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Stress और पेट का connection इतना strong क्यों है? gut health का सच

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब भी आपका कोई ज़रूरी इंटरव्यू होता है, कोई बड़ा एग्जाम होता है, या घर में कोई गंभीर बहस हो जाती है, तो आपके पेट में अजीब सी हलचल शुरू हो जाती है? किसी को अचानक से वॉशरूम भागना पड़ता है, किसी को भयंकर एसिडिटी (Acidity) होने लगती है, तो किसी की भूख ही पूरी तरह मर जाती है। हम अक्सर कहते हैं कि "मेरे पेट में तितलियाँ उड़ रही हैं" या "मुझे एक गट फीलिंग (Gut feeling) आ रही है।" यह महज़ कोई कहावतें नहीं हैं; यह विज्ञान है। आज की तेज़ रफ्तार और तनाव से भरी ज़िंदगी में, अस्पतालों के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (Gastroenterology) वार्ड ऐसे युवाओं से भरे पड़े हैं जिनकी तमाम रिपोर्ट्स (Ultrasound, Endoscopy) बिल्कुल नॉर्मल आती हैं, लेकिन फिर भी वे पेट दर्द, गैस और बार-बार वॉशरूम जाने की समस्या से तड़प रहे हैं। जब डॉक्टर उनसे कहते हैं कि "यह सब तुम्हारे दिमाग का वहम है या स्ट्रेस की वजह से है", तो उन्हें यकीन ही नहीं होता। आखिर कोई इंसान पेट की बीमारी से तड़प रहा है, तो उसका दिमाग से क्या लेना-देना?

सच्चाई यह है कि आपके दिमाग और आपके पेट के बीच एक बहुत ही गहरा, जादुई और सीधा कनेक्शन है। जिसे आप सिर्फ एक साधारण 'गैस' या 'डायरिया' समझकर इग्नोर कर रहे हैं, वह असल में आपके अंदर पल रहे भयंकर मानसिक तनाव (Mental Stress) का अलार्म है। जब यह स्ट्रेस लंबे समय तक बना रहता है, तो यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है या उन्हें बुरी तरह भड़का देता है। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि तनाव और पेट का यह कनेक्शन इतना स्ट्रॉन्ग क्यों है, गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) कैसे काम करता है, हमारी लाइफस्टाइल इसमें क्या रोल प्ले कर रही है, और कैसे आयुर्वेद की मदद से आप अपने दिमाग और पेट, दोनों को एक साथ शांत करके हमेशा के लिए स्वस्थ हो सकते हैं।

गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis): पेट और दिमाग का जादुई कनेक्शन

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका पेट और दिमाग आपस में बात कैसे करते हैं? हमारे शरीर में इन दोनों के बीच एक पूरा 'हाईवे' बना हुआ है, जिसे विज्ञान की भाषा में गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं। यह कोई आम कनेक्शन नहीं है; यह आपके पूरे स्वास्थ्य को कंट्रोल करता है।

  • वेगस नर्व (Vagus Nerve): यह हमारे शरीर की सबसे लंबी नस है जो सीधे हमारे दिमाग को हमारे पेट और आंतों से जोड़ती है। यह एक टू-वे (Two-way) हाईवे है। यानी दिमाग की परेशानी पेट तक पहुँचती है, और पेट की गड़बड़ी सीधे दिमाग को डिप्रेशन में डालती है।
  • दूसरा दिमाग (Second Brain): हमारी आंतों के अंदर अपना खुद का एक पूरा नर्वस सिस्टम होता है, जिसे 'एंटेरिक नर्वस सिस्टम' (Enteric Nervous System) कहते हैं। इसमें करोड़ों न्यूरॉन्स होते हैं (दिमाग के बाद सबसे ज़्यादा)। इसलिए पेट खुद फैसले ले सकता है और इसे हमारा 'सेकंड ब्रेन' कहा जाता है।
  • खुशी का हार्मोन (Serotonin): आपको जानकर हैरानी होगी कि शरीर का 90% 'सेरोटोनिन' (वह हार्मोन जो हमें खुशी और शांति का एहसास कराता है) हमारे दिमाग में नहीं, बल्कि हमारे पेट (Gut) में बनता है। अगर पेट खराब है, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते।

स्ट्रेस (Stress) के समय पाचन तंत्र का क्या होता है?

जब आप तनाव में होते हैं, ऑफिस की डेडलाइन का प्रेशर होता है या आप किसी चिंता में डूबे होते हैं, तो शरीर के अंदर एक एमरजेंसी (Emergency) सायरन बज जाता है। इस दौरान आपका पाचन तंत्र पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है।

  • फाइट या फ्लाइट मोड (Fight or Flight): तनाव के समय शरीर को लगता है कि उस पर कोई शेर हमला करने वाला है। ऐसे में शरीर सारा खून पेट से खींचकर आपके हाथों, पैरों और दिमाग की तरफ भेज देता है ताकि आप लड़ सकें या भाग सकें। खून की कमी से पाचन वहीं का वहीं रुक जाता है।
  • एसिड का भड़कना: तनाव के कारण पेट में खाना पचाने वाला एसिड (Tezaab) ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगता है। जब पेट में खाना नहीं होता, तो यह अतिरिक्त एसिड पेट की दीवारों को जलाकर अल्सर (Ulcers) और भयंकर एसिडिटी पैदा करता है।
  • आंतों की गति का बिगड़ना: स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) के कारण आंतों की सिकुड़ने और फैलने की गति (Motility) बिगड़ जाती है। या तो यह इतनी तेज़ हो जाती है कि खाना बिना पचे ही पानी की तरह बाहर आ जाता है (Loose motions), या इतनी धीमी हो जाती है कि इंसान को भयंकर कब्ज़ (Constipation) हो जाता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS): तनाव की सबसे बड़ी देन

IBS एक ऐसी बीमारी है जिसका सीधा संबंध आपकी आंतों की बनावट से नहीं, बल्कि उनके काम करने के तरीके और आपके दिमाग से है। यह आज के युवाओं की सबसे बड़ी पाचन समस्या बन चुकी है।

  • रिपोर्ट्स का नॉर्मल आना: IBS की सबसे बड़ी पहचान यह है कि आप कोलोनोस्कोपी से लेकर सारे ब्लड टेस्ट करा लें, सब कुछ 100% नॉर्मल आएगा। आंतों में कोई घाव या सूजन नहीं होती, लेकिन फिर भी पेट में ऐंठन और मरोड़ बनी रहती है।
  • दिमाग का ओवर-रिएक्शन: IBS के मरीज़ों का गट-ब्रेन कनेक्शन बहुत ज़्यादा सेंसिटिव हो जाता है। आंतों में हल्की-सी गैस बनने पर भी दिमाग उसे एक बहुत बड़े दर्द के रूप में महसूस करता है।
  • स्ट्रेस का ट्रिगर: जैसे ही कोई ऑफिस की मीटिंग होती है, ट्रेवल करना होता है या कोई डर लगता है, IBS के मरीज़ को तुरंत वॉशरूम भागना पड़ता है। तनाव ही IBS का सबसे बड़ा स्विच है जिसे बंद करना सबसे ज़रूरी है।

IBD (अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिजीज) में तनाव का कहर

IBD आंतों की एक गंभीर सूजन वाली ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें आंतों के अंदर गहरे घाव (Ulcers) बन जाते हैं। हालांकि तनाव IBD को पैदा नहीं करता, लेकिन यह इस बीमारी को भड़काने (Flare-up) का सबसे बड़ा कारण है।

  • इम्युनिटी का कमज़ोर होना: क्रोनिक स्ट्रेस आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को पूरी तरह कंफ्यूज़ कर देता है। स्ट्रेस में शरीर अपनी ही आंतों को दुश्मन मानकर उन पर हमला तेज़ कर देता है।
  • फ्लेयर-अप (Flare-ups): जो मरीज़ दवाइयों से बिल्कुल ठीक (Remission) चल रहे होते हैं, उन्हें सिर्फ एक बड़े मानसिक झटके या भारी स्ट्रेस के बाद अचानक मल में खून, म्यूकस और भयंकर डायरिया शुरू हो जाता है।
  • हीलिंग में रुकावट: स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) आंतों के घावों को भरने से रोकता है। आप चाहे कितनी भी महँगी दवाइयाँ खा लें, जब तक आपका दिमाग शांत नहीं होगा, आंतों के अल्सर कभी नहीं सूखेंगे।

हमारी गलत जीवनशैली: जो स्ट्रेस और पेट दोनों को बिगाड़ रही है

हम सोचते हैं कि सिर्फ काम का तनाव ही पेट खराब कर रहा है, लेकिन हमारी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी हमारे गट-ब्रेन एक्सिस को तबाह कर रही हैं। इन आदतों को बदलना बहुत ज़रूरी है।

  • स्क्रीन देखते हुए खाना: आज हम लैपटॉप पर काम करते हुए या मोबाइल में रील्स देखते हुए खाना खाते हैं। जब आपका दिमाग स्क्रीन के स्ट्रेस में होता है, तो पेट खाने को पचाने के लिए ज़रूरी पाचक रस (Digestive juices) रिलीज़ ही नहीं करता।
  • स्ट्रेस ईटिंग (Stress Eating): जब हम तनाव में होते हैं, तो हम अक्सर जंक फूड, भारी मीठा या फ्राइड चीज़ें खाते हैं। यह जंक फूड आंतों के 'गुड बैक्टीरिया' (Gut Flora) को मार देता है, जिससे आंतों की इम्युनिटी खत्म हो जाती है।
  • नींद की कमी: रात की गहरी नींद के दौरान ही शरीर आंतों की मरम्मत करता है और तनाव को रिलीज़ करता है। लगातार लेट सोने की आदत गट-ब्रेन एक्सिस को पूरी तरह हैक कर लेती है।
  • कैफीन का ओवरडोज़: स्ट्रेस में जगा रहने के लिए लोग दिन भर में कई कप चाय या कॉफी पी जाते हैं। कैफीन सीधे तौर पर स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाता है और आंतों में भारी तेज़ाब पैदा करता है।

आयुर्वेद इस कनेक्शन को कैसे समझता है? (मन और अग्नि का संबंध)

आयुर्वेद में दिमाग और पेट के इस गहरे संबंध को आज से हज़ारों साल पहले ही बहुत स्पष्ट रूप से समझा दिया गया था। आधुनिक विज्ञान जिस 'गट-ब्रेन एक्सिस' की बात आज कर रहा है, आयुर्वेद की नींव ही उसी पर टिकी है।

  • अग्नि और मन: आयुर्वेद मानता है कि हमारी पाचन शक्ति (Agni) सीधे तौर पर हमारे 'मन' (Mind) से जुड़ी है। अगर मन में काम (Desire), क्रोध (Anger), शोक (Grief), या भय (Fear) है, तो आप दुनिया का सबसे पौष्टिक खाना भी खा लें, वह पेट में ज़हर (आम) ही बनेगा।
  • वात दोष का भड़कना: तनाव, चिंता और डर सबसे पहले शरीर में 'वात दोष' (हवा और आकाश तत्व) को भड़काते हैं। विशेष रूप से 'प्राण वात' (दिमाग) और 'समान/अपान वात' (पेट और आंतें) का तालमेल बिगड़ जाता है।
  • रोगों की जड़: इसी भड़के हुए वात के कारण आंतों की गति बिगड़ जाती है, जिससे IBS (ग्रहणी दोष) पैदा होता है। और जब इसके साथ पित्त (गर्मी) जुड़ जाती है, तो आंतों में अल्सर (IBD/रक्तातिसार) बन जाते हैं।

गट हेल्थ और दिमाग को शांत करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें पेट की सूजन कम करने और दिमाग के स्ट्रेस को सोखने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के काम करती हैं।

  • ब्राह्मी (Brahmi) और शंखपुष्पी: ये दोनों जड़ी-बूटियाँ दिमाग के लिए 'सुपरफूड' हैं। ये स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को तुरंत नीचे लाती हैं, एंग्जायटी (Anxiety) खत्म करती हैं और गट-ब्रेन एक्सिस को शांत करती हैं।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह शरीर को स्ट्रेस से लड़ने की ताकत (Adaptogen) देता है। यह कमज़ोर आंतों को भारी मज़बूती देता है और नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करता है।
  • बिल्व (Bael): बेल का फल IBS और IBD, दोनों में अमृत के समान है। यह आंतों की सूजन को चूस लेता है, मल को बांधता है और पेट के नर्वस सिस्टम को शांत करता है।
  • कुटज (Kutaja): जब स्ट्रेस के कारण बार-बार दस्त लग रहे हों या आंतों से खून आ रहा हो, तो कुटज आंतों के घाव को भरने और इन्फेक्शन को रोकने की सबसे अचूक दवा है।

पंचकर्म थेरेपी तनाव और पाचन को कैसे ठीक करती है?

जब सिर्फ दवाइयों से स्ट्रेस और IBS की साइकिल न टूट रही हो, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर और दिमाग दोनों को गहराई से डिटॉक्स करके एकदम नया बना देती है।

  • शिरोधारा (Shirodhara): यह स्ट्रेस और गट-ब्रेन एक्सिस की सबसे जादुई थेरेपी है। इसमें माथे पर लगातार औषधीय तेल या काढ़े की धार गिराई जाती है। यह दिमाग को इतना गहरे ध्यान (Meditation) की अवस्था में ले जाती है कि सारा तनाव, डर और एंग्जायटी शरीर से बहकर निकल जाती है और पेट अपने आप शांत हो जाता है।
  • तक्रधारा (Takradhara): अगर पेट में बहुत ज़्यादा गर्मी और सूजन (IBD) है, तो माथे पर औषधीय छाछ (तक्र) की धारा गिराई जाती है। यह दिमाग को शांत करने के साथ-साथ आंतों की भयंकर गर्मी को भी खींच लेती है।
  • बस्ती (Basti): आंतों के नर्वस सिस्टम को शांत करने और वहां जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए औषधीय तेलों या काढ़े का एनिमा दिया जाता है। यह 'वात' दोष को जड़ से खत्म करता है।

गट-फ्रेंडली और वात-शामक डाइट प्लान कैसा हो?

आप जो खाते हैं, वह सीधे आपके दिमाग के रसायनों (Serotonin) और पेट के बैक्टीरिया को प्रभावित करता है। स्ट्रेस और पेट की बीमारी को हराने के लिए सही डाइट का पालन करना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
आहार का सिद्धांत सात्विक, हल्का, गर्म और सुपाच्य भोजन; शांत मन से, बिना स्क्रीन देखे ज़मीन पर बैठकर खाना जल्दबाज़ी में, तनाव में या स्क्रीन देखते हुए खाना
पोषक तत्व गाय का शुद्ध घी, मूंग की दाल, पुराना चावल, उबली सब्जियाँ: आंतों को पोषण व चिकनाई देते हैं भारी, तैलीय और कठिन पचने वाला भोजन
क्या बिल्कुल न खाएं हल्का और संतुलित भोजन राजमा, छोले, मैदा, बहुत कच्चा सलाद, पैकेटबंद जंक फूड (खासकर तनाव में)
दैनिक पेय सौंफ-जीरे का गुनगुना पानी, ताज़ा मीठा छाछ (तक्र): पाचन और गट हेल्थ के लिए लाभकारी चाय और कॉफी
जीवनशैली सहयोग रोज़ 30 मिनट योगासन (वज्रासन, पवनमुक्तासन) और अनुलोम-विलोम: स्ट्रेस कम कर पाचन सुधारते हैं निष्क्रिय जीवनशैली और तनाव को अनदेखा करना

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई जादू की छड़ी नहीं है जो सालों पुराने मानसिक तनाव और आंतों के घावों को एक दिन में गायब कर दे। आपके दिमाग और पेट के बिगड़े हुए कनेक्शन को दोबारा रीसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; गैस, एसिडिटी और पेट की भयंकर मरोड़ काफी कम होने लगेंगी। नींद अच्छी आने लगेगी और दिमाग में एक अजीब सी शांति महसूस होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: भड़का हुआ वात शांत होने से बार-बार वॉशरूम भागने की आदत (IBS) कंट्रोल में आ जाएगी। एंग्जायटी और पैनिक अटैक्स खत्म होने लगेंगे। अगर IBD है, तो खून आना रुक जाएगा।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपका पूरा गट-ब्रेन एक्सिस दोबारा ताकतवर बन जाएगा। आंतों की सुरक्षा परत अंदर से पूरी तरह हील हो जाएगी। आप बिना किसी डर और स्ट्रेस के एक सामान्य और खुशहाल ज़िंदगी जी सकेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

टीवी पर डॉ. चौहान का वीडियो देखने के बाद मैंने IBS और कमजोर पाचन के लिए जीवा क्लिनिक से संपर्क किया। 5 महीनों के भीतर मुझे काफी राहत महसूस हुई। मेरा पाचन बेहतर हो गया है और अब मैं कई ऐसी चीज़ें खा पा रहा हूँ, जो कुछ महीने पहले तक संभव नहीं थीं।

हालाँकि, मैं अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ हूँ, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि यदि मैं नियमित रूप से दवाइयाँ लेता रहूँ और आहार का पालन करता रहूँ, तो जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाऊँगा।

हर्ष रॉय
नोएडा

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

पेट और स्ट्रेस की इस गंभीर समस्या के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य एंटीस्पास्मोडिक्स और एंटीडिप्रेसेंट दवाओं से लक्षणों को दबाना वात को शांत करके, अग्नि सुधारकर और मन को मज़बूत बनाकर जड़ से समाधान
शरीर को देखने का नज़रिया पेट और दिमाग को अलग-अलग मानकर अलग उपचार शरीर को एक संपूर्ण प्रणाली मानकर ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ को साथ में संतुलित करना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट पर सीमित ध्यान, मुख्य फोकस दवाओं पर सात्विक डाइट, छाछ, ध्यान (Meditation) और ‘विरुद्ध आहार’ से परहेज़ को मुख्य आधार
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ते ही स्ट्रेस और मरोड़ वापस; आदत पड़ने का खतरा जड़ी-बूटियों से नर्वस सिस्टम मजबूत कर शरीर को स्वयं स्ट्रेस संभालने योग्य बनाना

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

पेट की हर गड़बड़ी को सिर्फ स्ट्रेस मानकर इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर आपको अपने शरीर में ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह किसी भयंकर बीमारी का अलार्म हो सकता है; तुरंत डॉक्टर से मिलें।

  • मल में बेतहाशा खून: अगर आपको लगातार कई दिनों तक मल के साथ बहुत ज़्यादा मात्रा में साफ लाल खून या बड़े-बड़े थक्के आ रहे हों (यह IBD या अल्सर का पक्का संकेत है)।
  • तेज़ी से वज़न गिरना: अगर बिना किसी डाइटिंग या कोशिश के आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिर रहा हो और आपको हर समय भयंकर कमज़ोरी व थकान महसूस हो।
  • असहनीय और लगातार दर्द: अगर पेट में अचानक से चाकू चुभने जैसा बहुत तेज़ दर्द उठे जो मल त्यागने के बाद भी कम न हो और पेट बिल्कुल सख्त (Tight) हो जाए।
  • लगातार बुखार और उल्टी: अगर पेट दर्द के साथ आपको लगातार तेज़ बुखार रहने लगे और आप जो भी खाएं वह उल्टी के ज़रिए बाहर आ जाए (यह आंतों में भयंकर इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है)।
  • रात में नींद खुलना: IBS का दर्द अक्सर इंसान को रात में जगाता नहीं है। अगर पेट की मरोड़ या डायरिया के कारण आपकी रात की नींद टूट रही है, तो यह IBD जैसी किसी गंभीर बीमारी का संकेत है।

निष्कर्ष

आपके दिमाग का तनाव (Stress) और आपके पेट का स्वास्थ्य (Gut Health) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब आप अपनी ज़िंदगी की परेशानियों, ऑफिस के दबाव और एंग्जायटी को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो आपका शरीर उस अनदेखे तनाव को पेट की गैस, मरोड़, IBS या अल्सर के रूप में बाहर निकालता है। "गट-ब्रेन एक्सिस" की सच्चाई यही है कि आप अपने दिमाग को सुन्न करने वाली गोलियाँ या पेट रोकने वाले चूर्ण खाकर इस समस्या को कभी खत्म नहीं कर सकते। जब तक आपकी आंतों में पल रही सूजन शांत नहीं होगी, आपका दिमाग डिप्रेशन से बाहर नहीं आएगा; और जब तक आपका दिमाग रिलैक्स नहीं होगा, आपकी आंतों के घाव कभी नहीं भरेंगे। इस खतरनाक दुष्चक्र (Vicious Cycle) को तोड़ने के लिए एक समग्र (Holistic) दृष्टिकोण की ज़रूरत है। आयुर्वेद आपको इस छलावे से बाहर निकालकर एक स्थायी और प्राकृतिक समाधान देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, ब्राह्मी और बिल्व जैसी चमत्कारी जड़ी-बूटियों, पंचकर्म की शिरोधारा थेरेपी और सही सात्विक जीवनशैली को अपनाकर आप अपने दिमाग की आग को शांत कर सकते हैं और अपने पेट को फौलाद सा मज़बूत बना सकते हैं। तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें, बीमारी की जड़ को मिटाएं, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपने शरीर और मन दोनों को हमेशा के लिए आज़ाद करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह हमारे दिमाग और पेट (आंतों) के बीच का एक सीधा और टू-वे (Two-way) कनेक्शन है, जो वेगस नर्व के ज़रिए जुड़ा होता है। इसी कनेक्शन के कारण तनाव का सीधा असर पेट पर और पेट खराब होने का असर हमारे मूड पर पड़ता है।

तनाव में शरीर का फाइट या फ्लाइट मोड ऑन हो जाता है। इससे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज़ होते हैं जो आंतों की सिकुड़ने और फैलने की गति (Motility) को बहुत ज़्यादा तेज़ कर देते हैं, जिससे खाना बिना पचे पानी की तरह बाहर आ जाता है।

IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) में आंतों की गति बिगड़ती है लेकिन अंदर कोई घाव नहीं होता (रिपोर्ट्स नॉर्मल आती हैं)। IBD (इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज) एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें आंतों के अंदर भयंकर सूजन और अल्सर (घाव) बन जाते हैं।

हाँ, बहुत ज़्यादा स्ट्रेस और एंग्जायटी लेने से पेट में एसिड (तेज़ाब) का स्राव बढ़ जाता है और पेट की सुरक्षा परत को खून का दौरा कम हो जाता है। इससे अल्सर बनने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिसे स्ट्रेस अल्सर कहते हैं।

अगर आपकी तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स (एंडोस्कोपी/अल्ट्रासाउंड) नॉर्मल आ रही हैं, लेकिन जब भी आपको कोई ऑफिस मीटिंग, एग्जाम या ट्रैवलिंग की टेंशन होती है और तभी आपको वॉशरूम भागना पड़ता है, तो यह 100% स्ट्रेस (IBS) है।

बिल्कुल। शरीर का 90% सेरोटोनिन (ख़ुशी का हार्मोन) आंतों में बनता है। जब आंतें बीमार होती हैं या उनका फ्लोरा (गुड बैक्टीरिया) मर जाता है, तो सेरोटोनिन का बनना कम हो जाता है, जिससे इंसान बिना कारण डिप्रेशन में चला जाता है।

जी हाँ! आयुर्वेद में ब्राह्मी, अश्वगंधा (दिमाग के लिए) और बिल्व, कुटज (पेट के लिए) जैसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो एक साथ गट-ब्रेन एक्सिस को शांत करती हैं और बीमारी को जड़ से खत्म करती हैं।

शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराई जाती है। यह सीधे आपके नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है और स्ट्रेस हार्मोन को खत्म कर देती है। दिमाग शांत होते ही आंतों की मरोड़ अपने आप खत्म हो जाती है।

बहुत ज़्यादा राजमा, छोले, मैदा, कच्चा सलाद, चाय, कॉफी, भारी मसालेदार खाना और शराब बिल्कुल बंद कर दें। ये चीज़ें आंतों में भयंकर गैस और एसिड बनाती हैं, जो गट-ब्रेन एक्सिस को सीधे तौर पर भड़काती हैं।

जी हाँ, योग (जैसे वज्रासन) और ध्यान (Meditation) सीधे तौर पर वेगस नर्व को एक्टिवेट करते हैं और शरीर को रिलैक्स मोड में लाते हैं। इससे स्ट्रेस कम होता है और आंतों की गति प्राकृतिक रूप से नॉर्मल हो जाती है।

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