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गर्मी में Migraine क्यों बढ़ जाता है? Heat, Dehydration और Pitta का क्या है Connection

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

 मई-जून की तेज़ गर्मी में कई लोगों को बार-बार सिर दर्द की शिकायत होने लगती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ़ सामान्य सिर दर्द नहीं होता। धूप में थोड़ी देर निकलते ही सिर के एक हिस्से में तेज़ दर्द, आँखों में जलन, उल्टी जैसा महसूस होना और तेज़ रोशनी से परेशानी शुरू हो जाती है। यही माइग्रेन का अटैक हो सकता है।

कई लोग महसूस करते हैं कि गर्मियों में उनके माइग्रेन के दौरे पहले से ज़्यादा बढ़ जाते हैं। कभी तेज़ धूप, कभी शरीर में पानी की कमी, तो कभी देर तक खाली पेट रहना ये छोटी लगने वाली बातें भी माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में शरीर में पित्त दोष बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है। जब शरीर के अंदर गर्मी और दाह बढ़ने लगती है, तो उसका असर सिर, आँखों, पाचन और मानसिक स्थिति पर भी दिख सकता है। यही वज़ह है कि इस मौसम में माइग्रेन के लक्षण ज़्यादा तेज़ महसूस हो सकते हैं।

माइग्रेन क्या होता है?

अगर आप सोचते हैं कि माइग्रेन बस एक आम सिरदर्द है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। यह असल में एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है जिसमें सिर के किसी एक हिस्से में ऐसा भयंकर दर्द उठता है मानो अंदर कोई हथौड़े चला रहा हो। जब इसका अटैक आता है, तो यह अपने साथ जी मिचलाना, उल्टियां होना, और तेज रोशनी या मामूली आवाज से भी चिड़चिड़ापन जैसी मुसीबतें लेकर आता है। कुछ लोगों की किस्मत अच्छी होती है कि उनका यह दर्द कुछ ही घंटों में शांत हो जाता है, लेकिन बहुत से बदकिस्मत लोग ऐसे भी हैं जो इस टॉर्चर को लगातार एक से दो दिनों तक झेलने को मजबूर हो जाते हैं। 

गर्मी में Migraine Trigger क्यों बढ़ते हैं? 

गर्मियों के आते ही माइग्रेन का ग्राफ अचानक से ऊपर भागने लगता है। आयुर्वेद की मानें तो इसका सीधा कनेक्शन हमारे शरीर के दोषों और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल से है। चलिए समझते हैं कि चिलचिलाती गर्मी हमारे सिर के इस दर्द को कैसे भड़काती है।

  • पित्त दोष का तेजी से बढ़ना: बाहर की चुभती हुई तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर के अंदरूनी 'पित्त' को एकदम से बढ़ा देती हैं। जब यह पित्त भड़कता है, तो सिर में आग जैसी जलन, आंखों में लाली और धक-धक करने वाला तेज दर्द शुरू हो जाता है।
  • शरीर में पानी का सूखा पड़ना: गर्मियों में पसीना इतना ज्यादा निकलता है कि अगर आप पानी पीने में थोड़ी भी लापरवाही करें, तो डिहाइड्रेशन होते देर नहीं लगती। शरीर में लिक्विड बैलेंस बिगड़ते ही दिमाग की नसें सुस्त पड़ने लगती हैं, जो सिरदर्द और कमजोरी का रूप ले लेती हैं।
  • वात दोष का पूरा संतुलन बिगड़ना: कभी सुबह का नाश्ता छोड़ देना, कभी देर रात तक जागना तो कभी भूखे पेट घूमना हमारे 'वात' को बुरी तरह भड़का देता है। नतीजा यह होता है कि सिर में एक अजीब सा भारीपन रहने लगता है, चक्कर आने लगते हैं और माइग्रेन का अटैक ट्रिगर हो जाता है।
  • मानसिक तनाव और भयंकर थकान: लगातार ऑफिस का काम, स्क्रीन के सामने बैठे रहना और ऊपर से इस उमस भरी गर्मी की चिड़चिड़ाहट सीधे हमारे नर्वस सिस्टम पर वार करती है। जब दिमाग की नसें पहले से ही तनाव में हों, तो दर्द का अहसास कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

Migraine बढ़ने से पहले शरीर क्या संकेत देता है? 

माइग्रेन का दर्द कभी भी बिना बताए अचानक से हमला नहीं करता। हमारा शरीर पहले ही छोटे-छोटे अलार्म बजाकर हमें आगाह करने की कोशिश करता है। दिक्कत यह है कि हम लोग अक्सर इसे मामूली थकान या धूप का असर समझकर टाल देते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार दिख रहे हैं, तो समझ जाइए कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है।

  • सिर का अचानक भारी लगना: बिना किसी खास वजह के ऐसा महसूस होने लगेगा जैसे सिर पर कोई भारी वजन रख दिया गया हो या अंदर एक दबाव सा बन रहा हो।
  • आंखों में अजीब सी जलन: आंखें थकी-थकी और लाल होने लगती हैं, और कमरे की नॉर्मल लाइट भी आंखों में चुभने लगती है।
  • बार-बार गले का सूखना: शरीर के भीतर जब गर्मी की मात्रा बढ़ने लगती है, तो इंसान को बार-बार बहुत तेज प्यास लगने लगती है।
  • मूड़ का एकदम से बिगड़ना: बिना किसी बात के छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा आने लगता है, बेचैनी बढ़ती है और किसी काम में मन नहीं लगता।

गर्मियों में कौन सी आदतें Migraine बढ़ा सकती हैं?

कई बार हम सारा दोष मौसम पर मढ़ देते हैं, लेकिन सच तो यह है कि हमारी खुद की कुछ रोज़मर्रा की खराब आदतें इस दर्द के लिए जिम्मेदार होती हैं। गर्मियों में हमारा शरीर पहले ही मौसम की मार झेल रहा होता है, ऐसे में हमारी ये गलतियां आग में घी का काम करती हैं।

  • बिना किसी छतरी या चश्मे के धूप में घूमना: दोपहर की सीधी धूप और लू के थपेड़े सीधे सिर पर असर करते हैं, जिससे नसों में खिंचाव पैदा होता है।
  • पानी पीने में कंजूसी करना: काम के चक्कर में पर्याप्त पानी न पीना शरीर को अंदर से सुखा देता है, जिससे चक्कर और सिरदर्द का अटैक आ जाता है।
  • वक्त पर खाना न खाना: लंबे समय तक खाली पेट रहने या लंच स्किप करने से पेट में गैस और एसिडिटी बनती है, जो माइग्रेन को सीधे दावत देती है।
  • चटपटा और गरम तासीर का भोजन: गर्मियों में भी ज्यादा चाय, पकौड़े या मसालेदार चीजें खाते रहना अंदरूनी सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ देता है।
  • कैफीन का ओवरडोज लेना: सिरदर्द ठीक करने के बहाने बार-बार चाय या कॉफी पीना उल्टा असर कर जाता है और बेचैनी को बढ़ा देता है।
  • घंटों मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को घूरना: बिना ब्रेक लिए लगातार स्क्रीन देखने से आंखों और दिमाग की नसों पर जो दबाव पड़ता है, वही माइग्रेन का कारण बनता है।

क्या बढ़ा हुआ पित्त माइग्रेन की वजह बन सकता है?

अगर हम आयुर्वेद की बात मानें, तो पित्त का सीधा संबंध हमारे शरीर की गर्मी, डाइजेशन और एनर्जी से होता है। जब तक यह पित्त अपनी लिमिट में रहता है, तब तक हमारा शरीर एकदम परफेक्ट तरीके से काम करता है। लेकिन जैसे ही इसका बैलेंस बिगड़ता है, तो इसका सबसे पहला और सीधा हमला हमारे सिर, आंखों और मानसिक शांति पर होता है।

गर्मियों के मौसम में तेज धूप में घूमना, कम पानी पीना, रात को देर तक जागना और मसालेदार खाना खाने से शरीर के अंदर एक भयंकर गर्मी पैदा होती है। यही बढ़ी हुई अंदरूनी गर्मी नसों में पहुंचकर माइग्रेन के दर्द को चरम पर पहुंचा देती है। जब शरीर में पित्त अपनी हद पार करने लगता है, तो वह कुछ इस तरह के लक्षण दिखाने शुरू कर देता है।

  • सिर के अंदर हर वक्त एक जलन और भारीपन का अहसास बने रहना।
  • आंखों के पिछले हिस्से में गर्मी महसूस होना या सुइयां चुभने जैसा लगना।
  • तेज रोशनी या धूप के सामने आते ही आंखें खोलने में तकलीफ होना।
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना और अंदर ही अंदर एक बेचैनी महसूस होना।
  • जैसे ही आप धूप में कदम रखें, वैसे ही सिर में एक तेज टीस उठना।
  • जरूरत से ज्यादा पसीना आना और हर पांच मिनट में प्यास लगना।

आयुर्वेद में गर्मियों में होने वाले Migraine को कैसे देखा जाता है? 

जब भी अचानक सिरदर्द होता है, हममें से ज़्यादातर लोग तुरंत पेनकिलर ढूंढने भागते हैं। पर आयुर्वेद इस मामले में बिल्कुल अलग और गहरी सोच रखता है। यहाँ गर्मियों में बढ़ने वाले माइग्रेन को सिर्फ एक साधारण सिरदर्द मानकर पल्ला नहीं झाड़ लिया जाता। इसे शरीर के भीतर मचे एक बड़े उपद्रव के रूप में देखा जाता है, जिसका असली विलेन बढ़ा हुआ पित्त और अंदरूनी गर्मी होती है। 

  • भड़के हुए पित्त को शांत करना: जून की चिलचिलाती धूप सीधे हमारे शरीर के पित्त को सातवें आसमान पर पहुंचा देती है। यही बढ़ा हुआ पित्त माइग्रेन का सबसे बड़ा ट्रिगर बनता है, इसलिए सबसे पहला काम इसे काबू में लाना होता है।
  • अंदर सुलगती गर्मी को बुझाना: सिर का भारी होना, आंखों से मानो अंगारे निकलना और छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ जाना, यह सब कुछ और नहीं बल्कि शरीर के अंदर भरी गर्मी का ही नतीजा है। आयुर्वेद कहता है कि जब तक यह आग ठंडी नहीं होगी, चैन नहीं मिलेगा।
  • खराब हाजमे को दुरुस्त करना: सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि सिर के दर्द का कनेक्शन पेट से भला कैसे हो गया। मगर कमज़ोर पाचन और पेट की एसिडिटी सीधे दिमाग की नसों को भड़का देती है, इसलिए हाजमे को ठीक रखना बहुत ज़रूरी है।
  • मानसिक तनाव से तौबा: अधूरी नींद और दिनभर की मानसिक थकान माइग्रेन को खुला न्योता देती है। ऐसे में दिमाग को शांत रखना कोई ऑप्शन नहीं बल्कि सबसे पहली ज़रूरत बन जाता है।

थाली पर ध्यान: माइग्रेन में क्या खाएं और किससे दूरी बनाएं

माइग्रेन के मरीजों के लिए यह बात सौ फीसदी सच साबित होती है। गर्मियों में आपकी थाली ही आपकी सबसे बड़ी दवा बन सकती है।

ये चीजें ज़रूर खाएं

  • दिनभर में अच्छा-खासा पानी पिएं और साथ में ताज़ा नारियल पानी को अपना बेस्ट फ्रेंड बना लें ताकि बॉडी में पानी का सूखा न पड़े।
  • जितना हो सके बिल्कुल हल्का और ताज़ा बना भोजन ही करें, जैसे मूँग की दाल, पतली खिचड़ी या दलिया।
  • खीरा, तरबूज, लौकी और पुदीना जैसी पेट को ठंडक देने वाली चीज़ों को अपनी रोज़ की डाइट में जमकर शामिल करें।
  • अपने खाने का एक फिक्स टाइम तय करें और गलती से भी बहुत लंबे समय तक खाली पेट रहने की भूल न करें।
  • भीगे हुए बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज खाएं, पर हाँ, इनकी मात्रा थोड़ी सीमित ही रखें।

इन चीज़ों से बिल्कुल दूरी बना लें

  • सिरदर्द ठीक करने के नाम पर बार-बार चाय, कॉफी या कैफीन वाले ड्रिंक्स पीना बंद कर दें क्योंकि ये शरीर को अंदर से सुखाते हैं।
  • बहुत ज्यादा तीखा, चटपटा, तला-भुना और तेल से लथपथ खाने से जितनी दूरी बना सकें, बना लें।
  • पैकेट में बंद चिप्स, प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड को किचन से बाहर का रास्ता दिखाएं।
  • डाइटिंग के चक्कर में खाना छोड़ना या भूखे पेट बैठे रहना माइग्रेन को सीधे बढ़ावा देता है।
  • फ्रिज का एकदम चिल्ड पानी या बर्फ से लदे ड्रिंक्स बार-बार पीने से बचें, क्योंकि यह बॉडी के टेम्परेचर को अचानक बिगाड़ देता है।

गर्मियों के माइग्रेन में रामबाण आयुर्वेदिक औषधियाँ

जब शरीर के भीतर पित्त और सिर की गर्मी बर्दाश्त से बाहर होने लगती है, तब आयुर्वेद के ख़जाने से निकली कुछ चुनिंदा जड़ी-बूटियाँ जादू की तरह काम करती हैं। ये औषधियाँ दिमाग को शांत करती हैं और दर्द के ट्रिगर्स को जड़ से दबा देती हैं।

  • ब्राह्मी: यह दिमाग को सुकून देने वाली एक बेहतरीन बूटी है। जब सिर में भारीपन महसूस हो और तनाव बढ़ने लगे, तो ब्राह्मी नसों को शांत करने में बहुत मदद करती है।
  • शंखपुष्पी: मन को एकदम रिलैक्स रखने और गर्मी की वजह से होने वाली घबराहट या बेचैनी को दूर करने के लिए इसका कोई मुकाबला नहीं है।
  • गिलोय: इसे आयुर्वेद का अमृत माना जाता है। यह शरीर के भीतर छिपी हुई एक्स्ट्रा गर्मी को खींचकर बाहर निकालती है और पित्त का बैलेंस एकदम सही कर देती है।
  • आमलकी: यानी आंवला, जो अपने ठंडे स्वभाव के लिए जाना जाता है। यह पेट की एसिडिटी को खत्म करके पित्त को पूरी तरह शांत रखता है।
  • सौंफ: अक्सर हम इसे सिर्फ माउथ फ्रेशनर समझते हैं, लेकिन यह सिर की जलन को कम करने और पाचन तंत्र को ठंडा रखने में बेहद असरदार है।

गर्मी और Pitta बढ़ने पर सहायक आयुर्वेदिक थेरेपी

कई बार सिर्फ खानपान बदलना काफी नहीं होता, शरीर को बाहर से भी थोड़े एक्स्ट्रा लाड़-प्यार और केयर की ज़रूरत होती है। आयुर्वेद में कुछ ऐसी शानदार थेरेपियाँ हैं जो आपके शरीर से गर्मी को सोख लेती हैं।

  • अभ्यंग यानी खास तेल की मालिश: औषधीय तेलों से की जाने वाली हल्की और सूथिंग मालिश शरीर की पूरी थकान और बढ़ी हुई गर्मी को पल भर में सोख लेती है।
  • शिरोधारा: इस थेरेपी में माथे पर जड़ी-बूटियों से बने लिक्विड की एक पतली और धीमी धार लगातार गिराई जाती है। यह मानसिक तनाव, सिर की भयंकर गर्मी और बेचैनी को शांत करने का सबसे अद्भुत तरीका है।
  • नाड़ी स्वेदन: हल्की और धीमी भाप वाली यह थेरेपी शरीर की हर तरह की जकड़न को खोल देती है, जिससे इंसान खुद को बहुत हल्का और तरोताज़ा महसूस करने लगता है।
  • शीतल लेप थेरेपी: माथे या शरीर पर लगाया जाने वाला जड़ी-बूटियों का यह ठंडा लेप त्वचा के रास्ते सीधे अंदरूनी जलन और बढ़ी हुई तपन को शांत कर देता है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम जय भगवान है और मैं सांपला, जिला रोहतक, हरियाणा से हूँ। मुझे पिछले 30 सालों से माइग्रेन की समस्या थी। इसके लिए मैंने पंजाब, चंडीगढ़, बठिंडा, पटियाला और रोहतक मेडिकल सहित कई जगहों पर इलाज कराया और बहुत दवाइयाँ लीं, लेकिन आराम नहीं मिला।

एक दिन मैं टीवी पर कार्यक्रम देख रहा था, जहाँ श्री चौहान जी माइग्रेन के बारे में बता रहे थे। उन्होंने माइग्रेन के लक्षण इतने अच्छे से समझाए कि मुझे लगा वह मेरी ही समस्या के बारे में बात कर रहे हैं। उसके बाद मैंने इलाज शुरू किया और आज मुझे माइग्रेन से काफी राहत मिल चुकी है।

 आयुर्वेदिक और मॉडर्न उपचार में अंतर

बिंदु आयुर्वेदिक दृष्टिकोण मॉडर्न दृष्टिकोण
सोच का तरीका माइग्रेन को बढ़े हुए पित्त, वात असंतुलन और शरीर की अंदरूनी गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। माइग्रेन को एक न्यूरोलॉजिकल समस्या माना जाता है, जिसमें नसों और मस्तिष्क की गतिविधि प्रभावित होती है।
मुख्य कारण पित्त बढ़ना, डिहाइड्रेशन, अनियमित दिनचर्या, तनाव और कमजोर पाचन को मुख्य कारण माना जाता है। हार्मोनल बदलाव, तनाव, तेज रोशनी, गर्मी, नींद की कमी और नसों की संवेदनशीलता को मुख्य कारण माना जाता है।
लक्षणों की समझ सिर में गर्मी, आंखों में जलन, चिड़चिड़ापन और शरीर के असंतुलन को मुख्य संकेत माना जाता है। तेज सिरदर्द, मतली, रोशनी और आवाज से परेशानी, तथा धड़कन जैसा दर्द मुख्य लक्षण माने जाते हैं।
उपचार का तरीका पित्त शांत करने वाली औषधियाँ, शिरोधारा, दिनचर्या सुधार और खानपान संतुलन पर जोर दिया जाता है। दर्द कम करने वाली दवाएं, माइग्रेन कंट्रोल दवाएं और ट्रिगर से बचने की सलाह दी जाती है।
मुख्य फोकस शरीर की अंदरूनी गर्मी और पाचन संतुलन को सुधारकर समस्या की जड़ पर काम करना। दर्द और माइग्रेन अटैक को नियंत्रित करना तथा लक्षणों की तीव्रता कम करना।
खानपान की भूमिका ठंडक देने वाले और हल्के भोजन को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कुछ ट्रिगर फूड से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन मुख्य फोकस दवाओं पर रहता है।
जीवनशैली की भूमिका नींद, तनाव, धूप और दिनचर्या को उपचार का जरूरी हिस्सा माना जाता है। नियमित नींद और तनाव नियंत्रण की सलाह दी जाती है ताकि अटैक कम हो सकें।
रिजल्ट सुधार धीरे-धीरे महसूस हो सकता है, लेकिन शरीर के संतुलन और लंबे समय की राहत पर ध्यान दिया जाता है। दर्द में जल्दी राहत मिल सकती है, लेकिन ट्रिगर रहने पर समस्या दोबारा हो सकती है।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

अक्सर हम भारतीयों की एक आदत होती है कि जब तक सिरदर्द बर्दाश्त से बाहर न हो जाए, हम उसे 'नॉर्मल धूप का असर' या 'थकान' कहकर टालते रहते हैं। मगर सच मानिए, अगर गर्मियों के दिनों में आपका सिरदर्द बार-बार लौटकर आ रहा है और आपकी ज़िद से ज़्यादा उसकी ज़िद बढ़ गई है, तो अब चुपचाप बैठने का वक्त बिल्कुल नहीं है। अगर आपको नीचे बताई गई स्थितियों में से किसी भी चीज़ का सामना करना पड़ रहा है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर या आयुर्वेद एक्सपर्ट के पास जाने में भलाई है।

  • जब सिर का दर्द इतना भयंकर रूप ले ले कि शांत कमरे में लेटने या आराम करने के बाद भी उसमें रत्ती भर का सुधार न दिखाई दे।
  • दर्द सिर्फ सिर तक न रुके, बल्कि उसके साथ आपको उल्टियाँ आने लगें, चक्कर से सिर घूमने लगे या आँखों के आगे धुंधलापन छा जाए।
  • अगर माइग्रेन का यह जानलेवा दौरा हर हफ्ते आपके दरवाज़े पर दस्तक देने लगे और आपका पूरा हफ्ता बर्बाद करने लगे।
  • जैसे ही आप घर से बाहर धूप या उमस भरी गर्मी में कदम रखें, और अचानक से सिर में बिजली जैसी तेज़ टीस उठनी शुरू हो जाए।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि गर्मियों के आते ही हमारे शरीर का पूरा सिस्टम बदल जाता है। इस मौसम में शरीर के भीतर बढ़ती गर्मी, पानी का सूखा पड़ना और पित्त का बेकाबू हो जाना ही माइग्रेन को सबसे ज़्यादा हवा देता है। चिलचिलाती दोपहर में बिना किसी तैयारी के निकल जाना, पर्याप्त पानी न पीना, घंटों खाली पेट बैठे रहना और छाती में होने वाली जलन असल में इस सिरदर्द के पक्के मददगार हैं। बहुत से लोगों को तो दर्द शुरू होने से पहले ही सिर का भारी होना, आँखों में तीखी चुभन, बिना बात का गुस्सा और दिल की धड़कनें तेज़ होने जैसे साफ इशारे मिलने लगते हैं।

ऐसे में सिर्फ एक गोली खाकर दर्द को कुछ घंटों के लिए दबा देना कोई अक्लमंदी नहीं है। इसका असली इलाज तो शरीर को अंदरूनी रूप से शांत और ठंडा रखना है। इसके लिए आपको खूब सारा पानी पीना होगा, समय पर बिल्कुल हल्का और सुपाच्य भोजन करना होगा और एक ऐसा रूटीन अपनाना होगा जो आपके पित्त को हमेशा काबू में रखे।  

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, गर्मियों में तेज धूप, शरीर में बढ़ी हुई गर्मी और पानी की कमी माइग्रेन को बढ़ा सकती है। कई लोगों में इस मौसम में सिरदर्द के दौरे ज्यादा महसूस हो सकते हैं।

हां, शरीर में पानी कम होने पर सिर भारी लगना, चक्कर और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना जरूरी माना जाता है।

लंबे समय तक धूप और गर्म वातावरण में रहने से सिरदर्द और माइग्रेन ट्रिगर हो सकते हैं। इससे शरीर की अंदरूनी गर्मी भी बढ़ सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार बढ़ा हुआ पित्त सिर में गर्मी, जलन और दर्द बढ़ा सकता है। यही कारण है कि गर्मियों में माइग्रेन ज्यादा महसूस हो सकता है।

बहुत ज्यादा तीखा, तला हुआ और गरम तासीर वाला भोजन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है। इससे माइग्रेन की परेशानी ट्रिगर हो सकती है।

हां, कम नींद और अनियमित दिनचर्या शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इससे सिरदर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

हां, मानसिक तनाव और शरीर की बढ़ी हुई गर्मी दोनों माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए शरीर और मन दोनों को शांत रखना जरूरी माना जाता है।

कुछ लोगों को ठंडक से राहत महसूस हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा ठंडी चीजें पाचन को कमजोर कर सकती हैं। संतुलित और हल्का भोजन बेहतर माना जाता है।

हाँ, गलत खानपान शरीर की गर्मी और पित्त बढ़ा सकता है। वहीं हल्का, ताजा और पानी से भरपूर भोजन राहत देने में मदद कर सकता है।

हां, समय पर सोना, पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और संतुलित भोजन लेना माइग्रेन की परेशानी कम करने में सहायक माना जाता है।

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