Diseases Search
Close Button
 
 

नाइट शिफ्ट करने वालों को डायबिटीज का खतरा ज्यादा क्यों होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

शुगर कम करने वाली गोलियों, नींद की दवाओं और कैफीन का इस्तेमाल नाइट शिफ्ट (रात की ड्यूटी) करने वालों में काफी आम है। जब काम के कारण नींद का प्राकृतिक चक्र टूटता है, तो लोग अक्सर खुद को जगाए रखने के लिए चाय-कॉफी पीते हैं और बाद में शुगर या ब्लड प्रेशर की गोलियाँ लेना शुरू कर देते हैं। ये दवाएँ कुछ समय के लिए ब्लड शुगर को फौरी तौर पर कम कर देती हैं या नींद ला देती हैं, जिससे इंसान को लगता है कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि गलत समय पर खानपान की वजह से और दवा छोड़ने के तुरंत बाद भयंकर कमज़ोरी महसूस होने लगती है और ब्लड शुगर पहले से भी ज़्यादा बढ़कर वापस आ जाता है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार दवाओं पर शरीर की निर्भरता, इंसुलिन रेजिस्टेंस, नींद की कमी, या सबसे महत्वपूर्ण—पाचन तंत्र की खराबी और शरीर के अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और पैंक्रियाज़ की सेहत बनी रहे।

नाइट शिफ्ट और डायबिटीज़ का कनेक्शन क्या है?

नाइट शिफ्ट और डायबिटीज़ के बीच का कनेक्शन एक ऐसी स्थिति है, जहाँ इंसान की बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) पूरी तरह बिगड़ जाती है। प्रकृति ने हमारे शरीर को दिन में काम करने और रात में आराम करने के लिए बनाया है। जब हम रात भर जागते हैं, तो शरीर के हार्मोन, खासकर कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) और इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है। आमतौर पर लोग इसका शिकार रात में जंक फूड खाने, बहुत ज़्यादा मीठा खाने, या दिन में ठीक से न सो पाने के कारण होते हैं। जब पैंक्रियाज़ कमज़ोर पड़ता है और शरीर लगातार तनाव में रहता है, तो वह खून में मौजूद शुगर को ऊर्जा में नहीं बदल पाता, जिससे शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ने लगता है। अंग्रेजी दवाएँ खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को दबाती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस खराब माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें यह मेटाबॉलिक बीमारी पनपती है। दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना किडनी और लिवर पर बुरा असर डालता है।

नाइट शिफ्ट से जुड़ी बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

मेटाबॉलिज़्म और नींद की तकलीफ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं

  • शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर रात में काम करने के कारण नींद न आने या लगातार थकान बनी रहने की बीमारी।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ खराब जीवनशैली और नींद की कमी के कारण शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता।
  • प्री-डायबिटीज़ यह वह स्थिति है जब ब्लड शुगर सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन इतना नहीं कि उसे डायबिटीज़ कहा जाए। नाइट शिफ्ट वालों में यह बहुत तेज़ी से पनपता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस रात में जागने से शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन को पहचानने से इनकार कर देती हैं।

लक्षण और संकेत

लगातार थकान और बिना बात के शुगर का बढ़ना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं

  • लगातार थकान और कमज़ोरी दिन में सोने के बावजूद शरीर में असहनीय सुस्ती और भारीपन रहना।
  • वज़न का तेज़ी से बढ़ना विशेषकर पेट के आसपास चर्बी जमा होना (बेली फैट), जो इंसुलिन बिगड़ने का सीधा संकेत है।
  • मीठा खाने की तेज़ लालसा रात के समय काम करते हुए मीठा या कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने की तीव्र इच्छा होना।
  • चिड़चिड़ापन और तनाव नींद पूरी न होने के कारण स्वभाव में गुस्सा आना और किसी काम में मन न लगना।
  • पाचन तंत्र की खराबी लगातार कब्ज़, गैस या एसिडिटी की शिकायत रहना।
  • ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

नाइट शिफ्ट करने वालों में डायबिटीज़ के मुख्य कारण क्या हैं?

लिवर खराब होने और शुगर बढ़ने के पीछे सिर्फ नींद की कमी नहीं, बल्कि आपकी अपनी आदतें सबसे बड़ी कारण होती हैं। मुख्य रूप से इन कारणों से बचना चाहिए

  • रात में भारी भोजन (रात्रि भोजन) आयुर्वेद के अनुसार रात में जठराग्नि (पाचन अग्नि) बहुत कमज़ोर होती है। रात में खाया गया मैदा, जंक फूड या भारी भोजन पचता नहीं है बल्कि शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनाता है जो खून को दूषित कर देते हैं।
  • सर्कैडियन रिदम का टूटना रात में जागने से मेलाटोनिन (नींद का हार्मोन) कम बनता है और कोर्टिसोल बढ़ता है, जो सीधे ब्लड शुगर को बढ़ाता है।
  • कैफीन की अधिकता नींद भगाने के लिए रात भर चाय या कॉफी पीने से शरीर में खुश्की (वात) बढ़ती है और पैंक्रियाज़ पर दबाव पड़ता है।
  • धूप की कमी रात में काम और दिन में सोने से शरीर को धूप नहीं मिलती, जिससे विटामिन डी की कमी हो जाती है। विटामिन डी की कमी डायबिटीज़ का एक बड़ा कारण है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी शिफ्ट के बाद थकावट के कारण व्यायाम न करना इंसुलिन रेजिस्टेंस को जन्म देता है।

इसके जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

इस स्थिति को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर बचाव न किया जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

  • हृदय रोग का खतरा बढ़ा हुआ स्ट्रेस और शुगर नसों में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम तेज़ी से बढ़ता है।
  • लिवर पर चर्बी (फैटी लिवर) रात में गलत समय पर खाने से सारा कचरा लिवर पर चर्बी के रूप में जमा होने लगता है।
  • कमज़ोर याददाश्त नींद पूरी न होने से दिमाग की नसें कमज़ोर हो जाती हैं।
  • मानसिक तनाव और डिप्रेशन समाज और परिवार से कट जाने और हार्मोन बिगड़ने के कारण डिप्रेशन हो सकता है।
  • किडनी और नसों का डैमेज लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर अंगों को अंदर से खोखला कर देता है।
  • समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से नाइट शिफ्ट के कारण होने वाली डायबिटीज़ (प्रमेह) सिर्फ ब्लड शुगर की दिक्कत नहीं है। यहाँ यह माना जाता है कि 'रात्रि जागरण' (रात में जागना) शरीर में वात दोष को बहुत तेज़ी से बढ़ाता है और कफ को सुखा देता है। साथ ही रात में खाना खाने से कमज़ोर जठराग्नि के कारण 'आम' (टॉक्सिन्स) बनता है। डॉक्टर नाड़ी, जीभ और पेट की स्थिति देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में यही टॉक्सिन्स तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने मेटाबॉलिज़्म को पूरी तरह दूषित कर दिया है। जब तक यह दूषित वसा शरीर में जमा रहेगी, इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हमेशा बनी रहेगी। आयुर्वेद में बस लक्षण मिटाना और गोलियाँ बढ़ाना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, वात दोष संतुलित हो और पैंक्रियाज़ प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बने।

डायबिटीज़ से बचाव और कमज़ोरी दूर करने के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में नाइट शिफ्ट वालों के पैंक्रियाज़ और दिमाग को स्वस्थ बनाने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • अश्वगंधा यह रात में जागने के कारण होने वाले मानसिक और शारीरिक तनाव (कोर्टिसोल) को कम करती है और शरीर को ताकत देती है।
  • ब्राह्मी यह दिमाग को शांत करती है, नसों की खुश्की मिटाती है और दिन में गहरी नींद लाने में मदद करती है।
  • गुडमार (Gurmar) यह मीठा खाने की लालसा को कम करता है और कमज़ोर हो चुके पैंक्रियाज़ से प्राकृतिक इंसुलिन उत्पादन बढ़ाता है।
  • गिलोय यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है और ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से कम करती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित फैट और तनाव को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया

  • गहरी सफाई और स्ट्रेस रिलीफ जब रात की शिफ्ट के कारण शरीर पूरी तरह टूट चुका हो, तो जीवा आयुर्वेद में 'शिरोधारा' और 'विरेचन' जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय यह 7 से 15 दिनों तक चलने वाली शरीर के अंदरूनी अंगों और दिमाग को शांत करने की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • तनाव और टॉक्सिन्स बाहर निकालना शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की धार गिराई जाती है जो नर्वस सिस्टम को गहरा आराम देती है। विरेचन प्रक्रिया से लिवर और आंतों में जमा पुरानी गंदगी बाहर निकल जाती है।
  • आंतरिक राहत अंदरूनी सफाई के साथ शरीर की मालिश (अभ्यंग) दी जाती है। इससे शरीर का भारीपन और वात दोष जड़ से खत्म होने लगता है।

डायबिटीज़ से बचाव के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, इस समस्या को दूर रखने के लिए हल्का, पचने में आसान और शरीर के वात-पित्त को संतुलित करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है

क्या खाएँ?

  • हल्का और सुपाच्य भोजन रात की शिफ्ट में भूख लगने पर भुने हुए मखाने, सूप या ताज़े फल खाएँ, जो पचने में आसान हों।
  • पुराना अनाज और मूंग दाल मुख्य भोजन में जौ, रागी और छिलके वाली हरी मूंग की दाल शामिल करें, यह शुगर को तेज़ी से नहीं बढ़ने देती।
  • गाय का घी और मेथी भोजन में थोड़ा शुद्ध गाय का घी शामिल करें जो वात को शांत करता है। सुबह खाली पेट मेथी का पानी पिएँ।

क्या न खाएँ?

  • कैफीन और चीनी रात में नींद भगाने के लिए बार-बार चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक बिल्कुल बंद कर दें।
  • विरुद्ध आहार शिफ्ट के दौरान बाज़ार का तला-भुना, पैकेटबंद नमकीन और जंक फूड कभी न खाएँ, यह पाचन को सबसे ज़्यादा दूषित करता है।
  • भारी भोजन रात के समय गरिष्ठ भोजन (पूरी, पराठे, छोले, पनीर) खाने से पैंक्रियाज़ पर भारी बोझ पड़ता है और चर्बी बढ़ती है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में मेटाबॉलिक रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे आप कितने सालों से नाइट शिफ्ट कर रहे हैं, शुगर का स्तर क्या है, और शरीर कितना कमज़ोर है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर समस्या नई है, थकान रहती है और शुगर अभी बॉर्डरलाइन पर है, तो आमतौर पर 1 से 2 महीनों में ही आपका शरीर हल्का होने लगता है और रिपोर्ट्स सुधर जाती हैं।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर डायबिटीज़ हो चुकी है और गोलियाँ खा रहे हैं, तो पैंक्रियाज़ को ताकत मिलने और नींद का पैटर्न ठीक होने में 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा भी लग सकते हैं।
  • उपचार का तरीका इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से पाचन सुधारने वाली जड़ी-बूटियाँ, स्ट्रेस कम करने के तरीके और योग शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपने डाइट प्लान का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में बीमारी के गंभीर होने की संभावना खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयां उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयां शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

इस बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है

आधुनिक चिकित्सा यह लक्षणों को बाहर से दबाने पर काम करती है। शुगर की गोलियाँ या नींद की दवाएँ तुरंत असर करती हैं जो कुछ समय के लिए अच्छा लगता है। लेकिन यह बीमारी की जड़ यानी मेटाबॉलिज़्म और बिगड़े हुए वात को खत्म नहीं करता। दवा छोड़ते ही बीमारी फिर से वापस आती है और लंबे समय तक भारी गोलियाँ खाने से अंगों पर बुरा असर पड़ता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा आयुर्वेद बीमारी की असली वजह यानी वात दोष का असंतुलन और दूषित पाचन को खत्म करता है। इसमें जड़ी-बूटियों और सही डाइट के ज़रिए पैंक्रियाज़ को भीतर से साफ किया जाता है। इसमें थोड़ा समय लगता है, लेकिन शरीर का वातावरण प्राकृतिक रूप से ऐसा बन जाता है कि स्ट्रेस कम हो जाता है और बीमारी से स्थायी आराम मिलता है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

नाइट शिफ्ट करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • शरीर का वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और आप दिनभर थका हुआ महसूस करें।
  • काम के दौरान बार-बार चक्कर आएँ या आँखों के आगे अंधेरा छाए।
  • हमेशा प्यास लगे और बार-बार टॉयलेट जाना पड़े।
  • दिन के समय लाख कोशिशों के बाद भी नींद न आए।
  • गर्दन और अंडरआर्म्स की त्वचा बहुत ज़्यादा काली और मोटी होने लगे।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और अंगों को स्थायी रूप से खराब होने से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से नाइट शिफ्ट में काम करने वालों को डायबिटीज़ का खतरा मुख्य रूप से वात दोष के बिगड़ने, मानसिक तनाव और कमज़ोर जठराग्नि के कारण बढ़ता है। रात में प्राकृतिक नींद न लेने, गलत समय पर खान-पान और बैठे रहने वाली जीवनशैली से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनते हैं जो पैंक्रियाज़ के काम को धीमा कर देते हैं। यही रुकावट इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं होने देती। सिर्फ बाहरी गोलियाँ खाने या कॉफी पीने से शुगर और थकान छिप जाती है लेकिन बीमारी मरती नहीं है। बचाव में पाचन की शुद्धि और तनाव कम करना सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें वात को संतुलित करना, हल्का खाना खाना, अश्वगंधा-गिलोय जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना और दिन में सही नींद लेना शामिल है जिससे बीमारी को उभरने से पहले ही रोका जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, यह तय नहीं है। अगर आप रात में हल्का खाना खाएँ, जंक फूड से बचें और अपनी नींद पूरी करें, तो आप इस बीमारी से पूरी तरह बच सकते हैं।

नहीं, ज़्यादा चाय-कॉफी पीने से शरीर में वात (खुश्की) और एसिडिटी बढ़ती है, जो आगे चलकर ब्लड शुगर को असंतुलित करती है।

बिल्कुल नहीं। रात में मीठा खाना सबसे ज़्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि रात में पैंक्रियाज़ शुगर को सही से पचाने के लिए तैयार नहीं होता।

हाँ, अश्वगंधा कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को कम करती है जिससे पैंक्रियाज़ को आराम मिलता है और नर्वस सिस्टम को ताकत मिलती है।

कम से कम 7-8 घंटे की गहरी और बिना रुकावट वाली नींद लेनी चाहिए। सोते समय कमरे में पूरा अंधेरा रखें।

हाँ, रात में जागने से मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और हार्मोन बिगड़ने के कारण पेट के आसपास बहुत तेज़ी से चर्बी बढ़ती है।

बिल्कुल, कंप्यूटर के आगे लगातार बैठे रहने और शारीरिक मेहनत न करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है।

हाँ, लंबे समय तक नींद पूरी न होने और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर सीधे नसों पर दबाव डालता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

हाँ, आयुर्वेद के सही डाइट प्लान और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के ज़रिए शरीर के दोषों को संतुलित करके इसे जड़ से ठीक किया जा सकता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us