Diseases Search
Close Button
 
 

Heat और Low Hydration Kidney Stress क्यों बढ़ा सकते हैं — Ayurveda Seasonal Care

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मई की झुलसा देने वाली लू और दिल्ली-एनसीआर की तपती दोपहरी में शरीर का सारा पानी पसीने के रूप में उड़ जाना एक आम बात है। ऑफिस की लंबी शिफ्ट्स में, लगातार स्क्रीन के सामने बैठे हुए हम अक्सर तब तक पानी नहीं पीते, जब तक कि प्यास बर्दाश्त के बाहर न हो जाए। और फिर प्यास बुझाने के लिए हम एक ही सांस में फ्रिज का जमा हुआ पानी या कोई एनर्जी ड्रिंक गटक लेते हैं।

हमें लगता है कि हमने शरीर को हाइड्रेट (Hydrate) कर लिया है, लेकिन असल में यह 'लो हाइड्रेशन' (Low Hydration) और भयंकर गर्मी का कॉकटेल शरीर के सबसे अहम फिल्टर, आपकी किडनी (Kidneys), को अंदर ही अंदर सुखा रहा होता है। किडनी कोई ऐसी मशीन नहीं है जिसे खराब होने पर आसानी से बदला जा सके; यह आपके शरीर की वह 'Buy It For Life' (BIFL) संपत्ति है जो अगर एक बार डैमेज हो गई, तो पूरी जीवनशैली को अपाहिज कर देती है।

गर्मी और पानी की कमी (Low Hydration) किडनी पर इतना भारी स्ट्रेस क्यों डालते हैं?

किडनी हमारे शरीर का वह स्मार्ट फिल्टर है जिसे अपना काम सुचारू रूप से करने के लिए लगातार साफ़ पानी के एक स्थिर प्रवाह (Steady flow) की ज़रूरत होती है। जब बाहर का तापमान बढ़ता है और शरीर में पानी कम होता है, तो यह सिस्टम कोलैप्स (Collapse) होने लगता है:

  • रक्त का भयंकर गाढ़ा होना: पसीने से पानी उड़ने के बाद खून गाढ़ा हो जाता है। इस गाढ़े और टॉक्सिन्स (Toxins) से भरे खून को फिल्टर करने के लिए किडनी की नाज़ुक नलिकाओं (Nephrons) को अपनी क्षमता से कई गुना ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है।
  • यूरिक एसिड और क्रिस्टल्स का जमना: पर्याप्त पानी न होने के कारण यूरिन गाढ़ा और एसिडिक (Acidic) हो जाता है। जो यूरिक एसिड और कैल्शियम यूरिन के ज़रिए बाहर निकल जाने चाहिए थे, वे किडनी के अंदर ही क्रिस्टल्स (Crystals) का रूप लेने लगते हैं, जो बाद में पथरी (Stones) बन जाते हैं।
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress): गर्मी के कारण शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे कोशिकाओं में भयंकर सूजन (Inflammation) पैदा होती है। किडनी को इस सूजन और हीट स्ट्रेस (Heat Stress) से लड़ने के लिए एक्स्ट्रा ऊर्जा लगानी पड़ती है।
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): यूरिन का फ्लो रुकने से बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक्ट में पनपने का पूरा मौका मिल जाता है, जो किडनी तक पहुँचकर गंभीर इन्फेक्शन पैदा कर सकते हैं।

डिहाइड्रेशन और हीट से होने वाला किडनी स्ट्रेस किन प्रकारों का होता है?

हर शरीर भयंकर गर्मी को अलग तरीके से झेलता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के बिगड़े हुए दोषों के आधार पर किडनी का यह स्ट्रेस मुख्य रूप से तीन प्रकारों में सामने आता है:

  • वात-प्रधान स्ट्रेस (रूखापन): इस स्थिति में किडनी और मूत्रवह स्रोतस में भयंकर खुश्की आ जाती है। यूरिन बहुत कम आता है और कमर के निचले हिस्से में भयंकर ऐंठन (Spasm) वाला दर्द होता है। वात दोष कम करने के उपाय न करने पर नसें सूखने लगती हैं।
  • पित्त-प्रधान स्ट्रेस (जलन): यह गर्मियों में सबसे आम है। खून में पित्त भड़कने से यूरिन का रंग गहरा पीला या लालिमा लिए हुए हो जाता है। पेशाब करते समय आग जैसी जलन होती है और बार-बार यूटीआई (UTI) होता है।
  • कफ-प्रधान स्ट्रेस (रुकावट): किडनी जब टॉक्सिन्स फिल्टर नहीं कर पाती, तो शरीर में पानी रुकने लगता है (Water Retention)। आँखों के नीचे सूजन, पैरों में भारीपन और अकारण वज़न बढ़ने जैसी सुस्ती हावी हो जाती है।

क्या आपका शरीर भी किडनी डैमेज के ये साइलेंट अलार्म बजा रहा है?

किडनी फेलियर का दर्द रातों-रात नहीं उठता। अपने और अपने परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रोएक्टिव हेल्थ स्क्रीनिंग (Proactive Health Screening) बहुत ज़रूरी है। इन शुरुआती संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें:

  • यूरिन के रंग और गंध में बदलाव: अगर भरपूर पानी पीने के बाद भी यूरिन गहरे पीले रंग (Dark yellow) का आ रहा है या उसमें से तेज़ अमोनिया जैसी बदबू आ रही है।
  • पीठ के निचले हिस्से (Flank) में भारीपन: रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ जहां किडनी होती है, वहां एक अजीब सा भारीपन या मीठा-मीठा दर्द बने रहना।
  • अचानक भयंकर थकावट: शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और टॉक्सिन्स के बढ़ने के कारण थोड़ा सा काम करने पर ही क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) और चक्कर आने जैसा महसूस होना।
  • मुँह का सूखना और धातु जैसा स्वाद: बार-बार पानी पीने पर भी मुँह सूखना और जीभ पर एक अजीब सा मेटैलिक (Metallic) स्वाद आना।

प्यास बुझाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

गर्मियों की इस जानलेवा प्यास और हीट स्ट्रेस से बचने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो किडनी के लिए सीधा ज़हर बन जाते हैं:

  • फ्रिज का बर्फ वाला पानी गटकना: धूप से आकर एक सांस में ठंडा पानी पीना जठराग्नि को पूरी तरह बुझा देता है। यह किडनी की नसों को अचानक सिकोड़ (Shock) देता है, जिससे ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
  • कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स पर निर्भरता: सुस्ती दूर करने के लिए दिन भर चाय, डार्क कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीना। ये चीज़ें डाययूरेटिक (Diuretic) होती हैं, जो शरीर से बचा-खुचा पानी भी निचोड़ कर बाहर निकाल देती हैं और डिहाइड्रेशन को 10 गुना बढ़ा देती हैं।
  • पेशाब को लंबे समय तक रोकना: काम के प्रेशर या साफ़ टॉयलेट न मिलने के कारण यूरिन को घंटों रोकना। यह रुके हुए टॉक्सिन्स को वापस किडनी में धकेल देता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: अगर इस रूटीन को न सुधारा जाए, तो यह आगे चलकर क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) और गंभीर जोड़ों की समस्याओं (यूरिक एसिड जमने से) का रूप ले लेता है।

आयुर्वेद 'हीट स्ट्रेस' और किडनी के इस विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे डिहाइड्रेशन और रीनल स्ट्रेस (Renal Stress) कहता है, आयुर्वेद उसे 'मूत्रवह स्रोतस' की विकृति, 'अपान वात' का असंतुलन और बढ़े हुए पित्त से समझता है।

  • पाचक पित्त का भड़कना: जब शरीर में पानी (क्लेद) कम हो जाता है, तो पेट और खून की गर्मी (पित्त) बेकाबू हो जाती है। यह भड़का हुआ पित्त सीधे तौर पर किडनी के नाज़ुक टिश्यूज़ (Tissues) को जलाता है।
  • अपान वात का उलटा बहना: यूरिन और मल को नीचे धकेलने का काम अपान वात करता है। जब मूत्रवह चैनल्स में रूखापन आता है, तो यह वात अपनी दिशा भूलकर ऊपर की ओर चढ़ता है, जिससे कमर दर्द और घबराहट होती है।
  • 'आम' (Toxins) का संचय: पाचन तंत्र के सुस्त होने से बना ज़हरीला 'आम' किडनी के सूक्ष्म फिल्टर को चोक कर देता है, जिससे यूरिन का फ्लो टूट जाता है।

किडनी को हाइड्रेट और फ्लश करने वाली 'क्लीन ईटिंग' आयुर्वेदिक डाइट

गर्मियों में केवल सादा पानी पीना काफी नहीं है। इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करने और शुद्ध शाकाहारी भोजन से किडनी को सुरक्षित रखने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - कूलिंग और किडनी डिटॉक्स) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - डिहाइड्रेशन और एसिडिटी बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley सबसे श्रेष्ठ मूत्रल है), ओट्स, रागी, मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, भारी राजमा या छोले।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी (किडनी के लिए अमृत), पेठा (Ash gourd), परवल, कद्दू, खीरा। कच्चा सलाद, अत्यधिक टमाटर (बीज वाले), बैंगन, शिमला मिर्च।
फल (Fruits) ताज़ा नारियल पानी, तरबूज़, खरबूजा, ताज़े मीठे अंगूर, सेब। डिब्बाबंद जूस, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स वाले फ्रूट स्नैक्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (पित्त शांत करने के लिए)। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत ज़्यादा तला-भुना।
पेय पदार्थ (Beverages) जौ का पानी, धनिए का पानी, पुदीने का शर्बत, ताज़ा मट्ठा (छाछ)। कॉफी, चाय, पैकेटबंद एनर्जी ड्रिंक्स और शराब (Alcohol)।

किडनी को सक्षम बनाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

अगर आप अपनी किडनी को प्राकृतिक रूप से शानदार और रोग-मुक्त रखना चाहते हैं, तो प्रकृति के इन दिव्य रसायनों पर भरोसा करें:

  • गोक्षुर: किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाने, यूरिन का फ्लो ठीक करने और यूरिक एसिड को शरीर से फ्लश करने के लिए गोक्षुर सबसे जादुई और सुरक्षित रसायन है।
  • धनिया: गर्मियों में शरीर की भयंकर गर्मी (पित्त) और यूरिन की आग जैसी जलन को शांत करने के लिए रात भर भीगे हुए धनिए के बीजों का पानी एक बेहतरीन शीतल औषधि है।
  • वरुण: यह जड़ी-बूटी यूरिनरी ट्रैक्ट की गर्मी व सूजन को शांत करने और क्रिस्टल्स को गलाने के लिए आयुर्वेद में अचूक मानी जाती है।
  • पुनर्नवा: जब किडनी के सही से काम न करने पर शरीर में पानी भर जाता है (Water retention), तो पुनर्नवा उस रुके हुए फ्लूइड को प्राकृतिक रूप से बाहर निकाल देता है।
  • गिलोय: बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन को रोकने और शरीर की इम्युनिटी बढ़ाकर अंदरूनी सूजन को खत्म करने के लिए गिलोय बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है।

किडनी और शरीर की गर्मी को शांत करने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब डिहाइड्रेशन और पित्त का स्ट्रेस नसों में गहराई तक जम चुका हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • तक्रधारा (Takradhara): गर्मियों में औषधीय मट्ठे (Buttermilk) की लगातार धारा माथे पर गिराने की यह प्रक्रिया मानसिक तनाव और शरीर के भयंकर पित्त को तुरंत शांत कर देती है।
  • विरेचन (Virechana): लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) शरीर से अत्यधिक एसिडिटी और 'आम' को बाहर निकालकर किडनी पर दबाव घटाती है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): शुद्ध कूलिंग औषधीय तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) शरीर की जकड़न को खत्म करती है और रोम-छिद्रों के ज़रिए शरीर का तापमान संतुलित करती है।

किडनी के पूरी तरह हाइड्रेट और रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय तक हीट स्ट्रेस और टॉक्सिन्स झेलने वाली किडनी को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। यूरिन की जलन और डार्क पीले रंग में भारी कमी आएगी। शरीर का भारीपन और थकावट दूर होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: गोक्षुर और पुनर्नवा के प्रभाव से किडनी के अंदर जमे हुए टॉक्सिन्स साफ होने लगेंगे। शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस होंगे और एक नई हल्की ऊर्जा महसूस होगी।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म और नर्वस सिस्टम पूरी तरह से रीबूट हो जाएगा। किडनी बिना किसी स्ट्रेस के प्राकृतिक रूप से खून को साफ करने में सक्षम हो जाएगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गर्मियों में किडनी की सुरक्षा और हाइड्रेशन को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड ब्लॉक करने वाली गोलियाँ देना और ज़बरदस्ती 4-5 लीटर पानी पीने की सलाह। जठराग्नि को बढ़ाना, वात-पित्त को शांत करना, और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों (गोक्षुर) से किडनी को डिटॉक्स करना।
पानी पीने का नज़रिया हर व्यक्ति के लिए पानी पीने का एक ही 'जेनेरिक' (Generic) फॉर्मूला। शरीर की 'प्रकृति' और प्यास (वेग) के अनुसार घूंट-घूंट करके पानी पीने का नियम।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल नमक कम करने की सलाह दी जाती है। भोजन की तासीर (गर्म/ठंडी) पर कोई खास ज़ोर नहीं। क्लीन ईटिंग', शीतवीर्य (ठंडी) डाइट, जौ का पानी और प्राकृतिक दिनचर्या को ही सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर यूरिन इन्फेक्शन और स्ट्रेस तुरंत वापस आ जाते हैं। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और किडनी इतनी मज़बूत हो जाती है कि वह प्राकृतिक रूप से एसिड को बाहर फेंकना सीख जाती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • यूरिन का बिल्कुल बंद हो जाना: अगर पानी पीने के बावजूद यूरिन बिल्कुल भी न आए या बूँद-बूँद आए, जो किडनी में बड़ी रुकावट का इशारा है।
  • यूरिन में खून आना: अगर आपको यूरिन पास करते समय असहनीय दर्द हो और यूरिन का रंग लाल या कोका-कोला जैसा डार्क ब्राउन हो जाए।
  • पीठ और पेट में असहनीय मरोड़: अगर पीठ के निचले हिस्से से पेट तक इतना भयंकर दर्द उठे कि खड़े होना या लेटना भी मुश्किल हो जाए (यह पथरी का दर्द हो सकता है)।
  • लगातार उल्टियाँ और तेज़ बुखार: अगर पेशाब में जलन के साथ-साथ भयंकर ठंड लगकर बुखार आए और कुछ भी खाने पर तुरंत उल्टी हो जाए (यह किडनी इन्फेक्शन का गंभीर संकेत है)।

निष्कर्ष

शरीर एक 'बाय इट फॉर लाइफ' संपत्ति है। जिस तरह आप अपने तकनीकी उपकरणों को ओवरहीट होने से बचाते हैं, उसी तरह आपकी किडनी को भी हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन से बचाने की सख्त ज़रूरत है। प्यास लगने पर गटका गया कैफीन या फ्रिज का जमा हुआ पानी आपकी किडनी को फायदा नहीं, बल्कि सीधा शॉक पहुँचाता है। यह कोई साधारण थकावट नहीं है; यह आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि आपके मूत्रवह स्रोतस ब्लॉक हो चुके हैं। जब आप इस अलार्म को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो आप अपनी किडनी के फिल्टर्स को हमेशा के लिए अपाहिज कर देते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। पानी को ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि प्यास के अनुसार घूंट-घूंट करके पिएं। 'क्लीन ईटिंग' अपनाएं, जंक फूड छोड़ें और अपनी डाइट में जौ का पानी, ताज़ा मट्ठा और लौकी को शामिल करें। गोक्षुर, वरुण और धनिया जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की तक्रधारा थेरेपी से अपने शरीर की भयंकर गर्मी को शांत करें। अपनी किडनी को सुरक्षित और फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आयुर्वेद कभी भी एक तय मात्रा (जैसे 4 लीटर) ज़बरदस्ती पीने की सलाह नहीं देता। ज़्यादा पानी पीने से जठराग्नि बुझ सकती है और किडनी पर भारी दबाव पड़ सकता है। आपको अपनी प्यास (वेग) के अनुसार ही पानी पीना चाहिए। अगर यूरिन साफ आ रहा है, तो आपका हाइड्रेशन सही है।

बिल्कुल। खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज़ी से आंतों से गुज़रता है और पेट के निचले हिस्से के आसपास जमा हो जाता है। इससे वात दोष भड़कता है, जो सीधे तौर पर घुटनों (Arthritis) और किडनी के फिल्टर सिस्टम को नुकसान पहुँचाता है। पानी हमेशा बैठकर और घूंट-घूंट करके पिएं।

हाँ। गर्मियों में पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो जाती है। पानी कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है और यूरिन एसिडिक हो जाता है, जिससे यूरिक एसिड क्रिस्टल्स के रूप में तेज़ी से जोड़ों और किडनी में जमने लगता है।

शत-प्रतिशत। एसी हवा से सारी नमी खींच लेता है, जिससे त्वचा और सांस के ज़रिए शरीर का पानी तेज़ी से सूखता है। एसी में पसीना नहीं आता, इसलिए प्यास कम लगती है, और यही खामोश डिहाइड्रेशन किडनी को सबसे ज़्यादा डैमेज करता है।

नहीं, ये किडनी के लिए धीमा ज़हर हैं। इनमें भारी मात्रा में कैफीन और कृत्रिम चीनी होती है। ये डाययूरेटिक (Diuretic) होते हैं, यानी ये शरीर से बचे-खुचे पानी को भी बाहर निकालते हैं और प्यास बुझाने के बजाय शरीर को और भी ज़्यादा डिहाइड्रेट कर देते हैं।

जौ की तासीर ठंडी होती है और यह एक बेहतरीन प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) है। यह किडनी पर बिना दबाव डाले यूरिन का फ्लो बढ़ाता है, शरीर से अत्यधिक गर्मी और टॉक्सिन्स को फ्लश करता है और पथरी बनने से रोकता है।

बिल्कुल। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो आंतें मल (Stool) में मौजूद पानी को सोख लेती हैं ताकि शरीर के ज़रूरी अंगों को पानी मिल सके। इससे मल सूखकर पत्थर जैसा हो जाता है और भयंकर कब्ज़ हो जाती है।

शत-प्रतिशत। धनिए के बीज तासीर में बहुत ठंडे होते हैं। 2 चम्मच धनिए के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर सुबह वह पानी पीने से पित्त की गर्मी तुरंत शांत होती है और यूरिन की जलन में जादुई राहत मिलती है।

बिल्कुल नहीं। वर्कआउट के समय शरीर की जठराग्नि और तापमान (पित्त) चरम पर होता है। उस पर तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी डालने से अग्नि बुझ जाती है, मेटाबॉलिज़्म क्रैश कर जाता है और किडनी की नसों में शॉक (Shock) पैदा होता है। हमेशा सामान्य या हल्का गुनगुना पानी घूंट-घूंट करके पिएं।

हाँ। आपके परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों और आपके लिए भी समय-समय पर रूटीन चेकअप और आयुर्वेदिक नाड़ी परीक्षा यह पकड़ सकती है कि शरीर में आम या यूरिक एसिड तो नहीं बढ़ रहा। बीमारी के गंभीर होने से पहले ही लाइफस्टाइल सुधारकर किडनी को 100% सुरक्षित रखा जा सकता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us