Diseases Search
Close Button
 
 

क्या लंबे समय तक Painkiller लेने से पेट में Ulcer बनने का खतरा बढ़ जाता है? आयुर्वेद क्या कहता है, जानें

Information By Dr. Keshav Chauhan

भारत में पेट की परेशानी को लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कहीं ज़्यादा गंभीर है। शोधों के मुताबिक पेट के अल्सर का जीवनकाल में जोखिम लगभग 5% से 10% तक होता है और इससे जुड़ी जटिलताएँ खासकर उन लोगों में अधिक पाई जाती हैं जो दर्द और सूजन के लिए NSAIDs (नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स) जैसी Painkiller दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करते हैं। NSAIDs पेट की नॉर्मल प्रोटेक्टिव लाइनिंग को कमज़ोर कर देते हैं, जिससे अल्सर और उससे जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

भारत में अल्सर की स्थिति को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ H. pylori जैसे संक्रमण और दवाओं के प्रभाव दोनों ही लोगों को प्रभावित करते हैं। शोध बताते हैं कि दर्द और सूजन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली Painkiller दवाओं से जुड़ी GI (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) समस्याओं की शिकायत लगभग 30% मरीज़ों में पाई गई है, जो यह संकेत देती है कि Painkiller का बढ़ा हुआ इस्तेमाल पेट और आंत से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ा सकता है।

आज हम इस लेख में इसी बात की जानकारी सरल हिंदी में देने वाले हैं कि क्या लंबे समय तक Painkiller लेने से पेट में Ulcer बनने का खतरा वाकई बढ़ जाता है, इसके पीछे क्यों, और आयुर्वेद इस बारे में क्या दावा करता है।

Painkiller पेट के अंदर क्या नुकसान करती हैं, इसे आसान भाषा में कैसे समझें?

जब भी शरीर में दर्द होता है, आप अक्सर राहत पाने के लिए दर्दनाशक गोली ले लेते हैं। शुरुआत में इससे आराम मिलता है, लेकिन अगर यही आदत लंबे समय तक चलती रहे, तो यह आपके पेट के लिए नुकसानदेह बन सकती है। इसे समझना बहुत ज़रूरी है कि दर्दनाशक दवाएँ आखिर पेट के अंदर करती क्या हैं।

आपके पेट के अंदर एक सुरक्षात्मक परत होती है, जो तेज़ अम्ल से पेट की दीवार को बचाती है। यही परत भोजन को पचाने में मदद करती है और पेट को सुरक्षित रखती है। लेकिन जब आप बार-बार दर्दनाशक लेते हैं, तो ये दवाएँ धीरे-धीरे उस परत को कमज़ोर करने लगती हैं।

परिणाम यह होता है कि:

  • पेट का अम्ल सीधे अंदरूनी दीवार पर असर करने लगता है

  • पेट में जलन और सूजन बढ़ने लगती है

  • समय के साथ वहीं घाव बनने लगते हैं, जिन्हें अल्सर कहा जाता है

एक और बात जो आपको समझनी चाहिए, वह यह है कि दर्दनाशक दवाएँ पेट के स्वाभाविक मरम्मत तंत्र को भी धीमा कर देती हैं। यानी अगर पेट में हल्की चोट या जलन पहले से मौजूद है, तो वह ठीक होने की बजाय और गहरी हो सकती है।

अगर आप खाली पेट दर्दनाशक लेते हैं, तो नुकसान और तेज़ी से बढ़ता है। पेट में जब कुछ भी खाने को नहीं होता, तब दवा सीधे पेट की दीवार पर असर करती है। इसलिए कई लोग कहते हैं कि “गोली से पेट खराब हो गया” — यह कोई छोटी बात नहीं, बल्कि शरीर का संकेत होता है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा।

पेट में Ulcer होने के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं जिन्हें लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं?

पेट में अल्सर की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे आते हैं। शुरुआत में ये इतने हल्के होते हैं कि आप इन्हें सामान्य गैस या अपच समझकर टाल देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है।

शुरुआती लक्षणों में आमतौर पर यह महसूस हो सकता है:

  • पेट के ऊपरी हिस्से में हल्की या तेज़ जलन

  • खाना खाने के बाद पेट में दर्द या भारीपन

  • खट्टी डकारें आना

  • थोड़ी-सी भूख में भी पेट भरा हुआ लगना

कई बार आपको यह भी महसूस हो सकता है कि:

  • सुबह खाली पेट जलन ज़्यादा होती है

  • रात में दर्द बढ़ जाता है

  • दर्दनाशक लेने के बाद कुछ देर आराम और फिर तकलीफ

कुछ लोगों में भूख कम लगने लगती है, तो कुछ का वज़न धीरे-धीरे घटने लगता है। कई बार मतली या उलटी जैसी परेशानी भी हो सकती है, लेकिन फिर भी लोग इसे “मौसम का असर” या “खाने की गड़बड़ी” मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

अगर आप लंबे समय से दर्दनाशक ले रहे हैं और ऊपर बताए गए लक्षण बार-बार हो रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि पेट के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है। ऐसे में खुद से दवा लेना बंद करना और सही सलाह लेना बहुत ज़रूरी हो जाता है।

डॉक्टर और आधुनिक चिकित्सा Painkiller से होने वाले Ulcer के बारे में क्या कहती है?

आधुनिक चिकित्सा में यह बात साफ मानी जाती है कि लंबे समय तक दर्दनाशक दवाओं का सेवन पेट में अल्सर का एक बड़ा कारण बन सकता है। डॉक्टर मानते हैं कि ये दवाएँ सीधे पेट की सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती हैं।

चिकित्सकों के अनुसार:

  • जो लोग रोज़ या लंबे समय तक दर्दनाशक लेते हैं, उनमें अल्सर का खतरा अधिक होता है

  • बुज़ुर्गों, पहले से पेट की समस्या वाले लोगों और तनाव में रहने वालों में जोखिम और बढ़ जाता है

  • बिना सलाह के दवा लेना स्थिति को और बिगाड़ सकता है

आधुनिक चिकित्सा में अक्सर ऐसे मरीज़ों को अतिरिक्त दवाएँ दी जाती हैं, ताकि पेट के अम्ल को कम किया जा सके या पेट की परत को कुछ हद तक सुरक्षा मिल सके। लेकिन डॉक्टर यह भी साफ कहते हैं कि दवा से होने वाली परेशानी का स्थायी हल केवल दवा नहीं हो सकती।

यही वजह है कि अब कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि केवल लक्षण दबाने की बजाय, जीवनशैली और खानपान पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर दर्द की असली वजह समझकर उसका इलाज किया जाए, तो बार-बार दर्दनाशक लेने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

आपके लिए सबसे अहम बात यह समझना है कि दर्दनाशक तुरंत राहत देती हैं, लेकिन अगर इनका गलत या ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग किया जाए, तो यह राहत धीरे-धीरे एक गंभीर पेट की बीमारी में बदल सकती है।

आयुर्वेद Painkiller और पेट के Ulcer के संबंध को कैसे देखता है?

आयुर्वेद किसी भी बीमारी को केवल एक अंग की समस्या नहीं मानता, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जोड़कर देखता है। जब बात लंबे समय तक दर्दनाशक दवाएँ लेने और पेट में अल्सर बनने की आती है, तो आयुर्वेद इसे एक धीरे-धीरे बिगड़ते हुए आंतरिक संतुलन का परिणाम मानता है।

आयुर्वेद के अनुसार, दर्दनाशक दवाएँ शरीर में तुरंत आराम तो देती हैं, लेकिन वे शरीर की प्राकृतिक चेतावनी को दबा देती हैं। दर्द दरअसल यह संकेत होता है कि अंदर कहीं गड़बड़ी है। जब आप बार-बार दर्द को दबाते रहते हैं, तो समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि अंदर ही अंदर बढ़ती जाती है।

आयुर्वेद यह भी मानता है कि लगातार दवाओं का सेवन:

  • पाचन तंत्र को कमज़ोर करता है

  • पेट की अंदरूनी परत को शुष्क और संवेदनशील बनाता है

  • वात और पित्त को असंतुलित करता है

जब पित्त बढ़ता है, तो पेट में अम्लता और जलन बढ़ती है। वहीं वात के बिगड़ने से पेट की दीवार कमज़ोर होने लगती है। इन दोनों के मिलेजुले असर से पेट में घाव बनने की स्थिति पैदा होती है, जिसे आधुनिक भाषा में अल्सर कहा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार Painkiller लेने से पाचन अग्नि पर क्या असर पड़ता है?

आयुर्वेद में पाचन अग्नि को स्वास्थ्य की जड़ माना गया है। अगर पाचन अग्नि ठीक है, तो शरीर खुद को संभाल लेता है। लेकिन जब आप लंबे समय तक दर्दनाशक दवाएँ लेते हैं, तो सबसे पहला असर इसी अग्नि पर पड़ता है।

पाचन अग्नि का काम होता है:

  • भोजन को सही तरीके से पचाना

  • शरीर को पोषण देना

  • विषैले तत्वों को बाहर निकालना

लगातार दवाएँ लेने से यह अग्नि धीरे-धीरे मंद पड़ने लगती है। इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत भूख खत्म हो जाएगी, बल्कि अंदर ही अंदर पाचन की ताकत कम होने लगती है।

आपको इसके संकेत इस तरह मिल सकते हैं:

आयुर्वेद मानता है कि जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पच पाता। इससे पेट में अम्ल बढ़ता है और वही अम्ल धीरे-धीरे पेट की परत को नुकसान पहुँचाने लगता है। यही स्थिति आगे चलकर अल्सर का रूप ले सकती है।

इसलिए आयुर्वेद में केवल दर्द कम करने पर नहीं, बल्कि पाचन अग्नि को मजबूत करने पर ज़ोर दिया जाता है। जब अग्नि संतुलित रहती है, तो शरीर खुद दर्द और सूजन से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।

अगर आप लंबे समय से Painkiller ले रहे हैं तो पेट को कैसे बचा सकते हैं?

अगर आप पहले से ही लंबे समय से दर्दनाशक दवाएँ ले रहे हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आयुर्वेद कहता है कि सही समय पर थोड़ी-सी समझदारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।

सबसे पहली और ज़रूरी बात यह है कि:

  • दवाओं को अपनी आदत न बनने दें

  • बिना ज़रूरत हर दर्द पर गोली न लें

पेट को सुरक्षित रखने के लिए आप कुछ सरल बातों पर ध्यान दे सकते हैं:

  • खाली पेट दवा लेने से बचें: खाली पेट ली गई दवा पेट की दीवार को सीधे नुकसान पहुँचाती है।

  • खाना सरल और हल्का रखें: बहुत तीखा, तला और भारी भोजन पेट की जलन को और बढ़ा देता है।

  • भूखे न रहें: लंबे समय तक भूखे रहने से पेट में अम्ल बढ़ता है, जिससे अल्सर का खतरा बढ़ता है।

  • तनाव कम करने की कोशिश करें: आयुर्वेद के अनुसार तनाव सीधे पाचन पर असर डालता है।

  • शरीर के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें: अगर बार-बार जलन, दर्द या खट्टी डकारें आ रही हैं, तो इसे सामान्य न समझें।

आयुर्वेद यह भी मानता है कि दर्द की जड़ तक पहुँचना ज़रूरी है। अगर दर्द किसी पुरानी समस्या, गलत दिनचर्या या पाचन की गड़बड़ी से जुड़ा है, तो केवल दवा लेने से समाधान नहीं मिलेगा।

जब आप अपने शरीर की सुनते हैं और उसे सही समय पर आराम, सही भोजन और संतुलित जीवनशैली देते हैं, तो दर्द अपने आप कम होने लगता है। यही आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है — लक्षण नहीं, कारण को ठीक करना।

क्या बिना Painkiller के भी दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है, आयुर्वेद क्या सुझाव देता है?

बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि दर्द का मतलब है दवा, लेकिन आयुर्वेद इस सोच को थोड़ा अलग तरीके से देखता है। आयुर्वेद के अनुसार, हर दर्द के पीछे कोई न कोई कारण होता है और अगर उस कारण पर काम किया जाए, तो दवा की ज़रूरत धीरे-धीरे कम हो सकती है।

अगर आपका दर्द पेट, जोड़ या मांसपेशियों से जुड़ा है, तो सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि क्या यह दर्द पाचन की गड़बड़ी, गलत दिनचर्या या तनाव की वजह से हो रहा है। जब आप कारण पहचान लेते हैं, तो दर्द अपने आप कम होने लगता है।

आयुर्वेद दर्द को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक तरीकों पर ज़ोर देता है, जैसे:

  • सही समय पर और हल्का भोजन

  • पर्याप्त आराम और नींद

  • हल्की गतिविधि और शरीर को ज़्यादा न थकाना

इसके अलावा, शरीर को भीतर से मज़बूत करना भी ज़रूरी होता है। जब पाचन अग्नि संतुलित रहती है और शरीर को सही पोषण मिलता है, तो दर्द सहने की क्षमता अपने आप बढ़ जाती है। ऐसे में आपको हर छोटे-मोटे दर्द के लिए गोली लेने की ज़रूरत महसूस नहीं होती।

आयुर्वेद यह भी सिखाता है कि दर्द शरीर की चेतावनी है। अगर आप हर बार उस चेतावनी को दबा देते हैं, तो समस्या अंदर ही अंदर बढ़ती जाती है। लेकिन अगर आप शरीर की सुनते हैं, थोड़ी रुककर अपनी दिनचर्या और आदतों पर ध्यान देते हैं, तो दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।

निष्कर्ष

दर्द होने पर दवा लेना गलत नहीं है, लेकिन जब वही दवा आदत बन जाए, तो शरीर धीरे-धीरे उसकी कीमत चुकाने लगता है। पेट में जलन, भारीपन या बार-बार होने वाली तकलीफ़ें अक्सर उसी अनदेखी की ओर इशारा करती हैं। अगर आप हर दर्द को दबाने की कोशिश करते रहेंगे, तो असली वजह वहीं बनी रहेगी और समस्या गहरी होती जाएगी।

आयुर्वेद आपको यह सिखाता है कि शरीर की बात सुनना ज़रूरी है। सही समय पर खाना, पाचन को मज़बूत रखना और ज़रूरत से ज़्यादा दवा से दूरी बनाना पेट को सुरक्षित रखने में मदद करता है। जब आप कारण पर ध्यान देते हैं, तो दर्द अपने आप कम होने लगता है और दवा पर निर्भरता घटती है।

अगर आप पेट के अल्सर या दर्द से जुड़ी किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं, तो देर न करें। आज ही हमारे प्रमाणित जीवा चिकित्सकों से व्यक्तिगत परामर्श के लिए संपर्क करें। डायल करें: 0129-4264323

FAQs

  1. क्या कभी-कभार दर्दनाशक लेने से भी पेट खराब हो सकता है?

अगर आप इसे कभी-कभार और भोजन के बाद लेते हैं, तो आमतौर पर नुकसान नहीं होता। परेशानी तब बढ़ती है जब दवा बार-बार और बिना ज़रूरत ली जाए।

  1. क्या पेट की पुरानी समस्या होने पर दर्दनाशक से ज़्यादा खतरा रहता है?

हाँ, जिन लोगों को पहले से गैस, जलन या पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए दर्दनाशक पेट को जल्दी नुकसान पहुँचा सकती है।

  1. क्या तनाव भी पेट में अल्सर बनने की रफ्तार बढ़ा सकता है?

लगातार तनाव पाचन को कमज़ोर करता है और पेट की जलन बढ़ाता है। इससे अल्सर बनने की संभावना तेज़ हो सकती है, खासकर दवा लेने वालों में।

  1. क्या गलत समय पर खाना भी अल्सर की समस्या बढ़ा सकता है?

हाँ, देर से खाना, लंबे समय तक भूखे रहना या बहुत भारी भोजन पेट में अम्ल बढ़ाता है, जिससे अल्सर की समस्या बिगड़ सकती है।

  1. क्या अल्सर होने पर तुरंत दवा बंद कर देनी चाहिए?

बिना सलाह अचानक दवा बंद करना सही नहीं होता। बेहतर है कि आप विशेषज्ञ से बात करें और सुरक्षित विकल्प या सही तरीका अपनाएँ।

  1. क्या घरेलू उपाय अल्सर में तुरंत राहत देते हैं?

घरेलू उपाय धीरे-धीरे असर दिखाते हैं। ये पेट को शांत करते हैं, लेकिन नियमितता और सही दिनचर्या के बिना पूरा लाभ नहीं मिलता।

Related Blogs

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us