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Liver Pain Right Side में नहीं Right Shoulder में - Hidden Connection..................

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 22 May, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconLiver and Gall
  • blog-view-icon5030

सोचिए, आप सुबह उठते हैं और आपके दाएँ कंधे (Right Shoulder) में एक अजीब सा, गहरा दर्द महसूस होता है। आप इसे गलत पोज़िशन में सोने का नतीजा या ऑफिस में लगातार बैठे रहने की थकान मानकर पेनकिलर खा लेते हैं और बाम मलते रहते हैं। हफ़्तों बीत जाते हैं, दर्द हल्का तो होता है, लेकिन पूरी तरह कभी नहीं जाता। आप ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के चक्कर लगाते हैं, एक्स-रे कराते हैं, लेकिन कंधे में कोई भी खराबी नहीं निकलती।

हकीकत यह है कि आपका कंधा बिल्कुल स्वस्थ है, लेकिन आपके शरीर का 'पावरहाउस' यानी लिवर (Liver) अंदर ही अंदर डैमेज हो रहा है और वह मदद के लिए पुकार रहा है। मेडिकल विज्ञान में इसे 'रेफर्ड पेन' (Referred Pain) कहा जाता है। जब आपके लिवर में सूजन या इन्फेक्शन होता है, तो वह दर्द दाएँ हिस्से में नीचे होने के बजाय, नसों के एक जटिल जाल के ज़रिए सीधे आपके दाएँ कंधे तक पहुँच जाता है। इस 'छिपे हुए कनेक्शन' को नज़रअंदाज़ करना एक भयंकर लिवर डैमेज का कारण बन सकता है।

दाएँ कंधे (Right Shoulder) तक लिवर का दर्द आखिर कैसे पहुँचता है?

जब भी लिवर में कोई परेशानी होती है, तो उसका दर्द सीधे वहीं महसूस होना चाहिए जहाँ लिवर स्थित है (पसलियों के नीचे दाएँ हिस्से में)। लेकिन नर्वस सिस्टम की बनावट इतनी जटिल है कि दर्द के सिग्नल्स (Signals) अपना रास्ता भटक जाते हैं:

  • फ्रेनिक नर्व का कनेक्शन (Phrenic Nerve Connection): आपके डायफ्राम (Diaphragm) और दाएँ कंधे को एक ही मुख्य नस कंट्रोल करती है, जिसे फ्रेनिक नर्व कहते हैं। जब सूजा हुआ लिवर डायफ्राम को धकेलता है, तो यह नस दब जाती है और दिमाग को लगता है कि दर्द कंधे से आ रहा है।
  • लिवर का आकार बढ़ना (Hepatomegaly): जब लिवर में फैट (Fat) जमा हो जाता है या इन्फेक्शन होता है, तो उसका आकार बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ लिवर अपनी जगह से ऊपर की ओर खिसककर आसपास की नसों पर भयंकर दबाव डालता है।
  • गॉलब्लैडर (Gallbladder) की सूजन: लिवर के ठीक नीचे पित्ताशय होता है। जब लिवर का फंक्शन खराब होता है, तो पित्त (Bile) गाढ़ा होकर पथरी बनाता है, और इसकी सूजन का दर्द भी सीधे दाएँ कंधे (Scapula) के ठीक पीछे महसूस होता है।

कंधे का यह दर्द किन भयंकर लिवर बीमारियों का खामोश अलार्म हो सकता है?

यह दर्द कोई साधारण खिंचाव नहीं है। जब लिवर का दर्द कंधे तक पहुँचने लगे, तो इसका मतलब है कि समस्या अंदर ही अंदर काफी गंभीर रूप ले चुकी है। यह दर्द मुख्य रूप से इन बीमारियों का संकेत हो सकता है:

  • फैटी लिवर डिसीज़ (Fatty Liver Disease): जो लोग वज़न का बढ़ना इग्नोर करते हैं, उनके लिवर पर भारी चर्बी जम जाती है। यह चर्बी लिवर को फुला देती है, जो कंधे में मीठा-मीठा (Dull aching) दर्द पैदा करती है।
  • लिवर एब्सेस (Liver Abscess): जब लिवर के अंदर कोई भयंकर बैक्टीरियल या अमीबिक इन्फेक्शन होता है, तो उसमें मवाद (Pus) भर जाता है। इसका दर्द बहुत तेज़ होता है और सीधे कंधे की हड्डी तक चुभता है।
  • हेपेटाइटिस (Hepatitis) का प्रभाव: लिवर में वायरस (Virus) के हमले के कारण होने वाली क्रोनिक सूजन (Inflammation), जो लंबे समय तक डायफ्राम को इरिटेट करती रहती है।

शरीर के किन संकेतों से पहचानें कि यह कंधे का दर्द लिवर से जुड़ा है?

अगर आपका कंधा दर्द कर रहा है, तो आप कैसे जानेंगे कि आपको हड्डी के डॉक्टर के पास जाना चाहिए या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) के पास? जब दर्द लिवर से आ रहा हो, तो शरीर ये खामोश अलार्म बजाता है:

  • मूवमेंट (Movement) का कोई असर न होना: अगर दर्द केवल ऑर्थोपेडिक है, तो हाथ हिलाने या घुमाने पर दर्द बढ़ेगा। लेकिन अगर दर्द लिवर से है, तो हाथ को किसी भी दिशा में घुमाने पर दर्द न तो बढ़ेगा और न ही कम होगा।
  • भयंकर थकावट और सुस्ती: रात को 8 घंटे सोने के बाद भी अगर आपको दिन भर क्रोनिक फटीग और कमज़ोरी महसूस होती है, तो यह कमज़ोर लिवर का साफ संकेत है।
  • खाना खाने के बाद भारीपन: जब आप कोई वसायुक्त (Fatty) या तला-भुना खाना खाते हैं, तो पाचन तंत्र उसे पचा नहीं पाता और दाहिनी पसलियों के नीचे भारीपन के साथ कंधे का दर्द तेज़ हो जाता है।
  • त्वचा और आँखों में पीलापन: अगर कंधे के दर्द के साथ-साथ आपकी आँखों का सफेद हिस्सा हल्का पीला (Jaundice) पड़ने लगे या पेशाब बहुत गहरे रंग का आने लगे।

कंधे के दर्द को मस्कुलर (Muscular) समझने पर होने वाली भयंकर गलतियाँ

गलत डायग्नोसिस (Misdiagnosis) किसी भी बीमारी को जानलेवा बना सकता है। जब लोग लिवर के दर्द को सर्वाइकल (Cervical) या मांसपेशियों का दर्द समझ लेते हैं, तो वे ये भयंकर गलतियाँ करते हैं:

  • पेनकिलर्स का अंधाधुंध सेवन: दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए रोज़ाना पेनकिलर खाना। ये रासायनिक दवाइयाँ सीधे लिवर में जाकर मेटाबोलाइज़ (Metabolize) होती हैं और पहले से डैमेज लिवर को पूरी तरह तबाह कर देती हैं।
  • गलत स्ट्रेचिंग और मालिश: लोग इसे गर्दन और कंधों में जकड़न मानकर भारी स्ट्रेचिंग करते हैं या तेज़ मालिश करवाते हैं। इससे नसों की कमज़ोरी बढ़ जाती है और असली बीमारी छिप जाती है।
  • लिवर के जादुई सप्लीमेंट्स खाना: इंटरनेट पर देखकर लिवर को 'डिटॉक्स' करने वाले बिना सर्टिफाइड जूस या पाउडर खाना, जो लिवर की सूजन को कम करने के बजाय उसे और भड़का देते हैं।

आयुर्वेद लिवर और कंधे के इस 'छिपे हुए कनेक्शन' को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा इसे 'रेफर्ड पेन' कहती है, लेकिन आयुर्वेद इसे शरीर में 'रंजक पित्त', 'स्रोतोरोध' (Blockage of channels) और प्राण वात के भयंकर असंतुलन के रूप में गहराई से समझाता है:

  • रंजक पित्त की विकृति: लिवर (यकृत) आयुर्वेद में 'रंजक पित्त' का मुख्य स्थान है। जब हमारी खराब जीवनशैली के कारण यह पित्त दूषित हो जाता है, तो यकृत में भयंकर सूजन (Inflammation) आ जाती है।
  • वात का प्रकोप और नसों में दर्द: जब लिवर में 'आम' (Toxins) जम जाता है, तो वह वहां से गुज़रने वाले वात दोष के रास्ते को रोक देता है। यह अटका हुआ वात ऊपर की ओर (कंधे की तरफ) चढ़ता है और भयंकर दर्द (Shoola) पैदा करता है।
  • रस और रक्त धातु का दूषित होना: यकृत खून (रक्त धातु) को साफ करने का काम करता है। जब लिवर खुद कमज़ोर हो जाता है, तो अशुद्ध खून पूरे शरीर में दौड़ता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द और झुनझुनी जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

यकृत (Liver) को साफ और वात को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

लिवर की सूजन को उतारने के लिए आपको अपनी डाइट से 'आम' और 'पित्त' बढ़ाने वाले भारी पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। अपनी रूटीन में इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाएं:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - लिवर को साफ करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - फैट और सूजन बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ (Barley), ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी और बहुत ज़्यादा फ़र्मेटेड (Fermented) अनाज।
वसा (Fats) बहुत सीमित मात्रा में गाय का शुद्ध घी। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड और बाज़ार के ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, करेला, परवल, लहसुन, पालक, मेथी (कड़वी सब्ज़ियाँ)। कटहल, अरबी, और भारी मात्रा में आलू (ये फैटी लिवर बढ़ाते हैं)।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब (Stewed Apple), मीठे अंगूर, आँवला। बहुत ज़्यादा खट्टे फल, डिब्बाबंद और केमिकल वाले जूस।
पेय पदार्थ (Beverages) गुनगुना पानी, छाछ (जीरा डालकर), धनिए का पानी, गन्ने का ताज़ा रस। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब (लिवर का सबसे बड़ा दुश्मन), बर्फ का पानी।

लिवर की सूजन दूर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे रसायन दिए हैं जो लिवर की डैमेज कोशिकाओं को फिर से ज़िंदा कर सकते हैं और बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों के दर्द को शांत कर सकते हैं:

  • गिलोय: यह लिवर की बीमारियों के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा अमृत है। गिलोय लिवर की सूजन को तेज़ी से उतारती है, शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और इम्यूनिटी को गज़ब की ताक़त देती है।
  • त्रिफला: लिवर पर जमे फैट (Fatty Liver) को काटने और पाचन तंत्र से 'आम' को खुरच कर बाहर निकालने में त्रिफला जादुई असर दिखाता है। यह लिवर पर पड़े दबाव को प्राकृतिक रूप से कम करता है।
  • कुटज: जब लिवर की खराबी के कारण आंतों में भयंकर गर्मी हो और पाचन बिल्कुल ठप हो जाए, तो कुटज पित्त को शांत करता है और यकृत की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाता है।
  • भूमि आंवला: इसे आयुर्वेद में लिवर का सबसे अच्छा दोस्त माना गया है। यह हेपेटाइटिस के प्रभाव को कम करता है और लिवर की बढ़ी हुई साइज़ (Hepatomegaly) को सिकोड़ कर नॉर्मल करता है।

लिवर को डिटॉक्स करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब लिवर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बहुत गहराई तक जम चुका हो और केवल डाइट से असर न दिख रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:

  • विरेचन थेरेपी: यह लिवर की डीप-क्लीनिंग (Deep Cleaning) का सबसे शक्तिशाली तरीका है। औषधीय जड़ी-बूटियों के ज़रिए पेट और आंतों से भयंकर पित्त और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे लिवर को एक नया जीवन मिलता है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और कंधे की नसों में फँसे हुए दर्द को रिलीज़ (Release) करने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों से पूरे शरीर की डीप-टिशू मालिश की जाती है।
  • स्वेदन थेरेपी: आयुर्वेदिक हर्बल स्टीम (भाप) लेने से शरीर के सूक्ष्म स्रोत (Channels) खुल जाते हैं और खून में मौजूद टॉक्सिन्स पसीने के ज़रिए शरीर से बाहर आ जाते हैं, जो लिवर का बोझ हल्का करते हैं।

लिवर और नसों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लगातार गलत खानपान से सूजे हुए लिवर और दबाव झेल रही नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और 'आम-पाचक' डाइट से आपका लिवर डिटॉक्स होना शुरू होगा। दाहिनी पसलियों के नीचे भारीपन कम होगा और कंधे का वो मीठा-मीठा दर्द (Referred pain) शांत होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (विरेचन) और रसायनों के प्रभाव से लिवर का फैट (Fatty liver) कम होने लगेगा और लिवर अपना प्राकृतिक आकार (Normal size) लेने लगेगा। शरीर की थकावट गायब हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: आपका लिवर पूरी तरह से रिपेयर और फौलादी हो जाएगा। आप बिना किसी जादुई सप्लीमेंट के, एक ऊर्जावान और दर्दरहित जीवन जीना शुरू कर देंगे, जहाँ कंधे का दर्द बस एक बीती हुई बात रह जाएगा।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

इस छिपे हुए लिवर और कंधे के दर्द को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द को दबाने के लिए पेनकिलर्स देना और लिवर के लिए केवल एंटीऑक्सिडेंट्स प्रिस्क्राइब करना। लिवर (रंजक पित्त) को शांत करना, वात को अनुलोम करना और 'विरेचन' द्वारा प्राकृतिक रूप से लिवर को डिटॉक्स करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक यांत्रिक (Mechanical) नसों के कम्प्रेसन (Phrenic Nerve) और फैट जमा होने की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए पित्त और नसों में अवरुद्ध वात का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल शराब और तेल छोड़ने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'आम-पाचक' भोजन, कड़वी सब्ज़ियाँ, और नींद पूरी न होना दूर करने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर पेनकिलर छोड़ने पर दर्द और थकान दोगुनी तेज़ी से वापस आते हैं (Rebound effect)। शरीर का लिवर और मेटाबॉलिज़्म अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि अंग अपने प्राकृतिक आकार में वापस आ जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद फैटी लिवर और उसकी सूजन को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने कंधे के दर्द के साथ-साथ शरीर में ये गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • पेट के ऊपरी दाएँ हिस्से में असहनीय दर्द: अगर कंधे के साथ-साथ दाहिनी पसलियों के ठीक नीचे इतना भयंकर दर्द उठे कि आप सीधे खड़े न हो पाएं (यह गॉलब्लैडर की पथरी के फँसने का संकेत है)।
  • आँखों का भयंकर रूप से पीला पड़ना (Severe Jaundice): अगर कुछ ही दिनों में आपकी आँखें और पूरी त्वचा गाढ़ी पीली हो जाए और पेशाब का रंग बिल्कुल भूरा (Brown) आने लगे।
  • अचानक खून की उल्टी आना (Hematemesis): अगर लिवर डैमेज इतना बढ़ गया है कि भोजन नली की नसें फट गई हों और उल्टी में ताज़ा खून आने लगे।
  • ठंड लगकर तेज़ बुख़ार आना: अगर लिवर के दर्द के साथ भयंकर कंपकंपी छूटे और तेज़ बुखार आए (यह लिवर एब्सेस या गंभीर इन्फेक्शन का बड़ा अलार्म है)।

निष्कर्ष

अपने शरीर को एक आपस में जुड़े हुए (Interconnected) बेहद स्मार्ट नेटवर्क की तरह समझें। जब आप केवल अपने दाएँ कंधे के दर्द पर मलहम लगा रहे होते हैं और उसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस मान लेते हैं, तो आप असल में अपने 'मुख्य इंजन' (लिवर) की चीख को अनदेखा कर रहे होते हैं। सुबह उठते ही थकान से चूर रहना, खाना ठीक से न पचना, और दाएँ कंधे की हड्डी के पीछे मीठा-मीठा दर्द रहना, ये कोई मस्कुलर कमज़ोरी नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका रंजक पित्त ब्लॉक हो चुका है और लिवर का बढ़ा हुआ आकार आपकी फ्रेनिक नर्व को दबा रहा है। केवल पेनकिलर्स के सहारे इस भयंकर दर्द को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके हृदय और पूरे मेटाबॉलिज़्म को डैमेज कर रहा है।

लिवर को और ज़्यादा बीमार करने वाली इस पेनकिलर की लत के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। जंक फूड और शराब को छोड़कर हमेशा हल्का, सुपाच्य और प्राकृतिक भोजन खाएं। अपनी डाइट में जौ, लौकी और छाछ शामिल करें। गिलोय, त्रिफला और भूमि आंवला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की विरेचन व स्वेदन थेरेपी से अपने सूजे हुए लिवर को प्राकृतिक सफाई देकर नया जीवन दें। लिवर की इस खामोश बीमारी को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपने 'पावरहाउस' को स्थायी रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, लिवर शरीर के दाएँ हिस्से (Right side) में स्थित होता है, इसलिए इसका रेफर्ड पेन (Referred Pain) हमेशा दाएँ कंधे या दाएँ स्कैप्युला (Scapula) में महसूस होता है। बाएँ कंधे का दर्द अक्सर हृदय (Heart) या स्प्लीन (Spleen) की समस्याओं का संकेत हो सकता है।

आमतौर पर फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज (Grade 1) पूरी तरह से साइलेंट होती है और इसमें दर्द नहीं होता। लेकिन जब फैट के कारण लिवर की बाहरी परत (Glissons capsule) खिंचने लगती है या सूजन (Grade 2/3) बढ़ जाती है, तब यह दर्द कंधे तक पहुंचता है।

अगर दर्द मांसपेशियों या हड्डी का है, तो कंधे को गोल घुमाने, भारी वज़न उठाने या सोने की पोज़िशन बदलने से दर्द कम या ज़्यादा होगा। लेकिन अगर दर्द लिवर (डायफ्राम) से आ रहा है, तो कंधे के मूवमेंट का उस दर्द पर कोई असर नहीं पड़ेगा; दर्द स्थिर (Constant) रहेगा।

हाँ, जो लोग क्रोनिक ड्रिंकर हैं (लंबे समय से भारी मात्रा में शराब पीते हैं), उनके लिवर में अल्कोहलिक हेपेटाइटिस (Alcoholic Hepatitis) हो सकता है। शराब पीने के अगले दिन लिवर में भयंकर सूजन आने से दाएँ कंधे में तेज़ चुभन महसूस हो सकती है।

कुछ मामलों में हाँ। पित्ताशय निकालने (Cholecystectomy) के बाद भी अगर लिवर के अंदर की नलियों (Bile ducts) में कोई पथरी फँस जाए या लिवर में सूजन बनी रहे, तो दाएँ कंधे का यह दर्द दोबारा लौट सकता है।

बिल्कुल। पेनकिलर्स (खासकर पेरासिटामोल का अत्यधिक डोज़) को मेटाबोलाइज़ करने का सारा काम लिवर का होता है। अगर आप कंधे के दर्द के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ पेनकिलर्स खाते हैं, तो यह दर्द तो नहीं मिटाएगा, लेकिन लिवर में टॉक्सिक हेपेटाइटिस ज़रूर पैदा कर देगा।

हाँ, जब लिवर में सूजन होती है, तो शरीर से टॉक्सिन्स सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाते। इसके कारण कंधे के दर्द के साथ-साथ आपको हमेशा उल्टी जैसा महसूस होना (Nausea) और भूख का पूरी तरह मर जाना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

हाँ, अर्ध-मत्स्येन्द्रासन (Half Spinal Twist) और भुजंगासन (Cobra Pose) जैसे आसन पेट के अंगों (विशेषकर लिवर) की प्राकृतिक मालिश करते हैं। इनसे लिवर का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, जो धीरे-धीरे सूजन और कंधे के रेफर्ड पेन को कम करने में मदद करता है।

आयुर्वेद के अनुसार, तनाव (Stress) सीधा वात दोष को भड़काता है और जठराग्नि को कमज़ोर करता है। स्ट्रेस में शरीर ज़्यादा कॉर्टिसोल रिलीज़ करता है, जो लिवर में फैट जमा होने (Fatty Liver) की प्रक्रिया को तेज़ कर देता है, जिससे समस्या भड़क जाती है।

शत-प्रतिशत। लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो खुद को दोबारा बनाने (Regenerate) की गज़ब की क्षमता रखता है। सही आयुर्वेदिक डाइट, वज़न कम करने और विरेचन जैसी थेरेपीज़ से लिवर का फैट खत्म होते ही कंधे का दर्द हमेशा के लिए चला जाता है।

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