जब आप लंबे समय तक एक जगह बैठे रहते हो और फिर एक दम से उठते हो तो पैरो में अजीब सा भारीपन आपको महसूस होता है। जब आप काफी देर से बैठ के उठते हो और फिर उठकर चलने का प्रयास करते हो तो पैरो में एक अजीब सी झुनझुनी भी महसूस होती है। यह हम सब के साथ रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में होता रहता है।
यह अकसर ऑफिस, ट्रैन या मेट्रो या वो लोग जिनका काम ही पूरा दिन बैठे रहने का होता है उनमे ज़्यादा देखा जाता है। इसके पीछे अनेक कारण हो सकते है जिन्हे नज़रअंदाज़ ना किया जाये तो इस भारीपन को कम व ठीक किया जा सकता है। लेकिन ये कब सामान्य है और कब असामान्य, यह जानना बहुत ज़रूरी है।
पैरो में भारीपन होने के क्या कारण हो सकते है?
जब हम लंबे समय तक बिना हिले-डुले एक जगह पर ही स्थिर बैठे रहते है तो हमारे शरीर में काफी बदलाव होते है जिसकी वजह से पैरो में भारीपन महसूस हो सकता है:
रक्त-संचार का धीमा पड़ना: लंबे समय तक बैठे रहने की वजह से हमारी रक्त संचार प्रक्रिया पर दबाब पड़ने लगता है जिसकी वजह से पैरो में खून एक जगह जमा होने लगता है और जिसकी वजह से नसों पर भरी दबाव पड़ता है और इसी कारण जब हम लंबे समय तक बैठ कर एकदम से उठते है तो पैरो में भारीपन महसूस होता है।
मांसपेशियों की सुस्ती: लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से हमारी मांसपेशियों थकने लगती है जिसकी वजह से उनमें खिंचाव और भारीपन महसूस होने लगता है। यदि किसी व्यक्ति की मांसपेशिया पहले से ही काफी कमज़ोर है तो उनके लिए ऐसे बैठे रहना काफी पीड़ाजनक हो सकता है।
पानी की कमी: जब आप पूरा दिन सिर्फ बैठे रहते है और पानी पिने का भी आलस्य करने लगते है तो शरीर में गहरी मात्रा में पानी की कमी होने लगती है जिसकी वजह से खून गाड़ा होने लगता है और उसे नसों में बहने में दिक्कत होने लगती है और वह एक जगह जमने लगता है और इसी वजह से पैरो में भारीपन होने लगता है।
गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव: जैसे एक सेब का पेड़ पर से गिरने में गुरुत्वाकर्षण का बहुत ही अहम भूमिका है उसी तरह हमारे दिन बैठे रहने के पिछे गुरुत्वाकर्षण बहुत एहम भूमिका निभाती है। बिलकुल भी न चलने के कारण और एक ही जगह बैठे रहने के कारण गुरुत्वाकर्षण से रक्त निचले पैरों में इकट्ठा होने लगता है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है और पैरो में भारीपन महसूस होने लगता है।
ऑक्सीजन की कमी होना: नसों में खून का बहाव धीमा होने के कारण ऊतक (Tissue) को कम ऑक्सीजन मिलता है, जिससे पैर थके-थके और भारी महसूस होने लगते हैं।
लंबे समय तक बैठने के बाद होने वाले सामान्य लक्षण
अगर आपके पैरों में भारीपन या सुन्नपन सिर्फ बैठने के कारण है तो आपको ये लक्षण महसूस हो सकते हैं:
- उठते समय पैरो का हल्का सा जाम हो जाना।
- घुटनो के निचे के पिछले हिस्से में हल्का सा दर्द महसूस होना।
- एड़ियों के आसपास हल्की सी सूजन हो जाना।
- चलते वक्त कुछ समय के लिए पैरो का लड़खड़ाना।
- हल्की सी थकान महसूस होना।
- मांसपेशियों में जकड़न व सुस्ती महसूस होना।
- कमर और पीठ में हल्का सा दर्द होना।
अगर यह सारे लक्षण थोड़ी देर तक चलने फिरने से ठीक हो जाते है तो यह लंबे समय से बैठे रहने की वजह से हो सकती है।
यह भारीपन कब सामान्य नहीं है?
अगर थोड़ा बहुत चलने फिरने के बाद भी आपका भारीपन नहीं जाता तो यह किसी गंभीर समस्या का इशारा हो सकता है इसलिए इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करे और समय पर निचे दिए हुए लक्षणों की और ध्यान दे:
सिर्फ एक पैर में परेशानी: अगर आपको दर्द अऊर भारीपन सिर्फ एक पैर में महसूस होता है तो यह सामान्य नहीं है।
दर्द और लालिमा: अगर आपके पैरो में लगातार दर्द रहे और छुने पर ज़्यादा दर्द महसूस होने लगे तो यह किसी गंभीर समस्या का इशारा हो सकता है।
साँस फूलना: अगर आपको चलते वक्त सीने में भारीपन या साँस फूलने जैसे समस्या होती है तो यह सामान्य नहीं है बल्कि किसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा है।
चलने पर दर्द का और बढ़ जाना: जब आप पूरा दिन खड़े होकर फिर चलने का प्रयास करते है और आपका दर्द चलने से और बढ़ने लग जाए तो इसे नज़रअंदाज़ ना करे।
सूजन का लगातार बने रहना: अगर आपकी सूजन लगातार बनी रहती है तो यह किसी गंभीर समस्या का इशारा हो सकता है।
एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह
लंबे समय तक बैठे रहने के बाद पैरों में भारीपन महसूस होना आमतौर पर ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने की वजह से होता है। लेकिन अगर सूजन केवल एक ही पैर में हो, या आपकी पिंडलियों में तेज दर्द, लालिमा और गर्माहट महसूस हो, तो इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें। ये नसों में खून जमने के बेहद गंभीर संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए तुरंत डॉक्टर से जांच और इलाज कराना ज़रूरी है
आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है?
आयुर्वेद बहुत ही सरल नज़रिए से इस समस्या को देखता है। आयुर्वेद कहता है कि जब शरीर में 'कफ' बढ़ता है और 'वात' का बहाव रुक जाता है, तो शरीर में भारीपन और आलस आने लगता है। दिन भर एक ही जगह बैठे रहने से शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है, जिसकी वजह से भारीपन महसूस होने लगता है। इसलिए आयुर्वेद हमेशा शरीर को सक्रिय रखने, सही समय पर ताज़ा और हल्का भोजन करने, और नियमित रूप से थोड़ी कसरत (जैसे योग या चलना) करने की सलाह देता है।
पैरों का भारीपन कैसे कम करें?
अगर आपके पैरो में भारीपन या दर्द महसूस होता है तो आप यह निचे दिए गए हुए उपाय कर सकते है:
- पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें: सोफे या बिस्तर पर लेट जाएं और अपने पैरों के नीचे 1 या 2 तकिए रख लें। पैरों को दिल के लेवल से थोड़ा ऊपर रखने से रुका हुआ खून तुरंत वापस लौटने लगता है और 15-20 मिनट में ही पैर एकदम हल्के हो जाते हैं।
- हल्की वॉक: खाना खाने के बाद 10-15 मिनट की हल्की वॉक पैरों की जकड़न खोल देती है।
- गुनगुने पानी की सिकाई: नहाते समय या एक बाल्टी में हल्का गर्म पानी लेकर पैरों को उसमें डुबोएं। इससे मांसपेशियों को बहुत आराम मिलता है।
- हल्की मालिश: पिंडलियों की नीचे से ऊपर की तरफ (हार्ट की दिशा में) हल्के हाथों से मालिश करने से भी बहुत सुकून मिलता है।
निष्कर्ष
हमारा शरीर घंटों तक एक ही कुर्सी पर जमे रहने के लिए नहीं बना है। जब हम चलना फिरना बंद कर देते है, तो पैर जाम होने लगते हैं।
लंबे समय तक बैठने से होने वाले पैरों के भारीपन का इलाज कोई महंगी दवा नहीं है, बल्कि अपनी दिनचर्या में बदलाव लेन से ठीक हो सकता है। दिन भर में थोड़ी-थोड़ी देर बाद उठना, पैरों को हिलाते रहना, शाम को वॉक करना और पानी पीते रहना ये छोटी-छोटी आदतें आपके पैरों को हमेशा हल्का बनाए रखेंगी।
References
Restless Legs Syndrome: Contemporary Diagnosis and Treatment - PMC
Restless Legs Syndrome | National Institute of Neurological Disorders and Stroke

































































