एरिया में हर वक्त दर्द रहता है।
  • टॉयलेट जाने में दिक्कत होती है।
  • कब्ज़ रहती है।
  • शरीर में हर वक्त बेचैनी और जकड़न लगती है।

हाजमा और 'आम' (टॉक्सिन्स) का खेल: आयुर्वेद बहुत साफ कहता है कि जब आपका हाजमा सुस्त पड़ता है, तो खाना शरीर में सड़ने लगता है। इस सड़े हुए खाने से एक जहरीला और चिपचिपा कचरा बनता है जिसे 'आम' कहते हैं। यह कचरा शरीर में जहां-जहां जमता है, वहां सूजन और भारीपन पैदा कर देता है।

इसी कचरे (आम) की वजह से आपका पेट फूलता है, गैस बनती है और शरीर में सूजन आती है। इसीलिए, हमारा इलाज सिर्फ आपके दर्द को सुन्न करने पर नहीं होता। हम सबसे पहले आपके हाजमे को फौलादी बनाते हैं, शरीर से उस 'आम' (गंदगी) को बाहर निकालते हैं और भड़के हुए वात को शांत करते हैं। जब जड़ खत्म हो जाती है, तो बीमारी भी खत्म हो जाती है।

Deep Endometriosis के लिए आयुर्वेद का नजरिया (दृष्टिकोण) 

आयुर्वेद में हम 'डीप एंडोमेट्रियोसिस' को महज पेट दर्द या पीरियड्स की कोई आम दिक्कत नहीं मानते। हमारा काम आपको पेनकिलर देकर कुछ घंटों के लिए दर्द को दबाना या शरीर को सुन्न करना बिल्कुल नहीं है। आपके शरीर का जो पूरा सिस्टम हिल गया है, जो अंदरूनी सूजन आ गई है और हाजमा बिगड़ चुका है, उसे एकदम जड़ से पकड़कर ठीक किया जाए, ताकि आपकी बॉडी का असली बैलेंस लौट आए।

  • आपके हिसाब से आपका इलाज: हर औरत का शरीर और उसकी परेशानी एक जैसी नहीं होती। इसलिए हम सिर्फ रिपोर्ट या बीमारी का नाम पढ़कर कोई बनी-बनाई दवा नहीं थमाते। आपकी तासीर कैसी है, आपको दिक्कतें क्या-क्या हैं और शरीर में कौन सा दोष बिगड़ा है, इन सबको बारीकी से समझकर ही सिर्फ आपके लिए एक स्पेशल इलाज तैयार किया जाता है।
  • वात को शांत करना: इस पूरी बीमारी में जो दर्द, ऐंठन और टॉयलेट जाने में तकलीफ (Bowel discomfort) होती है न, उसका सबसे बड़ा मुजरिम बिगड़ा हुआ 'वात' (हवा) होता है। हमारी सबसे पहली कोशिश इसी भड़के हुए वात को कंट्रोल करने की होती है, ताकि आपके शरीर को अंदर से एक गहरा सुकून मिल सके।
  • सूजन और भारीपन को काटना: पेल्विक एरिया (पेडू) के हिस्से में जो एक अजीब सा भारीपन, दबाव और सूजन बन गई है, उसे हमारे कुदरती नुस्खों से धीरे-धीरे पिघलाकर बाहर निकाला जाता है। इससे आपको वही पहले जैसा हल्कापन और आराम लगने लगता है।
  • पेट की आग (पाचन) को तेज़ करना: जब आपका हाजमा सुस्त पड़ जाता है, तो खाया हुआ खाना पचने के बजाय पेट में ही सड़ने लगता है और एक चिपचिपा कचरा (आम) बन जाता है। हम सबसे पहले आपके पेट की मशीनरी को दुरुस्त करते हैं, जिससे गैस और भारीपन की ये समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
  • लाइफस्टाइल में सुधार: सच कहूं तो सिर्फ जड़ी-बूटियां कोई जादू नहीं कर सकतीं। आप क्या खा रही हैं, आपकी नींद कैसी है, आपकी टेंशन कैसे कम हो और आपका डेली रूटीन कैसा होना चाहिए—ये सब सुधारना भी हमारे इलाज का एक बहुत जरूरी और बड़ा हिस्सा है।

Deep Endometriosis में इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक औषधियां

जैसा कि मैंने बताया, आयुर्वेद में हर मरीज को एक ही डिब्बे से दवा नहीं दी जाती। आपकी असली तकलीफ को समझकर कुछ ऐसी चुनिंदा कुदरती जड़ी-बूटियां दी जाती हैं, जिनका काम सिर्फ दर्द को छिपाना नहीं, बल्कि शरीर की अंदर से डेंटिंग-पेंटिंग (रिपेयरिंग) करना है:

  • अशोक (Ashoka): यह आपके पूरे रिप्रोडक्टिव सिस्टम की सर्विसिंग कर देता है और पेल्विक एरिया में होने वाले भारीपन या दर्द को एकदम स्पंज की तरह चूस लेता है।
  • शतावरी (Shatavari): यह जड़ी-बूटी शरीर को अंदर से कमाल का पोषण (Nutrition) देती है। जो हार्मोन्स पूरी तरह से हिल चुके हैं, उन्हें वापस पटरी पर लाने में इसका काम वाकई जादुई है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): सालों तक दर्द बर्दाश्त करते-करते जब शरीर और दिमाग पूरी तरह से जवाब दे जाते हैं, तब अश्वगंधा काम आती है। यह सारी दिमागी टेंशन और कमज़ोरी को निचोड़कर शरीर में एक नई और फौलादी ताकत भर देती है।
  • त्रिफला (Triphala): आपके हाजमे को फर्स्ट-क्लास बनाने और सालों पुरानी जिद्दी कब्ज़ को तोड़ने में त्रिफला की टक्कर में कोई नहीं है।
  • गुग्गुलु (Guggulu): शरीर के अंदरूनी हिस्सों में जहां कहीं भी जिद्दी सूजन या गांठें जमा हो गई हैं, गुग्गुलु उन्हें मोम की तरह पिघलाकर शरीर से बाहर का रास्ता दिखाने का सबसे पुराना और बेजोड़ कुदरती तरीका है।

Deep Endometriosis में सुकून देने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर अंदर से बहुत ज़्यादा ब्लॉक और जकड़ जाता है, तो सिर्फ खाने वाली दवाओं से बात नहीं बनती। ऐसे में कुछ खास पंचकर्म थेरेपीज़ शरीर की गहराई में जाकर सारी जकड़न और दर्द को पिघला देती हैं:

  • अभ्यंग (Abhyanga): जब कुछ खास औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश होती है, तो नसों में खून दौड़ने लगता है और शरीर का सारा दर्द और भारीपन पलक झपकते ही गायब सा लगने लगता है।
  • स्वेदन (Swedana): जड़ी-बूटियों की हल्की-हल्की भाप लेने से शरीर के अंदर तक जमी हुई जकड़न (Stiffness) और दर्द पसीने के रास्ते बाहर निकल जाता है।
  • बस्ती थेरेपी (Basti Therapy): वात दोष को जड़ से खत्म करने के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह पेल्विक एरिया की अंदरूनी सूजन और दर्द को खींच निकालने का सबसे पक्का इलाज है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर जब एक लय में गुनगुना तेल गिरता है, तो दिमाग की सारी टेंशन और दर्द से होने वाली बेचैनी एकदम शांत हो जाती है। इसे लेने के बाद जो नींद आती है, वो वाकई कमाल की होती है।

Deep Endometriosis में आपकी डाइट (आहार) का असली रोल

यकीन मानिए, आपकी रसोई ही आपका आधा अस्पताल है। सही खाना आपके शरीर की सूजन को काट सकता है, और गलत खाना आपके दर्द को और भड़का सकता है।

  • हल्का और सादा खाना: हमेशा ऐसा खाना खाएं जो पेट पर बोझ न डाले और आसानी से पच जाए, जैसे मूंग दाल, खिचड़ी या ताजी सब्जियों का सूप।
  • गरमा-गरम और ताजा भोजन: फ्रिज का रखा बासी खाना वात बढ़ाता है। रसोई में एकदम ताजा बना और हल्का गर्म खाना ही खाएं, इससे हाजमा बहुत स्मूथ रहता है।
  • हरी सब्जियां और ताजे फल: ये कुदरती चीजें शरीर को वो जरूरी विटामिन्स और फाइबर देती हैं, जो अंदर की सूजन को कम करके शरीर को बैलेंस में रखते हैं।
  • खूब सारा पानी और हर्बल चाय: दिनभर शरीर में पानी की कमी न होने दें। हल्का गुनगुना पानी पीने से पेट साफ रहता है और मोशन (टॉयलेट) में दिक्कत नहीं आती।
  • तले-भुने खाने से सख्त दूरी: बहुत ज़्यादा तेज़ मसाले, बाहर का जंक फूड और तली हुई चीजें आपके पेट की सूजन और दर्द को कई गुना बढ़ा सकती हैं। इन्हें तुरंत छोड़ दें।
  • टाइम पर खाने की आदत: कभी भी कुछ भी खा लेना शरीर की मशीनरी को खराब कर देता है। एक सही रूटीन बनाएं और हमेशा उसी वक्त पर खाना खाएं।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम वैजयंती है और मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूँ। मुझे PCOD की समस्या थी, जिसके कारण कभी मेरे पीरियड्स अनियमित हो जाते थे और कभी बहुत अधिक ब्लीडिंग होती थी। इस वजह से मैं काफी दर्द और तनाव में रहता था। एलोपैथिक परामर्श में मुझे सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे मैं बहुत चिंतित हो गई। तभी मेरी एक सहेली, जो जीवा आयुर्वेद की पूर्व मरीज थी, ने मुझे नजदीकी जीवा क्लिनिक जाने की सलाह दी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझकर इलाज शुरू किया। चूँकि PCOD मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है, इसलिए मुझे आयुर्वेदिक उपचार दिया गया। धीरे-धीरे मेरी पीरियड्स नियमित होने लगे, तनाव कम हुआ और मुझे काफी राहत महसूस हुई।

डॉक्टर के पास जाने में देरी कब न करें?

एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को 'औरतों की आम समस्या' मानकर चुपचाप सहने की गलती कभी न करें। अगर शरीर ये इशारे दे रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • पेल्विक एरिया और पेट के निचले हिस्से में कई दिनों से लगातार तेज़ दर्द बना हुआ हो।
  • पीरियड्स के दौरान दर्द इतना हो जाए कि आप बिस्तर से न उठ पाएं और आपके सारे काम रुक जाएं।
  • हर वक्त पेट फूला रहे और टॉयलेट जाने में (मोशन पास करते वक्त) बहुत ज़्यादा दिक्कत और दर्द हो।
  • अगर आपको प्रेगनेंसी (गर्भधारण) में लगातार परेशानी आ रही हो।
  • जब आपको लगे कि ये सारे लक्षण दिन-ब-दिन कम होने के बजाय और खतरनाक होते जा रहे हैं।

निष्कर्ष

'डीप एंडोमेट्रियोसिस' सिर्फ बच्चेदानी के आस-पास का कोई मामूली दर्द नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर बिगड़े हुए हाजमे, वात दोष और खराब लाइफस्टाइल का एक बहुत बड़ा अलार्म है। मॉडर्न साइंस अक्सर इसे एक ऐसी बीमारी मानती है जिसे सिर्फ दर्द की गोलियों से मैनेज किया जा सकता है, लेकिन आयुर्वेद इसे गहराई से समझकर शरीर को अंदर से साफ करने और बैलेंस करने का रास्ता दिखाता है।

असली इलाज सिर्फ पेनकिलर खाकर दर्द को सुन्न करना नहीं है, बल्कि इस बीमारी की जड़ को पकड़कर उसे शरीर से बाहर फेंकना है, ताकि आप एक दर्द-मुक्त और एकदम नॉर्मल जिंदगी जी सकें। शरीर को बस आपके थोड़े से साथ की जरूरत होती है!

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह जरूरी नहीं कि हर मामले में यह तेजी से बढ़े, लेकिन यदि शरीर का असंतुलन लंबे समय तक बना रहे तो लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों में यह धीरे-धीरे स्थिर भी रह सकता है। लक्षणों की तीव्रता जीवनशैली और शरीर की स्थिति पर निर्भर करती है। समय पर ध्यान न देने पर परेशानी बढ़ सकती है।

नहीं, पेट दर्द ही एकमात्र लक्षण नहीं होता। इसके साथ पेट फूलना, कमजोरी और थकान भी महसूस हो सकती है। कई बार आंतों से जुड़ी परेशानी भी दिखाई देती है। लक्षण व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकते हैं।

यह अधिकतर प्रजनन आयु में देखी जाती है। लेकिन हर व्यक्ति में इसके कारण और लक्षण अलग हो सकते हैं। शरीर में हार्मोनल बदलाव इसकी संभावना को प्रभावित करते हैं। इसे केवल उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाता।

हाँ, जीवनशैली का बड़ा प्रभाव पड़ता है। अनियमित खानपान और तनाव शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। कम शारीरिक गतिविधि भी समस्या को बढ़ा सकती है। संतुलित दिनचर्या शरीर को बेहतर स्थिति में रखती है।

कुछ मामलों में यह प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती है। यह प्रभाव हर व्यक्ति में अलग होता है। शरीर के अंदर सूजन और असंतुलन इसकी एक वजह हो सकती है। समय पर देखभाल से स्थिति को बेहतर किया जा सकता है।

नहीं, दर्द हर समय एक जैसा नहीं होता। यह कभी हल्का तो कभी ज्यादा हो सकता है। मासिक चक्र के दौरान इसमें बदलाव देखा जा सकता है। तनाव और थकान भी दर्द की तीव्रता बढ़ा सकते हैं।

हाँ, कई मामलों में आंतों की समस्या जुड़ी हो सकती है। पेट फूलना और कब्ज जैसी परेशानी देखी जा सकती है। यह शरीर के अंदर सूजन और दबाव के कारण हो सकता है। लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।

यह आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं। समय के साथ ये अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इसे अचानक होने वाली समस्या नहीं माना जाता।

हाँ, तनाव शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। यह दर्द और असहजता को बढ़ा सकता है। तनाव से नींद और पाचन भी प्रभावित होते हैं। मानसिक स्थिति पर शरीर पर सीधा असर पड़ता है।

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