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Green Tea रोज़ पीते हैं पर Thyroid और बिगड़ रहा है? कारण जानकर चौंक जाएंगे

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठते ही सबसे पहला काम, एक बड़ा कप गर्म 'ग्रीन टी' (Green Tea) पीना। चाहे आपको वज़न कम करना हो, शरीर को 'डिटॉक्स' करना हो या फिर अपने सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करना हो, इंटरनेट और फिटनेस गुरुओं ने हमें यही सिखाया है कि ग्रीन टी हर मर्ज़ की दवा है। अगर आपको हाइपोथायरायडिज़्म (Hypothyroidism) है और आपका वज़न बढ़ रहा है, तो शायद आप भी दिन में 3-4 कप ग्रीन टी पी रहे होंगे। आप एक सख़्त डाइट फॉलो कर रहे हैं, चीनी भी छोड़ दी है, लेकिन जब आप अपना ब्लड टेस्ट करवाते हैं तो पता चलता है कि आपका TSH लेवल कम होने के बजाय और ज़्यादा बढ़ गया है!

आप परेशान हो जाते हैं कि "जब मैं सब कुछ हेल्दी खा-पी रहा हूँ, तो मेरा थायरॉइड और खराब क्यों हो रहा है?" सच्चाई यह है कि जिसे आप 'अमृत' समझकर रोज़ाना पी रहे हैं, वह आपके कमज़ोर थायरॉइड के लिए एक 'खामोश ज़हर' का काम कर रहा है। इंटरनेट की आधी-अधूरी जानकारी ने हमें यह तो बता दिया कि ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, लेकिन यह कोई नहीं बताता कि यही ग्रीन टी आपके थायरॉइड हॉर्मोन बनने की पूरी प्रक्रिया को ब्लॉक कर सकती है। 

ग्रीन टी आपके थायरॉइड को कैसे डैमेज करती है?

ग्रीन टी को वज़न घटाने वाला एक जादुई ड्रिंक माना जाता है, लेकिन अगर आपको थायरॉइड की समस्या है, तो इसके अंदर मौजूद केमिकल्स आपके लिए भयंकर नुकसानदेह हो सकते हैं:

  • कैटेचिन (Catechins) का ओवरडोज़: ग्रीन टी में EGCG (Epigallocatechin gallate) नाम का एक बहुत शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (Catechin) होता है। विज्ञान के अनुसार, जब यह अत्यधिक मात्रा में शरीर में जाता है, तो यह 'थायरॉइड पेरोक्सीडेज' (TPO) नाम के एंजाइम को ब्लॉक कर देता है। यही वह एंजाइम है जो आपके थायरॉइड हॉर्मोन (T3 और T4) को बनाने के लिए ज़रूरी है। इसके ब्लॉक होने से थायरॉइड ग्रंथि काम करना बंद कर देती है।
  • फ्लोराइड (Fluoride) का ज़हर: चाय की पत्तियाँ ज़मीन से बहुत अधिक मात्रा में फ्लोराइड सोखती हैं। शरीर में जाकर यह फ्लोराइड 'आयोडीन' (Iodine) के साथ मुकाबला करता है। आयोडीन थायरॉइड हॉर्मोन का मुख्य भोजन है। फ्लोराइड के कारण ग्रंथि आयोडीन को सोख नहीं पाती और आप हाइपोथायरायडिज़्म का शिकार हो जाते हैं।
  • खाली पेट कैफीन और कॉर्टिसोल: ग्रीन टी में भी कैफीन होता है। सुबह खाली पेट इसे पीने से शरीर का 'कॉर्टिसोल' (स्ट्रेस हॉर्मोन) अचानक स्पाइक कर जाता है। बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल लिवर को T4 हॉर्मोन को एक्टिव T3 में बदलने से सीधे तौर पर रोक देता है।

ग्रीन टी के कारण थायराइड बिगड़ने की असली वजह

हम ग्रीन टी को वेट लॉस और डिटॉक्स का रामबाण इलाज मानते हैं, लेकिन थायराइड के मरीजों के लिए यह 'अमृत' कभी-कभी 'विष' की तरह काम करने लगता है। आयुर्वेद और आधुनिक शोध के अनुसार, इसके गलत तरीके से सेवन से शरीर की आंतरिक अग्नि और हार्मोनल संतुलन पर सीधा प्रहार होता है:

  • फ्लोराइड की अधिकता (High Fluoride Content): चाय की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से फ्लोराइड सोखने की क्षमता होती है। शरीर में फ्लोराइड की अधिक मात्रा आयोडीन के काम में बाधा डालती है, जो थायराइड हार्मोन ($T_3$ और $T_4$) बनाने के लिए सबसे ज़रूरी तत्व है।
  • शीतल और रुक्ष गुण (Cooling and Drying Nature): आयुर्वेद के अनुसार ग्रीन टी की तासीर ठंडी और खुश्क होती है। यह शरीर में 'वात' को बढ़ाती है और मेटाबॉलिक अग्नि (Agni) को मंद कर देती है, जिससे पहले से ही सुस्त थायराइड ग्रंथि और अधिक धीमी पड़ने लगती है।
  • कैटेचिन का एंटी-थायराइड प्रभाव: ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स (EGCG) वैसे तो फायदेमंद हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन 'थायराइड पेरोक्सीडेज' नामक एंजाइम की गतिविधि को रोक सकता है। यह एंजाइम थायराइड हार्मोन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य होता है।
  • खाली पेट सेवन और स्ट्रेस रिस्पॉन्स: सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीने से शरीर में 'कोर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर अचानक बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कोर्टिसोल सीधे तौर पर थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता को बाधित करता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है।

कैसे पहचानें कि ग्रीन टी आपको नुकसान पहुँचा रही है?

अगर आप 'हेल्दी' रहने के लिए ग्रीन टी पी रहे हैं, लेकिन आपका थायराइड लेवल कंट्रोल होने के बजाय बिगड़ता जा रहा है, तो आपका शरीर आपको कुछ खामोश संकेत दे रहा होगा। इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद ज़रूरी है:

  • वजन घटने के बजाय स्थिर होना या बढ़ना: अगर आप डाइट और एक्सरसाइज के साथ ग्रीन टी ले रहे हैं, फिर भी आपका वजन कम नहीं हो रहा, तो यह संकेत है कि यह ड्रिंक आपके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के बजाय उसे और धीमा कर रही है।
  • अत्यधिक ठंड लगना और त्वचा में रूखापन: ग्रीन टी के वात-वर्धक गुणों के कारण यदि आपको दूसरों की तुलना में ज़्यादा ठंड लगने लगे और आपकी त्वचा या स्कैल्प में अचानक रूखापन बढ़ जाए, तो समझ लें कि यह आपके थायराइड को प्रभावित कर रही है।
  • बालों का तेज़ी से झड़ना और कमज़ोरी: थायराइड हार्मोन की गड़बड़ी का सीधा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है। यदि ग्रीन टी शुरू करने के कुछ हफ्तों बाद बालों का गुच्छों में झड़ना शुरू हो जाए, तो यह शरीर में बढ़े हुए 'रुक्ष' (Drying) प्रभाव का परिणाम हो सकता है।
  • नींद में कमी और मानसिक घबराहट: ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और इसके हार्मोनल प्रभाव के कारण यदि आपको रात में नींद आने में दिक्कत हो रही है या दिन भर बेचैनी (Anxiety) महसूस होती है, तो यह आपकी एड्रिनल और थायराइड ग्रंथियों पर पड़ रहे दबाव का संकेत है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है? (कषाय रस और वात प्रकोप)

आयुर्वेद केवल कैलोरी या एंटीऑक्सीडेंट नहीं देखता; वह भोजन के 'रस' (Taste) और 'गुण' (Quality) का शरीर के दोषों पर प्रभाव देखता है।

  • कषाय रस (Astringent Taste): आयुर्वेद के अनुसार ग्रीन टी का मुख्य स्वाद 'कषाय' (कसैला) और गुण 'रूखा' (Dry) होता है। कषाय रस शरीर में 'वात दोष' को बहुत तेज़ी से भड़काता है। थायरॉइड पहले से ही 'अग्निमांद्य' और वात-कफ के असंतुलन की बीमारी है। खाली पेट इसे पीने से गले और नसों में भयंकर रूखापन आता है।
  • जठराग्नि का बुझना: लोग सोचते हैं कि ग्रीन टी मेटाबॉलिज़्म बढ़ाती है, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि खाली पेट अत्यधिक 'कषाय और शीत (Cold in potency)' चीज़ें पीने से आपकी प्राकृतिक 'पाचन अग्नि' बुझ जाती है। अग्नि बुझने से शरीर में 'आम' (Toxins) बनता है, जो थायरॉइड ग्रंथि को ब्लॉक कर देता है।

थायरॉइड डाइट प्लान

अगर आप थायरॉइड के मरीज़ हैं, तो ग्रीन टी छोड़ें और आयुर्वेद के इन अमृत-तुल्य विकल्पों को अपनाएं:

आहार की श्रेणी क्या चुनें (थायरॉइड के लिए अमृत - अग्नि वर्धक) क्या न चुनें (थायरॉइड के दुश्मन - हॉर्मोन ब्लॉकर्स)
सुबह का ड्रिंक (Morning Drink) धनिया का पानी (Coriander water - रात भर भीगे धनिया के बीजों को उबालकर पिएं)। खाली पेट ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी, नींबू-शहद का बहुत तेज़ गर्म पानी।
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ, ज्वार, रागी, ओट्स। मैदा, वाइट ब्रेड, यीस्ट (खमीर) वाली चीज़ें, पिज़्ज़ा।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, सहजन (Moringa), अच्छी तरह पकाई हुई सब्ज़ियाँ। कच्चा सलाद, कच्ची पत्तागोभी या ब्रोकली (Raw Goitrogens)।
डेयरी और वसा (Fats) गाय का शुद्ध घी (मेटाबॉलिज़्म और नसों के लिए बेहतरीन), नारियल तेल। रिफाइंड ऑयल, मार्जरीन, पैकेटबंद चीज़।
दालें (Pulses) मूंग दाल, मसूर दाल (हल्की और सुपाच्य)। भारी चने, राजमा, रात के समय उड़द की दाल।
मसाले (Spices) जीरा, सौंफ, धनिया, सोंठ, हल्दी (ये अग्नि को जगाते हैं)। अत्यधिक कृत्रिम मसाले, बाज़ार के सॉस और प्रिजर्वेटिव्स।

थायरॉइड ग्रंथि को रिपेयर करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • कांचनार गुग्गुलु: यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली औषधि है जो किसी भी ग्रंथि की सूजन और ब्लॉकेज को खोलती है। यह सुस्त पड़ी थायरॉइड ग्रंथि को दोबारा एक्टिव करती है।
  • अश्वगंधा: यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके कॉर्टिसोल को कम करता है, जो लिवर में T4 को T3 हॉर्मोन में बदलने के लिए सबसे ज़रूरी है।
  • पुनर्नवा: थायरॉइड के कारण शरीर में जो पानी रुक जाता है और चेहरे पर सूजन आती है, यह उसे प्राकृतिक रूप से बाहर निकालती है।

पंचकर्म थेरेपी: शरीर की डीप क्लींजिंग

जब सालों की गलत आदतों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह लॉक हो चुका हो, तो पंचकर्म इस ताले को खोलता है।

  • उद्वर्तन: यह एक विशेष हर्बल पाउडर की सूखी मालिश है। थायरॉइड के कारण जो ज़िद्दी चर्बी त्वचा के नीचे जम गई है, यह उसे घर्षण से पिघलाती है और सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तुरंत तेज़ कर देती है।
  • नस्य: नाक में औषधीय तेल डालना। चूँकि नाक दिमाग का दरवाज़ा है, यह थेरेपी पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्तेजित करती है ताकि वह थायरॉइड ग्रंथि को सही सिग्नल भेज सके।
  • विरेचन: लिवर की गहराई से सफाई ताकि थायरॉइड हार्मोन्स का कन्वर्ज़न सही ढंग से हो सके और खून से 'आम' बाहर निकले।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

बुझी हुई अग्नि और डैमेज हुई ग्रंथि को रिसेट होने में अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 4-6 हफ्ते: सुबह उठने पर शरीर की जकड़न और थकान कम होगी। हाज़मा सुधरेगा और चेहरे की सूजन (Puffiness) कम होगी।
  • 2 से 3 महीने तक: वज़न का बेतहाशा बढ़ना रुक जाएगा। रूखी त्वचा और बालों का झड़ना कम होगा।
  • 4 से 6 महीने तक: आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह रिसेट हो जाएगा। डॉक्टर की सलाह से आपकी एलोपैथिक थायरॉक्सिन की डोज़ धीरे-धीरे कम होने लगेगी और आप प्राकृतिक रूप से ऊर्ज़ावान महसूस करेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा वजन पहले लगभग 85 किलो रहता था, लेकिन अचानक वह बढ़ना शुरू हुआ और 115 किलो तक पहुँच गया। जब मैंने डॉक्टर को दिखाया और टेस्ट करवाए, तो मुझे थायराइड डिटेक्ट हुआ। डॉक्टर ने मुझे 75mg की टैबलेट शुरू की, लेकिन उससे मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा, बल्कि सीने में दर्द की शिकायत होने लगी।दोबारा जांच और अल्ट्रासाउंड कराने पर पता चला कि मुझे थर्ड ग्रेड फैटी लिवर (Fatty Liver Grade 3) है और किडनी में पथरी की भी समस्या है। मैं इतना परेशान हो गया कि मुझे रात को नींद आना भी बंद हो गई थी। फिर मुझे जीवा आयुर्वेद और डॉक्टर प्रताप चौहान के बारे में पता चला। जब मैंने कॉल किया, तो उन्होंने सबसे पहले मेरा वेट, हाइट और लाइफस्टाइल के बारे में विस्तार से पूछा और फिर दवाइयां शुरू कीं। जीवा का ट्रीटमेंट लेने के बाद मेरा थर्ड ग्रेड फैटी लिवर घटकर पहले ग्रेड 1 पर आया और अब वह पूरी तरह ठीक हो गया है।" मुझे लगता है कि अगर थायराइड का पता चलते ही मैं जीवा आयुर्वेद चला जाता, तो शायद मुझे फैटी लिवर, यूरिक एसिड और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का सामना ही न करना पड़ता। मेरी आप सबसे विनती है कि किसी भी समस्या के लिए जीवा आयुर्वेद जरूर जाएं ताकि आपको मेरी तरह परेशान न होना पड़े।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी मॉडर्न फिटनेस ट्रेंड्स आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य वज़न घटाने के लिए ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी और अत्यधिक कैफीन पर ज़ोर देना। शरीर की 'अग्नि' को जगाना और धनिया पानी जैसे सौम्य डिटॉक्स को अपनाना।
ग्रीन टी का नज़रिया इसे एंटीऑक्सीडेंट्स का खज़ाना मानकर हर बीमारी में पीने की सलाह। इसका 'कषाय' (कसैला) रस थायरॉइड के मरीज़ों में 'वात' भड़काता है और ग्रंथि को सुखाता है।
मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना कैफीन के ज़रिए हार्ट रेट और मेटाबॉलिज़्म को ज़बरदस्ती स्पाइक (Spike) करना। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों (त्रिकटु) से शरीर की असली 'पाचन अग्नि' को स्थायी रूप से तेज़ करना।
लंबा असर कैफीन और कैटेचिन के ओवरडोज़ से हॉर्मोनल क्रैश और भयंकर कमज़ोरी आती है। मेटाबॉलिज़्म प्राकृतिक रूप से ठीक होने से इंसान हमेशा के लिए ऊर्जावान हो जाता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? (Red Flags)

हाइपोथायरायडिज़्म अगर बहुत ज़्यादा बिगड़ जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। इन संकेतों पर तुरंत ध्यान दें:

  • अगर आपको थायरॉइड ग्रंथि (गले के सामने के हिस्से) में अचानक कोई बड़ी सी गांठ (Nodule) महसूस हो या निगलने में दर्द हो।
  • अगर आपकी त्वचा अत्यधिक पीली, रूखी हो जाए और आपको ऐसा लगे कि आप हमेशा बर्फ की तरह ठंडे पड़ रहे हैं।
  • अगर आपको अत्यधिक कमज़ोरी महसूस हो कि सुबह बिस्तर से उठना भी असंभव लगने लगे।
  • अगर चेहरे और आँखों के आस-पास अचानक बहुत ज़्यादा सूजन (Puffiness) आ जाए।

निष्कर्ष

इंटरनेट पर वज़न कम करने के नाम पर बेचे जा रहे हर 'डिटॉक्स ड्रिंक' आपके शरीर के लिए अमृत नहीं होते। अगर आप हाइपोथायरायडिज़्म के मरीज़ हैं, तो आपकी 'पाचन अग्नि' पहले से ही बहुत कमज़ोर है। ऐसे में सुबह उठते ही ग्रीन टी जैसा कषाय (कसैला) और कैफीन से भरा ड्रिंक पीना आपकी थायरॉइड ग्रंथि के एंजाइम्स (TPO) को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है और 'वात दोष' को भड़काकर आपके गले को अंदर से सुखा देता है। यही कारण है कि 'हेल्दी' डाइट फॉलो करने के बावजूद आपकी रिपोर्ट और भी खराब आती है। आयुर्वेद आपको इस अंधी दौड़ से बाहर निकालता है। अपनी थायरॉइड ग्रंथि का सम्मान करें। कैफीन की जगह 'धनिया का पानी' पिएं, जो ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करता है। कांचनार गुग्गुलु और अश्वगंधा जैसी शक्तिशाली जड़ी-बूटियों और पंचकर्म की मदद से अपने सुस्त मेटाबॉलिज़्म को किकस्टार्ट करें। भ्रामक ट्रेंड्स से बचें, और जीवा आयुर्वेद के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपने थायरॉइड को प्राकृतिक रूप से हील करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

ग्रीन टी में भारी मात्रा में कैटेचिन (विशेषकर EGCG) और फ्लोराइड होता है। अत्यधिक मात्रा में ये दोनों तत्व थायरॉइड पेरोक्सीडेज (TPO) एंजाइम को ब्लॉक कर देते हैं और आयोडीन के अवशोषण को रोकते हैं, जिससे थायरॉइड हॉर्मोन नहीं बन पाता।

ग्रीन टी का स्वाद कषाय (कसैला) होता है, जो पेट में भारीपन और वात दोष बढ़ाता है। खाली पेट इसे पीने से कमज़ोर पाचन अग्नि पूरी तरह बुझ जाती है और शरीर में आम (गंदगी) बनने लगता है।

थायरॉइड के मरीज़ों के लिए सबसे बेहतरीन मॉर्निंग ड्रिंक धनिया का पानी है। 1 चम्मच साबुत धनिया रात को 1 गिलास पानी में भिगो दें। सुबह उसे आधा रहने तक उबालें, छानें और हल्का गुनगुना पिएं। यह ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करता है।

अत्यधिक चाय या कॉफी (कैफीन) आपके एड्रेनल ग्लैंड्स पर ज़ोर डालती है और कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) बढ़ाती है। बढ़ा हुआ स्ट्रेस हॉर्मोन थायरॉइड के कार्य को बाधित करता है। इसलिए दिन में 1 कप से ज़्यादा चाय या कॉफी नहीं लेनी चाहिए।

अगर आपको बहुत ज़्यादा पीने की आदत है, तो दिन भर में केवल 1 कप हल्का ग्रीन टी भोजन के कुछ समय बाद ले सकते हैं। लेकिन इसे खाली पेट या दिन में 3-4 बार (डिटॉक्स के नाम पर) पीना ज़हर के समान है।

थायरॉइड हॉर्मोन की कमी से शरीर की कोशिकाएं कैलोरी को ऊर्जा में तेज़ी से नहीं बदल पातीं। सुस्त मेटाबॉलिज़्म के कारण शरीर खाए गए भोजन को सीधे चर्बी (Fat) और रुके हुए पानी (Fluid retention) के रूप में स्टोर करने लगता है।

कांचनार गुग्गुलु शरीर में बनी किसी भी ग्रंथि (Gland) की सूजन को कम करने और रुके हुए कफ को पिघलाने की सबसे अचूक दवा है। यह सुस्त पड़ी थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करके उसे प्राकृतिक हॉर्मोन बनाने में मदद करती है।

उद्वर्तन एक विशेष हर्बल पाउडर मालिश है। थायरॉइड के कारण जो ज़िद्दी चर्बी और कफ त्वचा के नीचे जम जाता है, यह मालिश उसके घर्षण (Friction) से चर्बी को तेज़ी से पिघलाती है और सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तुरंत किकस्टार्ट कर देती है।

नहीं। आयुर्वेदिक इलाज शुरू करते ही अपनी एलोपैथिक गोली एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए। आयुर्वेद आपकी ग्रंथि को अंदर से रिपेयर करता है। जैसे-जैसे आपकी रिपोर्ट और मेटाबॉलिज़्म सुधरेगा, डॉक्टर की सलाह से गोली की डोज़ धीरे-धीरे कम की जाती है।

तनाव (Stress) थायरॉइड का सबसे बड़ा दुश्मन है। अत्यधिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जो लिवर को T4 हॉर्मोन को एक्टिव T3 हॉर्मोन में बदलने से रोक देता है। इसलिए आप कितनी भी अच्छी डाइट लें, अगर दिमाग शांत नहीं है तो शरीर थका हुआ ही रहेगा।

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