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जोड़ों का हल्का दर्द नज़रअंदाज़ किया? 2 साल में यह बन सकता है AVN

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 01 May, 2026
  • category-iconUpdated on 01 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

आप ऑफिस से घर लौटते हैं, तो आपको अपने कूल्हे (Hip joint) या जांघ के आस-पास एक हल्का सा दर्द महसूस होता है। आप सोचते हैं कि यह दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने या ज़्यादा चलने के कारण हुआ सामान्य मस्कुलर दर्द है। आप एक पेनकिलर खाते हैं, दर्द दब जाता है और आप इसे भूल जाते हैं। लेकिन कुछ महीनों बाद यह दर्द वापस आता है, इस बार थोड़ा ज़्यादा तेज़, और अब आपको चलने में हल्का सा लंगड़ापन (Limping) महसूस होने लगता है। आप इसे फिर से नज़रअंदाज़ कर देते हैं या यूरिक एसिड/गठिया मानकर कोई चूरन फांकने लगते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कूल्हे का यह हल्का दर्द कोई सामान्य थकावट नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदर चल रही एक भयंकर तबाही का 'साइलेंट अलार्म' हो सकता है? जिसे आप सामान्य दर्द समझ रहे हैं, वह असल में Avascular Necrosis (AVN) हो सकता है—एक ऐसी लाइलाज मानी जाने वाली स्थिति जिसमें आपकी हड्डी को मिलने वाला खून बंद हो जाता है, और हड्डी अंदर ही अंदर 'गलने' या 'मरने' लगती है। अगर इस पहले संकेत को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए, तो महज़ 1 से 2 साल के भीतर यह हड्डी पूरी तरह ढह (Collapse) सकती है, जिसके बाद 'हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी' (Hip Replacement Surgery) के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 

Avascular Necrosis (AVN) क्या है और यह हड्डी को कैसे मारता है?

हमारी हड्डियाँ कोई निर्जीव पत्थर नहीं हैं; वे जीवित ऊतक (Living tissue) हैं जिन्हें लगातार ऑक्सीजन और पोषण की आवश्यकता होती है, जो उन्हें रक्त (Blood) के ज़रिए मिलता है।

  • रक्त संचार का कटना (Loss of Blood Supply): AVN (एवैस्कुलर नेक्रोसिस) में किसी कारणवश हड्डी (विशेषकर कूल्हे के जोड़ या Femur Head) की तरफ जाने वाली रक्त वाहिकाएं (Blood vessels) ब्लॉक हो जाती हैं या सिकुड़ जाती हैं।
  • हड्डी का मरना (Necrosis): जब हड्डी को खून नहीं मिलता, तो उसकी कोशिकाएं भूखी रहकर मरने लगती हैं। इस प्रक्रिया को 'नेक्रोसिस' (Necrosis) कहते हैं।
  • हड्डी का ढहना (Bone Collapse): जैसे-जैसे हड्डी अंदर से खोखली और मृत होती है, उस पर शरीर का वज़न पड़ने से उसमें छोटे-छोटे फ्रैक्चर (Micro-fractures) होने लगते हैं। अगर इसे शुरुआत में नहीं रोका गया, तो 1 से 2 साल के भीतर यह पूरी तरह पिचक (Collapse) जाती है, और जोड़ हमेशा के लिए बर्बाद हो जाता है।

यह हल्का दर्द AVN में कैसे बदल जाता है? (The Triggers)

AVN अचानक नहीं होता; इसके पीछे कुछ बहुत ही स्पष्ट कारण (Triggers) होते हैं जिन्हें हम अक्सर इग्नोर कर देते हैं:

  • स्टेरॉयड्स का भारी उपयोग (Steroids): कोविड-19 के बाद या किसी गंभीर एलर्जी के इलाज में भारी मात्रा में स्टेरॉयड लेने से खून गाढ़ा हो जाता है और नसों में फैट (Lipids) जमने लगता है, जो हड्डी का ब्लड फ्लो रोक देता है।
  • अत्यधिक शराब का सेवन (Alcohol Abuse): ज़्यादा शराब पीने से खून में फैट (Triglycerides) बढ़ जाता है, जो कूल्हे की बारीक नसों को ब्लॉक कर देता है।
  • चोट (Trauma): कभी कूल्हे में फ्रैक्चर या मोच आई हो और उसे ठीक से हील न किया गया हो।

आयुर्वेद AVN को कैसे समझता है? (अस्थि मज्जा क्षय और वात-रक्त आवरण)

आधुनिक विज्ञान जहाँ इसे केवल ब्लड सप्लाई कटने की बीमारी मानता है, आयुर्वेद इसे शरीर के धातु (Tissues) पोषण क्रम के टूटने के रूप में देखता है।

  • वात और कफ का आवरण (Blockage): जब शरीर में भारीपन (कफ या आम) और रूखापन (वात) बढ़ता है, तो वह 'रक्त' (खून) की नलियों को ब्लॉक कर देता है। इसे 'वात-रक्त आवरण' कहते हैं। खून हड्डी तक नहीं पहुँच पाता।
  • अस्थि धातु का सूखना: खून न मिलने से 'अस्थि धातु' (हड्डियाँ) और 'मज्जा धातु' (Bone marrow) सूखने लगते हैं। इसे आयुर्वेद में 'अस्थि क्षय' कहा गया है। वात दोष का मुख्य स्थान हड्डियाँ ही हैं, इसलिए वात भड़ककर हड्डी को खोखला कर देता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको दर्द दबाने वाली गोलियाँ देकर हड्डी के गलने का इंतज़ार नहीं करते, और न ही सीधे 'जॉइंट रिप्लेसमेंट' की सलाह देते हैं। हमारा लक्ष्य उस 'ब्लॉकेज' को खोलना है।

  • रक्त प्रवाह को खोलना (Improving Blood Circulation): सबसे पहले नसों में जमे 'आम' (टॉक्सिन्स) को पिघलाकर वात के रास्ते को खोला जाता है ताकि हड्डी तक दोबारा खून पहुँच सके।
  • अस्थि पोषण (Bone Rejuvenation): मृत हो रही हड्डी की कोशिकाओं को दोबारा जीवित (Regenerate) करने के लिए शक्तिशाली रसायन औषधियाँ दी जाती हैं।
  • वात शमन (Vata Pacification): दर्द को जड़ से मिटाने और हड्डी को और ज़्यादा सूखने से बचाने के लिए वात-शामक चिकित्सा की जाती है।

AVN की रोकथाम और रिकवरी के लिए विशेष आयुर्वेदिक डाइट (Bone Healing Diet)

जब हड्डी खून की कमी से मर रही हो, तो आपका आहार ऐसा होना चाहिए जो खून के बहाव को तेज़ करे और हड्डियों को ताकत दे।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - वात शामक और रक्त वर्धक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वात वर्धक और ब्लॉकेज करने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, गेहूं, ज्वार, दलिया, रागी (कैल्शियम से भरपूर)। मैदा, वाइट ब्रेड, यीस्ट वाली चीज़ें, बासी भोजन।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) सहजन (Drumstick - हड्डियों के लिए अमृत), लौकी, तरोई, पालक, परवल। आलू, गोभी, बैंगन, कटहल (ये गैस और वात बढ़ाकर नसों को सिकोड़ते हैं)।
डेयरी और वसा (Dairy & Fats) गाय का शुद्ध घी (नसों में चिकनाई लाता है), हल्दी वाला गर्म दूध। रिफाइंड तेल, बहुत ज़्यादा भारी पनीर, कोल्ड ड्रिंक्स।
फल (Fruits) अनार (खून बढ़ाने के लिए), सेब, पपीता, अंगूर। अत्यधिक खट्टे और ठंडे फल (फ्रिज से निकालकर सीधे न खाएं)।
पेय और मसाले लहसुन (ब्लड थिनर का काम करता है), अदरक, हल्दी, जीरा, सौंफ। अत्यधिक शराब (AVN का सबसे बड़ा कारण), सिगरेट, ज़्यादा कॉफी।

हड्डी को दोबारा ज़िंदगी देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • लाक्षादी गुग्गुलु (Lakshadi Guggulu): आयुर्वेद में टूटी या गल रही हड्डियों को जोड़ने और नई अस्थि कोशिकाओं का निर्माण करने के लिए यह एक जादुई औषधि है।
  • अस्थिशृंखला (Hadjod): जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, यह हड्डी को जोड़ती है। यह कैल्शियम का प्राकृतिक खज़ाना है और हड्डी की डेंसिटी (Density) बढ़ाती है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): खून की नलियों के ब्लॉकेज को खोलने और रक्त संचार (Blood flow) को सुचारू करने के लिए यह सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): कमज़ोर हो चुकी कूल्हे की मांसपेशियों को ताकत देने और नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने के लिए।

पंचकर्म थेरेपी: AVN के लिए 'संजीवनी'

जब AVN डिटेक्ट होता है, तो दवाइयों से ज़्यादा पंचकर्म की 'बस्ती' थेरेपी कारगर होती है, क्योंकि यह सीधे 'अस्थि धातु' (हड्डियों) तक पहुँचती है।

  • तिक्त क्षीर बस्ती (Tikta Kshira Basti): AVN के लिए यह आयुर्वेद का सबसे बड़ा 'ब्रह्मास्त्र' है। इसमें कड़वी (तिक्त) जड़ी-बूटियों को दूध और घी में पकाकर एनिमा के रूप में दिया जाता है। यह दवा सीधे बड़ी आंत (वात का मुख्य स्थान) से अवशोषित होकर हड्डियों तक पहुँचती है और उन्हें पोषण (Calcium/Minerals) देती है।
  • अभ्यंग और स्वेदन (Abhyanga & Swedana): महानारायण या क्षीरबला तेल से मालिश और जड़ी-बूटियों की भाप देने से कूल्हे के आस-पास का रक्त संचार (Blood circulation) तेज़ी से खुलता है और दर्द शांत होता है।
  • कटि बस्ती: कूल्हे के जोड़ पर औषधीय तेल का घेरा बनाकर तेल को रोका जाता है, जो त्वचा के रास्ते गहराई तक जाकर सूखी हुई नसों को चिकनाई देता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल MRI रिपोर्ट देखकर आपको डराते नहीं हैं; हम आपके 'दोषों' का मूल्याँकन करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि वात ने हड्डी को कितना सुखा दिया है और रक्त में 'आम' (गंदगी) का ब्लॉकेज कितना है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपके चलने के तरीके (Gait analysis), कूल्हे के मूवमेंट और दर्द के फैलने के पैटर्न को बारीकी से चेक करते हैं।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: क्या आपने कभी स्टेरॉयड्स लिए थे? क्या आप शराब का अत्यधिक सेवन करते हैं? इन कारणों का गहराई से अध्ययन किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको जॉइंट रिप्लेसमेंट के डर से बाहर निकालकर प्राकृतिक रिकवरी का रास्ता देते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: दर्द के कारण चलना मुश्किल हो, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपनी MRI रिपोर्ट दिखाएं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी AVN की 'स्टेज' (Stage 1 से 4) के अनुसार खास अस्थि-पोषक जड़ी-बूटियाँ, बस्ती पंचकर्म और एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

मृत हो रही हड्डी को दोबारा रक्त संचार से जोड़ने (Revascularization) में अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 1-2 महीने: कूल्हे का भयंकर दर्द और जकड़न कम होने लगेंगे। लंगड़ापन (Limping) काफी हद तक सुधरेगा।
  • 3 से 6 महीने तक: खून का बहाव सुधरने से हड्डी का गलना (Necrosis) रुक जाएगा। आप बिना पेनकिलर के आराम से चल-फिर सकेंगे।
  • 6 महीने से 1 साल: अगर बीमारी शुरुआती स्टेज (Stage 1 या 2) में है, तो हड्डी की कोशिकाएं दोबारा बननी (Regenerate) शुरू हो जाती हैं और सर्जरी की ज़रूरत हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ों के अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाता था। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।जीवा (Jiva) की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको केवल पेनकिलर्स के सहारे जीने या जल्दबाज़ी में अपना जॉइंट कटवाने (Surgery) की सलाह नहीं देते।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ दर्द को नहीं दबाते; हम रक्त संचार के 'ब्लॉकेज' को खोलकर हड्डी को प्राकृतिक पोषण देते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों AVN मरीज़ों को सर्जरी के खतरे से बाहर निकाला है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: AVN स्टेरॉयड से हुआ है, चोट से या शराब से? हमारा इलाज बिल्कुल आपकी पुरानी हिस्ट्री के आधार पर होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ लिवर और किडनी के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं और शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Orthopedics) आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स देना। 'Core Decompression' (हड्डी में छेद करना) और अंततः 'हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी'। रक्त के ब्लॉकेज को खोलना, 'अस्थि क्षय' को रोकना और सर्जरी से बचाना।
शरीर को देखने का नज़रिया मृत हड्डी को केवल एक मैकेनिकल पुर्ज़ा मानता है जिसे काटकर बदला जा सकता है। हड्डी को जीवित धातु (अस्थि) मानता है, जिसे 'बस्ती' पंचकर्म और जड़ी-बूटियों से हील किया जा सकता है।
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट का कोई विशेष महत्व नहीं बताया जाता। वात-शामक' और 'रक्त-शोधक' आहार को इलाज का सबसे बड़ा हथियार मानता है।
लंबा असर जॉइंट रिप्लेसमेंट की भी एक उम्र होती है (15-20 साल), उसके बाद दोबारा सर्जरी का खतरा रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, जिससे प्राकृतिक जॉइंट सुरक्षित रहता है और व्यक्ति जीवन भर अपने पैरों पर चलता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आपके कमर या जांघ का दर्द इन गंभीर लक्षणों के साथ आ रहा है, तो यह सामान्य नहीं है, तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • लंगड़ाना (Limping): अगर कूल्हे के दर्द के कारण आप अपने शरीर का पूरा वज़न एक पैर पर नहीं डाल पा रहे हैं।
  • दर्द का जांघ से घुटने तक जाना: अगर कूल्हे के जोड़ (Groin area) का दर्द आपके घुटने तक फैल रहा है।
  • सुबह भयंकर जकड़न: सोकर उठने पर अगर कूल्हा इतना जकड़ जाए कि पैर ज़मीन पर रखना मुश्किल हो जाए।
  • आराम करने पर भी दर्द (Resting Pain): जब आप चल-फिर नहीं रहे हों, लेटते समय भी अगर कूल्हे में तेज़ 'टीस' (Throbbing pain) उठे।

निष्कर्ष

"शरीर का कोई भी दर्द बिना किसी कारण के नहीं होता; यह एक चेतावनी है।" जब आप अपने कूल्हे या जांघ के हल्के दर्द को 'मस्कुलर स्ट्रेन' मानकर लगातार नज़रअंदाज़ करते हैं और पेनकिलर्स से उसे सुन्न करते हैं, तो आप असल में अपनी हड्डी को मरने का पूरा समय दे रहे होते हैं। Avascular Necrosis (AVN) एक खामोश हत्यारा है जो हड्डी की खून की सप्लाई को काटकर उसे अंदर ही अंदर गला देता है। जब तक आप जागते हैं, तब तक हड्डी पिचक चुकी होती है और सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बचता है। इस '2 साल' के क्रिटिकल समय को बर्बाद मत कीजिए। आयुर्वेद आपको जॉइंट रिप्लेसमेंट के बिना अपनी हड्डी को बचाने का विज्ञान देता है। लाक्षादी गुग्गुलु और अस्थिशृंखला जैसी चमत्कारी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, पंचकर्म की 'तिक्त क्षीर बस्ती' से अपनी सूखी हुई हड्डियों को दोबारा पोषण दें, और एक अनुशासित 'वात-शामक' जीवनशैली अपनाएं। अपने शरीर के अलार्म को सुनें, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपनी असली हड्डियों पर एक स्वस्थ और दर्द-मुक्त जीवन जिएं।

FAQs

AVN एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डी (आमतौर पर कूल्हे के जोड़/Femur head) को खून की सप्लाई मिलनी बंद हो जाती है। खून न मिलने के कारण हड्डी की कोशिकाएं मर जाती हैं और हड्डी अंदर से खोखली होकर पिचक (Collapse) जाती है।

अगर खून की सप्लाई पूरी तरह कट गई है और इसे इग्नोर किया जा रहा है, तो शुरुआती हल्के दर्द (Stage 1) से लेकर हड्डी के पूरी तरह ढह जाने (Stage 4) में आमतौर पर 1 से 2 साल का समय लगता है।

कोविड या अन्य बीमारियों में स्टेरॉयड्स (Steroids) का बहुत अधिक उपयोग, अत्यधिक शराब का सेवन, कूल्हे की पुरानी चोट, या खून को गाढ़ा करने वाली अन्य बीमारियाँ AVN के सबसे बड़े कारण हैं।

जी हाँ, अगर बीमारी स्टेज 1, 2 या 3 की शुरुआत में है, तो आयुर्वेदिक बस्ती पंचकर्म और अस्थि-पोषक औषधियों से रक्त संचार को दोबारा खोला जा सकता है, जिससे नेक्रोसिस (हड्डी का गलना) रुक जाता है और सर्जरी से बचा जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार वात हड्डियों में रहता है। तिक्त क्षीर बस्ती (कड़वी जड़ी-बूटियों और दूध का एनिमा) बड़ी आंत के ज़रिए सीधे अस्थि धातु (हड्डियों) तक पहुँचकर वात को शांत करती है और मृत हो रही हड्डी को कैल्शियम व पोषण देती है।

अगर हड्डी पूरी तरह पिचक चुकी है (Stage 4), तो सर्जरी ही विकल्प है। लेकिन शुरुआती और मध्य चरणों में (Stage 1-3), आयुर्वेद के माध्यम से दर्द को खत्म करके और हड्डी के डैमेज को रोककर, सर्जरी की आवश्यकता को टाला या खत्म किया जा सकता है।

बिल्कुल। बहुत अधिक शराब पीने से खून में फैट (Lipids) का स्तर बढ़ जाता है। यह फैट कूल्हे की बारीक नसों में जमकर ब्लॉकेज (Fat Embolism) पैदा करता है, जिससे हड्डी का खून कट जाता है और AVN हो जाता है।

अस्थि क्षय का मतलब है हड्डियों का सूखना या कमज़ोर होना। वात दोष के अत्यधिक बढ़ने से हड्डियों की प्राकृतिक नमी और ताकत खत्म हो जाती है, जिसे आधुनिक विज्ञान ओस्टियोपोरोसिस या नेक्रोसिस कहता है।

वैसे तो यह घुटने, कंधे या टखने में भी हो सकता है, लेकिन 80% से ज़्यादा मामलों में यह कूल्हे के जोड़ (Hip joint - Femur head) को ही अपना शिकार बनाता है।

AVN के मरीज़ों को वात-शामक और खून बढ़ाने वाली डाइट लेनी चाहिए। शुद्ध गाय का घी, दूध, सहजन (Moringa), पुराना चावल और ताज़े फल खाएं। गैस और वात बढ़ाने वाली चीज़ें जैसे आलू, गोभी, कटहल और शराब से पूरी तरह दूर रहें।

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