Diseases Search
Close Button
 
 

थकान, तनाव और कम इच्छा क्या यौन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan

थकान, तनाव और कम इच्छा क्या यौन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं?

तुरंत ताकत देने वाली दवाओं और उत्तेजक गोलियों (Performance enhancers) का इस्तेमाल यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) से जुड़ी समस्याओं, थकान और कम इच्छा में काफी आम है। ये दवाएँ शरीर में कृत्रिम रूप से खून का प्रवाह बढ़ाकर या नसों को उत्तेजित करके लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गया है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से भयंकर कमज़ोरी, थकान और इच्छा की कमी होने लगती है और बीमारी पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार गोलियाँ खाने से नसों और प्रजनन तंत्र का कमज़ोर होना, बीमारी कितनी गंभीर है, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ और अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और यौन सेहत प्राकृतिक रूप से बनी रहे।

थकान, तनाव और कम इच्छा क्या है?

यौन स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सेहत का भी हिस्सा है। जब कोई व्यक्ति लगातार शारीरिक थकान, भयंकर मानसिक तनाव और ऊर्जा की कमी से जूझता है, तो उसकी सेक्सुअल डिजायर (Libido) तेज़ी से गिरने लगती है। आमतौर पर लोग इसका शिकार खराब खान-पान, ऑफिस के भारी तनाव, नींद की कमी और कमज़ोर पाचन के कारण होते हैं। जब दिमाग तनाव में होता है, तो वह कॉर्टिसोल बनाता है जो टेस्टोस्टेरोन और अन्य यौन हार्मोन को दबा देता है, जिससे संबंध बनाने की इच्छा खत्म हो जाती है, जल्दी स्खलन (Premature Ejaculation) होता है या इरेक्शन में दिक्कत आती है। ताकत की गोलियाँ खाने पर कुछ समय के लिए प्रदर्शन ठीक हो जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को ढकती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस कमज़ोरी को ठीक नहीं करतीं जिससे 'शुक्र धातु' सूख रही है। दवा को बिना सोचे-समझे लंबे समय तक इस्तेमाल करना हृदय और लिवर पर बुरा असर डालता है।

यौन स्वास्थ्य और हार्मोन असंतुलन की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

यौन रोग और कमज़ोरी से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED): इसमें तनाव या नसों की कमज़ोरी के कारण सही से तनाव (Erection) नहीं आ पाता।
  • प्रीमेच्योर इजेकुलेशन (शीघ्रपतन): मानसिक घबराहट और अति-संवेदनशीलता के कारण बहुत जल्दी स्खलन हो जाना।
  • हाइपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसऑर्डर (HSDD): इसमें संबंध बनाने की इच्छा पूरी तरह से खत्म हो जाती है (Low Libido)।
  • क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (CFS): भयंकर शारीरिक और मानसिक थकान जो नींद लेने के बाद भी ठीक नहीं होती और यौन जीवन को बर्बाद कर देती है।

यौन कमज़ोरी और तनाव के लक्षण और संकेत

बार-बार थकान होना या इच्छा का खत्म होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • इच्छा की कमी: यौन गतिविधियों के प्रति बिल्कुल भी रुचि न रहना या अरुचि होना।
  • भयंकर थकान और ऊर्जा की कमी: दिन भर काम करने के बाद शरीर का टूट जाना और संबंध बनाने की ताकत न बचना।
  • प्रदर्शन में घबराहट (Performance Anxiety): संबंध बनाते समय दिमाग में डर, चिंता और तनाव रहना जिससे शरीर साथ नहीं देता।
  • चिड़चिड़ापन और नींद न आना: रात भर करवटें बदलना, गहरी नींद न आना और स्वभाव में गुस्सा भर जाना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: ताकत की गोली बंद करते ही अगले दिन से फिर से वही पुरानी कमज़ोरी आ जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

थकान, तनाव और यौन कमज़ोरी के क्रॉनिक कारण क्या हैं?

यौन जीवन के खराब होने के पीछे सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि कई अंदरूनी क्रॉनिक कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • मानसिक तनाव (Stress): ज़्यादा तनाव से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो टेस्टोस्टेरोन को कम कर देता है और नसों को सिकोड़ देता है।
  • कमज़ोर शुक्र धातु: आयुर्वेद के अनुसार सातों धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र) में से शुक्र सबसे अंत में बनता है। खराब पाचन से शुक्र धातु तक पोषण नहीं पहुँचता।
  • गलत खान-पान: जंक फूड, शराब, और सिगरेट पीने से खून की नलियों में रुकावट आती है जो अंगों तक खून का प्रवाह रोकती है।
  • नींद की कमी: शरीर और नसों को आराम न मिलने से वात दोष बढ़ता है जो ऊर्जा और ताकत को सोख लेता है।
  • अन्य बीमारियाँ: डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे के कारण भी यौन नसें कमज़ोर हो जाती हैं।

इसके जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

  • इस समस्या को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ बाहरी गोली पर निर्भर रहा जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  • रिश्तों में दरार: पार्टनर के साथ शारीरिक और भावनात्मक दूरी बढ़ने से तनाव और रिश्ते टूटने का खतरा रहता है।
  • मानसिक डिप्रेशन और चिंता: प्रदर्शन न कर पाने के कारण पुरुष या महिला अपना आत्मविश्वास खो देते हैं और डिप्रेशन में चले जाते हैं।
  • बाँझपन (Infertility): शुक्राणुओं की कमी या गुणवत्ता खराब होने से संतान प्राप्ति में भयंकर परेशानी आती है।
  • हृदय पर दबाव: बिना डॉक्टर की सलाह के उत्तेजक गोलियाँ (Viagra आदि) खाने से हार्ट अटैक का भयंकर जोखिम रहता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से थकान, तनाव और कम इच्छा सिर्फ एक अंग की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'क्लैब्य' (Impotence) या 'शुक्र क्षय' कहा जाता है और यह माना जाता है कि जब शरीर में वात दोष बिगड़ जाता है और 'ओजस' (Ojas - शरीर की परम ऊर्जा) कम हो जाता है, तब ऐसी परेशानी आती है। ज़्यादा मानसिक मेहनत, चिंता और खराब पाचन से शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) जमा हो जाते हैं, जो 'रस' से लेकर 'शुक्र' धातु तक की पोषण शृंखला को तोड़ देते हैं। जब तक यह दूषित 'आम' और बढ़ा हुआ वात शरीर में रहेगा, शरीर में ताकत और इच्छा नहीं आएगी। आयुर्वेद में बस नसों को कृत्रिम रूप से उत्तेजित करना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शरीर में 'ओजस' बढ़े, वात शांत हो और नसें प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनें।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे सभी लक्षणों, इच्छा की कमी, थकान और तनाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: पिछली बीमारियों (जैसे शुगर, बीपी) और खाई जा रही एलोपैथिक दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: रोज़ाना के खान-पान, शराब/सिगरेट की आदत, काम के तनाव और नींद को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का अच्छे से विश्लेषण करने और दूषित दोषों को पकड़ने के बाद ही नसों को ताकत देने और तनाव कम करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक (वाजीकरण और रसायन) इलाज शुरू किया जाता है।

थकान, तनाव और यौन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में वाजीकरण (Vajikarana), ऊर्जा बढ़ाने और नसों को ताकत देने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अश्वगंधा: यह तनाव (Stress) और कॉर्टिसोल को कम करने की सबसे बेहतरीन औषधि है। यह नसों को शांत करती है और घोड़े जैसी ताकत देती है।
  • शिलाजीत: आयुर्वेद में इसे शरीर की कमज़ोरी दूर करने के लिए बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह शुक्र धातु को पुष्ट करता है और ऊर्जा का संचार करता है।
  • सफेद मूसली: यह यौन इच्छा (Libido) को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है और शारीरिक कमज़ोरी को खत्म करती है।
  • गोक्षुर (गोखरू): यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्राकृतिक रूप से सुधारता है और प्रजनन अंगों में खून का प्रवाह बढ़ाता है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, मानसिक तनाव को दूर कर संपूर्ण स्वास्थ्य पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • गहरी सफाई और वाजीकरण: जब कमज़ोरी सालों पुरानी हो और दवा से ताकत न आ रही हो, तो जीवा आयुर्वेद में शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • शिरोधारा: भयंकर मानसिक तनाव, घबराहट (Anxiety) और नींद न आने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए माथे पर औषधीय तेल या मट्ठे की धार गिराई जाती है। यह दिमाग को परम शांति देती है।
  • बस्ती कर्म: बढ़े हुए वात दोष को शांत करने के लिए औषधीय तेल का एनीमा दिया जाता है, जो सीधा नसों और पेल्विक क्षेत्र को ताकत देता है।
  • स्थायी राहत के लिए रसायन औषधियाँ: अंदरूनी सफाई के साथ ताकत देने वाली वाजीकरण जड़ी-बूटियों का सेवन कराया जाता है।

रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, 'ओजस' और शुक्र धातु को बढ़ाने के लिए सुपाच्य, पौष्टिक और शरीर के वात दोष को शांत करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • गाय का दूध और घी: रात को सोने से पहले अश्वगंधा के साथ गर्म दूध और घी का सेवन करें, यह नसों को ताकत देता है और शुक्र धातु को बढ़ाता है।
  • बादाम, अखरोट और खजूर: भीगे हुए बादाम, अखरोट और खजूर रोज़ाना खाएँ, ये ऊर्जा का खजाना हैं और इच्छा को बढ़ाते हैं।
  • उड़द की दाल और लहसुन: आयुर्वेद में उड़द की दाल और लहसुन को प्राकृतिक वाजीकरण माना गया है, जो शरीर में ताकत भरते हैं।

क्या न खाएँ?

  • शराब और सिगरेट: नशा और स्मोकिंग नसों को सिकोड़ देते हैं और खून के प्रवाह को रोकते हैं, इन्हें बिल्कुल बंद कर दें।
  • ज़्यादा खट्टी और मसालेदार चीज़ें: अचार, इमली और ज़्यादा तीखा भोजन खाने से पित्त भड़कता है जो शुक्र को सुखा देता है।
  • जंक फूड और बासी खाना: पिज़्ज़ा, बर्गर और फ्रिज का रखा बासी खाना वात बढ़ाता है और शरीर में भारीपन लाता है।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ समस्या सुनकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, इच्छा की कमी और थकान के लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी पुरानी बीमारियों (शुगर, बीपी) और खाई जा रही उत्तेजक गोलियों के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने, नशे की आदत और ऑफिस के तनाव को समझा जाता है।
  • आपकी नींद, कब्ज़ और ऊर्जा के स्तर पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है।
  • शरीर में जमा गंदगी और वात-पित्त असंतुलन के संकेत देखे जाते हैं।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो आपके तनाव को खत्म करे और प्राकृतिक ताकत लौटाए।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

अपनी जानकारी हमारे साथ साझा करें: सबसे पहले आपको अपनी सेहत से जुड़ी बुनियादी जानकारी हमें देने के लिए, आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपने इलाज के सफर की शुरुआत कर सकते हैं।

डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करना: आपकी सुविधा के अनुसार, हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर से बातचीत करने का समय तय किया जाता है। आप अपनी पसंद के हिसाब से नीचे दिए गए दो तरीकों में से कोई भी चुन सकते हैं:

  • क्लिनिक पर जाकर: अगर आप आमने-सामने बैठकर बात करना चाहते हैं, तो अपने नज़दीकी जीवा क्लिनिक पर जा सकते हैं।
  • वीडियो कंसल्टेशन (सिर्फ ₹49 में): अगर क्लिनिक आना मुमकिन न हो, तो आप घर बैठे ही वीडियो कॉल के ज़रिए डॉक्टर से जुड़ सकते हैं। यह खास सुविधा अभी सिर्फ ₹49 में उपलब्ध है।

बीमारी को गहराई से समझना: हमारे डॉक्टर आपसे तसल्ली से बात करते हैं ताकि आपकी तकलीफों और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को अच्छे से समझ सकें। हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को ठीक करना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह (Root Cause) तक पहुँचना है।

आपके लिए खास इलाज की योजना: पूरी जाँच के बाद, डॉक्टर सिर्फ आपके लिए एक कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करते हैं। इसमें शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयाँ दी जाती हैं, जो आपके शरीर के दोषों को संतुलित करने और आपको अंदर से सेहतमंद बनाने में मदद करती हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे आपकी उम्र क्या है, तनाव कितना ज़्यादा है, और कमज़ोरी कितनी पुरानी है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर काम की थकान और नींद की कमी से इच्छा कम हुई है, तो आमतौर पर 3 से 6 हफ्तों में ही शरीर में ऊर्जा वापस आने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर सालों पुरानी कमज़ोरी है, शुगर की बीमारी है या मानसिक तनाव बहुत ज़्यादा है, तो शरीर को पूरी तरह शुद्ध होने और नसों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत होने में 3 से 6 महीने भी लग सकते हैं।
  • उपचार का तरीका: इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से वाजीकरण जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान, योग और तनाव कम करना शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो दोष संतुलित हो जाते हैं और भविष्य में उत्तेजक गोलियों पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरे लिए ओवर-द-काउंटर परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाएँ खरीदना पैसे की बर्बादी थी। जीवा डॉक्टर से सलाह लेना बस एक फ़ोन कॉल जितना आसान था; मुझे किसी से भी पर्सनली मिलने की ज़रूरत नहीं पड़ी, जो कि बहुत अच्छा था। दवाएँ सच में बहुत असरदार थीं और मैंने इलाज का पूरा कोर्स पूरा किया, जिससे मुझे बहुत फ़ायदा हुआ। मेरी मदद करने के लिए जीवा आयुर्वेद का धन्यवाद।

नाम: रवि

फ़रीदाबाद

  https://youtu.be/QTwiqKsBHso?si=a8wufPHvDtRMbY_g

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए ज़रूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च:

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह एक औसत अंदाज़ा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज):

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ (Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और फर्टिलिटी एक्सरसाइज़ की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम (24x7 देखभाल वाला इलाज):

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज (पंचकर्म व शोधन) चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है। यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (उत्तर बस्ती, विरेचन और अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएँ
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताज़ा (rejuvenated) होकर स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सकें।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • असली कारण पर आधारित इलाज: हमारा पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि बीमारी की जड़ (Root Cause) क्या है। हम सिर्फ बाहरी हार्मोन नहीं देते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर उस प्रजनन समस्या को ठीक करते हैं जिससे बांझपन शुरू हुआ है।
  • हर मरीज़ के लिए एक खास प्लान: आयुर्वेद मानता है कि हर इंसान का शरीर अलग होता है। इसलिए, हम सबको एक ही दवा नहीं देते। आपका इलाज आपकी अपनी प्रकृति, खान-पान और आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से खास आपके लिए तैयार किया जाता है।
  • जाँच और इलाज का सही तरीका: हम एक बहुत ही व्यवस्थित (systematic) प्रक्रिया का पालन करते हैं। इससे शरीर के वात दोष और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याओं को गहराई से समझकर उन्हें बैलेंस करने में मदद मिलती है।
  • शुद्ध और सुरक्षित दवाइयाँ: जीवा की सभी आयुर्वेदिक दवाइयाँ पूरी तरह से शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी होती हैं। इनके बनाने में सुरक्षा और क्वालिटी के कड़े मानकों का पालन किया जाता है ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को कोई नुकसान न हो।
  • अनुभवी डॉक्टरों की टीम: हमारे पास ऐसे डॉक्टरों की एक बड़ी टीम है जिन्हें आयुर्वेद का सालों का अनुभव है। ये एक्सपर्ट्स हर दिन हज़ारों मरीज़ों की मुश्किल समस्याओं को सुलझाने में उनकी मदद करते हैं।
  • परिणाम जो सच में दिखते हैं: हमारे 90% से ज़्यादा मरीज़ों ने अपने स्वास्थ्य में बड़ा और सकारात्मक सुधार महसूस किया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता में कमी: हमारा लक्ष्य आपको अंदर से सेहतमंद बनाना है। हमारे 88% मरीज़ धीरे-धीरे कृत्रिम दवाओं और भारी-भरकम हार्मोनल इंजेक्शन्स पर अपनी निर्भरता कम करने में सफल रहे हैं और एक नेचुरल लाइफस्टाइल की ओर बढ़े हैं।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

यौन कमज़ोरी और तनाव की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है:

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण दवाओं से लक्षणों को तुरंत नियंत्रित करना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका Sildenafil जैसी दवाओं से खून का प्रवाह बढ़ाकर इरेक्शन लाना शरीर को अंदर से मजबूत कर प्राकृतिक क्षमता बढ़ाना
मूल कारण पर प्रभाव नसों की कमजोरी और मानसिक कारणों को ठीक नहीं करता वात असंतुलन, तनाव और कमजोरी को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ उत्तेजक दवाइयाँ, एंटी-डिप्रेसेंट रसायन और वाजीकरण जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार
दुष्प्रभाव दवा छोड़ते ही समस्या लौटना, हृदय/ब्लड प्रेशर पर असर सामान्यतः सुरक्षित, प्राकृतिक सुधार
परिणाम अस्थायी प्रभाव ताकत और स्टैमिना में प्राकृतिक सुधार
समय तुरंत असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

थकान, तनाव और इच्छा की कमी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • लगातार कई महीनों तक संबंध बनाने का बिल्कुल मन न करे और ऊर्जा शून्य लगे।
  • तनाव इतना बढ़ जाए कि नींद आनी बंद हो जाए और पैनिक अटैक आने लगें।
  • बाज़ार की उत्तेजक गोलियाँ खाने के बाद सीने में भारीपन, दर्द या सिर चकराने लगे।
  • पार्टनर के साथ रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाएँ।
  • शुगर (Diabetes) या बीपी (BP) की बीमारी हो और अचानक यौन क्षमता कम हो जाए।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और डिप्रेशन व बाँझपन जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से थकान, तनाव और यौन इच्छा की कमी मुख्य रूप से वात दोष के बिगड़ने, मानसिक तनाव बढ़ने तथा शरीर में 'ओजस' और शुक्र धातु के क्षीण होने से जुड़ा होता है। जंक फूड खाने, कम नींद लेने, शराब पीने और ऑफिस का भारी तनाव लेने से नसों की ताकत खत्म हो जाती है। सिर्फ रोज़ाना बाज़ार की उत्तेजक गोलियाँ खाने से कुछ समय के लिए प्रदर्शन हो जाता है, लेकिन बीमारी जड़ से खत्म नहीं होती। इलाज में शरीर की अंदरूनी शुद्धि, तनाव को शांत करना और शुक्र धातु को पुष्ट करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इसमें अश्वगंधा-शिलाजीत जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना, दूध-घी-खजूर खाना और योग व ध्यान अपनाना शामिल है जिससे शरीर और मन प्राकृतिक रूप से स्वस्थ हों और बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us